Media24Media.com: #Inspiration

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #Inspiration. Show all posts
Showing posts with label #Inspiration. Show all posts

62 साल की उम्र में 10वीं पास कर कौशल्या देवी ने रचा मिसाल, महासमुंद की मां ने साबित किया—पढ़ाई की कोई उम्र नहीं

No comments Document Thumbnail

पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते छूट गई थी पढ़ाई, फिर दोबारा शुरू की पढ़ाई; तीनों बच्चे सरकारी सेवा में, मां की उपलब्धि पर परिवार में खुशी

महासमुंद- उम्र को अक्सर लोग नई शुरुआत में सबसे बड़ी बाधा मान लेते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के महासमुंद की कौशल्या देवी बंसल ने इस सोच को गलत साबित कर दिया है। उन्होंने 62 वर्ष की उम्र में कक्षा 10वीं की परीक्षा पास कर न सिर्फ अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी की, बल्कि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा बन गईं जो किसी कारणवश शिक्षा बीच में छोड़ देते हैं।


अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर सामने आई कौशल्या देवी की कहानी यह संदेश देती है कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उनकी पढ़ाई कम उम्र में ही छूट गई थी। हालांकि, मन में पढ़ाई पूरी करने की इच्छा बनी रही। इसी इच्छा और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने बाद के वर्षों में दोबारा पढ़ाई शुरू की और आखिरकार 10वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली।

परिवार की जिम्मेदारियों के बीच छूटी थी पढ़ाई

कौशल्या देवी ने जीवन के शुरुआती दौर में पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। इसी वजह से उनकी औपचारिक शिक्षा आगे नहीं बढ़ सकी। समय बीतता गया, परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां बढ़ती गईं, लेकिन पढ़ाई पूरी करने की इच्छा उनके मन में बनी रही।

बाद में उन्होंने उम्र की परवाह किए बिना दोबारा पढ़ाई की ओर कदम बढ़ाया। उनके लिए यह सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं था, बल्कि वर्षों से अधूरे रह गए एक सपने को पूरा करना था।

तीनों बच्चे सरकारी सेवा में

कौशल्या देवी की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके तीनों बच्चे सरकारी सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उनका एक बेटा कमिश्नर, दूसरा बेटा पुलिस अधीक्षक (SP) और बेटी ज्वॉइंट कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।

बच्चों की सफलता के बाद भी कौशल्या देवी ने खुद के अधूरे सपने को पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने का फैसला किया और परिवार के सहयोग से इसे मुकाम तक पहुंचाया।

62 की उम्र में परीक्षा पास करना बना प्रेरणा

10वीं की परीक्षा पास करना किसी भी विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है, लेकिन 62 वर्ष की उम्र में इसे हासिल करना कौशल्या देवी के लिए विशेष मायने रखता है। उन्होंने यह दिखाया कि यदि मन में दृढ़ इच्छा और लक्ष्य हासिल करने का संकल्प हो तो उम्र रास्ते की दीवार नहीं बन सकती।

उनकी कहानी उन महिलाओं और बुजुर्गों के लिए खास संदेश देती है, जो किसी कारण से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। कौशल्या देवी ने साबित किया कि अधूरा सपना कभी भी पूरा किया जा सकता है, बस शुरुआत करने का साहस चाहिए।

समाज के लिए बड़ा संदेश

कौशल्या देवी बंसल की कहानी केवल 10वीं पास करने की कहानी नहीं है। यह आत्मविश्वास, दृढ़ इच्छाशक्ति और आजीवन सीखने की भावना की कहानी है।

आज जब शिक्षा और कौशल को लेकर लगातार जागरूकता बढ़ रही है, ऐसे में 62 वर्षीय कौशल्या देवी का यह कदम समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है। उनकी सफलता बताती है कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ाने का भी जरिया है।

कौशल्या देवी की कहानी का संदेश

“उम्र चाहे कितनी भी हो, अगर सीखने की इच्छा जिंदा है तो नई शुरुआत हमेशा संभव है।”

महासमुंद की कौशल्या देवी बंसल ने 62 साल की उम्र में 10वीं पास कर यह साबित कर दिया कि सपनों को पूरा करने की कोई तय उम्र नहीं होती।

दीये से शिक्षा की मशाल तक महेन्द्र पटेल

No comments Document Thumbnail

शिक्षा, नवाचार, पर्यावरण और जनजागरण में योगदान; 5 सितंबर को राज्यपाल शिक्षक सम्मान

आरंग- कभी गांव में बिजली और सड़क के अभाव में दीये की रोशनी में पढ़ने वाले शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने संघर्षों को संकल्प में बदलकर शिक्षा, पर्यावरण, जनजागरूकता, सामाजिक सेवा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके बहुआयामी योगदान के लिए 5 सितंबर को राज्यपाल शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।

9 जुलाई 1976 को महासमुंद जिले के ग्राम लाफिन कला के किसान परिवार में जन्मे पटेल ने मिडिल की पढ़ाई के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलकर शिक्षा हासिल की। नवमी से बारहवीं तक बहन के घर रहकर पढ़ाई की। स्व-अध्ययन के बल पर डी.एड., स्नातक तथा हिन्दी, राजनीति और संस्कृत में स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी की।

पत्थर की बेंच से पक्का भवन तक 

11 दिसंबर 1998 को बेलसोंडा के स्टेशनपारा स्थित शासकीय नवीन प्राथमिक शाला से शिक्षकीय जीवन शुरू किया। संसाधनों के अभाव में पत्थरों को बेंच बनाकर पढ़ाने से शुरू हुआ सफर जनसहयोग से पक्के भवन और आधा एकड़ भूमि तक पहुंचा। पारधी समुदाय के घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयास से विद्यालय की दर्ज संख्या बढ़ी। पांचवीं बोर्ड परीक्षा में सभी 11 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

वर्ष 2005 से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में कार्यरत पटेल ने जनसहभागिता से करीब 70 लाख रुपये के विकास कार्य, पांच एकड़ मैदान का समतलीकरण, 81 फीट ऊंचे स्तंभ पर ध्वजारोहण, प्रार्थना शेड, सांस्कृतिक मंच, पुस्तकालय, किचन शेड और अहाता सहित अनेक सुविधाओं के विकास में योगदान दिया। स्वव्यय से कंप्यूटर, संगीत सामग्री और स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने के साथ जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में भी सहयोग किया।

नवाचार के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण 

शिक्षण में हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी पद्यों का लयबद्ध पठन तथा तकनीक और संगीत का प्रयोग उनका प्रमुख नवाचार रहा। अंग्रेजी के टेंस स्ट्रक्चर को गीत के माध्यम से सिखाने की पद्धति को शिक्षा विभाग के दिशा कार्यक्रम में भी अपनाया गया।

शिक्षादान और कैरियर मार्गदर्शन 

पिछले चार वर्षों से ‘शिक्षा दान केंद्र’ के माध्यम से कक्षा 9वीं-10वीं के सैकड़ों विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग और कैरियर मार्गदर्शन दे रहे हैं। स्वच्छता, पर्यावरण, मतदाता व यातायात जागरूकता जैसे अभियानों के लिए करीब 30 गीत और छह लघु फिल्मों का निर्माण-निर्देशन किया। उनके लगाए करीब 300 पौधे आज वृक्ष बन चुके हैं।

राजा मोरध्वज महोत्सव  आयोजन में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका 

आरंग की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत के संरक्षण में भी उनका योगदान रहा है। शोध, लेखन, राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता, ऐतिहासिक पत्रिका के संकलन तथा राजा मोरध्वज महोत्सव की शुरुआत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण सहित राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर 30 से अधिक सम्मान प्राप्त कर चुके महेन्द्र पटेल की यात्रा बताती है कि मजबूत संकल्प अभावों को भी अवसर में बदल सकता है। दीये की रोशनी में शुरू हुआ सफर आज हजारों बच्चों के भविष्य की मशाल बन चुका है।


मुस्कुराता बस्तर कार्यशाला में बच्चों की कला ने बिखेरे रंग

No comments Document Thumbnail

कार्टून और कैरिकेचर के माध्यम से बस्तर की सकारात्मक पहचान को मिलेगी नई दिशा

रायपुर- बस्तर की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से नई पहचान देने के उद्देश्य से जगदलपुर में आयोजित ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला में स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारकर रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

विशेषज्ञों ने सिखाईं कार्टून और कैरिकेचर की तकनीकें

कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ कार्टूनिस्टों और कला विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर बनाने की बुनियादी तकनीकें सिखाईं। उन्होंने बताया कि किसी भी चित्र की अच्छी शुरुआत सही सर्किल बनाने से होती है। इसके साथ ही रफ स्केच, आउटलाइन, रंगों के चयन और चेहरे के भावों को प्रभावी ढंग से चित्रित करने के तरीके भी बच्चों को सरल भाषा में समझाए गए।

प्रशिक्षण से बढ़ा बच्चों का आत्मविश्वास

स्वामी आत्मानंद स्कूल के छात्र वंश साहू ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और कला के प्रति उनकी रुचि और मजबूत हुई है।

चरणबद्ध मार्गदर्शन से आसान हुई चित्रकला

सेजेस शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 की छात्राएं भारती पांडे और पूनम ध्रुव ने कहा कि पहले उन्हें चित्र बनाने की सही शुरुआत की जानकारी नहीं थी, लेकिन विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से अब वे आसानी से कार्टून और कैरिकेचर बना पा रही हैं।

कल्पनाशीलता को मिली नई दिशा

सेजेस नानगुर की छात्राएं अंजलि नाग और नैना मरकाम तथा सेजेस जगदलपुर की छात्रा अक्षिता बाजपेई ने बताया कि वरिष्ठ कलाकारों का मार्गदर्शन उनकी कल्पनाशीलता को नई दिशा देगा और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।

बस्तर की सकारात्मक छवि को मिलेगा नया मंच

यह कार्यशाला बच्चों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ कला के माध्यम से बस्तर की शांतिपूर्ण, रचनात्मक और मुस्कुराती हुई पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इससे बस्तर की सकारात्मक छवि को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।


राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की 30 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि और आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा

ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव, बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री

रायपुर- ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का आज मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान  प्रदेश की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का सम्मान है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर ज्ञानेश्वरी ने न केवल देश के लिए पदक जीता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी इस बेटी पर गर्व है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने उन्हें आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी उपलब्धि का सम्मान हो और प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्हें ज्ञानेश्वरी से मिलने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने उनके उज्ज्वल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से भी उन्हें बधाई दी थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व और उत्सव का क्षण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग, आवश्यक संसाधन और हरसंभव प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रदेश का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा लहराएं तथा देश और प्रदेश का नाम विश्वभर में रोशन करें। ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना सरकार की खेल नीति का महत्वपूर्ण आधार है। यही प्रयास आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।

गुरु पूर्णिमा: ज्ञान, संस्कार और कृतज्ञता का पावन पर्व

No comments Document Thumbnail

"गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥"

भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। इसी गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान और कृतज्ञता को व्यक्त करने के लिए प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास से भी है। इस दिन उनका जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का संकलन किया, महाभारत की रचना की तथा अनेक पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध बनाया। उनके अतुलनीय योगदान के कारण उन्हें 'आदि गुरु' के रूप में सम्मानित किया जाता है।

भारतीय परंपरा में गुरु का अर्थ केवल विद्यालय के शिक्षक तक सीमित नहीं है। माता-पिता, आचार्य, संत, आध्यात्मिक गुरु और वे सभी लोग, जो हमें जीवन में सही मार्ग दिखाते हैं, गुरु के समान हैं। गुरु हमारे भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानने, ज्ञान का प्रकाश फैलाने और जीवन के अंधकार को दूर करने का कार्य करते हैं।

आज के आधुनिक और डिजिटल युग में जानकारी प्राप्त करना आसान हो गया है, लेकिन सही ज्ञान, विवेक और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शन आज भी गुरु ही प्रदान करते हैं। तकनीक हमें सूचना दे सकती है, परंतु जीवन जीने की कला, सही निर्णय लेने की क्षमता और मानवीय मूल्यों का बोध गुरु ही कराते हैं।

गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक या सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का भी अवसर है। यह दिन हमें अपने जीवन में उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है, जिन्होंने हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि सच्चा ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसके साथ विनम्रता, अनुशासन और सेवा की भावना जुड़ी हो।

आज के समय में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब गुरु के बताए आदर्श—सत्य, ईमानदारी, करुणा, संयम और सदाचार—पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने गुरु से मिले संस्कारों को जीवन में उतारे, तो एक सशक्त, शिक्षित और नैतिक समाज का निर्माण संभव है।

निष्कर्ष

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति की अमूल्य गुरु-शिष्य परंपरा का उत्सव है। यह पर्व हमें अपने गुरुओं के प्रति सम्मान, श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। आइए, इस पावन अवसर पर हम अपने सभी गुरुओं को नमन करें और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ज्ञान, संस्कार और मानवता से परिपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लें।

"गुरु का सम्मान केवल एक दिन का नहीं, बल्कि जीवनभर की साधना और कृतज्ञता का प्रतीक है।"

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एकलव्य के विद्यार्थियों का बढ़ाया उत्साह

No comments Document Thumbnail

जनजातीय प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान: मुख्यमंत्री साय ने नीट सफल विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद

खूब पढ़िए, आगे बढ़िए और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदार बनिए - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

जनजातीय युवाओं की नई पहचान बन रहे एकलव्य विद्यालय: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

एकलव्य की तरह लक्ष्य साधिए, सफलता निश्चित मिलेगी - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

अच्छा आचरण और सेवा भाव ही एक डॉक्टर की सबसे बड़ी पहचान है - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित एकलव्य संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों से नीट-2026 में सफल विद्यार्थियों से आत्मीय चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने सभी विद्यार्थियों को उनकी उल्लेखनीय सफलता पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर जनजातीय समाज के लिए गर्व का विषय है। 

उन्होंने कहा कि एकलव्य विद्यालयों के विद्यार्थियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि अवसर, संसाधन और संकल्प मिलने पर प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती।

सफलता का सबसे बड़ा मंत्र निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आपके विद्यालय का नाम 'एकलव्य' है और भारतीय इतिहास में एकलव्य का स्थान अद्वितीय है। उन्होंने गुरु द्रोणाचार्य को अपना आदर्श मानकर कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर साधना और समर्पण के बल पर धनुर्विद्या में असाधारण दक्षता प्राप्त की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उसी प्रकार आप भी अथक परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ निश्चय के साथ अपने जीवन का लक्ष्य प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि खूब पढ़िए, आगे बढ़िए और और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में भागीदार बनिए।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाय; बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय" का उल्लेख करते हुए गुरु के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि गुरु ही हमें ज्ञान देकर जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों का सदैव सम्मान करने और उनसे प्राप्त ज्ञान को समाज के हित में उपयोग करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत सरकार द्वारा देशभर में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं और छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व की बात है कि प्रदेश में  एकलव्य विद्यालय संचालित हैं, जहां जनजातीय समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एकलव्य की तरह लक्ष्य साधिए, सफलता निश्चित मिलेगी। उन्होंने कहा कि नीट जैसी कठिन राष्ट्रीय परीक्षा में सफलता प्राप्त करना आपके परिश्रम, आपके माता-पिता के आशीर्वाद और गुरुजनों के समर्पण का परिणाम है। उन्होंने इस अवसर पर सभी अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि डॉक्टर का स्थान समाज में अत्यंत सम्माननीय होता है। भगवान हमें जन्म देते हैं, लेकिन डॉक्टर जीवन की रक्षा करते हैं और लोगों को नया जीवन प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे केवल कुशल चिकित्सक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, सहृदय और विनम्र डॉक्टर भी बनें। उन्होंने कहा कि मरीज के प्रति मधुर व्यवहार और संवेदनशीलता भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कई बार डॉक्टर का अपनापन ही मरीज को मानसिक शक्ति प्रदान करता है।

शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन, विद्यार्थियों के लिए बढ़े अवसरएकलव्य संवाद के दौरान धमतरी जिले से आए छात्र राधेश्याम के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। पहले विद्यालयों की संख्या सीमित थी और छात्रों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जबकि आज सरकार गांव-गांव तक शिक्षा पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों का व्यापक विस्तार किया गया है तथा प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय स्थापित करने की दिशा में कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के समय प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज निजी एवं शासकीय संस्थानों सहित 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं और पांच नए शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए जा रहे हैं, जिससे मेडिकल शिक्षा की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में आईआईटी, ट्रिपल आईटी, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित अनेक उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण तथा मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली में स्थापित ट्राइबल यूथ हॉस्टल की क्षमता 50 से बढ़ाकर 200 सीट कर दी गई है, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास एवं भोजन की सुविधा के साथ यूपीएससी, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि इस वर्ष ट्राइबल यूथ हॉस्टल से 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेशभर में 34 नालंदा परिसर स्थापित किए गए हैं, जहां विद्यार्थी सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे ऑनलाइन और ऑफलाइन अध्ययन सामग्री के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए सरकार संसाधनों की कोई कमी नहीं आने देगी। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग द्वारा श्रमिक परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए प्रतिवर्ष दो लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है तथा विदेशों में अध्ययन करने वाले पात्र विद्यार्थियों का व्यय भी सरकार वहन करती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076  सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल - मुख्यमंत्री

गरियाबंद जिले से आए विद्यार्थी अवधेश कुमार के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रारंभ की गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि यह सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से प्रदेश का कोई भी नागरिक अपनी समस्या, सुझाव अथवा शिकायत सीधे शासन तक पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए  लगभग आठ हजार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि छात्रावास अथवा अध्ययन से संबंधित कोई समस्या हो तो वे भी हेल्पलाइन के माध्यम से शासन को अवगत करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि अल्प अवधि में ही इस व्यवस्था को व्यापक जनसमर्थन मिला है और लोग बिजली, पानी, नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन सहित अनेक समस्याओं के समाधान के लिए इसका प्रभावी उपयोग कर रहे हैं।

महासमुंद जिले की छात्रा मंजुला के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में मेडिकल शिक्षा हिंदी माध्यम में भी उपलब्ध कराई जा रही है। जिन विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा में कठिनाई होती है, उनके लिए हिंदी में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं ताकि भाषा किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की प्रगति में बाधा न बने।

राजनांदगांव जिले के विद्यार्थी देवानंद द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण तथा मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, जिससे आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी के सपनों के बीच बाधा न बने।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा और विकास की नई इबारत

कांकेर जिले की छात्रा कशिश नेताम द्वारा दूरस्थ वनांचलों में शिक्षा सुविधाओं के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अंचल लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहा, जिससे विकास कार्य बाधित हुए। लेकिन पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से नक्सलवाद समाप्त हुआ है। अब बस्तर में तेजी से सड़कें, विद्यालय, स्वास्थ्य संस्थान और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग में बंद पड़े विद्यालयों को पुनः संचालित किया जा रहा है तथा नए विद्यालय भी स्थापित किए जा रहे हैं। जावंगा एजुकेशन हब की तर्ज पर नारायणपुर जिले के जगरगुंडा और ओरछा में आधुनिक एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अपने क्षेत्र में उपलब्ध हो सके।

सुकमा जिले की छात्रा अंकिता के प्रश्न पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को हरसंभव सहयोग उपलब्ध करा रही है। इसलिए विद्यार्थियों का भी दायित्व है कि वे अपनी शिक्षा का लाभ प्रदेश और समाज को दें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक डॉक्टर के निर्माण में सरकार बड़े पैमाने पर संसाधन निवेश करती है और सरकार चाहती है कि प्रदेश के युवा चिकित्सक छत्तीसगढ़ में रहकर विशेषकर दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के लोगों की सेवा करें। उन्होंने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों को अतिरिक्त वेतन और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

जनसेवा को पूजा मानकर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करना प्रदान करता है ऊर्जा - मुख्यमंत्री

अपने सार्वजनिक जीवन और स्वास्थ्य संबंधी दिनचर्या पर विद्यार्थियों के प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पिछले लगभग 35 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जनसेवा को पूजा मानकर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करना ही उन्हें ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित योग, व्यायाम, संतुलित आहार और अनुशासित जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का निवास होता है और अनुशासित जीवन ही दीर्घकालिक सफलता का आधार है।

कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी विद्यार्थियों को पुनः शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी प्रतिभा, ज्ञान और संस्कार के बल पर समाज की सेवा करें तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि आपकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और आप सभी अपने उत्कृष्ट आचरण, सेवा भावना तथा समर्पण से प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।

संत गाडगे बाबा के आदर्शों पर चलकर समरस, स्वच्छ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

बोदरी में संत गाडगे बाबा की 150वीं जयंती समारोह में हुए शामिल, 42 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास

सामुदायिक भवन, खेल मैदान, स्कूल उन्नयन और तालाब सौंदर्यीकरण सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बिलासपुर जिले के बोदरी में आयोजित संत शिरोमणि गाडगे बाबा की 150वीं जयंती, शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने संत गाडगे बाबा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उनके बताए सेवा, स्वच्छता, सामाजिक समरसता तथा मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने लगभग 42 करोड़ रुपये की लागत की सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क अधोसंरचना विकास की आधारशिला है और इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बढ़ने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संत गाडगे बाबा का संपूर्ण जीवन समाज सुधार, स्वच्छता और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने छुआछूत, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष कर समाज को नई दिशा दी। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित स्वच्छ भारत मिशन, संत गाडगे बाबा के स्वच्छता और जनजागरण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कन्नौजे रजक समाज के सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 60 लाख रुपये तथा संत गाडगे भवन निर्माण हेतु 25 डिसमिल भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही सन्नडय कुर्मी समाज के सामुदायिक भवन के लिए 60 लाख रुपये और वर्मा समाज के सामुदायिक भवन के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने धमनी-चकरभाठा मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में उन्नयन, बोदरी में एयरपोर्ट के समीप खेल मैदान उपलब्ध कराने तथा जोरा तालाब के सौंदर्यीकरण की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और समाज के पदाधिकारियों का सम्मान करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित और जागरूक बनाने में सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रायपुर की बेटी का कमाल: 23 साल की चारु पांडे ने पास कीं 19 सरकारी परीक्षाएं, राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की 23 वर्षीय चारु पांडे ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। चारु ने अब तक 19 सरकारी प्रतियोगी परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर एक नया इतिहास रच दिया है।

चारु की इस असाधारण उपलब्धि ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। उनकी सफलता न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। सीमित संसाधनों और कठिन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत करते हुए एक के बाद एक कई प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाओं में सफलता हासिल की।

उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रमाण माना जा रहा है।

चारु पांडे की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर किए जाएं, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता। आज वे लाखों प्रतियोगी छात्रों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं और उनकी कहानी युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए उत्साहित कर रही है।

रायपुर और पूरे छत्तीसगढ़ में उनकी इस उपलब्धि पर खुशी का माहौल है और लोग उन्हें बधाइयां दे रहे हैं।

कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने प्रदेश का नाम किया रोशन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

No comments Document Thumbnail

श्रमिकों के बच्चे अब केवल श्रमिक नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासक बनेंगे : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि

28 हजार 754 श्रमिक परिवारों को 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित

विश्व पर्यावरण दिवस पर "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत किया पौधारोपण, प्रदेशवासियों से भी किया आह्वान

रायपुर- श्रमिक अपने श्रम, समर्पण और परिश्रम से समाज तथा देश के विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं। वे स्वयं कठिन परिस्थितियों में रहकर दूसरों को सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं, इसलिए श्रमिक वास्तव में देश के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में श्रम विभाग द्वारा आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं एवं 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की मेरिट सूची में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करने वाले पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 22 मेधावी छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत दो-दो लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इनमें कक्षा 10वीं के 9 तथा कक्षा 12वीं के 13 विद्यार्थी शामिल हैं। ये विद्यार्थी रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, गरियाबंद, सक्ती, बलौदाबाजार, रायगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न जिलों से हैं।

मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रमिक परिवारों के संघर्ष, परिश्रम और संकल्प की प्रेरक कहानी है। उन्होंने कहा कि आज जिन श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों को सम्मानित किया जा रहा है, उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कभी भी स्वयं को किसी से कम न समझें। इतिहास इस बात का साक्षी है कि अनेक महान व्यक्तित्व साधारण परिवारों से निकलकर अपनी मेहनत, लगन और शिक्षा के बल पर उच्चतम शिखरों तक पहुंचे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक बनकर न रह जाएं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासक, वैज्ञानिक और विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचकर छत्तीसगढ़ महतारी तथा देश की सेवा करें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिकों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं संचालित कर रही है। उन्होंने श्रमिक परिवारों से इन योजनाओं का अधिकाधिक लाभ लेने का आग्रह किया तथा उपस्थित हितग्राहियों से कहा कि वे उन श्रमिकों तक भी योजनाओं की जानकारी पहुंचाएं जो अभी इन सुविधाओं से वंचित हैं।

अपने केंद्रीय श्रम राज्य मंत्री के रूप में कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रमिकों और मेहनतकश वर्ग के हितों के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं। वर्ष 2014 से 2019 के दौरान केंद्र सरकार में दायित्व निभाते समय उन्हें श्रम मंत्रालय के कार्यों को निकट से देखने तथा श्रमिकों के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि पहले अलग-अलग स्थानों पर कार्य करने के कारण श्रमिकों को भविष्य निधि (पीएफ) राशि प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए यूनिवर्सल पीएफ नंबर की व्यवस्था लागू की गई, जिससे अब एक ही पीएफ नंबर श्रमिक के पूरे कार्यकाल से जुड़ा रहता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम पेंशन व्यवस्था तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य संरक्षण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कदम भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उठाए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 28 हजार 754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिवारों को कुल 7 करोड़ 79 लाख 52 हजार 370 रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की। यह राशि निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना, मुख्यमंत्री नोनीलाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना, मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना, पेंशन सहायता योजना सहित विभिन्न श्रमिक हितैषी योजनाओं के तहत प्रदान की गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के अंतर्गत मेधावी विद्यार्थियों को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा एक लाख रुपये दोपहिया वाहन क्रय करने के लिए प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक परिवारों के सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है तथा बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और अन्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मंडल द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिवारों के हित में अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार के लिए भी विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यक्रम में मेधावी विद्यार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ मिला है और वे इस राशि का उपयोग उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए करेंगे।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधारोपण किया तथा प्रदेशवासियों से अपनी माताओं के नाम पर पौधे लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोग अपने आंगन, खेत-खलिहान, मेढ़ अथवा उपलब्ध स्थानों पर पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण के इस अभियान को जनांदोलन का स्वरूप दें।

इस अवसर पर श्रम विभाग के सचिव एवं श्रम आयुक्त हिमशिखर गुप्ता, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, जनप्रतिनिधिगण, विभागीय अधिकारी, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में श्रमिक तथा उनके परिवारजन उपस्थित थे।

माउंट एवरेस्ट विजेता अमिता श्रीवास के स्वास्थ्य लाभ हेतु राज्य सरकार सजग : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को समन्वय कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

रायपुर- जांजगीर-चांपा जिले की होनहार पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को 22 मई 2026 को सफलतापूर्वक फतह कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि अमिता ने अपने साहस, दृढ़ संकल्प और अथक मेहनत से प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का नया अध्याय रचा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है कि छत्तीसगढ़ की बेटी ने विश्व की सर्वोच्च चोटी पर तिरंगा और हमारे प्रदेश का गौरव बढ़ाया। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट कर कहा कि समिट के बाद बेस कैंप लौटने के दौरान अत्यधिक ऊंचाई, शून्य से लगभग 40 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के कारण अमिता श्रीवास की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली है। उन्हें हेलीकॉप्टर के माध्यम से रेस्क्यू कर काठमांडू स्थित नॉर्विक इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें गंभीर फ्रॉस्टबाइट एवं हाई एल्टीट्यूड संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जानकारी मिलते ही राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक समन्वय स्थापित कर हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अमिता श्रीवास और उनके परिवार के साथ खड़ी है तथा उनके बेहतर उपचार के लिए निरंतर संपर्क और सहयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने अमिता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा कि अमिता बिटिया शीघ्र पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर लौटें, यही हमारी कामना है। उनका साहस, धैर्य और हौसला हजारों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। छत्तीसगढ़ को उन पर गर्व है।

ग्रामीण अंचल की बेटी बनी प्रेरणा: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सराहा उत्कृष्ट प्रदर्शन

No comments Document Thumbnail

सुशासन तिहार में मेधावी छात्रा कुसुम लता बिप्रे का सम्मान, टैबलेट देकर बढ़ाया उत्साह

रायपुर- धमतरी जिले के छोटे से ग्राम कंडेल की बेटी कुमारी कुसुम लता बिप्रे ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प से पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल की परीक्षा में 97.40 प्रतिशत अंक अर्जित कर प्रदेश की प्रावीण्य सूची में पांचवां स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल धमतरी जिले का गौरव बढ़ाया है, बल्कि ग्रामीण अंचल की बेटियों के लिए प्रेरणा की नई मिसाल भी प्रस्तुत की है।

सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत धमतरी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कुसुम लता को मंच पर सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने उन्हें शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा आगे की पढ़ाई और तकनीकी शिक्षा में सहयोग के उद्देश्य से टैबलेट प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज शिक्षा, खेल, विज्ञान और प्रशासन सहित हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और राज्य सरकार उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से निकल रही ऐसी प्रतिभाएं विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान हैं और सरकार प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कुसुम लता की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि यह ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था, परिवार के संस्कार और विद्यार्थियों की मेहनत का सकारात्मक परिणाम है। साधारण परिवार से आने वाली कुसुम लता ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में आगे बढ़ने का संकल्प हो, तो परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं।

कुसुम लता ने बताया कि उन्होंने नियमित अध्ययन, अनुशासन और परिवार के सहयोग के बल पर यह सफलता हासिल की है। उनकी इस उपलब्धि से जिले के अन्य विद्यार्थियों में भी शिक्षा के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार हुआ है। ग्रामीण अंचल की अनेक बेटियां अब उन्हें अपनी प्रेरणा के रूप में देख रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मेधावी छात्र-छात्राएं राज्य की अमूल्य पूंजी हैं। शासन उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि कुसुम लता की उपलब्धि हजारों विद्यार्थियों को यह संदेश देती है कि सपनों की उड़ान गांवों से भी शुरू होकर नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है और प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती।

इस अवसर पर सांसद महासमुंद रूपकुमारी चौधरी, विधायक कुरूद अजय चन्द्राकर, विधायक धमतरी ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, जिला पंचायत अध्यक्ष अरूण सार्वा सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

अनुशासित परिश्रम, तप और त्याग से मिलती है सफलता : सोनमणि बोरा

No comments Document Thumbnail

प्रमुख सचिव ने पीएम श्री सेजस विद्यालय कुम्हारी का किया निरीक्षण

विद्यार्थियों के समक्ष बने विद्यार्थी और अभ्यर्थी

रायपुर- आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक विकास विभाग के प्रमुख सचिव और दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव सोनमणी वोरा ने आज दुर्ग जिले के कुम्हारी स्थित पीएम श्री विद्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान विद्यालय के सभी विभागों का बारीकी से अवलोकन किया। सचिव बोरा ने विद्यालय की लाइब्रेरी, विज्ञान प्रयोगशाला, अटल लैब, स्पोर्ट्स रूम सहित सभी कक्षाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने प्राथमिक विभाग में संचालित जादुई पिटारा गतिविधियों तथा मिडिल विभाग में स्मार्ट क्लास के माध्यम से कराए जा रहे शिक्षण कार्य को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विद्यार्थियों से सहजता के साथ चर्चा कर पढ़ाई-लिखाई एवं खेलकूद की जानकारी ली। इस मौके पर कलेक्टर अभिजीत सिंह उपस्थित थे। 

प्रमुख सचिव बोरा ने विद्यार्थियों से चर्चा में कहा कि अनुशासित परिश्रम, तप और त्याग से सफलता मिलती है। उन्होंने पीएमश्री विद्यालय निरीक्षण के दौरान बच्चों के समक्ष विद्यार्थी और अभ्यर्थी भी बने। उन्होंने इस दौरान विद्यालय के उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम एवं विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना की तथा सभी कक्षाओं के टॉपर विद्यार्थियों से मुलाकात कर उन्हें सम्माति भी किया। प्रमुख सचिव बोरा और कलेक्टर सिंह ने विद्यार्थियों को जीवन में लक्ष्य बनाकर कार्य करने हेतु प्रेरित किया और यह भी पुछा कि वे जीवन क्या बनेंगे। यह पूछने पर टॉपर्स ने सी.ए., साइबर इंजीनियर, कलेक्टर बनने की इच्छा जाहिर की। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य हेतु शुभकामनाएं देते हुए शिक्षकों के प्रयासों की प्रशंसा की तथा विद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को सराहनीय बताया।

सम्मानित विद्यार्थियों में कक्षा 12वीं की छात्रा रिया साहू जिन्होंने राज्य स्तर पर चतुर्थ स्थान प्राप्त की है। वहीं कक्षा 10वीं की छात्रा साक्षी देवांगन ने जिला स्तर पर आठवां स्थान अर्जित किया है। कक्षा 8वीं में पायल रजानी एवं नैतिक आमटे ने संकुल स्तर पर प्रथम एवं द्वितीय स्थान हासिल की है। इसी प्रकार कक्षा 5वीं की छात्रा शिवानी पटेला प्रथम स्थान पर रही, जबकि भव्या साहू एवं रूपाली साहू ने द्वितीय स्थान प्राप्त कर विद्यालय का गौरव बढ़ाया।

वनांचल के सपनों को मिली नई उड़ान,तेंदूपत्ता संग्राहक के बेटे अजय गुप्ता बने भारतीय वन सेवा के अधिकारी

No comments Document Thumbnail

"अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत है" - मुख्यमंत्री विष्णु  देव साय

रायपुर- छत्तीसगढ़ के जंगलों से निकली एक प्रतिभा ने आज देश की सर्वाेच्च सेवाओं में अपनी जगह बनाकर प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। रायगढ जिले के सम्बलपुरी ग्राम के एक साधारण तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार के सुपुत्र अजय गुप्ता ने अपने अटूट संकल्प से भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर यह सिद्ध कर दिया है कि प्रतिभा संसाधनों की नहीं, बल्कि कड़े संघर्ष और सही मार्गदर्शन की मोहताज होती है।

रायगढ़ के संबलपुरी गांव में तेंदूपत्ता और महुआ बीनने वाला अजय गुप्ता अब IFS अधिकारी बन गया है। कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हुए अजय ने पूरे देश में 91वीं रैंक हासिल की। अब वही जंगल, जो कभी परिवार की रोजी-रोटी था, उसकी जिम्मेदारी बनने जा रहा है। अजय गुप्ता ने 12वीं कक्षा में भी शानदार प्रदर्शन किया और इसके बाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में प्रवेश मिला। एनआईटी में पढ़ाई के दौरान भी उन्हें तीन वर्षों तक छात्रवृत्ति मिलती रही। अजय कहते हैं कि पहले सपने बहुत बड़े नहीं थे। लगता था कि हमारी दुनिया बस गांव तक सीमित है, लेकिन एनआईटी में एडमिशन लेने के बाद नजरिया बदल गया। पहली बार लगा कि मैं भी कुछ बड़ा कर सकता हूं। अजय कहते हैं कि जंगल उनके बचपन से ही जिंदगी का हिस्सा रहा है। जंगल ने उन्हें सिर्फ रोजगार नहीं दिया, बल्कि जीवन की दिशा भी दी। वह कहते हैं बचपन से मेरा जुड़ाव जंगल से रहा है। जंगल ने मुझे बहुत कुछ दिया है, बस्तर में काम करने के दौरान भी जंगल से रिश्ता और मजबूत हुआ।

संघर्ष की जमीन से सफलता के आसमान तक

अजय का बचपन जंगलों के बीच वनोपज संग्रहण और खेती-किसानी करते हुए बीता। संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अजय बताते हैं। माता-पिता अधिक शिक्षित नहीं थे, लेकिन उन्होंने बच्चों की शिक्षा को ही अपना लक्ष्य माना। छुट्टियों के दौरान अजय स्वयं जंगलों में जाकर तेंदूपत्ता और महुआ इकट्ठा करने में माता-पिता की मदद करते थे। अभावों के बीच भी उन्होंने 10वीं में 92.66 प्रतिशत और 12वीं में 91.40 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी योग्यता का परिचय दिया था।

सरकारी योजनाओं ने पंखों को दी मजबूती

अजय की इस लंबी उड़ान में छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं ने 'कैशलेस सपोर्ट' और आर्थिक संबल प्रदान किया। लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति ने स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई के दौरान इस छात्रवृत्ति ने आर्थिक बोझ को कम किया। राज्य शासन की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से उन्हें निरंतर वित्तीय सहायता मिली, जिससे वे अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रायगढ़ जिले के अजय गुप्ता को भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होने पर बधाई देते हुए कहा कि अजय ने न केवल अपने माता-पिता का मान बढ़ाया है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि एक ऐसा युवा जिसने स्वयं जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित किया, आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालने जा रहा है। हमारी सरकार की 'लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति' और 'पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति' जैसी योजनाओं ने अजय जैसे प्रतिभाशाली युवाओं की राह आसान की है। अजय की उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही अवसर मिलने पर हमारे ग्रामीण अंचल के युवा भी देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकते हैं।

वन मंत्री ने जताया गौरव, हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने अजय गुप्ता को फोन कर बधाई दी और उनकी उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। मंत्री जी ने कहा कि अजय की सफलता छत्तीसगढ़ के उन हजारों वनाश्रित परिवारों की जीत है जो जंगलों के बीच रहकर बड़े सपने देखते हैं। यह साबित करता है कि हमारी योजनाओं का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि ऐसे ही सशक्त भविष्य का निर्माण करना है।

युवाओं के लिए नया आदर्श

अजय गुप्ता आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं जो सीमित संसाधनों में IFS जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि मेहनत सच्ची हो और शासन का साथ मिले, तो वनांचल का कोई भी युवा देश के शीर्ष पद तक पहुँच सकता है।

आम की छांव में बदले सपनों के मायने: मुख्यमंत्री ने कहा—“अब करोड़पति दीदी बनने की सोचिए”

No comments Document Thumbnail

सुशासन तिहार में वनांचल की महिलाओं से आत्मीय संवाद: संघर्ष की कहानियों में दिखी आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की तस्वीर

रायपुर- कबीरधाम जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं के असर को आंकड़ों से निकालकर मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे ग्रामपंचायत लोखान के कमराखोल में जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां मौजूद महिलाओं के लिए यह केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं थी, बल्कि अपने संघर्षों को पहचान मिलने का भावुक क्षण था।

आम के पुराने विशाल पेड़ की छांव में चौपाल सजी। मुख्यमंत्री महिलाओं और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे सहज बातचीत कर रहे थे।

गांव की महिलाएं खुलकर अपनी जिंदगी की कहानियां साझा कर रही थीं - कभी आर्थिक तंगी, सीमित अवसर और संघर्षों से भरी जिंदगी, तो आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने तक का सफर।

जब मुख्यमंत्री को बताया गया कि बिहान योजना से जुड़कर यहां की कई महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और गर्व दोनों दिखाई दिए। उन्होंने कहा - 

“आप लोगों ने मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी जिंदगी बदली है। अब यहीं मत रुकिए। बड़ा सोचिए, आगे बढ़िए। अब आपको करोड़पति दीदी बनने का सपना देखना है।”

मुख्यमंत्री के ये शब्द चौपाल में मौजूद नारीशक्ति के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं थे। ग्राम कुकदूर की कचरा तेलगाम ने अपनी कहानी साझा की। कचरा तेलगाम ने बिहान योजना से मिले दो लाख रुपये के ऋण से शटरिंग प्लेट्स खरीदीं और नया व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनके पास लगभग 1700 वर्गफुट शटरिंग सामग्री है और वे 22 से अधिक मकानों के निर्माण कार्य में सहयोग कर चुकी हैं। इस काम से उन्हें हर साल ढाई से तीन लाख रुपये तक की आय हो रही है।

कचरा तेलगाम बताती हैं कि पहले वे केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक ताकत बन चुकी हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर की जरूरतें और भविष्य की बचत -सब कुछ अब वे आत्मविश्वास के साथ संभाल रही हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जिस अपनेपन से बात की, उससे लगा कि हमारी मेहनत सच में किसी ने देखी और समझी है। अब और आगे बढ़ने का हौसला मिला है।

सुशासन तिहार के इस दौरे ने यह स्पष्ट किया कि शासन की योजनाएं दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में  लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं आज गांवों में आर्थिक बदलाव की नई धुरी बन चुकी हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और सम्मान के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है।

कबीरधाम के इन वनांचल गांवों में आम की छांव के नीचे हुई यह चौपाल महिलाओं के भीतर जगे नए विश्वास, बड़े सपनों और बदलती जिंदगी की नई शुरुआत का प्रतीक बन चुकी है। “लखपति दीदी” से “करोड़पति दीदी” तक का यह सपना अब गांव-गांव में नई उम्मीद बनकर फैल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने दूरभाष पर पद्मश्री फुलबासन यादव से की चर्चा, जाना हालचाल

No comments Document Thumbnail

पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर फुलबासन यादव ने जताया संतोष, कहा- मिला पूरा सहयोग

पुलिस प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के दिए गए हैं निर्देश

रायपुर- पद्मश्री सम्मान से अलंकृत वरिष्ठ समाजसेवी फुलबासन यादव के साथ हुई अप्रिय घटना को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री साय ने आज सुबह स्वयं दूरभाष पर फुलबासन यादव से चर्चा कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा घटना की जानकारी ली। 


 मुख्यमंत्री साय ने आश्वस्त किया कि इस मामले की हर पहलू से गहन जांच की जाएगी। दोषी चाहे जो हो, बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को इस संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए हैं।

पद्मश्री फुलबासन यादव ने घटना के बाद पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पुलिस प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया।

देवतुल्य शिक्षक सुरेन्द्र गुप्ता को भावभीनी विदाई, 3000 से अधिक लोगों की उपस्थिति में उमड़ा जनसैलाब

No comments Document Thumbnail

महासमुंद- जिले के डूमरमूढा गांव में एक अनूठा और भावुक विदाई समारोह देखने को मिला, जहां शिक्षक सुरेन्द्र कुमार गुप्ता को पूरे क्षेत्र ने मिलकर अश्रुपूर्ण विदाई दी। मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही महासमुंद और मानव जागृति सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 3000 से अधिक शुभचिंतक, 100 से अधिक गांवों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी, अभिभावक और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम के संयोजक शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने बताया कि सुरेन्द्र गुप्ता ने अपने 20 वर्षों के सेवाकाल में न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि समाज निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने जीवन विद्या आधारित शिक्षा को बढ़ावा देते हुए “सुखी समृद्ध व्यक्ति, परिवार और गांव” की अवधारणा को साकार किया।

विदाई समारोह के दौरान एक भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब गांव के बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने शिक्षक गुप्ता के चरण स्पर्श कर, गले लगाकर और श्रीफल, शाल, वस्त्र, फूलमाला व मिठाई देकर सम्मान प्रकट किया। खास बात यह रही कि सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने स्वयं गांव के हर घर जाकर अभिभावकों से हाथ जोड़कर विदाई ली।

सुरेन्द्र कुमार गुप्ता की समाजसेवा भी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने अपने वेतन के अंशदान से गांव में मानव जागृति सेवा संस्थान और श्रीराम मंदिर का निर्माण करवाया। उनके प्रयासों से 900 से अधिक ग्रामीणों को जीवन विद्या का अध्ययन कराया गया, जिसके लिए उन्होंने स्वयं शिविर आयोजित कर नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था भी की।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक, समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें “देवतुल्य शिक्षक” की संज्ञा दी।

यह विदाई समारोह न केवल एक शिक्षक के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार और सेवा के महत्व को भी उजागर कर गया।

कच्ची झोपड़ी से पक्के घर तक का सपना हो रहा साकार,मुख्यमंत्री ने ईंट जोड़कर किया श्रमदान

No comments Document Thumbnail

भैंसामुड़ा में पीएम आवास निर्माण का किया औचक अवलोकन

हितग्राही अनुसुइया पैंकरा ने जताया आभार

जशपुरनगर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आकस्मिक जशपुर जिला प्रवास के दौरानविकासखंड पत्थलगांव के ग्राम भैंसामुडा पहुंचे। मुख्यमंत्री साय जब गांव से गुजर रहे थे, तभी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हितग्राही अनुसुइया पैंकरा के निर्माणाधीन आवास पर पड़ी। वे तुरंत वाहन से उतरकर मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने वहां कार्यरत श्रमिकों के प्रयासों की सराहना की। संवेदनशील और प्रेरणादायक पहल करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वयं करणी तथा सीमेंट गारा से ईंट जोड़कर निर्माण कार्य में भागीदारी निभाई। मुख्यमंत्री ने स्वयं ईंट जोड़कर श्रमदान कर लोगों को भावुक कर दिया। मुख्यमंत्री की इस सहज और आत्मीय पहल से ग्रामीणों में उत्साह का माहौल बन गया। हितग्राही अनुसुइया पैंकरा ने भावुक होकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और कहा कि उनका वर्षों पुराना सपना अब साकार हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उन्हें पक्का घर मिल रहा है, जिससे उनका जीवन सुरक्षित और बेहतर बनेगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने चंदागढ़ के राजमिस्त्री सूक मोहन चक्रेश से भी बातचीत की। उन्होंने उनके रोजगार, दैनिक मजदूरी और परिवार की स्थिति के बारे में जानकारी ली तथा श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए शासन की योजनाओं का लाभ लेने की सलाह दी।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की यह पहल केवल एक निरीक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह गरीबों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन गई। यह दृश्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक रहा और शासन के प्रति विश्वास को और मजबूत करने वाला साबित हुआ। इस दौरान पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक गोमती साय, अन्य जनप्रतिनिधिगण सहित कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी लाल उमेद सिंह, डीएफओ शशि कुमार सहित ग्रामीण जन मौजदू रहे।


जब मुख्यमंत्री उतरे मैदान में: सुशासन तिहार में बच्चों संग खेला क्रिकेट, बढ़ाया हौसला

No comments Document Thumbnail

सादगी और अपनापन: बच्चों के साथ खेलते दिखे मुख्यमंत्री साय

सीएम का स्नेहिल अंदाज: बच्चों के साथ खेलकर बढ़ाया उत्साह

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जशपुर जिला प्रवास के दौरान ग्राम भैंसामुड़ा में एक बेहद आत्मीय और उत्साहवर्धक दृश्य देखने को मिला, जब वे शासकीय प्राथमिक शाला चंदागढ़ के स्कूल परिसर में अचानक पहुंच गए। विद्यालय पहुंचते ही उनकी नजर मैदान में क्रिकेट खेल रहे बच्चों पर पड़ी, जिनका जोश और उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों की इस ऊर्जा ने मुख्यमंत्री को इतना आकर्षित किया कि वे बिना औपचारिकता के सीधे मैदान में उतर गए और उनके साथ क्रिकेट खेलने लगे। मुख्यमंत्री को अपने बीच खेलते देख बच्चों की खुशी दोगुनी हो गई और पूरा वातावरण उत्साह और उल्लास से भर उठा।

इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने बच्चों से सहज संवाद करते हुए उनकी दिनचर्या, पढ़ाई और खेल के प्रति रुचि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बच्चों से पूछा कि वे नियमित रूप से खेलते हैं या नहीं और किस खेल में उनकी विशेष रुचि है। बच्चों के साथ इस आत्मीय संवाद के बीच उन्होंने यह भी समझने का प्रयास किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं की क्या स्थिति है और किन-किन संसाधनों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। 

मैदान में मौजूद खिलाड़ी प्रकाश ठाकुर से भी मुख्यमंत्री ने चर्चा कर उनके अनुभवों और खेल से जुड़े पहलुओं के बारे में जाना, जिससे स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों की वास्तविक स्थिति की जानकारी उन्हें मिल सकी।

बच्चों के उत्साह और खेल के प्रति उनकी रुचि को देखते हुए मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टर को निर्देशित किया कि स्कूल के विद्यार्थियों के लिए आवश्यक क्रिकेट किट और स्पोर्ट्स ड्रेस उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर खेल सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि वे अपने कौशल का समुचित विकास कर सकें और आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री का यह दृष्टिकोण खेल और शिक्षा के संतुलित विकास की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने ग्राम पंचायत के सरपंच रोशन प्रताप सिंह से भी बातचीत कर गांव की स्थिति, चल रहे विकास कार्यों और स्थानीय आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि गांव के समग्र विकास के लिए आवश्यक पहल सुनिश्चित की जाए, ताकि बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी संतुलित प्रगति हो सके।

मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा केवल एक प्रशासनिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के साथ बिताए गए उनके सहज और प्रेरणादायक क्षणों ने ग्रामीणों के मन में विशेष उत्साह और विश्वास का वातावरण निर्मित किया। यह दृश्य इस बात का प्रतीक बना कि शासन जब जमीनी स्तर पर पहुंचकर सीधे संवाद करता है, तो वह केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं करता, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा का संचार भी करता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘अविस्मरणीय यात्रा’ पुस्तक का किया विमोचन

No comments Document Thumbnail

महिला पत्रकारों ने नारी शक्ति वंदन के संकल्प को महिला सशक्तिकरण की ओर बताया ऐतिहासिक कदम

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित  कार्यालय कक्ष में पत्रकार नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने  नीरा साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।

इस अवसर पर निशा द्विवेदी, चित्रा पटेल, लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक संगीता लकड़ा एवं आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.