Media24Media.com: जलियांवाला बाग के शहीदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रद्धांजलि, साहस और बलिदान को बताया प्रेरणास्रोत

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जलियांवाला बाग के शहीदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रद्धांजलि, साहस और बलिदान को बताया प्रेरणास्रोत

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नई दिल्ली- नरेंद्र मोदी  ने आज जलियांवाला बाग नरसंहार के वीर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इन अमर बलिदानियों का त्याग हमारे देशवासियों के अदम्य साहस और अटूट आत्मबल का प्रतीक है, जो आज भी हर पीढ़ी को प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जलियांवाला बाग के शहीदों का बलिदान हमें स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रेरित करता है। उन्होंने इस ऐतिहासिक घटना को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए कहा कि विदेशी हुकूमत की बर्बरता के खिलाफ शहीदों ने जो साहस और स्वाभिमान दिखाया, वह देश के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी भाषाओं में श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि जलियांवाला बाग के शहीदों का साहस और दृढ़ संकल्प आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करता रहेगा।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें समाज को सशक्त और समृद्ध बनाने का संदेश दिया गया है। सुभाषित के माध्यम से उन्होंने कहा कि समाज के परिश्रमी और जागरूक लोगों का कर्तव्य है कि वे राष्ट्र को समृद्ध, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने वाली सकारात्मक शक्तियों को बढ़ावा दें, साथ ही विभाजन, अन्याय और असंतोष फैलाने वाली नकारात्मक शक्तियों का दृढ़ता से विरोध करें।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि आज के समय में देश को एकजुट रखते हुए विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों को अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

गौरतलब है कि जलियांवाला बाग नरसंहार भारत के इतिहास की एक ऐसी घटना है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी थी। आज भी यह दिन देशवासियों को एकता, संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है।

जलियांवाला बाग नरसंहार (Jallianwala Bagh Massacre) – संक्षिप्त विवरण

जलियांवाला बाग नरसंहार भारतीय इतिहास की सबसे दुखद और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, जो 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में घटी थी।

क्या हुआ था?

बैसाखी के दिन हजारों लोग  जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा के लिए एकत्रित हुए थे। वे लोग ब्रिटिश सरकार के दमनकारी कानून रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) के खिलाफ विरोध कर रहे थे।

उसी समय ब्रिटिश अधिकारी जनरल रेजिनाल्ड डायर (General Reginald Dyer)अपने सैनिकों के साथ वहां पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया।

कितने लोग मारे गए?

इस गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। आधिकारिक आंकड़े कम बताए गए, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक मानी जाती है।

घटना का प्रभाव

  • इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।

  • भारतीयों में अंग्रेजों के खिलाफ गहरा आक्रोश पैदा हुआ।

  • Mahatma Gandhi ने इसके बाद असहयोग आंदोलन शुरू किया।

  • भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा मिली।

क्यों महत्वपूर्ण है?

जलियांवाला बाग नरसंहार हमें याद दिलाता है कि आजादी कितने बलिदानों के बाद मिली है। यह घटना अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और एकजुट रहने की प्रेरणा देती है।

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