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रायपुर के भाठागांव में सब्जी बाजार हटाने पर बवाल, निगम टीम से झड़प

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रायपुर- राजधानी रायपुर के भाठागांव इलाके में सब्जी बाजार की शिफ्टिंग को लेकर बुधवार को विवाद बढ़ गया। नगर निगम की टीम सड़क किनारे संचालित सब्जी बाजार को हटाने और उसे दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान स्थानीय सब्जी विक्रेताओं और निगम कर्मचारियों के बीच कहासुनी हुई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई।

बाजार हटाने की कार्रवाई के दौरान शुरू हुआ विवाद

रिपोर्टों के मुताबिक, भाठागांव मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे लंबे समय से सब्जी की दुकानें लग रही थीं। निगम के अनुसार, इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी के बाद निगम की टीम बाजार को हटाने और विक्रेताओं को व्यवस्थित स्थान पर शिफ्ट करने की कार्रवाई के लिए पहुंची।

बताया गया है कि निगम की टीम जब कार्रवाई के लिए पहुंची तो कुछ विक्रेताओं ने इसका विरोध किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

विवाद के बाद मारपीट, कई कर्मचारी घायल

हंगामे के दौरान हुई झड़प में करीब 4 से 5 नगर निगम कर्मचारियों के घायल होने की जानकारी कई स्थानीय रिपोर्टों में सामने आई है। वहीं, विवाद को शांत कराने और बीच-बचाव की कोशिश कर रहे एक पुलिस जवान के भी घायल होने की सूचना है। घायलों की चोटों की गंभीरता को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

हालांकि, कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या अलग बताई गई है। इसलिए पुलिस की जांच और आधिकारिक मेडिकल/केस रिकॉर्ड आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

मौके पर पहुंची पुलिस, इलाके में तनाव

घटना की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल रहा। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ाई गई।

घटना के बाद नगर निगम की टीम पुरानी बस्ती थाने पहुंची और लिखित शिकायत देने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

वीडियो और CCTV से होगी जांच

पुलिस घटना से जुड़े वीडियो और आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य झड़प के दौरान मौजूद लोगों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि विवाद किस तरह बढ़ा और मारपीट में किन लोगों की भूमिका रही।

विवाद के पीछे सिर्फ बाजार हटाना ही मुद्दा नहीं

रिपोर्टों के अनुसार, विवाद का एक अहम पहलू बाजार की शिफ्टिंग और नई जगह पर दुकानदारों को मिलने वाली जगह भी है। विक्रेताओं की ओर से नई मंडी में जगह के आकार और आवंटन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, निगम का तर्क सड़क किनारे बाजार से यातायात प्रभावित होने और बाजार को व्यवस्थित स्थान पर ले जाने से जुड़ा बताया गया है।

अब पुलिस जांच पर नजर

फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के दावों और घटनाक्रम की पुलिस जांच जारी है। शिकायत, CCTV फुटेज, उपलब्ध वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

संक्षेप में: भाठागांव में सब्जी बाजार को दूसरी जगह शिफ्ट करने की नगर निगम की कार्रवाई के दौरान विवाद हुआ, जो बाद में झड़प में बदल गया। कई निगम कर्मचारियों और एक पुलिस जवान के घायल होने की सूचना है। निगम की शिकायत के बाद पुलिस CCTV और वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

गणित के डर को आकर्षण में बदलने गतिविधि आधारित शिक्षण पर शिक्षकों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

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छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर में ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' पर प्रशिक्षण हुआ आयोजित

गणितीय अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से समझाने पर हुई चर्चा

रायपुर- छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में मंगलवार को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' विषय पर विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को गणित शिक्षण की ऐसी नवीन, गतिविधि - आधारित और रचनात्मक विधियों से परिचित कराना रहा, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों के लिए गणित को सरल, रोचक और आनंददायक बनाया जा सके।

प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन, अनुभव, गतिविधियों और रचनात्मकता से जोड़कर पढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों में गणित के प्रति रूचि और जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ तार्किक सोच विकसित करने में भी सहायक हो सकती है।

कार्यक्रम के विशेषज्ञ इंजीनियर, ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन बेंगलुरु के मैथ्स कोच बी. एन. राव ने शिक्षकों को विभिन्न गतिविधि-आधारित एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गणितीय अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए व्यावहारिक उदाहरणों और विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया तथा बताया कि कक्षा में विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सक्रिय सहभागिता बढ़ाकर गणित को सहज एवं आनंददायक बनाया जा सकता है।

सेशन के दौरान शिक्षकों ने स्वयं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर गणितीय अवधारणाओं को समझा। गतिविधियों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। शिक्षकों ने इन तकनीकों को अपने-अपने कक्षा में लागू करने के तरीकों को भी समझा।

कार्यक्रम में रायपुर के चार विकासखंडों के शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की, जबकि पूरे रायपुर जिले के शिक्षकों के लिए कार्यक्रम का ऑनलाइन प्रसारण किया गया। इसके माध्यम से जिले के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक विशेषज्ञ द्वारा साझा की गई गतिविधि-आधारित गणित शिक्षण की विधियों से जुड़े और लाभान्वित हुए।

इंटरैक्टिव सत्र में गणित शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शिक्षकों के साथ संवाद भी किया गया। छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तर और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे प्रभावी शिक्षण उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराना रहा, जिनसे विद्यार्थी गणितीय अवधारणाओं को समझकर सीखें, उनका प्रयोग करें तथा उनमें तार्किक और वैज्ञानिक सोच विकसित हो।

 कार्यक्रम में शिक्षकों की उत्साहपूर्ण एवं सक्रिय सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हुए गणित शिक्षण की नई तकनीकों और दृष्टिकोणों को समझा। शिक्षकों के अनुभव और सुझावों ने कार्यक्रम को अधिक संवादात्मक एवं उपयोगी बनाया। इसी तरह 23 सितंबर को बी.एड. विद्यार्थियों के लिए भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

चंपारण्य में ₹73.42 करोड़ के महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स को केंद्र की मंजूरी

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राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा चंपारण्य, करीब 15 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का होगा विस्तार

चंपारण्य को राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम - राजेश अग्रवाल

रायपुर- छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में रायपुर जिले के चंपारण्य में लगभग 73.42 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित “श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स” परियोजना को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति  CSMC ने स्वीकृति प्रदान की है। सीएसएमसी स्वदेश दर्शन 2.0 की केंद्रीय समिति है, जो मिशन निदेशालय की अनुशंसाओं के आधार पर परियोजनाओं की स्वीकृति पर विचार करती है। परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा किया जाएगा तथा इसके लिए 18 माह की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने परियोजना की स्वीकृति पर कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में पर्यटन, विशेषकर आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास को नई गति मिल रही है। चंपारण्य छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली को बेहतर पर्यटक सुविधाओं के साथ राष्ट्रीय स्तर के आध्यात्मिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में यह स्वीकृति एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी। हमारा प्रयास होगा कि महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली की गरिमा और धार्मिक स्वरूप को अक्षुण्ण रखते हुए यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त सुविधाएं विकसित हों। यह परियोजना चंपारण्य को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के बीच और अधिक प्रभावी रूप से स्थापित करने में सहायक होगी।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। चंपारण्य परियोजना की स्वीकृति छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 

परियोजना की स्वीकृति के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय पर्यटन एवं  संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली चंपारण्य देशभर में वैष्णव श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य चंपारण्य को केवल तीर्थ यात्रा के एक पड़ाव तक सीमित न रखते हुए आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, विरासत एवं अनुभव-आधारित पर्यटन के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित करना है। परियोजना के माध्यम से पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने, उनके ठहराव की अवधि बढ़ाने तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी से संबंधित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स में म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, कथा ग्राउंड, ओपन एयर थिएटर, वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं डॉरमेटरी, मल्टीपर्पज हॉल, रेस्टोरेंट और वेंडर शॉप्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

परियोजना में यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन, तालाब विकास, दिव्य पाथवे एवं कवर्ड पाथवे, पार्किंग, साइनेज और लैंडस्केपिंग सहित अन्य पर्यटक सुविधाओं का भी विकास प्रस्तावित है। यह श्रद्धालुओं के साथ-साथ परिवारों, सांस्कृतिक पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और वेलनेस पर्यटन से जुड़े पर्यटकों के लिए भी आकर्षक अनुभव होगा।

परियोजना की परिकल्पना इस प्रकार की गई है कि चंपारण्य आने वाले श्रद्धालुओं को महाप्रभु श्री वल्लभाचार्य जी के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित होने का अवसर मिले। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे से पूरे दिन तक के प्रवास तथा धार्मिक आयोजनों एवं वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक अवधि तक ठहरने की संभावनाओं को भी ध्यान में रखा गया है।

परियोजना की डीपीआर एवं कार्य-सीमा तैयार है और स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद चंपारण्य में धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और वेलनेस पर्यटन की गतिविधियों को भी विस्तार मिलेगा। इससे पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित करने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

संत गहिरा गुरु विवि को मिले 5 राज्य स्तरीय NSS पुरस्कार

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 सरगुजा संभाग ने लहराया सफलता का परचम

​राष्ट्रीय सेवा योजना के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय सरगुजा ने संपूर्ण प्रदेश में अपना परचम लहराया है। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी वर्ष 2025-26 की राज्य स्तरीय एनएसएस पुरस्कार चयन सूची में विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी संस्थाओं तथा स्वयंसेवकों ने कुल पांच पुरस्कार अपने नाम किए हैं। इस शानदार उपलब्धि में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय स्तर की श्रेणी में पूरे राज्य में पहला स्थान प्राप्त कर सरगुजा संभाग का गौरव बढ़ाया है।

संस्थागत श्रेणी में सरगुजा जिले के सरस्वती शिक्षा महाविद्यालय, अम्बिकापुर को राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चुना गया है। वहीं महाविद्यालयीन स्वयंसेवक श्रेणी में राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अम्बिकापुर के शिवम शर्मा और शासकीय राम भजन राय एन.ई.एस. स्नातकोत्तर महाविद्यालय जशपुर नगर की कु. नेहा यादव ने बाजी मारी है। इसके अलावा विद्यालय स्तर की स्वयंसेवक श्रेणी में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अधिना (सूरजपुर) की कु. मीना राजवाड़े का चयन हुआ है।

राष्ट्रीय सेवा योजना के स्थापना दिवस के अवसर पर 24 सितम्बर को रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय सभागार में राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया जाएगा, जहाँ इन सभी उत्कृष्ट संस्थाओं और स्वयंसेवकों को सम्मानित किया जाएगा। वर्तमान में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय के अंतर्गत सरगुजा संभाग के छह जिलों में 158 इकाइयां संचालित हैं, जो जमीनी स्तर पर समाजसेवा और सामुदायिक विकास के कार्यों में जुटी हुई हैं।

विश्वविद्यालय की इस ऐतिहासिक सफलता पर कुलपति प्रो. राजेंद्र लाकपाले ने सभी विजेताओं, प्राचार्यों और कार्यक्रम अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का समर्पण ही राष्ट्र निर्माण की असली नींव है और यह उपलब्धि उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन व निष्ठा का ही परिणाम है।

धमतरी में दिव्यांग बालिकाओं को अधिकारों के प्रति किया गया जागरूक

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नुक्कड़ नाटक से दिया नशामुक्ति का संदेश

​रायपुर- राज्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत धमतरी स्थित शासकीय श्रवण बाधितार्थ बालिका विद्यालय में समाज कल्याण विभाग द्वारा एक दिवसीय विभागीय प्रचार-प्रसार एवं सामाजिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बालिकाओं को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा समाज में नशामुक्त वातावरण का निर्माण करना था।

योजनाओं की दी गई विस्तृत जानकारी

शिविर में समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित विभिन्न हितग्राहीमूलक एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया तथा मिलने वाले लाभों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शासन की मंशा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की है। बालिकाओं को उपलब्ध अवसरों और अधिकारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सही जानकारी ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है।

नुक्कड़ नाटक बना आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नशामुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति रही। कलाकारों ने अपने संवादों और जीवंत अभिनय के माध्यम से नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक तथा सामाजिक दुष्परिणामों को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। नाटक के जरिए संदेश दिया गया कि नशामुक्त समाज का निर्माण केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा सामूहिक दायित्व है।

उपस्थित ​प्रमुख जन-प्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने अंत में  लोगों को नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाने और दूसरों को प्रेरित करने का संकल्प दिलाया।

गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश नवीनीकरण के लिए चयन ट्रायल 23-24 सितम्बर को

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तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए चयन ट्रायल

आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य

रायपुर- राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रायपुर जिले में संचालित गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश के नवीनीकरण के लिए 23 सितम्बर और 24 सितम्बर को चयन ट्रायल का आयोजन किया गया है। इसमें भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी 23 सितम्बर को रायपुर के कोटा स्थित स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक पंजीयन करा सकते हैं। चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गैर-आवासीय बालक-बालिका तीरंदाजी और बालिकाओं के फुटबॉल (बालिका) के लिए चयन ट्रायल 23 सितम्बर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा तथा तीरंदाजी एरिना (बालिका खेल छात्रावास के सामने) में होंगे। वहीं गैर-आवासीय बालक-बालिका हॉकी एवं बालक-बालिका एथलेटिक्स के लिए चयन ट्रायल 24 सितम्बर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं हॉकी स्टेडियम पिच-02 में सुबह 7 बजे से आयोजित किए गए हैं।

चयन ट्रायल में राज्य के बालक-बालिका खिलाड़ी तथा अन्य राज्यों के 13 से 17 आयु वर्ग के खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं। फुटबॉल एवं तीरंदाजी खिलाड़ियों का 23 सितम्बर को पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं खेल कौशल परीक्षण स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं तीरंदाजी एरिना रायपुर में किया जाएगा। वहीं 24 सितम्बर को हॉकी एवं एथलेटिक्स खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं खेल कौशल परीक्षण स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम पिच-02 में होगा।

चयन ट्रायल में खिलाड़ियों का चयन उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयन समिति द्वारा किया जाएगा। खेल अकादमी संचालन नियम,2014 के तहत अंतिम रूप से चयनित खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, खेल परिधान, प्लेइंग किट, बीमा एवं छात्रवृत्ति आदि सुविधाएं शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।

आरंग गोठान में गायों की बदहाल स्थिति का आरोप, रोज एक गाय की मौत का दावा; प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

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आरंग- आरंग के धान मंडी, कलाई रोड स्थित गोठान में गायों की कथित बदहाल स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार गोठान में करीब 500 गायें मौजूद हैं, लेकिन सभी पशुओं को पर्याप्त चारा और जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं, इसे लेकर चिंता जताई जा रही है। यह भी दावा किया गया है कि यहां लगभग रोज एक गाय की मौत हो रही है।

बताया जा रहा है कि कुछ गायों को पर्याप्त चारा मिल रहा है, जबकि कई पशुओं को भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यदि ये दावे सही पाए जाते हैं, तो यह पशुओं की देखभाल और गोठान की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर स्थिति हो सकती है।

प्रशासन से मौके पर जांच की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित प्रशासन और पशु चिकित्सा विभाग से तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करने की मांग उठ रही है। जांच के दौरान गोठान में मौजूद गायों की संख्या, चारे और पानी की उपलब्धता, साफ-सफाई, पशु चिकित्सा सुविधाओं तथा हाल में हुई पशुओं की मौतों की जानकारी का सत्यापन किया जाना चाहिए।

बीमार या कमजोर गायों की तत्काल चिकित्सा जांच कराने के साथ-साथ पर्याप्त चारा और स्वच्छ पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की जा रही है।

जरूरी है कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके की वास्तविक स्थिति की जांच करे और यदि किसी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

नोट: गायों की संख्या और मौतों से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


स्कूलों में 15 दिन की छुट्टियां घोषित, दशहरा-दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें जारी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के स्कूली विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए बड़ी खबर है। स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें घोषित कर दी हैं। विभाग के 21 सितंबर 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, इन तीनों अवसरों पर स्कूलों में कुल 15 दिनों का अवकाश रहेगा।

तीनों छुट्टियां 5-5 दिन की

जारी कार्यक्रम के अनुसार दशहरा अवकाश 17 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। इसके बाद दीपावली अवकाश 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया है। वहीं साल के अंत में शीतकालीन अवकाश 24 दिसंबर से 28 दिसंबर 2026 तक रहेगा। इस तरह तीनों अवकाश मिलाकर विद्यार्थियों को कुल 15 दिन की छुट्टी मिलेगी।

  • अवकाश
  • तारीख
  • कुल दिन
  • दशहरा
  • 17–21 अक्टूबर 2026
  • 5 दिन
  • दीपावली
  • 6–10 नवंबर 2026
  • 5 दिन
  • शीतकालीन
  • 24–28 दिसंबर 2026
  • 5 दिन
  • कुल
  • —
  • 15 दिन

किन संस्थानों पर लागू होगा आदेश?

रिपोर्टों के मुताबिक यह अवकाश कार्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 में शासकीय, अनुदान प्राप्त और गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों के साथ-साथ D.Ed., B.Ed. और M.Ed. से जुड़े संस्थानों के लिए जारी किया गया है। आदेश में संबंधित संभागीय और जिला अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए सूचना भेजी गई है। 

गौरतलब है कि पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश 6-6 दिन, यानी कुल 18 दिन थे। इस बार इन तीनों प्रमुख अवकाशों की अवधि घटाकर 5-5 दिन निर्धारित की गई है।


बलौदाबाजार पुलिस में बड़ा फेरबदल, 38 पुलिसकर्मियों का तबादला

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बलौदाबाजार- जिले की पुलिस व्यवस्था में बड़ा फेरबदल किया गया है। पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने 38 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। तबादला सूची में निरीक्षक से लेकर आरक्षक तक के नाम शामिल हैं।

जारी आदेश के अनुसार, 5 निरीक्षक, 1 उप निरीक्षक (SI), 5 सहायक उप निरीक्षक (ASI), 9 प्रधान आरक्षक और 18 आरक्षकों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। संबंधित पुलिसकर्मियों को आदेश के अनुसार अपनी नई पदस्थापना पर कार्यभार संभालना होगा।

तबादला सूची में कई थाना और शाखाओं की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, रक्षित केंद्र में पदस्थ अवनीश कुमार श्रीवास्तव को कसडोल थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

पूरी तबादला सूची और आदेश की कॉपी सामने आने के बाद नई पदस्थापनाओं की पूरी जानकारी स्पष्ट हो गई है।

रायपुर में बढ़ेगी रजिस्ट्री की सुविधा, 7 नए कार्यालय खोलने की तैयारी

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रायपुर- राजधानी रायपुर में जमीन और मकान की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को जल्द बड़ी राहत मिल सकती है। शहर में 7 नए रजिस्ट्री कार्यालय खोलने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद रजिस्ट्री की सुविधा शहर के अलग-अलग इलाकों में उपलब्ध कराने की योजना है।

नए कार्यालय शुरू होने से मौजूदा रजिस्ट्री कार्यालयों में होने वाली भीड़ को कम करने और लोगों को अपने क्षेत्र के नजदीक ही दस्तावेजों की रजिस्ट्री कराने की सुविधा देने में मदद मिल सकती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को ज्यादा सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन और मकान की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों को रजिस्ट्री के लिए लंबी दूरी तय करने और भीड़ का सामना करने से राहत मिलने की उम्मीद है।

फिलहाल नए कार्यालयों को लेकर प्रक्रिया और स्थान तय करने की तैयारी चल रही है। व्यवस्था लागू होने के बाद रायपुर में रजिस्ट्री सेवाओं का नेटवर्क और व्यापक हो जाएगा।

रायगढ़ में सड़क पर उतरा हाथियों का पूरा कुनबा, शावकों के साथ सड़क पार करते दिखे गजराज

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रायगढ़- जिले के तमनार क्षेत्र में उस समय लोगों की आवाजाही थम गई, जब हाथियों का एक पूरा दल अचानक सड़क पर पहुंच गया। सामारुमा इलाके में नर और मादा हाथियों के साथ शावकों का दल सड़क पार करता दिखाई दिया। हाथियों को सड़क पर देखकर राहगीरों ने अपने वाहन रोक दिए और इस अनोखे नजारे को मोबाइल कैमरों में कैद किया।

सड़क पर दिखा हाथियों का काफिला

जानकारी के मुताबिक, तमनार रेंज के सामारुमा क्षेत्र में हाथियों का दल जंगल की ओर जाने के लिए सड़क पार कर रहा था। दल में बड़े हाथियों के साथ छोटे शावक भी शामिल थे।

हाथियों को सड़क पर देखते ही दोनों तरफ वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। लोग सुरक्षित दूरी पर खड़े होकर हाथियों के सड़क पार करने का इंतजार करते रहे।

वन विभाग ने संभाली स्थिति

हाथियों के सड़क पर पहुंचने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन अमले ने सड़क के दोनों ओर यातायात रोक दिया, ताकि हाथियों को बिना किसी परेशानी के सड़क पार कराया जा सके।

वन विभाग की निगरानी में हाथियों का दल धीरे-धीरे सड़क पार करके जंगल की ओर चला गया। राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

मोबाइल कैमरों में कैद हुआ नजारा

हाथियों के सड़क पार करने का यह पूरा दृश्य वहां मौजूद राहगीरों ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया। शावकों के साथ चलते हाथियों के इस काफिले को देखने के लिए कुछ समय के लिए लोगों की भीड़ भी जमा हो गई।

हालांकि, वन विभाग ने लोगों को हाथियों से दूरी बनाए रखने और उनके रास्ते में किसी तरह की बाधा न डालने की हिदायत दी।

इलाके में लगातार हो रहा हाथियों का मूवमेंट

वन विभाग के अनुसार, रायगढ़ वन मंडल में हाथियों की लगातार मौजूदगी बनी हुई है। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में 51 हाथी मौजूद हैं, जिनमें 13 नर, 32 मादा और 6 शावक शामिल हैं।

हाथियों की लगातार आवाजाही को देखते हुए वन विभाग की टीमें उनके मूवमेंट पर नजर बनाए हुए हैं।

वन विभाग की लोगों से अपील

वन विभाग ने हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों में रहने वाले लोगों और वाहन चालकों से सतर्क रहने की अपील की है। हाथियों के सड़क पर आने की स्थिति में उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखना और उनके रास्ते में न जाना बेहद जरूरी है।

बड़ी खबर

रायगढ़ के तमनार में सड़क पर हाथियों का पूरा कुनबा दिखाई दिया। शावकों के साथ हाथियों ने सड़क पार की तो कुछ देर के लिए यातायात रोक दिया गया। वन विभाग की सतर्कता के चलते हाथियों ने सुरक्षित तरीके से सड़क पार की और जंगल की ओर चले गए।

महानदी जल विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद, ओडिशा दौरे पर CM विष्णु देव साय ने कहा- बातचीत से निकलेगा रास्ता

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भुवनेश्वर- छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर समाधान की उम्मीद बढ़ी है। दो दिवसीय ओडिशा दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को कहा कि विवाद का समाधान बहुत जल्द होने की संभावना है। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार इस दिशा में काम कर रही है और दोनों राज्यों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है।

केंद्रीय जल आयोग के स्तर पर चल रही बातचीत

मुख्यमंत्री साय के अनुसार, महानदी जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा पहले ही अपनी-अपनी बात केंद्रीय जल आयोग (CWC) के सामने रख चुके हैं। दोनों राज्यों की तकनीकी टीमें भी आयोग की निगरानी में बातचीत कर रही हैं। साय ने कहा कि दोनों पक्ष आयोग के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय का सम्मान करेंगे।

इससे पहले 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। केंद्र सरकार ने उस बैठक को विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।

तकनीकी पहलुओं पर भी हो रहा मंथन

महानदी विवाद में अब बातचीत के साथ-साथ तकनीकी आंकड़ों पर भी चर्चा हो रही है। केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों की तकनीकी टीमें नदी में पानी की उपलब्धता, मौजूदा जल उपयोग, प्रमुख जल परियोजनाओं की क्षमता और भविष्य की जरूरतों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन कर रही हैं।

दोनों राज्यों की तकनीकी टीमों के बीच अब तक दो दौर की बातचीत हो चुकी है। अगली बैठक 21 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें जल बंटवारे से जुड़े संभावित ढांचे पर चर्चा होने की बात सामने आई है।

ट्रिब्यूनल की सुनवाई 28 सितंबर तक टली

महानदी जल विवाद को लेकर गठित महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने 17 सितंबर की सुनवाई को आगे बढ़ाकर 28 सितंबर 2026 कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब दोनों राज्य आपसी बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

न्यायाधिकरण ने दोनों राज्यों से बातचीत में हुई प्रगति की जानकारी मांगी है। इससे आने वाले दिनों में तकनीकी वार्ता और संभावित समझौते की दिशा महत्वपूर्ण हो गई है।

वर्षों पुराने विवाद में नई पहल

महानदी जल विवाद कई वर्षों से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच प्रमुख अंतरराज्यीय मुद्दा रहा है। दोनों राज्यों के बीच महानदी के पानी के उपयोग, जल परियोजनाओं और डाउनस्ट्रीम जल उपलब्धता को लेकर अलग-अलग मत रहे हैं।

ओडिशा का कहना रहा है कि ऊपरी हिस्से में बने बांधों और बैराजों से हीराकुंड जलाशय और राज्य के निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है। वहीं छत्तीसगढ़ ने अपने जल उपयोग को राज्य की जरूरतों और अपने हिस्से के अनुरूप ब

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ी रफ्तार, अगस्त में 5,943 EV की बिक्री; पिछले साल से करीब 67% ज्यादा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती नजर आ रही है। राज्य में अगस्त 2026 के दौरान 5,943 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई, जबकि अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 3,550 वाहन था। यानी एक साल में EV बिक्री में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में लोग पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों के साथ-साथ अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी तेजी से अपना रहे हैं।

पिछले साल की तुलना में बड़ा उछाल

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में छत्तीसगढ़ में 3,550 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई थी। एक साल बाद अगस्त 2026 में यह संख्या बढ़कर 5,943 हो गई। इस तरह एक वर्ष में 2,393 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक वाहन बिके।

EV बिक्री में इस वृद्धि को राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति बढ़ते रुझान के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर शहरी क्षेत्रों में दोपहिया और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने की बात सामने आ रही है।

पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में बढ़ रही EV की मांग

ईंधन की बढ़ती लागत, कम परिचालन खर्च और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। इलेक्ट्रिक वाहन सामान्य तौर पर पेट्रोल या डीजल वाहनों की तुलना में चलाने की लागत कम कर सकते हैं, हालांकि वाहन की कीमत, चार्जिंग सुविधा और बैटरी से जुड़े खर्च मॉडल के अनुसार अलग-अलग होते हैं।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका

EV की बिक्री बढ़ने के साथ राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी महत्वपूर्ण हो जाता है। शहरों के साथ-साथ प्रमुख राजमार्गों और अंतरशहरी मार्गों पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध होना इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

छत्तीसगढ़ में EV की बढ़ती बिक्री से वाहन बाजार में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री का रुझान राज्य की परिवहन व्यवस्था में बदलाव को प्रभावित कर सकता है।

67 फीसदी की बढ़ोतरी का क्या मतलब?

अगस्त 2025 के 3,550 वाहनों से अगस्त 2026 में 5,943 वाहनों तक पहुंचना लगभग 67.4% की साल-दर-साल वृद्धि है। हालांकि, केवल एक महीने के आंकड़े से पूरे साल की बिक्री का रुझान तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए आने वाले महीनों के आंकड़ों को भी देखना जरूरी होगा।

फिलहाल अगस्त के आंकड़े छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग की ओर संकेत करते हैं और बताते हैं कि राज्य के वाहन खरीदारों के बीच इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की स्वीकार्यता बढ़ रही है।

महासमुंद में ₹120 करोड़ के खैर तस्करी नेटवर्क का खुलासा, फर्जी NOC और 8 शेल कंपनियों से चल रहा था कथित कारोबार

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महासमुंद- छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की कथित अंतरराज्यीय तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस जांच के अनुसार, यह नेटवर्क पिछले करीब दो वर्षों से ओडिशा से हिमाचल प्रदेश तक फैला हुआ था और इस दौरान ₹120 करोड़ से अधिक मूल्य की खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार के प्रमाण मिले हैं। जांच में फर्जी वन दस्तावेज, नकली इनवॉयस, शेल कंपनियों और संदिग्ध बैंक खातों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई है।

23,350 किलो खैर लकड़ी से शुरू हुई जांच

मामला उस समय सामने आया जब 17 जून 2026 को महासमुंद जिले में एक ट्रक को रोका गया। ट्रक में करीब 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी लदी थी। पुलिस और वन विभाग की जांच में परिवहन से जुड़े दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी सामने आई। अधिकारियों के अनुसार, ट्रक के पास मौजूद नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम (NTPS) से संबंधित NOC/क्लीयरेंस दस्तावेज फर्जी पाए गए।

इसके बाद पुलिस ने मामले की तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की, जिसमें कथित तौर पर नेटवर्क के कई राज्यों तक फैले होने के संकेत मिले।

8 शेल कंपनियों के जरिए कागजों में दिखाया जाता था वैध कारोबार

पुलिस के मुताबिक, खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार को कागजों पर वैध दिखाने के लिए 8 शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता था। इन कंपनियों के माध्यम से फर्जी इनवॉयस तैयार किए जाने की बात जांच में सामने आई है। इसके अलावा 10 से अधिक संदिग्ध/म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन कंपनियों और बैंक खातों के जरिए रकम का लेन-देन किस तरह किया जाता था और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं।

ओडिशा से हिमाचल तक फैला था नेटवर्क

पुलिस की जांच के अनुसार, कथित तस्करी का नेटवर्क ओडिशा से शुरू होकर छत्तीसगढ़ होते हुए दूसरे राज्यों तक फैला था और खैर की लकड़ी को हिमाचल प्रदेश स्थित कत्था निर्माण इकाइयों तक पहुंचाने की बात सामने आई है। खैर के पेड़ की लकड़ी का उपयोग कत्था (catechu) बनाने में किया जाता है, जिसका इस्तेमाल पान में व्यापक रूप से होता है। 

50 टन से ज्यादा खैर लकड़ी जब्त होने का दावा

जांच के दौरान अलग-अलग स्थानों पर की गई कार्रवाई में पुलिस ने 50 टन से अधिक खैर लकड़ी जब्त करने और कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी किए जाने की जानकारी दी है। यह कार्रवाई कई राज्यों में की गई छापेमारी से जुड़ी बताई गई है। हालांकि, मामले में गिरफ्तार आरोपियों और नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है।

दो फर्म संचालक भी गिरफ्तार

महासमुंद पुलिस ने हाल में कथित तौर पर फर्जी इनवॉयस उपलब्ध कराने वाले दो फर्म संचालकों—पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल—को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार दोनों को 14 सितंबर को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। 

पुलिस का आरोप है कि इन फर्मों का इस्तेमाल खैर लकड़ी के कथित अवैध कारोबार को दस्तावेजों के जरिए वैध दिखाने में किया जाता था।

मुख्य आरोपी के ठिकाने से ₹81 लाख नकद बरामद

जांच के दौरान पुलिस ने कथित मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल से जुड़े ठिकाने पर भी कार्रवाई की। 7 सितंबर को की गई तलाशी में पुलिस ने ₹81 लाख नकद बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस रकम के स्रोत और कथित तस्करी नेटवर्क से उसके संबंधों की जांच कर रही है। 

वित्तीय नेटवर्क की भी जांच

पुलिस अब केवल लकड़ी की तस्करी तक सीमित न रहकर कथित पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है। शेल कंपनियों, फर्जी इनवॉयस और बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका और कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

वन संपदा की सुरक्षा को लेकर भी चिंता

खैर के पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी का मामला केवल आर्थिक अपराध तक सीमित नहीं है। इससे वन संपदा और स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी असर पड़ सकता है। इस मामले में फर्जी वन दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच ने वन उत्पादों के परिवहन की निगरानी और दस्तावेजी सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस के अनुसार जांच अभी जारी है। ₹120 करोड़ के कथित कारोबार, आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। ऊपर बताए गए आरोप पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं; इन्हें अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।


बागबाहरा लूटकांड का खुलासा, 24 घंटे में 4 आरोपी गिरफ्तार; 4 नाबालिग भी पकड़े गए

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बागबाहरा- जिले के बागबाहरा क्षेत्र में राहगीर से मोबाइल फोन और नकदी लूटने के मामले का पुलिस ने तेजी से खुलासा किया है। घटना के बाद सक्रिय हुई पुलिस टीम ने महज 24 घंटे के भीतर मामले में शामिल 4 वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, पुलिस ने 4 नाबालिगों को भी पकड़ा है।


राहगीर को बनाया था निशाना

पुलिस के अनुसार, बागबाहरा क्षेत्र में एक राहगीर को आरोपियों ने अपना निशाना बनाया था। आरोपियों ने उसके साथ लूट की वारदात को अंजाम देते हुए मोबाइल फोन और नकदी लूट ली और मौके से फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पीड़ित की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई।

24 घंटे में पुलिस ने सुलझाया मामला

घटना के बाद पुलिस टीम ने आसपास के इलाकों में पूछताछ करने के साथ ही उपलब्ध सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया। पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर मामले में शामिल आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 4 वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही वारदात में शामिल 4 नाबालिगों को भी पकड़ा गया है।

आरोपियों से पूछताछ जारी

गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस द्वारा पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस लूट की घटना में आरोपियों की भूमिका, वारदात में इस्तेमाल किए गए साधनों और लूटे गए सामान के संबंध में जानकारी जुटा रही है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों का किसी अन्य आपराधिक घटना से संबंध है या नहीं।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

बागबाहरा लूटकांड का 24 घंटे के भीतर खुलासा पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाता है। मामले में 4 वयस्क आरोपियों की गिरफ्तारी और 4 नाबालिगों को पकड़े जाने के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपराधिक घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

सांकरा में गांजा तस्करी पर बड़ी कार्रवाई, 37.300 किलो गांजा जब्त; 7 आरोपी गिरफ्तार

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सांकरा- जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सांकरा पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में गांजा बरामद किया है। पुलिस ने 37 किलो 300 ग्राम गांजा जब्त किया है। मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, जिले में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध परिवहन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी दौरान टीम को गांजा तस्करी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली। सूचना के आधार पर पुलिस और ANTF की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की।

जांच के दौरान टीम ने दो कारों को रोककर तलाशी ली। तलाशी में कारों से बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने गांजे को जब्त करने के साथ दोनों वाहनों को भी अपने कब्जे में ले लिया।

7 आरोपी गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ कर गांजे की सप्लाई, परिवहन और इसके पीछे जुड़े अन्य लोगों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे कहां पहुंचाया जाना था।

दो वाहन भी जब्त

गांजा परिवहन में इस्तेमाल की जा रही दो कारों को भी पुलिस ने जब्त किया है। जब्त वाहनों और बरामद मादक पदार्थ को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर रखा गया है।

आगे की जांच जारी

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। मामले में आगे की जांच के बाद तस्करी से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत प्रदेश की दीर्घकालिक अधोसंरचना विकास की बनेगी समग्र कार्ययोजना

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 रायपुर : प्रदेश में अधोसंरचना विकास को गति देने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत एवं एकीकृत अधोसंरचना तैयार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। लोक निर्माण विभाग को मिशन का नोडल विभाग बनाया गया है।


बैठक में मिशन के तहत प्रदेश के सड़क, ऊर्जा, ट्रांसमिशन, जल, सिंचाई, संचार, फाइबर नेटवर्क तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचना के समग्र विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति और कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई।

मुख्य सचिव विकासशील ने प्रदेश के रोड नेटवर्क के लिए आगामी 20 वर्षों का मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान में वर्तमान अधोसंरचना की स्थिति, भविष्य की जरूरतों, कनेक्टिविटी की आवश्यकताओं और संभावित विकास क्षेत्रों का समग्र आकलन किया जाए। इसके आधार पर चरणबद्ध तरीके से परियोजनाओं की प्राथमिकता तय कर उनके क्रियान्वयन की कार्ययोजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी के साथ ऊर्जा, जल, सिंचाई, संचार एवं डिजिटल कनेक्टिविटी सहित सभी प्रमुख अधोसंरचना घटकों को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ देखा जाए। प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकता का आकलन कर यह निर्धारित किया जाए कि आने वाले वर्षों में किस प्रकार की अधोसंरचना और किन क्षेत्रों में विकसित की जानी है।

इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब की संभावनाओं का होगा अध्ययन

मुख्य सचिव ने प्रदेश में इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सड़क एवं रेल सहित विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने तथा माल परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक परियोजनाओं को चिन्हित करने को कहा। उन्होंने अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए नए फंडिंग मैकेनिज्म की संभावनाओं का भी अध्ययन करने के निर्देश दिए। निजी एवं सार्वजनिक निवेश सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों का परीक्षण कर परियोजनाओं के लिए उपयुक्त वित्तीय व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

दीर्घकालिक योजना के साथ बनेगा वार्षिक एक्शन प्लान

मुख्य सचिव ने कहा कि 20 वर्षीय मास्टर प्लान के साथ वार्षिक एक्शन प्लान भी तैयार किया जाए। इसमें प्रत्येक वर्ष प्रस्तावित कार्यों, उनकी प्राथमिकता, आवश्यक संसाधनों और समय-सीमा का स्पष्ट निर्धारण हो। उन्होंने परियोजनाओं की प्रॉपर प्लानिंग एवं मैपिंग के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने देश के अन्य राज्यों में विकसित की जा रही आधुनिक अधोसंरचना परियोजनाओं का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों के एक्सपोजर विजिट आयोजित करने को भी कहा, इससे वहां अपनाई जा रही बेहतर तकनीकों एवं कार्यप्रणालियों को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जा सके। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए मिशन के कार्यों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर, लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के सीईओ चंदन कुमार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

 

नवा रायपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्तों के 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का राज्यपाल रामेन डेका ने किया शुभारंभ

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Chhattisgarh Local Body Election Year Book- 2026 का किया विमोचन

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तगणों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16-17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में हो रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है।

सम्मेलन का शुभारंभ आज माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तगण की स्थाई समिति के अध्यक्ष विजय देव एवं संयोजक सुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिव विकासशील उपस्थित रहे। शुभारंभ सहारोह के इस विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ स्थानीय निकाय निर्वाचन वार्षिकी 2026 Year Book के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया।

उद्घाटन उपरांत आज सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों के पधारे राज्य निर्वाचन आयुक्तगण ने स्थानीय लोकतंत्र विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने हेतु निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया एवं कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तगण और विषय-विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया ।

सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तगण द्वारा स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा "राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति" विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति आयोग की सचिव  शिखा राजपूत तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई।

बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन एक साथ राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता न पड़ने का उल्लेख किया गया।

मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरलम की ओर से सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग के संबंध में 'EVM sharing tracking policy and it's challenges and EMS SOFTWARE' 'Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation', 'Digitalising Elections in India', 'Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story' विषयों पर प्रस्तुतियां दी गई।

सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी न्यू जर्सी अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन का सार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के विषय विशेषज्ञ ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रानिक वोति वोटिंग मशीन हर प्रकार से सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों के अनुकूल इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।

झीरम घाटी हत्याकांड के दोषियों को मृत्युदंड न्याय की जीत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने कहा - झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का पीड़ादायक अध्याय, इसकी कटु स्मृतियां लंबे समय तक देती रहेंगी पीड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और दृढ़ नेतृत्व में सशस्त्र माओवाद के चंगुल से मुक्त हुआ छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने कहा - दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर बढ़ रहा

आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए भी आत्मचिंतन का अवसर : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने झीरम घाटी हत्याकांड मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने को न्याय की जीत बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा है कि झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है। एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में हमने सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है। दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध लड़ने वाले आतंक का भस्मासुर किसी विचार या क्षेत्र की सरहद को नहीं मानता है। यह समझकर उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने झीरम घाटी के क्रूर हमले में प्राण गंवाने वाले सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि  दी है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला: मामूली विभागीय सजा पर निलंबन अवधि का पूरा वेतन देने का आदेश

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी कर्मचारी को विभागीय जांच के बाद केवल मामूली विभागीय सजा दी जाती है और उसे सेवा में बहाल कर दिया जाता है, तो निलंबन की अवधि के लिए उसके पूरे वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निलंबन अपने आप में कोई सजा नहीं है, बल्कि विभागीय जांच पूरी होने तक की एक अस्थायी प्रशासनिक कार्रवाई है। ऐसे में यदि जांच के बाद कर्मचारी के खिलाफ केवल मामूली दंड लगाया गया है, तो निलंबन अवधि के वेतन को रोकना उचित नहीं माना जा सकता।

रायपुर में पदस्थ महिला ASI से जुड़ा था मामला

यह मामला रायपुर में पदस्थ एक महिला सहायक उपनिरीक्षक (ASI) से संबंधित था। विभागीय कार्रवाई के चलते उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित किया गया था। बाद में विभागीय जांच पूरी होने के बाद उन्हें सेवा में वापस बहाल कर दिया गया और उनके खिलाफ केवल मामूली विभागीय दंड लगाया गया।

मामले में निलंबन अवधि के दौरान रोके गए वेतन को लेकर विवाद सामने आया। इसी मुद्दे पर न्यायालय के समक्ष मामला पहुंचा, जहां कोर्ट ने कर्मचारी के निलंबन और बाद में दी गई विभागीय सजा के बीच के संबंध को देखते हुए वेतन भुगतान के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य आधार यह है कि निलंबन को अंतिम दंड नहीं माना जा सकता। यदि विभागीय जांच का परिणाम गंभीर सजा के रूप में सामने नहीं आता और कर्मचारी को मामूली दंड के साथ सेवा में बहाल कर दिया जाता है, तो निलंबन की पूरी अवधि के वेतन को रोकने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। ऐसे मामले में कर्मचारी को 100 प्रतिशत वेतन दिए जाने का अधिकार है।

इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह निलंबन अवधि के दौरान वेतन और विभागीय कार्रवाई के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रकाशित न्यायिक समाचार के आधार पर तैयार की गई है; किसी मामले में अंतिम कानूनी प्रभाव संबंधित आदेश/निर्णय के मूल पाठ पर निर्भर करता है।

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