Media24Media.com: कोयला मंत्रालय के रोडशो में कोयला गैसीफिकेशन को लेकर बड़े निवेश और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर

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कोयला मंत्रालय के रोडशो में कोयला गैसीफिकेशन को लेकर बड़े निवेश और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में “सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं के संवर्धन” योजना पर एक सफल रोडशो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीकी प्रदाताओं, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों की बड़ी भागीदारी देखी गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे  विशिष्ट अतिथि रहे। साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

कोयला गैसीफिकेशन को बताया रणनीतिक मिशन

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और भविष्य-उन्मुख ऊर्जा प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय मिशन है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने इस क्षेत्र के लिए ₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना शुरू की है और हाल ही में ₹37,500 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय सहायता को मंजूरी दी गई है। इससे लगभग ₹2.5 लाख करोड़ तक के निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर

मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन से भारत की LNG, मेथनॉल, अमोनिया और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को वैश्विक मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह तकनीक उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स, हाइड्रोजन और उन्नत निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगी और देश को स्वच्छ कोयला तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगी।

रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा

राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे ने कहा कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से कोयला-समृद्ध और पिछड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी और औद्योगिक विकास को गति देगी।

भारत को वैश्विक ऊर्जा हब बनाने की दिशा

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि भारत अपने प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम और समझदारीपूर्ण उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन के जरिए भारत सिंथेटिक गैस, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आयात निर्भरता को कम कर सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह योजना लगभग 25 परियोजनाओं के माध्यम से करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकती है।

भविष्य की ऊर्जा रणनीति पर फोकस

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए भारत को अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है। रोडशो में उद्योग जगत और निवेशकों के साथ तकनीकी, वित्तीय और नीति संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा भी हुई।

मंत्रालय ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन को “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित किया जाएगा।


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