Media24Media.com: #NewDelhi

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #NewDelhi. Show all posts
Showing posts with label #NewDelhi. Show all posts

BRICS Summit से पहले बड़ी कूटनीतिक हलचल, भारत पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भारत पहुंचे हैं। उनके दौरे को भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राष्ट्रपति पेजेशकियन के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी नजर

ईरान के राष्ट्रपति का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में भारत और ईरान के बीच होने वाली बातचीत का क्षेत्रीय और रणनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।

भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थन करता रहा है। दोनों नेताओं की बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रम और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।

चाबहार पोर्ट और कनेक्टिविटी पर फोकस

भारत और ईरान के संबंधों में चाबहार बंदरगाह एक महत्वपूर्ण कड़ी है। चाबहार के माध्यम से भारत को मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक बेहतर संपर्क स्थापित करने में रणनीतिक लाभ मिलता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी और व्यापारिक मार्गों को मजबूत करना बातचीत का अहम हिस्सा हो सकता है।

 BRICS के संदर्भ में भी दौरा महत्वपूर्ण

ईरान की BRICS में भागीदारी के कारण राष्ट्रपति पेजेशकियन का भारत दौरा संगठन के व्यापक आर्थिक और रणनीतिक एजेंडे के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत और ईरान के बीच बातचीत से दक्षिण-दक्षिण सहयोग, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को लेकर नए अवसरों पर चर्चा का रास्ता खुल सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन की प्रस्तावित बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। यह मुलाकात भारत-ईरान संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ BRICS के भीतर सहयोग और पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग, मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर

No comments Document Thumbnail

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे चीन के राष्ट्रपति, भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत की उम्मीद

नई दिल्ली - चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। वह 12–13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद, सुरक्षा और व्यापार को लेकर तनाव बना रहा है।

मोदी-शी मुलाकात पर टिकी नजर

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। दोनों नेताओं की बातचीत भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों नेताओं के बीच भारत में पहली औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत होगी।

इस बैठक में सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं।

सीमा विवाद अभी भी सबसे बड़ी चुनौती

भारत और चीन के रिश्तों में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन सीमा विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी तनाव पैदा हुआ था।

हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने सीमा पर तनाव कम करने और संवाद बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद सीमा पर भरोसे की कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताएं अभी भी भारत-चीन संबंधों के सामने बड़ी चुनौती हैं।

व्यापार और निवेश पर भी होगी चर्चा

भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंध भी आसान नहीं रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन भारत लंबे समय से व्यापार घाटे और चीनी कंपनियों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंता जताता रहा है।

शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान दोनों देश व्यापार और निवेश को बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, सुरक्षा और तकनीकी संवेदनशीलता को लेकर भारत का रुख सावधानी भरा रहने की संभावना है।

ब्रिक्स के मंच पर भारत-चीन संबंध

शी जिनपिंग की भारत यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

मध्य पूर्व में जारी युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा होगी। ऐसे समय में भारत और चीन का साथ मिलकर काम करना संगठन की एकजुटता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत के लिए क्या मायने रखती है यह यात्रा?

शी जिनपिंग की सात साल बाद भारत यात्रा को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह चीन के साथ संवाद और आर्थिक सहयोग बढ़ाते हुए अपनी सीमा सुरक्षा और रणनीतिक हितों से कोई समझौता न करे।

वहीं, चीन के लिए भारत के साथ बेहतर संबंध क्षेत्रीय स्थिरता और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-शी बातचीत से कुछ क्षेत्रों में तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन वर्षों से चली आ रही अविश्वास की स्थिति को तुरंत खत्म करना आसान नहीं होगा।


BRICS SUMMIT 2026: दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, ईरान युद्ध के बीच भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत में होने जा रहे BRICS शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां BRICS Summit आयोजित होगा। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और ऐसे समय में यह सम्मेलन हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई देशों के नेता और प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंचेंगे। शी जिनपिंग की भारत यात्रा खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह करीब सात साल बाद उनका भारत दौरा होगा।

सबसे बड़ा मुद्दा होगा पश्चिम एशिया का संकट

इस बार BRICS Summit ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव तेल, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

BRICS के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संगठन के सदस्य देशों के बीच ही इस संकट को लेकर अलग-अलग हित हैं। ईरान BRICS का सदस्य है, जबकि UAE और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देश भी समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सभी देशों को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए आसान नहीं होगा।

भारत की कूटनीतिक परीक्षा

भारत की कोशिश होगी कि BRICS को किसी एक पक्ष के समर्थन में खड़ा करने के बजाय संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का रास्ता आगे बढ़ाया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। ईरान और रूस के नेताओं के साथ भारत की हालिया बातचीत में भी यही रुख सामने आया है।

शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर भी नजर

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में तनाव रहा है, लेकिन हाल के समय में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है। ऐसे में BRICS Summit दोनों देशों को राजनयिक संबंधों को और बेहतर करने का अवसर दे सकता है।

हालांकि व्यापार और निवेश के मोर्चे पर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा को लेकर अविश्वास पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

पुतिन के साथ भी अहम बातचीत

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी भी सम्मेलन को खास बनाती है।

भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच BRICS Summit के दौरान द्विपक्षीय बातचीत होने की उम्मीद है।

भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि रूस के साथ उसके संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं और दोनों देश वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।

तेल और ऊर्जा सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए स्थिति और महत्वपूर्ण हो जाती है।

महंगा कच्चा तेल भारत के लिए कई तरह की मुश्किलें पैदा कर सकता है—

महंगा तेल → आयात बिल बढ़ेगा → रुपये पर दबाव → महंगाई बढ़ने का खतरा

इसी वजह से BRICS में ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री व्यापार पर चर्चा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

BRICS के एजेंडे में सिर्फ युद्ध नहीं

BRICS Summit में पश्चिम एशिया संकट के अलावा कई आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

मुख्य मुद्दों में शामिल हैं:

  • खाद्य सुरक्षा

  •  ऊर्जा सुरक्षा

  •  व्यापार और निवेश

  •  तकनीक और डिजिटल सहयोग

  •  टिकाऊ विकास

  •  स्वास्थ्य सहयोग

  •  सप्लाई चेन की मजबूती

  •  वैश्विक संस्थाओं में सुधार

  •  क्षेत्रीय और वैश्विक शांति

भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा है। भारत की कोशिश BRICS सहयोग को केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित रखने के बजाय विकास और व्यावहारिक सहयोग से जोड़ने की है।

दिल्ली घोषणापत्र पर होगी नजर

दो दिवसीय सम्मेलन के अंत में New Delhi Declaration जारी करने की कोशिश होगी। लेकिन पश्चिम एशिया के मुद्दे पर BRICS देशों के अलग-अलग रुख के कारण संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाना बड़ी चुनौती हो सकती है।

यही वजह है कि इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं है कि BRICS देश क्या घोषणा करते हैं, बल्कि यह भी है कि क्या वे मौजूदा वैश्विक संकटों पर एक साझा आवाज बना पाते हैं?

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दुनिया के कई बड़े नेताओं के दिल्ली पहुंचने के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए अलग-अलग सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।

भारत के लिए कितना बड़ा मौका?

BRICS Summit भारत के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत और वैश्विक नेतृत्व दिखाने का बड़ा अवसर है।

एक तरफ भारत को रूस और चीन जैसे बड़े देशों के साथ संबंधों को संभालना है, दूसरी तरफ ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाए रखना है। साथ ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी ध्यान में रखना है।

ऐसे में इस पूरे सम्मेलन में भारत की सबसे बड़ी चुनौती होगी—

“सभी पक्षों के साथ संबंध बनाए रखते हुए BRICS को एकजुट रखना।”

अगर भारत इस चुनौती को सफलतापूर्वक संभालता है और सदस्य देशों के बीच किसी साझा रुख पर सहमति बनती है, तो यह सम्मेलन भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस के अधिकारी प्रशिक्षुओं से की मुलाकात

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारतीय रक्षा संपदा सेवा (Indian Defence Estates Service) के 2025 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने आज नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। ये अधिकारी राष्ट्रीय रक्षा संपदा प्रबंधन संस्थान (NIDEM) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने देशभर में रक्षा भूमि के प्रबंधन और छावनी बोर्डों के नगर प्रशासन में रक्षा संपदा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

‘सेवा भाव’ के साथ काम करें अधिकारी

राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलती आकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने में लोक सेवकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सिविल सेवकों से पूरे ‘सेवा भाव’ के साथ लोगों के अनुकूल तरीके से सेवाएं प्रदान करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को नियमित रूप से आम लोगों से मिलना चाहिए और उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। इससे उनकी वास्तविक चिंताओं को समझने के साथ-साथ लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास तथा आश्वासन की भावना मजबूत होगी।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दें ध्यान

रक्षा मंत्री ने लोक सेवकों और युवा अधिकारियों से अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर समान रूप से ध्यान देने की अपील की। उन्होंने अधिकारियों को आध्यात्मिक मार्ग अपनाने और नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करने की सलाह दी।

इस अवसर पर रक्षा संपदा महानिदेशक शोभा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।

CM साय ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से की मुलाकात, संगठन व जनहित के मुद्दों पर हुई चर्चा

No comments Document Thumbnail

 रायपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शनिवार को नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान दोनों प्रमुख नेताओं के बीच संगठनात्मक गतिविधियों और राज्य के जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस बैठक की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सेवा, सुशासन और जनकल्याण' के संकल्प को जन-जन तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने को लेकर भी सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने इस मुलाकात को बेहद सकारात्मक बताते हुए जनहित के मुद्दों पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब राज्य में भाजपा संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लगातार बैठकों व संवाद का दौर जारी है।

नई दिल्ली में राष्ट्रीय उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण सम्मेलन (NCRBC) 2026 का शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- राष्ट्रीय उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण सम्मेलन (National Conference on Responsible Business Conduct - NCRBC) 2026 के चौथे संस्करण का शुभारंभ नई दिल्ली में हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन का विषय "विकसित भारत के लिए ESG-आधारित परिवर्तन (ESG-led Transformation for Viksit Bharat)" रखा गया है। सम्मेलन का आयोजन भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट (SBE) द्वारा किया गया है। IICA, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है।

उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण विकसित भारत की आधारशिला : नितिन गुप्ता

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण (Responsible Business Conduct) विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने, प्रतिस्पर्धी उद्योगों, विश्वसनीय बाजारों, समावेशी विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत ने सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब इन सूचनाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और निर्णय लेने में उपयोगिता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने जोर दिया कि सस्टेनेबिलिटी संबंधी जानकारी प्रासंगिक, तुलनीय, साक्ष्य-आधारित और सत्यापन योग्य होनी चाहिए।

गुप्ता ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग में भी वही अनुशासन और कठोरता अपनाई जानी चाहिए जो वित्तीय रिपोर्टिंग और ऑडिट में अपनाई जाती है। उन्होंने दस्तावेजीकरण, ट्रेसबिलिटी, आंतरिक नियंत्रण, साक्ष्य संरक्षण, पेशेवर जांच और स्वतंत्र सत्यापन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि विशेषकर एमएसएमई (MSMEs) और आपूर्ति श्रृंखलाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग तथा संस्थागत क्षमता निर्माण के माध्यम से व्यावहारिक और संतुलित सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

ESG को आर्थिक विकास का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा : ज्ञानेश्वर कुमार सिंह

भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के लिए ESG (पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन) को केवल नियामकीय अनुपालन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे आर्थिक विकास का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण भारत की सांस्कृतिक परंपरा में निहित है। उन्होंने वर्ष 2009 में जारी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) संबंधी स्वैच्छिक दिशा-निर्देशों से लेकर 2021 में लागू बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) ढांचे तक की यात्रा का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 166(2) में हितधारकों के हितों को प्राथमिकता देने का सिद्धांत पहले ही शामिल कर लिया गया था, जो भारत की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।

सिंह ने कहा कि भारत अब "ESG 1.0" से "ESG 2.0" की ओर बढ़ रहा है, जहां ESG केवल अनुपालन नहीं बल्कि दीर्घकालिक व्यवसायिक मूल्य, जोखिम प्रबंधन और संस्थागत मजबूती का आधार बन चुका है।

उन्होंने बोर्ड स्तर पर ESG को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने, ग्रीनवॉशिंग रोकने के लिए सस्टेनेबिलिटी डेटा के कानूनी ढांचे को मजबूत करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाने पर बल दिया।

व्यवसायिक रणनीति में शामिल हों बाल अधिकार : यूनिसेफ

यूनिसेफ इंडिया के उप-प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने कहा कि बाल अधिकारों को केवल परोपकारी गतिविधि नहीं बल्कि कंपनियों की मुख्य व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में 40 करोड़ से अधिक बच्चे भविष्य के कार्यबल और उपभोक्ता हैं।

उन्होंने असम के एक चाय बागान का उदाहरण देते हुए बताया कि मातृत्व अवकाश, कार्यस्थल पर क्रेच और जिम्मेदार आपूर्ति श्रृंखला जैसी नीतियों से बच्चों के कल्याण के साथ-साथ कर्मचारियों की स्थिरता भी बढ़ती है।

भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का "रॉकेट शिप" : हेलन ब्रांड

ACCA की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेलन ब्रांड ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए भारत की तेज आर्थिक प्रगति की सराहना की और कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था "चंद्रमा की ओर बढ़ते रॉकेट शिप" की तरह तेजी से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने ACCA की ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर के वित्तीय पेशेवर अब ऐसे संगठनों में काम करना चाहते हैं जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालते हों तथा मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील हों।

सतत विकास केवल अनुपालन नहीं, विकास की आधारशिला : प्रो. गरिमा दाधीच

स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख प्रो. गरिमा दाधीच ने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण विकसित भारत के निर्माण की अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी को केवल अनुपालन नहीं बल्कि विकास की आधारशिला के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने सम्मेलन के तीन प्रमुख सिद्धांत बताए—

  • पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी

  • ऋग्वेद का संदेश "संगच्छध्वं संवदध्वं"

  • भारत के G20 मंत्र "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" के अनुरूप विकास

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में हरित विकास, जलवायु परिवर्तन और सतत अवसंरचना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

उच्चस्तरीय पैनल में ESG पर व्यापक चर्चा

उद्घाटन सत्र के बाद "ESG, गवर्नेंस और बोर्ड-स्तरीय डिस्क्लोजर" विषय पर उच्चस्तरीय पैनल चर्चा आयोजित हुई।

SEBI के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा कि भारत को वैश्विक मानकों की जल्दबाजी में नकल नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपनी विकास आवश्यकताओं के अनुरूप ESG का मार्ग तय करना चाहिए।

ONGC के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि कंपनियों के इरादों और महत्वाकांक्षा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भरोसा और नीयत ही सुशासन की असली पहचान है।

CEEW के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभ घोष ने कहा कि ESG को अक्सर बोझ समझा जाता है, जबकि भारत की हरित अर्थव्यवस्था में लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश अवसर मौजूद है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के वरिष्ठ सलाहकार शैलेश पाठक ने कहा कि पूंजी वहीं टिकती है जहां भरोसा होता है। उन्होंने सोशल स्टॉक एक्सचेंज को सामाजिक उद्यमों और निवेशकों के बीच एक मजबूत सेतु बताया।

किर्लोस्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जॉर्ज वर्गीज ने कहा कि कड़े उत्सर्जन मानकों ने उनकी कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए अवसर खोले।

आईसीएआई (ICAI) के सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स बोर्ड के अध्यक्ष सीए प्रमोद जैन ने कहा कि भारत ESG आश्वासन को अनिवार्य बनाने वाले शुरुआती देशों में शामिल हो गया है, जिससे बोर्ड स्तर की रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता वित्तीय विवरणों के समान हो गई है।

दूसरे दिन होंगे कई महत्वपूर्ण सत्र

सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न क्षेत्रों में ESG के प्रभावी क्रियान्वयन, जिम्मेदार आपूर्ति श्रृंखला, MSMEs में ESG को मुख्यधारा में लाने, BRSR से आगे सेक्टर आधारित ESG ढांचे तथा पर्यावरणीय मानकों को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर उच्चस्तरीय चर्चा होगी।

यह सम्मेलन यूनिसेफ, पार्टनर्स इन चेंज, ACCA, ICAI, GAIN, UN Women, CEEW, WRI India और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन का उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित, समावेशी, टिकाऊ और नैतिक भारत के निर्माण में उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण को केंद्रीय भूमिका प्रदान करना है।

नारायणपुर के आदिवासी अंचल प्रतिभावान विद्यार्थियों का नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में EMRS छेरीबेड़ा के बच्चों ने बिखेरी चमक, छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता 

रायपुर- राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता (National Youth Parliament Competition) संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्कूली और कॉलेज छात्रों के लिए आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय प्रक्रियाओं की समझ और नेतृत्व गुणों का विकास करना है ताकि वे जिम्मेदार नागरिक और भविष्य के जन-प्रतिनिधि बन सकें।  जब हौसले बुलंद हों और मार्गदर्शन सही मिले, तो छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नारायणपुर के सुदूर वनांचल की प्रतिभाएँ भी देश की राजधानी दिल्ली तक अपनी धमक दर्ज करा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) छेरीबेड़ा के विद्यार्थियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। राजस्थान के उदयपुर (खेरवाड़ा) में आयोजित आंचलिक (जोनल) स्तरीय राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में इस विद्यालय की 53 सदस्यीय टीम ने न केवल छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि अपने उत्कृष्ट और ओजस्वी प्रदर्शन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला था, जिसमें छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी।

संसद की कार्यवाही देखने नई दिल्ली जाएंगे 8 होनहार विद्यार्थी

इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने वाले 8 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। इन बच्चों को अब देश के लोकतंत्र के मंदिर—नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण करने और वहाँ लाइव कार्यवाही देखने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा। ज्ञात हो कि स्पीकर की भूमिका में हर्षा को प्रथम स्थान,द्वितीय स्थान में मनसाय और अनुराधा तथा तृतीय स्थान अंजीला, निकिता, वेदिका, जयबति और शामी को मिला। इन बच्चों ने जिस आत्मविश्वास के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय बहसों को मंच पर जीवंत किया, उसने निर्णायकों का दिल जीत लिया।



सफलता के पीछे का 'मार्गदर्शन और समर्पण'

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विद्यालय के प्राचार्य का प्रेरणादायी नेतृत्व और विज़न रहा है। वहीं, बच्चों को संसद की बारीकियां सिखाने और उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाने में कार्यक्रम प्रभारी व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के कड़े प्रशिक्षण और समर्पण की मुख्य भूमिका रही। प्राचार्य ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर NESTS हेड क्वार्टर (नई दिल्ली), EMRS स्टेट सोसायटी CTD रायपुर, नारायणपुर कलेक्टर  और आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त  सहित सभी उच्चाधिकारियों का आभार व्यक्त किया है, जिनके निरंतर सहयोग से बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिला।

बस्तर संभाग के नारायणपुर जैसे वनांचल क्षेत्र के बच्चों की इस बड़ी छलांग से पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। विद्यालय परिवार, अभिभावकों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

उपराष्ट्रपति ने मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का किया अनावरण, मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन

No comments Document Thumbnail

 भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के द्वारका स्थित मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया तथा मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे आधुनिक भारत के महानतम समाज सुधारकों और राष्ट्रनिर्माताओं में से एक मन्नाथु पद्मनाभन की अमर विरासत का ऐतिहासिक उत्सव बताया। उन्होंने नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), दिल्ली को लंबे समय से संजोए गए मन्नम स्मृति मंडपम् के निर्माण के स्वप्न को साकार करने पर बधाई देते हुए कहा कि यह स्मारक केवल एक भवन नहीं, बल्कि एक ऐसी महान विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसके आदर्श सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्रसेवा की भावना को जाति, क्षेत्र और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठाते हैं।

मन्नाथु पद्मनाभन के जीवन और योगदान का स्मरण करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि प्रख्यात समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और नायर सर्विस सोसाइटी के संस्थापक ने शिक्षा, सामाजिक सुधार, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सेवा के माध्यम से समाज के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।

उपराष्ट्रपति ने मन्नाथु पद्मनाभन को सामाजिक पुनर्जागरण का सच्चा अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनकी दृष्टि किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं थी। उन्होंने कहा, "वे मानते थे कि प्रत्येक व्यक्ति समान सम्मान और समान अवसर का अधिकारी है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि वास्तविक सामाजिक प्रगति तभी संभव है, जब न्याय, करुणा और समावेशिता समाज के मार्गदर्शक सिद्धांत बनें।"

राधाकृष्णन ने कहा कि नायर सर्विस सोसाइटी की उल्लेखनीय प्रगति स्वयं उसके संस्थापक की असाधारण निष्ठा और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि मन्नाथु पद्मनाभन का विश्वास था कि महान संस्थाएँ धन से नहीं, बल्कि समर्पण से बनती हैं। उन्होंने सामान्य परिवारों के छोटे-छोटे योगदानों से शिक्षा और सामाजिक संस्थानों की स्थापना की, जिसने अनेक पीढ़ियों के जीवन को बदल दिया।

उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थापना के एक शताब्दी से अधिक समय बाद भी मन्नाथु पद्मनाभन के आदर्श केरल से कहीं आगे तक फैल चुके हैं। उन्होंने विशेष रूप से एनएसएस दिल्ली द्वारा कलरिपयट्टु, कथकली और मोहिनीयाट्टम जैसी केरल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में 25 शाखाओं और लगभग 25,000 सदस्यों वाले संगठन के रूप में एनएसएस दिल्ली की उल्लेखनीय प्रगति पर भी बधाई दी।

स्मारकों के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "स्मारक केवल पत्थरों पर की गई नक्काशी नहीं होते, बल्कि वे समाज की सामूहिक चेतना पर अंकित अमिट छाप होते हैं। उनका उद्देश्य केवल अतीत का स्मरण करना नहीं, बल्कि भविष्य को प्रेरणा देना भी है।"

उन्होंने नागरिकों से मन्नाथु पद्मनाभन के आदर्शों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा, "उनके प्रति हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हम समानता, शिक्षा, करुणा, सेवा और राष्ट्रीय एकता पर आधारित समाज निर्माण के उनके मिशन को आगे बढ़ाएँ।"

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत मन्नम इंटरनेशनल सेंटर परिसर में एक पौधा भी रोपा।

कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी, एनएसएस दिल्ली के अध्यक्ष एम. के. जी. पिल्लै, महासचिव एम. डी. जयप्रकाश सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

भारत ने नई दिल्ली में 13वीं आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA) संयुक्त समिति की बैठक की मेजबानी की

No comments Document Thumbnail

भारत ने 6 से 10 जुलाई, 2026 तक नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (ASEAN-India Trade in Goods Agreement - AITIGA) की समीक्षा के तहत वार्ताओं की प्रगति का आकलन करने के लिए 13वीं AITIGA संयुक्त समिति (Joint Committee - JC) तथा संबंधित बैठकों की मेजबानी की। ये बैठकें हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित की जा रही हैं।

13वीं संयुक्त समिति की बैठक के साथ-साथ AITIGA संयुक्त समिति के अंतर्गत गठित आठ उप-समितियों में से तीन की बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं। इनमें सीमा शुल्क प्रक्रियाएं एवं व्यापार सुगमता उप-समिति (SC-CPTF), राष्ट्रीय उपचार एवं बाजार पहुंच उप-समिति (SC-NTMA) तथा उद्गम नियम उप-समिति (SC-ROO) शामिल हैं। ये बैठकें भारत और आसियान के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करने, आपसी समझ बढ़ाने तथा रचनात्मक संवाद को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रही हैं।

संयुक्त समिति ने उप-समितियों को उनके-अपने कार्यक्षेत्रों में रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया और AITIGA समीक्षा के अंतर्गत लंबित अध्यायों को शीघ्र अंतिम रूप देने का आग्रह किया। वार्ताओं की गति बनाए रखने के लिए उप-समितियों को समयबद्ध लक्ष्य सौंपे गए तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर ठोस परिणाम हासिल करने के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

13वीं AITIGA संयुक्त समिति की बैठक 7 जुलाई, 2026 को आयोजित हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव नितिन कुमार यादव तथा मलेशिया के निवेश, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की उप महासचिव (व्यापार) मस्तुरा अहमद मुस्तफा ने की। बैठक में आसियान के सभी सदस्य देशों—ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम—के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया।

आसियान भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा रखता है। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान भारत और आसियान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 128 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो दोनों पक्षों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी को दर्शाता है और व्यापार एवं निवेश सहयोग के विस्तार की नई संभावनाएं प्रदान करता है।

श्रमिकों को मिली बड़ी राहत: विशेष अभियान के तहत 23 श्रम मामलों का निपटारा, 10.32 लाख रुपये का भुगतान

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय द्वारा लंबित श्रम मामलों के त्वरित निपटारे के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आज दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और उसके ठेकेदारों से जुड़े दावा मामलों की संयुक्त सुनवाई आयोजित की गई। यह सुनवाई नई दिल्ली स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय में क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय)-सह-प्राधिकरण, वेतन संहिता 2019 के समक्ष संपन्न हुई।

मामलों के प्रभावी और शीघ्र समाधान के उद्देश्य से मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) सोनल मिश्रा भी सुनवाई में शामिल हुईं। उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के अधिकारियों, प्रबंधन प्रतिनिधियों और श्रमिकों को संबोधित करते हुए श्रम विवादों के समयबद्ध निपटारे तथा श्रम कानूनों के सख्त अनुपालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

सुनवाई के दौरान कुल 193 दावा मामलों पर विचार किया गया, जिनमें से 23 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इसके परिणामस्वरूप 12 श्रमिकों को उनके बकाया भुगतान के रूप में कुल 10,32,484 रुपये प्रदान किए गए। शेष मामलों में भी विस्तृत सुनवाई की गई, जिससे अगली निर्धारित तिथि पर उनके समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कार्यवाही के दौरान DMRC के वरिष्ठ श्रम कल्याण निरीक्षक, श्रम कल्याण निरीक्षक तथा ठेकेदारों के प्रतिनिधियों को श्रम कानूनों के अनुपालन के प्रति जागरूक किया गया। विशेष रूप से समय पर वेतन भुगतान, वैधानिक अभिलेखों के रखरखाव और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया। प्रबंधन पक्ष ने श्रम अधिकारियों को आश्वासन दिया कि नियमों के बेहतर अनुपालन के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का यह विशेष अभियान श्रमिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान, न्याय तक उनकी पहुंच को सशक्त बनाने, श्रम कानूनों के अनुपालन को मजबूत करने और सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



मुख्यमंत्री ने अमित शाह से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की मांग

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  से मुलाकात कर राज्य में All India Institute of Ayurveda (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से राज्य के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और मरीजों को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इसके साथ ही प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेदिक शिक्षा और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संस्थान की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गति मिलेगी। विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक शोध एवं उपचार सुविधाओं से जोड़ने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर सकारात्मक चर्चा की और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेदिक संस्थान स्थापित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि AIIA की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि आयुष क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और चिकित्सा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।


विदेश मंत्रालय की स्पष्टता: पासपोर्ट अकेले नागरिकता का प्रमाण नहीं

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज़ है और इसे अपने आप में भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण नागरिकता और पहचान दस्तावेज़ों से जुड़ी चर्चाओं के बीच जारी किया।


विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट धारक की पहचान और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए जारी किया जाता है, जबकि नागरिकता से संबंधित मामलों का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम प्राधिकरणों द्वारा किया जाता है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त (Visa-Free) और वीजा-ऑन-अराइवल (Visa-on-Arrival) सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जिससे भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए कई देशों की यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्रालय की यह स्पष्टता नागरिकता और यात्रा दस्तावेज़ों के बीच अंतर को समझने में मदद करेगी। साथ ही, यह जानकारी उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो पासपोर्ट को नागरिकता के एकमात्र प्रमाण के रूप में देखते हैं।

विदेश मंत्रालय ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे नागरिकता, पहचान और यात्रा दस्तावेज़ों से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक दिशानिर्देशों का पालन करें तथा किसी भी भ्रम की स्थिति में संबंधित सरकारी एजेंसियों से संपर्क करें।


UPSC को मिला नया कार्यालय, बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए बढ़ाया गया बुनियादी ढांचा

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने आज नई दिल्ली स्थित टॉकरा टोरा एनेक्सी (Talkatora Annexe) भवन में आयोग के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोग के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

नए कार्यालय की स्थापना UPSC की बढ़ती प्रशासनिक और संस्थागत जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से की गई है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार ने कहा कि आयोग लंबे समय से कार्यालयी स्थान की कमी का सामना कर रहा था। समय के साथ आयोग की जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

उन्होंने बताया कि उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) सहित विभिन्न नई संस्थागत पहलों के कारण आयोग की गतिविधियों का विस्तार हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ कार्यालयों को अंतरिम व्यवस्था के तहत टॉकरा टोरा एनेक्सी भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है, जब तक कि धौलपुर हाउस में स्थायी सुविधाओं का विकास नहीं हो जाता।

डॉ. अजय कुमार ने कहा कि UPSC देश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और पारदर्शी, निष्पक्ष तथा योग्यता-आधारित भर्ती प्रणाली के माध्यम से देश को उत्कृष्ट प्रशासनिक अधिकारी उपलब्ध कराता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नया कार्यालय प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन में मदद करेगा।

गौरतलब है कि UPSC की स्थापना वर्ष 1926 में ली आयोग (Lee Commission) की सिफारिशों के आधार पर हुई थी। भारतीय संविधान लागू होने के बाद इसे संघ लोक सेवा आयोग के रूप में पुनर्गठित किया गया और देश की सिविल सेवाओं तथा अन्य सरकारी सेवाओं में योग्यता-आधारित भर्ती की जिम्मेदारी सौंपी गई।

वर्तमान में UPSC का मुख्यालय धौलपुर हाउस में स्थित है, जिसका निर्माण वर्ष 1920 में तत्कालीन धौलपुर रियासत के महाराज-राणा उदय भान सिंह के निवास के रूप में किया गया था। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1952 में इसे UPSC का मुख्यालय बनाया गया था।

नए कार्यालय के उद्घाटन को आयोग की संस्थागत क्षमता बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में अमेरिका के भारत स्थित राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अमित शाह ने कहा:

“आज नई दिल्ली में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की। सुरक्षा के क्षेत्र में, विशेष रूप से आतंकवाद-रोधी और मादक पदार्थों की तस्करी-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई।”

उन्होंने आगे कहा:

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि दोनों देशों के लोग इस द्विपक्षीय संबंध से लाभान्वित हों।”

बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग को और सुदृढ़ बनाने, आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रयासों तथा मादक पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए सहयोग बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने तथा दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत बिल्डकॉन 2026 का नई दिल्ली में शुभारंभ, 90 से अधिक देशों की भागीदारी

No comments Document Thumbnail

निर्माण सामग्री और निर्माण उद्योग को समर्पित प्रदर्शनी ‘भारत बिल्डकॉन 2026 – वन नेशन, वन एक्सपो’ का आज नई दिल्ली स्थित यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल तथा सांसद पुरुषोत्तम रूपाला उपस्थित रहे। कार्यक्रम में निर्माण और भवन निर्माण सामग्री उद्योग से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

प्रदर्शनी के उद्घाटन दिवस पर 25,000 से अधिक आगंतुकों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन भारत और विदेशों से आए वास्तुकारों, बिल्डरों, डेवलपर्स, ठेकेदारों, निर्माताओं, व्यापारियों, नीति-निर्माताओं, उद्योग संघों तथा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को एक मंच पर लाता है, जिससे उद्योग जगत के बीच संवाद और व्यावसायिक सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आर्थिक विकास और भारतीय उद्योगों के लिए वैश्विक बाजारों में अवसर बढ़ाने में मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत–ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते (CETA) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा और भारतीय निर्माताओं तथा निर्यातकों के लिए नए अवसर प्रदान करेगा।

जितिन प्रसाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया, जिसके तहत गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण और सोर्सिंग केंद्र के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि निर्माण और भवन निर्माण सामग्री सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की क्षमता और संसाधन रखता है।

उन्होंने कहा कि भारत बिल्डकॉन जैसे मंच निर्माताओं, नवप्रवर्तकों, खरीदारों, नीति-निर्माताओं और उद्योग से जुड़े अन्य हितधारकों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करते हैं तथा क्षेत्र में सहयोग और व्यापारिक अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भारत बिल्डकॉन 2026 में 90 से अधिक देशों और भारत के 100 से अधिक शहरों की भागीदारी है। प्रदर्शनी में 24 विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित उत्पादों, तकनीकों और नवाचारों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इनमें सिरेमिक एवं स्टोन, हार्डवेयर, सीमेंट एवं स्टील, प्लाईवुड एवं लैमिनेट्स, फर्नीचर, सैनिटरीवेयर, विद्युत उपकरण, पेंट्स, निर्माण प्रौद्योगिकी तथा अन्य संबद्ध क्षेत्र शामिल हैं।

यह प्रदर्शनी आगामी दिनों तक जारी रहेगी और उद्योग जगत को तकनीकी नवाचारों के प्रदर्शन, व्यावसायिक सहयोग तथा नए व्यापारिक अवसरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराएगी।

नई दिल्ली में ‘विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026’ का आयोजन, युवाओं को मिलेगा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय 15 से 17 जून 2026 तक नई दिल्ली में ‘विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026’ का आयोजन कर रहा है। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में आयोजित यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, नीति-निर्माण और संसदीय कार्यप्रणाली से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक उद्घाटन 16 जून 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा किया जाएगा। पूर्व संस्करणों की सफलता को आगे बढ़ाते हुए यह पहल युवाओं को शासन और लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्रदान करेगी।

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अनुसार, विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा जनआंदोलन है जो देश के युवाओं की ऊर्जा, विचारों और आकांक्षाओं को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ता है। कार्यक्रम के दौरान तैयार किए गए संकल्प और सुझाव विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

यह कार्यक्रम तीन चरणों में आयोजित किया गया है।

जिला स्तरीय चरण में देशभर के 757 नोडल विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में “आपातकाल के 50 वर्ष : भारतीय लोकतंत्र के लिए सीख” विषय पर व्यापक चर्चा आयोजित की गई। प्रत्येक जिले से शीर्ष पांच प्रतिभागियों को राज्य स्तरीय चरण में भाग लेने का अवसर मिला।

राज्य स्तरीय चरण विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं और प्रमुख सरकारी परिसरों में आयोजित किया गया, जहां “केंद्रीय बजट 2026 : युवा शक्ति संचालित बजट” विषय पर विचार-विमर्श हुआ। इन सत्रों की अध्यक्षता राज्य विधानसभाओं के अध्यक्षों और राज्यपालों ने की, जिससे युवाओं को क्षेत्रीय शासन व्यवस्था को समझने का अवसर मिला।

अब राष्ट्रीय चरण में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चयनित प्रतिभागी नई दिल्ली में एकत्रित हुए हैं। 15 से 17 जून तक चलने वाले इस चरण में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

कार्यक्रम के तहत प्रत्येक राज्य की टीम का एक प्रतिनिधि “नारी शक्ति वंदन : समावेशिता और विकसित भारत 2047 को गति देने वाला अभियान” विषय पर तीन मिनट का संबोधन देगा।

इसके बाद प्रश्नकाल आयोजित होगा, जिसमें प्रतिभागी संसदीय परंपराओं के अनुरूप प्रश्न पूछेंगे और उत्तर देंगे। प्रत्येक प्रश्न और उत्तर के लिए तीन-तीन मिनट का समय निर्धारित किया गया है।

प्रतिभागियों के नेतृत्व और संवाद कौशल को निखारने के लिए एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व द्वारा वक्तृत्व कला और सार्वजनिक भाषण पर विशेष मास्टरक्लास भी आयोजित की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान युवा प्रतिनिधियों को प्रधानमंत्री संग्रहालय (PM Sangrahalaya) का भ्रमण कराया जाएगा, जहां वे भारत की राजनीतिक विरासत और नेतृत्व की यात्रा को समझ सकेंगे। साथ ही उन्हें नए संसद भवन का भी दौरा कराया जाएगा, जिससे वे देश के लोकतंत्र के सर्वोच्च संस्थान को निकट से देख सकें।

कार्यक्रम का समापन 17 जून 2026 को पुरस्कार समारोह के साथ होगा, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट 2026 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

मंत्रालय का मानना है कि यह पहल युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए एक नई पीढ़ी के जागरूक और जिम्मेदार नेतृत्व का निर्माण करेगी।

IGI Airport पर भारत की पहली SkyCast प्रणाली का उद्घाटन, विमानन सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान में नई क्रांति

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर भारत की पहली “SkyCast System” का उद्घाटन किया और इसे भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत बताया।

मंत्री ने बताया कि इस तरह की केवल 18 उन्नत प्रणालियाँ अभी तक विश्वभर में स्थापित हैं, और भारत अब 19वाँ देश बन गया है जिसने विमानन मौसम निगरानी के लिए इस एकीकृत एटमॉस्फेरिक रिमोट सेंसिंग सिस्टम को अपनाया है। IGI एयरपोर्ट के बाद ऐसी दूसरी सुविधा जेवर एयरपोर्ट पर स्थापित की जाएगी और इसके बाद इसे देश के अन्य हवाई अड्डों पर भी विस्तारित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, IMD, IITM, GMR और विमानन क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईकास्ट सिस्टम और फॉग ऑब्जर्वेटरी सुविधा का उद्घाटन किया, जिसके बाद IITM के वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी प्रस्तुति और डेमो दिया गया।

डॉ. सिंह ने कहा कि “मिशन मौसम” के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच ने इस प्रकार की उन्नत मौसम अवसंरचना को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि स्काईकास्ट विमानन सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाएगा और गंभीर मौसम स्थितियों में रीयल-टाइम जानकारी प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली यात्रियों के लिए उड़ानों में देरी, डायवर्जन और रद्दीकरण को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी, क्योंकि यह पायलटों को लगभग तीन घंटे पहले तक सटीक चेतावनी दे सकेगी।

स्काईकास्ट प्रणाली में अत्याधुनिक एटमॉस्फेरिक तकनीकें शामिल हैं, जैसे रडार विंड प्रोफाइलर, SODAR, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS) और CL61 LiDAR आधारित सीलामीटर। यह सिस्टम धुंध, टर्बुलेंस, दृश्यता और मौसम संबंधी रीयल-टाइम डेटा प्रदान करता है।

मंत्री ने बताया कि इसका मुख्य घटक रडार विंड प्रोफाइलर है, जो लगभग 3 किलोमीटर ऊंचाई तक हवा की गति, दिशा और टर्बुलेंस की निगरानी करता है, जिससे लैंडिंग और टेकऑफ अधिक सुरक्षित हो सकें।

फॉग मॉनिटरिंग सिस्टम विशेष रूप से दिल्ली जैसे शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां प्रदूषण और धुंध की परस्पर क्रिया दृश्यता को प्रभावित करती है।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विमानन सुरक्षा, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगी।

डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि इस प्रकार की तकनीकें भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता को और अधिक सटीक बनाएंगी और मिशन मौसम के तहत देशभर में ऐसी प्रणालियाँ विस्तारित की जाएंगी।

स्काईकास्ट प्रणाली भारत की “वेदर-स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर” दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीक-संचालित विमानन सेवाओं की ओर देश को आगे ले जाएगी।

भारत और दक्षिण कोरिया ने CEPA अपग्रेड वार्ता में प्रगति पर चर्चा, डिजिटल ट्रेड और निवेश सहयोग पर जोर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- India-Korea Comprehensive Economic Partnership Agreement (IK CEPA) के उन्नयन को लेकर 12वें दौर की वार्ता 25 से 27 मई 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित की गई। यह वार्ता 20 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित संयुक्त घोषणा के बाद हुई, जिसमें दोनों देशों ने CEPA अपग्रेड वार्ता को तेज करने पर सहमति जताई थी।

यह वार्ता भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और कोरिया के व्यापार, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्रालय के बीच हुई। भारतीय पक्ष का नेतृत्व कपिल चौधरी ने किया, जबकि कोरियाई पक्ष का नेतृत्व Park Geun-oh ने किया।

प्रमुख चर्चा बिंदु

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया, जिनमें शामिल हैं:

  • वस्तु व्यापार (Trade in Goods)

  • सेवाओं का व्यापार (Trade in Services)

  • मूल नियम (Rules of Origin)

  • निवेश (Investment)

  • स्वच्छता एवं फाइटोसैनिटरी मानक (SPS)

दोनों पक्षों ने डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन सहयोग और रणनीतिक औद्योगिक सहयोग के लिए अलग-अलग उप-समूह बनाने पर भी सहमति जताई।

व्यापार घाटे पर चर्चा

भारत और कोरिया ने स्वीकार किया कि वर्ष 2010 में CEPA लागू होने के बाद भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है। इस मुद्दे को CEPA ढांचे के भीतर संतुलित समाधान के साथ हल करने पर सहमति बनी।

रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

दोनों देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के दृष्टिकोण के अनुरूप “फ्यूचरिस्टिक पार्टनरशिप” को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

समयबद्ध निष्कर्ष का लक्ष्य

भारत और कोरिया ने CEPA अपग्रेड वार्ता को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और एक आधुनिक, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता तैयार करने का लक्ष्य दोहराया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग को नई दिशा मिल सके।

खरीफ सम्मेलन-2026 में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखी कृषि विकास की रूपरेखा

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित खरीफ सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और नागरिकों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है।

दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 मई को NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में किया जा रहा है। सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

‘टीम एग्रीकल्चर’ का साझा मंच

चौहान ने कहा कि खरीफ सम्मेलन ने पूरे ‘टीम एग्रीकल्चर’ को एक मंच पर लाने का कार्य किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम एग्रीकल्चर में केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें, वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठन (FPO), और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और राज्यों की सक्रिय भागीदारी से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं, जबकि केंद्र सरकार सहयोगी और साझेदार की भूमिका निभाती है।

क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की भौगोलिक और जलवायु विविधता को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के साथ-साथ क्षेत्रीय सम्मेलनों की शुरुआत की है। जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत में भी जल्द सम्मेलन आयोजित होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्यों की समस्याओं और आवश्यकताओं पर छोटे समूहों में अधिक प्रभावी और विस्तृत चर्चा संभव हो पाती है। भविष्य में आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धि

चौहान ने कहा कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और केंद्र व राज्यों के सहयोग से भारत ने वर्ष 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

उन्होंने बताया कि:

  • कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

  • चावल उत्पादन 154.024 मिलियन टन रहा और भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व में पहला स्थान हासिल किया।

  • गेहूं उत्पादन 120.657 मिलियन टन और मक्का उत्पादन 55.092 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

तेलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुल तेलहन उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली उत्पादन 13.074 मिलियन टन और सरसों उत्पादन 13.768 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

प्राकृतिक खेती और जलवायु परिवर्तन पर फोकस

कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और लंबे सूखे जैसी परिस्थितियों को देखते हुए टिकाऊ और सुरक्षित कृषि पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित उर्वरक उपयोग, डिजिटल कृषि, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि अवसंरचना कोष और पीएम-आशा योजना जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

चौहान ने कहा कि भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है, इसलिए सीमित भूमि से अधिक आय सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त कृषि ऋण, निवेश और आधुनिक तकनीकों की मदद से किसान बेहतर खेती कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ पर भी व्यापक चर्चा होगी और केंद्र व राज्य मिलकर खरीफ सीजन के लिए संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार करेंगे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई पुस्तक ‘अपनापन’ का ऐलान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 35 वर्षों के अनुभवों का वर्णन

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी नई पुस्तक ‘अपनापन’ की घोषणा की है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 वर्षों के संबंधों, अनुभवों और कार्यशैली को व्यक्तिगत दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।

यह पुस्तक 26 मई 2026 को सुबह 10:30 बजे एनएएससी कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में औपचारिक रूप से लॉन्च की जाएगी। इस अवसर पर पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू तथा पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा उपस्थित रहेंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘अपनापन’ केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व शैली, संवेदनशीलता, अनुशासन, कार्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण का एक आत्मीय दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि उनकी और नरेंद्र मोदी की पहचान 1991 की एकता यात्रा से शुरू हुई थी, जो समय के साथ संगठनात्मक कार्य, शासन और सार्वजनिक जीवन की साझी यात्रा में बदल गई।

उन्होंने कहा कि दुनिया नरेंद्र मोदी को एक निर्णायक और प्रभावशाली नेता के रूप में देखती है, लेकिन उन्होंने उन्हें एक कर्मयोगी, राष्ट्रहित के प्रति समर्पित और संवेदनशील व्यक्ति के रूप में करीब से देखा है। चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री देर रात तक काम करने के बावजूद हर नए दिन समान ऊर्जा और स्पष्टता के साथ देशसेवा में जुट जाते हैं।

एकता यात्रा को याद करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहाँ कुछ लोग इसे केवल राजनीतिक अभियान मानते थे, वहीं नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय चेतना का आंदोलन बना दिया। उनका उद्देश्य केवल श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना नहीं था, बल्कि युवाओं में राष्ट्रभक्ति और समर्पण की भावना जगाना था।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की संगठन क्षमता, चुनावी रणनीति, जमीनी स्तर तक विचार पहुँचाने की क्षमता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव को उनकी प्रमुख विशेषताओं में बताया। चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने यह भी देखा कि जटिल और लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान संवाद, स्पष्टता और दृढ़ संकल्प से कैसे किया जा सकता है।

कोविड-19 महामारी के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने धैर्य, दूरदृष्टि और संतुलित निर्णय क्षमता का परिचय दिया, जिससे देश को दिशा और विश्वास मिला।

उन्होंने कहा कि ‘अपनापन’ विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करेगी और यह संदेश देगी कि राष्ट्र परिवर्तन के लिए केवल बड़ा पद नहीं, बल्कि महान संकल्प, अनुशासन, सेवा भावना और लोगों से आत्मीय जुड़ाव आवश्यक है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.