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विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला आयोजित, 5 वर्षों में 30 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य

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विशाखापत्तनम- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने मत्स्य पालन विभाग तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के सहयोग से 5-6 जून 2026 को विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया। दो दिवसीय इस कार्यशाला में मूल्य संवर्धन, स्थिरता, बाजार पहुंच, नवाचार और अवसंरचना विकास के माध्यम से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में एन. चंद्रबाबू नायडू,पीयूष गोयल,राजीव रंजन सिंह,किंजारापु राममोहन नायडू,चिराग पासवान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार समन्वित दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात के मूल्य में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में 30 अरब अमेरिकी डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार, स्थिरता और नए निर्यात बाजारों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

पीयूष गोयल ने रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पादों सहित मूल्य संवर्धित समुद्री खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्यातकों से हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से उपलब्ध वैश्विक बाजार अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में राज्य की अग्रणी भूमिका तथा समुद्री खाद्य निर्यात में उसके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने आंध्र प्रदेश को सतत जलीय कृषि और समुद्री खाद्य निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि भारत में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का समुद्री खाद्य निर्यात लगभग 73,890 करोड़ रुपये (8.46 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है। फ्रोजन श्रिम्प (झींगा) देश का प्रमुख निर्यात उत्पाद बना हुआ है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने उच्च मूल्य वाले समुद्री खाद्य निर्यात के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने समुद्री खाद्य क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और तकनीकी नवाचार की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया।

मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्खी ने निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अवसंरचना विकास, प्रमाणन, नवाचार, मूल्य संवर्धन और बाजार पहुंच को वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का प्रमुख आधार बताया।

कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न संस्थानों, समुद्री खाद्य निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों, उद्योग संगठनों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं तथा जलीय कृषि किसानों ने भाग लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMKSSY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी लाभ वितरित किए गए।

चर्चा सत्रों में रोग प्रबंधन, बढ़ती उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता, कोल्ड चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और सतत मत्स्य पालन जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में ट्रेसबिलिटी सिस्टम, सतत प्रमाणन, मूल्य संवर्धन, निर्यात संवर्धन, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन तथा समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए संभावित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) ढांचे पर चर्चा हुई।

कार्यशाला का समापन समुद्री खाद्य क्षेत्र में स्थिरता, ट्रेसबिलिटी, मूल्य संवर्धन, निर्यात अवसंरचना, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को भारत के समुद्री खाद्य निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पीयूष गोयल की कनाडा यात्रा: भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी को नई गति, निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर

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भारत और कनाडा के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 28 मई 2026 को कनाडा की तीन दिवसीय सफल और ऐतिहासिक यात्रा संपन्न की। इस यात्रा के दौरान टोरंटो में उच्च स्तरीय बैठकों, अकादमिक संस्थानों, नवाचार केंद्रों, सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, निवेशकों और भारतीय समुदाय के साथ कई महत्वपूर्ण संवाद हुए।

शिक्षा और नीति संवाद

मंत्री ने टोरंटो विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित Munk School of Global Affairs and Public Policy में छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने भारत की तेज आर्थिक प्रगति, सुधारों और वैश्विक नेतृत्व पर प्रकाश डाला और भारत-कनाडा संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।

नवाचार और तकनीकी सहयोग

उन्होंने Ontario Centre of Innovation का दौरा किया और स्टार्टअप, एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र दुनिया में तेजी से उभर रहा है और कनाडा इसके साथ साझेदारी कर सकता है।

उद्योग और निवेश चर्चा

मंत्री ने कनाडा-भारत व्यापार गलियारे से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों से मुलाकात की और व्यापार एवं निवेश को बढ़ाने पर चर्चा की। इसके अलावा उन्होंने ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड  से मुलाकात कर विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की।

प्रमुख वित्तीय संस्थानों से बैठक

गोयल ने Ontario Teachers' Pension Plan और CPP Investments के साथ बैठक की, जिसमें भारत में दीर्घकालिक निवेश अवसरों पर चर्चा हुई।

भारत-कनाडा आर्थिक लक्ष्य

उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के बीच वर्तमान में लगभग 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार है, जिसे 2030 तक 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। दोनों देश CEPA (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता) वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रवासी भारतीयों से संवाद

यात्रा के अंत में उन्होंने कनाडा-भारत फाउंडेशन और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत की और भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की।

यह यात्रा भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने और वैश्विक निवेश व सहयोग के नए अवसर खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


कनाडा दौरे पर पीयूष गोयल ने निवेश, तकनीक और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर, 50 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य पर सहमति

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने कनाडा दौरे के दूसरे दिन टोरंटो में वरिष्ठ कनाडाई व्यापार नेताओं और संस्थागत निवेशकों के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इस दौरे का उद्देश्य भारत–कनाडा द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना तथा निवेश और प्रौद्योगिकी साझेदारी को रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ावा देना है।

दिन की शुरुआत उन्होंने कनाडा–इंडिया “बिल्डिंग ब्रिजेस” कार्यक्रम में मुख्य भाषण के साथ की, जिसे ग्लोबल अफेयर्स कनाडा, CII और ASSOCHAM द्वारा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर टोरंटो में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में 150 से अधिक व्यापार प्रतिनिधियों, निवेश समूहों और उद्योग संगठनों ने भाग लिया, जिनमें उन्नत विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी, स्वच्छ तकनीक, ऊर्जा तथा तेल एवं गैस क्षेत्र शामिल थे।

इसके बाद गोयल और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनींदर सिद्धू के बीच एक फायरसाइड चैट हुई। इसमें गोयल ने भारत और कनाडा के बीच बढ़ती पूरकताओं पर प्रकाश डालते हुए मजबूत और पूर्वानुमान योग्य व्यापारिक माहौल की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री सिद्धू ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई और कनाडा के अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति की सराहना की। उन्होंने नवंबर में भारत के लिए “टीम कनाडा ट्रेड मिशन” की घोषणा की, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिज, परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग के अवसर तलाशना है।

दोनों पक्षों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने और वर्ष के अंत तक CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) वार्ता को पूरा करने के साझा लक्ष्य की पुष्टि की।

इसके बाद भारत–कनाडा निवेश गोलमेज बैठक आयोजित हुई, जिसकी सह-अध्यक्षता दोनों मंत्रियों ने की। इसमें कनाडा के प्रमुख पेंशन फंड्स, बैंक और निवेश संस्थान शामिल हुए। चर्चा का केंद्र भारत सरकार की बुनियादी ढांचा विकास, वित्तीय क्षेत्र सुधार और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस नीतियाँ रहीं, जो वैश्विक निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। गोयल ने निवेशकों को स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई, विनिर्माण और सप्लाई चेन विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ साझेदारी के लिए आमंत्रित किया।

उन्होंने कनाडा की कई प्रमुख कंपनियों और वित्तीय निवेशकों के साथ व्यक्तिगत बैठकें भी कीं, जिनमें बीमा, खाद्य प्रसंस्करण, बैंकिंग और महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण क्षेत्र शामिल थे। इन बैठकों में भारत के मैक्रोइकोनॉमिक आउटलुक, व्यापार समझौतों पर बढ़ता फोकस, उच्च-विकास क्षेत्रों के अवसर, STEM प्रतिभा और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की वृद्धि, PLI योजनाएँ तथा भारत के बेहतर होते नियामक ढांचे पर चर्चा हुई।

इसके बाद गोयल ने टोरंटो के Humber Bay Park स्थित कनिष्क स्मारक का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित की और एयर इंडिया फ्लाइट AI-182 आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी।

दिन का समापन ब्रैम्पटन स्थित पियर्सन कन्वेंशन सेंटर में भारतीय महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित स्वागत समारोह के साथ हुआ। यहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने कनाडा में भारतीय समुदाय की भूमिका और भारत–कनाडा व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को रेखांकित किया।

गोयल इस दौरे पर 100 से अधिक भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित अब तक के सबसे बड़े भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह तीन दिवसीय यात्रा भारत–कनाडा आर्थिक संबंधों को पुनर्जीवित करने और CEPA वार्ता को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए।

न्यूज़ीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले ने इसे “एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला अवसर” बताते हुए कहा कि यह समझौता निर्यात को बढ़ावा देगा, रोजगार सृजित करेगा और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय और दोनों देशों के बीच मजबूत सांस्कृतिक एवं खेल संबंधों का भी उल्लेख किया।

वहीं, पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता विकसित देशों के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि यह समझौता किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड की ओर से भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश की संभावना जताई गई है।

यह FTA भारत के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप है और पिछले कुछ वर्षों में भारत द्वारा किए गए प्रमुख व्यापार समझौतों में शामिल है। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत को न्यूज़ीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जिससे MSME सेक्टर और श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा लाभ होगा।

समझौते के तहत भारत ने लगभग 70% टैरिफ लाइनों पर रियायत दी है, जबकि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, कृषि उत्पाद और कुछ औद्योगिक वस्तुओं को संरक्षण दिया गया है। इससे घरेलू उद्योगों और किसानों के हित सुरक्षित रहेंगे।

कृषि क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे उत्पादों के आयात के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिससे संतुलन बना रहे।

सेवा क्षेत्र में भारत को 118 सेक्टरों में बाजार पहुंच मिलेगी, जिसमें आईटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। साथ ही, भारतीय पेशेवरों के लिए 5000 विशेष वीज़ा का प्रावधान किया गया है, जिससे रोजगार और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के अवसर बढ़ेंगे।

छात्रों के लिए भी यह समझौता लाभकारी है। अब भारतीय छात्रों को न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के दौरान काम करने और पढ़ाई के बाद नौकरी के अधिक अवसर मिलेंगे। युवाओं के लिए वर्किंग हॉलिडे वीज़ा की सुविधा भी दी गई है।

यह समझौता MSME, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और नवाचार को बढ़ावा देगा। साथ ही, भारत के फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को न्यूज़ीलैंड के बाजार में आसान प्रवेश मिलेगा।

बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के तहत भारतीय भौगोलिक संकेत (GI) उत्पादों को भी न्यूज़ीलैंड में मान्यता मिलने का रास्ता साफ होगा।

यह समझौता व्यापार प्रक्रियाओं को आसान बनाने, लागत कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर देता है। सीमा शुल्क निकासी को तेज किया जाएगा और डिजिटल सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

सांस्कृतिक और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में भी यह समझौता ऐतिहासिक है। AYUSH और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक पहचान दिलाने में यह अहम भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यापार, निवेश, रोजगार और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करेगा।

WTO MC14 में भारत की मजबूत पैरवी, समानता और सर्वसम्मति आधारित व्यापार प्रणाली पर जोर

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याउंडे (कैमरून)- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के दूसरे दिन WTO सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों ने चर्चा की। भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं।

बैठक में गोयल ने कहा कि सर्वसम्मति (consensus) आधारित निर्णय प्रक्रिया WTO की विश्वसनीयता की आधारशिला है और किसी भी सदस्य देश को उसकी सहमति के बिना नियमों में बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-आधारित चर्चा पर जोर देते हुए कहा कि WTO को वर्तमान चुनौतियों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए।

भारत के प्रमुख मुद्दे

  • खाद्य सुरक्षा (Food Security)

  • पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH)

  • विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM)

  • कॉटन से जुड़े मुद्दे

भारत ने कहा कि इन लंबित मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और वैश्विक व्यापार प्रणाली में मौजूद असमानताओं (asymmetries) को दूर करना आवश्यक है।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

  • डिस्प्यूट सेटलमेंट सिस्टम की कमजोरी पर चिंता

  • छोटे देशों के हितों की रक्षा की आवश्यकता

  • पारदर्शिता का दुरुपयोग कर व्यापारिक दबाव बनाने के खिलाफ चेतावनी

  • सभी देशों को समान अवसर देने पर जोर

भारत का रुख

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने WTO सुधार प्रक्रिया को समयबद्ध और ठोस आधार पर आगे बढ़ाने का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया:

  • पारदर्शी

  • समावेशी

  • सदस्य-प्रेरित (member-driven) होनी चाहिए

द्विपक्षीय बैठकें

सम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने:

  • अमेरिका, चीन, कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

  • व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की

WTO MC14 में भारत ने वैश्विक व्यापार में संतुलन, समान अवसर और विकासशील देशों के हितों की रक्षा पर जोर दिया।


डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) का याउंडे, कैमरून में शुभारंभ

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विश्व व्यापार संगठन (WTO) का 14वाँ मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 26 मार्च 2026 को कैमरून की राजधानी याउंडे में एक औपचारिक सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता कैमरून के व्यापार मंत्री ने की। इस अवसर पर WTO की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला तथा सदस्य देशों के व्यापार मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। भारत की ओर से वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उद्घाटन सत्र में भाग लिया। उद्घाटन सत्र के बाद 15 सितंबर 2025 को मत्स्य सब्सिडी समझौते के लागू होने के उपलक्ष्य में एक संक्षिप्त समारोह आयोजित किया गया।

उद्घाटन समारोह के बाद मंत्रियों ने WTO के मूलभूत मुद्दों और उसके सिद्धांतों पर चर्चा की। इस दौरान भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि WTO में आवश्यक सुधार पारदर्शी, समावेशी और सदस्य-प्रधान प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास को केंद्र में रखते हुए संगठन के मूल सिद्धांतों—जैसे भेदभाव-रहित व्यवस्था, सर्वसम्मति आधारित निर्णय और समानता—को बनाए रखा जाना चाहिए।

सम्मेलन के पहले दिन के दौरान पीयूष गोयल ने कैमरून के प्रधानमंत्री महामहिम डायोन नगुटे जोसेफ से मुलाकात की और भारत–कैमरून सहयोग को मजबूत करने सहित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने WTO की महानिदेशक से भी मुलाकात कर MC14 के एजेंडे पर बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने नीदरलैंड, फ्रांस और इथियोपिया के अपने समकक्षों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकों में व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी MC14 के दौरान चिली, पैराग्वे, अमेरिका, नेपाल, फिलीपींस, सऊदी अरब, यूरोपीय संसद के प्रतिनिधिमंडल, मैक्सिको, पेरू, रूस, न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में MC14 के एजेंडे के साथ-साथ व्यापार संबंधों को बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा हुई। चिली और पेरू के साथ भारत-चिली तथा भारत-पेरू मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं की प्रगति पर बातचीत हुई। वहीं यूरोपीय संघ और न्यूज़ीलैंड के साथ हाल ही में संपन्न FTA वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

दिन का समापन कैमरून द्वारा आयोजित एक औपचारिक स्वागत समारोह और रात्रिभोज के साथ हुआ।

डंके की चोट पर बोले पीयूष गोयल - किसानों, MSME और देसी उद्योगों के हित पूरी तरह सुरक्षित

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 नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील की रूपरेखा को लेकर जारी संयुक्त बयान के बाद देश में उठ रही आशंकाओं पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यह समझौता पूरी तरह भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया गया है और इसमें किसानों, MSME, हैंडीक्राफ्ट व हैंडलूम सेक्टर के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है।


पीयूष गोयल ने कहा,

“डंके की चोट पर मैं कह सकता हूं कि इस ट्रेड डील में भारत के किसानों, डेयरी सेक्टर, MSME और देसी उद्योगों के हितों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है। GM फूड, मीट और डेयरी उत्पादों पर किसी भी तरह की रियायत नहीं दी गई है।”

भारत को अमेरिका में बेहतर मार्केट एक्सेस

ट्रेड डील की रूपरेखा के बाद देश में जताई जा रही चिंताओं के बीच गोयल ने कहा कि इस समझौते के तहत भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अमेरिका में कम टैरिफ पर बेहतर मार्केट एक्सेस मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए भारत का बाजार केवल कुछ सीमित उत्पादों के लिए ही खोला गया है।

कृषि और डेयरी सेक्टर पूरी तरह सुरक्षित

केंद्रीय मंत्री ने कहा,
“जिस तरह से हमारे किसानों और डेयरी सेक्टर के हितों की रक्षा की गई है, वह सराहनीय है। भारत-अमेरिका के बीच देर रात फाइनल हुआ साझा बयान देश के हर कोने में सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।”

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक हैंडीक्राफ्ट कारीगर ने टैरिफ घटने से मिलने वाले फायदों को लेकर उम्मीद जताई है। कारीगर के अनुसार, 18 प्रतिशत टैरिफ होने से नए ऑर्डर मिलेंगे और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

18% टैरिफ, कई उत्पादों पर 0 ड्यूटी

गोयल ने बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाया गया 50 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। यह दर भारत के पड़ोसी देशों और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि कई अहम सेक्टर ऐसे हैं, जहां अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर 0 प्रतिशत ड्यूटी जारी रहेगी, जिनमें शामिल हैं—

  • रत्न और हीरे
  • फार्मास्युटिकल उत्पाद
  • स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स

कृषि उत्पादों को भी बड़ी राहत

कृषि क्षेत्र में भी कई भारतीय उत्पाद अमेरिका में 0 रेसिप्रोकल टैरिफ के साथ निर्यात किए जाएंगे। इनमें मसाले, चाय, कॉफी, नारियल व नारियल तेल, वेजिटेबल वैक्स, सुपारी, काजू, चेस्टनट, ब्राजील नट के साथ कई फल और सब्जियां शामिल हैं।

2047 के विकसित भारत की दिशा में अहम कदम

पीयूष गोयल ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह ट्रेड डील बेहद अहम है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को सालाना 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने के उद्देश्य से फरवरी 2024 में बातचीत शुरू हुई थी।

उन्होंने कहा,
“टेक्सटाइल और ऐपेरल सेक्टर में भारत को बड़ा फायदा होगा। यह समझौता संतुलित है और दोनों देशों के नेताओं की दूरदृष्टि को दर्शाता है।”

ट्रेड डील की प्रमुख बातें

  • अमेरिका भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% करेगा
  • भारत कुछ अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाएगा या समाप्त करेगा
  • अगले 5 वर्षों में भारत 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा, विमान, तकनीक और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा रखता है
  • रूसी तेल खरीद पर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क हटाया गया

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह समझौता भारत के निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के साथ भारत के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।

किम्बर्ली प्रक्रिया की अध्यक्षता के लिए भारत का चयन, 1 जनवरी 2026 से संभालेगा नेतृत्व

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नई दिल्ली- किम्बर्ली प्रक्रिया (KP) की आम सभा ने भारत को 1 जनवरी 2026 से किम्बर्ली प्रक्रिया की अध्यक्षता संभालने के लिए चुना है। किम्बर्ली प्रक्रिया एक त्रिपक्षीय पहल है जिसमें सरकारें, अंतरराष्ट्रीय हीरे का उद्योग और नागरिक समाज शामिल हैं। इसका उद्देश्य “संघर्ष हीरों” (Conflict Diamonds) के व्यापार को रोकना है—ये वे हीरे हैं जिनका उपयोग विद्रोही समूह या उनके सहयोगी संघर्षों को वित्तपोषित करने के लिए करते हैं, जो वैध सरकारों को कमजोर करते हैं, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों में परिभाषित है।

भारत 25 दिसंबर 2025 से KP के उपाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण करेगा, इसके बाद नए साल में अध्यक्षता संभालेगा। यह तीसरी बार है जब भारत को किम्बर्ली प्रक्रिया की अध्यक्षता के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि भारत का चयन मोदी सरकार की अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ईमानदारी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता पर वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।

किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणन योजना (KPCS), जिसे एक संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत स्थापित किया गया था, 1 जनवरी 2003 से प्रभावी है और तब से यह संघर्ष हीरों के व्यापार को रोकने का एक प्रभावी तंत्र बन चुकी है। वर्तमान में किम्बर्ली प्रक्रिया के 60 प्रतिभागी हैं, जिसमें यूरोपीय संघ और उसके सदस्य राज्य को एक ही प्रतिभागी के रूप में गिना जाता है। KP प्रतिभागी विश्व के लगभग 99 प्रतिशत कच्चे हीरों के व्यापार को नियंत्रित करते हैं, जिससे यह इस क्षेत्र का सबसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय तंत्र बन गया है।

हीरे के निर्माण और व्यापार में एक प्रमुख वैश्विक केंद्र होने के नाते, भारत की अध्यक्षता ऐसे समय में आ रही है जब भू-राजनीति बदल रही है और सतत और जिम्मेदार स्रोतों से हीरों की आपूर्ति पर अधिक जोर दिया जा रहा है। भारत अपने कार्यकाल के दौरान संचालन और अनुपालन को मजबूत करने, डिजिटल प्रमाणन और ट्रेसबिलिटी को बढ़ावा देने, डेटा-आधारित निगरानी के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने, और संघर्ष-रहित हीरों में उपभोक्ता विश्वास मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।

2025 में उपाध्यक्ष और 2026 में अध्यक्ष के रूप में, भारत सभी प्रतिभागियों और पर्यवेक्षकों के साथ मिलकर किम्बर्ली प्रक्रिया में विश्वास को मजबूत करने, नियम-आधारित अनुपालन सुनिश्चित करने और इसकी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए काम करेगा। इसके साथ ही भारत KP को एक अधिक समावेशी और प्रभावी बहुपक्षीय तंत्र बनाने की दिशा में भी प्रयास करेगा।

भारत-ओमान व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) : द्विपक्षीय व्यापार और सेवा क्षेत्र में नई संभावनाएँ

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भारत और ओमान ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जिसके तहत दोनों देशों ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement – CEPA) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और ओमान के वाणिज्य, उद्योग और निवेश संवर्धन मंत्री क़ैस बिन मोहम्मद अल यूसुफ ने हस्ताक्षर किए।


यह CEPA समझौता भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच आर्थिक समेकन को गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ओमान इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और भारतीय वस्त्र एवं सेवाओं के लिए मध्य पूर्व और अफ्रीका की ओर एक प्रमुख मार्गदर्शक है। ओमान में लगभग 7 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें 200–300 वर्षों से उपस्थित भारतीय व्यापारी परिवार भी शामिल हैं, जो ओमान की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। भारतीय उद्यमों की ओमान में मजबूत उपस्थिति है, जहाँ 6,000 से अधिक भारतीय संस्थान विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। वार्षिक प्रेषण लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर है, जो आर्थिक जुड़ाव की गहराई को दर्शाता है। भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है, और CEPA ढांचे के तहत इसके विस्तार की मजबूत संभावनाएँ हैं।

यह समझौता हाल के छह महीनों में ब्रिटेन के बाद दूसरा मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) है और इसका उद्देश्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार समझौते करना है, जो भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों से प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं और भारतीय व्यवसायों के लिए अवसर प्रदान करती हैं।

मुख्य लाभ और प्रावधान:

  • CEPA के तहत ओमान ने भारत को अभूतपूर्व शुल्क छूट दी है। ओमान ने अपने 98.08% टैरिफ लाइनों पर शून्य-शुल्क प्रवेश की पेशकश की है, जो भारत के ओमान निर्यात का 99.38% कवर करती है। प्रमुख श्रम-गहन क्षेत्र जैसे आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, कृषि उत्पाद, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और ऑटोमोबाइल पर पूर्ण टैरिफ समाप्ति लागू होगी। इसमें से 97.96% टैरिफ लाइनों पर तत्काल शुल्‍क उन्मूलन लागू होगा।

  • भारत ने अपने कुल 12,556 टैरिफ लाइनों में से 77.79% पर टैरिफ उदारीकरण की पेशकश की है, जो ओमान से भारत के आयात का 94.81% मूल्य कवर करता है। संवेदनशील उत्पादों को भारत ने बिना कोई छूट दिए बहिष्करण श्रेणी में रखा है, जिसमें कृषि उत्पाद (डेयरी, चाय, कॉफ़ी, रबर, तंबाकू), सोना और चांदी की धातुएँ, आभूषण, अन्य श्रम-गहन उत्पाद जैसे फुटवियर और खेल सामग्री, और कई बेस मेटल्स का स्क्रैप शामिल है।

  • सेवा क्षेत्र, जो भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख चालक है, को भी व्यापक लाभ मिलेगा। ओमान के वैश्विक सेवा आयात लगभग 12.52 बिलियन अमेरिकी डॉलर हैं, जिसमें भारत के हिस्से का 5.31% है, जो भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए महत्वपूर्ण अप्रयुक्त अवसर दिखाता है। समझौते में व्यापक सेवाओं का पैकेज शामिल है, जिसमें ओमान ने कंप्यूटर सेवाएँ, व्यावसायिक एवं पेशेवर सेवाएँ, ऑडियो-विज़ुअल सेवाएँ, अनुसंधान और विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रतिबद्धताएँ दी हैं।

  • CEPA के तहत भारतीय पेशेवरों के लिए बेहतर गतिशीलता का प्रावधान किया गया है। पहली बार, ओमान ने मोड 4 के तहत व्यापक प्रतिबद्धताएँ दी हैं, जिसमें इन्ट्रा-कार्पोरेट ट्रांसफरीज़ की कोटा 20% से बढ़ाकर 50% कर दी गई है और कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस सप्लायर्स के लिए रहने की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 2 वर्ष कर दी गई है, जिसे आगे और 2 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें लेखा, कराधान, वास्तुकला, चिकित्सा और संबद्ध सेवाओं में कुशल पेशेवरों के लिए प्रवेश और रहने की अधिक उदार शर्तें भी शामिल हैं।

  • CEPA भारतीय कंपनियों को ओमान में प्रमुख सेवा क्षेत्रों में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देता है, जिससे भारत की सेवा उद्योग के लिए क्षेत्र में विस्तार के नए अवसर खुलते हैं।

  • एक महत्वपूर्ण पहलू है पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine) में ओमान की प्रतिबद्धता, जो सभी आपूर्ति मोड्स में लागू होगी, और यह किसी भी अन्य देश द्वारा पहले नहीं दी गई इतनी व्यापक प्रतिबद्धता है। इससे भारत के आयुष और वेलनेस क्षेत्रों को खाड़ी क्षेत्र में अपने कौशल को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

  • समझौते में गैर-शुल्क बाधाओं (Non-Tariff Barriers) को भी संबोधित किया गया है, जिससे वास्तविक बाजार पहुँच में सुधार होगा।

यह समझौता 2006 के बाद ओमान द्वारा किसी देश के साथ किया गया पहला द्विपक्षीय समझौता है (अमेरिका के बाद)।

पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा:

"भारत-ओमान CEPA भारत और ओमान के ऐतिहासिक मजबूत संबंधों को और सशक्त करता है और एक संतुलित आर्थिक ढांचा प्रस्तुत करता है, जो भारतीय निर्यातकों और पेशेवरों के लिए अवसरों को बढ़ाता है। यह भारतीय वस्तुओं के लिए ओमान के बाजार में लगभग सार्वभौमिक शून्य-शुल्क पहुँच प्रदान करता है, उच्च विकास वाले प्रमुख क्षेत्रों में सेवाओं के विस्तार को सुनिश्चित करता है और भारतीय पेशेवरों के गतिशीलता को बेहतर बनाता है।"

CEPA से द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि, रोजगार सृजन, निर्यात विस्तार, आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करना और भारत व ओमान के बीच दीर्घकालिक आर्थिक जुड़ाव के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की यात्रा: पिछले 11 वर्षों में ऐतिहासिक परिवर्तन – पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एक ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र की पिछले 11 वर्षों की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सशक्त दृष्टि, ईमानदार मंशा और निरंतर क्रियान्वयन किसी राष्ट्र की दिशा और दशा बदल सकते हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि के अवसर पर गोयल ने कहा कि देश केवल लौह पुरुष को ही नहीं, बल्कि ऐसे दूरदर्शी नेता को भी स्मरण करता है, जो भारत को राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर देखना चाहते थे।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वही आत्मनिर्भरता की भावना भारत के ऊर्जा क्षेत्र में साकार हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने अब तक का सर्वाधिक 1,048 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया, जबकि कोयला आयात में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आई है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 46 गुना बढ़ी है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश बन गया है। वहीं, पवन ऊर्जा क्षमता 2014 में 21 गीगावॉट से बढ़कर 2025 में 53 गीगावॉट हो गई है।

गोयल ने बताया कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब बन चुका है और रिफाइनिंग क्षमता को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि 34,238 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 25,923 किलोमीटर परिचालन में हैं।
उन्होंने शांति (SHANTI) विधेयक का भी उल्लेख किया, जिसके तहत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि भारत अब अतिरिक्त बिजली उत्पादन, ग्रिड एकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ चुका है। यह परिवर्तन आकस्मिक नहीं, बल्कि स्पष्ट दृष्टि और सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत बिजली की कमी से निकलकर बिजली सुरक्षा और अब बिजली स्थिरता की ओर अग्रसर हुआ है।

गोयल ने कहा कि यह परिवर्तन पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—

पहला स्तंभ: सार्वभौमिक पहुंच

उन्होंने कहा कि सौभाग्य योजना के तहत हर घर तक बिजली पहुँचाई गई है। उजाला योजना के अंतर्गत 47.4 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए गए, जिससे बिजली बिल में बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई।
उन्होंने कहा कि अब बच्चे सूर्यास्त के बाद भी पढ़ाई कर पा रहे हैं—यह केवल घरों में नहीं, बल्कि आशाओं में भी रोशनी ला रहा है।
उन्होंने बताया कि 10 करोड़ परिवारों को स्वच्छ रसोई गैस कनेक्शन मिलने से महिलाएँ स्वस्थ जीवन जी रही हैं और पीएम-कुसुम योजना के तहत किसान ऊर्जा प्रदाता बन रहे हैं।

दूसरा स्तंभ: वहनीयता

मंत्री ने कहा कि सौर, पवन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है।
उन्होंने बताया कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य, जिसे 2030 तक हासिल करना था, वह समय से पहले पूरा कर लिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सौर और पवन ऊर्जा की बिक्री के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क माफ किया गया है।

तीसरा स्तंभ: उपलब्धता

गोयल ने कहा कि बिजली की कमी 2013 में 4.2 प्रतिशत से घटकर 2025 में 0.1 प्रतिशत रह गई है।
उन्होंने बताया कि एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से भारत ने 250 गीगावॉट की रिकॉर्ड पीक पावर डिमांड को पूरा किया है।

चौथा स्तंभ: वित्तीय व्यवहार्यता

उन्होंने कहा कि पीएम-उदय योजना के तहत सुधारों से बिजली वितरण क्षेत्र सशक्त हुआ है।
डिस्कॉम बकाया 2022 में ₹1.4 लाख करोड़ से घटकर 2025 में ₹6,500 करोड़ रह गया है।

पाँचवां स्तंभ: स्थिरता और वैश्विक जिम्मेदारी

गोयल ने कहा कि भारत पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने वाला पहला G20 देश बन गया है।
उन्होंने बताया कि देश की 50 प्रतिशत स्थापित विद्युत क्षमता अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त हो रही है।

मंत्री ने कहा कि 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने की ओर बढ़ते हुए, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति को पुनः निर्धारित किया जा रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ से अधिक की जीवाश्म ईंधन आयात बचत है।
उन्होंने पीएम सूर्य घर योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत लगभग 20 लाख घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए सरकार जनता को सशक्त कर रही है।
उन्होंने बताया कि कोयला क्षेत्र पर गठित उच्चस्तरीय समिति की कई सिफारिशों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें कोयला अन्वेषण और खनन को तेज करना तथा कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देना शामिल है।
 गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ते हुए, भारत का ऊर्जा क्षेत्र पैमाने, गति और स्थिरता को एक साथ साधने का वैश्विक उदाहरण बनेगा।

पीयूष गोयल का संदेश: युवा भारत के निर्माण में स्नातकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

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वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नोएडा स्थित एमिटी विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसी विश्वविद्यालय का इससे बड़ा योगदान नहीं हो सकता कि वह प्रतिभाशाली युवाओं को वापस आने के लिए प्रेरित करे, उनकी क्षमताओं को निखारे और उन्हें ऐसा मंच दे जो उनकी योग्यता को पहचान और सम्मान दे।

लगभग 29,000 ऑन-कैंपस और ऑनलाइन छात्रों के स्नातक होने पर बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि समारोह का वास्तविक केंद्रबिंदु छात्रों और पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं की उपलब्धियाँ हैं।

गोयल ने विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों को दिए जाने वाले व्यापक अवसरों पर प्रकाश डाला और योग्यता-आधारित छात्रवृत्तियों के माध्यम से ज़रूरत-आधारित रहित (need-blind) प्रवेश प्रणाली की सराहना की। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय में आधी छात्र संख्या युवा महिलाओं की है और नवाचार के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय अग्रणी है, जहाँ छात्रों के पास 450 से अधिक पेटेंट हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय के 50 संकाय सदस्य रामलिंगम स्वामी फ़ेलो हैं, जो राष्ट्र सेवा के लिए लौटे हैं।

महापरिनिर्वाण दिवस पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर की विरासत को याद करते हुए उन्होंने संविधान में निहित समानता, सामाजिक सद्भाव और सबके लिए अवसरों के मूल्यों को दोहराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब भी वंचित वर्गों के उत्थान की नींव है और छात्रों को समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को याद रखना चाहिए।

मंत्री ने स्नातक हो रही इस पीढ़ी को भारत के विकसित राष्ट्र 2047 के लक्ष्य में एक महत्वपूर्ण भाग बताया और कहा कि आने वाले 25 वर्ष विकसित भारत के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की सीमाओं को आगे बढ़ाएँ और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दें।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने लाल किले से अपने संबोधन में एक लाख युवाओं से सार्वजनिक जीवन और राजनीति को करियर के रूप में अपनाने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि राजनीति को ऐसे प्रतिबद्ध व्यक्तियों की आवश्यकता है जो राष्ट्र के लिए काम करें, सार्वजनिक जीवन की ईमानदारी को बनाए रखें और 140 करोड़ नागरिकों को अपने कर्तव्यों—परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति—जागरूक करें।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि अधिक विश्वविद्यालय छात्रों को सार्वजनिक जीवन और राजनीति को समझने के लिए प्रेरित करेंगे, और नोट किया कि एमिटी विश्वविद्यालय राजनीतिक विज्ञान का अध्ययन प्रदान करता है। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान चाहें तो छात्रों को निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ इंटर्नशिप के लिए भेज सकते हैं ताकि वे शासन और जनसेवा को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें और भविष्य में इसे और बेहतर बना सकें।

उन्होंने अपने शुरुआती कंप्यूटर प्रशिक्षण को याद करते हुए कहा कि “garbage in, garbage out” और बताया कि भारतीय राजनीति को अधिक अच्छे लोग और मजबूत जननेता चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि अधिक संवेदनशील और ईमानदार युवा सार्वजनिक जीवन से जुड़ेंगे तो भारत अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से महाशक्ति बनेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री का उद्धरण देते हुए कहा कि भारत का भविष्य “can-do generation” के हाथों में है और यही युवा नया भारत बनाएंगे।

उन्होंने छात्रों को याद दिलाया कि वे अमृत काल में भारत का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी उठाते हैं और उन्हें उन सिद्धांतों पर विचार करने को कहा जो इस यात्रा का मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण को हर नागरिक के लिए एक प्रेरणादायी मार्गदर्शक बताया और 15 अगस्त 2022 के भाषण का उल्लेख किया जब भारत ने 75वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पाँच प्रमुख प्रण बताए थे, जो 2022 से 2047 तक भारत को $4 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था से $35 ट्रिलियन और $2,500 प्रति व्यक्ति आय से $20,000 तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि 140 करोड़ भारतीय इन सिद्धांतों को अपनाएँ, तो भारत का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल होगा।

पाँच प्रणों का उल्लेख

पहला प्रण: विकसित भारत का संकल्प

उन्होंने कहा कि आने वाले 25 वर्ष निर्णायक हैं और युवाओं को अपने क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ हासिल करनी होंगी।

दूसरा प्रण: औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति

उन्होंने छात्रों से मानसिक बाधाओं, पुराने विचारों और सीमित सोच को त्यागने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय पारंपरिक भारतीय दीक्षांत वस्त्र अपनाने पर विचार कर सकते हैं, जो राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक होगा।

तीसरा प्रण: भारत की विरासत पर गर्व

उन्होंने कहा कि तीव्र आधुनिकीकरण के बावजूद भारत की शक्ति उसकी विविधता, मूल्य और प्राचीन ज्ञान में निहित है।

चौथा प्रण: भारत की एकता—विविधता में एकता

उन्होंने छात्रों से अलग-अलग समुदायों से जुड़ने, सहयोग बढ़ाने और पुल बनाने का आह्वान किया।

पाँचवाँ प्रण: कर्तव्य की भावना

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए है। उन्होंने छात्रों को भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में योगदान देने को कहा।

गोयल ने शिक्षकों और अभिभावकों के योगदान की सराहना की और उनके समर्पण को छात्रों की सफलता की नींव बताया। उन्होंने छात्रों को अपने शिक्षकों और विश्वविद्यालय से जुड़े रहने की प्रेरणा दी।

उन्होंने कहा कि वास्तविक दुनिया में कदम रखते ही चुनौतियाँ स्वाभाविक हैं, लेकिन विश्वास जताया कि एमिटी विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए मूल्य और शिक्षा उन्हें इन चुनौतियों से आत्मविश्वास और दृढ़ता के साथ निपटने में सक्षम बनाएंगे। उन्होंने छात्रों से राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय योगदान देने और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।


भारत–कनाडा आर्थिक सहयोग में नई ऊर्जा: पीयूष गोयल ने क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी और एआई में अपार संभावनाएँ बताईं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में इंडो-कनाडियन बिजनेस चैंबर को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और कनाडा के बीच क्रिटिकल मिनरल्स, मिनरल प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, न्यूक्लियर एनर्जी और सप्लाई-चेन विविधीकरण में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और नेक्स्ट-जनरेशन डेटा सेंटर्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत की क्षमता दुनिया में तेजी से बढ़ रही है और भारत हर वर्ष सबसे बड़ा STEM टैलेंट पूल तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा प्राकृतिक सहयोगी हैं, जिनकी पूरक क्षमताएँ—व्यापार, निवेश और नई तकनीकों में व्यापक अवसर पैदा करती हैं।

भारत–कनाडा के मजबूत संबंध और CEPA पर प्रगति

पीयूष गोयल ने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई सकारात्मक बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने उच्च महत्त्वाकांक्षी CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर बातचीत शुरू करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमति व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि CEPA दोनों देशों के बीच विश्वास, निवेश सुरक्षा और सम्मानजनक संवाद को मजबूत करेगा।

क्लीन एनर्जी और एआई–ड्रिवन इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत अग्रणी

पीयूष गोयल ने बताया कि भारत की 500 GW की राष्ट्रीय पावर ग्रिड—जिसमें 250 GW नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है—एआई आधारित प्रणालियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW क्लीन एनर्जी क्षमता हासिल करना है, जिससे भारत दुनिया के सबसे भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ ऊर्जा प्रदाताओं में शामिल होगा।

भारत की अर्थव्यवस्था: मजबूती, स्थिरता और वैश्विक विश्वास

उन्होंने बताया कि भारत “Fragile Five” की सूची से आगे बढ़कर आज दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और अगले 2–2.5 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

भारत के पास—

  • कम मुद्रास्फीति,

  • मजबूत बैंकिंग प्रणाली,

  • ऊँचे विदेशी मुद्रा भंडार,

  • तेज़ी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर,

  • और सशक्त कैपिटल मार्केट है।

उन्होंने यह भी बताया कि बीते 11 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार 4.5 गुना तक बढ़ा है, जो निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है।

भारत–कनाडा साझेदारी को मज़बूत करने के लिए पाँच–बिंदु प्रस्ताव

पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच संबंध को गति देने के लिए पाँच प्रमुख सुझाव दिए—

  1. संवाद को परिणामों में बदलना
    — स्पष्ट रोडमैप, लक्ष्य और मापनीय प्रगति।

  2. सीईओ फोरम को सक्रिय करना
    — उद्योगों के बीच सीधे सहयोग को बढ़ावा देना।

  3. कनाडा को भारत के आगामी AI Summit में भाग लेने के लिए आमंत्रण।

  4. संयुक्त नवाचार को बढ़ावा
    — भारत की मजबूत IPR व्यवस्था, विशाल डेटा सेट और किफायती अनुसंधान माहौल का लाभ उठाना।

  5. प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी
    — क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, एयरोस्पेस, रक्षा और मेक इन इंडिया के तहत निर्माण।

उन्होंने कहा कि कनाडाई नवाचार और भारतीय क्षमताएँ मिलकर दुनिया के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर सकती हैं।

भारत–कनाडा सहयोग: 2047 के विकसित भारत की यात्रा में साथ

अंत में,पीयूष गोयल ने कनाडाई कंपनियों को भारत की विकसित राष्ट्र 2047 की यात्रा में सहयोगी बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत स्थिर, पारदर्शी और अवसरों से भरपूर वातावरण प्रदान करता है और आने वाले वर्षों में भारत–कनाडा साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।


इज़राइल दौरे में पीयूष गोयल की उच्चस्तरीय बैठकों से कृषि, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को नई गति

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने आधिकारिक इज़राइल दौरे के दौरान व्यापक बैठकों की एक श्रृंखला आयोजित की, जिससे कृषि, प्रौद्योगिकी, नवाचार और व्यापार के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग और मजबूत हुआ।

अपनी बैठकों के क्रम में, 21 नवंबर 2025 को गोयल ने इज़राइल के कृषि और खाद्य सुरक्षा मंत्री एवी डिक्टर से मुलाकात की और कृषि सहयोग को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। मंत्री डिक्टर ने गोयल को इज़राइल की 25-वर्षीय खाद्य सुरक्षा रोडमैप, उन्नत बीज-सुधार रणनीतियों और कृषि के लिए जल-पुन: उपयोग तकनीकों में देश की वैश्विक नेतृत्व क्षमता के बारे में जानकारी दी।

अपने कार्यक्रम के दौरान, गोयल ने ‘पेरिस सेंटर फॉर पीस एंड इनोवेशन’ का दौरा किया, जहाँ उन्हें इज़राइल के अग्रणी तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से अवगत कराया गया। उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, स्टेंट तकनीक, आयरन डोम सिस्टम सहित कई महत्वपूर्ण नवाचार दिखाए गए, साथ ही भविष्य की उभरती तकनीकों और वर्चुअल रियलिटी समाधान भी प्रस्तुत किए गए। उन्होंने पेरिस सेंटर को एक प्रेरणादायक संस्था बताया, जो इज़राइल की सृजनात्मकता, नवाचार और सामाजिक प्रभाव की यात्रा को दर्शाती है।

मंत्री ने मोबिलआई द्वारा प्रदर्शित स्वचालित-ड्राइव तकनीक के माध्यम से इज़राइल की अगली पीढ़ी की गतिशीलता समाधानों में प्रगति का अनुभव भी किया। उन्होंने किब्बुत्ज़ रमात रचेल का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने सहकारी जीवनशैली, टिकाऊ कृषि पद्धतियों और समुदाय-चालित नवाचार के उनके मॉडल को देखा। इन अनुभवों ने इज़राइल की तकनीकी क्षमता और ग्रामीण विकास व सततता के प्रति उसके दृष्टिकोण की महत्वपूर्ण समझ प्रदान की।

इससे पहले, 20 नवंबर 2025 को,पीयूष गोयल ने इज़राइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकाट के साथ बैठक से अपने आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार की वर्तमान प्रगति की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाया। इसके बाद भारत–इज़राइल बिजनेस फोरम आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों के मंत्रियों और उद्योग जगत के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इस फोरम में तकनीकी सत्र और बी2बी बैठकें शामिल थीं, जो प्रौद्योगिकी, नवाचार, कृषि और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की मजबूत रुचि को दर्शाती हैं। अपने संबोधन में गोयल ने भारत–इज़राइल संबंधों की विश्वास-आधारित नींव पर जोर दिया और फिनटेक, एग्रीटेक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, फार्मास्यूटिकल्स, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाओं का उल्लेख किया।

गोयल ने इज़राइल के वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें निवेश संबंधों को मजबूत करने, वित्तीय प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने और अधिक प्रभावी आर्थिक आदान–प्रदान के लिए नियामक सहयोग पर चर्चा हुई।

अपने उद्योग संवाद के तहत, मंत्री ने इज़राइल की अग्रणी कंपनियों—चेक पॉइंट (साइबर सुरक्षा), आईडीई टेक्नोलॉजीज (जल समाधान), एनटीए (मेट्रो परियोजनाएँ) और नेटाफिम (प्रिसिजन कृषि)—के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की। चर्चाएँ साइबर सुरक्षा, जल एवं सीवेज प्रबंधन, शहरी गतिशीलता समाधान और उन्नत सिंचाई तकनीकों पर केंद्रित रहीं—जो भारत की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप हैं।

दौरे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था भारत–इज़राइल मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए टर्म्स ऑफ़ रेफ़रेंस पर हस्ताक्षर। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई और विश्वास व्यक्त किया कि वार्ताएँ संतुलित और परस्पर लाभकारी एफटीए की दिशा में सफल होंगी।

गोयल ने प्रमुख इज़राइली मीडिया से भी संवाद किया और डायमंड समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की, जो भारत–इज़राइल व्यापार संबंधों का एक प्रमुख स्तंभ है। बाद में उन्होंने मंत्री बरकाट के साथ भारत–इज़राइल सीईओ फोरम में भाग लिया, जहाँ उन्होंने द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी की मजबूती, गहराई और बढ़ती संभावनाओं को रेखांकित किया।

पीयूष गोयल की इन गतिविधियों ने भारत और इज़राइल की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया, जिसमें दोनों देश आर्थिक संबंधों को गहरा करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।


भारत–न्यूज़ीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट: द्विपक्षीय बैठक में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज मुंबई में न्यूज़ीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैकले के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें प्रस्तावित भारत–न्यूज़ीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर चर्चा की गई। यह बैठक चल रही वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें दोनों मंत्रियों ने वस्तु और सेवा व्यापार से संबंधित प्रमुख विषयों में सहमति बनाने पर ध्यान केंद्रित किया।

दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि हाल की बैठक में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, कई तत्वों पर अंतिम निर्णय हो गया और जल्द से जल्द और परस्पर संतोषजनक समझौते के मार्ग पर स्पष्ट साझा समझ विकसित हुई है।

मंत्रियों ने यह भी नोट किया कि भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार वित्तीय वर्ष 2024–25 में 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो लगभग 49 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक व्यापक और संतुलित FTA न केवल व्यापार प्रवाह को तेज करेगा, बल्कि निवेश संबंधों को गहरा करेगा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाएगा और दोनों देशों के व्यवसायों के लिए एक पारदर्शी, स्थिर और पूर्वानुमेय ढांचा प्रदान करेगा।

दोनों मंत्रियों ने महत्वाकांक्षी और भविष्य-केंद्रित साझेदारी के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता की पुन: पुष्टि की और व्यक्त किया कि यह FTA विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसर खोल सकता है, जिसमें सेवाएँ, नवाचार और तकनीकी सहयोग शामिल हैं। उन्होंने सहमति व्यक्त की कि सकारात्मक गति बनाए रखी जाए और जल्द से जल्द संतुलित और परस्पर लाभकारी समझौते की सुविधा के लिए आगामी सप्ताहों में प्रयास तेज किए जाएँ।


आंध्र प्रदेश में लॉजिस्टिक्स डिजिटलीकरण को बढ़ावा: NLDSL और राज्य सरकार ने ULIP आधारित पहल के लिए किया MoU हस्ताक्षर

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नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NICDC) लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL) और आंध्र प्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2025 को विशाखापट्टनम में आयोजित 30वें CII पार्टनरशिप समिट के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की उपस्थिति में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) का उपयोग करके आंध्र प्रदेश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का व्यापक डिजिटलीकरण करना है।

इस पहल के तहत आंध्र प्रदेश के सरकारी और निजी हितधारकों को राज्य के लॉजिस्टिक्स संचालन और प्रदर्शन मानकों की वास्तविक समय में जानकारी प्रदान करने के लिए एक मजबूत एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया जाएगा। यह प्लेटफ़ॉर्म विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय को बढ़ाएगा, दक्षता में सुधार करेगा और डेटा-आधारित निर्णय लेने को सक्षम बनाएगा।

आंध्र प्रदेश सरकार, INCAP के माध्यम से, NLDSL के साथ मिलकर राज्य के विभिन्न विभागों के लॉजिस्टिक्स संबंधी प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) की निगरानी के लिए एकीकृत लॉजिस्टिक्स डैशबोर्ड विकसित करेगी। इस डैशबोर्ड से प्राप्त विश्लेषणात्मक रिपोर्टें और अंतर्दृष्टियाँ ULIP की क्षमताओं का उपयोग करते हुए राज्य के लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में मदद करेंगी।

यह MoU उन्नत तकनीकी समाधानों को लॉजिस्टिक्स विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और कुशल, आधुनिक और मजबूत आपूर्ति शृंखला अवसंरचना के निर्माण में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करता है।

MoU पर हस्ताक्षर NICDC के CEO एवं MD तथा NLDSL के चेयरमैन रजत कुमार सैनी की उपस्थिति में किए गए। यह समझौता INCAP के VC एवं MD सी. वी. प्रवीण आदित्य और NLDSL के CEO ताकायुकी काणो द्वारा औपचारिक रूप से कार्यान्वित किया गया। यह साझेदारी राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) के अनुरूप विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ULIP के बारे में:

ULIP एक डिजिटल गेटवे है जो उद्योग हितधारकों को विभिन्न सरकारी प्रणालियों से API-आधारित एकीकरण के माध्यम से लॉजिस्टिक्स संबंधी डेटा तक पहुँच प्रदान करता है। ULIP ने 11 मंत्रालयों की 44 प्रणालियों से 136 APIs के माध्यम से एकीकरण किया है, जो 2,000 से अधिक डेटा फ़ील्ड्स को कवर करता है। अब तक उद्योगों ने ULIP का उपयोग करके 210 से अधिक एप्लिकेशन विकसित किए हैं और 200 करोड़ से अधिक API लेनदेन किए गए हैं। निजी क्षेत्र के अलावा, ULIP कोयला मंत्रालय, भारतीय खाद्य निगम (FCI) और विभिन्न राज्य सरकारों सहित कई विभागों को डेटा-आधारित शासन प्रदान करने में भी सहयोग कर रहा है।


वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियुष गोयल ने वेनेजुएला के खनन विकास मंत्री से की द्विपक्षीय बैठक

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विजयवाड़ा- वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियुष गोयल ने 14–15 नवंबर 2025 को विशाखापत्तनम में आयोजित 30वें CII पार्टनरशिप समिट के अवसर पर वेनेजुएला के मंत्री ऑफ इकोलॉजिकल माइनिंग डेवलपमेंट, Mr. Hector Silva के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक के दौरान, वेनेजुएला की ओर से भारत के साथ तेल क्षेत्र से परे आर्थिक सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखाई गई, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग और भारतीय निवेश आकर्षित करना शामिल है।

मंत्री गोयल ने इंडिया–वेनेजुएला जॉइंट कमिटी मैकेनिज्म को पुनः सक्रिय करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसकी पिछली बैठक एक दशक पहले हुई थी। उन्होंने कहा कि ONGC के वेनेजुएला में चल रहे संचालन खनन और अन्वेषण में गहन सहयोग की संभावना प्रदान करते हैं।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने सुझाव दिया कि वेनेजुएला भारतीय फार्माकोपिया को स्वीकार कर सकता है, ताकि फार्मास्यूटिकल ट्रेड को सुगम बनाया जा सके।मंत्री गोयल ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत वेनेजुएला में निवेश की संभावनाओं का पता लगाने वाले व्यवसायों के साथ सक्रिय रूप से संवाद करेगा।

भारत-नेपाल द्विपक्षीय बैठक: ट्रांजिट संधि में संशोधन से रेल आधारित व्यापारिक संपर्क को मिलेगा बढ़ावा

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भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और नेपाल सरकार के उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री अनिल कुमार सिन्हा के बीच आज नई दिल्ली में एक द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक के दौरान भारत और नेपाल के बीच ट्रांजिट संधि (Treaty of Transit) के प्रोटोकॉल में संशोधन से संबंधित लेटर ऑफ एक्सचेंज (LoE) का आदान-प्रदान किया गया। इस हस्ताक्षर से जोगबनी (भारत) और बिराटनगर (नेपाल) के बीच रेल आधारित माल परिवहन को सुगम बनाया जाएगा, जिसमें अब बल्क कार्गो (bulk cargo) भी शामिल होगा। यह उदारीकरण प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर — कोलकाता–जोगबनी, कोलकाता–नौतनवा (सुनौली) और विशाखापत्तनम–नौतनवा (सुनौली) — तक विस्तारित किया गया है, जिससे दोनों देशों के बीच बहु-मोडल व्यापारिक संपर्क और नेपाल के तीसरे देशों के साथ व्यापार को और सशक्त बनाया जाएगा।

यह लेटर ऑफ एक्सचेंज (LoE) जोगबनी–बिराटनगर रेल लिंक के माध्यम से कंटेनरयुक्त और बल्क कार्गो दोनों के लिए प्रत्यक्ष रेल संपर्क को सक्षम बनाता है। इसके माध्यम से कोलकाता और विशाखापत्तनम बंदरगाहों से माल की ढुलाई नेपाल के मोरंग जिले में स्थित नेपाल कस्टम यार्ड कार्गो स्टेशन तक की जा सकेगी। यह रेल लिंक भारत सरकार की अनुदान सहायता (grant assistance) से निर्मित किया गया था और इसे भारत एवं नेपाल के प्रधानमंत्रियों द्वारा 1 जून 2023 को संयुक्त रूप से उद्घाटित किया गया था।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा-पार कनेक्टिविटी और व्यापार सुगमता को बढ़ाने के लिए चल रही द्विपक्षीय पहलों का स्वागत किया, जिसमें इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICPs) और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं का विकास शामिल है।

भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक और निवेश भागीदार है, जो नेपाल के बाहरी व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये नई पहलें दोनों देशों के बीच आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेंगी और क्षेत्रीय सहयोग को भी बढ़ावा देंगी।

भारत को वैश्विक वेलनेस डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में अग्रसर: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित 22वें सीआईआई वार्षिक स्वास्थ्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को सरकार के निरंतर सुलभता (affordability) पर केंद्रित दृष्टिकोण से बहुत लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत (0%) कर दिया है, साथ ही चिकित्सा उपकरणों, कैंसर की दवाओं और अन्य आवश्यक दवाओं पर शुल्क में कमी की है ताकि उपचार अधिक से अधिक नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बन सके।

गोयल ने कहा कि सरकार आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उत्पादों पर शुल्क या उपकर (cess) में और कमी की संभावनाओं पर विचार करने के लिए खुली है, ताकि अधिक दवाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे उन दवाओं और उत्पादों की सूची साझा करें जिन पर शुल्क में कमी से लाभ हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक “सुनने वाली सरकार (listening government)” है, जो सुझावों और विचारों के लिए हमेशा खुली है तथा सरकार, चिकित्सा पेशेवरों और स्वास्थ्य उद्योग के संयुक्त प्रयासों से न केवल भारत के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी बल्कि भारत को वैश्विक चिकित्सा एवं वेलनेस गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने जन औषधि केंद्रों की सफलता का भी उल्लेख किया, जो अब 10,000 से अधिक हो गए हैं, और जहाँ सस्ती जेनेरिक दवाएँ व स्वच्छता उत्पाद नाममात्र कीमतों पर उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को काफी राहत मिली है।

गोयल ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य मॉडल समावेशी और न्यायसंगत होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम ऐसा ढांचा नहीं अपना सकते जहाँ स्थानीय नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहें और ध्यान केवल अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पर्यटन पर केंद्रित हो।” उन्होंने ज़ोर दिया कि मजबूत घरेलू स्वास्थ्य प्रणाली भारत को चिकित्सा मूल्य यात्रा (medical value travel) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने में मदद करेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार “अच्छा स्वास्थ्य एक समृद्ध समाज की नींव है” को दोहराते हुए कहा कि विकसित भारत (Viksit Bharat) 2047 के लक्ष्य की दिशा में डॉक्टरों और पूरे चिकित्सा तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

गोयल ने बताया कि जब 2014 में वर्तमान सरकार सत्ता में आई थी, तब भारत में केवल 7 एम्स (AIIMS) और 387 मेडिकल कॉलेज थे। अब यह संख्या बढ़कर 23 एम्स और 706 मेडिकल कॉलेज हो गई है। इससे डॉक्टरों की बढ़ती मांग पूरी होगी और भारत से विश्व को उत्कृष्ट चिकित्सा पेशेवरों का योगदान मिलता रहेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष लाल किले से घोषणा की थी कि 2029 तक मेडिकल सीटों की संख्या में बड़े पैमाने पर वृद्धि की जाएगी, जिससे चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 70 करोड़ लोग मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के पात्र हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री की संवेदनशील नेतृत्व शैली का उदाहरण है 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, आय की परवाह किए बिना, मुफ्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय।

गोयल ने मेडिकल टूरिस्ट्स के लिए वीजा ऑन अराइवल और ई-वीजा सुविधाओं का स्वागत किया, और कहा कि भारत पहले से ही कई देशों को यह सुविधा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी, विदेशों में लंबी प्रतीक्षा अवधि, और सस्ते इलाज की वजह से भारत एक विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पताल चाहें तो 10 प्रतिशत तक विदेशी मरीजों को सेवा दें और उनकी आय का कुछ हिस्सा आयुष्मान भारत या CSR कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब वर्गों के लिए योगदान करें, जिससे विकास और समावेशन दोनों सुनिश्चित हों।

उन्होंने कहा कि भारत में विश्व-स्तरीय चिकित्सा सेवाएँ विकसित देशों की तुलना में एक-तिहाई या एक-चौथाई लागत पर उपलब्ध हैं। भारत के डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन और देखभाल करने वाले कर्मी पूरी दुनिया में मांग में हैं।

गोयल ने प्रमुख अस्पतालों से अनुरोध किया कि वे नर्सों और केयरगिवर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करें और सरकार एनआरआई डॉक्टरों को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में योगदान करने के लिए नीति विकल्पों पर विचार करने को तैयार है।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत उसका आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक वेलनेस और करुणामय सेवा का संतुलित मेल है। उन्होंने कहा कि ‘हील इन इंडिया (Heal in India)’ में योग, आयुर्वेद, ध्यान और आध्यात्मिक पर्यटन को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि भारत को समग्र वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

उन्होंने कहा, “भारत के पास आधुनिक चिकित्सा कौशल, पारंपरिक वेलनेस विरासत, प्रतिभाशाली जनशक्ति और आतिथ्य की संस्कृति — सब कुछ है जो उसे दुनिया का नंबर एक वेलनेस डेस्टिनेशन बना सकता है।”

भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चौथा दौर की वार्ता संपन्न, दोनों देशों ने किया समयबद्ध और संतुलित समझौते के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त

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ऑकलैंड और रोटोरुआ-भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement - FTA) पर चौथे दौर की वार्ताएँ आज ऑकलैंड और रोटोरुआ में सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। यह दौर पाँच दिनों तक चला, जिसमें दोनों पक्षों के बीच रचनात्मक और दूरदर्शी चर्चाएँ हुईं।

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के वाणिज्य मंत्री टॉड मैकक्ले ने इस दौर के दौरान हुई निरंतर प्रगति की सराहना की और एक आधुनिक, व्यापक एवं भविष्य-उन्मुख मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में काम जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्य बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा

वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने कई प्रमुख विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया, जिनमें शामिल हैं —

  • वस्तुओं का व्यापार (Trade in Goods)

  • सेवाओं का व्यापार (Trade in Services)

  • आर्थिक एवं व्यापारिक सहयोग (Economic and Trade Cooperation)

  • उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin)

इन चर्चाओं में दोनों देशों की यह साझा भावना परिलक्षित हुई कि भारत–न्यूजीलैंड साझेदारी को और सशक्त बनाते हुए एक संतुलित, समावेशी और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ा जाए।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत वैश्विक समृद्धि और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को सुनिश्चित करने के लिए गहरे आर्थिक साझेदारी संबंध स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

दोनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) से भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार प्रवाह में वृद्धि, निवेश संबंधों को गहराई, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, और व्यवसायों के लिए अधिक स्थिरता और बाजार पहुँच सुनिश्चित होगी।

व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय वृद्धि

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार (Bilateral Merchandise Trade) लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

प्रस्तावित FTA से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, दवा निर्माण, शिक्षा और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएँ खुलने की उम्मीद है, जिससे व्यवसायों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलेगा।

समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने पर जोर

दोनों देशों ने यह सहमति जताई कि अंतर-सत्रीय कार्य (Inter-sessional Work) के माध्यम से बातचीत की गति को बनाए रखा जाएगा। सभी अध्यायों पर विस्तृत चर्चा जारी रहेगी ताकि भारत–न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते को जल्द से जल्द, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी रूप में अंतिम रूप दिया जा सके।


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