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छत्तीसगढ़ ने लागू किया 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026', निवेश और उद्योगों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योगों और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026' लागू किया है। इस कानून का उद्देश्य उद्योगों की स्थापना और संचालन से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को तेज, सरल और समयबद्ध बनाना है, जिससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

नए कानून के तहत ट्रस्ट-बेस्ड (विश्वास आधारित) और रिस्क-बेस्ड (जोखिम आधारित) नियामक व्यवस्था अपनाई जाएगी। इसके तहत उद्योगों का वर्गीकरण उनके आकार, निवेश और जोखिम के आधार पर किया जाएगा। कम जोखिम वाले उद्योगों को बार-बार निरीक्षण और अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में आवश्यक निगरानी जारी रहेगी।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से उद्योगों को विभिन्न विभागों से समयबद्ध मंजूरी मिलेगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुमति नहीं मिलने पर कई मामलों में 'डीम्ड अप्रूवल' (स्वतः स्वीकृति) का प्रावधान भी लागू होगा। साथ ही, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को स्व-प्रमाणन (Self-Certification) जैसी सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे अनुपालन लागत और प्रशासनिक बोझ कम होगा।

राज्य सरकार का मानना है कि यह कानून पारंपरिक निरीक्षण-आधारित व्यवस्था की जगह पारदर्शी, जवाबदेह और निवेशक-अनुकूल शासन प्रणाली को बढ़ावा देगा। इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा औद्योगिक परियोजनाओं को तेजी से गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ में विनिर्माण, एमएसएमई, कृषि-आधारित उद्योग, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को नई रफ्तार मिल सकती है। इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को देश के सबसे निवेश-अनुकूल राज्यों में शामिल करना है। नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जो उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाकर आर्थिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।

कोयला मंत्रालय के रोडशो में कोयला गैसीफिकेशन को लेकर बड़े निवेश और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में “सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं के संवर्धन” योजना पर एक सफल रोडशो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीकी प्रदाताओं, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों की बड़ी भागीदारी देखी गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे  विशिष्ट अतिथि रहे। साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

कोयला गैसीफिकेशन को बताया रणनीतिक मिशन

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और भविष्य-उन्मुख ऊर्जा प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय मिशन है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने इस क्षेत्र के लिए ₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना शुरू की है और हाल ही में ₹37,500 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय सहायता को मंजूरी दी गई है। इससे लगभग ₹2.5 लाख करोड़ तक के निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर

मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन से भारत की LNG, मेथनॉल, अमोनिया और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को वैश्विक मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह तकनीक उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स, हाइड्रोजन और उन्नत निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगी और देश को स्वच्छ कोयला तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगी।

रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा

राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे ने कहा कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से कोयला-समृद्ध और पिछड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी और औद्योगिक विकास को गति देगी।

भारत को वैश्विक ऊर्जा हब बनाने की दिशा

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि भारत अपने प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम और समझदारीपूर्ण उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन के जरिए भारत सिंथेटिक गैस, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आयात निर्भरता को कम कर सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह योजना लगभग 25 परियोजनाओं के माध्यम से करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकती है।

भविष्य की ऊर्जा रणनीति पर फोकस

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए भारत को अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है। रोडशो में उद्योग जगत और निवेशकों के साथ तकनीकी, वित्तीय और नीति संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा भी हुई।

मंत्रालय ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन को “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित किया जाएगा।


इकोनॉमी के विकास के लिए वैल्यू एडिशन आधारित उत्पादन करना होगा -राज्यपाल डेका

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वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को मिल रहा है लाभ - मुख्यमंत्री साय

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 11 वें दीक्षांत समारोह मे शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री

1880 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 13 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक मिले

रायपुर- छत्तीसगढ़ की लगभग 80 प्रतिशत अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। आज भूमि लगातार संकुचित होती जा रही है। अतएव हमें कम जमीन में ज्यादा से ज्यादा उत्पादन के लिए कार्य करना होगा। अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के लिए वैल्यू एडिशन उत्पादन आज की महती आवश्यकता है।

राज्यपाल रमेन डेका एवं कुलाधिपति इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर ने विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के पूर्व निदेशक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह उपस्थित थे ।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के सभागार में आयोजित भव्य एवं गरिमामय दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को पदक एवं उपाधियां वितरित की गई। विभिन्न संकायों में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 13 स्वर्ण, 7 रजत एवं 2 कांस्य पदक सहित 128 शोधार्थियों को पी.एच.डी, 518 विधार्थियों को स्नातकोत्तर और 1234 विधार्थियों को स्नातक उपाधि प्रदान की गई।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रमेन डेका ने इन उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्र जीवन का एक बहुत बड़ा अवसर होता है। यह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नही बल्कि भविष्य की शुरूआत का प्रतीक है। जब यह विश्वविद्यालय स्थापित हुआ था तब यहां केवल दो या तीन स्ट्रीम ही उपलब्ध थी। लेकिन समय के साथ शिक्षा और अवसरों का विस्तार हुआ है। 

राज्यपाल डेका ने कहा कि आज कृषि परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। अब यह विज्ञान तकनीकी, नवाचार और उद्यमिता से संचालित हो रही है। विश्वभर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, उपग्रह मानचित्र, सटीक कृषि जलवायु अनुकूल तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग बढ़ रहा है। 

भारत भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है। ड्रोन द्वारा उर्वरक एवं कीटनाशक छिड़काव, डिजिटल उपकरणों से मृदा स्वास्थ्य निगरानी, मोबाइल ऐप द्वारा किसान परामर्श और ई-नाम बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं। किसानों और युवाओं को भी आधुनिक और उन्नत खेती की ओर बढ़ना चाहिए। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। लेकिन अब हमें बासमती जैसे उच्च गुणवत्ता वाले धान के उत्पादन पर भी ध्यान देना चाहिए। इससे कार्पोरेट कंपनियों द्वारा खरीद आसान होगी और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा। हाइड्रोपोनिक्स और प्राकृतिक खेती के लिए भी भविष्य में बड़ी संभावनाएं है। विद्यार्थियों को भी कृषि के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।  

 राज्यपाल डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि और जल संरचना कृषि के लिए अनुकूल है। यहां पानी आसानी से नीचे नहीं जाता जिससे उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। सही तकनीक और सोच के साथ कृषि को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय ने कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है तथा वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नई फसल किस्मों और आधुनिक तकनीकों से किसानों को बड़ा लाभ मिल रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन,फल-सब्जी और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों से 3100 रूपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि उपकरणों की उपलब्धता तथा मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से ड्रोन, एआई और डिजिटल तकनीकों को खेती से जोड़कर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सेतु बनने का आव्हान किया।कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि प्रदेश में कृषि को बढ़ावा देने के लिए अनेक नवाचार किए जा रहे है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान की सबसे ज्यादा प्रजातियां है। सुगन्धित धान के लिए हमारा राज्य जाना जाता है। फल, फूल और मसाले की भी अपार संभावनाएं यहां है। उन्होंने विद्यार्थियों से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के ज्ञान का लाभ छत्तीसगढ़ को मिलेगा।

समारोह में दीक्षांत भाषण डॉ. अशोक कुमार सिंह ने दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने दीक्षांत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया उन्होंने विश्वविद्यालय की गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। साथ ही उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को दीक्षा उपदेश दिया। आभार प्रदर्शन कुलसचिव द्वारा किया गया। दीक्षांत समारोह में क्षेत्र के विधायक पद्मश्री अनुज शर्मा, विभिन्न विश्वविद्यालय के कुलपति, विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल, विद्या परिषद तथा प्रशासनिक परिषद के सदस्यगण, प्राध्यापक, वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के अधिकारी, उपाधि तथा पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी तथा उनके पालकगण उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वारंगल में देश के पहले कार्यशील पीएम मित्र पार्क का किया उद्घाटन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने आज  पीएम मित्र पार्क का उद्घाटन किया। यह भारत के औद्योगिक और वस्त्र क्षेत्र के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। लगभग 1695.54 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह देश का पहला कार्यशील  पीएम मित्र पार्क है, जो भारत सरकार के 5F विज़न — “Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign” — को साकार करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि वारंगल का  पीएम मित्र पार्क देश में टेक्सटाइल क्रांति को नई गति देगा तथा विशेष रूप से महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

यह पार्क प्रस्तावित नागपुर-विजयवाड़ा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (NH-163G) और राष्ट्रीय राजमार्ग-163 के निकट स्थित है, जिससे रेलवे नेटवर्क और बंदरगाहों तक बेहतर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इससे वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी।

विश्वस्तरीय औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित इस पार्क में अत्याधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया गया है, जिसमें विस्तृत आंतरिक सड़क नेटवर्क, समर्पित विद्युत उपकेंद्र और सुनिश्चित जलापूर्ति शामिल हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यहां शून्य तरल अपशिष्ट प्रणाली तकनीक से युक्त Common Effluent Treatment Plant (CETP) भी स्थापित किया गया है।

1,327 एकड़ क्षेत्र में फैला यह पार्क भारत के वस्त्र उद्योग के विकास का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। यहां 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावना है और अब तक 62 प्रतिशत क्षेत्र आवंटित किया जा चुका है। इस परियोजना से लगभग 24,400 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है, जबकि हजारों लोगों को पहले ही रोजगार मिल चुका है।

भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय ने मार्च 2023 में तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश में सात PM MITRA पार्क स्थापित करने को मंजूरी दी थी, ताकि देश में टेक्सटाइल अधोसंरचना को मजबूत किया जा सके।

तेलंगाना सरकार ने मार्च 2022 में वारंगल स्थित काकतिया मेगा टेक्सटाइल पार्क को PM MITRA योजना के तहत चयनित करने का प्रस्ताव दिया था। योजना के तहत इसे 200 करोड़ रुपये की विकास सहायता और 300 करोड़ रुपये की प्रतिस्पर्धात्मक प्रोत्साहन सहायता (सीआईएस) प्रदान की गई।

पीएम मित्र पार्क, वारंगल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में शून्य तरल अपशिष्ट प्रणाली आधारित CETP उन्नयन, कॉमन बॉयलर सुविधा, श्रमिक छात्रावास विस्तार तथा 10 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र जैसी आधुनिक सुविधाओं को शामिल किया गया है।

पार्क में उद्योगों के लिए आवंटित कुल 548 एकड़ भूमि में से 310 एकड़ भूमि  पीएम मित्र पार्क योजना की घोषणा के बाद आवंटित की गई है। यहां स्थापित उद्योगों को विश्वस्तरीय टेक्सटाइल अधोसंरचना के साथ-साथ पीएम मित्र पार्क योजना के तहत प्रतिस्पर्धात्मक प्रोत्साहन सहायता भी मिलेगी।

पार्क में स्थापित इकाइयों को केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं का भी लाभ मिलेगा। विशेष रूप से टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए लागू PLI योजना के तहत निवेश आकर्षित किया जा रहा है। इसी क्रम में एवरटॉप टेक्सटाइल एंड अपैरल कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड भी PLI योजना की लाभार्थी कंपनी है, जो लगभग 1051 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और करीब 12,800 लोगों को रोजगार प्रदान करेगी। कंपनी का अनुमानित वार्षिक कारोबार 1990 करोड़ रुपये रहने की संभावना है।

पीएम मित्र पार्क योजना केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता, आधुनिक साझा अधोसंरचना, निवेशकों के विश्वास और राष्ट्रीय टेक्सटाइल रणनीति के साथ एकीकृत विकास मॉडल के माध्यम से भारत को वैश्विक टेक्सटाइल हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कोयला गैसीफिकेशन मिशन में बड़ी उपलब्धि

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कोयला मंत्रालय ने भारत के कोयला गैसीफिकेशन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ₹8,500 करोड़ की वित्तीय प्रोत्साहन योजना (Financial Incentive Scheme) के तहत राउंड-II की कैटेगरी-III में लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) जारी किया गया है।

इस अवसर पर  संजय कुमार झा अतिरिक्त सचिव (कोयला मंत्रालय) ने कार्तिकेय वायुनंदना प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र के गडचिरोली में कोल-टू-एसेटिक एसिड प्लांट स्थापित करने के लिए LoA सौंपा।

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:

  • 💰 कुल निवेश: ₹793 करोड़

  • 🏭 उत्पादन: एसेटिक एसिड

  • ⚙️ क्षमता: 75,900 टन प्रति वर्ष (TPA)

  • 📍 स्थान: गडचिरोली, महाराष्ट्र

यह परियोजना घरेलू कोयले के वैल्यू-एडेड उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

योजना की प्रगति

  • पहले राउंड में 7 परियोजनाएं पहले से कार्यान्वयन में हैं।

  • राउंड-II के तहत कैटेगरी-II और III में निवेश को बढ़ावा देने के लिए RFP आमंत्रित किए गए हैं।

कैटेगरी-III के तहत:

  • प्रति प्रोजेक्ट ₹100 करोड़ तक या

  • कुल लागत (Capex) का 15% (जो कम हो) तक वित्तीय सहायता दी जाती है।

क्या होगा फायदा?

  • घरेलू केमिकल उत्पादन को बढ़ावा

  • आयात पर निर्भरता में कमी

  • आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

  • स्वच्छ और कुशल कोयला उपयोग से टिकाऊ औद्योगिक विकास

यह पहल भारत में सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने और कोयले के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से जापान के प्रतिनिधिमंडल की सौजन्य मुलाकात: निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार को लेकर हुई विस्तृत चर्चा

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। 

मुख्यमंत्री साय ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विकास और तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की। 

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर अपने जापान प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार की उद्योगोन्मुखी और निवेश प्रोत्साहनकारी नीतियों के कारण छत्तीसगढ़ वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जापान तकनीकी दृष्टि से अग्रणी देश है और वहां की उन्नत विशेषज्ञता का लाभ छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के निवेश और सहयोग से प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

जापान से आए प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ सरकार की नई औद्योगिक नीति की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल और पारदर्शी वातावरण तैयार हुआ है, जिससे उद्योगों के विस्तार के लिए बेहतर संभावनाएं उपलब्ध हो रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में अपने निवेश को और बढ़ाने की इच्छा भी व्यक्त की।

इस अवसर पर विधायक अनुज शर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, एफसेनल के डायरेक्टर युकीहिरो मोमोसे, कोनोइके ट्रांसपोर्ट के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर तोशीहीरो फूजीवारा, एफएसएनएल के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील कुमार दीक्षित तथा हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड के पूर्व सीएमडी के. डी. दीवान उपस्थित थे।

वित्त वर्ष 2025–26 में कोयला क्षेत्र ने रचा इतिहास, उत्पादन 200 मिलियन टन के पार

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 भारत के कोयला क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ है। इस दौरान कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से संयुक्त उत्पादन और आपूर्ति पहली बार 200 मिलियन टन (MT) के आंकड़े को पार कर गई है।

31 मार्च 2026 तक इन खदानों से कुल कोयला उत्पादन 210.46 मिलियन टन दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 190.95 मिलियन टन की तुलना में 10.22% अधिक है। वहीं, डिस्पैच (आपूर्ति) भी बढ़कर 204.61 मिलियन टन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 190.42 मिलियन टन के मुकाबले 7.35% की वृद्धि दर्शाता है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • 200 MT का ऐतिहासिक आंकड़ा पार: पहली बार उत्पादन और डिस्पैच 200 मिलियन टन से अधिक हुआ।

  • नई खदानों की शुरुआत: इस वर्ष 12 नई कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों को संचालन की अनुमति (MOP) मिली, जिससे 86 मिलियन टन वार्षिक क्षमता बढ़ी।

  • तेज उत्पादन शुरुआत: 7 खदानों ने उसी वित्त वर्ष में उत्पादन शुरू किया, जो तेज निष्पादन और बेहतर समन्वय को दर्शाता है।

पिछले चार वर्षों के आंकड़ों से उत्पादन और आपूर्ति में लगातार वृद्धि का रुझान देखने को मिला है, जो बेहतर लॉजिस्टिक्स और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को दर्शाता है।

यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की नीतियों, आसान अनुमोदन प्रक्रिया और क्षेत्र में सुधारों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह प्रगति ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में अहम योगदान देगी। आने वाले समय में दक्षता, विस्तार और जिम्मेदार खनन पर जोर देते हुए यह क्षेत्र देश की औद्योगिक और आर्थिक वृद्धि को गति देता रहेगा।

बजट 2026-27 में SEZ को बढ़ावा, घरेलू बिक्री पर रियायती शुल्क की बड़ी राहत

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने यूनियन बजट 2026-27 में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs) को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके तहत पात्र SEZ निर्माण इकाइयों को घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) में सीमित मात्रा में उत्पादों की बिक्री रियायती शुल्क दरों पर करने की अनुमति दी जाएगी।

मुख्य बिंदु

  • SEZ इकाइयों को अब बिना पूरी कस्टम ड्यूटी के बोझ के देश में बिक्री की सुविधा

  • बिक्री की मात्रा निर्यात के अनुपात तक सीमित होगी

  • देश में कुल 368 SEZ (फरवरी 2026 तक)

  • 2025-26 में SEZ निर्यात 11.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक (32% वृद्धि)

SEZ क्या हैं?

SEZ (Special Economic Zones) ऐसे विशेष क्षेत्र होते हैं जो:

  • ड्यूटी-फ्री एरिया होते हैं

  • निर्यात बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने के लिए बनाए जाते हैं

  • यहां उद्योगों को टैक्स छूट, आसान नियम और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलता है

सरकार का नया कदम क्यों अहम है?

  • उद्योगों को अधिक उत्पादन और बेहतर उपयोग (capacity utilisation) का मौका

  • निर्यात लागत में कमी

  • वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा

  • घरेलू बाजार में भी सीमित अवसर

SEZ का प्रदर्शन

  • 31.73 लाख से अधिक रोजगार (दिसंबर 2025 तक)

  • कुल निवेश: ₹7.86 लाख करोड़

  • निर्यात में लगातार वृद्धि

अन्य प्रमुख सुधार

  • सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए विशेष SEZ (गुजरात, कर्नाटक)

  • सिंगल विंडो क्लीयरेंस

  • ड्यूटी-फ्री आयात और जीएसटी में छूट

  • बेहतर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

 सरकार का यह कदम SEZ को भारत के आर्थिक विकास, निर्यात वृद्धि और निवेश आकर्षण का मजबूत आधार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


DPIIT और NPC द्वारा हैदराबाद में ‘बॉयलर चिंतन शिविर’ का आयोजन

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उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) के सहयोग से हैदराबाद में “बॉयलर पर चिंतन शिविर” का आयोजन किया।

इस चिंतन शिविर का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, नीतियों के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और “विजन 2047” जैसे दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप रणनीतियों को समन्वित करना था। चर्चा का मुख्य फोकस बॉयलर उद्योग के लिए एक रोडमैप तैयार करना था, जिसमें उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों को शामिल किया गया।

उच्चस्तरीय सहभागिता

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की महानिदेशक नीरजा शेखर,DPIIT के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे,और तकनीकी सलाहकार (बॉयलर) एवं सचिव, केंद्रीय बॉयलर बोर्ड, संदीप सदानंद कुंभार शामिल हुए।

इसके अलावा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, बॉयलर निर्माता, बॉयलर उपयोगकर्ता, थर्ड पार्टी निरीक्षण प्राधिकरण (TPIA) और अन्य हितधारक भी चर्चा में शामिल हुए।

Boilers Act, 2025 पर चर्चा

प्रतिभागियों को बताया गया कि बॉयलर अधिनियम, 1923 (संविधान से पूर्व का कानून) की वर्तमान प्रासंगिकता की समीक्षा की गई थी। चूंकि यह कानून जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे बनाए रखने का निर्णय लिया गया, लेकिन इसके प्रावधानों को अद्यतन किया गया।

इसके परिणामस्वरूप कानून को Boilers Act, 2025 के रूप में पुनः अधिनियमित किया गया, जो 1 मई 2025 से लागू है।चिंतन शिविर का उद्देश्य इस नए कानून पर फीडबैक लेना और नियामक ढांचे को मजबूत बनाने के सुझाव आमंत्रित करना था।

तकनीकी सत्र और उद्योग विषय

तकनीकी सत्रों में निम्न विषयों पर चर्चा हुई:

  • Boilers Act, 2025 और इसके नियम व विनियम

  • ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार सुगमता)

  • थर्ड पार्टी निरीक्षण प्राधिकरण और सक्षम व्यक्तियों की भूमिका

  • पुराने बॉयलरों की शेष जीवन अवधि का आकलन

  • बॉयलर निर्माण में उन्नत तकनीक

  • सुपरक्रिटिकल बॉयलरों की स्थापना में आने वाली चुनौतियाँ

खुली चर्चा और सुझाव

कार्यक्रम का समापन पैनल चर्चा और ओपन हाउस संवाद के साथ हुआ, जिसमें हितधारकों से नियमों को सरल बनाने, अनुपालन बोझ कम करने और व्यापार सुगमता बढ़ाने के सुझाव मांगे गए, जबकि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न करने पर जोर दिया गया।


भारत का विनिर्माण क्षेत्र: 2026-27 बजट के साथ नई औद्योगिक क्रांति

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प्रमुख निष्कर्ष (Key Takeaways)

  • FY 2025-26 की पहली तिमाही में विनिर्माण GVA वृद्धि 7.72% और दूसरी तिमाही में 9.13% रही।

  • मध्यम और उच्च तकनीक उद्योग भारत के विनिर्माण मूल्य का 46.3% योगदान दे रहे हैं।

  • केंद्रीय बजट 2026-27 में सात रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण विस्तार पर जोर।

  • समुद्री खाद्य, माइक्रोवेव ओवन, फुटवियर और विमान निर्माण जैसे क्षेत्रों में कस्टम ड्यूटी छूट।

  • MSME को मजबूत करने के लिए ₹10,000 करोड़ SME ग्रोथ फंड और ₹2,000 करोड़ आत्मनिर्भर भारत फंड टॉप-अप।

परिचय (Introduction)

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में धीमी वृद्धि के बावजूद, भारत ने मजबूत घरेलू नीतियों और आर्थिक आधार के कारण बेहतर प्रदर्शन किया।

विनिर्माण क्षेत्र भारत के 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का मुख्य आधार है। बजट 2026-27 ने निवेश, नवाचार, बुनियादी ढाँचा और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए नए उपाय किए हैं।

भारत के विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन

औद्योगिक और विनिर्माण गतिविधियों में तेजी

  • FY 2025-26 के पहले आधे हिस्से में औद्योगिक GVA 7% बढ़ा।

  • दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन 7.8% बढ़ा, जो दो वर्षों में सबसे अधिक था।

  • विनिर्माण क्षेत्र में 8.1% वृद्धि हुई।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर वाहन और परिवहन उपकरणों में तेज वृद्धि दर्ज की गई।

व्यापारिक विश्वास और मांग

  • PMI जनवरी 2026 में 55.4 रहा (50 से ऊपर वृद्धि दर्शाता है)।

  • RBI सर्वे के अनुसार, उद्योगों को मांग बढ़ने और लागत कम होने की उम्मीद है।

 मुख्य उद्योगों की भूमिका

  • सीमेंट: FY25 में उत्पादन ~453 मिलियन टन

  • स्टील: कच्चा स्टील उत्पादन 11.7% बढ़ा

  • कोयला: उत्पादन 1,047.52 मिलियन टन

  • रसायन एवं पेट्रोकेमिकल: 58,617 हजार टन उत्पादन

वैश्विक विनिर्माण में भारत की स्थिति

  • मध्यम और उच्च तकनीक उद्योगों का योगदान 46.3%

  • औद्योगिक प्रतिस्पर्धा सूचकांक (CIP) में भारत की रैंक 37वीं

  • FY26 में निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा (USD 634.3 बिलियन)

 MSME की भूमिका

  • विनिर्माण उत्पादन में योगदान: 35.4%

  • निर्यात में योगदान: 48.58%

  • GDP में योगदान: 31.1%

  • रोजगार: 32.82 करोड़ लोग

बजट 2026-27: विनिर्माण को बढ़ावा देने की पहल

रणनीतिक और उभरते क्षेत्र

  • 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों का पुनर्विकास

  • Biopharma SHAKTI योजना (₹10,000 करोड़)

  • सेमीकंडक्टर मिशन 2.0

  • रासायनिक पार्क

  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट योजना (₹40,000 करोड़)

  • दुर्लभ पृथ्वी खनिज कॉरिडोर

  • खेल उपकरण निर्माण योजना

  • कंटेनर निर्माण योजना (₹10,000 करोड़)

  • टेक्सटाइल मिशन और मेगा टेक्सटाइल पार्क

  • MSME के लिए SME ग्रोथ फंड

कर और सीमा शुल्क सुधार

  • कई क्षेत्रों में बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट

  • निर्यात के लिए इनपुट आयात सीमा बढ़ाई गई

  • भरोसेमंद निर्माताओं के लिए ड्यूटी भुगतान में सुविधा

  • विमान और रक्षा क्षेत्र के लिए कच्चे माल पर ड्यूटी छूट

सरकारी योजनाएँ और निवेश

PLI योजना

  • इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटो में निवेश बढ़ा

  • मोबाइल फोन निर्माण में भारत वैश्विक केंद्र बना

 राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन

  • GDP में विनिर्माण का हिस्सा 25% करने का लक्ष्य

  • 143 मिलियन रोजगार सृजन लक्ष्य

  • निर्यात लक्ष्य USD 1.2 ट्रिलियन

निवेश और नवाचार

  • FY26 में GFCF का हिस्सा 30%

  • सरकारी पूंजीगत खर्च ₹3.07 लाख करोड़ से ₹11.21 लाख करोड़

  • निजी निवेश ₹14.6 लाख करोड़

  • ₹1 लाख करोड़ RDI फंड

  • 2 लाख से अधिक स्टार्टअप

नवाचार और वैश्विक रैंकिंग

  • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंक 66 से 38

  • पेटेंट, ट्रेडमार्क और डिजाइन में शीर्ष रैंकिंग

  • AI, क्वांटम, बायोटेक, रक्षा और ऊर्जा में अग्रणी शोध

बुनियादी ढाँचा सुधार

  • PM GatiShakti और National Logistics Policy

  • औद्योगिक कॉरिडोर और स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी

  • बेहतर लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत का विनिर्माण क्षेत्र एक नए विस्तार चरण में प्रवेश कर चुका है।
आत्मनिर्भर भारत और 2047 के आर्थिक लक्ष्य के लिए विनिर्माण प्रमुख इंजन बन रहा है।
सरकार की नीतियाँ, निवेश, नवाचार और बुनियादी ढाँचा सुधार भारत को वैश्विक औद्योगिक शक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।


भिलाई स्टील प्लांट और लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट को प्रगति प्लेटफॉर्म से नई गति: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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छत्तीसगढ़ में भिलाई इस्पात संयंत्र आधुनिकीकरण और लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मिली नई गति : प्रगति प्लेटफार्म बना गेमचेंजर

दशकों से लंबित परियोजनाएँ अब समयबद्ध रूप से हो रही पूरी : प्रगति प्लेटफ़ॉर्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की गति नई ऊँचाइयों पर पहुँची है। दशकों से लंबित महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं ऊर्जा परियोजनाएँ अब “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से समयबद्ध ढंग से पूरी हो रही हैं। यह केंद्र सरकार की परिणामोन्मुख, जवाबदेह तथा निर्णायक कार्यशैली का सशक्त प्रमाण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से न केवल देश में रेल उत्पादन को नई गति मिली है, बल्कि इससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हुए हैं। इससे आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती मिली है और औद्योगिक विकास को नई दिशा प्राप्त हुई है।

इसी प्रकार एनटीपीसी की लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना (1600 मेगावाट) से छत्तीसगढ़ सहित छह राज्यों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है तथा औद्योगिक और कृषि गतिविधियों को नई ऊर्जा प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “प्रगति” प्लेटफ़ॉर्म ने परियोजनाओं की निगरानी, निरंतर समीक्षा और बाधाओं के त्वरित समाधान की एक सशक्त प्रणाली विकसित की है। स्पष्ट लक्ष्य, तेज़ क्रियान्वयन और ठोस परिणाम—यही नए भारत की कार्यसंस्कृति है और यही “विकसित भारत @ 2047” के लक्ष्य को साकार करने का मार्ग है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित प्रगति (PRAGATI) की 50वीं बैठक ने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को भी नई गति प्रदान की है। प्रगति सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए विकसित एक आईसीटी आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसने परियोजनाओं की निगरानी और समाधान की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया है। पिछले दशक में प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की परियोजनाओं की रफ्तार तेज हुई है। इससे देशभर में अवसंरचना, ऊर्जा, रेल, सड़क, कोयला और अन्य क्षेत्रों से जुड़े अनेक कार्यों को समयबद्ध प्रगति मिली है। इन परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ से संबंधित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएँ भी शामिल हैं।

बैठक में भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण और विस्तार कार्य का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इस परियोजना को वर्ष 2007 में स्वीकृति मिली थी। प्रगति बैठकों में नियमित समीक्षा और अंतर-एजेंसी समन्वय के कारण इस परियोजना को नई गति मिली, जिसके परिणामस्वरूप इसका कार्य तेज़ी से आगे बढ़ा और लक्षित प्रगति सुनिश्चित हुई।

भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन, सहायक उद्योगों के विस्तार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्राप्त हुई है। इससे राज्य को देश के प्रमुख इस्पात उत्पादन केंद्र के रूप में और अधिक मजबूती मिली है।

इसी प्रकार रायगढ़ में वर्ष 2009 में स्वीकृत लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना  की प्रगति प्लेटफॉर्म के अंतर्गत उच्च स्तरीय समीक्षाओं, समय-समय पर दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देशों और निरंतर मॉनिटरिंग से तेज गति मिली और इसके क्रियान्वयन में ठोस प्रगति दर्ज की गई।

आज लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाली प्रमुख परियोजनाओं में से एक बन चुकी है। इस परियोजना ने न केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को “पावर हब ऑफ इंडिया” के रूप में और अधिक मजबूत किया है। इससे राज्य और देश दोनों के ऊर्जा तंत्र को नई स्थिरता प्राप्त हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह रेखांकित किया कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने सहयोगी संघवाद को नई शक्ति दी है और केंद्र तथा राज्यों के संयुक्त प्रयासों से विकास कार्यों में गति और विश्वास दोनों बढ़ा है। प्रगति से तेज़ होती छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रगति की 50वीं बैठक को देश और छत्तीसगढ़ के लिए दूरगामी महत्व का बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास परियोजनाओं को समयबद्ध रूप से पूरा करने की जो व्यवस्था स्थापित की गई है, उसका सीधा लाभ छत्तीसगढ़ को भी मिला है। उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र के आधुनिकीकरण तथा लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना जैसी बड़ी परियोजनाओं को नई गति मिलना इस बात का प्रमाण है कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने वास्तविक अर्थों में समाधान-उन्मुख शासन का मॉडल प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश के औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षमता, निवेश, रोज़गार और सहायक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रगति के माध्यम से परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित होने से छत्तीसगढ़ विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य में अपनी निर्णायक भूमिका और मजबूती के साथ निभाता रहेगा।

नामरूप में चौथे उर्वरक संयंत्र की आधारशिला से पहले केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने तैयारियों की समीक्षा की

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 नई दिल्ली — केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री (MoPSW) सर्बानंद सोनोवाल ने आज असम के डिब्रूगढ़ जिले स्थित नामरूप उर्वरक परिसर का दौरा किया। उन्होंने 21 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित यात्रा से पहले जमीनी तैयारियों की समीक्षा की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नामरूप में चौथे उर्वरक संयंत्र की आधारशिला रखेंगे।

नया ब्राउनफील्ड अमोनिया-यूरिया संयंत्र ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइज़र कॉरपोरेशन लिमिटेड (BVFCL) के मौजूदा परिसर में स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना पर ₹10,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया जाएगा। इसे असम के औद्योगिक आधार को सशक्त बनाने और पूर्वोत्तर तथा पूर्वी भारत में उर्वरक उपलब्धता सुधारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

दौरे के दौरान सोनोवाल ने लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं, सुरक्षा तैयारियों और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से जुड़ी समग्र तैयारियों का आकलन किया। उन्होंने प्रारंभिक कार्यों की प्रगति की भी समीक्षा की और अधिकारियों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि आधारशिला कार्यक्रम की सभी तैयारियां समयबद्ध और सुचारु रूप से पूरी हों।

सोनोवाल ने कहा, “यह परियोजना असम के लोगों की एक लंबे समय से चली आ रही आकांक्षा की पूर्ति है।” उन्होंने उल्लेख किया कि नामरूप में चौथे उर्वरक संयंत्र की मांग दशकों से की जा रही थी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा इस परियोजना को स्वीकृति देना पूर्वोत्तर के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता और भारत की कृषि एवं औद्योगिक पारिस्थितिकी को मजबूत करने के संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी और निर्णायक नेतृत्व में असम के लोगों की दशकों पुरानी मांग आज पूरी हुई है। नामरूप का चौथा उर्वरक संयंत्र पूर्वोत्तर के प्रति प्रधानमंत्री की गहरी प्रतिबद्धता और भारत की कृषि एवं औद्योगिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने के उनके संकल्प का प्रतीक है।”

परियोजना के चालू होने के बाद, यह नया उर्वरक संयंत्र पूर्वोत्तर क्षेत्र में यूरिया और संबंधित उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला को काफी मजबूत करेगा, दूर-दराज के उत्पादन केंद्रों पर निर्भरता कम करेगा और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद करेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 12.5 लाख मीट्रिक टन होगी और इससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

सोनोवाल ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में असम और पूरे पूर्वोत्तर में हो रहे व्यापक विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने संपर्क, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षमता में किए गए बड़े निवेशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के युवाओं, किसानों और श्रमिकों के लिए नए अवसर सृजित हुए हैं।

निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री के साथ वरिष्ठ राज्य मंत्री, स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन के अधिकारी और विभिन्न नागरिक एवं विकास संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि प्रधानमंत्री की यात्रा और आधारशिला कार्यक्रम का सफल आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।

सोनोवाल ने कहा, “21 दिसंबर को प्रधानमंत्री की नामरूप यात्रा असम के लिए गर्व का क्षण है। हम पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं ताकि आधारशिला कार्यक्रम त्रुटिरहित रूप से संपन्न हो और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवर्तनकारी विकास एजेंडे तथा पूर्वोत्तर पर उनके विशेष फोकस को प्रतिबिंबित करे।”

नामरूप परियोजना से असम के औद्योगिक विकास में एक नया अध्याय शुरू होने, पूर्वोत्तर में उर्वरक सुरक्षा को मजबूती मिलने और कृषि उत्पादकता तथा किसानों की आय बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति मिलने की उम्मीद है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री के साथ असम सरकार के मंत्री प्रशांत फुकन और जोगेन मोहन; विधायक तरंगा गोगोई, बिनोद हजारिका, चक्रधर गोगोई, तेराश गोवाला, भास्कर शर्मा और धर्मेश्वर कोनवार; असम पर्यटन विकास निगम (ATDC) के अध्यक्ष ऋतुपर्णा बरुआह; डिब्रूगढ़ नगर निगम (DMC) के मेयर सैकत पात्रा और उप-मेयर उज्ज्वल फुकन; डिब्रूगढ़ विकास प्राधिकरण (DDA) के अध्यक्ष असीम हजारिका; सोनवाल कचारी स्वायत्त परिषद (SKAC) के मुख्य कार्यकारी सदस्य टंकश्वर सोनोवाल; तथा डिप्टी कमिश्नर विक्रम कैरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

सरकार ने कोयला उपयोग में पारदर्शिता व दक्षता बढ़ाने हेतु CoalSETU नीति को मंजूरी दी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की केंद्रीय मंत्रिमंडल समिति (CCEA) ने आज CoalSETU (Seamless, Efficient & Transparent Utilisation) नीति के तहत कोयला लिंकज की नीलामी की मंजूरी दे दी है। इसके लिए NRS (गैर-नियामित क्षेत्र) लिंकज नीति में “CoalSETU विंडो” नामक एक नया प्रावधान जोड़ा जाएगा। इस नई नीति का उद्देश्य किसी भी औद्योगिक उपयोग और निर्यात के लिए कोयले के पारदर्शी और कुशल उपयोग को बढ़ावा देना है। यह नीति कोयला क्षेत्र में सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों की श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नीति की मुख्य विशेषताएँ

  • नई नीति के तहत NRS लिंकज नीति 2016 में CoalSETU विंडो जोड़ी जाएगी।

  • इस विंडो के माध्यम से किसी भी घरेलू खरीदार को कोयला लिंकज की दीर्घकालिक नीलामी में भाग लेने की अनुमति होगी।

  • इस विंडो में कोकिंग कोयला की पेशकश नहीं की जाएगी।

  • ट्रेडर्स को इस नई विंडो में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।

मौजूदा नीति की तुलना में बड़ा बदलाव

वर्तमान NRS लिंकज नीति केवल सीमित उद्योगों—सीमेंट, स्टील (कोकिंग), स्पंज आयरन, एल्युमिनियम आदि—तक सीमित थी। इन्हें केवल नियत एंड-यूज़ के लिए ही कोयला मिलता था।
लेकिन अब बदलते बाज़ार परिदृश्य और Ease of Doing Business को ध्यान में रखते हुए:

  • कोयला लिंकज को बिना किसी एंड-यूज़ प्रतिबंध के उपलब्ध कराया जाएगा,

  • जिससे घरेलू उद्योगों को कोयला उपलब्धता बढ़ेगी,

  • आयातित कोयले पर निर्भरता कम होगी,

  • और देश के कोयला भंडार का तेज उपयोग संभव होगा।

यह संशोधन उन सुधारों के अनुरूप है, जिनके तहत वाणिज्यिक खनन के लिए भी एंड-यूज़ प्रतिबंध हटाए गए थे।

नई विंडो की विशेष शर्तें

  • कोयला लिंकज का उपयोग स्वयं की खपत, निर्यात (50% तक) या कोयला धुलाई (वॉशिंग) के लिए किया जा सकेगा।

  • कोयले की देश के भीतर पुनर्विक्रय (resale) की अनुमति नहीं होगी।

  • लिंकज धारक अपनी समूह कंपनियों के बीच कोयले का लचीला उपयोग कर सकेंगे।

  • वाशरी ऑपरेटरों को लिंकज देने से भविष्य में धोया हुआ कोयला (washed coal) अधिक उपलब्ध होगा, जिससे आयात कम होंगे।

  • धोया हुआ कोयला विदेशों में भी निर्यात किया जा सकेगा।

NRS की मौजूदा नीलामी जारी रहेगी

निर्दिष्ट उद्योगों (सीमेंट, स्टील आदि) के लिए मौजूदा कोयला लिंकज नीलामी जारी रहेगी।
वे उद्योग भी चाहें तो CoalSETU विंडो में भाग ले सकते हैं।


एनएमडीसी स्टील लिमिटेड ने नवंबर 2025 में दर्ज किया अब तक का सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन

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एनएमडीसी स्टील लिमिटेड (NSL), भारत का सबसे नया एकीकृत इस्पात संयंत्र, ने नवंबर 2025 को अपने मूल्य शृंखला के सभी क्षेत्रों में असाधारण परिचालन उपलब्धियों के साथ समाप्त किया है। प्रक्रिया स्थिरता, परिचालन उत्कृष्टता और क्षमता उपयोग में निरंतर वृद्धि प्रदर्शित करते हुए, एनएसएल ने कई प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ मासिक प्रदर्शन दर्ज किया है।

नवंबर महीने में रॉ मैटेरियल हैंडलिंग सिस्टम (RMHS) ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं, जिसमें 21 नवंबर 2025 को एक दिन में सर्वाधिक 616 वैगन टिपल किए गए। संयंत्र ने 5,18,886 टन बेस मिक्स का सबसे अधिक मासिक उत्पादन भी प्राप्त किया।

सिंटर प्लांट ने भी निरंतर बेहतर प्रदर्शन किया, जहाँ 30 नवंबर 2025 को एक दिन में सर्वाधिक 15,590 टन और महीने भर में 4,14,271 टन सिंटर उत्पादन दर्ज किया गया, जो 105% से अधिक क्षमता उपयोग को दर्शाता है।

ब्लास्ट फर्नेस ने उत्कृष्ट दक्षता का प्रदर्शन किया, जहाँ 28 नवंबर 2025 को 11,315 टन हॉट मेटल का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, जो 119% क्षमता उपयोग है। मासिक उत्पादन 2,80,049 टन रहा, जो 101% क्षमता उपयोग से अधिक है। उल्लेखनीय रूप से, एनएसएल ने सिर्फ सिंटर और अयस्क का उपयोग करते हुए प्रति टन हॉट मेटल पर 519 किलोग्राम का अब तक का सबसे कम मासिक औसत फ्यूल रेट प्राप्त किया, जो देश में सर्वोत्तम में से एक है। इसके साथ ही, 164 किलोग्राम प्रति टन का सर्वाधिक मासिक औसत PCI रेट भी हासिल किया गया।

स्टील मेल्टिंग शॉप और थिन स्लैब कास्टर–हॉट स्ट्रिप मिल्स ने अब तक का सर्वोत्तम प्रदर्शन दिया। एनएसएल ने 2,03,356 टन एचआर कॉइल, 2,09,445 टन क्रूड स्टील, और 2,15,010 टन लिक्विड स्टील का सर्वाधिक मासिक उत्पादन दर्ज किया, जिसमें 84%, 85% और 86% से अधिक क्षमता उपयोग शामिल है। संयंत्र ने 4,799 हीट्स के साथ सर्वश्रेष्ठ कन्वर्टर लाइनिंग लाइफ का भी नया रिकॉर्ड बनाया। दो नए ग्रेड—IS 2062 E450BR और IS 2062 E350C—का सफलतापूर्वक वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू किया गया, जिससे निर्माण, अवसंरचना और हैवी इंजीनियरिंग क्षेत्रों के लिए कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार हुआ।

एनएसएल ने ऑक्सीजन प्लांट के संचालन का अनुकूलन करके लागत दक्षता को भी मजबूत किया, जिससे लगभग 1.9 करोड़ रुपये की बिजली लागत की बचत हुई। अन्य प्रमुख उपलब्धियों में ब्लास्ट फर्नेस (Pkg. 05) और टर्बो ब्लोअर (Pkg. 10A) के पीजी टेस्ट की सफलतापूर्ण पूर्ति और IS 2041:2024 और IS 2062 E450BR के लिए BIS लाइसेंस प्राप्त करना शामिल है।

इस उत्कृष्ट प्रदर्शन पर अमिताभ मुखर्जी, CMD ने कहा:

“यूनिटों में लगातार रिकॉर्ड उपलब्धियाँ हमारी टीम की निष्ठा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का प्रमाण हैं। जैसे-जैसे भारत वैश्विक इस्पात महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, एनएसएल तकनीक-आधारित दक्षता, विस्तृत उत्पाद पोर्टफोलियो और राष्ट्र-निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ भारत की इस्पात विकास यात्रा में योगदान देने के लिए तैयार है।’’


छत्तीसगढ़ देश का सबसे भरोसेमंद और तेज़ी से उभरता औद्योगिक गंतव्य- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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छत्तीसगढ़ को मिले 6800 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव, उद्योग और पर्यटन को मिलेगा बूस्ट 

दिल्ली में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में 3,000 से ज्यादा रोजगार का खुला रास्ता

नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व निवेश प्रस्ताव मिले। स्टील, ऊर्जा और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों ने राज्य में उद्योग स्थापित करने, क्षमता विस्तार, होटल निर्माण और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए रुचि दिखाई। कार्यक्रम में शामिल कंपनियों ने कुल 6321.25 करोड़ के औद्योगिक निवेश और 505 करोड़ का पर्यटन निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन परियोजनाओं से आगामी वर्षों में 3,000 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इस निवेश प्रस्ताव के साथ अब तक छत्तीसगढ़ को कुल 7.90 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।

दिल्ली स्थित होटल द ललित में आज आयोजित कार्यक्रम में स्टील और टूरिज़्म सेक्टर को केंद्र में रखते हुए नए निवेश अवसरों पर फोकस किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उद्योग जगत के प्रमुख निवेशकों, विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की एवं स्टील और टूरिज़्म सेक्टर की कई कंपनियों को निवेश प्रस्ताव पत्र सौंपे।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, भारत सरकार के केमिकल और उर्वरक मंत्रालय के सचिव अमित अग्रवाल, इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंडरिक भी उपस्थित रहे। 

मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों को निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ आज देश के सबसे भरोसेमंद, स्थिर और तेज़ी से उभरते हुए औद्योगिक गंतव्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य में ऊर्जा, खनिज, सक्षम मानव संसाधन और निवेशक-हितैषी नीति का ऐसा संयोजन मौजूद है, जो किसी भी उद्योग के लिए अत्यंत उपयुक्त वातावरण तैयार करता है।

उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अनुमतियाँ अब पहले की तुलना में अधिक तेज़ी और पारदर्शिता के साथ जारी हो रही हैं। छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाना आज पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, टिन, लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की उपस्थिति बड़े औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र के लिए वरदान है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित 'एनर्जी समिट' में राज्य को साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और कई परियोजनाओं में कार्य प्रारंभ भी हो चुका है।

मुख्यमंत्री साय ने स्टील सेक्टर का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ देश का स्टील हब है, जहां भिलाई स्टील प्लांट, नगरनार स्टील प्लांट और एमएसएमई आधारित स्टील इकाइयां राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूती प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा भिलाई स्टील प्लांट पिछले 70 वर्षों से देश की औद्योगिक प्रगति का स्तंभ रहा है और इसकी उपस्थिति ने स्टील आधारित उद्योगों का प्राकृतिक इकोसिस्टम तैयार किया है। ग्रीन स्टील और नवीकरणीय ऊर्जा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य राज्य के लिए नए अवसर लेकर आया है और छत्तीसगढ़ इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

टूरिज़्म सेक्टर पर बात करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर आज बहुत बदल रहा है। नक्सल हिंसा में कमी आई है, सड़कें, इंटरनेट और सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है। उन्होंने कहा कि बस्तर अब निवेश और पर्यटन दोनों का नया केंद्र बन रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि 26 मार्च 2026 तक बस्तर पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो जाए। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है और राज्य सरकार होम-स्टे नीति, ट्राइबल टूरिज्म व सस्टेनेबल टूरिज्म पर फोकस कर रही है। 

इस अवसर पर सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, पर्यटन विभाग के सचिव रोहित यादव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, संचालक प्रभात मलिक, सीएसआईडीसी के महाप्रबंधक विश्वेश कुमार, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के संचालक विवेक आचार्य, इन्वेस्टमेंट कमिश्नर ऋतु सेन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ को मिले प्रमुख निवेश प्रस्ताव

  1. ग्रीन एनर्जी इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने कचरे से बिजली उत्पादन करने वाले 50 मेगावॉट के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की स्थापना के लिए ₹3,769 करोड़ का निवेश प्रस्तावित किया है, जिससे 150 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ में कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
  2. आरती कोटेड स्टील द्वारा 315 करोड़ निवेश प्रस्ताव दिया गया है, एवं 550 रोजगार सृजन की संभावना है। 
  3. एसडीआरएम मेटैलिक्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्टील प्लांट एवं पावर यूनिट के लिए ₹195.75 करोड़ का निवेश प्रस्ताव दिया है, जिससे रोजगार 492 रोजगार सृजन की संभावना है। 
  4. आरएसएलडी बायोफ्यूल प्राइवेट लिमिटेड, चंडीगढ़ द्वारा इथेनॉल प्लांट हेतु ₹200 करोड़ का निवेश प्रस्ताव दिया है, एवं 213 रोजगार सृजन की संभावना है। 
  5. जे.के. लक्ष्मी सीमेंट, राजस्थान द्वारा क्षमता विस्तार हेतु 1816.5 करोड़ से अधिक निवेश प्रस्ताव, 110 रोजगार सृजन 
  6. अरमानी ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज़, रायपुर द्वारा मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माण हेतु ₹25 करोड़ का प्रस्ताव, जिससे 200 युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा।

पर्यटन क्षेत्र में मिले 505 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

  1. मार्स विवान प्राइवेट लिमिटेड, रायपुर द्वारा 217 कमरों वाले होटल के लिए ₹220 करोड़ निवेश इससे 522 लोगों को रोजगार प्राप्त होगी। 
  2. हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट, तेलंगाना द्वारा वेलनेस रिसॉर्ट एवं शिक्षा केंद्र हेतु ₹200 करोड़ निवेश
  3. विद्या इन, जशपुर द्वारा 52 कमरों के होटल हेतु ₹25 करोड़ निवेश
  4. पीएसए रिज़ॉर्ट, जगदलपुर द्वारा 150 कमरों के एडवेंचर होटल एवं रिसॉर्ट हेतु ₹60 करोड़ निवेश, जिससे बस्तर में पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। इससे 200 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

एपीएल अपोलो इंडस्ट्रीज ने छत्तीसगढ़ में 1200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव दिया, 100 बिस्तरों का चैरिटी अस्पताल भी बनाएगी कंपनी

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रायपुर- एपीएल अपोलो इंडस्ट्रीज ग्रुप के चेयरमैन संजय गुप्ता ने अपनी टीम के साथ आज नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाक़ात की। मुलाक़ात के दौरान कंपनी ने राज्य में लगभग ₹1200 करोड़ के औद्योगिक निवेश का बड़ा प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा।

कंपनी ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि वह छत्तीसगढ़ में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए औद्योगिक संयंत्रों की स्थापना पर गंभीरता से काम कर रही है। निवेश प्रस्ताव राज्य की नई औद्योगिक नीति और तेज़ी से विकसित हो रहे औद्योगिक बुनियादी ढांचे को देखते हुए पेश किया गया है।

बैठक में एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की घोषणा भी की गई। एपीएल अपोलो ग्रुप ने बताया कि वह छत्तीसगढ़ में 100 बिस्तरों का एक आधुनिक चैरिटी अस्पताल भी जल्द शुरू करेगा, जिससे आम जनता को किफ़ायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सकेंगी।

भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला: 14 नवंबर से दिल्ली में बिखरेगी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की छटा

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  • छत्तीसगढ़ में पर्यटन-संस्कृति के साथ उद्योगों-कृषि आधारित उद्योगों की संभावनाओं का होगा प्रदर्शन
  • वनोपज उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ मिलेट कैफे भी लगेगा

रायपुर-नईदिल्ली के भारत मण्डपम में 14 नवंबर से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की छटा बिखरेगी। यहां 27 नवंबर तक भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की थीम पर छत्तीसगढ़ का आकर्षक पवेलियन बनाया जा रहा है। इस मेले में देश के सभी राज्यों सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उद्योगपति और निवेशक भी आयेंगे। मेले में बने छत्तीसगढ़ पवेलियन में राज्य के औद्योगिक विकास की झलक दिखाई जायेगी। यहां छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था, उद्योगों के लिए व्यापक अनुकूल माहौल और व्यवस्थाऐं तथा नई औद्योगिक नीति के बारे में आगंतुकों को पूरी जानकरी दी जायेगी। इस मेले में राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में उपलब्ध निवेश प्रोत्साहन, सुक्ष्म लघु एवं मध्यम ईकाईयों की स्थापना, उनके उत्पादों से संबंधित जानकारियों का भी प्रदर्शन किया जायेगा। मेला अवधि में छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए निवेशेकों के साथ बैठकें, इन्वेस्टर कनेक्ट आदि भी किये जायेंगे।  


इस अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और पर्यटन की संभावना का भी प्रदर्शन किया जायेगा, ताकि संस्कृति और पर्यटन पर आधारित रोजगार मूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। मेले में बने पवेलियन में छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प, वनोपज उत्पादों, खादी ग्रामोद्योग क्षेत्र में उद्योग शुरू करने की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी जायेगी। पवेलियन में बस्तर क्षेत्र को फोकस करते हुए डिजिटल तकनीकों से सुसज्जित प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। 

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के दौरान 24 नवंबर को भारत मण्डपम दिल्ली में छत्तीसगढ़ दिवस भी मनाया जायेगा। शाम 6 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित मंत्रीमण्डल के सदस्य भी शामिल होंगे। यह आयोजन संस्कृति विभाग द्वारा किया जायेगा। छत्तीसगढ़ पवेलियन में हर दिन राज्य की सांस्कृतिक छटा का प्रदर्शन नृतक दलों के माध्यम से किया जायेगा।  यहां छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग हस्तकला, हथकरघा, चरखा आदि का जीवंत प्रदर्शन, उत्कृष्ट उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की भी व्यवस्था रहेगी।

छत्तीसगढ़ पवेलियन में मिलेट से संबंधी उत्पादों के प्रदर्शन के साथ-साथ मिलेट कैफे भी लगाया जायेगा। इससे लोगों को छत्तीसगढ़ में उगाये जाने वाले लघु धान्यों कोदो, कुटकी, रागी, संवा आदि के उत्पादन, उनके व्यवसाय के लिये आकर्षित किया जा सकेगा। इस मेले में छत्तीसगढ़ में उपलब्ध जैविक और एक्जॉटिक खाद्यन्नों का भी प्रदर्शन होगा, ताकि इन उत्पादकों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल सके। लघु वनोपज संघ के द्वारा अपने वनोपजों से बने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री भी कि जायेगी। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एफएमसीजी कंपनियों के माध्यम से इन उत्पादों की मार्केटिंग करने की व्यवस्था का प्रयास किया जायेगा। पवेलियन में छत्तीसगढ़ के आकर्षक पर्यटन स्थलों, उपलब्ध अधोसंरचना और ईको-टूरिज्म के बारे में भी जानकारी दी जायेगी। ताकि अधिक से अधिक लोग छत्तीसगढ़ के बारे में जान सके।

केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने स्पेशलिटी स्टील के लिए पीएलआई योजना के तीसरे चरण (PLI 1.2) का शुभारंभ किया

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केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने स्पेशलिटी स्टील (विशेष इस्पात) के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तीसरे चरण का शुभारंभ किया। इस्पात मंत्रालय की इस पीएलआई योजना के तहत अब तक ₹43,874 करोड़ का निवेश संकल्पित किया जा चुका है, जिससे 30,760 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं और 14.3 मिलियन टन स्पेशलिटी स्टील के उत्पादन का अनुमान है। सितंबर 2025 तक, पहले दो चरणों में भाग लेने वाली कंपनियों ने ₹22,973 करोड़ का निवेश किया है और 13,284 रोजगार उत्पन्न किए हैं।

स्पेशलिटी स्टील के लिए पीएलआई योजना, जिसे जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया था, आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के अंतर्गत एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य भारत को उच्च गुणवत्ता वाले स्टील उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है। योजना का तीसरा चरण (PLI 1.2) उभरते और उन्नत इस्पात उत्पादों जैसे सुपर एलॉय, सीआरजीओ, स्टेनलेस स्टील (लॉन्ग और फ्लैट), टाइटेनियम एलॉय और कोटेड स्टील में निवेश आकर्षित करने पर केंद्रित है। यह पहल उच्च मूल्य वाले इस्पात के उत्पादन को बढ़ावा देने, नए रोजगार सृजन और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में सहायक होगी।

तीसरे चरण (PLI 1.2) की प्रमुख विशेषताएं:

  • आवेदन अवधि: लॉन्च की तारीख से 30 दिनों तक ऑनलाइन पोर्टल https://plimos.mecon.co.in के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

  • पात्रता: भारत में पंजीकृत वे कंपनियाँ जो अधिसूचित उत्पादों के एंड-टू-एंड विनिर्माण में संलग्न हैं, आवेदन के लिए पात्र हैं।

  • उत्पाद कवरेज: योजना के तीसरे चरण में पाँच प्रमुख लक्ष्य वर्गों में 22 उत्पाद उप-श्रेणियाँ शामिल हैं, जिनमें रणनीतिक स्टील ग्रेड, वाणिज्यिक ग्रेड (श्रेणी 1 और 2) तथा कोटेड/वायर उत्पाद सम्मिलित हैं।

  • प्रोत्साहन दरें: प्रोत्साहन दरें उत्पाद श्रेणी और उत्पादन वर्ष के आधार पर 4% से 15% तक होंगी।

  • प्रोत्साहन अवधि: वित्त वर्ष 2025–26 से अधिकतम पाँच वर्षों तक लाभ उपलब्ध रहेगा, जबकि भुगतान वित्त वर्ष 2026–27 से प्रारंभ होगा।

  • अन्य परिवर्तन: मूल्य निर्धारण के लिए आधार वर्ष 2019–20 से संशोधित कर 2024–25 कर दिया गया है ताकि वर्तमान रुझानों को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके।

यह कदम न केवल इस्पात क्षेत्र में तकनीकी उन्नति और आत्मनिर्भरता को सशक्त करेगा, बल्कि भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी वैश्विक स्तर पर नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा।

स्पेशलिटी स्टील के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तीसरे चरण (PLI 1.2) का शुभारंभ

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नई दिल्ली- भारत सरकार का इस्पात मंत्रालय "स्पेशलिटी स्टील के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना" के तीसरे चरण (पीएलआई 1.2) की शुरुआत करने जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत सरकार की “आत्मनिर्भर भारत” दृष्टि के तहत एक प्रमुख पहल है। इस अवसर पर माननीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारी एवं इस्पात क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक भी उपस्थित रहेंगे।

स्पेशलिटी स्टील के लिए पीएलआई योजना को जुलाई 2021 में केन्द्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹6,322 करोड़ की कुल लागत के साथ स्वीकृति दी गई थी। इस योजना का उद्देश्य भारत को उच्च मूल्य एवं उन्नत श्रेणी के इस्पात उत्पादन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। योजना का लक्ष्य निर्धारित उत्पाद श्रेणियों में उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहन देना है, जिससे देश में वैल्यू एडिशन बढ़े और रक्षा, ऊर्जा, एयरोस्पेस एवं अवसंरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम हो।

अब तक इस योजना के अंतर्गत ₹43,874 करोड़ का निवेश प्रतिबद्ध किया गया है, जिसमें से ₹22,973 करोड़ का निवेश पहले ही किया जा चुका है, और पहले दो चरणों में 13,000 से अधिक रोजगार सृजित किए जा चुके हैं।

यह योजना 22 उप-श्रेणियों को कवर करती है, जिनमें सुपर अलॉय, सीआरजीओ, अलॉय फोर्जिंग्स, स्टेनलेस स्टील (लॉन्ग और फ्लैट), टाइटेनियम अलॉय और कोटेड स्टील शामिल हैं। इस योजना के अंतर्गत 4% से 15% तक की प्रोत्साहन दरें निर्धारित की गई हैं, जो वित्त वर्ष 2025–26 से पांच वर्षों के लिए लागू होंगी, जबकि भुगतान वित्त वर्ष 2026–27 से शुरू होगा। इसके साथ ही मूल्य निर्धारण का आधार वर्ष भी अद्यतन कर वित्त वर्ष 2024–25 किया गया है ताकि वर्तमान रुझानों को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित किया जा सके।

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