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मानसून में देरी से घबराएं नहीं, समय पर करें धान की बोआई-रोपाई : कृषि वैज्ञानिक

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रायपुर-  प्रदेश में इस वर्ष मानसून सामान्य से कुछ देर से पहुंचा है, लेकिन किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के वैज्ञानिकों ने कहा है कि अभी भी धान की खेती के लिए पर्याप्त समय है। मौसम को देखते हुए किसानों को कुछ जरूरी कृषि सलाह जारी की गई है।

वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून लगभग 10 दिन देर से आया। जून माह में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा हुई, लेकिन अब प्रदेश के सभी हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। मौसम विभाग के अनुसार 8 जुलाई तक राज्य में अच्छी वर्षा होने की संभावना है।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान 15 जुलाई तक धान की सीधी बुआई तथा 30 जुलाई तक रोपाई और बियासी का कार्य कर सकते हैं। यदि किसी कारणवश थोड़ा विलंब भी हो जाए और हरेली (12 अगस्त) तक बोआई-रोपाई करनी पड़े, तब भी फसल पर अधिक असर नहीं पड़ेगा।

मानसून में देरी को देखते हुए किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों, जैसे इन्द्रावती, बस्तर धान-1, छत्तीसगढ़ बारानी धान, इंदिरा एरोबिक धान, एमटीयू-1010, एमटीयू-1153, एमटीयू-1156, एमटीयू-1001, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान और महामाया का उपयोग करने की सलाह दी गई है। किसानों से कहा गया है कि बुआई से पहले बीज का फफूंदनाशक दवा से उपचार अवश्य करें और जैव उर्वरकों का भी उपयोग करें। इससे फसल स्वस्थ रहती है और उत्पादन बढ़ता है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि धान की सीधी बुआई में खरपतवार (खरपतवार/घास) बड़ी समस्या होती है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन में भारी कमी आ सकती है। इसलिए बुआई के बाद पहले 40 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है। इसके लिए हाथ से निंदाई, पैडी वीडर या कृषि विभाग द्वारा अनुशंसित खरपतवारनाशकों का उपयोग किया जा सकता है।

उर्वरक प्रबंधन को लेकर किसानों को सलाह दी गई है कि प्रति एकड़ अधिकतम दो बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी का ही उपयोग करें। डीएपी की पूरी मात्रा बुआई या रोपाई के समय दें, जबकि यूरिया की पहली खुराक 30 से 35 दिन बाद और दूसरी खुराक 60 से 70 दिन बाद दें। साथ ही हरी खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियों में किसानों के लिए यूरिया, डीएपी, एनपीके, सिंगल सुपर फॉस्फेट और पोटाश का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है। किसानों को आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान सेवाओं के संचालक डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी ने किसानों से अपील की है कि खेती से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या के समाधान के लिए अपने निकटतम कृषि विज्ञान केन्द्र, कृषि अनुसंधान केन्द्र, कृषि महाविद्यालय अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें। विश्वविद्यालय द्वारा समय-समय पर किसानों के लिए आवश्यक तकनीकी सलाह जारी की जा रही है।

प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती-किसानी में तेजी

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राज्य में 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी पूर्ण

इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का है लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सुगमता से मिले खाद-बीज

किसानों को 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

प्रदेश में अब तक 96.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी

रायपुर- प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य तेजी के साथ शुरू हो गया है। राज्य में अब तक 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 

प्रदेश के किसानों को अब तक 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 7.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 10 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 02 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 96.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है।  

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 4.30 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 3.09 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 62 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 2.67 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था। इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 7.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 47 प्रतिशत है।   

अधिकारियों बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। खरीफ सीजन 2026 के लिए 30 जून की स्थिति में 5525 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 4517 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

छत्तीसगढ़ में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और राज्य के अधिकांश हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आगामी दिनों में कई जिलों में मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

राजधानी रायपुर सहित दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, महासमुंद, बलौदाबाजार, धमतरी, कांकेर, बस्तर और सरगुजा संभाग के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना जताई गई है। लगातार हो रही वर्षा से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता किसानों के लिए राहत लेकर आई है। समय पर और पर्याप्त वर्षा से धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी तथा सिंचाई पर निर्भरता कम होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान खेतों की तैयारी और रोपाई कार्य में जुट गए हैं।

हालांकि, मौसम विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव, तेज हवाओं और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की है। प्रशासन ने भी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले 48 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में मानसून और अधिक सक्रिय हो सकता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में भारी से अति भारी वर्षा दर्ज होने की संभावना है।


कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, 315 जिलों की पहचान

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नई दिल्ली- देश में इस वर्ष एल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICAR-CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।


बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून में काफी देरी हुई है और अब तक सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई की शुरुआत तक भी वर्षा कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।

315 जिले चिन्हित, 111 सबसे अधिक संवेदनशील

कृषि मंत्रालय और ICAR द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर देश के 315 जिलों को कमजोर मानसून से प्रभावित होने की आशंका वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है।

  • 111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में

  • 76 जिले मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में

  • 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में

ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित हैं।

हर जिले के लिए तैयार की गई विशेष योजना

सरकार ने सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजना (District Agriculture Contingency Plan) तैयार की है। इसमें कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर तुरंत लागू की जाएं।


जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

इसके तहत:

  • तालाबों और जलाशयों की मरम्मत

  • चेक डैम और स्टॉप डैम निर्माण

  • वर्षा जल संचयन

  • मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण कार्य

को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह

सरकार ने किसानों को कम पानी वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से:

  • दालें

  • श्री अन्न (मिलेट्स)

  • तिलहन फसलें

को बढ़ावा दिया जाएगा।

साथ ही अंतरफसल (Intercropping) और मिश्रित खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि किसी एक फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों की आय प्रभावित न हो।

बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज और उर्वरक उपलब्ध हैं।

  • अतिरिक्त बीज भंडार सुरक्षित रखा गया है।

  • पुनः बुवाई की स्थिति के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

  • यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है।

किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन

देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों को मौसम और फसलों से संबंधित वैज्ञानिक सलाह देंगे।

इसके लिए:

  • एसएमएस

  • व्हाट्सएप संदेश

  • कॉल सेंटर

  • रेडियो और टीवी

  • सोशल मीडिया

का उपयोग किया जाएगा ताकि किसानों तक समय पर सही जानकारी पहुंच सके।

पशुपालकों के लिए भी तैयारी

कमजोर मानसून के कारण चारे की कमी की आशंका को देखते हुए सरकार ने अग्रिम योजना तैयार की है। जरूरत पड़ने पर चारा अधिशेष क्षेत्रों से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच

सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)

का अधिकतम लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

किसानों से अपील: घबराएं नहीं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा,

"घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह तैयार हैं। वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासन और किसानों के सहयोग से हर चुनौती का सामना किया जाएगा।"


खरीफ सीजन से पहले सरकार सतर्क: कृषि मंत्री की अहम समीक्षा बैठक

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज अपने निवास पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों की रक्षा करना तथा आगामी खरीफ सीजन के लिए रणनीतिक तैयारी सुनिश्चित करना था।

बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे संकट के समय सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाएं।

बैठक के प्रमुख बिंदु और निर्णय:

उर्वरक आपूर्ति और किसान आईडी

शिवराज सिंह चौहान ने उर्वरकों की समान और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए ‘किसान आईडी’ के कार्य को तेज करने के निर्देश दिए। साथ ही, उन्होंने बताया कि इस विषय पर जल्द ही विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ बैठक की जाएगी।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई

वैश्विक संकट का लाभ उठाकर उर्वरक और बीजों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकारों को भी सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

बीज उत्पादन और पैकेजिंग सहायता

बैठक में कृषि-रसायनों और बीज सुखाने (ड्राइंग सीड) के लिए आवश्यक गैसों की उपलब्धता की समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए पैकेजिंग सामग्री की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ समन्वय के निर्देश दिए गए।

विशेष प्रकोष्ठ (Special Cell) का गठन

कृषि क्षेत्र की 24x7 निगरानी के लिए एक ‘विशेष प्रकोष्ठ’ का गठन किया गया है। यह प्रकोष्ठ उर्वरक, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता पर साप्ताहिक रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपेगा।

अंत में,शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को सभी आवश्यक कृषि संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।

जिले में धान खरीदी ने पकड़ी रफ्तार

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अब 123 उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी शुरू, 01 लाख 44 हजार 506 क्विंटल धान खरीदा गया

महासमुंद- राज्य शासन के मंशानुरूप खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 अंतर्गत कृषक उन्नति योजना के तहत जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बिना किसी रुकावट के तेजी से जारी है। जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का आज 7वां दिन हैं। जिले के 130 समितियों के 182 उपार्जन केन्द्रों में से 123 केन्द्रों में आज दिनांक तक एक लाख 44 हजार 506.80 क्विंटल धान की खरीदी की गई है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन में जिन केन्द्रों में धान खरीदी की शुरुआत नहीं हुई है लगभग उन सभी उपार्जन केंद्रों में किसानों से निर्बाध रूप से धान खरीदने की पूरी तैयारी की गई है।

जिले में किसान उत्साह से धान खरीदी केंद्रों में धान लेकर पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में आज प्राथमिक सहकारी समिति बेमचा में धान बेचने आए कृषक प्रहलाद चंद्राकर एवं देवेन्द्र साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में किसानों के हित में उठाए गए कदमों से हमें भरोसा मिल रहा है कि हमारा धान उचित मूल्य पर सुरक्षित तरीके से खरीदी जाएगा। उन्होंने बताया कि खरीदी केन्द्र में व्यवस्था बेहतर और खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी है। वे बताते है कि बिना किसी परेशानी के उन्होंने धान का विक्रय किया। उन्होंने सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं और सहयोग के लिए शासन एवं प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित किया।

उत्साह पूर्वक धान बेचने पहुंच रहे हैं किसान

टोकन तुहर हाथ मोबाइल एप से आसानी से कट रहा है टोकन- किसान प्रहलाद एवं देवेन्द्र

ग्राम कौंदकेरा के किसान प्रह्लाद चंद्राकर ने कहा कि सरकार धान खरीदी में किसानों का पूरा ध्यान रख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी मोबाइल ऐप द्वारा घर में टोकन काटा गया।  उन्होंने बताया कि आज 550 कट्टा धान बेमचा मंडी में लाया हूं। धान की तौलाई अच्छे से हो रही है। उन्होंने कहा कि बारदाना भी आसानी से मिल रहा है। हम सरकार की व्यवस्था से खुश है। इसी तरह किसान देवेंद्र साहू ने भी बताया कि उनका 25 एकड़ खेत है और आज लगभग 60 क्विंटल धान बेचने आए है। मुस्कुराते हुए कहा कि धान खरीदी हम लोगों का त्यौहार है। आसानी से धान बिक जाए तो ये हमारे लिए बहुत बड़ी खुशी की बात है। बेमचा सहकारी समिति में अब तक 34 किसानों का टोकन काटा गया है। यहां 5 पंचायत के 12 गांव के किसान धान बेचने आते हैं।


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