Media24Media.com: कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, 315 जिलों की पहचान

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कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, 315 जिलों की पहचान

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नई दिल्ली- देश में इस वर्ष एल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICAR-CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।


बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून में काफी देरी हुई है और अब तक सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई की शुरुआत तक भी वर्षा कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।

315 जिले चिन्हित, 111 सबसे अधिक संवेदनशील

कृषि मंत्रालय और ICAR द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर देश के 315 जिलों को कमजोर मानसून से प्रभावित होने की आशंका वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है।

  • 111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में

  • 76 जिले मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में

  • 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में

ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित हैं।

हर जिले के लिए तैयार की गई विशेष योजना

सरकार ने सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजना (District Agriculture Contingency Plan) तैयार की है। इसमें कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर तुरंत लागू की जाएं।


जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

इसके तहत:

  • तालाबों और जलाशयों की मरम्मत

  • चेक डैम और स्टॉप डैम निर्माण

  • वर्षा जल संचयन

  • मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण कार्य

को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह

सरकार ने किसानों को कम पानी वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से:

  • दालें

  • श्री अन्न (मिलेट्स)

  • तिलहन फसलें

को बढ़ावा दिया जाएगा।

साथ ही अंतरफसल (Intercropping) और मिश्रित खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि किसी एक फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों की आय प्रभावित न हो।

बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज और उर्वरक उपलब्ध हैं।

  • अतिरिक्त बीज भंडार सुरक्षित रखा गया है।

  • पुनः बुवाई की स्थिति के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

  • यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है।

किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन

देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों को मौसम और फसलों से संबंधित वैज्ञानिक सलाह देंगे।

इसके लिए:

  • एसएमएस

  • व्हाट्सएप संदेश

  • कॉल सेंटर

  • रेडियो और टीवी

  • सोशल मीडिया

का उपयोग किया जाएगा ताकि किसानों तक समय पर सही जानकारी पहुंच सके।

पशुपालकों के लिए भी तैयारी

कमजोर मानसून के कारण चारे की कमी की आशंका को देखते हुए सरकार ने अग्रिम योजना तैयार की है। जरूरत पड़ने पर चारा अधिशेष क्षेत्रों से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच

सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)

का अधिकतम लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

किसानों से अपील: घबराएं नहीं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा,

"घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह तैयार हैं। वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासन और किसानों के सहयोग से हर चुनौती का सामना किया जाएगा।"


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