Media24Media.com: MeitY ने BFSI क्षेत्र के लिए 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26' का दूसरा संस्करण जारी किया

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MeitY ने BFSI क्षेत्र के लिए 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26' का दूसरा संस्करण जारी किया

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In), वित्तीय क्षेत्र कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (CSIRT-Fin) और SISA के सहयोग से बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा (BFSI) तथा डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26' का दूसरा संस्करण जारी किया।

रिपोर्ट वित्तीय संस्थानों, नियामकों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और डिजिटल भुगतान क्षेत्र में तेजी से बदलते साइबर खतरों का समग्र आकलन उपलब्ध कराती है।

रिपोर्ट जारी करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि साइबर खतरे लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे समय में डिजिटल विश्वास को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि CERT-In, CSIRT-Fin और SISA के बीच यह सहयोग भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी साइबर सुरक्षा ज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।

रिपोर्ट डिजिटल फॉरेंसिक एवं इंसिडेंट रिस्पॉन्स (DFIR) अनुसंधान, CERT-In और CSIRT-Fin के विश्लेषण तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित खतरों पर किए गए अध्ययन पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि पिछले संस्करण में किए गए सात प्रमुख पूर्वानुमानों में से छह अब वास्तविकता बन चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि किसी नए साइबर खतरे के सामने आने और उसके दुरुपयोग के बीच का समय तेजी से घट रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, सोशल इंजीनियरिंग, क्रेडेंशियल चोरी, सप्लाई-चेन पर हमले और क्लाउड का दुरुपयोग जैसे खतरे अब सामान्य हमले की रणनीतियां बन चुके हैं। आधुनिक साइबर हमले अब वैध लॉगिन, अधिकृत भुगतान या सामान्य उपयोगकर्ता गतिविधि की तरह दिखाई देते हैं, जिससे उन्हें समय रहते पहचानना बेहद कठिन हो जाता है।

SISA के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्शन शांतमूर्ति ने कहा कि नवाचार और उसके दुरुपयोग के बीच की दूरी काफी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि BFSI क्षेत्र का आधार विश्वास है और साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी नियंत्रण का विषय नहीं, बल्कि संस्थानों की विकास रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

CERT-In के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने कहा कि भारत का वित्तीय तंत्र जितना अधिक डिजिटल और परस्पर जुड़ा हुआ होगा, साइबर सुरक्षा उतनी ही साझा जिम्मेदारी बन जाएगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट संस्थानों को उभरते खतरों का पूर्वानुमान लगाने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और देश की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने में मदद करेगी।

रिपोर्ट में 'एनाटॉमी ऑफ साइबर फेल्योर' नामक चार-स्तरीय ढांचा (4-Layer Gap Archetype Framework) भी प्रस्तुत किया गया है, जो यह समझने में मदद करता है कि आधुनिक साइबर हमले किन कमजोरियों का लाभ उठाकर बड़े सुरक्षा उल्लंघन में बदल जाते हैं। इसके आधार पर संस्थान जोखिमों की पहचान कर अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

रिपोर्ट में अगले 18 महीनों का रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें बुनियादी सुरक्षा उपायों को मजबूत करने, निरंतर जोखिम मूल्यांकन, समन्वित प्रतिक्रिया और अधिक सक्षम साइबर सुरक्षा ढांचा विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

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