Media24Media.com: नए बेस ईयर (2022–23) पर राज्य आय आंकड़ों को लेकर विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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नए बेस ईयर (2022–23) पर राज्य आय आंकड़ों को लेकर विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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विशाखापट्टनम- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की राष्ट्रीय लेखा प्रभाग (NAD) द्वारा 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों को नए आधार वर्ष (2022–23) के अनुसार राज्य आय और संबंधित आंकड़ों में किए गए बदलावों से अवगत कराना तथा आंकड़ों में एकरूपता, पारदर्शिता और तुलनीयता सुनिश्चित करना है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के वित्त एवं योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार, MoSPI के अतिरिक्त महानिदेशक सिद्धार्थ कुंडू, उप महानिदेशक डॉ. सुभ्रा सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) राज्यों की उधारी सीमा तय करने और केंद्र से मिलने वाले करों के बंटवारे के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने GST, e-Vahan और PFMS जैसे प्रशासनिक डेटा के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने राज्यों से ASUSE और PLFS जैसे सर्वेक्षणों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की, ताकि विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए बेहतर जिला स्तर के आंकड़े तैयार किए जा सकें।

आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव पीयूष कुमार ने कहा कि 2011–12 से 2022–23 में बेस ईयर का बदलाव अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों को सही तरीके से दर्शाने के लिए आवश्यक है। इससे राज्य और जिला स्तर पर नीति निर्माण के लिए अधिक सटीक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर अधिकारियों ने राज्यों की भूमिका को राष्ट्रीय आंकड़ों की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर के 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 125 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

निष्कर्ष: यह कार्यशाला राज्यों को नई आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप आंकड़ों को समझने और बेहतर नीति निर्माण में सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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