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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा की, किसानों के हितों को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में उच्च स्तरीय साप्ताहिक कृषि समीक्षा बैठक की। बैठक में पूरे देश में खरीफ 2026 सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में संभावित एल नीनो परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष चर्चा की गई। मंत्री ने विशेष रूप से कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता और कम वर्षा वाले जिलों के लिए अग्रिम आपदा प्रबंधन योजना पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों के हितों की सुरक्षा है।

कम वर्षा वाले जिलों के लिए विशेष तैयारी के निर्देश

चौहान ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में कम या असमान वर्षा की संभावना है, उन्हें पहले से चिन्हित किया जाए और राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसल-वार आकस्मिक योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतर-फसल (इंटरक्रॉपिंग) और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जोखिम-प्रवण जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि 9–10 संभावित प्रभावित राज्यों में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और अन्य संस्थानों के साथ समन्वय बैठकें की जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों को वैज्ञानिक और भरोसेमंद जानकारी दी जाए, ताकि वे सुरक्षित फसल विकल्पों का चयन कर सकें।

कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष फोकस

बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। चौहान ने वैज्ञानिक तकनीक, उपयुक्त किस्मों का चयन, मल्चिंग, नमी संरक्षण और अंतर-फसल प्रणाली को बड़े स्तर पर अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए।

दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन

दलहन में आत्मनिर्भरता को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए बेहतर बीज उपलब्धता, क्षेत्र विस्तार और तकनीकी मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उर्वरक और जल भंडारण की स्थिति की समीक्षा

बैठक में उर्वरक उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों की स्थिति और राज्यों में स्टॉक की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि देश में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और आपूर्ति प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है।

कृषि संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विश्वविद्यालयों, KVKs और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी जानकारी तभी उपयोगी है जब वह समय पर खेतों तक पहुंचे।

कृषि मंत्री ने कहा कि निरंतर संवाद, समीक्षा और फीडबैक से ही खरीफ 2026 को सुरक्षित और सफल बनाया जा सकता है।

विदिशा में बनेगा देश का मॉडल किसान स्कूल, शिवराज सिंह चौहान ने रखी आधारशिला

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विदिशा- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को विदिशा जिले के Berkhedi Jetu में किसानों के लिए एक अनूठे “किसान स्कूल” की आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने खेती को लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक कृषि, आधुनिक तकनीक और एकीकृत खेती को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे पारंपरिक राजनीतिक सभा के बजाय किसानों की प्रशिक्षण कक्षा के रूप में आयोजित किया गया। मंत्री ने कहा कि यहां आए सभी किसान विद्यार्थी हैं और उन्हें सीधे खेतों में आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन कर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

49 एकड़ में बनेगा मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र

बेरखेड़ी जेतू में बनने वाला कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) 49 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसे देश का मॉडल केवीके बनाया जाएगा, जहां आधुनिक खेती के प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जाएंगे। भवन निर्माण पूरा होने का इंतजार किए बिना इसी खरीफ सीजन से खेतों में प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

ढाई एकड़ में भी संभव सम्मानजनक आय

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भूमि के छोटे होते आकार के बावजूद वैज्ञानिक और एकीकृत खेती अपनाकर एक हेक्टेयर (करीब ढाई एकड़) भूमि से भी परिवार की आजीविका सम्मानजनक रूप से चलाई जा सकती है। इसके लिए विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए विशेष कृषि रोडमैप तैयार किया गया है।

‘खेत बचाओ अभियान’ को मिलेगा विस्तार

केंद्रीय मंत्री ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों से मृदा परीक्षण कराने और संतुलित उर्वरकों के उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचा रहा है। अभियान के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

किसानों को मिलेगी एग्री क्लिनिक और मोबाइल सलाह

नए कृषि विज्ञान केंद्र में ‘एग्री क्लिनिक’ स्थापित किया जाएगा, जहां किसान पौधों, पत्तियों और मिट्टी के नमूने लाकर रोगों की पहचान और उपचार संबंधी सलाह प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही हेल्पलाइन और मोबाइल ऐप के माध्यम से भी किसानों को तत्काल वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।

नकली बीज और खाद पर सख्ती

केंद्रीय मंत्री ने नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने किसानों से खरीद के समय बिल लेने और क्यूआर कोड के जरिए उत्पादों की जांच करने की अपील की।

छोटे किसानों के लिए मशीन बैंक

सरकार छोटे और सीमांत किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीन बैंक स्थापित करेगी। यहां लेजर लेवलर, डीएसआर मशीन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक मशीनें किराये पर उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि किसान कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकें।

कृषि आधारित स्टार्टअप और प्रोसेसिंग पर जोर

कार्यक्रम में कृषि उत्पादों की वैल्यू एडिशन और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की घोषणा भी की गई। युवाओं को मशरूम उत्पादन, डेयरी, मधुमक्खी पालन और पोल्ट्री जैसे कृषि आधारित उद्यमों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान ने दाल एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों द्वारा उत्पादित दालों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी और अधिक उत्पादन वाले क्षेत्रों में दाल मिल स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।

कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मिट्टी की सेहत सुधारने, संतुलित उर्वरकों के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने का एक जनआंदोलन है।

खरीफ सम्मेलन-2026 में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखी कृषि विकास की रूपरेखा

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित खरीफ सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और नागरिकों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है।

दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 मई को NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में किया जा रहा है। सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

‘टीम एग्रीकल्चर’ का साझा मंच

चौहान ने कहा कि खरीफ सम्मेलन ने पूरे ‘टीम एग्रीकल्चर’ को एक मंच पर लाने का कार्य किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम एग्रीकल्चर में केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें, वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठन (FPO), और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और राज्यों की सक्रिय भागीदारी से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं, जबकि केंद्र सरकार सहयोगी और साझेदार की भूमिका निभाती है।

क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की भौगोलिक और जलवायु विविधता को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के साथ-साथ क्षेत्रीय सम्मेलनों की शुरुआत की है। जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत में भी जल्द सम्मेलन आयोजित होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्यों की समस्याओं और आवश्यकताओं पर छोटे समूहों में अधिक प्रभावी और विस्तृत चर्चा संभव हो पाती है। भविष्य में आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धि

चौहान ने कहा कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और केंद्र व राज्यों के सहयोग से भारत ने वर्ष 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

उन्होंने बताया कि:

  • कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

  • चावल उत्पादन 154.024 मिलियन टन रहा और भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व में पहला स्थान हासिल किया।

  • गेहूं उत्पादन 120.657 मिलियन टन और मक्का उत्पादन 55.092 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

तेलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुल तेलहन उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली उत्पादन 13.074 मिलियन टन और सरसों उत्पादन 13.768 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

प्राकृतिक खेती और जलवायु परिवर्तन पर फोकस

कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और लंबे सूखे जैसी परिस्थितियों को देखते हुए टिकाऊ और सुरक्षित कृषि पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित उर्वरक उपयोग, डिजिटल कृषि, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि अवसंरचना कोष और पीएम-आशा योजना जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

चौहान ने कहा कि भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है, इसलिए सीमित भूमि से अधिक आय सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त कृषि ऋण, निवेश और आधुनिक तकनीकों की मदद से किसान बेहतर खेती कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ पर भी व्यापक चर्चा होगी और केंद्र व राज्य मिलकर खरीफ सीजन के लिए संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार करेंगे।

परंपरागत खेती छोड़ फूलों की खेती अपनाई, कम लागत में मिला ज्यादा मुनाफा

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एक किसान की सफलता बनी प्रेरणा, गांव के अन्य किसान भी बढ़ा रहे कदम

रायपुर- परंपरागत खेती (गेहूं-धान) की तुलना में फूलों की खेती कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा दे रही है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की 12 महीने मांग होने से किसान हर सीजन में बंपर कमाई कर रहे हैं। कम पूंजी से शुरू होकर, यह व्यवसाय प्रति हेक्टेयर लाखों रुपये का शुद्ध लाभ  दे रहा है, जिससे किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।  शादी, पार्टी, त्यौहार और धार्मिक आयोजनों में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, जिससे अच्छी कीमतें मिलती हैं।

राज्य शासन की योजनाओं का लाभ लेकर रायगढ़ जिले के किसान अब परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी कड़ी में लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा निवासी किसान ईश्वरचरण पैकरा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन से फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। किसान की सफलता आज सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

ईश्वरचरण पैकरा पहले परंपरागत रूप से धान की खेती किया करते थे, जिसमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित थी। वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की। विभाग द्वारा तकनीकी सहयोग एवं आवश्यक मार्गदर्शन मिलने से उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेती की, जिसका परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। जहां पहले धान की खेती से उन्हें लगभग 11 क्विंटल उत्पादन मिलता था और सीमित आय होती थी, वहीं फूलों की खेती से उन्हें करीब 38 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस उत्पादन से उनकी कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।

फूलों की खेती में सफलता मिलने के बाद ईश्वरचरण पैकरा का आत्मविश्वास बढ़ा है। वे बताते हैं कि कम समय में अधिक लाभ मिलने के कारण अब वे इस खेती को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनके खेत में खिले गेंदा फूलों की रंगीन पंक्तियां आज उनकी मेहनत और सफलता की कहानी बयां करती हैं। उनकी इस उपलब्धि को देखकर गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इस प्रकार राज्य शासन की योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हो रही हैं, बल्कि कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

खरीफ सीजन से पहले सरकार सतर्क: कृषि मंत्री की अहम समीक्षा बैठक

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने निवास पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों की रक्षा करना तथा आगामी खरीफ सीजन के लिए रणनीतिक तैयारी सुनिश्चित करना था।

बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे संकट के समय सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाएं।

बैठक के प्रमुख बिंदु और निर्णय:

उर्वरक आपूर्ति और किसान आईडी

शिवराज सिंह चौहान ने उर्वरकों की समान और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए ‘किसान आईडी’ के कार्य को तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने बताया कि इस विषय पर जल्द ही विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की जाएगी।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई

वैश्विक संकट का लाभ उठाकर उर्वरक और बीजों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकारों को भी सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

बीज उत्पादन और पैकेजिंग सहायता

बैठक में कृषि-रसायनों और बीज सुखाने (ड्राइंग सीड) के लिए आवश्यक गैसों की उपलब्धता की समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए पैकेजिंग सामग्री की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय के निर्देश दिए गए।

विशेष प्रकोष्ठ (Special Cell) का गठन

कृषि क्षेत्र की 24x7 निगरानी के लिए एक ‘विशेष प्रकोष्ठ’ का गठन किया गया है। यह प्रकोष्ठ उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर साप्ताहिक रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपेगा।

अंत में,शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को सभी आवश्यक कृषि संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN): 22वीं किस्त के माध्यम से किसानों की आय सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

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 मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री ने 13 मार्च 2026 को गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की 22वीं किस्त के रूप में ₹18,640 करोड़ जारी किए।

  • इस किस्त से 9.32 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला, जिनमें 2.15 करोड़ महिला किसान शामिल हैं।

  • योजना शुरू होने से अब तक ₹4.27 लाख करोड़ से अधिक राशि किसानों को दी जा चुकी है।

  • यह दुनिया की सबसे बड़ी Direct Benefit Transfer (DBT) योजनाओं में से एक है, जिसमें आधार और डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए सीधे पैसे ट्रांसफर होते हैं।

  • IFPRI और नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार किसानों की आय बढ़ी है और साहूकारों पर निर्भरता घटी है।

परिचय

PM-KISAN की 22वीं किस्त 13 मार्च 2026 को जारी की गई। इसके तहत किसानों को DBT के माध्यम से सीधे बैंक खातों में पैसे भेजे गए, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई।

सरकार ने बजट 2026–27 में ₹60,000 करोड़ इस योजना के लिए निर्धारित किए हैं, जो किसानों की आय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

PM-KISAN क्या है?

  • शुरुआत: 24 फरवरी 2019

  • उद्देश्य: छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देना

  • लाभ:

    • हर साल ₹6,000

    • 3 किस्तों में ₹2,000–₹2,000

  • पैसा सीधे आधार-लिंक बैंक खातों में जाता है

 किसानों पर प्रभाव

✔️ आय और उत्पादन में सुधार

  • किसान इस पैसे से बीज, खाद, कीटनाशक खरीदते हैं

  • इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ता है

✔️ कर्ज पर निर्भरता कम

  • नकद सहायता मिलने से किसानों को महाजनों से उधार कम लेना पड़ता है

✔️ महिलाओं की भागीदारी

  • लाभार्थियों में 25% से अधिक महिलाएं हैं

जमीनी स्तर के उदाहरण

  • केरल की महिला किसान: समय पर पैसा मिलने से खेती में आत्मविश्वास बढ़ा

  • अंडमान के किसान: नई फसल (जैसे तरबूज) शुरू कर पाए

  • जम्मू-कश्मीर के किसान: बेहतर इनपुट खरीदकर उत्पादन बढ़ाया

डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम

  • आधार आधारित e-KYC

  • PM-KISAN पोर्टल और मोबाइल ऐप

  • रियल-टाइम मॉनिटरिंग

  • सार्वजनिक लाभार्थी सूची

इससे योजना में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ा है

 नई तकनीक: Kisan e-Mitra

  • AI आधारित चैटबॉट

  • 11 भाषाओं में उपलब्ध

  • किसान पूछ सकते हैं:

    • भुगतान स्थिति

    • रजिस्ट्रेशन

    • पात्रता

रिसर्च क्या कहती है?

  • IFPRI:

    • नकद सहायता से खेती में निवेश बढ़ा

  • नीति आयोग:

    • 85% किसानों की आय में सुधार

    • 90% से अधिक किसान खेती में ही पैसा खर्च करते हैं

निष्कर्ष

PM-KISAN केवल एक सहायता योजना नहीं, बल्कि किसानों को सशक्त बनाने का माध्यम है।

  • यह योजना

    • आय सुरक्षा देती है

    • कृषि निवेश बढ़ाती है

    • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है

 भविष्य में तकनीक और डिजिटल सिस्टम के साथ यह योजना भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


कावेरी बीज कंपनी पर किसानों का करोड़ों रुपये बकाया, सीएम और पूर्व सीएम को सौंपा ज्ञापन

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महासमुंद- सिकंदराबाद (तेलंगाना) की कावेरी बीज कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ के किसानों और मजदूरों का भुगतान नहीं करने का मामला सामने आया है। करीब आठ महीने से भुगतान नहीं मिलने से परेशान किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने रविवार को परागांव में मुख्यमंत्री विष्णु देव सायऔर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेलको ज्ञापन सौंपा।

दोनों नेताओं से किसानों और मजदूरों का बकाया भुगतान दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई। जानकारी के अनुसार वर्ष 2024-25 के रबी सीजन में सिकंदराबाद (तेलंगाना) की कावेरी बीज कंपनी ने छत्तीसगढ़ के किसानों की जमीन लीज पर लेकर बीज उत्पादन कराया था।किसानों से खेती कराई गई। मजदूरों से कड़ी मेहनत कराई गई। मशीनों का भी उपयोग किया गया। लेकिन अब तक किसानों की लीज राशि और मजदूरों का मेहनताना नहीं दिया गया है। किसानों का मूल बकाया ₹3,23,26,388 है। मजदूरों का मेहनताना ₹7,89,500 है।

जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक 2 प्रतिशत मासिक ब्याज जोड़ने पर कुल बकाया राशि बढ़कर ₹3,84,14,430 हो गई है। प्रतिनिधि मंडल में जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश महासचिव तेजराम विद्रोही और प्रभावित किसान कृष्ण कुमार चंद्राकर, रोशन चंद्राकर, भीखम चंद्राकर, पंकज चंद्राकर और प्रवीण चंद्राकर शामिल थे।

किसानों ने कहा कि यह केवल पैसों का मामला नहीं है। यह किसानों और मजदूरों की मेहनत और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। भुगतान नहीं मिलने से कई परिवार कर्ज में डूब गए हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है।

किसानों ने कहा कि शासन-प्रशासन से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी: भारत में कृषि कचरे से ऊर्जा और संसाधन बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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भारत में बढ़ते कृषि और खाद्य अपशिष्ट (वेस्ट) की समस्या पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। देश में हर साल लगभग 35 करोड़ टन कृषि अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें फसल अवशेष, भूसा, भूसी और खाद्य प्रसंस्करण के उप-उत्पाद शामिल हैं। सही प्रबंधन न होने पर यह अपशिष्ट वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण का कारण बनता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कृषि अवशेषों से 18,000 मेगावाट से अधिक ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है। इसके अलावा, इनसे जैविक खाद भी बनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है।

सर्कुलर इकोनॉमी: कचरे से संसाधन बनाने की सोच

सर्कुलर इकोनॉमी का उद्देश्य कचरे को संसाधन में बदलना और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को कम करना है। यह मॉडल Reduce, Reuse, Recycle, Refurbish, Recover और Repair के सिद्धांतों पर आधारित है। अनुमान है कि 2050 तक भारत की सर्कुलर इकोनॉमी का बाजार मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है और 1 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी।

कृषि अपशिष्ट के प्रमुख स्रोत

  • फसल अवशेष (स्टबल): जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और प्रदूषण बढ़ता है।

  • पशु अपशिष्ट: गोबर और अन्य अपशिष्ट से बायोगैस और जैविक खाद बनाई जा सकती है।

  • पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस: भंडारण और परिवहन में खाद्य नुकसान।

  • फूड वेस्ट: घरों और बाजारों में खाद्य बर्बादी, जिससे ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं।

सरकारी पहलें: कचरे से संपदा (Waste-to-Wealth)

GOBARdhan योजना

सरकार गोबर, फसल अवशेष और खाद्य अपशिष्ट से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद बनाने को बढ़ावा दे रही है। जनवरी 2026 तक देश के 51.4% जिलों में 979 बायोगैस प्लांट स्थापित हो चुके हैं।

फसल अवशेष प्रबंधन (CRM)

फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए मशीनों और कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना की गई है। अब तक 3.24 लाख से अधिक मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं।

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)

भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए 66,310 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे कृषि मूल्य श्रृंखला मजबूत हुई है।

एनिमल हसबैंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (AHIDF)

पशुपालन क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये का कोष निजी निवेश को बढ़ावा दे रहा है और जैविक खाद व बायोगैस उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है।

जल शक्ति मिशन और जल पुन: उपयोग

जल शक्ति मंत्रालय घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा दे रहा है, जिससे कृषि में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और भूजल पर दबाव कम होगा।

सतत विकास लक्ष्य (SDGs) से जुड़ा सर्कुलर कृषि मॉडल

सर्कुलर कृषि मॉडल SDG-2 (भूख समाप्ति और सतत कृषि) और मिट्टी स्वास्थ्य सुधार से जुड़ा है। कम्पोस्टिंग, बायोचार और बायोमास रीसाइक्लिंग से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन बढ़ता है।

निष्कर्ष

भारत में कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में उठाए गए कदम पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को संतुलित कर रहे हैं। सरकार की योजनाएं कृषि अपशिष्ट को ऊर्जा, जैविक खाद और रोजगार में बदल रही हैं। इससे खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


होली से पहले किसानों को बड़ी सौगात, 10 हजार करोड़ का होगा भुगतान

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई।

बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

छत्तीसगढ़ विधानसभा के षष्ठम् विधानसभा के अष्टम् सत्र (फरवरी-मार्च 2026) के लिए राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी दी गई।

विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने वाले बजट अनुमान 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक-2026 के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई।

कैबिनेट ने किसानों के हित में बड़ा निर्णय लिया।

समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल के मान से अंतर की राशि का भुगतान होली से पहले एकमुश्त किया जाएगा।

खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25 लाख 24 हजार 339 किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई।

कृषक उन्नति योजना के तहत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।

सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है। यह देश में सर्वाधिक है।

बीते दो वर्षों में किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है।

इस वर्ष के भुगतान के बाद यह राशि बढ़कर 35 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी।

किसान स्कूल बहेराडीह में 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस, किसान महोत्सव में बांस गीत की विशेष प्रस्तुति

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जांजगीर-चाम्पा- बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा. इस मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय किसान महोत्सव में बलौदा के किसान महेत्तर लाल यादव और उनके सहयोगी कटनई के किसान पतिराम यादव बांस गीत की शानदार प्रस्तुति देंगे. इसके साथ ही जिले के किसान और स्कूली बच्चों के द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे.

वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि 23 दिसंबर, मंगलवार को राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल की पांचवीं स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा. इस अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय किसान महोत्सव में किसान और स्कूली बच्चे रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगें, वहीं दूसरी तरफ बलौदा के किसान महेत्तर लाल यादव और उनके सहयोगी कटनई के किसान पतिराम यादव के द्वारा बांस गीत की शानदार प्रस्तुति दी जाएगी. किसान दिवस में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ के 9 प्रगतिशील किसान समेत विलुप्त चीजों को सहेजने में किसान स्कूल स्कूल की पुरखा के सुरता अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले 9 लोगों और प्रदेश के 9 पत्रकारों का सम्मान किया जाएगा.

2026 सीज़न के लिए कोपरा का MSP बढ़ा: किसानों को मिलेगा अधिक लाभकारी मूल्य

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक कार्यों पर मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने 2026 सीज़न के लिए नारियल कोपरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) मंज़ूर कर लिया है।

किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने 2018-19 के केंद्रीय बजट में घोषित किया था कि सभी अधिदेशित फसलों का MSP, उनकी ऑल-इंडिया वेटेड औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना निर्धारित किया जाएगा।

2026 सीज़न के लिए नया MSP

  • मिलिंग कोपरा (FA Q): ₹12,027 प्रति क्विंटल

  • बॉल कोपरा: ₹12,500 प्रति क्विंटल

MSP में बढ़ोतरी

पिछले सीज़न की तुलना में:

  • मिलिंग कोपरा: ₹445 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

  • बॉल कोपरा: ₹400 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

2014 के मार्केटिंग सीज़न से अब तक MSP में भारी वृद्धि हुई है:

  • मिलिंग कोपरा: ₹5,250 → ₹12,027 (129% वृद्धि)

  • बॉल कोपरा: ₹5,500 → ₹12,500 (127% वृद्धि)

लाभ

  • किसानों को बेहतर और लाभकारी मूल्य मिलेगा।

  • कोपरा उत्पादन बढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा।

  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारियल उत्पादों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

खरीद एजेंसियाँ

  • NAFED

  • NCCF
    ये दोनों ही प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत कोपरा खरीदने वाली केंद्रीय नोडल एजेंसियाँ बनी रहेंगी।

मृणाल मंडल ने धान विक्रय का सही मूल्य मिला,ऑनलाइन टोकन से आसान हुआ धान खरीदी

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रायपुर- ऑनलाइन टोकन  प्रणाली ने धान खरीदी प्रक्रिया को सरल और सहज बनाया है l किसान स्वयं ऑनलाइन टोकन के माध्यम से  घर बैठे ही टोकन प्राप्त कर सकते हैं।  समिति में पहुंचते ही  उन्हें बिना किसी परेशानी के धान बेचना आसानी हुआ ।

जिला बलरामपुर- रामानुजगंज के बलरामपुर विकासखंड के धान उपार्जन केंद्र बरदर में ग्राम रामनगरकला रहने वाले किसान मृणाल मंडल ने अपनी मेहनत से उपजे लगभग 166 बोरी धान का विक्रय किया। समिति में मिली बेहतर व्यवस्था, सहज प्रक्रिया और त्वरित खरीदी ने उन्हें संतुष्ट किया,  मृणाल मंडल बताते हैं कि धान का सर्वाधिक मूल्य ने उनकी मेहनत को सही मूल्य दिलाया है। 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी का प्रावधान किसानों के लिए  बड़ी राहत साबित हो रहा है।

मंडल ने बताया कि समय पर समिति पहुंचना और तुरंत धान की खरीदी होना उनके लिए अत्यंत सुखद अनुभव रहा। बिना लंबी प्रतीक्षा और बिना किसी भागदौड़ और सुव्यवस्थित खरीदी व्यवस्था से धान विक्रय हो गया। उन्होंने बताया की इस बार की उपज के मिले राशि से परिवार की जरूरत, अगली फसल की तैयारी में उपयोग करेंगे।मंडल ने धान खरीदी व्यवस्था को सरल एवं सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त भी किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में साझा की देश की उपलब्धियां और युवा सशक्तिकरण की कहानी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2025 के 'मन की बात' कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए देश की विभिन्न उपलब्धियों, युवा सशक्तिकरण, कृषि, खेल और संस्कृति के क्षेत्रों में प्रगति का जिक्र किया। उन्होंने विशेष रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्राकृतिक खेती, मधुमक्खी पालन, खेल और पर्यटन जैसे विषयों पर जोर देते हुए लोगों से ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को अपनाने का आग्रह किया।

विज्ञान, अंतरिक्ष और नौसेना में प्रगति

प्रधानमंत्री ने हाल ही में हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन MRO सुविधा का उद्घाटन किया और मुंबई में भारतीय नौसेना में INS 'महे' के शामिल होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह देश की नई सोच, नवाचार और युवाओं की शक्ति का परिचायक है।

उन्होंने ISRO द्वारा आयोजित मार्स ड्रोन प्रतियोगिता का उदाहरण देते हुए कहा कि पुणे की टीम ने बार-बार असफलताओं के बावजूद अपने ड्रोन को मार्स जैसे वातावरण में उड़ाने में सफलता पाई। प्रधानमंत्री ने इसे युवाओं की समर्पित मानसिकता और वैज्ञानिकों के आत्मविश्वास का प्रतीक बताया।

कृषि और मधुमक्खी पालन में देश की उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने भारत में खाद्यान्न उत्पादन की उपलब्धि का जिक्र किया। देश ने 357 मिलियन टन उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया है, जो 10 साल पहले की तुलना में 100 मिलियन टन अधिक है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के 'रम्बन सुलाई हनी', कर्नाटक के 'शिवगंगा कलंजीया', और नागालैंड के 'क्लिफ-हनी' जैसे विशेष मधुमक्खी पालन कार्यक्रमों का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि देश में मधुमक्खी पालन के माध्यम से 1.5 लाख टन से अधिक शहद का उत्पादन हो रहा है और एक्सपोर्ट में तीन गुना वृद्धि हुई है।

खेल और सहनशक्ति वाले खेल

प्रधानमंत्री मोदी ने खेल क्षेत्र में भी देश की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस महीने भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने ICC वुमेन्स वर्ल्ड कप जीता। इसके अलावा, भारत ने टोक्यो में डिफ ओलंपिक्स में 20 पदक, कबड्डी वर्ल्ड कप, वर्ल्ड बॉक्सिंग कप और ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया।

उन्होंने 'एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स' और 'आयरनमैन ट्रायथलॉन' जैसे खेलों में बढ़ती युवा भागीदारी को सराहा और Fit India Sundays जैसे कार्यक्रमों का उदाहरण दिया।

संस्कृति, पर्यटन और प्राकृतिक खेती

प्रधानमंत्री ने कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र और अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का जिक्र करते हुए बताया कि दुनिया भर से लोग गीता के अद्भुत संदेश से प्रेरित हो रहे हैं।

उन्होंने प्राकृतिक खेती की ओर युवाओं के रुझान और दक्षिण भारत में बढ़ती जागरूकता पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने 'काशी-तमिल संगम' का उल्लेख करते हुए तमिल संस्कृति और भाषा को देश की गौरवशाली धरोहर बताया।

सर्दियों के पर्यटन पर भी उन्होंने ध्यान केंद्रित किया और उत्तराखंड के शीतकालीन पर्यटन स्थलों, हाई अल्टिट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन, और ‘Wed in India’ अभियान की लोकप्रियता का जिक्र किया।

वोकल फॉर लोकल और हस्तशिल्प

प्रधानमंत्री ने G20 शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए भारत के हस्तशिल्प और शिल्पकला के उदाहरणों का उल्लेख किया। उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को अपनाएं, केवल देश में बने उत्पाद खरीदें और इस अभियान को आगे बढ़ाएं।

संदेश और प्रेरणा

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से अपील की कि युवा, विज्ञान, खेल, कृषि, पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय रहें। उन्होंने कहा कि कठिनाइयों के बावजूद समर्पण और टीमवर्क से हर क्षेत्र में सफलता संभव है।

प्रधानमंत्री ने सर्दियों के मौसम में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने और आने वाले महीनों में नई कहानियों और उपलब्धियों पर चर्चा करने का संदेश भी दिया।

निष्कर्ष: प्रधानमंत्री मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के लिए प्रेरणा और उपलब्धियों का उत्सव है। विज्ञान, कृषि, खेल, संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत के संदेश से भरा यह कार्यक्रम देशवासियों में उत्साह और नई ऊर्जा भरता है।


विगत 25 वर्षों में दुर्ग जिले के कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति

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रायपुर- दुर्ग जिले के कृषि विभाग ने विगत 25 वर्षों में कृषि विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियाँ दर्ज की हैं, जिनका सकारात्मक असर जिले की कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 के दौरान खरीफ और रबी फसलों के क्षेत्र एवं उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। खरीफ फसल का क्षेत्राच्छादन 1,46,276 हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जो पिछले 25 वर्षों की तुलना में 4 प्रतिशत अधिक है, वहीं रबी फसल का क्षेत्र 53,660 हेक्टेयर रहा, जिसमें 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उत्पादन के स्तर पर भी जिले का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा है। खरीफ फसल का कुल उत्पादन 7.20 लाख मीट्रिक टन रहा, जो 53 प्रतिशत अधिक है, जबकि रबी उत्पादन 84 हजार मीट्रिक टन तक पहुँच गया, जो 43 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है। उत्पादकता में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है—खरीफ की उत्पादकता 4922 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर और रबी की उत्पादकता 1565 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रही, जो क्रमशः 48 और 34 प्रतिशत अधिक है। फसल सघनता भी बढ़कर 133 प्रतिशत हो गई है, जो 25 वर्षों की तुलना में 9 प्रतिशत की वृद्धि है।

किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता रही है। वर्ष 2025 में 50,762 क्विंटल बीज वितरित किया गया, जो पिछले 25 वर्षों की तुलना में 58 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार उर्वरकों का वितरण भी बढ़कर 89,632 मीट्रिक टन तक पहुंचा, जिसमें 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बीज उत्पादन के क्षेत्र में भी जिले ने उल्लेखनीय प्रगति की है। खरीफ में 76,764 क्विंटल और रबी में 9,026 क्विंटल बीज का उत्पादन किया गया, जो पूर्व तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। इन प्रयासों से किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होने लगे हैं, जिससे कृषि कार्यों की दक्षता और उत्पादन क्षमता में निरंतर सुधार हुआ है।

वर्ष 2025 में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं से कुल 1,06,659 कृषकों को लाभान्वित किया गया है, जो पिछले 25 वर्षों की तुलना में लगभग दस गुना अधिक है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि सरकारी सहायताएँ अब अधिक व्यापक और प्रभावी रूप से किसानों तक पहुँच रही हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत जिले के 80,230 किसानों को 340.24 करोड़ रुपये की राशि सीधे आधार-सत्यापित बैंक खातों में हस्तांतरित की गई है, जिससे योजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2,85,995 किसानों को 482.18 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया है। इस प्रक्रिया में ग्राम स्तर पर मोबाइल ऐप से फसल कटाई प्रयोग किए जाने से दावा भुगतान तेज और सटीक हुआ है।

इसी प्रकार कृषक उन्नति योजना के तहत वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 2,12,430 किसानों को 998.48 करोड़ रुपये की आदान सहायता प्रदान की गई है, जिसने किसानों को खेती के लिए मजबूत आर्थिक आधार प्रदान किया है। इन सभी समन्वित प्रयासों ने दुर्ग जिले के कृषि क्षेत्र को नई दिशा और मजबूती दी है। विभागीय प्रबंधन, तकनीकी हस्तक्षेप और केंद्र व राज्य की कृषक हितैषी नीतियों का प्रभाव अब जिले के सतत कृषि विकास में साफ दिखाई दे रहा है, जो आने वाले वर्षों में भी कृषि क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव साबित होगा।

राजकुमार भगत ने नारायणपुर धान खरीदी केंद्र में बेचा धान

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ऑनलाइन टोकन जारी होने से किसानों को मिल रही बड़ी सुविधा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्यभर के सभी धान खरीदी केंद्रों में खरीदी प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित रूप से जारी है। इसी क्रम में आज जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम नारायणपुर धान खरीदी केंद्र में किसान राजकुमार भगत अपने धान की बिक्री के लिए पहुँचे। उन्होंने बताया कि उनका ऑनलाइन टोकन आसानी से कट गया और उन्हें किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

राजकुमार भगत ने कहा कि वे हर वर्ष इसी केंद्र में धान बेचते हैं और इस बार भी सभी व्यवस्थाएँ बेहद सुव्यवस्थित हैं। उन्होंने खरीदी केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं जैसे—ऑनलाइन टोकन जारी व्यवस्था, माइक्रो एटीएम, पर्याप्त बारदाना, पेयजल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर संतोष प्रकट किया।

प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी प्रबंध किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रत्येक किसान को धान खरीदी की प्रक्रिया सहज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो। इसके लिए प्रशासनिक टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।

क्या है माइक्रो एटीएम सुविधा?

धान उपार्जन केंद्रों में किसानों की त्वरित जरूरतों को पूरा करने हेतु छत्तीसगढ़ सरकार ने माइक्रो एटीएम सुविधा उपलब्ध कराई है। इस सुविधा के माध्यम से किसान 2,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की राशि तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल से किसानों को बैंक की शाखाओं में लंबी कतारों में लगने की आवश्यकता नहीं पड़ती, और धान बेचने के तुरंत बाद आवश्यक राशि आसानी से मिल जाती है।

यह सुविधा किसानों की तत्काल आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में अत्यंत मददगार साबित हो रही है और संपूर्ण धान खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुविधाजनक, सुगम एवं किसान-फ्रेंडली बना रही है।

धान विक्रय में हुई सुगमता से प्रसन्नचित है बुजुर्ग किसान कोल्हु राम साहू

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  • मोबाईल एप्प से मिला टोकन और उपार्जन केन्द्र
  • निपानी में आसानी से किया धान का विक्रय

रायपुर- बालोद जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य सुगमता और पारदर्शिता के साथ जारी है। जिले के ग्राम निपानी के बुजुर्ग किसान कोल्हु राम साहू ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि शासन-प्रशासन की व्यवस्था बहुत अच्छी है, इसका परिणाम है कि उनका लगभग 80 क्विंटल धान आसानी से विक्रय हो गया है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी का कार्य शुरू होने के पूर्व ही उन्होंने अपने फसल की कटाई, मिंटाई आदि कार्य पूरा कर लिया था। धान खरीदी के एक दिन पूर्व ही उन्होंने अपने नाती के सहयोग से मोबाईल में तुंहर टोकन एप्प के माध्यम से अपने धान के विक्रय हेतु टोकन प्राप्त किया था। उन्होंने बताया कि पहले सोसायटी में टोकन के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, लेकिन अब मोबाईल के माध्यम से ही घर बैठे ऑनलाईन टोकन प्राप्त करने की बड़ी सुविधा मिली है, जो कि उनके जैसे बुजुर्गों के लिए काफी सुविधाजनक साबित हुआ है। 

बुजुर्ग किसान साहू ने बताया कि उन्होंने 17 नवम्बर को 80 क्विंटल धान विक्रय के लिए टोकन लिया था, उस दिन वे धान खरीदी केन्द्र खुलते ही अपना धान लेकर आ गए थे। जिसके पश्चात् समय पर ही उनके धान की आदर््ता माप कर, पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध कराया गया। बारदाना में धान भरने, तौलाई, सिलाई तथा स्टेक में रखने हेतु खरीदी केन्द्र में पर्याप्त मात्रा में कर्मचारी उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से समय पर ही उनका धान विक्रय हुआ है। उन्होंने बताया कि शासन प्रशासन की इस व्यवस्था से ही उनके धान का विक्रय आसानी से समय पर सुनिश्चित हुआ है, जिससे वे बहुत ही संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि धान खरीदी केन्द्र में पहुॅचने वाले किसानों के लिए बैठक, पेयजल, शौचालय आदि की भी व्यवस्था है, जो उन्हें धान खरीदी के कार्य में काफी सुविधाजनक लगा। उन्होंने किसान हितैषी योजनाओं एवं निर्णयों की सराहना करते हुए कहा कि 3100 रूपये प्रति क्विंटल में धान की खरीदी तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल की खरीदी से सभी किसानों के लिए खेती का कार्य काफी लाभदायक बन चुका है। उन्होंने किसान हितैषी योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को विशेष रूप से धन्यवाद देते हुए शासन प्रशासन का आभार जताया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों और बीज संरक्षण में योगदान देने वालों को PPV&FRA पुरस्कार से सम्मानित किया

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कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास के केंद्रीय मंत्री, शिवराज सिंह चौहान ने आज ‘प्लांट जीनोम सेवर अवार्ड्स सेरेमनी’ में भाग लिया, जो पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकारों (PPV&FRA) अधिनियम, 2001 की रजत जयंती और PPV&FRA के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर सी. सुब्रमण्यम हॉल, पुसा कैंपस, नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने देशभर के चुनिंदा किसान पुरस्कार विजेताओं को उनके बीज संरक्षण और जैव विविधता में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।

पुरस्कार विजेताओं में तेलंगाना का कम्युनिटी सीड बैंक, पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान का शिक्षा निकेतन, मिथिलांचल मखाना उत्पादक संघ, असम का CRS-ना डिहिंग टेंगा यूनियन कमेटी, उत्तराखंड के भूपेंद्र जोशी, केरल के टी. जोसेफ, बिहार के लक्षण प्रमाणिक और अनंथमूर्ति जे, उत्तराखंड के नरेंद्र सिंह सहित विभिन्न श्रेणियों के अन्य लोग शामिल थे।

अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकार प्राधिकरण (PPV&FRA) की “पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय उपलब्धियों” की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि प्रथाएँ दुनिया की सबसे पुरानी हैं और राष्ट्र की सभ्यता की नींव हैं। उन्होंने कहा, “कई स्वदेशी फसल किस्में पोषण और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं। कई पारंपरिक किस्में विलुप्त होने के कगार पर थीं, और किसानों की प्रतिबद्धता के कारण इन्हें संरक्षित किया गया है।”

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि PPV&FRA अधिनियम के तहत सरकार बीज किस्मों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 15 लाख रुपये तक की वित्तीय प्रोत्साहन राशि देती है। उन्होंने कहा, “बीज किसान की सबसे बड़ी पूंजी है। यह हमारा मौलिक अधिकार है। जबकि नई और उच्च उपज वाली किस्मों को बढ़ावा देना आवश्यक है, पारंपरिक बीजों को संरक्षित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। दोनों के बीच संतुलन होना चाहिए।”

उन्होंने सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों पर विचार किया जाएगा और जहां आवश्यक हो, PPV&FRA अधिनियम के भविष्य के संशोधनों में इन्हें शामिल किया जाएगा।

उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि किसानों में PPV&FRA अधिनियम के प्रति जागरूकता सीमित है। “आज भी कई किसान अधिनियम के लाभों से अनजान हैं। पंजीकरण में प्रक्रियात्मक जटिलताएँ हैं जिन्हें सरल बनाना चाहिए। हमें पारदर्शिता बढ़ानी होगी और सुनिश्चित करना होगा कि वास्तविक लाभ सीधे ग्रामीण स्तर तक पहुंचे।”

केंद्रीय मंत्री ने PPV&FRA और अन्य संबंधित कानूनों के बीच समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया और पारंपरिक किस्मों के ज्ञान को संरक्षित करने के लिए एक मजबूत वैज्ञानिक डेटाबेस बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “जो किसान हमारे बीज और जैव विविधता को संरक्षित करते हैं, वे हमारे कृषि विरासत के असली संरक्षक हैं। उन्हें सम्मानित, सशक्त और समर्थित किया जाना चाहिए।”

कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री, भागीरथ चौधरी, ने किसानों द्वारा अपनाए गए प्राकृतिक और जैविक तरीकों को उजागर किया, जिनसे पौधों और बीज किस्मों का संरक्षण किया जाता है। उन्होंने कहा कि PPV&FRA ने ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा प्रदान किया है। “इस प्राधिकरण के माध्यम से संरक्षण का कार्य तेजी से प्रगति कर रहा है, और यह सशक्त प्रणाली बीज और पौध संरक्षण में और अधिक भूमिका निभाएगी और किसानों के कल्याण में नए अध्याय जोड़ती रहेगी।”

कृषि राज्यमंत्री, रामनाथ ठाकुर, ने पारंपरिक फसलों जैसे ‘मांडुआ’ (फिंगर मिलेट) के बीजों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्राधिकरण से कहा कि इस संबंध में अधिक सक्रिय कदम उठाए जाएँ और कई स्वदेशी फसल प्रजातियों के औषधीय मूल्य पर ध्यान देने और उनके संरक्षण व अनुसंधान-आधारित प्रचार को सुनिश्चित किया जाए।

इस कार्यक्रम में कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी, कृषि राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर, सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय,देवेश चतुर्वेदी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक, डॉ. मांगी लाल जाट, संयुक्त सचिव (कृषि), अजीत कुमार साहू, PPV&FRA के अध्यक्ष, डॉ. त्रिलोचन मोहापात्रा और PPV&FRA के रजिस्ट्रार जनरल, डॉ. डी.के. अग्रवाल, साथ ही वरिष्ठ अधिकारी और देशभर के भाग लेने वाले किसान उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि:

पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकार प्राधिकरण (PPV&FRA) एक वैधानिक निकाय है, जिसे 2001 में पौधों की किस्मों और किसानों के अधिकार अधिनियम के तहत स्थापित किया गया, और यह भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

PPV&FRA के मुख्य उद्देश्य हैं:

  • नए पौधों की किस्में विकसित करने वाले पौधों के उन्नायक को बौद्धिक संपदा अधिकार प्रदान करना।

  • किसानों और समुदायों को मान्यता देना और पुरस्कृत करना, जो पारंपरिक किस्मों और जैव विविधता का संरक्षण करते हैं।

  • पंजीकृत किस्मों के किसानों को उनके बीज को बचाने, उपयोग करने, बोने, पुन: बोने, आदान-प्रदान करने, साझा करने और बेचने के अधिकार की सुरक्षा करना।

  • पौधों की नस्ल सुधार और कृषि में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना।

  • राष्ट्रीय पौध किस्मों के रजिस्टर (NRPV) को बनाए रखना और मूल्यवान जर्मप्लाज्म संसाधनों का दस्तावेजीकरण और संरक्षण सुनिश्चित करना।

प्राधिकरण किसानों के पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा और स्वदेशी किस्मों के उपयोग से होने वाले लाभों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वैज्ञानिक नवाचार और पारंपरिक ज्ञान को जोड़कर, PPV&FRA भारत की कृषि जैव विविधता की सुरक्षा, बीज संप्रभुता और सतत विकास को बढ़ावा देने में एक प्रमुख उपकरण बन गया है।

पिछले 21 वर्षों में, PPV&FRA ने हजारों नई और पारंपरिक किस्मों का पंजीकरण किया, किसान समुदायों के योगदान को मान्यता दी, और वित्तीय एवं संस्थागत मान्यता के माध्यम से संरक्षण प्रयासों को प्रोत्साहित किया।

अधिनियम की रजत जयंती और प्राधिकरण के 21वें स्थापना दिवस का उत्सव भारत की समावेशी, सतत और किसान-केंद्रित कृषि विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। प्राधिकरण आत्मनिर्भर भारत की सिद्धांतों के अनुरूप लचीले और जैव विविधता वाले कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए अपना योगदान जारी रखेगा।


केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गोरखपुर में ‘ग्राम चौपाल’ के माध्यम से किसानों से किया संवाद, कृषि एवं ग्रामीण विकास पर साझा किए विचार

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के डुमरी खुर्द गांव में आयोजित एक ‘ग्राम चौपाल’ के दौरान ग्रामीण भाई-बहनों से संवाद किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों, किसानों, स्वयं सहायता समूह (SHG) सदस्यों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

शिवराज सिंह चौहान ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के हित में किए जा रहे संयुक्त प्रयासों की जानकारी दी और कहा कि सरकार लगातार उत्पादन बढ़ाने, बेहतर बीज उपलब्ध कराने और लागत घटाने के लिए कदम उठा रही है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसलों के नुकसान पर क्षतिपूर्ति प्रदान की जाएगी। किसानों से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रमुख फसलों, उत्पादन लागत और स्थानीय खाद्य दुकानों की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर फीडबैक भी लिया।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के ‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन’ के तहत मसूर और चने के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में पहल की जा रही है और इस पर किसानों से सुझाव भी मांगे गए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की गई है, जिससे किसानों को बड़ा लाभ होगा। विशेष रूप से गेहूं, चना, मसूर और सरसों की MSP में हुई बढ़ोतरी का विवरण साझा किया गया।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि यंत्रों पर जीएसटी दरें 12% और 18% से घटाकर 5% कर दी गई हैं, जिससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

उन्होंने किसानों से पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और बागवानी को कृषि के साथ अपनाने का आग्रह किया और पशुओं के टीकाकरण से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।

इस ‘ग्राम चौपाल’ में बड़ी संख्या में किसानों, स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपनी समस्याएं एवं सुझाव केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ साझा किए। कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने सभी से ग्रामीण विकास और कृषि समृद्धि के लिए सहयोग और सहभागिता की अपील की।


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