Media24Media.com: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बर्खास्त कर्मचारी को देनी होगी विभागीय जांच की पूरी जानकारी

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बर्खास्त कर्मचारी को देनी होगी विभागीय जांच की पूरी जानकारी

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RTI के तहत अपनी ही विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेज मांगना कर्मचारी का अधिकार, सूचना रोकने की दलील को कोर्ट ने किया खारिज

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को उसके खिलाफ हुई विभागीय जांच और बर्खास्तगी का आधार बने दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी अपनी ही विभागीय जांच से संबंधित रिकॉर्ड अपने बचाव के लिए मांग रहा हो और उसमें किसी तीसरे व्यक्ति की निजता का सवाल न हो, तो केवल RTI की छूट का हवाला देकर सूचना रोकी नहीं जा सकती।

क्या है पूरा मामला?

मामला जांजगीर स्थित फैमिली कोर्ट में चालक के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी से जुड़ा है। कर्मचारी के खिलाफ कथित कदाचार के आरोपों को लेकर दो विभागीय जांच शुरू की गई थीं। जांच में उसके खिलाफ सात आरोप लगाए गए और बाद में विभागीय कार्रवाई के तहत उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

बर्खास्तगी के बाद कर्मचारी ने अपने खिलाफ हुई विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड RTI के माध्यम से मांगे। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से सूचना देने से इनकार किया गया और RTI कानून में मौजूद कुछ अपवादों का हवाला दिया गया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अधिकारियों की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि कर्मचारी जिस सूचना की मांग कर रहा है, वह उसकी अपनी विभागीय जांच से संबंधित है और उसके बचाव के लिए उपयोगी हो सकती है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मांगी गई जानकारी में किसी तीसरे पक्ष की निजता प्रभावित नहीं होती है, तो केवल RTI Act की धारा 8(1)(c) या 8(1)(j) का हवाला देकर ऐसी सूचना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फैमिली कोर्ट को दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि पूर्व कर्मचारी को उसकी विभागीय जांच से संबंधित मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। यह आदेश 31 अगस्त 2026 को पारित किया गया था।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभागीय जांच का सामना करने वाले कर्मचारी के लिए संबंधित दस्तावेज उसके बचाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले से यह संदेश गया है कि RTI कानून की छूट का इस्तेमाल कर्मचारी को उसकी अपनी विभागीय कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता, जब तक कोई वैध गोपनीयता या अन्य कानूनी अपवाद लागू न हो।

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