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विधायी प्रारूपण के 36वें बेसिक कोर्स का शुभारंभ, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 18 अधिकारी ले रहे हैं प्रशिक्षण

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नई दिल्ली- विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के अंतर्गत इंस्टीट्यूट ऑफ लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग एंड रिसर्च (ILDR) द्वारा आयोजित विधायी प्रारूपण (Legislative Drafting) के 36वें बेसिक कोर्स का शुभारंभ 22 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित विधायी सभागार, कर्तव्य भवन-02 में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों के लिए आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में विधायी विभाग एवं विधिक कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि, अतिरिक्त सचिव एवं कोर्स निदेशक (ILDR) डॉ. मनोज कुमार तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. राजीव मणि ने पूरे देश में विधायी प्रारूपण में एकरूपता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे कानूनों में स्पष्टता, समानता और कानूनी निश्चितता सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर हो रहे विधायी सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गुणवत्तापूर्ण और एकसमान प्रारूपण अत्यंत आवश्यक है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 जुलाई से 25 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इसमें 13 राज्य सरकारों और एक केंद्रशासित प्रदेश से आए 18 प्रशिक्षु अधिकारी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को विधायी प्रारूपण के सिद्धांतों की गहन समझ प्रदान करना तथा विधायी दस्तावेजों के मसौदा-निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें प्रभावी प्रारूपण के लिए आवश्यक ज्ञान एवं कौशल से सुसज्जित करना है।

यह कोर्स देशभर में विधायी प्रारूपण की एकरूपता, सटीकता और उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की संस्थागत क्षमता को भी मजबूत करेगा।

विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति,नीति बनाने समिति गठित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने अधोसंरचना विकास निगम (CIDC) के अंतर्गत आने वाले विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के हित में एक बड़ा और संवेदनशील निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर, इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के लिए एक नई नीति बनाने का निर्णय लिया गया है। इस नीति के निर्धारण के लिए राज्य शासन द्वारा सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग की अध्यक्षता में 07 सदस्यीय अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया है, जिसका आदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार, पूर्व में इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को शिक्षाकर्मी वर्ग-तीन के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। लेकिन शिक्षाकर्मी पद समाप्त होने के बाद जल संसाधन विभाग ने 13 दिसंबर 2022 को एक आदेश जारी कर सीआईडीसी ((CIDC) के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान किया था। सीआईडीसी में पद रिक्त न होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति के कई महत्वपूर्ण प्रकरण लंबे समय से लंबित हो गए थे। इसके चलते आश्रित परिवारों को गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर समिति गठित, 1 माह में सौंपनी होगी रिपोर्ट

मामले की संवेदनशीलता, उच्च न्यायालय के निर्देशों और कर्मचारी हित को सर्वाेपरि रखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नई नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। गठित की गई 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट एक माह के भीतर शासन को सौंपनी होगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट (मंत्रि-परिषद्) से अंतिम अनुमोदन लिया जाएगा, जिसके बाद नई नीति को विधिवत अधिसूचित कर दिया जाएगा।

शासन का मुख्य उद्देश्य

राज्य शासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इस नई नीति के लागू होने से वर्षों से लंबित प्रकरणों का तेजी से निपटारा होगा और पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार व आर्थिक संबल मिल सकेगा।

जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को सशक्त बनाने के लिए 'भुवनेश्वर घोषणा' को अपनाया गया

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जनजातीय कार्य मंत्रालय और ओडिशा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 'जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को सशक्त बनाने' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन भुवनेश्वर घोषणा (Bhubaneswar Declaration) को अपनाने के साथ हुआ। यह घोषणा प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत@2047' के विजन को साकार करने की दिशा में जनजातीय ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा देने वाले मजबूत संस्थानों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

कार्यशाला में जनजातीय अनुसंधान संस्थानों, राज्य जनजातीय कल्याण विभागों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, प्रौद्योगिकी संगठनों, उद्योग, विकास सहयोगी संस्थाओं तथा नागरिक समाज के लगभग 200 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें भारत के जनजातीय अनुसंधान तंत्र के भविष्य पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

पहले दिन की प्रमुख चर्चाएं

पहले दिन चार विषयगत समूह चर्चाएं और विशेषज्ञ पैनल आयोजित किए गए। इनमें निम्नलिखित विषयों पर विशेष जोर दिया गया—

  • जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को ज्ञान एवं सांस्कृतिक संसाधन केंद्रों के रूप में विकसित करना।

  • जनजातीय भाषाओं, पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण एवं डिजिटल संरक्षण।

  • साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए मजबूत जनजातीय डेटा प्रणाली, आधारभूत सर्वेक्षण और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान को बढ़ावा देना।

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तथा नवाचार आधारित तकनीकों के माध्यम से अनुसंधान, योजना, सेवा वितरण और निगरानी को सशक्त बनाना।

  • संस्थागत सुधार, सुशासन, मानव संसाधन विकास और रणनीतिक साझेदारी के माध्यम से TRIs को पेशेवर एवं टिकाऊ संस्थानों के रूप में विकसित करना।

दूसरे दिन राष्ट्रीय रोडमैप पर सहमति

दूसरे दिन सभी कार्य समूहों ने अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं, जिन पर विशेषज्ञों एवं जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ विस्तृत चर्चा हुई। इन सिफारिशों के आधार पर जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया गया।

सचिव रंजना चोपड़ा का वक्तव्य

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव  रंजना चोपड़ा ने कहा कि—

"जनजातीय अनुसंधान संस्थान जनजातीय समुदायों की आवाज़ हैं। उन्हें उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और समुदाय की वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित विश्वस्तरीय उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्हें अधिक संस्थागत और वित्तीय स्वायत्तता मिलनी चाहिए तथा राज्य सरकारों, विश्वविद्यालयों और अन्य ज्ञान संस्थानों के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। भुवनेश्वर घोषणा जनजातीय विकास को नई गति देने वाली महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता है।"

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सात TRIs सम्मानित

जनजातीय अनुसंधान, दस्तावेजीकरण, ज्ञान सृजन एवं जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए सात जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को प्रशंसा प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए—

  • जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, छत्तीसगढ़

  • अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, ओडिशा

  • जनजातीय अनुसंधान एवं सांस्कृतिक संस्थान, त्रिपुरा

  • जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, महाराष्ट्र

  • किर्टाड्स (KIRTADS), केरल

  • जनजातीय सांस्कृतिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, तेलंगाना

  • डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण अनुसंधान संस्थान, झारखंड

भुवनेश्वर घोषणा के प्रमुख संकल्प

घोषणा में निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी—

  • TRIs को उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) के रूप में विकसित करना।

  • सामुदायिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान को प्राथमिकता देना।

  • राष्ट्रीय TRI अनुसंधान एजेंडा (2027–2032) तैयार करना।

  • Model TRI Framework 2030 को लागू करना।

  • सभी TRIs के लिए परिणाम एवं रैंकिंग प्रणाली विकसित करना।

  • जनजातीय भाषाओं, संस्कृति, संगीत, पारंपरिक ज्ञान एवं कला का संरक्षण करना।

  • अनुसंधान गुणवत्ता, डेटा प्रबंधन और नैतिक मानकों को मजबूत करना।

  • AI, डेटा एनालिटिक्स और साझा तकनीकी अवसंरचना का उपयोग बढ़ाना।

  • विश्वविद्यालयों, उद्योग और तकनीकी संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देना।

  • जनजातीय युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।

समापन

कार्यशाला के समापन पर भुवनेश्वर घोषणा को औपचारिक रूप से अपनाया गया। यह घोषणा जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को अनुसंधान, ज्ञान सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के उत्कृष्ट केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर का मार्गदर्शक दस्तावेज़ होगी। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत का संरक्षण करते हुए 'विकसित भारत@2047' के लक्ष्य को साकार करने में जनजातीय समुदायों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।

चिंतन शिविर 3.0 से सुशासन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार होगी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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डिजिटल गवर्नेंस, उभरती तकनीकों, कृषि समृद्धि और नेतृत्व विकास पर मंथन

पिछले चिंतन शिविरों के परिणामस्वरूप ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचार हुए साकार

रायपुर- चिंतन शिविर 3.0 का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन के विभिन्न आयामों पर व्यापक मंथन करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार और नवाचार का माध्यम बन चुका है। पिछले दो संस्करणों से प्राप्त सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन में तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना ही इस शिविर का मूल उद्देश्य है।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 के प्रथम दिवस में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, सेवा-भाव और जनप्रतिनिधियों के नैतिक दायित्वों पर अपने विचार रखे। उन्होंने मूल्य-आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन को प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

शिविर में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने "इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़" विषय पर संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीक आधारित सेवा वितरण, नवाचार, रोजगार सृजन तथा डिजिटल समावेशन के लिए छत्तीसगढ़ के समक्ष उपलब्ध अवसरों की भी चर्चा की।

कृषि विषयक सत्र "कृषि से समृद्धि" में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों की जानकारी देते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समूह आधारित विचार-मंथन में भी भाग लिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु जैसे महत्वपूर्ण नवाचार भी इसी चिंतन प्रक्रिया का परिणाम हैं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव सुशासन, तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार नवाचार, ज्ञान, तकनीक और प्रभावी नीति-निर्माण को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी तथा चिंतन शिविर से निकले विचारों को शीघ्र ही ठोस नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन कार्य योजना हेतु गठित स्टियरिंग समिति की बैठक सम्पन्न

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ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं-मुख्य सचिव श्री विकासशील

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। 

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ श्रीनिवास राव, एपीसीसीएफ सुनील मिश्रा शामिल हुए।

वृक्ष-आवरण में देश में प्रथम स्थान पर रहा छत्तीसगढ 

छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं। 

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।  

बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की।

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव  निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

नए बेस ईयर (2022–23) पर राज्य आय आंकड़ों को लेकर विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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विशाखापट्टनम- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की राष्ट्रीय लेखा प्रभाग (NAD) द्वारा 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों को नए आधार वर्ष (2022–23) के अनुसार राज्य आय और संबंधित आंकड़ों में किए गए बदलावों से अवगत कराना तथा आंकड़ों में एकरूपता, पारदर्शिता और तुलनीयता सुनिश्चित करना है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के वित्त एवं योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार, MoSPI के अतिरिक्त महानिदेशक सिद्धार्थ कुंडू, उप महानिदेशक डॉ. सुभ्रा सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) राज्यों की उधारी सीमा तय करने और केंद्र से मिलने वाले करों के बंटवारे के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने GST, e-Vahan और PFMS जैसे प्रशासनिक डेटा के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने राज्यों से ASUSE और PLFS जैसे सर्वेक्षणों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की, ताकि विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए बेहतर जिला स्तर के आंकड़े तैयार किए जा सकें।

आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव पीयूष कुमार ने कहा कि 2011–12 से 2022–23 में बेस ईयर का बदलाव अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों को सही तरीके से दर्शाने के लिए आवश्यक है। इससे राज्य और जिला स्तर पर नीति निर्माण के लिए अधिक सटीक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर अधिकारियों ने राज्यों की भूमिका को राष्ट्रीय आंकड़ों की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर के 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 125 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

निष्कर्ष: यह कार्यशाला राज्यों को नई आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप आंकड़ों को समझने और बेहतर नीति निर्माण में सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने CPES और IES अधिकारियों को किया संबोधित, राष्ट्र निर्माण में योगदान पर दिया जोर

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केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) और भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों ने आज (27 मार्च 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत की प्रगति के अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं और उनके निर्णय एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी नीतियों के निर्माण और सुधारों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण और जुनून के साथ कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में कई चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन ये चुनौतियाँ राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने जिज्ञासा, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।

केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बिजली औद्योगिक विकास, नवाचार, बेहतर जीवन स्तर और देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि CPES ने विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण के क्षेत्रों में योजना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही बिजली प्रणालियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ इंजीनियरिंग प्रथाओं और नवाचार के माध्यम से देश की ऊर्जा संरचना को मजबूत करने में CPES अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

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भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में आर्थिक योजना और उसके क्रियान्वयन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि IES अधिकारियों की भूमिका सतत विकास सुनिश्चित करने, महंगाई को नियंत्रित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, असमानताओं को कम करने और जटिल आर्थिक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों को यह याद रखने की सलाह दी कि हर आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी होती है। किसी भी आर्थिक नीति का वास्तविक माप केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके परिणामों में होता है—जो लोगों के जीवन में सुधार लाए, विशेषकर सबसे कमजोर वर्गों के लिए।

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राष्ट्रीय सांख्यिकीय सर्वेक्षणों के डेटा की पारदर्शिता, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए MoSPI की व्यापक पहल

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 यह जानकारी आज लोकसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री, साथ ही योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री एवं संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री राव इंदरजीत सिंह द्वारा दी गई।

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के यूनिट-लेवल डेटा की सुगम उपलब्धता

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा संचालित राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के यूनिट-लेवल डेटा और मेटाडेटा को मंत्रालय की वेबसाइट पर नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
डाटा उपयोगकर्ताओं के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए जाते हैं ताकि वे आसानी से सर्वेक्षण संकेतकों का निर्माण कर सकें।

डेटा डाउनलोड को और सरल बनाने के लिए, एक डेटा एक्सट्रैक्शन टूल भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे उपयोगकर्ता कच्चे डेटा को उपयोगी व विश्लेषणयोग्य प्रारूप में परिवर्तित कर सकें। सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी होने के बाद डेटा यूज़र्स कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जाती हैं ताकि उपयोगकर्ताओं की समझ बढ़ाई जा सके और पद्धति से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान हो सके।

डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा

MoSPI द्वारा डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रोटोकॉल अपनाए जाते हैं:

  • माइक्रोडाटा/यूनिट-लेवल डेटा को अनाम (anonymized) किया जाता है ताकि किसी व्यक्ति की पहचान न उजागर हो।

  • डेटा संग्रह के लिए Computer Assisted Personal Interviewing (CAPI) का उपयोग किया जाता है, जिसमें

    • संपूर्ण डेटा ट्रांसमिशन एन्क्रिप्टेड मोड में होता है।

    • डेटा सुरक्षित क्लाउड-आधारित प्लेटफ़ॉर्म पर संग्रहित किया जाता है।

राज्यों की क्षमता निर्माण (Capacity Building)

MoSPI द्वारा राज्यों को विस्तृत प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • NSS सर्वेक्षणों का संचालन

  • CAPI सॉफ्टवेयर का उपयोग

  • क्लाउड-आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का प्रबंधन

सर्वेक्षण बाद की टेब्युलेशन वर्कशॉप्स के माध्यम से राज्य अधिकारियों की क्षमता और बढ़ाई जाती है।
मंत्रालय द्वारा ‘Support for Statistical Strengthening (SSS)’ उप-योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सांख्यिकीय क्षमता बढ़ाने हेतु 2010 से 27 नवम्बर 2025 तक ₹364.69 करोड़ प्रदान किए गए हैं, जिनमें से ₹42.01 करोड़ EFC 2021-26 अवधि के दौरान जारी किए गए।

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) में डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करना

ASI के लिए डेटा संग्रह अब वेब पोर्टल के माध्यम से किया जाता है, जिससे:

  • मानवीय त्रुटियों में कमी

  • डेटा में स्वतः वैलिडेशन

  • माइक्रो व मैक्रो स्तर पर डेटा चेक

MoSPI द्वारा नियमित रूप से ASI राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती हैं ताकि उद्योग प्रतिनिधियों को सर्वेक्षण के महत्व से अवगत कराया जा सके और उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।
इसके अलावा:

  • मल्टी-लेयर वैलिडेशन चेक

  • ASI यूनिट्स के लिए जागरूकता कैंप

  • निरीक्षण व प्रशिक्षण

द्वारा डेटा की गुणवत्ता लगातार बेहतर की जा रही है।


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