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भारत में डिजिटल भुगतान क्रांति: UPI ने बदली वित्तीय लेन-देन की तस्वीर

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कुछ समय पहले तक भारत में पैसे का लेन-देन समय लेने वाला और जटिल प्रक्रिया हुआ करता था। बिल भुगतान के लिए लंबी कतारें, पैसे भेजने के लिए बैंक जाना और कई दिनों तक इंतजार करना आम बात थी। लेकिन आज डिजिटल तकनीक ने इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है।

डिजिटल परिवर्तन की शुरुआत

भारत में भुगतान प्रणाली का विकास बार्टर सिस्टम से लेकर नकद, चेक और डिजिटल माध्यमों तक हुआ है। 2000 के दशक में RBI ने RTGS (2004) और IMPS (2010) जैसी सेवाएं शुरू कीं, जिससे तेज ट्रांसफर संभव हुआ, लेकिन इनकी पहुंच सीमित थी।

JAM ट्रिनिटी: बड़ा बदलाव

डिजिटल क्रांति की असली नींव JAM ट्रिनिटी (जनधन, आधार और मोबाइल) ने रखी:

  • जनधन योजना: करोड़ों लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा

  • आधार: डिजिटल पहचान और पारदर्शिता सुनिश्चित

  • मोबाइल: आसान और त्वरित लेन-देन का माध्यम

इससे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को मजबूती मिली और लोगों में डिजिटल भुगतान के प्रति भरोसा बढ़ा।

UPI: एक क्रांतिकारी नवाचार

2016 में लॉन्च हुआ यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भारत की भुगतान प्रणाली में बड़ा बदलाव लेकर आया:

  • मोबाइल नंबर या UPI ID से तुरंत भुगतान

  • 24x7 रियल-टाइम ट्रांजैक्शन

  • सभी बैंकों और ऐप्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी

  • सुरक्षित और आसान उपयोग

UPI की उपलब्धियां

  • जनवरी 2026 में 21.7 अरब ट्रांजैक्शन

  • ₹28.33 लाख करोड़ का लेन-देन

  • भारत के 81% डिजिटल रिटेल भुगतान में हिस्सेदारी

  • वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में 49% हिस्सा

वित्तीय समावेशन को बढ़ावा

UPI ने सिर्फ भुगतान आसान नहीं किया, बल्कि:

  • छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों को डिजिटल बनाया

  • ग्रामीण और शहरी अंतर को कम किया

  • क्रेडिट, बीमा और बचत तक पहुंच बढ़ाई

आज ऑटो ड्राइवर, दुकानदार, किसान—सभी QR कोड से भुगतान ले रहे हैं।

सुरक्षा और विश्वास

  • RBI द्वारा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन लागू (1 अप्रैल 2026 से)

  • सुरक्षित और भरोसेमंद लेन-देन

  • आसान शिकायत निवारण प्रणाली

वैश्विक पहचान

भारत का UPI अब दुनिया में मिसाल बन चुका है:

  • IMF और World Bank ने सराहा

  • कई देशों (UAE, सिंगापुर, नेपाल, फ्रांस आदि) में विस्तार

  • दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम

निष्कर्ष

UPI ने भारत में वित्तीय लेन-देन को तेज, सरल, पारदर्शी और समावेशी बना दिया है। यह सिर्फ एक पेमेंट सिस्टम नहीं, बल्कि जन-जन का प्लेटफॉर्म बन गया है, जिसने देश की आर्थिक प्रगति को नई दिशा दी है।


वित्तीय सेवा विभाग ने 2025 में किए ऐतिहासिक सुधार, बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में भारत ने रचा नया कीर्तिमान

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नई दिल्ली- वित्त मंत्रालय के अंतर्गत वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने वर्ष 2025 में व्यापक और दूरगामी सुधारों के माध्यम से भारत के बैंकिंग, बीमा, पेंशन, डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन तंत्र को नई मजबूती प्रदान की है। “आपकी पूँजी, आपका अधिकार” अभियान, बैंकिंग कानून (संशोधन) अधिनियम 2025, EASE 8.0 (EASE₹ise), क्रेडिट लाइन ऑन UPI और Hello! UPI जैसे नवाचारों ने वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

बैंकिंग क्षेत्र ऐतिहासिक मजबूती की ओर

सरकार के सुधारात्मक कदमों के परिणामस्वरूप बैंकिंग क्षेत्र की परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
सितंबर 2025 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) का सकल एनपीए घटकर 2.05% और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का 2.30% रह गया है।
प्रावधान कवरेज अनुपात (PCR) बढ़कर SCBs में 93% से अधिक और PSBs में लगभग 95% हो गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 में SCBs ने ₹4.01 लाख करोड़ और PSBs ने ₹1.78 लाख करोड़ का अब तक का सर्वाधिक शुद्ध लाभ दर्ज किया।

EASE सुधारों से बदली PSBs की तस्वीर

EASE एजेंडा के तहत डिजिटल बैंकिंग, डेटा एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा, ग्राहक सेवा और फिनटेक सहयोग को बढ़ावा मिला। EASE₹ise के अंतर्गत जोखिम प्रबंधन, नवाचार, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और उत्कृष्टता पर विशेष जोर दिया गया, जिससे PSBs को भविष्य के लिए तैयार किया गया।


डिजिटल भुगतान में भारत वैश्विक अग्रणी

DIGIDHAN मिशन के तहत डिजिटल लेन-देन में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई।
वर्ष 2017-18 के 2,071 करोड़ लेन-देन से बढ़कर 2024-25 में यह संख्या 22,831 करोड़ हो गई।
UPI आज देश के कुल खुदरा डिजिटल भुगतानों का लगभग 81% संभाल रहा है और वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में भारत की हिस्सेदारी लगभग 49% है।
Hello! UPI, UPI Lite X और क्रेडिट लाइन ऑन UPI ने वरिष्ठ नागरिकों, ग्रामीण क्षेत्रों और फीचर फोन उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल भुगतान को सरल बनाया है।

वित्तीय समावेशन को नई गति

प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत 57 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें ₹2.8 लाख करोड़ से अधिक जमा है।
मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, अटल पेंशन योजना और NPS वात्सल्य ने महिलाओं, युवाओं, किसानों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है।

बीमा, NBFC और MSME को बढ़ावा

सबका बीमा, सबकी रक्षा अधिनियम 2025 के माध्यम से बीमा क्षेत्र में एफडीआई सीमा 100% कर दी गई है।
NBFCs और MSMEs के लिए नई क्रेडिट गारंटी योजनाओं से निवेश और रोजगार सृजन को बल मिला है।
SIDBI ने MSME क्लस्टरों में नए शाखा नेटवर्क का विस्तार किया है।

निष्कर्ष

वर्ष 2025 में वित्तीय सेवा विभाग के सुधारों ने भारत की वित्तीय प्रणाली को अधिक मजबूत, पारदर्शी और समावेशी बनाया है। बैंकिंग स्थिरता, डिजिटल भुगतान में वैश्विक नेतृत्व और व्यापक वित्तीय समावेशन के साथ DFS ने विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया है।


ई-बिल सिस्टम का शुभारंभ: उर्वरक सब्सिडी के डिजिटल और पारदर्शी भुगतान की दिशा में बड़ा कदम

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन और विकसित भारत @ 2047 के लक्ष्य के अनुरूप, उर्वरक विभाग ने डिजिटल शासन और वित्तीय सुधारों को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में ई-बिल सिस्टम का उद्घाटन किया। इस प्रणाली के माध्यम से सरकार लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के उर्वरक सब्सिडी भुगतान को डिजिटल रूप से संसाधित कर सकेगी।

समारोह में संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह ऑनलाइन प्रणाली पारदर्शी, कुशल और तकनीक-संचालित शासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उर्वरक विभाग के सचिव राजत कुमार मिश्रा ने कहा कि इस लॉन्च के साथ विभाग के वित्तीय संचालन को आधुनिक बनाने में एक बड़ी मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह नई प्रणाली मैन्युअल और कागजी प्रक्रियाओं से पूरी तरह डिजिटल, सिस्टम-टू-सिस्टम वर्कफ़्लो में परिवर्तन का प्रतीक है, जिससे बिलों के भौतिक आदान-प्रदान की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

यह पहल उर्वरक विभाग के iFMS (Integrated Financial Management System) और वित्त मंत्रालय के CGA के PFMS के बीच अनोखी तकनीकी साझेदारी का परिणाम है।

CCA संतोष कुमार ने कहा कि इस परिवर्तन से पारदर्शिता और जवाबदेही काफी हद तक बढ़ेगी, क्योंकि यह सभी वित्तीय लेन-देन का केन्द्रीयकृत और छेड़छाड़-रहित डिजिटल ऑडिट ट्रेल बनाएगा, जिससे निगरानी और ऑडिटिंग आसान हो जाएगी। इस प्रणाली के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को रियल-टाइम खर्च की निगरानी और मजबूत वित्तीय नियंत्रण मिलेगा, क्योंकि सभी भुगतान केंद्रीयकृत प्रणाली में ट्रैक और रिपोर्ट किए जाएंगे।

JS (F&A) मनोज सेठी ने कहा कि यह प्रणाली एंड-टू-एंड डिजिटल बिल प्रोसेसिंग सक्षम करती है, जिससे भुगतान की समय-सीमा में तेजी आएगी, विशेषकर साप्ताहिक उर्वरक सब्सिडी भुगतान के समय पर वितरण में। साथ ही, ई-बिल प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ताओं की सुविधा बढ़ाता है क्योंकि उर्वरक कंपनियां ऑनलाइन दावा जमा कर सकती हैं और भुगतान की स्थिति रियल-टाइम में ट्रैक कर सकती हैं, जिससे भौतिक यात्रा और मैन्युअल फॉलो-अप की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।

यह प्रणाली विभाग में मानक इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ़्लो (जैसे फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट बिल प्रोसेसिंग) को लागू करती है, जिससे बिल हैंडलिंग में समानता, निष्पक्षता और वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित होता है। इसके अलावा, सिस्टम एकीकरण से आईटी सिस्टम साइलो कम, सिस्टम मेंटेनेंस सरल और रियल-टाइम वित्तीय जानकारी का व्यापक आधार तैयार होता है, जो नीति निर्माण और बजट प्रबंधन में सहायक है।

इस कार्यक्रम में AS अनीता सी. मेश्राम, AS अपर्णा शर्मा, JS KK पाठक, JS अनुराग रोहतगी और डायरेक्टर लबोनी दास दत्ता उपस्थित थे।

असेम गुप्ता, वरिष्ठ तकनीकी निदेशक, NIC ने समाधान की तकनीकी उत्कृष्टता और सहज आर्किटेक्चर समझाया। NIC टीम, जिसमें जॉइंट डायरेक्टर आशुतोष तिवारी और डेवलपर हरेकृष्ण तिवारी शामिल थे, ने प्लेटफ़ॉर्म के कार्यान्वयन और डेमो का समर्थन किया। NIC के प्रयासों की व्यापक सराहना की गई।

संगठित ई-बिल प्रणाली वित्तीय शासन को सशक्त बनाती है, जिसमें पूर्वनिर्धारित मानदंडों के खिलाफ भुगतान की पुष्टि, ऑडिट उद्देश्यों के लिए हर क्रिया का लॉग और धोखाधड़ी या दुरुपयोग के जोखिम को कम करना शामिल है। यह पहल सरकार की पारदर्शी, कुशल और तकनीक-संचालित प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: वित्तीय सेवाओं पर ऐतिहासिक समझौते की वार्ता संपन्न

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने 22 दिसंबर 2025 को भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के अंतर्गत वित्तीय सेवाओं पर परिशिष्ट (Financial Services Annex) से संबंधित वार्ताओं को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। यह उपलब्धि द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को 10 दिसंबर 2025 को आयोजित अंतिम दौर की वार्ताओं के दौरान अंतिम रूप दिया गया।


भारत और न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए दृढ़ प्रतिबद्धता साझा करते हैं। इस संबंध के महत्व को स्वीकार करते हुए, दोनों देशों ने एक दूरदर्शी, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता विकसित करने के लिए सहयोग किया है, जो उनके-अपने वित्तीय सेवा क्षेत्रों के लिए नए अवसर खोलेगा। यह एफटीए द्विपक्षीय सहयोग को गति देने, बाजार पहुंच को सुगम बनाने और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की वित्तीय प्रणालियों के गहन एकीकरण के लिए आवश्यक संस्थागत और नियामक ढांचा प्रदान करेगा।

भारत–न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवाएं परिशिष्ट, सामान्य GATS प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़ते हुए, कुल 18 अनुच्छेदों तक विस्तारित है। इसके प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान और रियल-टाइम लेन-देन अवसंरचना:

भारत और न्यूज़ीलैंड ने घरेलू भुगतान अंतर्संचालनीयता विकसित करने तथा एकीकृत फास्ट पेमेंट सिस्टम (FPS) के माध्यम से रियल-टाइम सीमा-पार रेमिटेंस और व्यापारी भुगतान को समर्थन देने पर सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। यह प्रावधान भारत के डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम और फिनटेक क्षेत्र को सशक्त करेगा, भारतीय प्रवासी समुदाय से रेमिटेंस प्रवाह को बढ़ाएगा, भारतीय भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार के अवसर पैदा करेगा और UPI व NPCI जैसी भारत की डिजिटल भुगतान प्रणालियों की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा।

वित्तीय प्रौद्योगिकी और नियामक नवाचार:

दोनों देशों ने वित्तीय सेवाओं में नवाचार के लिए सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है। समझौते में एक-दूसरे के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स और डिजिटल सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क से सीखने के प्रावधान शामिल हैं, जिनका सीमा-पार अनुप्रयोग संभव होगा। इससे भारत को द्विपक्षीय साझेदारी में एक फिनटेक हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी तथा भारतीय फिनटेक कंपनियों के लिए सहयोग के नए अवसर सृजित होंगे।

वित्तीय सूचना का हस्तांतरण और संरक्षण:

भारत और न्यूज़ीलैंड ने वित्तीय सूचना के हस्तांतरण, प्रसंस्करण और भंडारण से संबंधित प्रत्येक पक्ष के विधायी और नियामक अधिकारों को मान्यता दी है। साथ ही, डेटा संप्रभुता और उपभोक्ता गोपनीयता की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सीमा-पार डिजिटल संचालन को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

क्रेडिट रेटिंग और गैर-भेदभाव:

इस प्रावधान के तहत भारतीय वित्तीय संस्थानों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में मनमाने या भेदभावपूर्ण क्रेडिट आकलन से सुरक्षा मिलेगी। इससे भारतीय बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार पहुंच सुगम होगी और उनके संचालन पर किसी प्रकार के भेदभावपूर्ण नियामक प्रतिबंध से बचाव होगा।

बैक-ऑफिस और सहायक सेवाएं:

वित्तीय सेवाओं परिशिष्ट के अंतर्गत दोनों देशों ने बैक-ऑफिस और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी सहायक गतिविधियों को समर्थन देने पर सहमति जताई है। यह भारत की विश्वस्तरीय आईटी और बिजनेस प्रोसेस सर्विस क्षमताओं का लाभ उठाएगा तथा लागत-कुशल वित्तीय सेवा वितरण को सक्षम बनाएगा, साथ ही भारत के वित्तीय सेवाओं, आईटी और बीपीओ क्षेत्रों की वृद्धि को समर्थन देगा।

एफडीआई सीमा और बैंक शाखाएं:

विशिष्ट प्रतिबद्धताओं की अनुसूचियां बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों में बाजार पहुंच और राष्ट्रीय उपचार पर प्रगतिशील सहयोग को दर्शाती हैं। भारत ने बैंकिंग और बीमा में एफडीआई सीमा बढ़ाने तथा चार वर्षों की अवधि में 15 बैंक शाखाएं स्थापित करने की अनुमति देने वाला उदार बैंक शाखा लाइसेंसिंग ढांचा प्रस्तावित किया है, जो GATS के तहत पहले प्रस्तावित 12 शाखाओं की सीमा से अधिक है। इससे भारतीय वित्तीय सेवा प्रदाताओं को न्यूज़ीलैंड में अपने संचालन का विस्तार करने में मदद मिलेगी और वित्तीय सेवाओं के निर्यात में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, भारत–न्यूज़ीलैंड वित्तीय सेवाएं परिशिष्ट पर वार्ताओं का सफल समापन दोनों सरकारों की आर्थिक संबंधों को गहरा करने और तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय सेवा परिदृश्य में पारस्परिक अवसरों का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह समझौता दूरदर्शी, संतुलित और बेहतर बाजार पहुंच, नियामक स्पष्टता तथा सहयोगी ढांचे प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, जिससे दोनों देशों के वित्तीय संस्थानों और सेवा प्रदाताओं को लाभ होगा।

वर्तमान में, भारतीय बैंक—बैंक ऑफ बड़ौदा और बैंक ऑफ इंडिया—न्यूज़ीलैंड में चार शाखाओं के साथ सहायक संचालन कर रहे हैं, जबकि न्यूज़ीलैंड की कोई भी बैंकिंग या बीमा इकाई भारत में मौजूद नहीं है और न ही कोई भारतीय बीमा कंपनी न्यूज़ीलैंड में स्थापित है। यह एफटीए स्पष्ट बाजार पहुंच प्रतिबद्धताओं, नियामक पारदर्शिता और द्विपक्षीय सहयोग ढांचे के माध्यम से द्विपक्षीय निवेश, संस्थागत उपस्थिति और सेवाओं के विस्तार को प्रोत्साहित करेगा तथा दोनों देशों के वित्तीय सेवा बाजारों के बीच संबंधों को नई गति देगा।

स्कूलिंग में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहल

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भारत सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में जीवन और शिक्षा की सुविधा (Ease of Living & Schooling) को बढ़ावा देने के लिए कई विधायी, नीति और संस्थागत सुधारों की पहल की है।

एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) और अन्य संबंधित हितधारकों को पत्र लिखकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को स्कूलों में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसका उद्देश्य स्कूल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाना, विशेषकर स्कूलों में वित्तीय लेन-देन से संबंधित कार्यों को सरल और पारदर्शी बनाना है।

UPI, मोबाइल वॉलेट और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों की व्यापक और बढ़ती पहुँच का लाभ उठाते हुए, विभाग ने सभी राज्यों, UTs और मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त निकायों जैसे NCERT, CBSE, KVS, NVS को यह सुझाव दिया है कि वे स्कूलों में प्रवेश और परीक्षा शुल्क की डिजिटल माध्यम से वसूली के लिए सुरक्षित और पारदर्शी तरीके अपनाएँ।

पत्र में कहा गया है कि नकद-आधारित भुगतान से डिजिटल भुगतान में संक्रमण करने के कई फायदे हैं। यह अभिभावकों और छात्रों के लिए सुविधाजनक, पारदर्शी और घर से भुगतान करने योग्य विकल्प उपलब्ध कराता है, जिससे उन्हें स्कूल आने की आवश्यकता नहीं होती।

विभाग ने राज्यों और UTs को इसी दिशा में कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया है और कहा कि स्कूलों में डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ना सरकारी डिजिटल परिवर्तन के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इससे सभी हितधारकों की वित्तीय साक्षरता बढ़ेगी और डिजिटल लेन-देन की दुनिया खुल जाएगी।

यह पहल विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी — एक डिजिटल रूप से सशक्त, समावेशी और नागरिक-केंद्रित शिक्षा प्रणाली की दिशा में।


15 नवंबर से FASTag नहीं होने पर कैश में दोगुना, UPI से केवल 1.25 गुना टोल शुल्क देना होगा

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राष्ट्रीय राजमार्गों पर नकद लेन-देन समाप्त करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नियमों में संशोधन किया

डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय राजमार्गों पर उपयोग शुल्क प्लाज़ा (टोल प्लाज़ा) पर नकद लेन-देन को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में संशोधन किया है।

नए नियम के तहत, यदि कोई वाहन बिना वैध और कार्यशील FASTag के शुल्क प्लाज़ा में प्रवेश करता है तो नकद भुगतान करने पर उससे संबंधित वाहन श्रेणी के लिए लागू उपयोग शुल्क का दोगुना शुल्क लिया जाएगा।

हालाँकि, यदि वही उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) के माध्यम से करता है, तो उससे संबंधित वाहन श्रेणी के लागू शुल्क का केवल 1.25 गुना शुल्क लिया जाएगा।

उदाहरण:

  • यदि किसी वाहन के लिए वैध FASTag के माध्यम से ₹100 का उपयोग शुल्क निर्धारित है,

  • तो नकद भुगतान करने पर शुल्क ₹200 होगा,

  • जबकि UPI से भुगतान करने पर शुल्क केवल ₹125 होगा।

यह संशोधन शुल्क वसूली प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने, टोल वसूली में पारदर्शिता बढ़ाने और राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के लिए आवागमन को आसान बनाने के उद्देश्य से किया गया है। यह अधिसूचना 15 नवंबर, 2025 से प्रभावी होगी।

राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण और वसूली) नियम, 2008 में किया गया यह नवीनतम संशोधन सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह टोल वसूली को अधिक कुशल बनाने और टोल प्लाज़ा पर भीड़भाड़ को कम करने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग करेगी। संशोधित नियम डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करेंगे, टोल संचालन में पारदर्शिता बढ़ाएँगे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर उपयोगकर्ताओं के समग्र अनुभव में सुधार करेंगे।


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