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एसईसीएल की दीपका ओपनकास्ट परियोजना बनी भारत के कोयला क्षेत्र की नई पहचान, उत्पादन, लाभ और सतत विकास में स्थापित किए नए मानक

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रायपुर- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका ओपनकास्ट (OCP) परियोजना आज भारत के कोयला खनन क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। वर्ष 1992 में मात्र 10 लाख टन कोयला उत्पादन करने वाली यह परियोजना आज देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक खदानों में शामिल है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने 37.5 मिलियन टन (एमटी) का रिकॉर्ड कोयला उत्पादन तथा 39.43 मिलियन टन कोयला प्रेषण (डिस्पैच) कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

हाल ही में परियोजना को 40 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) की पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) प्राप्त हुई है। साथ ही 60 MTPA तक क्षमता विस्तार के स्पष्ट रोडमैप के साथ दीपका परियोजना उत्पादन, दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की शानदार शुरुआत

पिछले वर्ष के रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद दीपका परियोजना ने चालू वित्तीय वर्ष की भी मजबूत शुरुआत की है।

25 जुलाई 2026 तक परियोजना ने 12.66 मिलियन टन कोयला उत्पादन कर निर्धारित लक्ष्य का 104 प्रतिशत हासिल किया। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्पादन में 30.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो खदान की बेहतर उत्पादकता और मशीनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाती है।

इसी अवधि में 13.87 मिलियन टन कोयले का डिस्पैच किया गया, जो निर्धारित लक्ष्य का 109 प्रतिशत है। इससे देश के ताप विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित हुई।

उत्पादन के साथ लाभप्रदता में भी उल्लेखनीय वृद्धि

दीपका परियोजना केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि वित्तीय प्रदर्शन में भी अग्रणी रही है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने 3,230.91 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया, जिससे यह SECL के सबसे अधिक लाभ देने वाले परियोजनाओं में शामिल हो गई।

बेहतर लागत प्रबंधन और परिचालन दक्षता के कारण प्रति टन लाभ बढ़कर 827 रुपये पहुंच गया। इससे यह साबित हुआ कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के साथ लागत नियंत्रण भी प्रभावी ढंग से संभव है।

भविष्य की उत्पादन क्षमता के लिए मजबूत आधार

दीर्घकालीन उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

मालगांव का सफल अधिग्रहण होने के बाद अब हरदी बाजार क्षेत्र में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए आधुनिक पुनर्वास नगर विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामुदायिक भवन और अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस पारदर्शी और सहभागी मॉडल से खनन के लिए भूमि उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय का विश्वास भी मजबूत हुआ है।

बेहतर आधारभूत संरचना से तेज हुआ कोयला परिवहन

दीपका परियोजना के पास कोयला परिवहन की अत्याधुनिक व्यवस्था उपलब्ध है।

परियोजना में एमजीआर (MGR) आधारित साइलो, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC) साइलो, रेलवे लोडिंग प्रणाली तथा सड़क परिवहन का एकीकृत नेटवर्क विकसित किया गया है।

इस व्यवस्था के माध्यम से एनटीपीसी सीपत सहित पश्चिमी एवं मध्य भारत के कई ताप विद्युत संयंत्रों तक समय पर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

आधुनिक तकनीक से बढ़ी उत्पादकता

दीपका परियोजना ने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

परियोजना में 42 घनमीटर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक रोप शोवेल, उच्च क्षमता के सरफेस माइनर, इन-पिट बेल्ट कन्वेयर, आधुनिक साइलो लोडिंग प्रणाली, ड्रोन आधारित निगरानी तथा डिजिटल माइन मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।

इन तकनीकों से खदान की योजना, निगरानी और मशीनों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ जिम्मेदार खनन

दीपका परियोजना ने यह सिद्ध किया है कि अधिक उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ संभव हैं।

परियोजना में Continuous Ambient Air Quality Monitoring System (CAAQMS), फॉग कैनन आधारित धूल नियंत्रण, व्हील वॉशिंग सिस्टम, वृहद वृक्षारोपण अभियान, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तथा प्लास्टिक अपशिष्ट पुनर्चक्रण जैसी अनेक पर्यावरणीय पहलें लागू की गई हैं।

डिजिटल पर्यावरण निगरानी प्रणाली के माध्यम से नियामकीय अनुपालन और पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा रही है।

40 MTPA से आगे 60 MTPA की ओर बढ़ता कदम

हाल ही में प्राप्त 40 MTPA पर्यावरणीय स्वीकृति दीपका परियोजना के विकास की अंतिम मंजिल नहीं बल्कि अगले विस्तार चरण की शुरुआत है।

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, आधुनिक आधारभूत संरचना और उन्नत तकनीक के सहारे परियोजना अब 60 MTPA उत्पादन क्षमता हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

दीपका ओपनकास्ट परियोजना आज वैज्ञानिक खनन, तकनीकी नवाचार, वित्तीय अनुशासन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है। SECL की यह प्रमुख परियोजना उत्पादन, लाभप्रदता, परिचालन दक्षता और सतत विकास के नए मानक स्थापित करते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मजबूत कर रही है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय (ऑफशोर) अन्वेषण योजना को मंजूरी दी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कल ‘समुद्र मंथन’ (Samudra Manthan) राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना को मंजूरी दी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) के लिए वित्त वर्ष 2030–31 तक ₹84,084 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह अब तक का भारत का सबसे महत्वाकांक्षी अपतटीय तेल एवं गैस अन्वेषण अभियान है।

यह निर्णय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश के हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों की श्रृंखला का महत्वपूर्ण परिणाम है।

‘समुद्र मंथन’ योजना इन सुधारों को जमीन पर उतारते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक नया अध्याय शुरू करती है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और हर वर्ष लगभग 144 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब ₹13 लाख करोड़) का कच्चा तेल आयात करता है। हाल की वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने यह स्पष्ट किया है कि तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा संसाधनों की सुरक्षित और निर्बाध उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है।

आने वाले दशकों में भारत की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन बढ़ाना आयात पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य है।

सरकार द्वारा किए गए प्रमुख सुधार

वर्ष 2014 से सरकार ने हाइड्रोकार्बन अन्वेषण एवं उत्पादन क्षेत्र में कई संरचनात्मक सुधार किए हैं—

  1. ऑफशोर क्षेत्रों को खोलना – पहले प्रतिबंधित ("नो-गो") क्षेत्रों में से लगभग 99% क्षेत्र खोल दिए गए, जिससे भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के 10 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पहली बार अन्वेषण संभव हुआ।

  2. अनुबंध प्रणाली में सुधार – उत्पादन साझेदारी अनुबंध (Production Sharing Contract) की जगह राजस्व साझेदारी अनुबंध (Revenue Sharing Contract) लागू किया गया, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और प्रशासनिक हस्तक्षेप कम हुआ।

  3. विधायी सुधार – ऑयलफील्ड्स (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) संशोधन अधिनियम, 2025 के माध्यम से कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाया गया, अनुबंधीय स्थिरता सुनिश्चित की गई तथा विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत किया गया।

  4. नए नियमों का कार्यान्वयन – पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियम, 2025 लागू कर कारोबार को आसान बनाया गया और नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल किया गया।

  5. समान निर्णय प्रणाली – सभी अनुबंध व्यवस्थाओं के लिए सशक्त सचिव समिति (Empowered Committee of Secretaries) की संरचना और अधिकारों को एकरूप बनाया गया।

  6. अन्वेषण पर विशेष जोर – ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के प्रदर्शन मानकों में बदलाव कर अन्वेषण गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई।

क्यों जरूरी है यह योजना?

तेल एवं गैस का अन्वेषण अत्यधिक पूंजी-गहन और लंबी अवधि वाली प्रक्रिया है। किसी ब्लॉक के आवंटन से व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने में सामान्यतः 5 से 10 वर्ष लगते हैं।

इसके अलावा, मौजूदा तेल एवं गैस क्षेत्रों का उत्पादन हर वर्ष लगभग 6–7% स्वाभाविक रूप से घटता है। इसलिए नई खोजें और निरंतर अन्वेषण आवश्यक हैं।

इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने अन्वेषण-आधारित विकास (Exploration-led Growth) की रणनीति अपनाई है।

‘समुद्र मंथन’ योजना की प्रमुख विशेषताएं

इस योजना के तहत सरकार गहरे समुद्र (Deepwater) में खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का अधिकतम 50% वहन करेगी। इससे निवेशकों का जोखिम कम होगा, निजी निवेश बढ़ेगा और भारत की अपतटीय हाइड्रोकार्बन क्षमता का तेजी से विकास होगा।

भारत की भविष्य की तेल एवं गैस संभावनाएं मुख्य रूप से कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी तथा अंडमान जैसे गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में हैं। यहां एक खोजी कुएं की ड्रिलिंग पर लगभग 125–150 मिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है।

इसीलिए सरकार जोखिम-साझेदारी (Risk Sharing) मॉडल अपनाकर अन्वेषण को प्रोत्साहित करेगी।

₹84,084 करोड़ की योजना के चार प्रमुख घटक

  1. आधुनिक अपतटीय भूकंपीय (Seismic) डेटा संग्रह एवं प्रसंस्करण – ₹28,534 करोड़

  2. 60 गहरे समुद्री खोजी कुओं की ड्रिलिंग – ₹43,200 करोड़

    • सरकार पात्र लागत का अधिकतम 50% या ₹675 करोड़ प्रति कुआं (जो भी कम हो) सहायता देगी।

  3. साझा अपतटीय अवसंरचना (Common Offshore Infrastructure Hubs) – ₹10,000 करोड़

  4. ऑयल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र (Manufacturing & Services Zones) – ₹2,000 करोड़

इसके अतिरिक्त योजना के निगरानी, डिजिटल हस्तक्षेप, मानव संसाधन, जन-जागरूकता एवं मूल्यांकन जैसे कार्यों के लिए ₹350 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

संभावित लाभ

यदि अन्वेषण सफल रहता है तो इस योजना से—

  • भारत का घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन 62 MMTOE से बढ़कर 80 MMTOE प्रतिवर्ष हो सकता है।

  • देश का हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार 1.6 अरब टन तेल समतुल्य (TOE) से बढ़कर 2.2 अरब TOE तक पहुंच सकता है।

  • कच्चे तेल के आयात में हर वर्ष लगभग ₹1 लाख करोड़ की कमी आने की संभावना है।

  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात पर दीर्घकालिक निर्भरता घटेगी।

बेहतर डेटा, जोखिम-साझेदारी, साझा अवसंरचना और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देकर ‘समुद्र मंथन’ योजना भारत को गहरे समुद्र में तेल एवं गैस अन्वेषण तथा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल सिद्ध होगी।

नीति आयोग ने ‘शांति अधिनियम, 2025’ के कार्यान्वयन पर हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की

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नीति आयोग ने 10 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर के समरसता ऑडिटोरियम में ‘शांति अधिनियम, 2025’ (SHANTI Act, 2025) के कार्यान्वयन पर एक हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultation) आयोजित किया। इस बैठक में सरकार, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के प्रमुख नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर इस ऐतिहासिक अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिचालन ढांचे (Operational Framework) पर विचार-विमर्श किया।

बैठक की अध्यक्षता प्रो. अभय करंदीकर, सदस्य, नीति आयोग ने की। इस अवसर पर पंकज अग्रवाल (सचिव, विद्युत मंत्रालय), घनश्याम प्रसाद (अध्यक्ष, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण), गुरदीप सिंह (सीएमडी, एनटीपीसी लिमिटेड), डॉ. अंशु भारद्वाज (कार्यक्रम निदेशक, नीति आयोग), राजनाथ राम (सलाहकार, नीति आयोग), डॉ. गरिमा शर्मा (प्रमुख, एसएसएसडी, परमाणु ऊर्जा विभाग) तथा  हरि कुमार (विशिष्ट वैज्ञानिक एवं निदेशक, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड) सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

तकनीकी चर्चाओं को अधिनियम के सफल कार्यान्वयन के लिए तीन प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया:

1. विधायी एवं नियामकीय ढांचा (Legislative & Regulatory Framework):

इस सत्र में शांति अधिनियम, 2025 के मसौदा नियमों, विनियमों तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से संबंधित प्रावधानों पर चर्चा हुई। साथ ही अधिनियम के तहत वैधानिक अनुपालन (Statutory Compliance) की रूपरेखा प्रस्तुत की गई और इस बात पर विचार किया गया कि घरेलू हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विदेशी निवेश को कैसे आकर्षित किया जा सकता है।

2. वित्त, बीमा एवं जनधारणा (Finance, Insurance & Public Perception):

हितधारकों ने अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक वित्तीय तंत्र तथा जोखिम-प्रबंधन व्यवस्था पर विचार-विमर्श किया। दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए उपयुक्त बीमा व्यवस्था, जन-जागरूकता बढ़ाने, स्थानीय समुदायों का विश्वास मजबूत करने तथा परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के प्रति व्यापक जन-स्वीकृति विकसित करने की रणनीतियों पर भी चर्चा हुई।

3. विनिर्माण, संचालन एवं क्षमता निर्माण (Manufacturing, Operations & Capacity Building):

इस सत्र में अधिनियम के क्रियान्वयन चरण पर विशेष ध्यान दिया गया। घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने, परिचालन तैयारियों को सुनिश्चित करने, कुशल मानव संसाधन विकसित करने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक सुदृढ़ बनाने तथा उद्योग के विस्तार के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम तैयार करने पर विचार किया गया।

बैठक के दौरान हितधारकों ने इन तीनों प्रमुख विषयों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव और विचार साझा किए। इन सुझावों से ‘शांति अधिनियम, 2025’ के कार्यान्वयन ढांचे को और अधिक प्रभावी, मजबूत एवं व्यावहारिक बनाने में सहायता मिलेगी।

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को देगा ऊर्जा सुरक्षा का नेतृत्व: प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) 2026 की अध्यक्षता के दौरान भारत का लक्ष्य ग्लोबल साउथ को सुरक्षित, लचीले, न्यायसंगत और सतत वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कहा कि भारत का मानना है कि मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली केवल प्रभावी घरेलू नीतियों से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत वैश्विक साझेदारी से भी निर्मित होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सहयोग के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सभी देशों के लिए सुरक्षित एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मध्य-पूर्व में आपूर्ति सामान्य होने के बाद उद्योगों को फिर मिली एलपीजी की पूरी आपूर्ति

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने देश के वाणिज्यिक (Commercial) और औद्योगिक (Industrial) उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को फिर से सामान्य स्तर पर बहाल कर दिया है। यह फैसला मध्य-पूर्व में आपूर्ति की स्थिति में सुधार के बाद लिया गया है।

हाल ही में मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति बाधित होने के कारण सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए वाणिज्यिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए पैक्ड एलपीजी की आपूर्ति पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। अब हालात सामान्य होने के बाद ये प्रतिबंध हटा दिए गए हैं।

सरकार के इस निर्णय से होटल, रेस्तरां, छोटे उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत मिलेगी, क्योंकि उन्हें अब पहले की तरह नियमित एलपीजी आपूर्ति उपलब्ध होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी क्षेत्र में ईंधन की कमी न हो और आवश्यक सेवाएं सुचारु रूप से संचालित होती रहें।

अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर तनाव कम होने के संकेत

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अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय वार्ता में सकारात्मक प्रगति देखने को मिली है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की और मध्यस्थ देशों ने बताया कि अगले 60 दिनों के भीतर एक व्यापक समझौते की दिशा में रोडमैप तैयार किया गया है।

यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब दुनिया की निगाहें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर टिकी हुई हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव और नौवहन संबंधी बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई थी।

वार्ता में प्रगति की खबर सामने आते ही वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखी गई। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि दोनों देशों के बीच समझौता आगे बढ़ता है, तो ऊर्जा आपूर्ति पर मंडरा रहा संकट काफी हद तक कम हो सकता है।

ईरान ने दावा किया है कि उसे तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण लाभ मिले हैं, वहीं अमेरिका ने क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। हालांकि दोनों पक्षों के बीच अभी कई संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम सहमति बनना बाकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रगति मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए आने वाले सप्ताह बेहद अहम होंगे। 

कोयला मंत्रालय के रोडशो में कोयला गैसीफिकेशन को लेकर बड़े निवेश और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में “सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं के संवर्धन” योजना पर एक सफल रोडशो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीकी प्रदाताओं, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों की बड़ी भागीदारी देखी गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे  विशिष्ट अतिथि रहे। साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

कोयला गैसीफिकेशन को बताया रणनीतिक मिशन

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और भविष्य-उन्मुख ऊर्जा प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय मिशन है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने इस क्षेत्र के लिए ₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना शुरू की है और हाल ही में ₹37,500 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय सहायता को मंजूरी दी गई है। इससे लगभग ₹2.5 लाख करोड़ तक के निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर

मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन से भारत की LNG, मेथनॉल, अमोनिया और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को वैश्विक मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह तकनीक उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स, हाइड्रोजन और उन्नत निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगी और देश को स्वच्छ कोयला तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगी।

रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा

राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे ने कहा कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से कोयला-समृद्ध और पिछड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी और औद्योगिक विकास को गति देगी।

भारत को वैश्विक ऊर्जा हब बनाने की दिशा

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि भारत अपने प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम और समझदारीपूर्ण उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन के जरिए भारत सिंथेटिक गैस, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आयात निर्भरता को कम कर सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह योजना लगभग 25 परियोजनाओं के माध्यम से करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकती है।

भविष्य की ऊर्जा रणनीति पर फोकस

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए भारत को अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है। रोडशो में उद्योग जगत और निवेशकों के साथ तकनीकी, वित्तीय और नीति संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा भी हुई।

मंत्रालय ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन को “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित किया जाएगा।


SECL दौरे में कोयला उत्पादन, डिजिटलीकरण और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर, छत्तीसगढ़ सीएम से हुई अहम चर्चा

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केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री, भारत सरकार, सतीश चंद्र दुबे ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) का एक दिवसीय दौरा किया, जिसके दौरान उन्होंने कंपनी के परिचालन प्रदर्शन, बुनियादी ढांचा पहलों और भविष्य की विकास योजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से भी मुलाकात की, जिसमें कोयला उत्पादन, अवसंरचना विकास, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, ऊर्जा सुरक्षा और राज्य में औद्योगिक विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय को मजबूत करने, प्रमुख विकास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने, संचालन को सुगम बनाने और कोयला-समृद्ध क्षेत्रों में आर्थिक विकास तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोयला क्षेत्र के विकास में दिए जा रहे निरंतर सहयोग की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण राज्य की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान को और मजबूत करेगा।

SECL मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कोयला उत्पादन, डिस्पैच, गुणवत्ता प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटलीकरण, पर्यावरणीय स्थिरता उपायों, कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं, माइन क्लोजर गतिविधियों, CSR पहलों और कंपनी की भविष्य की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की। इस बैठक में SECL के सीएमडी हरिश दुहन, कार्यकारी निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और SECL के अधिकारी उपस्थित रहे।

मंत्री ने सुरक्षित और सतत खनन प्रक्रियाओं, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि SECL भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और उत्पादन, गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों तथा पर्यावरण प्रबंधन में कंपनी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि CSR गतिविधियों को कोयला क्षेत्र में रहने वाले लोगों के समावेशी विकास और कल्याण पर केंद्रित रहना चाहिए।

इस अवसर पर SECL के सीएमडी हरिश दुहन ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में SECL ने कोल इंडिया के 100 मिलियन टन के संचयी उत्पादन लक्ष्य में 26.86 मिलियन टन का सर्वाधिक योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि कंपनी कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

SECL की डिजिटल परिवर्तन पहल के तहत मंत्री ने ई-डैडास (e-DADAS – Design and Drawings Approval in SECL) पोर्टल और अस्पताल प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (HMIS) पोर्टल का शुभारंभ किया। ई-डैडास पोर्टल प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से संबंधित इंजीनियरिंग डिज़ाइन और ड्रॉइंग के ऑनलाइन मूल्यांकन, निगरानी और अनुमोदन को सुगम बनाएगा, जिससे पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा। वहीं HMIS पोर्टल अस्पतालों में मरीजों के रिकॉर्ड और प्रबंधन प्रणाली के डिजिटलीकरण के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा।

दौरे के दौरान दुबे ने बिलासपुर स्थित इंदिरा विहार स्वास्थ्य केंद्र में अत्याधुनिक 5-पार्ट हेमेटोलॉजी एनालाइज़र यूनिट का भी उद्घाटन किया। यह उन्नत स्वचालित परीक्षण क्षमता से युक्त मशीन तेज और अधिक सटीक रक्त परीक्षण सुनिश्चित करेगी तथा स्वास्थ्य सेवाओं की निदान दक्षता को बढ़ाएगी। मंत्री ने स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं की समीक्षा भी की और SECL द्वारा चिकित्सा अवसंरचना एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।



सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक में मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने खनन क्षेत्र में सुधार एवं आत्मनिर्भर भारत पर दिया जोर

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केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने 14 मई 2026 को रांची में सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस समीक्षा बैठक में सीएमपीडीआई के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक चौधरी शिवराज सिंह, सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक नीलेंदु कुमार सिंह, एमईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक आई. डी. नारायण, सीएमपीडीआई के तकनीकी निदेशक तथा सीएमपीडीआई, सीसीएल और एमईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

समीक्षा के दौरान वर्ष 2025-26 में सीएमपीडीआई द्वारा अन्वेषण, प्रतिवेदन तैयार करना, पूंजीगत व्यय, अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व पहल तथा सौर परियोजनाओं के विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की गई। साथ ही वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों पर भी चर्चा की गई।

मंत्री ने सीएमपीडीआई के प्रदर्शन की सराहना करते हुए स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों तथा महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक अन्वेषण के महत्व पर बल दिया, जो देश की भविष्य की ऊर्जा एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने खरीद प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने तथा परियोजनाओं में देरी रोकने के लिए बाजार पहुंच में सुधार करने और अधिक बोलीदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने यह भी कहा कि खदान बंदी गतिविधियों को स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी सामाजिक-आर्थिक अवसरों में बदला जाना चाहिए। उन्होंने पुनः प्राप्त खनन क्षेत्रों में मखाना की खेती और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि इसे सरकार की “एक जिला, एक उत्पाद” पहल से जोड़ा जा सके। यह दूरदर्शी पहल परित्यक्त खनन क्षेत्रों को कृषि एवं जलीय कृषि परिसंपत्तियों में बदलकर स्थानीय लोगों को दीर्घकालिक और सतत आर्थिक सहायता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

बैठक के दौरान सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड तथा मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड के बीच कोयला तथा ऊर्जा एवं गैर-ऊर्जा खनिजों के अन्वेषण के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने हेतु 14 मई 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह संयुक्त अन्वेषण गतिविधियां देश में कोयला एवं अन्य खनिजों के राष्ट्रीय भंडार को बढ़ाने तथा नई खदानों के विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विजन को साकार करने, भारत की खनिज संपदा के विकास को गति देने तथा खनिज क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत में स्वदेशी टाइप-IV CNG कंपोजिट सिलेंडर निर्माण सुविधा स्थापित करने हेतु TDB और NTF Energy Solutions के बीच समझौता

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भारत सरकार के स्वच्छ ऊर्जा गतिशीलता को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने तथा आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत स्वदेशी विनिर्माण को सशक्त करने के दृष्टिकोण के अनुरूप, प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने दिल्ली स्थित M/s NTF Energy Solutions Private Limited के साथ “टाइप-IV CNG सिलेंडर के व्यावसायीकरण हेतु विनिर्माण सुविधा की स्थापना” नामक परियोजना के लिए एक समझौता किया है।

इस परियोजना का उद्देश्य उन्नत विनिर्माण सुविधा स्थापित करना है, जिसके माध्यम से अत्याधुनिक फिलामेंट वाइंडिंग, ब्लो मोल्डिंग और उच्च-दबाव परीक्षण तकनीकों का उपयोग कर स्वदेशी रूप से विकसित टाइप-IV कंपोजिट CNG सिलेंडरों का उत्पादन और व्यावसायीकरण किया जाएगा। यह पहल स्वच्छ परिवहन और उभरते ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए उन्नत गैस भंडारण प्रणालियों में भारत की घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक इस्पात सिलेंडरों का अगली पीढ़ी का विकल्प हैं, जो लगभग 75% तक वजन में कमी प्रदान करते हैं, जिससे वाहन की दक्षता बढ़ती है और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है। इन सिलेंडरों में जंग-रोधी पॉलिमर लाइनर, अनुकूलित CFRP ले-अप और उन्नत मैकेनिकल लॉकिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है, जो सुरक्षा, टिकाऊपन तथा रिसाव, कंपन और दबाव चक्रों के प्रति प्रतिरोध को बढ़ाते हैं। इनका डिज़ाइन 600 बार से अधिक बर्स्ट प्रेशर प्राप्त करता है, जो नियामक मानकों से काफी अधिक है और संचालन सुरक्षा को मजबूत बनाता है।

यह तकनीक NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित की गई है और इसे भारत के तेजी से बढ़ते CNG मोबिलिटी इकोसिस्टम को समर्थन देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना सरकार के स्वच्छ परिवहन, स्वच्छ ईंधन और उन्नत मोबिलिटी घटकों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।

प्रस्तावित सुविधा स्थानीय रूप से उपलब्ध कच्चे माल और उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग कर उच्च-दबाव कंपोजिट सिलेंडरों के लिए एक लागत-प्रतिस्पर्धी और भविष्य-उन्मुख उत्पादन प्रणाली विकसित करेगी। यह परियोजना आयात प्रतिस्थापन, तकनीकी आत्मनिर्भरता और देश में एक मजबूत स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

इस अवसर पर TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत टाइप-IV कंपोजिट सिलेंडरों का विकास और व्यावसायीकरण भारत के स्वच्छ गतिशीलता ढांचे और स्वदेशी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। NTF Energy Solutions को TDB का समर्थन सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह सतत परिवहन, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने वाली अगली पीढ़ी की तकनीकों को सक्षम बना रही है।”

NTF Energy Solutions Pvt. Ltd. के प्रबंध निदेशक नवीन जैन और निदेशक नमन जैन ने TDB के समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सहायता स्वदेशी हल्के कंपोजिट सिलेंडर तकनीकों के व्यावसायीकरण को तेज करेगी, जिससे कंपनी भारत के स्वच्छ और अधिक दक्ष गतिशीलता समाधान की दिशा में संक्रमण में योगदान दे सकेगी।

रूस के बाद भारत बनेगा फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला दूसरा देश: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि रूस के बाद भारत दुनिया का दूसरा देश होगा जो व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करेगा। “स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स” विषय पर सांसदों और विधायकों की कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का विकास कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिसने 6 अप्रैल 2026 को पहली बार क्रिटिकलिटी प्राप्त की।

यह रिएक्टर Indira Gandhi Centre for Atomic Research (IGCAR) द्वारा विकसित और BHAVINI द्वारा निर्मित है। यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत को दर्शाता है। इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग होता है, जो जितना ईंधन खर्च करता है उससे अधिक उत्पन्न करता है। इस उपलब्धि के साथ भारत अपने विशाल थोरियम भंडार के उपयोग की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता तरुण चुघ ने की। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि भारत को परमाणु रणनीति के तीसरे चरण में थोरियम के उपयोग की दिशा में ले जाती है। पूरी तरह संचालन में आने के बाद भारत, रूस के बाद, व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चलाने वाला दूसरा देश बन जाएगा।

वर्तमान में केवल रूस ही व्यावसायिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित कर रहा है, जबकि भारत अपने रिएक्टर के कमीशनिंग के उन्नत चरण में है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, जर्मनी और चीन जैसे कई देशों ने पहले प्रयोगात्मक फास्ट रिएक्टर विकसित किए थे, लेकिन इनमें से अधिकांश कार्यक्रम अब बंद हो चुके हैं।

मंत्री ने कहा कि प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की स्थापना भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो परमाणु ईंधन के अधिक कुशल उपयोग को सक्षम बनाता है और थोरियम के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।

उन्होंने यह भी कहा कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक में केवल कुछ ही देशों ने प्रगति की है, जिससे भारत को वैश्विक स्तर पर एक विशेष स्थान मिलता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, खासकर 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में।

उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को भविष्य में निरंतर और विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जहां परमाणु ऊर्जा अपरिहार्य होगी।

मंत्री ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs), नीतिगत समर्थन और SHANTI एक्ट जैसी पहलों के महत्व पर भी प्रकाश डाला, जो निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देंगे। “न्यूक्लियर मिशन” के तहत 20,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 2033 तक 5 SMRs स्थापित करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि SMRs उद्योगों, घनी आबादी वाले क्षेत्रों, दूरदराज के इलाकों और ग्रिड से दूर क्षेत्रों में बिजली उत्पादन के लिए उपयोगी होंगे।

अंत में, उन्होंने कहा कि परमाणु, नवीकरणीय और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का संतुलित मिश्रण 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कोयला मंत्रालय ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की

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नई दिल्ली: विक्रम देव दत्त  सचिव, कोयला मंत्रालय   ने 15वें दौर की वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी की शुरुआत की। इस अवसर पर अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार, कोल कंट्रोलर सजीश कुमार एन सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

इस दौर में कुल 11 कोयला ब्लॉकों की नीलामी की जा रही है, जिनमें 7 पूरी तरह से अन्वेषित और 4 आंशिक रूप से अन्वेषित खदानें शामिल हैं। इनमें से 3 खदानें कोल माइंस (स्पेशल प्रोविज़न) एक्ट, 2015 के तहत और 8 खदानें माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत पेश की गई हैं। इसके अलावा 13वें दौर के दूसरे प्रयास में 6 खदानें भी शामिल की गई हैं।

ये खदानें झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में स्थित हैं, जिससे निवेश बढ़ने, घरेलू कोयला उत्पादन में वृद्धि और रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

अब तक कोयला मंत्रालय 13 दौरों में 135 कोयला खदानों की सफल नीलामी कर चुका है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 325 मिलियन टन प्रतिवर्ष है।

अपने संबोधन में विक्रम देव दत्त ने कहा कि कोयला क्षेत्र में किए गए सुधार प्रधानमंत्री Narendra Modi के पारदर्शिता और दक्षता के विजन के अनुरूप हैं। उन्होंने बताया कि 2020 में शुरू की गई वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था ने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी और प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।

उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के लिए घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने, कोयला गैसीकरण जैसी स्वच्छ तकनीकों को अपनाने और वैज्ञानिक खदान बंद करने (माइन क्लोजर) पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने CSR गतिविधियों के माध्यम से कोयला क्षेत्रों में सामुदायिक विकास को मजबूत करने की बात कही।



अतिरिक्त सचिव रूपिंदर बरार ने भी सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक हितों के संतुलन पर जोर देते हुए कोयला क्षेत्र में नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम के दौरान तकनीक, नवाचार, कोयला गैसीकरण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। हितधारकों ने मिलकर एक आधुनिक, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर कोयला क्षेत्र के निर्माण की दिशा में विचार-विमर्श किया।

कोयला मंत्रालय का यह कदम देश में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने और कोयला क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम: ऊर्जा सुरक्षा हेतु कोयला—15वें वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी चरण का शुभारंभ

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कोयला मंत्रालय 17 अप्रैल 2026 को “आत्मनिर्भर भारत: ऊर्जा सुरक्षा के लिए कोयला” विषय पर एक हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultation) आयोजित करने जा रहा है, साथ ही वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामी के 15वें चरण का शुभारंभ भी किया जाएगा। यह कार्यक्रम मुंबई में आयोजित होगा, जिसमें श्री विक्रम देव दत्त, सचिव, कोयला मंत्रालय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह पहल भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने और आत्मनिर्भर राष्ट्र के विजन को आगे बढ़ाने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वाणिज्यिक कोयला खदान नीलामियों की उल्लेखनीय सफलता को आगे बढ़ाते हुए, कोयला मंत्रालय देश के ऊर्जा परिदृश्य को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत के बाद से घरेलू कोयले की उपलब्धता में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।

आगामी 15वां चरण इसी प्रगतिशील यात्रा को आगे बढ़ाता है। इसमें कोयला खदानों को अत्यंत उदार शर्तों पर उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा मिले, विविध निवेश आकर्षित हों और उद्योग की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो। इस चरण में पूरी तरह से अन्वेषित (fully explored) और आंशिक रूप से अन्वेषित (partially explored) कोयला ब्लॉकों की पेशकश की जाएगी, जिसमें अनुभवी खनन कंपनियों के साथ-साथ नए और तकनीक-आधारित उद्यमों को भी भाग लेने का अवसर मिलेगा।

यह पहल कोयला क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने, निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार सृजन और समग्र क्षेत्रीय विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वाणिज्यिक कोयला खनन ढांचे ने पारदर्शिता को बढ़ाया है, प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया है और सभी प्रतिभागियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए हैं। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उद्योगों के लिए कोयले की उपलब्धता बढ़ी है और आयात पर निर्भरता कम हुई है, जो आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।

वाणिज्यिक कोयला खनन देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभरा है, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है और विभिन्न उद्योगों के लिए कोयले की स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। आने वाला चरण इस मजबूत नींव को और सुदृढ़ करेगा और क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य में विश्वास को बढ़ाएगा।

कोयला मंत्रालय देश को विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ सतत विकास, नवाचार और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

स्वदेशी तकनीक की जीत: भारत का PFBR रिएक्टर हुआ सफल

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भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, 500 मेगावाट (MWe) प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को रात 08:25 बजे सफलतापूर्वक पहली क्रिटिकलिटी (नियंत्रित विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत) हासिल की। यह देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वदेशी परमाणु तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह उपलब्धि डॉ. अजीत कुमार मोहंती (सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग एवं अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग), श्रीकुमार जी. पिल्लई (निदेशक, IGCAR), अल्लू अनंत (CMD-इन-चार्ज, BHAVINI) और  के.वी. सुरेश कुमार (पूर्व CMD, BHAVINI) की उपस्थिति में हासिल की गई। यह सभी मानकों को पूरा करने के बाद संभव हुआ, जिन्हें परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने कठोर सुरक्षा समीक्षा के बाद मंजूरी दी थी।

PFBR का डिजाइन और तकनीकी विकास पूरी तरह से इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा किया गया, जो परमाणु ऊर्जा विभाग का एक अनुसंधान केंद्र है। इसका निर्माण और संचालन भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा किया गया।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पारंपरिक रिएक्टरों के विपरीत, PFBR में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग होता है। इसके कोर के चारों ओर यूरेनियम-238 की परत होती है, जो तेज न्यूट्रॉन की मदद से प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित हो जाती है। इससे रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक उत्पन्न करने में सक्षम होता है।

इस रिएक्टर को भविष्य में थोरियम-232 के उपयोग के लिए भी डिजाइन किया गया है, जो परिवर्तित होकर यूरेनियम-233 बनेगा और भारत के परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण को ऊर्जा प्रदान करेगा।

यह क्षमता देश के सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है और भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है।

पहली क्रिटिकलिटी हासिल करने के साथ ही भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को साकार करने के और करीब पहुंच गया है। फास्ट ब्रीडर तकनीक वर्तमान रिएक्टरों और भविष्य के थोरियम आधारित रिएक्टरों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है।

यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता को दर्शाती है। इस रिएक्टर में उन्नत सुरक्षा प्रणाली, उच्च तापमान तरल सोडियम कूलिंग तकनीक और क्लोज्ड फ्यूल साइकिल का उपयोग किया गया है, जिससे परमाणु सामग्री का पुनर्चक्रण संभव होता है और अपशिष्ट कम होता है।

यह परियोजना वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और उद्योग सहयोगियों के समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने स्वदेशी तकनीकों और उपकरणों के माध्यम से इसका निर्माण किया। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता को भी दर्शाता है।

ऊर्जा उत्पादन के अलावा, यह कार्यक्रम परमाणु ईंधन चक्र, उन्नत सामग्री, रिएक्टर भौतिकी और बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग में देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करता है।

जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विश्वसनीय, कम-कार्बन और उच्च दक्षता वाली ऊर्जा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पहली क्रिटिकलिटी की यह उपलब्धि न केवल एक तकनीकी मील का पत्थर है, बल्कि “विकसित भारत” के लिए एक सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में बड़ा कदम भी है।


वित्त वर्ष 2025–26 में कोयला क्षेत्र ने रचा इतिहास, उत्पादन 200 मिलियन टन के पार

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025–26 भारत के कोयला क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ है। इस दौरान कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से संयुक्त उत्पादन और आपूर्ति पहली बार 200 मिलियन टन (MT) के आंकड़े को पार कर गई है।

31 मार्च 2026 तक इन खदानों से कुल कोयला उत्पादन 210.46 मिलियन टन दर्ज किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 190.95 मिलियन टन की तुलना में 10.22% अधिक है। वहीं, डिस्पैच (आपूर्ति) भी बढ़कर 204.61 मिलियन टन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के 190.42 मिलियन टन के मुकाबले 7.35% की वृद्धि दर्शाता है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • 200 MT का ऐतिहासिक आंकड़ा पार: पहली बार उत्पादन और डिस्पैच 200 मिलियन टन से अधिक हुआ।

  • नई खदानों की शुरुआत: इस वर्ष 12 नई कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों को संचालन की अनुमति (MOP) मिली, जिससे 86 मिलियन टन वार्षिक क्षमता बढ़ी।

  • तेज उत्पादन शुरुआत: 7 खदानों ने उसी वित्त वर्ष में उत्पादन शुरू किया, जो तेज निष्पादन और बेहतर समन्वय को दर्शाता है।

पिछले चार वर्षों के आंकड़ों से उत्पादन और आपूर्ति में लगातार वृद्धि का रुझान देखने को मिला है, जो बेहतर लॉजिस्टिक्स और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को दर्शाता है।

यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की नीतियों, आसान अनुमोदन प्रक्रिया और क्षेत्र में सुधारों ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह प्रगति ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में अहम योगदान देगी। आने वाले समय में दक्षता, विस्तार और जिम्मेदार खनन पर जोर देते हुए यह क्षेत्र देश की औद्योगिक और आर्थिक वृद्धि को गति देता रहेगा।

पश्चिम एशिया की स्थिति के बीच भारत सरकार सतर्क, ऊर्जा आपूर्ति और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित

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पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत सरकार लगातार निगरानी रखते हुए ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री संचालन और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। 29 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार सरकार ने कई महत्वपूर्ण उपाय किए हैं।

ऊर्जा आपूर्ति बनी स्थिर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और भंडार पर्याप्त है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर ₹10 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई है और निर्यात पर शुल्क लगाकर घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित की है।

कुछ राज्यों में अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी देखी गई, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

गैस और एलपीजी आपूर्ति पर विशेष ध्यान

सीएनजी और घरेलू पाइप्ड गैस (PNG) को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि औद्योगिक आपूर्ति सीमित रूप से जारी है। एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और एक दिन में 55 लाख से अधिक सिलेंडर वितरित किए गए।

सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को बढ़ाकर 70% तक कर दिया है, जिससे होटल, ढाबा, उद्योग और अन्य क्षेत्रों को राहत मिलेगी।

राज्यों को सख्त निर्देश

राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने, दैनिक प्रेस ब्रीफिंग जारी करने और अफवाहों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। देशभर में हजारों छापेमारी कर कई सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

समुद्री सुरक्षा और संचालन सामान्य

सरकार के अनुसार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और बंदरगाह संचालन सामान्य रूप से जारी है। दो एलपीजी जहाज सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। अब तक 900 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा

विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहे हैं। 28 फरवरी से अब तक करीब 5.24 लाख भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं।

सरकार विभिन्न देशों से वैकल्पिक मार्गों के जरिए नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रही है।

सरकार की अपील

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें, ऊर्जा की बचत करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।


शहरी क्षेत्रों में PNG विस्तार को मिलेगा गति, 50 लाख नए कनेक्शन देने का लक्ष्य

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नई दिल्ली- विज्ञान भवन में आज शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) सेवाओं के विस्तार और आवश्यक सेवाओं की निरंतर आपूर्ति पर एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र और राज्यों के कई वरिष्ठ मंत्री, अधिकारी, नगर निकायों के प्रतिनिधि तथा गैस कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए।

बैठक में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उपभोक्ता मामले मंत्रालय के केंद्रीय मंत्रियों ने भाग लिया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मंत्री और अधिकारी भी उपस्थित रहे, जबकि कुछ राज्यों ने वर्चुअली हिस्सा लिया।

बैठक में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए PNG नेटवर्क का विस्तार जरूरी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की प्रस्तुति में PNG को LPG के मुकाबले अधिक सुरक्षित, सस्ता और पर्यावरण अनुकूल बताया गया। हालांकि, राइट ऑफ वे (RoW) मंजूरी, नगर निगम की अनुमति और ऊंचे शुल्क जैसी समस्याएं इसके विस्तार में बाधा बन रही हैं।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने शहरों को आर्थिक विकास का इंजन बताते हुए PNG विस्तार को मिशन मोड में लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने सिंगल विंडो क्लीयरेंस, बेहतर शहरी योजना और अंतिम छोर (last-mile) तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही 50 लाख नए PNG कनेक्शन देने का लक्ष्य भी रखा गया।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य का जिक्र करते हुए PNG इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया, जबकि उपभोक्ता मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति, अफवाहों पर रोक और ईंधन की कालाबाजारी रोकने की आवश्यकता बताई।

बैठक में राज्यों ने सुझाव दिया कि RoW शुल्क को कम या अस्थायी रूप से माफ किया जाए और मंजूरी प्रक्रिया को सरल व समयबद्ध बनाया जाए। साथ ही LPG से PNG में चरणबद्ध बदलाव के लिए जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि PNG नेटवर्क विस्तार को तेज करने के लिए ठोस कार्ययोजना, बेहतर समन्वय और नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।



पेट्रोलियम और LPG की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल और LPG की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सभी रिटेल फ्यूल आउटलेट्स के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है और देश के किसी भी हिस्से में किसी प्रकार की कमी नहीं है। मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की जानबूझकर फैलाई गई, भ्रामक और सामूहिक अफवाहों पर विश्वास न करें, जो अनावश्यक घबराहट फैलाने के लिए सोशल मीडिया पर साझा की जा रही हैं।

पेट्रोल और डीजल: कोई कमी नहीं, कोई राशनिंग नहीं

  1. भारत ऊर्जा सुरक्षा का एक मॉडल है। भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक है, जो 150 से अधिक देशों को ईंधन आपूर्ति करता है। भारत एक नेट निर्यातक देश है, इसलिए घरेलू पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से सुनिश्चित है। देश के 1 लाख से अधिक रिटेल फ्यूल आउटलेट्स पूरी तरह से खुले हैं और बिना किसी रुकावट के ईंधन प्रदान कर रहे हैं। किसी भी आउटलेट को राशनिंग करने के लिए नहीं कहा गया है।

क्रूड ऑइल आपूर्ति: कोई अंतर नहीं

  1. हॉर्मुज जलसंधि की स्थिति के बावजूद, भारत वर्तमान में दुनिया भर के 41 से अधिक आपूर्तिकर्ताओं से पहले से अधिक क्रूड ऑइल प्राप्त कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उच्च मात्रा उपलब्ध होने के कारण किसी भी व्यवधान की भरपाई हो गई है। सभी भारतीय रिफाइनरियां 100% से अधिक क्षमता पर चल रही हैं। अगले 60 दिनों की क्रूड आपूर्ति पहले से ही तय कर ली गई है।

स्ट्रैटेजिक रिजर्व: वास्तविक स्थिति

  1. अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि देश में केवल 6 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। वास्तविकता यह है कि भारत के पास कुल 74 दिनों की रिजर्व क्षमता है और वर्तमान में लगभग 60 दिनों का स्टॉक मौजूद है, जिसमें क्रूड, उत्पाद स्टॉक और स्ट्रैटेजिक स्टोरेज शामिल हैं। इसलिए किसी भी तरह की कमी की बात करना पूरी तरह गलत है।

LPG: उत्पादन बढ़ा, आयात कम, आपूर्ति सुनिश्चित

  1. LPG की कोई कमी नहीं है। घरेलू रिफाइनरी उत्पादन को 40% बढ़ाकर दैनिक 50 हजार मीट्रिक टन किया गया है, जो हमारी आवश्यकताओं का 60% से अधिक है। कुल आवश्यकता लगभग 80 हजार मीट्रिक टन है। आयात की आवश्यकता घटकर 30 हजार मीट्रिक टन रह गई है। 800 हजार मीट्रिक टन सुनिश्चित एलपीजी कार्गो पहले से ही अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से भारत के 22 एलपीजी आयात टर्मिनलों में आ रहा है। रोजाना 50 लाख सिलेंडर सफलतापूर्वक वितरित किए जा रहे हैं।

PNG: लंबी अवधि की योजना, संकट प्रतिक्रिया नहीं

  1. पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा दिया जा रहा है क्योंकि यह सस्ता, साफ और सुरक्षित ईंधन है। भारत वर्तमान में 92 MMSCMD गैस घरेलू रूप से उत्पादन करता है, कुल दैनिक आवश्यकता 191 MMSCMD है। PNG कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ हो गए हैं। PNG को LPG की कमी के कारण नहीं बल्कि दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के हिस्से के रूप में बढ़ाया जा रहा है।

मंत्रालय की चेतावनी: भ्रामक जानकारी के खिलाफ कार्रवाई

  1. मंत्रालय ने गंभीर चिंता व्यक्त की है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और पोस्ट फैल रही हैं, जो कतिपय देशों में राशनिंग की झूठी जानकारी देकर भारत में संकट का भ्रम फैला रही हैं।

  2. कुछ पोस्ट सरकारी आदेशों को आपात स्थिति के रूप में गलत तरीके से पेश कर रही हैं, जबकि वे केवल सामान्य प्रशासनिक उपाय हैं।

  3. इस भ्रामक जानकारी के फैलाव से अनावश्यक चिंता और अफवाहें पैदा हो रही हैं। मंत्रालय सभी नागरिकों से अनुरोध करता है कि वे ईंधन और गैस की उपलब्धता के बारे में केवल आधिकारिक सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। गलत जानकारी फैलाना कानून के तहत अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस एवं डीजल-पेट्रोल का पर्याप्त स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था पर सतत निगरानी के निर्देश

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खाद्य सचिव रीना कंगाले ने आयल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर दिए आवश्यक दिशानिर्देश

शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-3663 जारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के लिए आज मंत्रालय महानदी भवन में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने सभी ऑयल कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में घरेलू एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता एवं आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की।

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में संचालित सभी 5 एलपीजी बॉटलिंग प्लांटों में एलपीजी गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। इस अवसर पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को राज्य में एलपीजी गैस की दैनिक आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए, ताकि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बैठक में ऑयल कंपनी के अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि कमर्शियल एलपीजी सिलेण्डर वर्तमान में केवल विशेष अत्यावश्यक संस्थाओं, जैसे अस्पतालों एवं शैक्षणिक संस्थाओं को ही सप्लाई किए जा रहे हैं। इस पर खाद्य सचिव रीना कंगाले ने निर्देशित किया कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों की परीक्षाएँ चल रही हैं, इसलिए शैक्षणिक संस्थाओं एवं छात्रावासों को गैस सिलेण्डर की आपूर्ति सुनिश्चित कराई जाए।

बैठक के दौरान सचिव कंगाले ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर 15 प्रतिशत कमर्शियल सप्लाई होटलों आदि को भी दिए जाने पर विचार किया जाए, ताकि आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को भी सीमित स्तर पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही जिलों में एलपीजी गैस के दुरुपयोग तथा अवैध गैस रिफिलिंग की रोकथाम के लिए भी कड़े निर्देश दिए गए। इस संबंध में जिला प्रशासन को आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या कालाबाजारी को रोका जा सके।

बैठक में राज्य में डीजल, पेट्रोल एवं सीएनजी गैस की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। ऑयल कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के तीनों डीजल-पेट्रोल डिपो में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध है। इस पर संचालक खाद्य एवं ऑयल कंपनी के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि डीजल और पेट्रोल की दैनिक आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था पर भी नियमित निगरानी रखी जाए।

खाद्य सचिव  कंगाले ने राज्य के उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश में एलपीजी गैस तथा डीजल-पेट्रोल की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में है और इन पेट्रोलियम पदार्थों की किसी प्रकार की कमी या शॉर्टेज नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों के माध्यम से गैस सिलेण्डर की आपूर्ति नियमानुसार नियमित रूप से की जा रही है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत या जानकारी के लिए उपभोक्ता टोल फ्री कॉल सेंटर नंबर 1800-233-3663 पर संपर्क कर सकते हैं।

मोपीएनजी ने मुंबई में upstream-focused कार्यक्रम आयोजित किया, तेल-गैस क्षेत्र में निवेश और सुधारों पर जोर

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मुंबई- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने मुंबई में एक दिन का upstream-focused कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय upstream ऑपरेटर, E&P सेवा प्रदाता, वैश्विक कंसल्टिंग फर्म, वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियाँ, अकादमिक और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में भारत के upstream सुधार एजेंडा और निवेश अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप  सिंह पुरी ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि हाल के विधायी, नियामक और नीति सुधार भारत के upstream क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आए हैं। इन सुधारों और डेटा-आधारित खोज पहलों ने विशेषकर भारत के offshore और frontier क्षेत्रों में निवेश के अवसर खोल दिए हैं। उन्होंने निवेशकों के लिए स्थिर, पारदर्शी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ढांचा प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

कार्यक्रम के प्रमुख घटक

कार्यक्रम में निम्न सत्र शामिल थे:

  • भारत की E&P वृद्धि के लिए वित्त पोषण पर कार्यशाला

  • Oilfields (Regulation and Development) Act में संशोधन, Petroleum and Natural Gas Rules और Model Revenue Sharing Contract (MRSC) पर सत्र

  • आगामी upstream bid rounds के लिए bid promotion event

MoPNG और Directorate General of Hydrocarbons (DGH) के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभागियों से विभिन्न सत्रों में व्यापक बातचीत की।

E&P वृद्धि के लिए वित्त पोषण: नई चुनौतियाँ और समाधान

इस सत्र में upstream निवेश के बढ़ते जोखिम और पूंजी जरूरतों पर चर्चा हुई। वैश्विक कंसल्टिंग फर्मों (S&P Global, Deloitte, A.T. Kearney, EY) ने upstream वित्त पोषण मॉडल, जोखिम आवंटन और पूंजी जुटाने के अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण साझा किए।

बैंक और बीमा कंपनियों (State Bank of India, New India Assurance, Bajaj Allianz) ने जोखिम मूल्यांकन, exposure और बैंक गारंटी ढांचों के बारे में जानकारी दी।

कार्यशाला में चर्चा के मुख्य बिंदु:

  • upstream परियोजनाओं के वित्त पोषण के वर्तमान अभ्यास

  • balance-sheet आधारित lending की सीमाएँ

  • bank guarantee आवश्यकताओं का पूंजी दक्षता पर प्रभाव

  • insurance-backed surety bonds जैसे नए जोखिम-रहित वित्तीय उपकरण

MoPNG सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि timely और पर्याप्त पूंजी उपलब्धता upstream निष्पादन के लिए निर्णायक होगी।

ORD Act, PNG Rules और MRSC: नीति से अनुबंध तक स्पष्टता

विशेष सत्र में संशोधित Oilfields (Regulation and Development) Act, revised Petroleum and Natural Gas Rules, और updated MRSC की जानकारी दी गई।
MoPNG ने बताया कि ये सुधार upstream निवेशकों के लिए स्थिर और भविष्यसूचक नियमों का ढांचा प्रदान करते हैं, जिससे exploration गतिविधि के विस्तार में मदद मिलेगी।

DGH ने बताया कि updated MRSC इन सुधारों को लागू करने में सहायक है और नीति-इरादे तथा अनुबंध कार्यान्वयन में तालमेल सुनिश्चित करता है।

नई Upstream Bid Rounds: सुधारों को अवसर में बदलना

Bid promotion सत्र में आगामी bid rounds और निवेश अवसरों का विस्तार से परिचय कराया गया।

DGH के DG श्रीकांत नागुलपल्ली ने आगामी bid rounds की जानकारी दी:

  • OALP Bid Round X: 25 exploration blocks, 182,589 sq km (91% offshore)

  • DSF Bid Round IV: 9 contract areas, 55 discoveries, ~200 MMTOE 2P reserves

  • CBM Bid Rounds 2025–26: 16 blocks, 74 BCM prognosticated gas (2025), 200 BCM (2026)

डाटा और डिजिटल टेक्नोलॉजी: आगे की दिशा

University of Houston ने भारत के East Coast basins की prospectivity पर insights दिए।
Schlumberger ने डिजिटल समाधान के माध्यम से frontier और underexplored basins में investment अवसरों को दिखाया।

भारत की upstream निवेश कहानी: मजबूत रणनीतिक केस

सत्र में यह भी बताया गया कि भारत के हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में निवेश के लिए प्रमुख कारण हैं:

  • 3.9 बिलियन टन oil equivalent का yet-to-find resource potential

  • बड़ा घरेलू बाजार और पूर्ण marketing/pricing freedom

  • revenue-sharing contracts के तहत कम नियामक बोझ

  • National Data Repository के माध्यम से high-quality E&P data

  • घरेलू उत्पादन और energy security बढ़ाने के लिए मजबूत नीति

निष्कर्ष

MoPNG के इस upstream-focused कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि भारत की upstream सुधार यात्रा निवेशकों के लिए नए अवसर और विश्वास पैदा कर रही है। नीति, डेटा, वित्त और तकनीकी क्षमता के संयोजन से भारत का upstream क्षेत्र वैश्विक निवेश आकर्षण बन रहा है।


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