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MeitY ने BFSI क्षेत्र के लिए 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26' का दूसरा संस्करण जारी किया

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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In), वित्तीय क्षेत्र कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (CSIRT-Fin) और SISA के सहयोग से बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा (BFSI) तथा डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के लिए 'डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26' का दूसरा संस्करण जारी किया।

रिपोर्ट वित्तीय संस्थानों, नियामकों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और डिजिटल भुगतान क्षेत्र में तेजी से बदलते साइबर खतरों का समग्र आकलन उपलब्ध कराती है।

रिपोर्ट जारी करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि साइबर खतरे लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे समय में डिजिटल विश्वास को मजबूत करने के लिए सरकारी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि CERT-In, CSIRT-Fin और SISA के बीच यह सहयोग भारत की साइबर सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी साइबर सुरक्षा ज्ञान को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।

रिपोर्ट डिजिटल फॉरेंसिक एवं इंसिडेंट रिस्पॉन्स (DFIR) अनुसंधान, CERT-In और CSIRT-Fin के विश्लेषण तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित खतरों पर किए गए अध्ययन पर आधारित है। इसमें बताया गया है कि पिछले संस्करण में किए गए सात प्रमुख पूर्वानुमानों में से छह अब वास्तविकता बन चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि किसी नए साइबर खतरे के सामने आने और उसके दुरुपयोग के बीच का समय तेजी से घट रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, सोशल इंजीनियरिंग, क्रेडेंशियल चोरी, सप्लाई-चेन पर हमले और क्लाउड का दुरुपयोग जैसे खतरे अब सामान्य हमले की रणनीतियां बन चुके हैं। आधुनिक साइबर हमले अब वैध लॉगिन, अधिकृत भुगतान या सामान्य उपयोगकर्ता गतिविधि की तरह दिखाई देते हैं, जिससे उन्हें समय रहते पहचानना बेहद कठिन हो जाता है।

SISA के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी दर्शन शांतमूर्ति ने कहा कि नवाचार और उसके दुरुपयोग के बीच की दूरी काफी कम हो गई है। उन्होंने कहा कि BFSI क्षेत्र का आधार विश्वास है और साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी नियंत्रण का विषय नहीं, बल्कि संस्थानों की विकास रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।

CERT-In के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने कहा कि भारत का वित्तीय तंत्र जितना अधिक डिजिटल और परस्पर जुड़ा हुआ होगा, साइबर सुरक्षा उतनी ही साझा जिम्मेदारी बन जाएगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट संस्थानों को उभरते खतरों का पूर्वानुमान लगाने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और देश की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने में मदद करेगी।

रिपोर्ट में 'एनाटॉमी ऑफ साइबर फेल्योर' नामक चार-स्तरीय ढांचा (4-Layer Gap Archetype Framework) भी प्रस्तुत किया गया है, जो यह समझने में मदद करता है कि आधुनिक साइबर हमले किन कमजोरियों का लाभ उठाकर बड़े सुरक्षा उल्लंघन में बदल जाते हैं। इसके आधार पर संस्थान जोखिमों की पहचान कर अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

रिपोर्ट में अगले 18 महीनों का रोडमैप भी प्रस्तुत किया गया है, जिसमें बुनियादी सुरक्षा उपायों को मजबूत करने, निरंतर जोखिम मूल्यांकन, समन्वित प्रतिक्रिया और अधिक सक्षम साइबर सुरक्षा ढांचा विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है।

भारत-जापान के बीच टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता आयोजित, रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति

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भारत और जापान के बीच 13 जुलाई 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री  कानो कोजी ने किया।

बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली रक्षा नीति वार्ता के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक चर्चा की तथा साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक में सैन्य-से-सैन्य सहयोग, संयुक्त मुख्यालयों के बीच समन्वय, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग (विशेष रूप से समुद्री प्रौद्योगिकी) तथा संस्थागत सहयोग सहित रक्षा संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई।

दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का स्वागत किया और नियमित उच्च-स्तरीय संवाद एवं आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया। इस वर्ष प्रस्तावित मंत्रिस्तरीय यात्राओं और 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के संभावित परिणामों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा अन्य उभरते रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ती समानता पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में मिलकर कार्य जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में जापान के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करना महत्वपूर्ण है। वहीं, कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों के और विस्तार के प्रति जापान की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले रक्षा सचिव ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी से मुलाकात कर उन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने जापानी रक्षा मंत्री को भारत आने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी में लगातार आ रही मजबूती पर संतोष व्यक्त किया।

अपने दौरे की शुरुआत में रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज मेमोरियल स्टोन पर पुष्पांजलि अर्पित कर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के उन जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह यात्रा भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते रक्षा संबंधों, पारस्परिक सम्मान तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति (SCMC) की 12वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित

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भारत-मलेशिया सैन्य सहयोग उप-समिति (Sub Committee Meeting on Military Cooperation - SCMC) की 12वीं बैठक 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और मलेशियाई सशस्त्र बलों के सहायक चीफ ऑफ स्टाफ (रक्षा संचालन एवं प्रशिक्षण) मेजर जनरल अमेर महमूद बिन अब्दुल रहमान ने की।

प्रमुख बिंदु

  • दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सैन्य सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की और अब तक हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

  • बैठक में सैन्य आदान-प्रदान, संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, स्टाफ वार्ता, क्षमता निर्माण, समुद्री सहयोग तथा उभरते क्षेत्रों में सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

रक्षा सहयोग को मिलेगा और बल

  • दोनों देशों ने नियमित द्विपक्षीय गतिविधियों की सफलता की सराहना की।

  • सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में अधिक भागीदारी, पेशेवर संवाद और सैन्य आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी।

  • रक्षा उद्योग, रक्षा प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग

  • दोनों पक्षों ने आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक-प्लस (ADMM-Plus) में एक-दूसरे की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।

  • आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह (Experts' Working Group on Counter-Terrorism) के तहत व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

  • क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम

  • बैठक में भारत-मलेशिया उन्नत रणनीतिक साझेदारी (Enhanced Strategic Partnership) में रक्षा सहयोग को एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया गया।

  • दोनों देशों ने आपसी विश्वास, साझा हितों और सुरक्षित, स्थिर एवं समृद्ध इंडो-पैसिफिक की साझा दृष्टि के आधार पर रक्षा संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

अन्य प्रमुख गतिविधियां

  • मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की।

  • प्रतिनिधिमंडल ने वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, नई दिल्ली स्थित डीपीएसयू भवन का भी दौरा किया।

  • बैठक से पहले मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पर पुष्पचक्र अर्पित कर भारत के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की समीक्षा बैठक में रिकॉर्ड प्रदर्शन, डिजिटल सुधार और वित्तीय समावेशन पर जोर

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वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान उनके परिचालन, वित्तीय और रणनीतिक प्रदर्शन का आकलन किया गया। इस बैठक में DFS के विशेष सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एमडी एवं सीईओ तथा कार्यकारी निदेशक उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान “आपकी पूँजी, आपका अधिकार (Your Money, Your Right)” शीर्षक से एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक देशभर में चलाए गए उस अभियान को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को उनके अनक्लेम्ड वित्तीय परिसंपत्तियों की पहचान करने और उन्हें वापस प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। इस पहल के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और अन्य हितधारकों के सहयोग से पिछले छह महीनों में लगभग ₹6,800 करोड़ की राशि लगभग 29 लाख लाभार्थियों को वापस की गई है।

बैठक में DFS की नवीनीकृत वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया। नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ तैयार यह पोर्टल अधिक सुगमता, सरल नेविगेशन और बेहतर सूचना प्रसार प्रदान करता है। यह वेबसाइट 23 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है और इसमें दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए विशेष सुविधाएँ भी शामिल हैं, जो समावेशी डिजिटल सेवा वितरण की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समीक्षा के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के व्यवसाय वृद्धि, लाभप्रदता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग, एमएसएमई ऋण प्रवाह, साइबर सुरक्षा और परिचालन जोखिम प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत आकलन किया गया। बताया गया कि वित्त वर्ष 2025–26 में PSBs ने मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन किया है। कुल बैंकिंग व्यवसाय लगभग ₹283.3 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जबकि शुद्ध लाभ बढ़कर लगभग ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

बैठक में यह भी बताया गया कि सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) घटकर 1.93% और शुद्ध NPA घटकर 0.39% के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर आ गई है, जो बैंकिंग प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, पीएम मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा और डिजिटल लेंडिंग जैसी वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

डिजिटल लोन प्रोसेसिंग, ई-केवाईसी, पेपरलेस सिस्टम और सरकारी प्लेटफॉर्म के एकीकरण जैसे उपायों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में एमएसएमई क्षेत्र को ऋण उपलब्धता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और डिजिटल बैंकिंग प्रणाली को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।

अंत में सचिव ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बदलते वैश्विक परिदृश्य में सतर्क रहते हुए दक्षता, पारदर्शिता और ग्राहक सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को समर्थन मिल सके।

भारत-वियतनाम ने विज्ञान और तकनीक सहयोग को दी नई गति, जितेंद्र सिंह और वियतनाम मंत्री के बीच अहम बैठक

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में वियतनाम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री वु हाई क्वान के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच लगभग दो हजार वर्षों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह की वर्ष 2024 में भारत यात्रा के बाद दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिली है।

बैठक में स्टार्टअप सहयोग, रिसर्च पार्टनरशिप, तकनीकी नवाचार और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नियमित सहयोग जारी रखने और साझा विकास के लिए ठोस पहल करने पर सहमति व्यक्त की।


भारत की डिजिटल पहचान सुरक्षा को मजबूत करने के लिए UIDAI–NFSU साझेदारी

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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण और राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय ने डिजिटल फॉरेंसिक्स, साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीकी अनुसंधान के क्षेत्रों में पाँच वर्षीय संरचित सहयोग स्थापित करने के लिए समझौता किया है।

यह समझौता ज्ञापन (MoU) दोनों प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को एक साथ लाकर UIDAI के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर—जो भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली की आधारशिला है—की साइबर सुरक्षा और मजबूती को और सुदृढ़ करेगा।

MoU का आदान-प्रदान UIDAI के सीईओ विवेक चंद्र वर्मा और NFSU के गुजरात कैंपस के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस.ओ. जुनारे के बीच किया गया। इस अवसर पर UIDAI के उप महानिदेशक अभिषेक कुमार सिंह सहित दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह सहयोग छह प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा:

  • शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास

  • सूचना सुरक्षा और सिस्टम की अखंडता

  • फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रयोगशाला उत्कृष्टता

  • साइबर सुरक्षा गतिविधियों के लिए तकनीकी सहयोग

  • तकनीकी परामर्श एवं अनुसंधान (जैसे AI, ब्लॉकचेन, डीपफेक डिटेक्शन, क्रिप्टोग्राफी)

  • प्लेसमेंट और आउटरीच के अवसर

UIDAI के सीईओ विवेक चंद्र वर्मा ने कहा, “यह सहयोग भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा, मजबूती और फॉरेंसिक क्षमताओं को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे डिजिटल पहचान प्रणालियों की सुरक्षा और भी सुनिश्चित होगी।”


सी-डॉट और जंप्स ऑटोमेशन के बीच समझौता: साइबर सुरक्षा जागरूकता के लिए गेमिंग प्लेटफॉर्म विकसित होगा

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नई दिल्ली: दूरसंचार विकास केंद्र (सी-डॉट) ने साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने के लिएजंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता सी-डॉट के सहयोगात्मक अनुसंधान कार्यक्रम (Collaborative Research Programme) (CCRP) के तहत किया गया है।

इस अवसर पर सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय जंप्स ऑटोमेशन के टेक्नोलॉजी प्रमुख रोहन चांदक  बोर्ड सदस्य और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

गेमिफिकेशन के जरिए साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को अधिक रोचक, इंटरैक्टिव और प्रभावी बनाना है। प्रस्तावित प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरीना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और चर्चा मंच शामिल होंगे। इसमें फ़िशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर प्रतिक्रिया और संकट प्रबंधन जैसे वास्तविक परिदृश्यों पर आधारित सिमुलेशन भी होंगे।

एआई आधारित स्मार्ट सिस्टम

यह प्लेटफॉर्म एआई-आधारित एनालिटिक्स इंजन से लैस होगा, जो उपयोगकर्ताओं के प्रदर्शन का विश्लेषण करेगा, चुनौती के स्तर को स्वतः समायोजित करेगा और नए साइबर खतरों के अनुसार कंटेंट को अपडेट रखेगा। यह समाधान सी-डॉट की स्वदेशी तकनीकी क्षमता और जंप्स ऑटोमेशन की एआई विशेषज्ञता का संयोजन होगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने इस पहल को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म लोगों और संगठनों को साइबर खतरों की पहचान और उनसे निपटने में सक्षम बनाएगा।

वहीं, रोहन चांदक ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को अधिक प्रभावशाली बनाएगा और मानव-जनित साइबर जोखिमों को कम करने में मदद करेगा।

व्यावसायिक स्तर पर लागू होगा प्लेटफॉर्म

यह प्लेटफॉर्म एक SaaS (Software as a Service) मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में विभिन्न संस्थानों और कंपनियों में आसानी से लागू किया जा सकेगा।

निष्कर्ष

यह साझेदारी भारत में साइबर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने और स्वदेशी तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

एनसीसी और नाइलिट की संयुक्त पहल: कैडेट्स के लिए साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

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नई दिल्ली- देश में युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए National Cadet Corps (NCC) ने National Institute of Electronics and Information Technology (NIELIT) के सहयोग से एक व्यापक साइबर सुरक्षा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (Cyber Security Capacity Building Programme) की शुरुआत की है। इस संबंध में दोनों संस्थानों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर NCC के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल Virendra Vats और NIELIT के महानिदेशक Madan Mohan Tripathi उपस्थित रहे।

दो चरणों में होगा प्रशिक्षण

यह कार्यक्रम दो चरणों में लागू किया जाएगा:

1. साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम

पहले चरण में 15 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें कैडेट्स को डिजिटल साक्षरता, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, साइबर हाइजीन और साइबर खतरों के बारे में बुनियादी जानकारी दी जाएगी। यह प्रशिक्षण NIELIT के डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर के सभी NCC कैडेट्स के लिए उपलब्ध होगा।

2. साइबर डिफेंडर कार्यक्रम

दूसरे चरण में 60 घंटे का गहन ऑफलाइन प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इसमें चयनित कैडेट्स को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, रियल-लाइफ सिमुलेशन और आधुनिक साइबर सुरक्षा टूल्स का उपयोग सिखाया जाएगा, जिससे वे साइबर खतरों की पहचान और उनसे निपटने में सक्षम बन सकें।

उद्देश्य और महत्व

इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षित NCC साइबर कैडेट्स की एक मजबूत टीम तैयार करना है, जो:

  • समाज में साइबर जागरूकता फैलाएं

  • सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को बढ़ावा दें

  • जमीनी स्तर पर साइबर सुरक्षा अभियानों में सहयोग करें

यह कार्यक्रम Digital India और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (NSQF) के लक्ष्यों के अनुरूप भी है।

निष्कर्ष

यह पहल न केवल युवाओं को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सक्षम बनाएगी, बल्कि देश में सुरक्षित और जागरूक डिजिटल समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए FIU-IND और I4C के बीच समझौता

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नई दिल्ली- भारत में साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने सूचना साझा करने और समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते पर FIU-IND के निदेशक अमित मोहन गोविल और I4C के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने में दोनों एजेंसियों के बीच सहयोग और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के नए दौर की शुरुआत का प्रतीक है।

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, जिसके साथ नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यह MoU दोनों एजेंसियों को परिचालन संबंधी जानकारी विकसित करने, जांच एजेंसियों को सहयोग देने, वित्तीय अपराधों की रोकथाम, डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा और संपत्ति की रिकवरी में मदद करेगा।

समझौते का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रभावी फीडबैक तंत्र स्थापित करना है। साथ ही, वित्तीय संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश और ‘रेड फ्लैग’ संकेतकों का विकास और प्रसार भी किया जाएगा, जिससे साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम को और सुदृढ़ किया जा सके।

यह कदम साइबर अपराधों के खिलाफ ‘पूरे सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

FIU-IND के बारे में:

फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया देश की केंद्रीय एजेंसी है, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी प्राप्त, विश्लेषित और साझा करती है तथा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ कार्रवाई का समन्वय करती है।

I4C के बारे में:

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण इकाई है, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए एक समन्वित ढांचा और प्लेटफॉर्म प्रदान करती है। I4C ने नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), साइबर-पुलिस और सस्पेक्ट रजिस्ट्री जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जो विभिन्न एजेंसियों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम जानकारी साझा करने में सहायक हैं।

सी-डॉट और दिल्ली पुलिस के बीच समझौता, तकनीक आधारित स्मार्ट पुलिसिंग को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली- दूरसंचार विभाग (DoT) के अंतर्गत कार्यरत प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संस्था सी-डॉट (C-DOT) ने दिल्ली पुलिस के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य राजधानी में तकनीक आधारित, स्वदेशी और सुरक्षित पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत करना है।

इस समझौते के तहत सी-डॉट दिल्ली पुलिस को आधुनिक और उन्नत तकनीकी समाधान उपलब्ध कराएगा, जिससे पुलिस की संचार व्यवस्था, निगरानी प्रणाली, साइबर सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता में बड़ा सुधार होगा। यह कदम आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूती देता है।

समझौते के अंतर्गत नौ प्रमुख तकनीकों को लागू किया जाएगा। इनमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के जरिए संदिग्धों और लापता व्यक्तियों की पहचान आसान होगी। SAMVAD प्लेटफॉर्म सुरक्षित मैसेजिंग और कॉलिंग की सुविधा देगा, जबकि SAMVAD Prime वरिष्ठ अधिकारियों के लिए विशेष सुरक्षित संचार प्रणाली होगी।
इसके अलावा, C-DOT Meet के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, MCX प्लेटफॉर्म से आपात स्थितियों में त्वरित संचार, और इंटेलिजेंट अटेंडेंस सिस्टम से प्रशासनिक कार्यों में सुधार होगा।

साथ ही, सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम के जरिए जनता को आपातकालीन सूचनाएं तुरंत भेजी जा सकेंगी। साइबर सुरक्षा के लिए Trinetra ESOC और Trinetra 360 जैसे AI आधारित सिस्टम लगाए जाएंगे। वहीं, क्वांटम आधारित सुरक्षा समाधान पुलिस संचार को भविष्य के खतरों से सुरक्षित बनाएंगे।

इस अवसर पर सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय और दिल्ली पुलिस आयुक्त श्री सतीश गोलछा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। दोनों पक्षों ने इस साझेदारी को देश में तकनीक आधारित पुलिसिंग का एक मॉडल बताया।

यह समझौता दिल्ली को एक सुरक्षित, स्मार्ट और तकनीकी रूप से सक्षम शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

CERT-In ने 2025 में साइबर सुरक्षा में दिखाई मजबूती, 29.44 लाख से अधिक घटनाओं का सफलतापूर्वक प्रबंधन

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नई दिल्ली-भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और बढ़ते साइबर खतरों के बीच, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने 2025 में साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। CERT-In ने 2025 में 29.44 लाख से अधिक साइबर घटनाओं का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया और देश की साइबर प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूती से स्थापित किया।

सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत काम करने वाली CERT-In, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत कार्यरत है। यह राष्ट्रीय स्तर पर साइबर घटनाओं का नियंत्रण, जोखिम का आकलन, जागरूकता और सहयोग के माध्यम से डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

2025 में CERT-In की प्रमुख उपलब्धियाँ

साइबर घटनाओं का प्रबंधन और चेतावनियाँ

  • 2025 में CERT-In ने 29.44 लाख से अधिक साइबर घटनाओं को संभाला।

  • 1,530 चेतावनियाँ (Alerts), 390 Vulnerability Notes और 65 Advisories जारी किए गए।

  • 29 Common Vulnerabilities and Exposures (CVEs) की पहचान और प्रकाशन किया गया।

साइबर सुरक्षा ऑडिट क्षमता में वृद्धि

  • CERT-In ने 231 प्रमाणित साइबर सुरक्षा ऑडिट संगठनों को सूचीबद्ध (Empanel) किया।

  • इससे सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की ICT प्रणाली की सुरक्षा और मजबूत हुई।

  • अधिकांश ऑडिट बैंकिंग, वित्त, पावर, ऊर्जा और परिवहन क्षेत्रों में किए गए।

क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण

  • CERT-In ने 32 विशेष तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम और 95 जागरूकता सत्र आयोजित किए।

  • 20,799 अधिकारियों और साइबर सुरक्षा पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया गया।

साइबर ड्रिल और तैयारी अभ्यास

  • 2025 में CERT-In ने 122 साइबर सुरक्षा ड्रिल और अभ्यास आयोजित किए।

  • इसमें लगभग 1,570 संगठनों ने भाग लिया, जिनमें रक्षा, ऊर्जा, वित्त, परिवहन, दूरसंचार और IT/ITeS क्षेत्र शामिल हैं।

सार्वजनिक जागरूकता

  • CERT-In ने 95 जागरूकता सत्र आयोजित किए, जिनमें 91,065 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

  • अक्टूबर 2025 में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह (NCSAM) के अंतर्गत “Cyber Smart Kids: Suraksha Guide” और वरिष्ठ नागरिकों के लिए “Cybersecurity Best Practices” जैसी गाइडबुक प्रकाशित की गई।

Cyber Swachhta Kendra (CSK): 98% डिजिटल आबादी को कवरेज

CERT-In द्वारा संचालित Cyber Swachhta Kendra (CSK) ने देश में साइबर स्वच्छता को बढ़ावा दिया है। दिसंबर 2025 तक CSK ने 98% डिजिटल आबादी को कवर किया है।

  • 1,427 संगठनों को CSK से जोड़ा गया।

  • 89.55 लाख से अधिक बार मालवेयर हटाने के उपकरण डाउनलोड किए गए।

CSK का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार और मैलवेयर से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना है।

वैश्विक स्तर पर मान्यता: भारत की साइबर सुरक्षा नेतृत्व क्षमता

CERT-In की निरंतर कार्यशैली और AI-आधारित खतरा पहचान तकनीक को अंतरराष्ट्रीय मंचों ने भी सराहा है।

  • वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने CERT-In के AI-आधारित खतरा पहचान और साइबर खतरे साझा करने के मॉडल की प्रशंसा की।

  • ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और WEF द्वारा प्रकाशित ‘Cyber Resilience Compass’ रिपोर्ट में CERT-In को महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बताया गया।

  • फ्रांस की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी (ANSSI) द्वारा AI जोखिम आधारित दृष्टिकोण पर प्रकाशित रिपोर्ट में CERT-In को अंतरराष्ट्रीय साझेदार के रूप में शामिल किया गया।

निष्कर्ष

भारत की डिजिटल क्रांति के साथ साइबर खतरों में वृद्धि के बावजूद, CERT-In ने 2025 में अपने मजबूत और समन्वित सुरक्षा तंत्र से राष्ट्रीय साइबर प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया है। बड़े पैमाने पर घटनाओं का प्रबंधन, ऑडिटिंग, क्षमता निर्माण, जागरूकता और वैश्विक मान्यता ने CERT-In को भारत की साइबर सुरक्षा रणनीति का केंद्र बनाया है।

सरकार की यह प्रतिबद्धता देश के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित, विश्वसनीय और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


आईबी शताब्दी व्याख्यान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन: ‘जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा से विकसित भारत का निर्माण’

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज (23 दिसंबर 2025) नई दिल्ली में “People-Centric National Security: Community Participation in Building Viksit Bharat” (जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा: विकसित भारत के निर्माण में सामुदायिक सहभागिता) विषय पर आयोजित आईबी शताब्दी एंडॉवमेंट व्याख्यान को संबोधित किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि स्वतंत्रता के बाद से ही इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) भारत के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा देश की एकता और अखंडता की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस व्याख्यान का विषय देश के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आईबी सहित सभी संबंधित संस्थानों को यह जागरूकता फैलानी चाहिए कि राष्ट्रीय सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। सजग नागरिक राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सरकारी प्रयासों को मजबूत सहयोग प्रदान कर सकते हैं। जब नागरिक समुदाय के रूप में संगठित होते हैं, तो वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सरकार की पहलों को प्रभावी समर्थन दे सकते हैं। संविधान में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है, जिनमें से कई राष्ट्रीय सुरक्षा के व्यापक आयामों से जुड़े हैं। छात्र, शिक्षक, मीडिया, आवासीय कल्याण संघ, नागरिक समाज संगठन तथा अन्य अनेक समुदाय इन कर्तव्यों के प्रचार-प्रसार में भूमिका निभा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सामुदायिक सहभागिता राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ बनाती है। अनेक उदाहरण हैं, जब सजग नागरिकों ने समय पर सूचना देकर सुरक्षा संकट को टालने में पेशेवर बलों की मदद की है। राष्ट्रीय सुरक्षा की विस्तारित परिभाषा और रणनीति में जनता को केंद्र में रखा जाना चाहिए। नागरिकों को केवल मूक दर्शक नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने आसपास और उससे आगे के क्षेत्रों की सुरक्षा में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए। ‘जन भागीदारी’ जन-केंद्रित सुरक्षा की आधारशिला है।

राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिक पुलिस और आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों को जनता की सेवा की भावना के साथ कार्य करना चाहिए। यही सेवा भावना लोगों के बीच विश्वास पैदा करेगी, जो जन-केंद्रित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के विकास के लिए अनिवार्य है, जिसमें सामुदायिक सहभागिता एक प्रमुख तत्व होगी।

उन्होंने कहा कि भारत को बहु-आयामी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सीमा क्षेत्रों में तनाव, आतंकवाद और उग्रवाद, विद्रोह और साम्प्रदायिक कट्टरता पारंपरिक सुरक्षा चिंताएँ रही हैं। हाल के वर्षों में साइबर अपराध एक गंभीर सुरक्षा खतरे के रूप में उभरे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के किसी भी हिस्से में सुरक्षा की कमी का आर्थिक प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। सुरक्षा आर्थिक निवेश और विकास के प्रमुख कारकों में से एक है। ‘सुरक्षित भारत’ का निर्माण ‘समृद्ध भारत’ के लिए आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद लगभग समाप्ति की ओर है। उन्होंने बताया कि आंतरिक सुरक्षा से जुड़े बलों और एजेंसियों की गहन कार्रवाई इसके पीछे प्रमुख कारण रही है। साथ ही, समुदायों का विश्वास जीतने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया। जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देना उग्रवादी और विद्रोही समूहों द्वारा लोगों के शोषण के खिलाफ प्रभावी सिद्ध हुआ है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सोशल मीडिया ने सूचना और संचार की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। इसमें सृजन और विनाश—दोनों की क्षमता है। गलत सूचना से लोगों की रक्षा करना एक बड़ी चुनौती है, जिसे निरंतर और प्रभावी ढंग से किया जाना चाहिए। राष्ट्रीय हित में तथ्य-आधारित विमर्श प्रस्तुत करने वाले सक्रिय सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का एक समुदाय तैयार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे जटिल चुनौतियाँ गैर-पारंपरिक और डिजिटल प्रकृति की हैं, जिनमें से अधिकांश अत्याधुनिक तकनीकों से उत्पन्न होती हैं। ऐसे में तकनीकी रूप से सक्षम समुदायों का विकास आवश्यक है। डिजिटल धोखाधड़ी की बढ़ती समस्या के लिए घर, संस्थान और समुदाय—तीनों स्तरों पर सतर्कता जरूरी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों को फिशिंग, डिजिटल धोखाधड़ी और ऑनलाइन उत्पीड़न की रिपोर्ट करने में सक्षम बना सकते हैं और संबंधित एजेंसियों को रियल-टाइम डेटा उपलब्ध करा सकते हैं। इस डेटा के विश्लेषण से पूर्वानुमानात्मक पुलिसिंग मॉडल विकसित किए जा सकते हैं। सजग और सक्षम नागरिक समुदाय न केवल साइबर अपराधों के प्रति कम संवेदनशील होंगे, बल्कि इनके खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी कार्य करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि यदि नागरिक कल्याण और जन सहभागिता को रणनीति के केंद्र में रखा जाए, तो नागरिक प्रभावी खुफिया और सुरक्षा स्रोत बन सकते हैं। जन भागीदारी से प्रेरित यह परिवर्तन 21वीं सदी की जटिल और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहायक होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सार्वजनिक सहभागिता के माध्यम से हम सभी मिलकर एक सजग, शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध भारत के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेंगे।

बंदरगाहों और पोतों की सुरक्षा के लिए ‘ब्यूरो ऑफ पोर्ट सिक्योरिटी’ के गठन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पोतों और बंदरगाह सुविधाओं की सुरक्षा के लिए एक समर्पित निकाय ‘ब्यूरो ऑफ पोर्ट सिक्योरिटी (BoPS)’ के गठन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री तथा नागरिक उड्डयन मंत्री भी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देशभर में एक मजबूत और प्रभावी बंदरगाह सुरक्षा ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि सुरक्षा उपायों को ग्रेडेड और जोखिम-आधारित दृष्टिकोण के तहत लागू किया जाए, जिसमें बंदरगाहों की संवेदनशीलता, व्यापारिक क्षमता, भौगोलिक स्थिति और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखा जाए।

ब्यूरो ऑफ पोर्ट सिक्योरिटी (BoPS) का गठन नवप्रवर्तित मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 की धारा 13 के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय के रूप में किया जाएगा। यह ब्यूरो बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के अधीन कार्य करेगा और पोतों तथा बंदरगाह सुविधाओं की सुरक्षा से जुड़े नियामक एवं पर्यवेक्षणीय कार्यों के लिए उत्तरदायी होगा। BoPS की संरचना ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) की तर्ज पर की जाएगी।

BoPS का नेतृत्व पे लेवल-15 के एक आईपीएस अधिकारी द्वारा किया जाएगा। एक वर्ष की संक्रमण अवधि के दौरान डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग (DGS/DGMA), डायरेक्टर जनरल, BoPS के रूप में कार्य करेंगे।

BoPS सुरक्षा से संबंधित सूचनाओं के समयबद्ध विश्लेषण, संग्रह और आदान-प्रदान को भी सुनिश्चित करेगा। इसमें साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा तथा बंदरगाहों की आईटी अवसंरचना को डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखने के लिए एक समर्पित साइबर सुरक्षा प्रभाग की स्थापना की जाएगी।

बंदरगाह सुरक्षा अवसंरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को बंदरगाह सुविधाओं के लिए मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (Recognised Security Organisation – RSO) के रूप में नामित किया गया है। CISF बंदरगाहों के लिए सुरक्षा आकलन करने और सुरक्षा योजनाएं तैयार करने का दायित्व निभाएगा।

इसके साथ ही CISF को बंदरगाह सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षा एजेंसियों (PSAs) को प्रशिक्षण देने और उनकी क्षमता निर्माण का दायित्व भी सौंपा गया है। इन एजेंसियों का प्रमाणन किया जाएगा और यह सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त नियामक प्रावधान लागू किए जाएंगे कि इस क्षेत्र में केवल लाइसेंस प्राप्त निजी सुरक्षा एजेंसियां ही कार्य करें।

बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि समुद्री सुरक्षा ढांचे से प्राप्त अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को नागरिक उड्डयन सुरक्षा के क्षेत्र में भी अपनाया जाएगा, ताकि समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक मजबूत किया जा सके।

दूरसंचार धोखाधड़ी पर सख्त प्रावधान, ‘संचार साथी’ से नागरिकों की भागीदारी बढ़ी: डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर

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संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने आज लोकसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 की उप-धारा 42(3)(e) के तहत धोखाधड़ी, छल या व्यक्ति-भेषण (Personation) के माध्यम से सिम कार्ड या अन्य दूरसंचार पहचानकर्ता प्राप्त करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं।

मंत्री ने बताया कि दूरसंचार अधिनियम, 2023 की उप-धारा 42(3)(c) और 42(3)(f) के अंतर्गत दूरसंचार पहचानकर्ताओं के साथ छेड़छाड़ करना तथा यह जानते हुए भी ऐसे रेडियो उपकरणों को रखना या उपयोग करना, जिनमें अनधिकृत या छेड़छाड़ किए गए पहचानकर्ता हों, अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अतिरिक्त, टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर दूरसंचार उपकरण की विशिष्ट पहचान संख्या को हटाने, बदलने या उसमें छेड़छाड़ करने तथा ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर को रखने या उपयोग करने पर रोक लगाते हैं, जिनके बारे में जानकारी हो कि वे अवैध रूप से कॉन्फ़िगर किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने लाइसेंस शर्तों के माध्यम से यह अनिवार्य किया है कि सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाता (TSPs) किसी भी ग्राहक को सब्सक्राइबर के रूप में जोड़ने से पहले उसकी उचित पहचान और सत्यापन सुनिश्चित करें।

डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि DoT ने नागरिक-केंद्रित ‘संचार साथी’ पोर्टल और ऐप विकसित किया है, जिसके माध्यम से नागरिक अपने मोबाइल हैंडसेट की प्रामाणिकता अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान (IMEI) के जरिए जांच सकते हैं। दूरसंचार धोखाधड़ी को रोकने और डिजिटल सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘संचार साथी’ पहल के तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। IMEI सत्यापन से जुड़े व्याख्यात्मक वीडियो और इन्फोग्राफिक्स DoT के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके साथ ही, ‘संचार मित्र’ योजना शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत छात्र स्वयंसेवकों को डिजिटल सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और संचार साथी पोर्टल व ऐप के उपयोग के बारे में नागरिकों को जागरूक करने के लिए जोड़ा गया है। स्थानीय भाषाओं में संवाद के माध्यम से यह पहल जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने में मदद कर रही है।

नागरिकों तक पहुंच के लिए बहुभाषी समाचार लेख, विज्ञापन, सार्वजनिक स्थलों पर डिजिटल स्क्रीन और होर्डिंग्स, टीवी और रेडियो संदेश, DoT की फील्ड इकाइयों द्वारा स्थानीय गतिविधियां, टेलीकॉम कंपनियों के साथ एसएमएस अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जा रहा है।

मंत्री ने बताया कि ‘संचार साथी’ जनभागीदारी को भी बढ़ावा देता है, जिसके तहत नागरिक साइबर धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के संदिग्ध दुरुपयोग की रिपोर्ट कर सकते हैं। इससे अधिकारी और टेलीकॉम ऑपरेटर संदिग्ध नंबरों और फर्जी कनेक्शनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई कर पाते हैं, जिससे दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके और निर्दोष उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

सरकार का फोकस सुरक्षित साइबरस्पेस पर: CERT-In और NCIIPC के जरिए मजबूत की जा रही देश की डिजिटल सुरक्षा

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नई दिल्ली- भारत सरकार सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह साइबरस्पेस सुनिश्चित करने के लिए निरंतर सतर्कता के साथ काम कर रही है। देश की डिजिटल अवसंरचना पर साइबर खतरों को देखते हुए भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम (CERT-In) और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC) चौबीसों घंटे डिजिटल सेवाओं और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा में जुटे हैं।

CERT-In और NCIIPC साइबर घटनाओं की नियमित निगरानी करते हैं, त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करते हैं और सेवाओं की बहाली में सहयोग करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत सुरक्षा और भेद्यता ऑडिट किए जाते हैं। इसी कड़ी में जुलाई 2025 में CERT-In ने समग्र साइबर सुरक्षा ऑडिट नीति दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत सभी क्षेत्रों—विशेषकर महत्वपूर्ण अवसंरचना—में वर्ष में कम से कम एक बार साइबर सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया गया है। इसके लिए 231 सुरक्षा ऑडिट संगठनों को पैनल में शामिल किया गया है।

सरकार ने रैनसमवेयर और सीमा-पार साइबर अपराधों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। CERT-In को आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 70B के तहत राष्ट्रीय नोडल एजेंसी घोषित किया गया है, जो नवीनतम साइबर खतरों पर अलर्ट और एडवाइजरी जारी करता है तथा प्रभावित संस्थानों को सुधारात्मक उपायों की सलाह देता है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों और राष्ट्रीय डेटा केंद्रों की वार्षिक सुरक्षा ऑडिट कराई जाती है, साथ ही एआई/एमएल आधारित उन्नत टूल्स से 24×7 निगरानी, ज़ीरो ट्रस्ट सुरक्षा, एंडपॉइंट प्रोटेक्शन और पुराने सिस्टम्स को हटाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

इसके अलावा, CERT-In का स्वचालित साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विभिन्न क्षेत्रों के संगठनों के साथ रियल-टाइम अलर्ट साझा करता है। साइबर मॉक ड्रिल, सेक्टर-विशिष्ट CSIRT (जैसे CSIRT-Fin, CSIRT-Power), साइबर क्राइसिस मैनेजमेंट प्लान (CCMP) और 213 संवेदनशीलता कार्यशालाओं के जरिए तैयारियों को और मजबूत किया गया है।

साइबर प्रतिभा विकास के लिए ISEA कार्यक्रम, CSPAI (AI सुरक्षा) प्रमाणन, और साइबर स्वच्छता केंद्र (CSK) के माध्यम से नागरिकों व संगठनों को मुफ्त टूल्स, सलाह और जागरूकता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 17 दिसंबर 2025 को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

आधार डेटा पूरी तरह सुरक्षित, अब तक कोई ब्रीच नहीं: लोकसभा में सरकार का स्पष्ट बयान

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आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली के रूप में एक नया रिकॉर्ड स्थापित कर चुका है। देश में लगभग 134 करोड़ जीवित आधार धारक हैं और अब तक 16,000 करोड़ से अधिक आधार प्रमाणीकरण लेनदेन सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं।

आधार जारी करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार धारकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक और बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब तक UIDAI के डेटाबेस से किसी भी प्रकार का डेटा ब्रीच नहीं हुआ है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 17 दिसंबर 2025 को लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि UIDAI ने डिफेंस-इन-डेप्थ अवधारणा पर आधारित मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। आधार डेटा के प्रसारण और भंडारण के दौरान उन्नत एन्क्रिप्शन तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है।

UIDAI की सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली को STQC द्वारा ISO 27001:2022 और प्राइवेसी इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के लिए ISO/IEC 27701:2019 का प्रमाणन प्राप्त है। इसके अलावा, UIDAI को संरक्षित प्रणाली घोषित किया गया है, जिससे राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र (NCIIPC) द्वारा लगातार साइबर सुरक्षा परामर्श दिया जाता है।

आधार पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी के लिए स्वतंत्र ऑडिट एजेंसी के माध्यम से गवर्नेंस, रिस्क और कंप्लायंस फ्रेमवर्क लागू किया गया है। साथ ही, UIDAI अपने सभी अनुप्रयोगों का नियमित रूप से साइबर सुरक्षा ऑडिट करता है, जिसमें स्टैटिक और डायनामिक एप्लिकेशन सिक्योरिटी टेस्टिंग शामिल है।

सरकार ने दोहराया कि आधार प्रणाली न केवल तकनीकी रूप से सशक्त है, बल्कि नागरिकों की निजता और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, जिससे डिजिटल इंडिया के प्रति लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

भारतीय रेल आरक्षण प्रणाली को और सुरक्षित व पारदर्शी बनाने हेतु व्यापक सुधार लागू

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भारतीय रेल की आरक्षण टिकट बुकिंग प्रणाली एक मजबूत और अत्यंत सुरक्षित आईटी प्लेटफ़ॉर्म है, जिसमें उद्योग-मानक, अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा नियंत्रण व्यवस्थित हैं। भारतीय रेल ने आरक्षण प्रणाली के प्रदर्शन और नियमित/तत्काल टिकटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:

1. संदिग्ध यूज़र आईडी निष्क्रिय

जनवरी 2025 से अब तक लगभग 3.02 करोड़ संदिग्ध यूज़र आईडी निष्क्रिय कर दी गई हैं।

2. एंटी-बॉट समाधान लागू

ग़ैर-प्रामाणिक उपयोगकर्ताओं को फ़िल्टर करने और वास्तविक यात्रियों को सुचारू टिकट बुकिंग सुनिश्चित करने के लिए AKAMAI जैसे एंटी-बॉट समाधान लागू किए गए हैं।

3. ऑनलाइन तत्काल टिकट के लिए आधार-आधारित OTP

तत्काल टिकट बुकिंग में दुरुपयोग रोकने और पारदर्शिता बढ़ाने हेतु, आधार-आधारित OTP सत्यापन चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है।
04.12.2025 तक यह सुविधा 322 ट्रेनों में चालू है।
इससे इन ट्रेनों में लगभग 65% मामलों में कन्फर्म तत्काल टिकट उपलब्धता समय बढ़ा है।

4. आरक्षण काउंटरों पर आधार-आधारित OTP

काउंटर बुकिंग में भी आधार-आधारित OTP लागू किया गया है और 04.12.2025 तक 211 ट्रेनों में इसे लागू किया जा चुका है।

5. लोकप्रिय ट्रेनों में सुधार

96 लोकप्रिय ट्रेनों में लगभग 95% मामलों में कन्फर्म तत्काल टिकट उपलब्धता समय बढ़ा है।

6. संदिग्ध PNR मामलों पर कार्रवाई

संदिग्ध रूप से बुक किए गए PNR के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायतें दर्ज की गई हैं।

7. बहु-स्तरीय साइबर सुरक्षा अवसंरचना

रेलवे आरक्षण प्रणाली कई सुरक्षा परतों से सुसज्जित है—

  • नेटवर्क फ़ायरवॉल

  • इंट्रूज़न प्रिवेंशन सिस्टम

  • एप्लिकेशन डिलीवरी कंट्रोलर

  • वेब एप्लिकेशन फ़ायरवॉल

  • एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन

  • निगरानी के लिए CCTV
    डेटा सेंटर पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड है और ISO 27001 ISMS प्रमाणित है।

8. RailTel द्वारा साइबर सुरक्षा सेवाएँ

RailTel उभरते साइबर ख़तरों से निपटने के लिए निम्न सेवाएँ प्रदान करता है:

  • थ्रेट इंटेलिजेंस

  • डीप और डार्क वेब निगरानी

  • डिज़िटल रिस्क प्रोटेक्शन

  • टेक-डाउन सेवाएँ

9. नियमित सुरक्षा ऑडिट

CERT-In द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसियों से नियमित सुरक्षा ऑडिट किया जाता है।
CERT-In और NCIIPC लगातार टिकटिंग सिस्टम से जुड़े इंटरनेट ट्रैफ़िक की निगरानी करते हैं।

10. सुझावों पर कार्रवाई

जनप्रतिनिधियों, संगठनों और रेल उपयोगकर्ताओं से प्राप्त सुझावों पर समय-समय पर समीक्षा कर उपयुक्त कार्रवाई की जाती है। इनका केंद्रीकृत संकलन नहीं रखा जाता क्योंकि यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।

यह जानकारी रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लोकसभा में लिखित उत्तर में दी गई।

केंद्र और राज्यों की संयुक्त पहल: साइबर अपराध से निपटने के लिए देशभर में साइबर पुलिस स्टेशनों का तेज़ विस्तार

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‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्य सूची के विषय हैं। इसलिए अपराधों की रोकथाम, पता लगाना, जाँच और अभियोजन, तथा साइबर अपराधों से निपटने के लिए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की स्थापना का दायित्व मुख्य रूप से राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) का है। केंद्र सरकार राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह जारी करके और विभिन्न योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्रदान कर उनकी क्षमता-वृद्धि में सहयोग करती है।

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPR&D) अपनी रिपोर्ट “Data on Police Organizations” में साइबर सेल और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों का वार्षिक डाटा प्रकाशित करता है। नवीनतम रिपोर्ट वर्ष 2024 की है। पिछले पाँच वर्षों में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में कुल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की संख्या 169 (2020) से बढ़कर 459 (2024) हो गई है। विस्तृत विवरण परिशिष्ट में दिया गया है।

साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख पहलें

1. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की स्थापना

गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समग्र और समन्वित तरीके से निपटने के लिए I4C की स्थापना की है।

2. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP)

  • वेबसाइट: cybercrime.gov.in

  • सभी प्रकार के साइबर अपराध, विशेषकर महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग हेतु बनाया गया है।

  • यहाँ दर्ज शिकायतों पर आगे की कार्रवाई संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश की एजेंसियाँ करती हैं।

3. नागरिक वित्तीय साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS)

  • वर्ष 2021 में शुरू की गई।

  • वित्तीय धोखाधड़ी की त्वरित रिपोर्टिंग और फंड्स को फ्रीज कराने में मदद करती है।

  • इसके लिए हेल्पलाइन 1930 संचालित की गई है।

4. साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर (CFMC)

  • I4C में स्थापित अत्याधुनिक केंद्र।

  • इसमें विभिन्न बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटरों, टेलीकॉम, आईटी इंटरमीडियरीज और राज्यों की LEAs के प्रतिनिधि मिलकर कार्य करते हैं।

5. संयुक्त साइबर समन्वय टीमें (JCCTs)

मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापट्टनम और गुवाहाटी — इन सात क्षेत्रों में साइबर अपराध हॉटस्पॉट्स को ध्यान में रखते हुए JCCTs स्थापित की गई हैं।

6. ‘समन्वय’ प्लेटफ़ॉर्म

  • यह MIS, डेटा रिपॉजिटरी और समन्वय मंच है।

  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए साइबर अपराध डेटा, विश्लेषण और इंटरस्टेट लिंक तैयार करता है।

  • इसके माध्यम से अब तक 16,840 आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हुई है और 1,05,129 साइबर जाँच सहायता अनुरोध पूरे किए गए हैं।

7. राज्यों में S4C/R4C केंद्र

  • राज्यों को I4C की तर्ज पर S4C/R4C स्थापित करने का अनुरोध किया गया है।

  • अब तक बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में S4C स्थापित हो चुके हैं।

परिशिष्ट: राज्य/केंद्रशासित प्रदेश अनुसार साइबर क्राइम पुलिस स्टेशनों की संख्या (2020–2024)

कुल संख्या: 169 (2020) → 459 (2024)
(डेटा: BPR&D — Data on Police Organizations, 2020–2024)

यह जानकारी गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने लोकसभा में लिखित उत्तर के रूप में दी।


NMDC और IIT कानपुर ने साइबर सुरक्षा तथा AI–ML तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर किए

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उद्योग–शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी NMDC ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का उद्देश्य साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नई पहलों को बढ़ावा देना और NMDC के संचालन में आधुनिक डिजिटल तकनीकों—विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML)—को अपनाने को प्रोत्साहित करना है।

यह MoU NMDC की ओर से कार्यकारी निदेशक (डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन) सत्येंद्र राय और IIT कानपुर की ओर से अनुसंधान एवं विकास डीन प्रो. अशोक डे द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। इस अवसर पर IIT कानपुर के निदेशक प्रो. मनिंद्र अग्रवाल, NMDC के वरिष्ठ अधिकारी और IIT कानपुर के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

इस साझेदारी के माध्यम से NMDC और IIT कानपुर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिलकर कार्य करेंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • साइबर सुरक्षा जोखिम आकलन

  • नीति, शासन और अनुपालन समर्थन

  • AI और ML तकनीकों का एकीकरण और प्रगति

  • सुरक्षा संचालन और घटनाओं पर प्रतिक्रिया

  • क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण

  • संयुक्त शोध और नवाचार

इसके अलावा, दोनों संस्थान संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे, शोध कार्य करेंगे, पायलट प्रोजेक्ट चलाएंगे और प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट समाधान विकसित करेंगे।

सहयोग पर टिप्पणी करते हुए NMDC के CMD, अमिताभ मुखर्जी ने कहा,

“यह MoU IIT कानपुर की उन्नत शोध क्षमताओं को NMDC के व्यापक संचालन तंत्र से जोड़ता है। यह सहयोग हमें हमारी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने, संचालन संबंधी इंटेलिजेंस बढ़ाने और एक सुरक्षित व भविष्य-उन्मुख तकनीकी आधार बनाने में मदद करेगा।”

यह MoU दर्शाता है कि NMDC एक डिजिटल रूप से सशक्त और भविष्य के लिए तैयार खनन संगठन बनने के लिए प्रतिबद्ध है।


केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का स्पष्टीकरण: संचार साथी ऐप पूरी तरह वैकल्पिक, सुरक्षित और उपभोक्ता केंद्रित

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संचार साथी ऐप को लेकर स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह लोकतांत्रिक और पूरी तरह स्वैच्छिक (voluntary) है। उपयोगकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार ऐप को सक्रिय कर सकते हैं और चाहें तो कभी भी इसे निष्क्रिय या हटा सकते हैं।

उपभोक्ता केंद्रित, सुरक्षित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म

सिंधिया ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और संचार साथी ऐप हर मोबाइल उपयोगकर्ता को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा:

“संचार साथी एक ऐप और पोर्टल दोनों है, जो नागरिकों को पारदर्शी और आसान टूल्स के माध्यम से खुद को सुरक्षित करने में सक्षम बनाता है। यह जनभागीदारी की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें नागरिक अपने डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।”

संचार साथी के प्रभाव और प्रमुख उपलब्धियाँ

लॉन्च के बाद से संचार साथी ने बड़े पैमाने पर प्रभाव डाला है:

  • 21.5 करोड़+ पोर्टल विज़िट

  • 1.4 करोड़+ ऐप डाउनलोड

  • 1.43 करोड़+ मोबाइल कनेक्शन नागरिकों द्वारा “Not My Number” चुनने पर डिस्कनेक्ट

  • 26 लाख खोए/चोरी हुए मोबाइल फोन ट्रेस किए गए

    • इनमें से 7.23 लाख फोन सफलतापूर्वक लौटाए गए

  • 40.96 लाख फर्जी कनेक्शन नागरिकों की रिपोर्ट के आधार पर डिस्कनेक्ट

  • 6.2 लाख फ्रॉड-लिंक्ड IMEI ब्लॉक

  • ₹475 करोड़ की संभावित वित्तीय धोखाधड़ी रोकी गई Financial Fraud Risk Indicator (FRI) के माध्यम से

साइबर सुरक्षा और नागरिक संरक्षण सर्वोपरि

संचार साथी में उपयोगकर्ताओं को कॉल लॉग से सीधे संदिग्ध धोखाधड़ी रिपोर्ट करने की सुविधा है, जिससे नागरिक स्वयं और दूसरों को डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रख सकते हैं।

 सिंधिया ने कहा:

“हर नागरिक की डिजिटल सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। संचार साथी स्वैच्छिक, पारदर्शी और पूरी तरह नागरिक सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इसे कभी भी सक्रिय, निष्क्रिय या हटाया जा सकता है—सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए गोपनीयता से समझौता किए बिना।”


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