Media24Media.com: जल जीवन मिशन 2.0 के तहत यूपी के साथ अहम MoU

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जल जीवन मिशन 2.0 के तहत यूपी के साथ अहम MoU

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ग्रामीण पेयजल प्रबंधन में संरचनात्मक सुधारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत उत्तर प्रदेश राज्य के साथ एक सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) आज हस्ताक्षरित किया गया। इसके साथ ही राज्य ने मिशन के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। जल जीवन मिशन 2.0 को 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

यह MoU केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

यह MoU जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) की संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीणा नाइक और उत्तर प्रदेश सरकार के नमामि गंगे एवं ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव के बीच हस्ताक्षरित और आदान-प्रदान किया गया।

इस अवसर पर DDWS के सचिवअशोक के. के. मीणा, अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन, यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 अब सुनिश्चित सेवा वितरण, जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं और इनका समय पर उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति सरकार की शून्य-सहनशीलता नीति को भी दोहराया।

मंत्री ने बताया कि SBI रिसर्च के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत लगभग 9 करोड़ महिलाओं को रोजाना पानी लाने के कठिन कार्य से राहत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल की सार्वभौमिक पहुंच से प्रतिदिन करीब 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो सकती है और दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख वार्षिक मौतों को रोका जा सकता है।

उन्होंने जल संरक्षण और जन भागीदारी पर भी जोर देते हुए कहा कि जल संचय, वर्षा जल संचयन और स्रोत की स्थिरता पर समान ध्यान देना आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जल जीवन मिशन से पहले राज्य के बहुत कम गांवों में पाइप से पेयजल उपलब्ध था। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का उल्लेख किया और बताया कि अब स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं के कारण मृत्यु दर लगभग शून्य के करीब आ गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल और शौचालय सुविधाएं उपलब्ध होने से छात्राओं के ड्रॉपआउट में कमी आई है। राज्य सरकार अब नियमित और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इस MoU में 11 प्रमुख सुधार क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें पेयजल प्रबंधन की संस्थागत संरचना, तकनीकी अनुपालन, जल गुणवत्ता, डिजिटल डेटा प्रबंधन, जन भागीदारी, क्षमता निर्माण और वित्तीय स्थिरता शामिल हैं।

MoU के तहत ग्राम पंचायत आधारित, सेवा-उन्मुख और समुदाय केंद्रित जल प्रबंधन मॉडल को लागू किया जाएगा। साथ ही, पूर्ण हो चुकी योजनाओं को “जल अर्पण” प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायतों और समुदायों को सौंपा जाएगा।

इसमें डिजिटल योजना प्लेटफॉर्म (DSS), “जल सेवा आंकलन”, “मेरी पंचायत” ऐप और “जल उत्सव” जैसे अभियानों का भी प्रावधान है। राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026 की शुरुआत 8 मार्च 2026 को हुई और यह 22 मार्च 2026 (विश्व जल दिवस) तक चलेगा।

जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही जन भागीदारी और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह पहल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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