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एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया

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कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्थित कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत के किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है, जिसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचित किया गया है।

कोयला मंत्रालय ने आधार (लक्षित वितरण वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाएं) अधिनियम, 2016 तथा आधार प्रमाणीकरण (सुशासन, सामाजिक कल्याण, नवाचार एवं ज्ञान) नियम, 2020 के तहत इस योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करते हुए राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के माध्यम से लाभार्थियों को स्वैच्छिक आधार प्रमाणीकरण के जरिए पारदर्शी, प्रभावी और लक्षित तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, जो लाभार्थी आधार का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों की भी व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2023 में शुरू की गई 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना, एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर पहल है। इसके तहत कंपनी के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) की निःशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।

इस योजना ने लगातार उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं।

पहला बैच (2023–24):

  • 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • 11 विद्यार्थियों को एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश मिला।

  • 2-2 विद्यार्थियों को बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS) तथा बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPTH) में प्रवेश प्राप्त हुआ।

  • 2 विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में वेटरनरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया।

दूसरा बैच (2024–25):

  • 40 में से 31 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • विद्यार्थियों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस तथा बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस (B.F.Sc.) जैसे पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश मिला।

यह राजपत्र अधिसूचना 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे योजना की संस्थागत व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली और एकमात्र सीएसआर योजना भी बन चुकी है। यह इसकी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था तथा तकनीक आधारित पारदर्शी सेवा वितरण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'एसईसीएल के सुश्रुत' के माध्यम से एसईसीएल खनन क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करते हुए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भविष्य के योग्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

कोयला मंत्रालय के रोडशो में कोयला गैसीफिकेशन को लेकर बड़े निवेश और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में “सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं के संवर्धन” योजना पर एक सफल रोडशो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीकी प्रदाताओं, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों की बड़ी भागीदारी देखी गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे  विशिष्ट अतिथि रहे। साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

कोयला गैसीफिकेशन को बताया रणनीतिक मिशन

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और भविष्य-उन्मुख ऊर्जा प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय मिशन है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने इस क्षेत्र के लिए ₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना शुरू की है और हाल ही में ₹37,500 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय सहायता को मंजूरी दी गई है। इससे लगभग ₹2.5 लाख करोड़ तक के निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर

मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन से भारत की LNG, मेथनॉल, अमोनिया और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को वैश्विक मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह तकनीक उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स, हाइड्रोजन और उन्नत निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगी और देश को स्वच्छ कोयला तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगी।

रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा

राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे ने कहा कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से कोयला-समृद्ध और पिछड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी और औद्योगिक विकास को गति देगी।

भारत को वैश्विक ऊर्जा हब बनाने की दिशा

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि भारत अपने प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम और समझदारीपूर्ण उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन के जरिए भारत सिंथेटिक गैस, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आयात निर्भरता को कम कर सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह योजना लगभग 25 परियोजनाओं के माध्यम से करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकती है।

भविष्य की ऊर्जा रणनीति पर फोकस

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए भारत को अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है। रोडशो में उद्योग जगत और निवेशकों के साथ तकनीकी, वित्तीय और नीति संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा भी हुई।

मंत्रालय ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन को “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित किया जाएगा।


कोयला गैसीफिकेशन मिशन में बड़ी उपलब्धि

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कोयला मंत्रालय ने भारत के कोयला गैसीफिकेशन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ₹8,500 करोड़ की वित्तीय प्रोत्साहन योजना (Financial Incentive Scheme) के तहत राउंड-II की कैटेगरी-III में लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) जारी किया गया है।

इस अवसर पर  संजय कुमार झा अतिरिक्त सचिव (कोयला मंत्रालय) ने कार्तिकेय वायुनंदना प्राइवेट लिमिटेड को महाराष्ट्र के गडचिरोली में कोल-टू-एसेटिक एसिड प्लांट स्थापित करने के लिए LoA सौंपा।

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें:

  • 💰 कुल निवेश: ₹793 करोड़

  • 🏭 उत्पादन: एसेटिक एसिड

  • ⚙️ क्षमता: 75,900 टन प्रति वर्ष (TPA)

  • 📍 स्थान: गडचिरोली, महाराष्ट्र

यह परियोजना घरेलू कोयले के वैल्यू-एडेड उपयोग की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

योजना की प्रगति

  • पहले राउंड में 7 परियोजनाएं पहले से कार्यान्वयन में हैं।

  • राउंड-II के तहत कैटेगरी-II और III में निवेश को बढ़ावा देने के लिए RFP आमंत्रित किए गए हैं।

कैटेगरी-III के तहत:

  • प्रति प्रोजेक्ट ₹100 करोड़ तक या

  • कुल लागत (Capex) का 15% (जो कम हो) तक वित्तीय सहायता दी जाती है।

क्या होगा फायदा?

  • घरेलू केमिकल उत्पादन को बढ़ावा

  • आयात पर निर्भरता में कमी

  • आत्मनिर्भर भारत को मजबूती

  • स्वच्छ और कुशल कोयला उपयोग से टिकाऊ औद्योगिक विकास

यह पहल भारत में सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने और कोयले के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम: ऊर्जा सुरक्षा हेतु कोयला—15वें वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी चरण का शुभारंभ

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कोयला मंत्रालय 17 अप्रैल 2026 को “आत्मनिर्भर भारत: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला” विषय पर एक हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultation) आयोजित करने जा रहा है, साथ ही वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 15वें चरण का शुभारंभ भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम मुंबई में आयोजित होगा, जिसमें श्री विक्रम देव दत्त, सचिव, कोयला मंत्रालय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहल भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आत्मनिर्भर राष्ट्र के विजन को आगे बढ़ाने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामियों की उल्लेखनीय सफलता को आगे बढ़ाते हुए, कोयला मंत्रालय देश के ऊर्जा परिदृश्य को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत के बाद से घरेलू कोयले की उपलब्धता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।

आगामी 15वां चरण इसी प्रगतिशील यात्रा को आगे बढ़ाता है। इसमें कोयला खदानों को अत्यंत उदार शर्तों पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा मिले, विविध निवेश आकर्षित हों और उद्योग की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो। इस चरण में पूरी तरह से अन्वेषित (fully explored) और आंशिक रूप से अन्वेषित (partially explored) कोयला ब्लॉकों की पेशकश की जाएगी, जिसमें अनुभवी खनन कंपनियों के साथ-साथ नए और तकनीक-आधारित उद्यमों को भी भाग लेने का अवसर मिलेगा।

यह पहल कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार सृजन और समग्र क्षेत्रीय विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वाणिज्यिक कोयला खनन ढांचे ने पारदर्शिता को बढ़ाया है, प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया है और सभी प्रतिभागियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उद्योगों के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ी है और आयात पर निर्भरता कम हुई है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।

वाणिज्यिक कोयला खनन देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है और विभिन्न उद्योगों के लिए कोयले की स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। आने वाला चरण इस मजबूत नींव को और सुदृढ़ करेगा और क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य में विश्वास को बढ़ाएगा।

कोयला मंत्रालय देश को विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सतत विकास, नवाचार और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

दिसंबर 2025 में कैप्टिव एवं वाणिज्यिक कोयला खदानों के उत्पादन और प्रेषण में निरंतर वृद्धि दर्ज

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वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान दिसंबर 2025 में कैप्टिव एवं वाणिज्यिक कोयला खदानों से कोयला उत्पादन और प्रेषण में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में कोयला उत्पादन 19.48 मिलियन टन (MT) रहा, जबकि कोयला प्रेषण 18.02 मिलियन टन दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्पादन में 5.75 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3) के दौरान कैप्टिव एवं वाणिज्यिक खदानों से कुल कोयला उत्पादन 54.14 मिलियन टन रहा, जबकि प्रेषण 50.61 मिलियन टन दर्ज किया गया। इस तिमाही में उत्पादन में 5.35 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में निरंतर परिचालन गति को दर्शाती है।

समग्र रूप से, वित्त वर्ष 2025–26 में दिसंबर तक की अवधि के दौरान इस क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इस अवधि में कोयला उत्पादन में 9.72 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई, जबकि प्रेषण में 6.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में उल्लेखनीय है। ये उत्साहजनक रुझान बेहतर परिचालन दक्षता और खनन क्षमता के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।

संलग्न ग्राफ उत्पादन और प्रेषण—दोनों में निरंतर सुधार और मजबूत वृद्धि को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है।

मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय रणनीतिक नीतिगत उपायों, कठोर निगरानी और हितधारकों को निरंतर सहयोग को जाता है। इन प्रयासों से परिचालन अनुमोदनों में तेजी आई है और उत्पादन क्षमताओं का विस्तार हुआ है, जिससे कोयला उत्पादन और प्रेषण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

कोयला मंत्रालय कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए एक स्थिर और प्रदर्शन-आधारित वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। निरंतर नीतिगत सुविधा, निकट प्रदर्शन निगरानी और हितधारकों के साथ समन्वित सहभागिता के माध्यम से मंत्रालय का उद्देश्य विश्वसनीय कोयला उपलब्धता सुनिश्चित करना, प्रमुख क्षेत्रों में निर्बाध संचालन को समर्थन देना और देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना है। ये प्रयास विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

कोयला अन्वेषण में बड़ी राहत: कोयला मंत्रालय ने सरल की स्वीकृति प्रक्रिया, निजी एजेंसियों को मिली बढ़ी भूमिका

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भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोयला और लिग्नाइट संसाधनों की तेज़, अधिक कुशल और तकनीकी रूप से सुदृढ़ खोज की आवश्यकता है। इसी राष्ट्रीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, कोयला मंत्रालय निरंतर ऐसे प्रगतिशील सुधार लागू कर रहा है जो पारदर्शिता बढ़ाते हैं, निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करते हैं और राष्ट्र की ऊर्जा तैयारियों को सुदृढ़ करते हैं। यह पहल भारत के लिए खोज-परिस्थितिकी तंत्र को आधुनिक बनाने और प्रक्रियाओं को अधिक सक्षम बनाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कोयला मंत्रालय ने पूर्व की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर, अधिसूचित मान्यता प्राप्त अन्वेषण एजेंसियों (APAs) — जिन्हें QCI-NABET द्वारा मान्यता प्राप्त है — द्वारा तैयार किए गए कोयला और लिग्नाइट ब्लॉकों के अन्वेषण कार्यक्रमों और भूवैज्ञानिक रिपोर्टों (GRs) की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया है। इन GRs की सहकर्मी समीक्षा भी किसी अन्य APA द्वारा की जाएगी। नई प्रक्रिया में, जनवरी 2022 में गठित मंत्रालय स्तरीय समिति की स्वीकृति की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। यह एक बड़ा प्रक्रियागत सुधार है और अन्वेषण क्षेत्र में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

कोयला मंत्रालय द्वारा प्रकाशित नई कार्यप्रणाली उसकी वेबसाइट पर उपलब्ध है:

हाल के सुधारों के तहत निजी मान्यता प्राप्त अन्वेषण एजेंसियों की क्षमताओं का विस्तार और उपयोग कर सरकार ने निजी अन्वेषण संस्थाओं पर मजबूत विश्वास प्रदर्शित किया है। यह दृष्टिकोण उनकी दक्षता, तकनीकी विशेषज्ञता और नवाचार को भारत के कोयला संसाधनों के सतत विकास में उपयोग करने का उद्देश्य रखता है, साथ ही उच्च तकनीकी मानकों और कड़ी पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। नई प्रक्रिया से भूवैज्ञानिक रिपोर्ट की स्वीकृति में कम से कम 3 माह की बचत होगी, जिससे कोयला ब्लॉक के शीघ्र परिचालन में मदद मिलेगी और ब्लॉक आवंटियों को समयबद्ध रूप से मील के पत्थर पूरे करने में सहायता मिलेगी। यह सुधार अन्वेषण की गति बढ़ाएगा, स्वीकृति समय कम करेगा और भारत के कोयला संसाधनों की दीर्घकालिक सुरक्षा तथा सतत उपयोग में योगदान देगा।

इन दूरदर्शी सुधारों के साथ, कोयला मंत्रालय भारत को अधिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाता रहेगा। अन्वेषण क्षमताओं को मजबूत कर और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर, मंत्रालय एक मजबूत कोयला पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान दे रहा है—जो विकसित भारत की आकांक्षाओं को आने वाले वर्षों में ऊर्जा प्रदान करेगा और राष्ट्र के लिए एक अधिक सक्षम, भविष्य-तैयार ऊर्जा परिदृश्य तैयार करेगा।

विशेष अभियान 5.0 के सफल समापन पर कोयला मंत्रालय और उसके उपक्रमों द्वारा उल्लेखनीय उपलब्धियां

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विशेष अभियान 5.0 के सफल समापन के उपरांत, कोयला मंत्रालय और इसके अधीन सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) ने तैयारियों के दौरान पहचानी गई विभिन्न गतिविधियों को व्यापक स्तर पर लागू किया।

क्रियान्वयन चरण (2 से 31 अक्टूबर, 2025) के दौरान, मंत्रालय ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को उल्लेखनीय रूप से पार करते हुए ₹56,85,76,462 का राजस्व अर्जित किया और कुल 1,28,527 फाइलों का निष्पादन / निराकरण किया।
मंत्रालय ने डिजिटल माध्यमों में भी सक्रिय उपस्थिति दर्ज की — 3,107 ट्वीट्स और 28 प्रेस विज्ञप्तियां अभियान पोर्टल पर अपलोड की गईं, जो प्रभावी संचार और जागरूकता का उदाहरण हैं।

  • क्रमांक
  • पैरामीटर
  • लक्ष्य
  • उपलब्धि
  • उपलब्धि%
  • 1
  • स्वच्छता अभियान स्थल
  • 1,439
  • 1,741
  • 121
  • 2
  • स्वच्छता अभियान के अंतर्गत साफ की गई क्षेत्रफल (वर्ग फुट)
  • 82,51,511
  • 1,12,89,378
  • 137
  • 3
  • कबाड़ निस्तारण (मीट्रिक टन)
  • 8,678
  • 14,017
  • 162
  • 4
  • सांसद संदर्भ
  • 4
  • 4
  • 100
  • 5
  • आंतरिक निगरानी समिति संदर्भ
  • 2
  • 2
  • 100
  • 6
  • जन शिकायतें
  • 166
  • 166
  • 100
  • 7
  • पीएमओ संदर्भ
  • 61
  • 61
  • 100
  • 8
  • भौतिक फाइलों की समीक्षा
  • 1,23,830
  • 1,90,841
  • 154
  • 9
  • ई-फाइलों की समीक्षा
  • 32,182
  • 65,637
  • 203

विशेष अभियान 5.0 की प्रमुख सर्वोत्तम प्रथाएं

  1. लघु फिल्म – “एक कदम बदलाव की ओर” (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड)
    – चंच विक्टोरिया क्षेत्र, BCCL द्वारा निर्मित इस प्रेरणादायक फिल्म में स्वच्छता, अनुशासन और टीमवर्क की शक्ति को दर्शाया गया है।
  2. योग एवं ध्यान कक्ष – कोल इंडिया लिमिटेड (CIL)
    – सीआईएल के आवासीय परिसर में योग और ध्यान केंद्र स्थापित किया गया, जिससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को बढ़ावा मिला।


  3. महिला-नेतृत्व वाला लागत एवं बजट अनुभाग – वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL)
    – मुख्यालय में पूर्णतः महिलाओं द्वारा संचालित यह अनुभाग वित्तीय निर्णयों में महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  4. कचरे से मूर्तिकला – सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL)
    – 0.2 टन गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे से 7 फुट ऊँची कोयला खनिक की मूर्ति तैयार की गई, जो रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है।
  5. वेस्ट टू आर्ट प्रतियोगिता – महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL)
    – छात्रों ने ‘कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रण करें’ के संदेश को कला के माध्यम से अभिव्यक्त किया।


  6. स्क्रैप टू सर्विस – ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL)
  7. – निष्क्रिय अस्पताल के उपयोगी सामानों को NGO भारत सेवाश्रम संघ को दान किया गया, जिससे सामाजिक कल्याण को बढ़ावा मिला।

  8. स्वच्छता जागरूकता हेतु नुक्कड़ नाटक – भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL)
    – कार्यस्थल और समुदायों में स्वच्छता पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया।

  9. वैज्ञानिक खदान समापन
    – स्वतंत्रता के बाद पहली बार, 11 कोयला खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद किया गया। FY 2025–26 में 22 और खदानें बंद की जाएंगी।

  10. औद्योगिक कबाड़ से फेंसिंग निर्माण – सीसीएल
    – पुराने गियर, स्प्रॉकेट आदि से सुंदर फेंसिंग और हरित क्षेत्र विकसित किया गया।

  11. LIVES फ्रेमवर्क का शुभारंभ
    – खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनः उपयोग एवं सतत विकास हेतु तकनीकी, पारिस्थितिक और सामुदायिक पहलुओं को एकीकृत करने वाला ढांचा।

  12. ARTHA फ्रेमवर्क
    – हरित वित्त जुटाने के लिए व्यावहारिक पांच-चरणीय दृष्टिकोण (Align–Rank–Target–Harness–Adapt)।

  13. “सेवार्थ” – सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए डिजिटल PRMB सेल (ECL)
    – केवल महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित, यह केंद्र मानव-स्पर्श के साथ डिजिटल चिकित्सा प्रतिपूर्ति सेवा प्रदान करता है।

विशेष अभियान 5.0 के ये उपलब्धियां पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सुशासन के प्रति मंत्रालय की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को संचालन तंत्र में एकीकृत करते हुए, कोयला मंत्रालय दक्षता बढ़ाने और स्वच्छ, सतत कोयला क्षेत्र के निर्माण के लिए सतत प्रयासरत है।

Bill tracking Portal


कोयला मंत्रालय करेगा ‘कोयला शक्ति’ स्मार्ट कोल एनालिटिक्स डैशबोर्ड लॉन्च: डिजिटल इंडिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

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नई दिल्ली-डिजिटल परिवर्तन और डेटा-आधारित शासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में, कोयला मंत्रालय जल्द ही “कोयला शक्ति” (Koyla Shakti) नामक एक स्मार्ट कोल एनालिटिक्स डैशबोर्ड (Smart Coal Analytics Dashboard) लॉन्च करने जा रहा है। यह एक एकीकृत प्लेटफॉर्म होगा, जो कोयला क्षेत्र के संचालन की रीयल-टाइम निगरानी और विश्लेषण की सुविधा प्रदान करेगा।

इस डैशबोर्ड का शुभारंभ 29 अक्टूबर 2025 को द ओबेरॉय होटल, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस अवसर पर कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिजिटल इंडिया को सशक्त करने और टेक्नोलॉजी आधारित सुशासन के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, कोयला मंत्रालय लगातार कोयला क्षेत्र में डिजिटल सिस्टम्स के एकीकरण की दिशा में कार्य कर रहा है।
कोयला शक्ति का शुभारंभ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है — यह कोयला उत्पादन, परिवहन और आपूर्ति की निगरानी के लिए एक एकीकृत रीयल-टाइम डिजिटल इंटरफेस प्रदान करेगा। यह मंच डेटा-आधारित निर्णय लेने, पारदर्शिता बढ़ाने और पूरे कोयला पारिस्थितिकी तंत्र में दक्षता सुनिश्चित करेगा।

कोयला शक्ति के बारे में

कोयला शक्ति – स्मार्ट कोल एनालिटिक्स डैशबोर्ड (SCAD) को कोयला मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है। यह एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो विभिन्न हितधारकों से प्राप्त डेटा को एकीकृत करता है, जिनमें शामिल हैं —

  • कोयला उत्पादन कंपनियाँ एवं निजी खननकर्ता

  • केंद्रीय मंत्रालय एवं विभाग — कोयला, रेल, विद्युत, वित्त, बंदरगाह, नौवहन एवं जलमार्ग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग

  • राज्य सरकारों के खनिज विभाग (ई-खानिज प्लेटफॉर्म)

  • बिजली उत्पादन कंपनियाँ एवं औद्योगिक कोयला उपभोक्ता

  • बंदरगाह प्राधिकरण और निजी कोयला हैंडलिंग टर्मिनल

प्रमुख उद्देश्य एवं विशेषताएँ

मुख्य उद्देश्य: कोयला आपूर्ति श्रृंखला में परिचालन दक्षता, पारदर्शिता और समन्वय को मजबूत बनाना।

मुख्य विशेषताएँ:

  1. एकीकृत दृश्यता: विभिन्न स्रोतों से डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करना।

  2. रीयल-टाइम निगरानी: कोयला उत्पादन, डिस्पैच और लॉजिस्टिक्स की सतत निगरानी।

  3. डेटा-आधारित निर्णय: नीतिगत और प्रबंधन निर्णयों के लिए विश्लेषणात्मक उपकरण।

  4. त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली: समस्याओं के शीघ्र समाधान हेतु अलर्ट और सूचनाएँ।

  5. मानकीकरण: एकरूप रिपोर्टिंग प्रारूप और मापदंड।

  6. संचालन दक्षता: मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग को सरल बनाना एवं मानवीय त्रुटियों को कम करना।

  7. विस्तार क्षमता (Scalability): भविष्य की डिजिटल प्रणालियों और अतिरिक्त डेटा सेट्स के साथ एकीकरण की सुविधा।

  8. पारदर्शिता एवं जवाबदेही: प्रदर्शन संकेतकों की दृश्यता सभी हितधारकों के लिए सुनिश्चित करना।

  9. नीतिगत योजना और पूर्वानुमान: मांग पूर्वानुमान और रणनीतिक योजना के लिए विश्लेषणात्मक अंतर्दृष्टि प्रदान करना।

डिजिटल इंडिया मिशन को बढ़ावा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बना रही है।
कोयला शक्ति का शुभारंभ इस दिशा में कोयला मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है — जो पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता कोयला शासन में स्थापित करने का प्रयास है।

कोयला मंत्रालय तकनीक के माध्यम से सतत संसाधन प्रबंधन, संचालनिक निगरानी और जन विश्वास को सुदृढ़ करने की दिशा में अग्रसर है, जिससे भारत आत्मनिर्भर भारत और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

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