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आत्मसमर्पित 95 नक्सलियों को 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पुनर्वास को मिल रही गति

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जलवायु मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत बीजापुर जिले के 95 आत्मसमर्पित नक्सलियों को 1 करोड़ 40 लाख 86 हजार 700 रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

बीजापुर कलेक्टर विश्वदीप ने नीति के प्रावधानों के अनुसार शस्त्रों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए राशि के आहरण और वितरण की स्वीकृति दी है।

यह प्रोत्साहन राशि आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें नया जीवन शुरू करने और सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी जा रही है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना का अवसर मिल रहा है, जिससे बस्तर अंचल में शांति और विकास को नई गति मिल रही है।

16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

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पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा

रायपुर- नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन, पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में सहभागिता करते हुए पंचायतों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का अवलोकन किया।

छत्तीसगढ़ को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान

कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए प्रस्तावित अनुदान की जानकारी साझा की गई। आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में छत्तीसगढ़ को कुल 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त होगा। इसमें 9,331 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट तथा 2,333 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अंतर-राज्यीय अनुदान वितरण में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.68 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

वर्षवार आवंटन के अनुसार 2026-27 में राज्य को 1,498 करोड़ रुपए की बेसिक ग्रांट मिलेगी। 2027-28 में 1,663 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 248 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2028-29 में 1,846 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 624 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2029-30 में 2,049 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 693 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट तथा 2030-31 में 2,275 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 768 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट का प्रावधान किया गया है।

यह अनुदान ग्राम पंचायतों एवं अन्य ग्रामीण स्थानीय निकायों के माध्यम से आधारभूत अधोसंरचना के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसके मसौदे (ड्राफ्ट) को तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।

समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी. रमासुब्रमणियन करेंगे। समिति में कानून, प्रशासन और समाज से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि व्यापक विचार-विमर्श के बाद राज्य के लिए उपयुक्त मसौदा तैयार किया जा सके।

सरकार के अनुसार, यह समिति विभिन्न राज्यों में लागू या प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के प्रावधानों का अध्ययन करेगी, संबंधित कानूनों की समीक्षा करेगी और विभिन्न सामाजिक, धार्मिक तथा कानूनी पक्षों से सुझाव प्राप्त करने के बाद अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी।

समिति राज्य के सभी वर्गों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से संवाद स्थापित कर एक संतुलित और व्यवहारिक मसौदा तैयार करेगी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद छत्तीसगढ़ समान नागरिक संहिता की दिशा में ठोस पहल करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानूनों की संभावनाओं का अध्ययन करना और राज्य के हित में उपयुक्त सुझाव तैयार करना है।

गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)

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इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारतीय स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के भारती सार्वजनिक नीति संस्थान के सहयोग से 23 मई 2026 को आईएसबी मोहाली परिसर में “गवर्नेंस समिट 2026 : विकसित भारत के लिए समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)” का आयोजन किया।

शिखर सम्मेलन के चौथे संस्करण की शुरुआत उद्घाटन मुख्य भाषण से हुई, जिसे भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने संबोधित किया। उन्होंने ऐसे एआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के अंतिम छोर पर मौजूद प्रत्येक नागरिक की सेवा कर सके।

उन्होंने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के लिए उत्पादकता बढ़ाने, शासन व्यवस्था में सुधार करने तथा स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विनिर्माण और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में पहुंच का विस्तार करने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रस्तुत करती है।” उन्होंने यह भी कहा कि एआई के कारण बौद्धिक कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएं स्वाभाविक हैं, लेकिन भारत समावेशी विकास के लिए इस तकनीक का उपयोग करने की विशिष्ट स्थिति में है।

पूरे दिन चले इस कार्यक्रम में चार विषयगत पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें डिजिटल वाणिज्य में एआई की भूमिका, महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और वहनीयता, तथा रोजगार सृजन और डिजिटल उद्यमिता जैसे विषय शामिल थे। इसके साथ ही एक समानांतर गोलमेज चर्चा में राज्य सरकारों से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक अंतिम छोर तक सार्वजनिक सेवा वितरण में एआई के क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन में भारती सार्वजनिक नीति संस्थान, आईएसबी के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर अश्विनी छत्रे ने एआई से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं को प्रभावी प्रशासनिक ढांचे में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एआई को एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को आकार देगा।”

उन्होंने असमानता, तकनीकी छलांग लगाने के अवसर और भविष्य के रोजगार को उभरते एआई परिदृश्य के प्रमुख आयाम बताया। प्रोफेसर छत्रे ने यह भी कहा कि एआई से जुड़े अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त सुरक्षा उपाय, सामाजिक सुरक्षा तंत्र और सकारात्मक नीतिगत कदम आवश्यक हैं।

इस शिखर सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों ने भाग लिया। सम्मेलन में रिलायंस रिटेल, मास्टरकार्ड, अपोलो हॉस्पिटल्स, आईआईटी मद्रास, यूनिसेफ इंडिया, पंजाब पुलिस तथा कई केंद्रीय और राज्य सरकारी मंत्रालयों की भागीदारी रही।

विशेष लेख-विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 2025,ग्रामीण छत्तीसगढ़ के सशक्तिकरण का नया अध्याय

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1 जुलाई 2026 से लागू होगी नई रोजगार गारंटी व्यवस्था, अब 100 के बजाय मिलेंगे 125 दिन का काम

रायपुर- भारत सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका और समग्र विकास को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से श्विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। यह क्रांतिकारी कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में प्रभावी होगा और वर्तमान मनरेगा  का स्थान लेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस नई व्यवस्था को प्रदेश में पूरी तत्परता से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संदेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अधिनियम को ग्रामीण समृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत-2047 के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में यह अधिनियम एक मील का पत्थर है। छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए 125 दिनों के सुनिश्चित रोजगार की कानूनी गारंटी हमारे ग्रामीण भाई-बहनों के जीवन में आर्थिक स्थिरता और खुशहाली का नया सवेरा लेकर आएगी। हमारी सरकार इस व्यवस्था को पूरी पारदर्शिता के साथ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

अधिनियम की प्रमुख विशेषताएँ और लाभ

125 दिनों के रोजगार की गारंटी नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों के अकुशल शारीरिक श्रम की वैधानिक गारंटी मिलेगी। यह वर्तमान 100 दिनों की सीमा से 25 प्रतिशत अधिक है। केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना हेतु 95 हजार 692.31 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट प्रावधान किया है। राज्यों के अंशदान सहित कुल परिव्यय 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगा। मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिकों के खातों में (DBT) साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। देरी होने पर श्रमिक श्विलंब क्षतिपूर्तिश् के हकदार होंगे। यदि काम की मांग करने के निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो शासन द्वारा संबंधित श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों के चयन के लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों (जैसे जल संरक्षण, कृषि अधोसंरचना) का निर्माण होगा।

सुगम संक्रमण  की व्यवस्था

श्रमिकों और प्रशासन की सुविधा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं। वर्तमान ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे और 1 जुलाई से स्वतः नई व्यवस्था में समाहित हो जाएंगे। नए श्रमिक ग्राम पंचायत स्तर पर सहजता से अपना पंजीयन करा सकेंगे।

विकसित भारत 2047 का आधार

यह अधिनियम केवल एक रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और उत्पादक बनाने का महा-अभियान है। छत्तीसगढ़ में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण अधोसंरचना, जल संरक्षण और कृषि सुधार को अभूतपूर्व गति मिलेगी, जो राज्य को विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से आगे ले जाएगी।

भारत सरकार के भूमि संसाधन सचिव ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से की सौजन्य भेंट

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जलग्रहण प्रबंधन, पीएम सिंचाई योजना, डिजिटल राजस्व सुधार और ई-पंजीयन की प्रगति पर हुई चर्चा

रायपुर- भारत सरकार, भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने आज मंत्रालय (महानदी भवन) में छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट की। इस दौरान छत्तीसगढ़ में सुशासन के अंतर्गत जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भुईयां पोर्टल, ई-कोर्ट और पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की गई।नरेन्द्र भूषण ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन) और राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विभागीय प्रगति का जायजा लिया।

राजस्व विभाग डिजिटलीकरण और ई-सुशासन

बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों के आधुनिकीकरण पर प्रस्तुतीकरण दिया। डिजिटल रिकॉड्स। के रूप में राज्य में भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण कर मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्थापित किए गए हैं। भू-नक्शा डिजिटलीकरण के तहत सभी भू-नक्शों को डिजिटल स्वरूप दिया गया है। भुईयां पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिसे भूमि स्वामी कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए रेवेन्यू ई-कोर्ट का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, भूमि का ऑटो डायवर्सन ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हो रहा है।

पंजीयन एवं स्टाम्प पारदर्शी और पेपरलेस रजिस्ट्री

वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग द्वारा तकनीक के समावेश से रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। ई-पंजीयन के तहत दस्तावेजों की रजिस्ट्री अब पूर्णतः ऑनलाइन और पेपरलेस मोड में की जा रही है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए व्हाट्सएप के माध्यम से अपॉइंटमेंट से लेकर रजिस्ट्री पूर्ण होने तक के अपडेट्स क्रेता-विक्रेता को भेजे जा रहे हैं। रजिस्ट्री की प्रति भी व्हाट्सएप से डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, जलग्रहण क्षेत्र विकास

छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी (REWARD) के अधिकारियों ने पीएमकेएसवाई (WDC 2.0) की प्रगति साझा की। वर्ष 2021-22 में स्वीकृत 45 परियोजनाओं के तहत 27 जिलों के 387 माइक्रो वाटरशेड में कार्य जारी है। 2.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के उपचार हेतु कुल 613.66 करोड़ रुपये की लागत तय है (केंद्र-राज्य अनुपात 60-40 प्रतिशत है)। भारत सरकार द्वारा हाल ही में (28 अप्रैल 2026) 30.14 करोड़ रुपये की केंद्रांश राशि जारी करते हुए परियोजना की अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।

बैठक में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संयुक्त सचिव भारत सरकार भूमि संसाधन विभाग नितिन खाडे, संचालक भूमि संसाधन भारत सरकार श्री श्याम कुमार सहित छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, पंजीयन एवं स्टाम्प, छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेन्सी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुये।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से तेलंगाना एवं अन्य प्रांतो में प्रवासित परिवारों के लिए पुर्नवास के लिए बनेगी कार्ययोजना

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अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग के ऐसे विस्थापित परिवार जो किन्ही कारणों बस्तर संभाग के सीमावर्ती तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश में प्रवासित है, ऐसे परिवारों के पुनर्वास की कार्ययोजना बनायी जा रही है। मंत्रालय महानदी भवन में आज अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में पुनर्वास हेतु गठित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की प्रथम बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के संबंध में कार्ययोजना तैयार करने विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में बताया गया कि जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के लोग तेलंगाना एवं आन्ध्रप्रदेश राज्य में प्रवासित हो गए है। इसके लिए प्रवासित परिवारों की ओर से राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में याचिका दायर किया गया है। इसके तहत माननीय आयोग द्वारा एक माह के भीतर सर्वे कर प्रवासित परिवारों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके परिपालन में बस्तर संभाग के संभागायुक्त द्वारा एक समयबद्ध कार्यक्रम के तहत कलेक्टर दंतेवाड़ा, सुकमा एवं जिला बीजापुर को प्रवासित परिवारों के सर्वे किया जाकर 15 दिन के भीतर प्रतिवेदन प्रेषित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सर्वे अनुसार जिला दंतेवाड़ा से तेलंगाना प्रदेश के 60 ग्राम में 618 परिवार के 2654 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से तेलंगाना प्रदेश के 293 ग्राम में 2733 परिवार के 12026 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से तेलंगाना प्रदेश के 114 ग्राम में 994 परिवार के 5029 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से तेलंगाना राज्य के 467 ग्राम में 4345 परिवार के 19709 व्यक्ति प्रवासित है।

इसी तरह जिला दंतेवाड़ा से आंध्रप्रदेश के 25 ग्राम में 125 परिवार के 568 व्यक्ति एवं जिला सुकमा से आंध्रप्रदेश के 155 ग्राम में 2462 परिवार के 10787 व्यक्ति तथा जिला बीजापुर से आंध्रप्रदेश के 04 ग्राम में 07 परिवार के 34 व्यक्ति प्रवासित है। इस तरह से छत्तीसगढ़ राज्य के उक्त तीनो जिला से आंध्रप्रदेश राज्य के 184 ग्राम में 2594 परिवार के 11389 व्यक्ति प्रवासित है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दंतेवाड़ा, सुकमा एवं बीजापुर के 667 ग्राम से तेलंगाना एवं आंध्रप्रदेश राज्य के 651 ग्राम में 6939 परिवार के 31098 व्यक्ति प्रवासित है। बैठक में अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बस्तर संभाग डोमन सिंह एवं पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुन्दरराज से चर्चा कर अन्य प्रांतों में प्रवासित परिवारों के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए एक बार और सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त कर लें।

अपर मुख्य सचिव गृह पिंगुआ ने कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा से कहा है कि वे अपने-अपने जिलों से अन्य प्रांतों में प्रवासित लोगों के बारे में उनके मूल ग्राम एवं निवास स्थान से आवश्यक जानकारी तैयार कर लें। जिससे पुनर्वास योजना बनाने आसानी होगी। इसी तरह से पुनर्वास योजना बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को निर्देशित दिए गए है कि वे शीघ्र ही अपने-अपने विभागों के नोडल अधिकारी नियुक्त कर दें, जिससे शीघ्र पुनर्वास योजना बनाने में आसानी होगी। 

वीडियो कॉन्फ्रेंस में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, गृह विभाग की सचिव नेहा चम्पावत, आईजी बस्तर सुन्दरराज, कमिश्नर बस्तर डोमन सिंह सहित कलेक्टर दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा शामिल हुए। इसी तरह से बैठक में सामान्य प्रशासन, वित्त विभाग, राजस्व, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, वाणिज्य एवं उद्योग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत यूपी के साथ अहम MoU

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ग्रामीण पेयजल प्रबंधन में संरचनात्मक सुधारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत उत्तर प्रदेश राज्य के साथ एक सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन (MoU) आज हस्ताक्षरित किया गया। इसके साथ ही राज्य ने मिशन के सुधार-आधारित कार्यान्वयन ढांचे में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। जल जीवन मिशन 2.0 को 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई थी।

यह MoU केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की उपस्थिति में हस्ताक्षरित हुआ, जबकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना तथा उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

यह MoU जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) की संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीणा नाइक और उत्तर प्रदेश सरकार के नमामि गंगे एवं ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव के बीच हस्ताक्षरित और आदान-प्रदान किया गया।

इस अवसर पर DDWS के सचिवअशोक के. के. मीणा, अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के मिशन निदेशक कमल किशोर सोअन, यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक डॉ. राज शेखर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 अब सुनिश्चित सेवा वितरण, जवाबदेही और दीर्घकालिक स्थिरता पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं और इनका समय पर उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति सरकार की शून्य-सहनशीलता नीति को भी दोहराया।

मंत्री ने बताया कि SBI रिसर्च के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत लगभग 9 करोड़ महिलाओं को रोजाना पानी लाने के कठिन कार्य से राहत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अध्ययन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षित पेयजल की सार्वभौमिक पहुंच से प्रतिदिन करीब 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो सकती है और दस्त से होने वाली लगभग 4 लाख वार्षिक मौतों को रोका जा सकता है।

उन्होंने जल संरक्षण और जन भागीदारी पर भी जोर देते हुए कहा कि जल संचय, वर्षा जल संचयन और स्रोत की स्थिरता पर समान ध्यान देना आवश्यक है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जल जीवन मिशन से पहले राज्य के बहुत कम गांवों में पाइप से पेयजल उपलब्ध था। उन्होंने विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का उल्लेख किया और बताया कि अब स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं के कारण मृत्यु दर लगभग शून्य के करीब आ गई है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल और शौचालय सुविधाएं उपलब्ध होने से छात्राओं के ड्रॉपआउट में कमी आई है। राज्य सरकार अब नियमित और गुणवत्तापूर्ण जल आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

इस MoU में 11 प्रमुख सुधार क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें पेयजल प्रबंधन की संस्थागत संरचना, तकनीकी अनुपालन, जल गुणवत्ता, डिजिटल डेटा प्रबंधन, जन भागीदारी, क्षमता निर्माण और वित्तीय स्थिरता शामिल हैं।

MoU के तहत ग्राम पंचायत आधारित, सेवा-उन्मुख और समुदाय केंद्रित जल प्रबंधन मॉडल को लागू किया जाएगा। साथ ही, पूर्ण हो चुकी योजनाओं को “जल अर्पण” प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायतों और समुदायों को सौंपा जाएगा।

इसमें डिजिटल योजना प्लेटफॉर्म (DSS), “जल सेवा आंकलन”, “मेरी पंचायत” ऐप और “जल उत्सव” जैसे अभियानों का भी प्रावधान है। राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026 की शुरुआत 8 मार्च 2026 को हुई और यह 22 मार्च 2026 (विश्व जल दिवस) तक चलेगा।

जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही जन भागीदारी और संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करना है।

यह पहल ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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