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भारत को वैश्विक वेलनेस डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में अग्रसर: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में आयोजित 22वें सीआईआई वार्षिक स्वास्थ्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र को सरकार के निरंतर सुलभता (affordability) पर केंद्रित दृष्टिकोण से बहुत लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत (0%) कर दिया है, साथ ही चिकित्सा उपकरणों, कैंसर की दवाओं और अन्य आवश्यक दवाओं पर शुल्क में कमी की है ताकि उपचार अधिक से अधिक नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बन सके।

गोयल ने कहा कि सरकार आवश्यक दवाओं और चिकित्सा उत्पादों पर शुल्क या उपकर (cess) में और कमी की संभावनाओं पर विचार करने के लिए खुली है, ताकि अधिक दवाएँ सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे उन दवाओं और उत्पादों की सूची साझा करें जिन पर शुल्क में कमी से लाभ हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह एक “सुनने वाली सरकार (listening government)” है, जो सुझावों और विचारों के लिए हमेशा खुली है तथा सरकार, चिकित्सा पेशेवरों और स्वास्थ्य उद्योग के संयुक्त प्रयासों से न केवल भारत के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी बल्कि भारत को वैश्विक चिकित्सा एवं वेलनेस गंतव्य के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने जन औषधि केंद्रों की सफलता का भी उल्लेख किया, जो अब 10,000 से अधिक हो गए हैं, और जहाँ सस्ती जेनेरिक दवाएँ व स्वच्छता उत्पाद नाममात्र कीमतों पर उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को काफी राहत मिली है।

गोयल ने कहा कि भारत का स्वास्थ्य मॉडल समावेशी और न्यायसंगत होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम ऐसा ढांचा नहीं अपना सकते जहाँ स्थानीय नागरिक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहें और ध्यान केवल अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पर्यटन पर केंद्रित हो।” उन्होंने ज़ोर दिया कि मजबूत घरेलू स्वास्थ्य प्रणाली भारत को चिकित्सा मूल्य यात्रा (medical value travel) के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने में मदद करेगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचार “अच्छा स्वास्थ्य एक समृद्ध समाज की नींव है” को दोहराते हुए कहा कि विकसित भारत (Viksit Bharat) 2047 के लक्ष्य की दिशा में डॉक्टरों और पूरे चिकित्सा तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

गोयल ने बताया कि जब 2014 में वर्तमान सरकार सत्ता में आई थी, तब भारत में केवल 7 एम्स (AIIMS) और 387 मेडिकल कॉलेज थे। अब यह संख्या बढ़कर 23 एम्स और 706 मेडिकल कॉलेज हो गई है। इससे डॉक्टरों की बढ़ती मांग पूरी होगी और भारत से विश्व को उत्कृष्ट चिकित्सा पेशेवरों का योगदान मिलता रहेगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले वर्ष लाल किले से घोषणा की थी कि 2029 तक मेडिकल सीटों की संख्या में बड़े पैमाने पर वृद्धि की जाएगी, जिससे चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाया जा सके।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 70 करोड़ लोग मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं के पात्र हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री की संवेदनशील नेतृत्व शैली का उदाहरण है 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को, आय की परवाह किए बिना, मुफ्त स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का निर्णय।

गोयल ने मेडिकल टूरिस्ट्स के लिए वीजा ऑन अराइवल और ई-वीजा सुविधाओं का स्वागत किया, और कहा कि भारत पहले से ही कई देशों को यह सुविधा प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी, विदेशों में लंबी प्रतीक्षा अवधि, और सस्ते इलाज की वजह से भारत एक विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने सुझाव दिया कि अस्पताल चाहें तो 10 प्रतिशत तक विदेशी मरीजों को सेवा दें और उनकी आय का कुछ हिस्सा आयुष्मान भारत या CSR कार्यक्रमों के माध्यम से गरीब वर्गों के लिए योगदान करें, जिससे विकास और समावेशन दोनों सुनिश्चित हों।

उन्होंने कहा कि भारत में विश्व-स्तरीय चिकित्सा सेवाएँ विकसित देशों की तुलना में एक-तिहाई या एक-चौथाई लागत पर उपलब्ध हैं। भारत के डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन और देखभाल करने वाले कर्मी पूरी दुनिया में मांग में हैं।

गोयल ने प्रमुख अस्पतालों से अनुरोध किया कि वे नर्सों और केयरगिवर्स के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करें और सरकार एनआरआई डॉक्टरों को भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था में योगदान करने के लिए नीति विकल्पों पर विचार करने को तैयार है।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत उसका आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक वेलनेस और करुणामय सेवा का संतुलित मेल है। उन्होंने कहा कि ‘हील इन इंडिया (Heal in India)’ में योग, आयुर्वेद, ध्यान और आध्यात्मिक पर्यटन को भी शामिल किया जाना चाहिए ताकि भारत को समग्र वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

उन्होंने कहा, “भारत के पास आधुनिक चिकित्सा कौशल, पारंपरिक वेलनेस विरासत, प्रतिभाशाली जनशक्ति और आतिथ्य की संस्कृति — सब कुछ है जो उसे दुनिया का नंबर एक वेलनेस डेस्टिनेशन बना सकता है।”

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