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विशेष लेख -सहूलियत, सम्मान और सेहत...हर घर नल से बदली जिंदगी

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रोज सुबह उठते ही घर में नल से साफ पानी आते देखने की खुशी क्या होती है, इसे कमली से पूछिए। उप मुख्यमंत्री अरुण साव को अपने आंगन में लगे नल से आ रहे पानी की धार को दिखाते खुशी से उनकी आंखें डबडबा गईं। जल जीवन मिशन ने कमली जैसी हजारों महिलाओं को अमूल्य खुशियां दी हैं। कभी पीने और निस्तारी के पानी के लिए दिनभर चिंतित रहने वाली इन महिलाओं का जीवन घर में लगे नल ने बदल दिया है।

उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव अपने चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान जल जीवन मिशन का काम देखने कमली के भी गांव पहुंचे। कमली के गांव बस्तर जिले के तोकापाल विकासखण्ड के दुगनपाल में उन्होंने कुछ और घरों में भी जाकर नल से पानी आते देखा। जल जीवन मिशन से घर में पानी पहुंचने की खुशी सभी महिलाओं के चेहरे पर दिख रही थी।

जल जीवन मिशन दूरस्थ गांवों और वनांचलों की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है। आधी आबादी के एक बड़े हिस्से को पीने के पानी के लिए रोज जूझना पड़ता था। खासतौर से गर्मियों के दिनों में जब हर साल सिर पर पानी के बर्तन का सफर कुछ सौ मीटरों से कुछ किलोमीटरों में बदल जाता था। 

जीवन के लिए अनिवार्य जरुरत पानी की व्यवस्था गर्मियों में महिलाओं का जीवन दुष्कर बना देती थी। दुगनपाल में भी महिलाओं को रोज गांव के हैंडपंप या कुआं पर जाकर घर के सभी लोगों के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता था। घर में नल लग जाने से अब इस समस्या से निजात मिल गई है। जल जीवन मिशन के काम जैसे-जैसे पूरे होते जा रहे हैं, महिलाओं की बाहर से पानी लाने की चिंता और तकलीफ दूर होते जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक साढ़े आठ हजार से अधिक योजनाओं को पूर्ण कर संचालन के लिए पंचायतों को सौंपा जा चुका है।

जल जीवन मिशन महज हर घर तक पेयजल पहुंचाने की योजना नहीं है। यह महिलाओं की दिनचर्या और जीवन में भी बड़ा बदलाव ला रहा है। गांवों में परंपरागत रूप से घर में पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पानी के इंतजाम का जिम्मा महिलाओं पर ही है। घर तक पानी की पहुंच न होने के कारण उन्हें हैंडपंपो, सार्वजनिक नलों, कुंओं या अन्य स्रोतों से रोज पूरे परिवार के लिए जल संग्रहण करना पड़ता है। 

रोजाना का यह श्रमसाध्य और समयसाध्य काम बारिश तथा भीषण गर्मी के दिनों में और कठिन हो जाता है। कई इलाकों में गर्मियों में जलस्रोतों के सूख जाने के कारण दूर-दूर से पानी लाने की मजबूरी रहती है। परिवार के लिए पानी की व्यवस्था हर दिन का संघर्ष बन जाता है। महिलाओं के दिन के कई घंटे इसी काम में निकल जाते हैं।

जल जीवन मिशन हर घर तक नल से जल पहुंचाने के साथ ही महिलाओं को कई समस्याओं से निजात दिला रहा है। घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचने से वे कई चिंताओं से मुक्त हो गई हैं। अब रोज-रोज पानी के लिए बहुत सारा श्रम और समय नहीं लगाना पड़ता। इससे उन्हें घर के दूसरे कामों, बच्चों की परवरिश, खेती-बाड़ी एवं आजीविका के अन्य कार्यों के लिए अधिक समय मिल रहा है और वे इन कार्यों पर अपना ज्यादा ध्यान व समय दे पा रही हैं।

जल जीवन मिशन से बारहों महीने घर पर ही जलापूर्ति से लगातार बारिश तथा गर्मी के दिनों में बाहर से पानी लाने की मुसीबत दूर हो गई है। गर्मियों में जलस्तर के नीचे चले जाने से तथा बरसात में लगातार बारिश से जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है। गुणवत्ताहीन पेयजल से पेट तथा निस्तारी के लिए खराब जल के उपयोग से त्वचा संबंधी रोगों का खतरा रहता है। जल जीवन मिशन ने सेहत के इन खतरों को भी दूर कर दिया है।

जल जीवन मिशन 2.0 को गति देने के लिए जिला कलेक्टरों के 8वें पेयजल संवाद का आयोजन

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जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों का 8वां पेयजल संवाद आयोजित किया। इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर/उपायुक्त तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के जल जीवन मिशन (JJM) के मिशन निदेशक शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के कार्यान्वयन को तेज करना और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना था।

इस संवाद की अध्यक्षता DDWS के सचिव अशोक के.के. मीना ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन तथा DDWS के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

सचिव ने अपने संबोधन में बताया कि 2019 में शुरू हुए जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप और सामुदायिक स्रोतों पर निर्भरता को घटाकर घर-घर नल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी प्रगति हुई है। कोविड काल की चुनौतियों के बावजूद मिशन ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और अब इसे दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है। वर्तमान में लगभग 81% ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध है।

उन्होंने स्थिरता (Sustainability) पर जोर देते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे का निर्माण केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से हुआ है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक कार्यक्षमता स्थानीय शासन पर निर्भर करती है। JJM 2.0 के तहत गांव के भीतर की जल आपूर्ति व्यवस्था ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी, जबकि बड़े ढांचे राज्य सरकारों के पास रहेंगे। ग्राम पंचायतों को स्थानीय सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करना होगा और ग्राम सभाओं के माध्यम से समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने जिला स्तर पर सेवा सुधार के लिए DWSM बैठकों के महत्व पर भी जोर दिया और जिला कलेक्टरों से हर महीने नियमित बैठकें करने, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं की समीक्षा करने तथा विवरण डैशबोर्ड पर अपलोड करने का आग्रह किया।

सचिव ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2024 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के क्रियान्वयन में जिला कलेक्टरों की जिम्मेदारी बढ़ गई है, जिसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जा रही है।

अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने कहा कि JJM 2.0 और अन्य सुधारों के तहत जिला स्तर के नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर मिशन के लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन, समन्वय और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगामी 22 मई 2026 को होने वाली जिला कलेक्टरों की बैठक में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया, जिसमें JJM 2.0 और SBM-G के तहत प्राथमिक कार्यों पर दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

परियोजना निगरानी और सुधार प्रणाली पर प्रस्तुति

बैठक में सुजलम भारत PM गति शक्ति मोबाइल ऐप के प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग मॉड्यूल पर प्रस्तुति दी गई, जिसके माध्यम से जल जीवन मिशन की योजनाओं की निर्माण, परीक्षण, कमीशनिंग और हैंडओवर तक की निगरानी की जा सकती है।

इसके साथ ही व्यापक कार्यान्वयन और सुधार योजना (CIRP) फ्रेमवर्क पर भी प्रस्तुति दी गई, जिसमें भौतिक प्रगति, वित्तीय प्रबंधन, जल गुणवत्ता, शासन सुधार और डिजिटल निगरानी को शामिल किया गया है।

जिलों द्वारा सर्वोत्तम प्रथाओं की प्रस्तुति

नागपुर (महाराष्ट्र):

जल संकट वाले क्षेत्र में सोलर आधारित पंप और वर्षा जल संचयन से 24 घंटे जल आपूर्ति सुनिश्चित की गई, जिससे लागत में भारी कमी आई।

कोरापुट (ओडिशा):

पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंग आधारित प्रणाली, सोलर योजनाएं और डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से जल आपूर्ति मजबूत की गई।

कोल्लम (केरल):

100% मीटरिंग, 24 घंटे शिकायत निवारण प्रणाली और 24 घंटे जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई।

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश):

नदी पुनर्जीवन, तालाब संरक्षण और समुदाय आधारित जल संरक्षण अभियानों के माध्यम से जल स्तर में सुधार किया गया।

पाली (राजस्थान):

जल संकट से निपटने के लिए भूजल और सतही जल के संयोजन, वर्षा जल संचयन और रिचार्ज संरचनाओं को अपनाया गया।

धनबाद (झारखंड):

डिजिटल ऐप के माध्यम से जल संपत्तियों की निगरानी, तालाब पुनर्जीवन और सूखे बोरवेल्स को पुनः सक्रिय किया गया।

निष्कर्ष

इन प्रस्तुतियों ने जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे प्रयासों, चुनौतियों और नवाचारों को उजागर किया। अंत में अतिरिक्त सचिव कमल किशोर सोआन ने जिला कलेक्टरों की सक्रिय भूमिका को मिशन की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत मेघालय ने केंद्र के साथ सुधार-आधारित MoU पर किए हस्ताक्षर

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ग्रामीण जल आपूर्ति को परिणाम-आधारित और सेवा-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए मेघालय, जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने वाला 12वां राज्य बन गया है। यह कदम राज्य के JJM 2.0 के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में औपचारिक प्रवेश को दर्शाता है, जिसे 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

यह MoU केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की वर्चुअल उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ।

बैठक में मेघालय सरकार के पीएचई मंत्री मार्कुइज़ एन. मराक, आयुक्त एवं सचिव प्रवीण बक्शी, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) के सचिव अशोक के. के. मीना, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना ने कहा कि यह MoU केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर सतत जल सेवाओं को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। उन्होंने विकेंद्रीकरण और सामुदायिक भागीदारी पर जोर देते हुए बताया कि ग्राम पंचायतों और गांव जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSCs) को जल आपूर्ति प्रणालियों के संचालन और प्रबंधन में सशक्त बनाया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री सी. आर. पाटिल ने मेघालय की प्रगति की सराहना करते हुए बताया कि राज्य ने 83% से अधिक ग्रामीण नल जल कवरेज हासिल कर लिया है और जल्द ही 100% लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जल जीवन मिशन की समयसीमा को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, और इसके लिए अतिरिक्त ₹1.51 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें 2025–26 के बजट में लगभग ₹67,300 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हर घर तक स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण और सतत जल प्रबंधन पर भी जोर दिया तथा मनरेगा और अन्य योजनाओं के माध्यम से जल स्रोतों को मजबूत करने की बात कही।

मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने केंद्र सरकार और जल शक्ति मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मेघालय, जो पहले ग्रामीण नल जल कवरेज में पिछड़े राज्यों में था, अब 83.59% कवरेज तक पहुंच गया है। उन्होंने राज्य की जल नीति (2019) और क्लाइमेट काउंसिल जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि विभिन्न विभाग मिलकर जल प्रबंधन पर काम कर रहे हैं।

यह सुधार-आधारित MoU सुनिश्चित करेगा कि हर ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता के साथ नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध हो। साथ ही, सामुदायिक भागीदारी और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से जल आपूर्ति प्रणालियों का सतत संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और दीर्घकालिक जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

भारत-श्रीलंका सहयोग को नई दिशा: जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन पर साझा अनुभव

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श्रीलंका की संसद की इंफ्रास्ट्रक्चर और स्ट्रैटेजिक डेवलपमेंट संबंधी सेक्टोरल ओवरसाइट कमेटी का एक उच्चस्तरीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल, एस. एम. मरिक्कर, सांसद (अध्यक्ष) के नेतृत्व में, इस समय भारत के एक सप्ताह के आधिकारिक अध्ययन दौरे पर है।

इस दौरे के तहत जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने प्रतिनिधिमंडल के लिए जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (SBM-G) पर एक विस्तृत प्रस्तुति का आयोजन किया।

इस अवसर पर DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना, अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (NJJM) कमल किशोर सोअन सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए सचिव, DDWS अशोक के. के. मीना ने बताया कि भारत में केंद्र और राज्य सरकारें बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को ग्राम पंचायतों के माध्यम से लागू करती हैं, ताकि जमीनी स्तर पर लोगों तक आवश्यक सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकें। उन्होंने बताया कि भारत में ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता के लिए दो प्रमुख मिशन—जल जीवन मिशन (2019) और स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण (2014)—लागू किए जा रहे हैं।

उन्होंने इन मिशनों के क्रियान्वयन से जुड़े चार प्रमुख बिंदुओं को साझा किया:

  • ग्राम पंचायतों के माध्यम से विकेंद्रीकरण और समुदाय आधारित सेवा वितरण

  • विभिन्न विभागों के बीच समन्वय

  • पारदर्शिता और निगरानी के लिए तकनीक का उपयोग

  • सतत विकास, जैसे ग्रे-वॉटर प्रबंधन और वर्षा जल संचयन

इसके बाद जल जीवन मिशन के निदेशक हरि नारायणन मुरुगन ने भारत-श्रीलंका पेयजल सहयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाने की घोषणा की थी, जिसके बाद जल जीवन मिशन शुरू किया गया। वर्तमान में 17% से बढ़कर 82% ग्रामीण घरों तक नल जल पहुंच चुका है और 15 करोड़ से अधिक घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार ने मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाकर JJM 2.0 के रूप में लागू करने का निर्णय लिया है, जिसमें संचालन, रखरखाव, जनभागीदारी और सतत जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्वच्छ भारत मिशन–ग्रामीण पर प्रस्तुति देते हुए उप सचिव कृतिका कुलहरी ने बताया कि यह मिशन 2014 में शुरू हुआ था और 2019 तक पूरे देश को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया। अब इसका दूसरा चरण ODF प्लस और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित है।

उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत:

  • 12 करोड़ से अधिक शौचालय बनाए गए

  • 2.72 लाख से अधिक सामुदायिक शौचालय परिसरों का निर्माण हुआ

  • शौचालय निर्माण के लिए ₹12,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है

इसके बाद एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें श्रीलंकाई प्रतिनिधियों ने भारत के अनुभवों से सीखने में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने अपने देश में जल स्रोतों में भारी धातुओं (जैसे पारा) की समस्या और जल शुद्धिकरण की उच्च लागत जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया तथा सस्ती और प्रभावी तकनीकों के लिए सहयोग का आग्रह किया।

कार्यक्रम के समापन पर संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक ने कहा कि भारत और श्रीलंका आपसी सहयोग और ज्ञान साझा करने के माध्यम से जल प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं।

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत यूपी के साथ अहम MoU

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ग्रामीण पेयजल प्रबंधन में संरचनात्मक सुधारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत उत्तर प्रदेश राज्य के साथ एक सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) आज हस्ताक्षरित किया गया। इसके साथ ही राज्य ने मिशन के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। जल जीवन मिशन 2.0 को 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

यह MoU केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

यह MoU जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) की संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीणा नाइक और उत्तर प्रदेश सरकार के नमामि गंगे एवं ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव के बीच हस्ताक्षरित और आदान-प्रदान किया गया।

इस अवसर पर DDWS के सचिवअशोक के. के. मीणा, अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन, यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 अब सुनिश्चित सेवा वितरण, जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं और इनका समय पर उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति सरकार की शून्य-सहनशीलता नीति को भी दोहराया।

मंत्री ने बताया कि SBI रिसर्च के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत लगभग 9 करोड़ महिलाओं को रोजाना पानी लाने के कठिन कार्य से राहत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल की सार्वभौमिक पहुंच से प्रतिदिन करीब 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो सकती है और दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख वार्षिक मौतों को रोका जा सकता है।

उन्होंने जल संरक्षण और जन भागीदारी पर भी जोर देते हुए कहा कि जल संचय, वर्षा जल संचयन और स्रोत की स्थिरता पर समान ध्यान देना आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जल जीवन मिशन से पहले राज्य के बहुत कम गांवों में पाइप से पेयजल उपलब्ध था। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का उल्लेख किया और बताया कि अब स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं के कारण मृत्यु दर लगभग शून्य के करीब आ गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल और शौचालय सुविधाएं उपलब्ध होने से छात्राओं के ड्रॉपआउट में कमी आई है। राज्य सरकार अब नियमित और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इस MoU में 11 प्रमुख सुधार क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें पेयजल प्रबंधन की संस्थागत संरचना, तकनीकी अनुपालन, जल गुणवत्ता, डिजिटल डेटा प्रबंधन, जन भागीदारी, क्षमता निर्माण और वित्तीय स्थिरता शामिल हैं।

MoU के तहत ग्राम पंचायत आधारित, सेवा-उन्मुख और समुदाय केंद्रित जल प्रबंधन मॉडल को लागू किया जाएगा। साथ ही, पूर्ण हो चुकी योजनाओं को “जल अर्पण” प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायतों और समुदायों को सौंपा जाएगा।

इसमें डिजिटल योजना प्लेटफॉर्म (DSS), “जल सेवा आंकलन”, “मेरी पंचायत” ऐप और “जल उत्सव” जैसे अभियानों का भी प्रावधान है। राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026 की शुरुआत 8 मार्च 2026 को हुई और यह 22 मार्च 2026 (विश्व जल दिवस) तक चलेगा।

जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही जन भागीदारी और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह पहल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीने के पानी और स्वच्छता विभाग ने ‘सजल ग्राम संवाद’ का दूसरा संस्करण आयोजित किया, ग्रामीण जल जीवन मिशन में भागीदारी और नवाचार को सुदृढ़ किया

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पीने के पानी और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आज ‘सजल ग्राम संवाद’ के दूसरे संस्करण का सफल आयोजन किया, जो भारत सरकार की सहभागी जल शासन और जल जीवन मिशन (JJM) की सामुदायिक-नेतृत्व वाली कार्यान्वयन प्रतिबद्धता को मजबूती प्रदान करता है।

इस वर्चुअल संवाद में ग्राम पंचायत प्रतिनिधि, ग्राम जल और स्वच्छता समिति (VWSC) के सदस्य, समुदाय के लोग, महिला स्व-सहायता समूह (SHG) और मोर्चा कार्यकर्ता, साथ ही जिला कलेक्टर/डेप्युटी कमिश्नर, जिला पंचायत के CEO, DWSM अधिकारी और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

दूसरे संस्करण में 8,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें ग्राम पंचायत स्तर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल थे।

मुख्य ग्रामीण अनुभव और उदाहरण:

  • जाहीरपुरा, मेहसाणा, गुजरात: केंद्रीय जल शक्ति मंत C. R. पाटिल ने ग्रामीणों से गुजराती में संवाद किया। ग्रामीणों ने साफ पानी की उपलब्धता से होने वाले स्वास्थ्य लाभ, चिकित्सा खर्च में बचत और बच्चों की शिक्षा में निवेश को साझा किया। सक्रिय पानी समिति द्वारा ₹700 प्रति घर उपयोग शुल्क संग्रह और संचालन-रखरखाव में योगदान पर जोर दिया गया।

  • कोडी, उदूपी, कर्नाटक: राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने कन्नड़ में संवाद किया। गांव ने 24×7 जल आपूर्ति, नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण, नाल जल मित्रों की भूमिका और वित्तीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया।

  • पचेक्खानी, पाक्योंग, सिक्किम: VWSC सदस्यों, बच्चों और समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत हुई, जहां मजबूत WASH तंत्र के योगदान और शिकायत निवारण प्रणाली पर चर्चा हुई।

  • अवनीरा, शोपियां, जम्मू-कश्मीर: ग्रामीणों ने JJM से होने वाले परिवर्तन साझा किए। महिलाओं को पानी लाने की कठिनाइयों से मुक्ति और स्वच्छ जल आपूर्ति की उपलब्धता पर जोर दिया।

  • डाकिन पोरबोटिया, जोरहट, असम: 221 जल आपूर्ति योजनाओं में से 182 योजनाओं में नियमित और 100% उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह पर चर्चा की गई।

  • कालुवाला, देहरादून, उत्तराखंड: महिलाओं द्वारा नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण, पाइपलाइन वृद्धि, जल सखियों और SHG की भागीदारी पर जोर।

  • आरानी, सिमडेगा, झारखंड: मासिक जल गुणवत्ता परीक्षण, महिलाओं और बच्चों की भागीदारी, समय की बचत और स्वच्छ पानी से शिक्षा में सुधार साझा किया गया।

  • लोहरा, चंद्रपुर, महाराष्ट्र: VWSC और समुदाय की सक्रिय भागीदारी, समय पर उपयोग शुल्क संग्रह और नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण की सफलता पर प्रकाश डाला गया।

मुख्य संदेश:

DDWS के सचिव अशोक के. के. मीना ने बताया कि संवाद का उद्देश्य ग्रामीणों की स्थानीय भाषा में सुनना और जल आपूर्ति योजनाओं के संचालन, रखरखाव और सकारात्मक परिवर्तन की कहानियों को सामने लाना है। अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सौन ने नियमित DWSM बैठकें, पंचायती डैशबोर्ड का उपयोग और e-ग्राम स्वराज पोर्टल पर वास्तविक समय की रिपोर्टिंग पर जोर दिया।

आगे का मार्ग:

सजल ग्राम संवाद प्लेटफॉर्म, जल जीवन मिशन के उद्देश्यों को सुदृढ़ करता है, जिससे नीति निर्धारक और अंतिम छोर पर जल आपूर्ति की जिम्मेदारी रखने वाले संस्थानों के बीच प्रत्यक्ष और दो-तरफा संवाद स्थापित होता है। दूसरे संस्करण ने केंद्र और स्थानीय संस्थानों के बीच फीडबैक लूप को और मजबूत किया और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों को टिकाऊ, नागरिक-केंद्रित और भविष्य-तैयार बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल: ग्रामीण परिवारों के लिए नल कनेक्शन की उपलब्धता और निगरानी

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परिचय

अगस्त 2019 से, भारत सरकार जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल कनेक्शन द्वारा पीने के पानी की सुविधा पहुँचाना है। “पीने का पानी” एक राज्य विषय है, इसलिए योजना, अनुमोदन, क्रियान्वयन, संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों का समर्थन करती है।

योजना का संचालन और मार्गदर्शन

राज्यों को JJM के प्रभावी योजना और क्रियान्वयन में मदद करने के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइन साझा की गई हैं, जो योजना, निष्पादन, गुणवत्ता आश्वासन, निगरानी और बनाए रखी जाने वाली बुनियादी संरचना के सभी पहलुओं को कवर करती हैं।

भारत सरकार समय-समय पर समीक्षा बैठकों और बहु-आयामी टीमों के दौरे के माध्यम से राज्यों के साथ मिशन के क्रियान्वयन की समीक्षा करती है और सुधार के क्षेत्रों को उजागर करती है।

प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • JJM में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाता है।

  • भौतिक और वित्तीय प्रगति JJM–IMIS (Integrated Management Information System) पर रिपोर्ट की जाती है।

  • सभी नल कनेक्शन परिवार के मुखिया के आधार कार्ड से लिंक किए जाते हैं।

  • निर्माण कार्य के तहत बनाए गए संपत्तियों की जियो-टैगिंग की व्यवस्था की गई है।

गुणवत्ता नियंत्रण और तृतीय पक्ष निरीक्षण

  • भुगतान से पहले तीसरे पक्ष के निरीक्षण और प्रमाणन को अनिवार्य किया गया है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तीसरे पक्ष निरीक्षण एजेंसियों (TPIAs) को सूचीबद्ध करने का अधिकार है, जो कार्य की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री और मशीनरी की गुणवत्ता की जांच करें।

निगरानी और सुधारात्मक कदम

  • अप्रैल 2025 से, राज्यों द्वारा हर महीने चार योजनाओं का यादृच्छिक निरीक्षण किया जा रहा है।

  • राष्ट्रीय WASH विशेषज्ञों (NWEs) के लिए निगरानी ढांचे को मजबूत किया गया है, जिसमें गुणवत्ता के मानक और TPI के ToR को संशोधित किया गया है।

  • IMIS के माध्यम से IT निगरानी का विस्तार किया गया है, जिससे जिला और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों को भी निगरानी की सुविधा मिली है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को JJM में रिपोर्ट की गई अनियमितताओं (गुणवत्ता या वित्तीय) के प्रति नियमित रूप से सचेत किया जाता है और शून्य सहिष्णुता अपनाने के लिए निर्देशित किया गया है।

  • 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट किए गए अनुसार, कुल 17,036 शिकायतें मिलीं, जिनमें वित्तीय अनियमितताएँ और कार्य की खराब गुणवत्ता शामिल हैं।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 621 विभागीय अधिकारियों, 969 ठेकेदारों और 153 TPIAs के खिलाफ कार्रवाई की गई।

स्रोत: यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने आज राज्य सभा में लिखित उत्तर में दी।

सुजलम भारत समिट 2025: जल सुरक्षा और सतत प्रबंधन के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में शुरू

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नई दिल्ली- केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित “Vision for Sujalam Bharat” समिट 2025 आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में शुरू हुआ। यह दो दिवसीय समिट 28–29 नवंबर तक जारी रहेगा। समिट में केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ, पंचायत सदस्य, एनजीओ, स्वयं सहायता समूह (SHG) और राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार विजेताओं ने भाग लिया। उद्घाटन का आरंभ पारंपरिक ‘जल कलश’ समारोह से किया गया।

समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, यह समिट जल प्रबंधन, स्वच्छता और सतत प्रथाओं को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय अनुभव और समुदाय की भागीदारी को राष्ट्रीय नीति निर्माण में शामिल करने का एक मंच है। उन्होंने बताया कि भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 18% हिस्सा है, जबकि ताजे पानी के स्रोत केवल 4% हैं। शहरीकरण, औद्योगिकीकरण, भूमि उपयोग में परिवर्तन और जलवायु अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए समुदाय आधारित जल संरक्षण संरचनाएँ आवश्यक हैं।

उन्होंने जल शक्ति अभियान (JSA) और जल संचय जन भागीदारी (JSJB) के तहत बड़े पैमाने पर जल संरक्षण और पुनर्भरण प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही नामामी गंगे कार्यक्रम, जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन (SBM) के माध्यम से पीने के पानी और स्वच्छता की सुविधाओं में सुधार की जा रही है।

उद्घाटन सत्र में जल संचय जन भागीदारी 1.0 पुस्तक और बराक नदी बेसिन के पारिस्थितिक मूल्यांकन रिपोर्ट का विमोचन किया गया। इसके अलावा गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल का भी उद्घाटन किया गया, जो जनता को नदी स्वास्थ्य की वास्तविक समय की जानकारी प्रदान करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने SAMRIDHI-MCAD के माध्यम से वैज्ञानिक और प्रेशर आधारित सिंचाई प्रणालियों द्वारा जल प्रबंधन में सुधार और JSA:CTR 2025 के तहत 22.5 लाख जल संरक्षण कार्यों और 42 लाख से अधिक वृक्षारोपण गतिविधियों की उपलब्धि साझा की।

समिट के मुख्य विषय निम्नलिखित हैं:

  1. नदियों और स्रोतों का पुनर्जीवन – निरंतर और स्वच्छ धारा सुनिश्चित करना।

  2. पीने के पानी की स्थिरता – सुरक्षित और पर्याप्त पानी की व्यवस्था।

  3. जल प्रबंधन के लिए तकनीक – डिजिटल उपकरण, एआई आधारित निगरानी और माइक्रो-इरिगेशन।

  4. जल संरक्षण और पुनर्भरण – समुदाय आधारित भूजल प्रबंधन और परंपरागत प्रणालियों का पुनरुद्धार।

  5. ग्रे वाटर प्रबंधन और पुन: उपयोग – घरेलू, औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में जल का पुन: उपयोग।

  6. सामुदायिक एवं संस्थागत भागीदारी – व्यवहार परिवर्तन और दीर्घकालीन जल सुरक्षा के लिए समुदाय का सशक्तिकरण।

दो दिवसीय समिट में राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ तकनीकी विशेषज्ञ, पंचायत सदस्य और पुरस्कार विजेताओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों की सिफारिशों के आधार पर मंत्रालय आगामी कार्यान्वयन चरण के लिए संरचित और व्यावहारिक मार्गदर्शन तैयार करेगा।

समापन में केंद्रीय मंत्री ने कहा:

“सुझलम भारत केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय प्रयास है, जो जल-सुरक्षित, स्वस्थ और सशक्त समुदाय बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस समिट के माध्यम से हम प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप एक जल-समृद्ध, सतत और समृद्ध भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।”


जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा ‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ का दूसरा संस्करण आयोजित

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पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) के तहत स्थानीय प्रशासन को सशक्त बनाने, जल स्रोतों की स्थिरता सुनिश्चित करने और ग्रामीण जल आपूर्ति सेवा वितरण में जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से ‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ का दूसरा संस्करण आयोजित किया गया।

यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोन ने की। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव (NJJM) स्वाति मीना नाइक, वरिष्ठ अधिकारी, देशभर के जिला कलेक्टर्स/जिला मजिस्ट्रेट, मिशन निदेशक एवं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राज्य मिशन टीमों सहित 800 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

‘जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद’ श्रृंखला जल जीवन मिशन के अंतर्गत विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन और स्थानीय शासन को मजबूत करने का एक राष्ट्रीय संवाद मंच है। इसका पहला संस्करण 14 अक्टूबर 2025 को आयोजित हुआ था, जिसमें डिजिटल टूल्स, जवाबदेही तंत्र और पारस्परिक सीख के माध्यम से पंचायतों और जिलों को सशक्त बनाने पर चर्चा हुई थी। आज आयोजित दूसरे संस्करण में जल स्रोतों की स्थिरता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें डेटा आधारित योजना, कानूनी सुरक्षा उपायों और मनरेगा के साथ अभिसरण पर बल दिया गया।

प्रमुख बिंदु

🔹 मनरेगा के साथ अभिसरण – सोन ने 23 सितंबर 2025 को जारी राजपत्र अधिसूचना S.O. 4288(E) का उल्लेख करते हुए जिलों से आग्रह किया कि वे जल स्रोत पुनर्भरण, संरक्षण और जल संचयन के कार्यों पर विशेष खर्च सुनिश्चित करें।

🔹 संरक्षण और नियामक तंत्र – 27 अक्टूबर 2025 को विभाग द्वारा जारी पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने ‘संरक्षित पेयजल क्षेत्र’ (Protected Drinking Water Zones) स्थापित करने, गश्त और निरीक्षण व्यवस्था लागू करने तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSCs) को समुदाय आधारित निगरानी के लिए सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि “जल जीवन मिशन में जिलाधिकारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि स्थायी सेवा वितरण का आधार डेटा-आधारित निर्णय, स्थानीय स्वामित्व और निवारक शासन है।”

निर्णय समर्थन प्रणाली (DSS) का प्रदर्शन

संयुक्त सचिव स्वाति मीना नाइक ने Decision Support System (DSS) का परिचय कराया, जिसे BISAG-N के सहयोग से विकसित किया गया है। यह प्रणाली राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वैज्ञानिक आधार पर जल स्रोतों की योजना, आकलन और संरक्षण में सहायता करती है।
सहायक सचिव (DS-NJJM)अंकीता चक्रवर्ती ने DSS पोर्टल का प्रदर्शन किया, जो भू-स्थानिक मानचित्र, कृत्रिम जल पुनर्भरण आवश्यकता (AWRR) विश्लेषण और वास्तविक समय ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करता है।

जिलों द्वारा प्रस्तुत श्रेष्ठ अभ्यास

🔹 गडचिरोली (महाराष्ट्र) – पाइप जल योजनाओं और सौर ऊर्जा आधारित मिनी जल योजनाओं के माध्यम से FHTC कवरेज 8.37% से बढ़कर 93% तक पहुंचा। हनीकॉम्ब तकनीक आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली पर कार्य प्रगति पर है।

🔹 हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश) – सभी 248 ग्राम पंचायतों में ‘हर घर जल’ उपलब्ध। महिलाओं द्वारा फील्ड टेस्ट किट (FTK) से जल परीक्षण।

🔹 डांग (गुजरात) – महिला संचालित जल समितियां ‘मुख्यमंत्री महिला पानी समिति प्रोत्साहन योजना’ के तहत कार्यरत।

🔹 बारामुला (जम्मू-कश्मीर) – 6,600 किमी पाइपलाइन नेटवर्क, 228 फिल्ट्रेशन प्लांट, और 391 सेवा जलाशय। ₹60 करोड़ की परिहासपोरा मल्टी-विलेज योजना से 75,000 लोगों को स्वच्छ जल।

🔹 बोकारो (झारखंड) – ‘जल सहिया’ मॉडल से महिलाओं को प्रशिक्षण, संचालन, परीक्षण और वित्तीय प्रबंधन में सशक्त बनाया गया।

जिला कलेक्टर्स पेयजल संवाद के बारे में

DDWS द्वारा आरंभ की गई यह श्रृंखला जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में संलग्न जिला कलेक्टर्स और क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए एक राष्ट्रीय ज्ञान-साझा और पारस्परिक सीख का मंच है। यह संवाद ग्रामीण भारत में दीर्घकालिक जल सुरक्षा और सेवा वितरण की स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


जल जीवन मिशन: ग्रामीण भारत में हर घर जल सुनिश्चित करने की क्रांति

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भारत ने जल जीवन मिशन (Har Ghar Jal) के तहत ग्रामीण जल सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। 22 अक्टूबर 2025 तक, 15.72 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में नल के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुँचाया जा रहा है, जो ग्रामीण भारत में सार्वभौमिक जल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मिशन की शुरुआत और दृष्टिकोण

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को मिशन की शुरुआत की, उस समय केवल 3.23 करोड़ (16.71%) घरों में नल का जल उपलब्ध था। मिशन के तहत अब 12.48 करोड़ अतिरिक्त घरों को जोड़ा जा चुका है, जिससे यह ग्रामीण भारत में सबसे तेजी से बढ़ती आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक बन गया है।

जल जीवन मिशन का उद्देश्य माताओं और बहनों को पीने के जल के लिए दूर तक चलने के बोझ से मुक्त करना, उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाना, और ग्रामीण परिवारों के जीवन में सम्मान और गरिमा जोड़ना है।

मिशन के मुख्य उद्देश्य

  1. हर ग्रामीण घर में Functional Household Tap Connection (FHTC) सुनिश्चित करना।

  2. स्रोत स्थिरता: जल स्रोतों का संरक्षण और पुनर्भरण।

  3. समुदाय आधारित भागीदारी और जागरूकता अभियान।

  4. स्वास्थ्य और जीवन स्तर सुधार: जलजनित रोगों में कमी।

  5. सतत विकास: ग्रे वाटर प्रबंधन, वर्षा जल संचयन।

प्रगति (22 अक्टूबर 2025 तक)

  • 192 जिले: सभी घरों, स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों तक नल का जल।

  • ब्लॉक्स: 1,912 ने पूर्ण कवरेज रिपोर्ट की, 1,019 प्रमाणित।

  • ग्राम पंचायतें: 1,25,185 ने रिपोर्ट की, 88,875 प्रमाणित।

  • गांव: 2,66,273 रिपोर्ट किए, 1,74,348 प्रमाणित।

  • 100% कवरेज वाले राज्य/संघ राज्य क्षेत्र: 11, जिनमें गोवा, अंडमान और निकोबार, दादरा & नगर हवेली & दमण & दीव, हरियाणा, तेलंगाना, पुडुचेरी, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

  • संस्थागत कवरेज: 9,23,297 स्कूल और 9,66,876 आंगनवाड़ी केंद्रों में नल का जल।

गुणवत्ता आश्वासन और निगरानी

  • 2,843 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं ने 38.78 लाख जल नमूनों की जांच की।

  • 24.80 लाख महिलाओं ने फील्ड टेस्टिंग किट्स (FTKs) के उपयोग में प्रशिक्षण प्राप्त किया।

  • यह समुदाय-संचालित दृष्टिकोण जल प्रदूषण का शीघ्र पता लगाने और स्थानीय स्वामित्व को मजबूत करता है।

मिशन के प्रमुख घटक

  1. ग्राम में पाइप्ड जल आपूर्ति – हर घर में नल का जल।

  2. सतत जल स्रोत – विश्वसनीय और दीर्घकालिक आपूर्ति।

  3. थोक जल स्थानांतरण और वितरण – ट्रिटमेंट प्लांट और वितरण नेटवर्क।

  4. तकनीकी हस्तक्षेप – जल गुणवत्ता सुधार।

  5. पिछले योजनाओं का उन्नयन – न्यूनतम सेवा स्तर 55 LPCD।

  6. ग्रे वाटर प्रबंधन – जल संरक्षण।

  7. समुदाय क्षमता निर्माण – सतत जल प्रबंधन में सामुदायिक क्षमता बढ़ाना।

  8. आपातकालीन निधि – प्राकृतिक आपदाओं या संकटों के लिए।

डिजिटल नवाचार

  • RPWSS मॉड्यूल: प्रत्येक योजना को डिजिटल ID देकर पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और डेटा-आधारित निगरानी।

  • GIS और PM Gati Shakti के साथ एकीकृत, रियल-टाइम डैशबोर्ड और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स।

  • पंचायतों और जल समिति को सशक्त करना, स्थानीय कौशल विकास।

मिशन के प्रभाव

  • समय बचत: प्रत्येक दिन 5.5 करोड़ घंटे, मुख्यतः महिलाओं के लिए।

  • स्वास्थ्य लाभ: लगभग 4 लाख दस्त रोगों से होने वाली मौतों की रोकथाम, 14 मिलियन DALYs बचाई गई।

  • महिला सशक्तिकरण: 9 करोड़ महिलाएं अब पानी लेने नहीं जातीं।

  • नौकरी सृजन: लगभग 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष रोजगार के अवसर।

सामुदायिक और प्रौद्योगिकी-संचालित सफलता की कहानियाँ

  • महाराष्ट्र: Mhapan गांव में महिला स्वयं सहायता समूह ने 100% बिल संग्रह किया और स्व-सहायता मॉडल स्थापित किया।

  • नागालैंड: Wokha में जल स्रोत संरक्षण और वर्षा जल पुनर्भरण, युवा और महिलाओं के नेतृत्व में।

  • असम: Borbori में जलजनित रोग शून्य, सामुदायिक योगदान से सतत संचालन।

  • राजस्थान: Bothara में जल सुरक्षा योजना, चेक डैम और कंटूर ट्रेंच से जल स्तर 70 फीट बढ़ा।

  • पश्चिम बंगाल: ‘Jal Mitra’ ऐप ने निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की, 13.70 करोड़ सामुदायिक गतिविधियों को ट्रैक किया।

निष्कर्ष

जल जीवन मिशन ग्रामीण भारत में सुरक्षित नल जल, स्वास्थ्य, रोजगार और गरिमा सुनिश्चित कर रहा है। छह वर्षों में, यह हर घर जल के विजन को वास्तविकता में बदल रहा है। समुदाय-आधारित सहभागिता और डिजिटल नवाचार के माध्यम से यह मिशन सतत, समान और लोगों-केंद्रित विकास का आदर्श प्रस्तुत करता है।


जल जीवन मिशन (JJM) की अगली दिशा: जिला प्रशासन की भूमिका और डिजिटल नवाचार

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जल जीवन मिशन ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जिससे 15.71 करोड़ (81.17%) ग्रामीण घरों को नल के पानी की सुविधा प्रदान की गई है। अब मिशन अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसका मुख्य फोकस दीर्घकालिक स्थायित्व, कार्यक्षमता और सेवा वितरण पर है। इस संदर्भ में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जिला कलेक्टर नीति और लोगों के बीच सेतु का काम करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि हर घर न केवल पानी प्राप्त करे बल्कि उसे नियमित और स्थायी रूप से प्राप्त करता रहे।

इसी को ध्यान में रखते हुए, पेयजल संवाद का पहला आयोजन आज पीएम जल शक्ति मंत्रालय, पीने के पानी और स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा किया गया। यह एक राष्ट्रीय संवाद था, जिसका उद्देश्य जिला-आधारित शासन को सशक्त बनाना, नवाचार को बढ़ावा देना, और जिलों के बीच अनुभव एवं सीख का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना था।

यह आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गया और इसका संचालन अशोक के. के. मीणा, सचिव, DDWS ने किया। इसके साथ उपस्थित थे कमल किशोर सौन, अतिरिक्त सचिव और मिशन डायरेक्टर, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM), स्मृति स्वाती मीणा नाइक, संयुक्त सचिव, NJJM, साथ ही देश भर के जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट, मिशन डायरेक्टर और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की मिशन टीमें।

जिला नेतृत्व और नवाचार

यह पहल ग्रामीण जल प्रबंधन में जिलाओं और स्थानीय संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए की जा रही सतत सुधार योजनाओं पर आधारित है। पिछले कुछ महीनों में, DDWS ने 729 जिला कलेक्टरों के साथ व्यक्तिगत और वर्चुअल संवाद किए हैं, JJM-IMIS जिला/ DWSM डैशबोर्ड और पंचायत डैशबोर्ड विकसित किए हैं, जो ई-ग्राम स्वराज से जुड़ा है। इसके अलावा, QCI के साथ मिलकर 80,000 से अधिक सरपंचों को सरपंच संवाद मोबाइल ऐप के माध्यम से जोड़ा गया, जिससे स्थानीय स्वामित्व और जवाबदेही बढ़ी।

नागरिकों के लिए WQMIS और सिटिजन कॉर्नर जैसे उपकरण और PM गति शक्ति के माध्यम से स्थानिक नक्शांकन ने एक पारदर्शी, डेटा-संचालित पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है, जहां जिला नेतृत्व नवाचार, सर्वोत्तम प्रथाओं और समुदाय-आधारित शासन मॉडल साझा कर सकता है।

मुख्य भाषण

अशोक के. के. मीणा, सचिव, DDWS ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि जल जीवन मिशन, 81% ग्रामीण कवर के बाद, अब संस्थागत समेकन, जवाबदेही और स्थायित्व पर केंद्रित अगले चरण में प्रवेश कर गया है। उन्होंने कहा कि हर जिला अपनी स्थानीय वास्तविकताओं और नेतृत्व के अनुसार अद्वितीय समाधान, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं के उदाहरण प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा, “हमें स्थानीय संस्थाओं को ग्रामीण जल सेवाओं की रीढ़ बनाना होगा, जहां निर्णय डेटा-आधारित हों, संचालन जवाबदेह हों, और समुदायों को बनाए गए संसाधनों को स्थायी रूप से संचालित करने का अधिकार हो।”

इसके बाद पूर्वी खासी हिल्स (मेघालय), गंजाम (ओडिशा), रत्नागिरी (महाराष्ट्र), चरैडियो (असम), धम्तारी (छत्तीसगढ़), उत्तर त्रिपुरा (त्रिपुरा) के जिला कलेक्टरों ने अपनी सफल पहलों पर प्रस्तुति दी। मुख्य पहलों में स्रोत संरक्षण, मजबूत निगरानी तंत्र, स्वयं सहायता समूहों द्वारा रखरखाव और शुल्क संग्रह, तकनीक-सक्षम शिकायत निवारण और समूह जल आपूर्ति मॉडल शामिल थे।

डिजिटल रूपांतरण: RPWSS आईडी मॉड्यूल

स्मृति स्वाती मीणा नाइक, संयुक्त सचिव, NJJM ने डिजिटल रूपांतरण के महत्व और RPWSS आईडी मॉड्यूल के माध्यम से ग्रामीण जल सेवाओं की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने की रूपरेखा पेश की।

RPWSS आईडी मॉड्यूल हर जल आपूर्ति योजना को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान देता है, जिससे वास्तविक समय में ट्रैकिंग, पूर्वानुमानित रखरखाव और पारदर्शी निगरानी संभव होती है। यह PM गति शक्ति से जुड़ा है और विकास कार्यक्रमों के समेकन और डेटा-संचालित निर्णयों का समर्थन करता है।

जिला प्रशासन के लिए इसका मतलब है सशक्त निगरानी, समन्वय और डेटा आधारित निर्णय, जबकि ग्राम पंचायतों के लिए यह दिन-प्रतिदिन रखरखाव, जल्दी क्षति पहचान और निवारक कार्रवाई में मदद करता है। नागरिकों के लिए, यह पारदर्शिता और तेज़ प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है।

भविष्य की दिशा: स्थायी जल शासन

कमल किशोर सौन, AS&MD-NJJM ने कहा कि JJM अब केवल अवसंरचना निर्माण योजना नहीं बल्कि शासन सुधार, विकेंद्रीकरण और जनभागीदारी की एक आंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद को एक नियमित राष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने मिशन का सार संक्षेप में बताया — “जल बचेगा, तो जल रहेगा और अगर जल रहेगा तो जल मिलेगा।”


निष्कर्ष

जल जीवन मिशन अब केवल हर घर जल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सशक्त, डिजिटल और समुदाय-आधारित ग्रामीण जल शासन की नई दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के हर गांव में जल स्थायित्व, गरिमा और साझा उत्तरदायित्व के साथ उपलब्ध हो।


नीति आयोग ने हिमालयी क्षेत्रों में हर मौसम में नल से जल आपूर्ति पर आयोजित किया मंथन सत्र, संकलन किया जारी

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नई दिल्ली- नीति आयोग ने आज हिमालय के ऊँचे क्षेत्रों में हर मौसम में नल से जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक मंथन सत्र (Brainstorming Session) का आयोजन किया और इस विषय पर एक संकलन (Compendium) जारी किया।

इस सत्र में जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, हिमालयी राज्य लद्दाख और हिमाचल प्रदेश, आईआईटी मंडी जैसे शैक्षणिक संस्थानों तथा विभिन्न राज्यों में कार्यरत जमीनी संगठनों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।

सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और समुदायों की आजीविका में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। चर्चाओं में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि केंद्र और राज्य सरकारों के हस्तक्षेपों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। इससे संपत्तियों पर समुदाय की स्वामित्व भावना बढ़ेगी और जल संसाधनों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

विशेषज्ञों ने भूगोल, कठोर मौसम, कार्यान्वयन की चुनौतियाँ, तकनीक के उपयोग और डेटा विश्लेषण जैसी बाधाओं से निपटने के उपायों पर भी चर्चा की। उन्होंने सतत कृषि मॉडल, कृषि-वनीकरण (Agro-Forestry), झरनों का पुनर्जीवन, ड्रिप आधारित जल आपूर्ति प्रणालियाँ और नवीन अभियांत्रिकी सामग्री के उपयोग जैसी पहलें अपनाने की सिफारिश की।

सत्र में यह भी बताया गया कि स्थानीय समुदायों की क्षमता निर्माण (Capacity Building) से उनकी सतत भागीदारी सुनिश्चित हुई है। साथ ही, समुदाय के सदस्यों के कौशल की औपचारिक मान्यता (Formal Skill Recognition) की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि उन्हें बेहतर रोजगार और आजीविका के अवसर प्राप्त हो सकें।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि झरनों पर एक “Centre of Excellence” स्थापित किया जाए, जिससे सभी हितधारक एक मंच पर आकर झरनों के पुनर्जीवन और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए मिलकर कार्य कर सकें।

जारी किया गया संकलन (Compendium) हिमालयी राज्यों के नवाचारों, सफल अनुभवों और केस स्टडीज़ को प्रस्तुत करता है, जो दर्शाता है कि प्रौद्योगिकी, सामुदायिक भागीदारी और नीतिगत एकीकरण के माध्यम से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी सतत जल आपूर्ति संभव है।


DDWS और BISAG-N के बीच समझौता: जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन के लिए बनेगा GIS-आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म

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नई दिल्ली- जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आज नई दिल्ली स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (BISAG-N) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए। BISAG-N, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है।

यह साझेदारी देश में जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [SBM(G)] के लिए एक GIS-एकीकृत निर्णय सहायता प्लेटफ़ॉर्म (Decision Support Platform) विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह प्लेटफ़ॉर्म ग्रामीण जल आपूर्ति और स्वच्छता कार्यक्रमों में डेटा-आधारित निर्णय, पारदर्शिता और कुशल निगरानी को सशक्त बनाएगा।

समारोह की अध्यक्षता अशोक के. के. मीना, सचिव, DDWS ने की। इस अवसर पर स्वाति मीना नाइक, संयुक्त सचिव (JJM) और विनय ठाकुर, विशेष महानिदेशक, BISAG-N ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौते का आदान-प्रदान किया।कमल किशोर सोन, अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध निदेशक (NJJM) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

सचिव अशोक के. के. मीना ने इस अवसर पर कहा कि,

“पेयजल और स्वच्छता मिशनों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने के लिए जियोस्पेशियल तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। BISAG-N के साथ यह सहयोग JJM और SBM(G) को अत्याधुनिक GIS क्षमताओं से लैस करेगा, जिससे रियल-टाइम डेटा विश्लेषण और बेहतर नीति-निर्णय संभव होंगे।”

नए प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ग्रामीण पाइप जल आपूर्ति योजनाओं (RPWSS) का डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक योजना को यूनिक स्कीम आईडी प्रदान की जाएगी। यह प्रणाली घर-घर जल आपूर्ति की सूक्ष्म निगरानी और अन्य ग्रामीण अवसंरचना योजनाओं के साथ समन्वय (convergence) को मजबूत करेगी।

समझौते के तहत BISAG-N प्लेटफ़ॉर्म के डेटाबेस डिज़ाइन, मानचित्र निर्माण, डेटा माइग्रेशन, सॉफ़्टवेयर विकास और सिस्टम इंटीग्रेशन जैसी सभी तकनीकी सेवाएं प्रदान करेगा। इसमें डिजिटल फोटोग्रामेट्री, वेक्टर डेटा कैप्चर, थीमैटिक मैपिंग और ग्राउंड कंट्रोल सर्वेक्षण जैसी उन्नत तकनीकें भी शामिल होंगी।

यह पहल प्रधानमंत्री गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप होगी, जिससे जल एवं स्वच्छता अवसंरचना का अन्य क्षेत्रों की परिसंपत्तियों के साथ एकीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे संसाधनों का इष्टतम उपयोग, सेवा वितरण में सुधार और ग्रामीण विकास की गति को बढ़ावा मिलेगा।

यह सहयोग भारत सरकार के डिजिटल इंडिया विज़न से भी जुड़ा है, जिसका उद्देश्य समावेशी और सतत विकास के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करना है। DDWS और BISAG-N का यह संयुक्त प्रयास ग्रामीण जल और स्वच्छता सेवाओं की प्रभावी योजना, निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा।


जल जीवन मिशन से बदली बिंजाम गांव की तस्वीर, हर घर पहुंचा नल का जल

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जल जीवन मिशन ने बदली जिंदगी : पहले सुबह का अधिकांश समय पानी के इंतजाम में ही निकल जाता था, पर अब घर पहुंच रहा पानी

रायपुर-हर घर नल से पानी पहुंचाने के मिशन ‘जल जीवन मिशन’ ने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। पहले सुबह का अधिकांश समय परिवार के लिए पानी के इंतजाम में बिताने वाली महिलाएं अब घर में नल से पानी आने के बाद राहत की सांस ले रही हैं। अब उन्हें बच्चों की परवरिश, पढ़ाई-लिखाई, खेती, मजदूरी और आजीविका के अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय मिल जा रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दंतेवाड़ा जिले के गीदम   विकासखंड के बिंजाम ग्राम पंचायत में जल जीवन मिशन के माध्यम से 267 घरों में नल से जल पहुंचाया है। इससे गांववाले और वहां की महिलाएं काफी खुश हैं। गांव को ’’हर घर जल ग्राम’’ का दर्जा भी मिल गया है।

बिंजाम के अधिकांश परिवार आजीविका के लिए खेती और मजदूरी पर आश्रित हैं। यहां पहले पेयजल का मुख्य स्रोत हैंडपंप ही था। पर अब जल जीवन मिशन से गांव के हर घर में नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति हो रही है। जल आपूर्ति के लिए गांव में 16 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन बिछाई गई है। तीन उच्च स्तरीय जलागारों (पानी टंकियों) के माध्यम से हर घर तक पानी पहुंचाया जा रहा है।

जल जीवन मिशन से हर परिवार को न केवल पर्याप्त जल मिल रहा है, बल्कि यह स्वच्छ और सुरक्षित भी है। गांव में गठित ‘जल वाहिनी’ समूह की महिलाओं को जल की गुणवत्ता के परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये महिलाएं फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल की गुणवत्ता का परीक्षण कर गांव में गुणवत्तायुक्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। इससे गांववाले अब जलजनित और गंदे पानी से होने वाली बीमारियों के खतरे से मुक्त हो गए हैं।

जल जीवन मिशन ने बिंजाम की महिलाओं का जीवन बदल दिया है। पहले धूप, गर्मी, बरसात, ठंड या रात होने पर भी महिलाओं को पानी लाने घर से दूर जाना पड़ता था। घर पर छोटे बच्चे हों या खुद की तबीयत खराब हो, तो भी पानी लेने बाहर निकलना ही पड़ता था। पर अब घर में ही नल लग जाने से हालात बदल गए हैं। रोज की परेशानियों से निजात मिल गई है।

बिंजाम की महिलाएं बताती हैं कि पहले घर के सभी लोगों के लिए पानी की व्यवस्था में बहुत समय लगता था, मेहनत भी बहुत लगती थी। सुबह का ज्यादातर समय इसी में निकल जाता था जिसके चलते उनकी दुनिया सिमट सी गई थी। परिवार के खेती-किसानी के कार्यों में न वे ठीक से सहयोग कर पाती थीं और न ही अन्य कोई रोजगारमूलक गतिविधियों के बारे में सोच सकती थीं। पर अब जल जीवन मिशन ने ये सारी परेशानियां दूर कर दी हैं। अब बच्चे रोज समय पर बिना रूकावट के स्कूल जा रहे हैं। महिलाएं को अब अपनी सब्जी-बाड़ी और वनोपज संग्रहण के साथ ही खेत और घर के अन्य कामों के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। 


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