Media24Media.com: ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लचीलापन: आईएसए–एसआईडीएस नेतृत्व सत्र में भारत की वैश्विक सौर प्रतिबद्धता

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ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लचीलापन: आईएसए–एसआईडीएस नेतृत्व सत्र में भारत की वैश्विक सौर प्रतिबद्धता

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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 19.11.2025 को ब्राज़ील के बेलेम में आयोजित यूएनएफसीसीसी सीओपी30 के अवसर पर आयोजित आईएसए-एसआईडीएस प्लेटफ़ॉर्म के उच्च-स्तरीय मंत्री नेतृत्व सत्र को संबोधित किया। यह आयोजन ‘यूनाइटिंग आइलैंड्स, इंस्पायरिंग एक्शन – लीडरशिप फ़ॉर एनर्जी सिक्योरिटी’ विषय के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में स्मॉल आइलैंड डेवलपिंग स्टेट्स (SIDS), अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) के सदस्य देशों और भागीदार संगठनों के मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने ऊर्जा सुरक्षा, वहनीयता और लचीलापन बढ़ाने के लिए सामूहिक कार्यों को आगे बढ़ाने हेतु भाग लिया।

सत्र के विचार-विमर्श से यह स्पष्ट हुआ कि SIDS विशेष प्रकार की चुनौतियों का सामना करते हैं—आयातित जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता, जलवायु-जनित व्यवधान, और कमजोर अवसंरचना। ISA-SIDS प्लेटफ़ॉर्म का उद्देश्य एक परिवर्तनकारी डिजिटल और वित्तीय तंत्र स्थापित करना है, जो मानकीकृत खरीद प्रणाली, मिश्रित वित्त, स्थानीय क्षमता निर्माण और सौर प्रौद्योगिकियों तक सुगम पहुंच के माध्यम से सौर ऊर्जा को तेजी से अपनाने में सहायता करेगा।

सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री यादव ने ISA के माध्यम से SIDS को स्वच्छ ऊर्जा मार्गों को आगे बढ़ाने में भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। आशावाद के साथ अपने वक्तव्य की शुरुआत करते हुए मंत्री ने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा में तेज प्रगति का उल्लेख किया और कहा, “आज भारत 500 गीगावॉट से अधिक स्थापित बिजली क्षमता पार कर चुका है — और इसका आधे से अधिक हिस्सा स्वच्छ ऊर्जा है। भारत अपने एनडीसी लक्ष्य से पाँच वर्ष पहले ही 50% गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल कर चुका है।”

मंत्री ने बताया कि भारत अब विश्व का चौथा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक और सौर ऊर्जा में तीसरा सबसे बड़ा देश है। उन्होंने कहा, “यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न और उनके स्केल, स्पीड तथा आम लोगों की शक्ति में विश्वास के कारण संभव हुआ।” उन्होंने पीएम सूर्य घर रूफटॉप सोलर कार्यक्रम की उदाहरणस्वरूप एक स्कूल शिक्षक के अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे इस योजना ने उनके जीवन में परिवर्तन लाया—जहाँ पहले वे हर महीने बिजली बिल को लेकर चिंतित रहते थे, वहीं अब वे धूप का इंतज़ार करते हैं क्योंकि वही उनकी आय का स्रोत बन गया है।

मंत्री ने बताया कि भारत में 20 लाख से अधिक परिवारों ने रूफटॉप सोलर अपनाया है, जिसे उन्होंने “हर घर की स्वतंत्रता” और “हर छत पर एक मिनी पावर प्लांट” कहा। कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “कृषि के लिए सौर ऊर्जा हमारे किसान समुदाय के लिए एक नया सवेरा है। अब वे सूरज के साथ काम करते हैं और शांति से सोते हैं।” सौर पंप और सौर ऊर्जा से संचालित फीडर खेती को ज्यादा भरोसेमंद और सम्मानजनक बना रहे हैं, क्योंकि वे किसानों को दिन के समय स्वच्छ सौर ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं—न डीज़ल, न इंतज़ार, न तनाव।

मंत्री ने पीएम जनमन योजना के माध्यम से दूरस्थ और वनों में बसे क्षेत्रों को रोशन करने की पहल तथा ऊर्जा भंडारण में भारत की बड़ी प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया, “भारत दुनिया की सबसे बड़ी ‘सोलर और बैटरी’ परियोजनाओं में से कुछ बना रहा है, जिनमें लद्दाख की एक परियोजना भी शामिल है, जो इतनी स्वच्छ ऊर्जा संग्रहीत करेगी कि पूरे एक शहर को रोशन कर सके।” उन्होंने जोर देकर कहा कि SIDS के लिए ऐसे मॉडल डीज़ल आयात कम करने, ऊर्जा लागत घटाने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।

आईएसए के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री यादव ने कहा, “ISA एक वैश्विक सोलर परिवार के रूप में उभरा है। अब 124 से अधिक देश अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का हिस्सा हैं। ISA को एक वैश्विक सौर परिवार के रूप में सोचें—प्रशांत द्वीपों से लेकर अफ्रीका के सवाना तक और दक्षिण अमेरिका के पर्वतों तक।” उन्होंने कहा कि ISA सौर परियोजना डिज़ाइन में तेजी ला रहा है, वित्त जुटा रहा है, स्थानीय रोजगार पैदा कर रहा है, और सौर ऊर्जा को स्वच्छ और विश्वसनीय बिजली का पहला विकल्प बना रहा है।

अपने संबोधन के अंत में मंत्री ने साझा वैश्विक कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा, “सौर ऊर्जा केवल तकनीकी रूप से ही नहीं बल्कि आशा और सशक्तिकरण की किरण बनकर फैल रही है। यह स्वतंत्रता है। यह गरिमा है। यह शांति है।”

अपने वक्तव्यों में छोटे द्वीपीय देशों के प्रतिनिधियों और अन्य प्रतिभागियों ने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा, विशेषकर सौर ऊर्जा क्षेत्र में तेज प्रगति की सराहना की। उन्होंने SIDS प्लेटफ़ॉर्म का समर्थन करते हुए कहा कि यह उनके देशों में नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता को खोलने में सहायक होगा। यह भी माना गया कि जलवायु-लचीली प्रणालियाँ केवल जलवायु की ही नहीं बल्कि सामाजिक-आर्थिक प्राथमिकता भी हैं। उम्मीद जताई गई कि यह प्लेटफ़ॉर्म व्यवहार्यता अध्ययन, स्थानीय कार्यबल के कौशल विकास और जलवायु वित्त के जोखिम घटाने के माध्यम से उनके जलवायु लचीलेपन को बढ़ाने में मदद करेगा।


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