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अनुशासित परिश्रम, तप और त्याग से मिलती है सफलता : सोनमणि बोरा

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प्रमुख सचिव ने पीएम श्री सेजस विद्यालय कुम्हारी का किया निरीक्षण

विद्यार्थियों के समक्ष बने विद्यार्थी और अभ्यर्थी

रायपुर- आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास विभाग के प्रमुख सचिव और दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव सोनमणी वोरा ने आज दुर्ग जिले के कुम्हारी स्थित पीएम श्री विद्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान विद्यालय के सभी विभागों का बारीकी से अवलोकन किया। सचिव बोरा ने विद्यालय की लाइब्रेरी, विज्ञान प्रयोगशाला, अटल लैब, स्पोर्ट्स रूम सहित सभी कक्षाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने प्राथमिक विभाग में संचालित जादुई पिटारा गतिविधियों तथा मिडिल विभाग में स्मार्ट क्लास के माध्यम से कराए जा रहे शिक्षण कार्य को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विद्यार्थियों से सहजता के साथ चर्चा कर पढ़ाई-लिखाई एवं खेलकूद की जानकारी ली। इस मौके पर कलेक्टर अभिजीत सिंह उपस्थित थे। 

प्रमुख सचिव बोरा ने विद्यार्थियों से चर्चा में कहा कि अनुशासित परिश्रम, तप और त्याग से सफलता मिलती है। उन्होंने पीएमश्री विद्यालय निरीक्षण के दौरान बच्चों के समक्ष विद्यार्थी और अभ्यर्थी भी बने। उन्होंने इस दौरान विद्यालय के उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम एवं विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना की तथा सभी कक्षाओं के टॉपर विद्यार्थियों से मुलाकात कर उन्हें सम्माति भी किया। प्रमुख सचिव बोरा और कलेक्टर सिंह ने विद्यार्थियों को जीवन में लक्ष्य बनाकर कार्य करने हेतु प्रेरित किया और यह भी पुछा कि वे जीवन क्या बनेंगे। यह पूछने पर टॉपर्स ने सी.ए., साइबर इंजीनियर, कलेक्टर बनने की इच्छा जाहिर की। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य हेतु शुभकामनाएं देते हुए शिक्षकों के प्रयासों की प्रशंसा की तथा विद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को सराहनीय बताया।

सम्मानित विद्यार्थियों में कक्षा 12वीं की छात्रा रिया साहू जिन्होंने राज्य स्तर पर चतुर्थ स्थान प्राप्त की है। वहीं कक्षा 10वीं की छात्रा साक्षी देवांगन ने जिला स्तर पर आठवां स्थान अर्जित किया है। कक्षा 8वीं में पायल रजानी एवं नैतिक आमटे ने संकुल स्तर पर प्रथम एवं द्वितीय स्थान हासिल की है। इसी प्रकार कक्षा 5वीं की छात्रा शिवानी पटेला प्रथम स्थान पर रही, जबकि भव्या साहू एवं रूपाली साहू ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया।

जलियांवाला बाग के शहीदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रद्धांजलि, साहस और बलिदान को बताया प्रेरणास्रोत

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नई दिल्ली- नरेंद्र मोदी  ने आज जलियांवाला बाग नरसंहार के वीर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इन अमर बलिदानियों का त्याग हमारे देशवासियों के अदम्य साहस और अटूट आत्मबल का प्रतीक है, जो आज भी हर पीढ़ी को प्रेरित करता है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जलियांवाला बाग के शहीदों का बलिदान हमें स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा के मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रेरित करता है। उन्होंने इस ऐतिहासिक घटना को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए कहा कि विदेशी हुकूमत की बर्बरता के खिलाफ शहीदों ने जो साहस और स्वाभिमान दिखाया, वह देश के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में हिंदी, अंग्रेजी और पंजाबी भाषाओं में श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा कि जलियांवाला बाग के शहीदों का साहस और दृढ़ संकल्प आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करता रहेगा।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया, जिसमें समाज को सशक्त और समृद्ध बनाने का संदेश दिया गया है। सुभाषित के माध्यम से उन्होंने कहा कि समाज के परिश्रमी और जागरूक लोगों का कर्तव्य है कि वे राष्ट्र को समृद्ध, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने वाली सकारात्मक शक्तियों को बढ़ावा दें, साथ ही विभाजन, अन्याय और असंतोष फैलाने वाली नकारात्मक शक्तियों का दृढ़ता से विरोध करें।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि आज के समय में देश को एकजुट रखते हुए विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे शहीदों के आदर्शों को अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

गौरतलब है कि जलियांवाला बाग नरसंहार भारत के इतिहास की एक ऐसी घटना है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था और स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी थी। आज भी यह दिन देशवासियों को एकता, संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है।

जलियांवाला बाग नरसंहार (Jallianwala Bagh Massacre) – संक्षिप्त विवरण

जलियांवाला बाग नरसंहार भारतीय इतिहास की सबसे दुखद और महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, जो 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर में घटी थी।

क्या हुआ था?

बैसाखी के दिन हजारों लोग  जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा के लिए एकत्रित हुए थे। वे लोग ब्रिटिश सरकार के दमनकारी कानून रॉलेट एक्ट (Rowlatt Act) के खिलाफ विरोध कर रहे थे।

उसी समय ब्रिटिश अधिकारी जनरल रेजिनाल्ड डायर (General Reginald Dyer)अपने सैनिकों के साथ वहां पहुंचे और बिना किसी चेतावनी के निहत्थे लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया।

कितने लोग मारे गए?

इस गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। आधिकारिक आंकड़े कम बताए गए, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक मानी जाती है।

घटना का प्रभाव

  • इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।

  • भारतीयों में अंग्रेजों के खिलाफ गहरा आक्रोश पैदा हुआ।

  • Mahatma Gandhi ने इसके बाद असहयोग आंदोलन शुरू किया।

  • भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा मिली।

क्यों महत्वपूर्ण है?

जलियांवाला बाग नरसंहार हमें याद दिलाता है कि आजादी कितने बलिदानों के बाद मिली है। यह घटना अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने और एकजुट रहने की प्रेरणा देती है।

‘वीर बाल दिवस’ पर गुरु गोबिंद सिंह जी, माता गुजरी और साहिबज़ादों को अमित शाह व प्रधानमंत्री मोदी की भावपूर्ण श्रद्धांजलि

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‘वीर बाल दिवस’ के अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सिख धर्म के दशम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी, माता गुजरी जी तथा चारों साहिबज़ादों को उनके अद्वितीय बलिदान को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘एक्स’ (X) पर साझा किए गए अपने संदेश में अमित शाह ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के वीर पुत्रों—साहिबज़ादा अजीत सिंह, साहिबज़ादा जुझार सिंह, साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह—द्वारा अत्यंत अल्प आयु में धर्म और देश की रक्षा के लिए दिया गया बलिदान विश्व इतिहास में साहस, शौर्य और त्याग का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह बलिदान न केवल तत्कालीन अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी नैतिक शक्ति और मानवता की रक्षा का संदेश देता है।

अमित शाह ने कहा कि माता गुजरी जी और गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा साहिबज़ादों में संस्कारित किए गए मूल्य—धर्म की रक्षा, मानवता की सेवा और अन्याय के विरुद्ध अडिग रहने की भावना—क्रूर शासकों द्वारा दी गई अमानवीय यातनाओं के बावजूद भी डिग नहीं सके। उन्होंने कहा कि यह अदम्य साहस भारतीय सभ्यता की आत्मा को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘वीर बाल दिवस’ की शुरुआत का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह प्रयास सुनिश्चित करता है कि चारों साहिबज़ादों के त्याग और बलिदान की गाथा हर पीढ़ी तक पहुँचे और देश के युवा उनसे प्रेरणा लेकर राष्ट्र, समाज और मानवता की सेवा के लिए आगे आएँ।

प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी ने भी ‘वीर बाल दिवस’ के अवसर पर गुरु गोबिंद सिंह जी, माता गुजरी जी और चारों साहिबज़ादों को नमन करते हुए कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान भारत की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक विरासत और धर्म की रक्षा के लिए अमर प्रेरणा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबज़ादों का शौर्य और दृढ़ संकल्प देशवासियों को सदैव सत्य, साहस और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।

छोटी सी उम्र में साहिबजादों ने वीरता और गौरव की जो मिसाल पेश की, वह युगों तक प्रेरणा देती रहेगी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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बलिदान और कर्तव्य के गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को परिचित कराना हमारा नैतिक दायित्व - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय वीर बाल रैली में हुए शामिल, हरी झंडी दिखाकर किया रैली का शुभारंभ

साहसिक गतिविधियों और भव्य झांकियों के साथ 5 हजार से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं ने निकाली ऐतिहासिक रैली

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा  आयोजित वीर बाल रैली में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर के मरीन ड्राइव से रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस भव्य रैली में लगभग 5,000 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं, स्काउट-गाइड एवं एनसीसी कैडेट्स ने सहभागिता की। रैली में सिख परंपरा की वीरता को दर्शाती गतका जैसी साहसिक गतिविधियों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं प्रेरणादायी झांकियों ने उपस्थित जनसमूह को गहरे भावनात्मक स्तर पर जोड़ा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में हम दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों — बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी — के अद्वितीय बलिदान को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल 9 वर्ष और 7 वर्ष की अल्पायु में साहिबजादों ने जिस अदम्य साहस, आस्था और बलिदान का परिचय दिया, वह मानव इतिहास में अनुकरणीय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी छोटी उम्र में भी साहिबजादे किसी दबाव के आगे नहीं झुके, अपनी आस्था से विचलित नहीं हुए और धर्म एवं सत्य की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। यह बलिदान केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। साय ने कहा कि सिख धर्म की यह गौरवशाली परंपरा हम सभी के लिए गर्व का विषय है। नई पीढ़ी को साहिबजादों के बलिदान और मूल्यों से परिचित कराना हमारा नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 से वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की पहल अत्यंत सराहनीय है। इससे बच्चों और युवाओं में शौर्य, साहस और राष्ट्रप्रेम की भावना प्रबल हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम साहिबजादों के जीवन को देखते हैं, तो हमें दशम गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा दिए गए संस्कारों और शिक्षाओं पर गर्व होता है। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना कर अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का मार्ग दिखाया। उनकी प्रेरक पंक्तियाँ “सवा लाख से एक लड़ाऊँ, चिड़ियन ते मैं बाज लड़ाऊँ, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहलाऊँ।” आज भी हर भारतीय के भीतर साहस और संघर्ष की चेतना जागृत करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पंक्तियाँ हमें सिखाती हैं कि साधन नहीं, साहस और संकल्प ही विजय का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भारत की धरती धन्य है, जिसने ऐसे महान गुरुओं और साहिबजादों को जन्म दिया। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग एवं शिक्षा विभाग को बधाई और शुभकामनाएँ दीं। 

कैबिनेट मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि साहिबजादों का बलिदान हमें निर्भीकता, सत्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रथम की भावना का मार्ग दिखाता है। उनका जीवन हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने साहिबजादों की शहादत के ऐतिहासिक प्रसंगों से उपस्थित जनसमूह को अवगत कराया।

इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, क्रेडा अध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, सीजीएमएससी अध्यक्ष दीपक म्हस्के, छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा सहित सिख समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधि, समाजसेवी एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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