Media24Media.com: #Rainfall

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #Rainfall. Show all posts
Showing posts with label #Rainfall. Show all posts

देशभर में भारी बारिश का अलर्ट: कई राज्यों में मूसलाधार वर्षा की चेतावनी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। गुजरात, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

प्रशासन ने संबंधित जिलों में आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है। नागरिकों से मौसम की ताज़ा जानकारी पर नज़र रखने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।

खण्ड एवम अल्प वर्षा की संभावनाओं के बीच किसानों से सरकार का अपील

No comments Document Thumbnail

धान की खेती रोपा पद्धति के बजाय सीधी बुवाई पर दे विशेष जोर

डीएसआर तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की होती है बचत, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले हो जाती है तैयार

उच्चहन भूमि में दलहनी-तिलहनी अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सोयाबीन जैसी फसलों की खेती अपनाने की सलाह

रायपुर- खरीफ सीजन 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मानसून के देर से आने, जल्दी समाप्त होने तथा फसल अवधि के दौरान लंबे अंतराल तक वर्षा नहीं होने (खण्ड वर्षा) एवम् अल्प की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के किसानों के लिए सामान्य आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। इस कार्ययोजना का उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों की फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उत्पादन बनाए रखना तथा खेती की लागत कम करना है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है, ताकि वर्षा की अनिश्चितता का प्रभाव कम किया जा सके। धान की खेती में रोपा पद्धति के बजाय धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है। इस तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।

राज्य सरकार ने किसानों को वर्षा शुरू होने से पहले खेतों एवं मेड़ों की सफाई, समय पर जुताई तथा खेतों में मेडबंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करने की सलाह दी है, ताकि उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग किया जा सके। कम वर्षा की संभावना को देखते हुए उच्चहन भूमि में धान के स्थान पर अरहर, मूंग एवं उड़द जैसी दलहनी तथा मूंगफली, तिल, रामतिल एवं सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी गई है। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम मानी जाती हैं, जिससे किसानों का जोखिम कम हो सकता है। फसलों की कतार पद्धति से बुवाई पर भी बल दिया गया है। इससे खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण तथा पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है, जिससे सूखे की स्थिति में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।

किसानों को बुवाई से पहले बीज उपचार अनिवार्य रूप से करने की सलाह दी गई है। इसके तहत कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, थायमेथोक्साम-इमिडाक्लोप्रिड 1.5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज तथा धान के लिए एजोस्थिरिलम, अन्य फसलों के लिए एजोटोबेक्टर और दलहनी फसलों के लिए राइजोबियम (10 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज) के उपयोग की सलाह दी गई है। यदि 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है, तो किसानों को पुनः बुवाई करते समय सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई तथा अगस्त में तिल, सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का सुझाव दिया गया है।

कम वर्षा की स्थिति में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया है। नत्रजन उर्वरकों का सीमित उपयोग करते हुए 2 प्रतिशत यूरिया घोल का पर्णीय छिड़काव अथवा प्रति एकड़ 2 बोतल नैनो यूरिया का उपयोग अधिक लाभकारी रहेगा। वहीं दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बुवाई के लगभग एक माह बाद 2 प्रतिशत डीएपी घोल के पर्णीय छिड़काव करने को कहा गया है।

सरकार ने गांवों में नालों पर सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर अस्थायी बांध बनाने, डबरियों, तालाबों एवं कुओं में वर्षा जल संग्रह करने तथा आवश्यकता पड़ने पर इस संचित जल का जीवन रक्षक सिंचाई के रूप में उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही किसानों से मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्य करने, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से खेती के जोखिम को कम करने की अपील की गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि खरीफ 2026 में वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो किसानों के लिए कम अवधि वाली धान की किस्मों के साथ-साथ अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलें अपेक्षाकृत अधिक लाभकारी विकल्प साबित हो सकती हैं। राज्य सरकार ने किसानों से कृषि संबंधी किसी भी कठिनाई की स्थिति में निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केन्द्र, कृषि विज्ञान केन्द्र एवं कृषि विभाग से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह लेने की अपील की है।

प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती-किसानी में तेजी

No comments Document Thumbnail

राज्य में 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी पूर्ण

इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का है लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सुगमता से मिले खाद-बीज

किसानों को 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

प्रदेश में अब तक 96.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी

रायपुर- प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य तेजी के साथ शुरू हो गया है। राज्य में अब तक 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 

प्रदेश के किसानों को अब तक 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 7.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 10 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 02 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 96.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है।  

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 4.30 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 3.09 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 62 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 2.67 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था। इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 7.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 47 प्रतिशत है।   

अधिकारियों बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। खरीफ सीजन 2026 के लिए 30 जून की स्थिति में 5525 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 4517 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, 315 जिलों की पहचान

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- देश में इस वर्ष एल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICAR-CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।


बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून में काफी देरी हुई है और अब तक सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई की शुरुआत तक भी वर्षा कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।

315 जिले चिन्हित, 111 सबसे अधिक संवेदनशील

कृषि मंत्रालय और ICAR द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर देश के 315 जिलों को कमजोर मानसून से प्रभावित होने की आशंका वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है।

  • 111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में

  • 76 जिले मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में

  • 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में

ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित हैं।

हर जिले के लिए तैयार की गई विशेष योजना

सरकार ने सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजना (District Agriculture Contingency Plan) तैयार की है। इसमें कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर तुरंत लागू की जाएं।


जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

इसके तहत:

  • तालाबों और जलाशयों की मरम्मत

  • चेक डैम और स्टॉप डैम निर्माण

  • वर्षा जल संचयन

  • मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण कार्य

को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह

सरकार ने किसानों को कम पानी वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से:

  • दालें

  • श्री अन्न (मिलेट्स)

  • तिलहन फसलें

को बढ़ावा दिया जाएगा।

साथ ही अंतरफसल (Intercropping) और मिश्रित खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि किसी एक फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों की आय प्रभावित न हो।

बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज और उर्वरक उपलब्ध हैं।

  • अतिरिक्त बीज भंडार सुरक्षित रखा गया है।

  • पुनः बुवाई की स्थिति के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

  • यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है।

किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन

देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों को मौसम और फसलों से संबंधित वैज्ञानिक सलाह देंगे।

इसके लिए:

  • एसएमएस

  • व्हाट्सएप संदेश

  • कॉल सेंटर

  • रेडियो और टीवी

  • सोशल मीडिया

का उपयोग किया जाएगा ताकि किसानों तक समय पर सही जानकारी पहुंच सके।

पशुपालकों के लिए भी तैयारी

कमजोर मानसून के कारण चारे की कमी की आशंका को देखते हुए सरकार ने अग्रिम योजना तैयार की है। जरूरत पड़ने पर चारा अधिशेष क्षेत्रों से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच

सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)

का अधिकतम लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

किसानों से अपील: घबराएं नहीं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा,

"घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह तैयार हैं। वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासन और किसानों के सहयोग से हर चुनौती का सामना किया जाएगा।"


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.