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विश्व हाथी दिवस 2026: विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समारोह, हाथी संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल जारी

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विशाखापत्तनम- विश्व हाथी दिवस 2026 के अवसर पर आज विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय स्तर के समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री कोनिडेला पवन कल्याण समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव  तन्मय कुमार, महानिदेशक (वन) एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, अपर महानिदेशक (वन्यजीव) रमेश पांडे सहित मंत्रालय, आंध्र प्रदेश वन विभाग, भारतीय रेल, विभिन्न राज्यों के वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान से हाथी संरक्षण पर जोर

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत हाथियों के लिए एक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रिमोट सेंसिंग और जियोस्पेशियल मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) को कम करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है। साथ ही, संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों के कल्याण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सिंह ने कहा कि हाथी संरक्षण भारत के लिए केवल एक नीतिगत प्राथमिकता नहीं, बल्कि देश की सभ्यतागत विरासत और पारिस्थितिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि भारत में वर्तमान में 33 हाथी रिजर्व और वैज्ञानिक रूप से चिन्हित 150 हाथी गलियारे (Elephant Corridors) हैं। भारत में दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत जंगली एशियाई हाथी आबादी पाई जाती है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष एक जटिल समस्या है और इसके समाधान के लिए विभिन्न हितधारकों को साथ लाकर, जमीनी स्तर पर सत्यापित वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग करना जरूरी है।

‘Conflict to Coexistence’ होगा आंध्र प्रदेश का मंत्र

मुख्य वक्तव्य देते हुए आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष के मामलों से निपटने के लिए राज्य सरकार का मंत्र ‘Conflict to Coexistence’ यानी ‘संघर्ष से सह-अस्तित्व की ओर’ है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष राज्यों की प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसे साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश सरकार की H.A.N.U.M.A.N. (Healing And Nurturing Units for Monitoring, Aid and Nursing of Wildlife) पहल की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग के साथ स्थानीय समुदायों को जोड़ा जा रहा है और वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

‘गज गौरव पुरस्कार 2026’ प्रदान किए गए

विश्व हाथी दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने हाथी संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को ‘गज गौरव पुरस्कार 2026’ प्रदान किए।

‘30 Giant Steps’ का विमोचन

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘30 Giant Steps’ का विमोचन रहा। इसमें वर्ष 2020 से 2026 के बीच प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत हासिल की गई 30 प्रमुख उपलब्धियों, महत्वपूर्ण पड़ावों और संरक्षण पहलों को रेखांकित किया गया है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट की शुरुआत वर्ष 1992 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में हुई थी। तीन दशकों से अधिक समय से यह योजना हाथियों, उनके आवास और गलियारों के संरक्षण, मानव–हाथी संघर्ष को कम करने तथा बंदी हाथियों के कल्याण की दिशा में काम कर रही है।

दक्षिण भारत के लिए क्षेत्रीय कार्ययोजना जारी

समारोह में ‘Regional Action Plan for Comprehensive Understanding and Management of Human–Elephant Conflict in Southern India’ भी जारी की गई। यह कार्ययोजना कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मानव–हाथी संघर्ष के व्यापक और समन्वित प्रबंधन पर केंद्रित है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत दक्षिणी हाथी क्षेत्र वाले राज्यों, वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार इस योजना में 500 करोड़ रुपये के भारत सरकार के सहयोग का प्रावधान है।

योजना में हाथी आवासों की कनेक्टिविटी, गलियारों का संरक्षण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, संघर्ष कम करने के लिए बुनियादी ढांचा, आवास पुनर्स्थापन, सामुदायिक भागीदारी, अनुसंधान एवं निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, क्षमता निर्माण तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है।

हाथी संरक्षण पर विशेष प्रकाशन जारी

समारोह में Journal of Wildlife Science का विशेष अंक भी जारी किया गया, जो भारत में हाथी संरक्षण के तीन दशकों को समर्पित है। इसमें पिछले तीन दशकों में हाथी संरक्षण से संबंधित वैज्ञानिक ज्ञान और अनुसंधान को संकलित किया गया है।

इसके अलावा ‘Asian Elephants in Central India Before 1947’ नामक मोनोग्राफ भी जारी किया गया। इसमें वर्ष 1947 से पहले मध्य भारत में हाथियों के वितरण, स्थिति और मानव–हाथी संबंधों का ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत किया गया है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक

विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट एलिफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की।

बैठक में हाथी संरक्षण एवं प्रबंधन से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान ‘The Trumpet’ के Volume VI Issue 01, Nilgiri Elephant Reserve के लिए Model Elephant Conservation Plan, ‘Captive Elephant Husbandry: Science, Welfare and Practice’ तथा मानव–हाथी संघर्ष अध्ययन के दूसरे चरण से जुड़ी पहलें जारी की गईं।

मानव–हाथी संघर्ष पर राष्ट्रीय कार्यशाला

विश्व हाथी दिवस समारोह के तहत ‘Human–Elephant Conflict: Varying Scenarios Across India’ विषय पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें हाथी बहुल राज्यों के नियामक प्राधिकरणों, वैज्ञानिक संस्थानों और मैदानी एजेंसियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला में मानव–हाथी संघर्ष की स्थिति, रुझानों और विभिन्न क्षेत्रों में इसके अलग-अलग स्वरूपों की वैज्ञानिक आंकड़ों और मैदानी अनुभवों के आधार पर समीक्षा की गई। चर्चा में विद्युत करंट से हाथियों की मौत रोकने, रेलवे से होने वाली हाथी मृत्यु को कम करने, पशु चिकित्सा हस्तक्षेप, आवास एवं गलियारा प्रबंधन और एकीकृत लैंडस्केप दृष्टिकोण जैसे विषयों पर जोर दिया गया।

21,450 स्कूलों के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

विश्व हाथी दिवस के अवसर पर प्रोजेक्ट एलिफेंट और National Museum of Natural History के समन्वय से देशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया।

इस अभियान में 21,450 स्कूलों के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों को हाथियों के पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व तथा उनके आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए चित्रकला एवं मुखौटा निर्माण प्रतियोगिताएं, रैलियां, नुक्कड़ नाटक, जागरूकता कार्यक्रम और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए गए।

देशभर के विद्यार्थियों ने हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा की शपथ लेते हुए स्वयं को वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के युवा दूत के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

हाथियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भारत की प्रतिबद्धता

विशाखापत्तनम में आयोजित विश्व हाथी दिवस 2026 समारोह ने हाथियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर दोहराया। विज्ञान और तकनीक के उपयोग, हाथी आवास एवं गलियारों के संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से भारत का लक्ष्य हाथियों की स्वस्थ आबादी और मजबूत वन परिदृश्य को सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए देश की इस राष्ट्रीय धरोहर प्रजाति का भविष्य सुरक्षित रह सके।

विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला आयोजित, 5 वर्षों में 30 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य

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विशाखापत्तनम- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने मत्स्य पालन विभाग तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के सहयोग से 5-6 जून 2026 को विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया। दो दिवसीय इस कार्यशाला में मूल्य संवर्धन, स्थिरता, बाजार पहुंच, नवाचार और अवसंरचना विकास के माध्यम से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में एन. चंद्रबाबू नायडू,पीयूष गोयल,राजीव रंजन सिंह,किंजारापु राममोहन नायडू,चिराग पासवान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार समन्वित दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात के मूल्य में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में 30 अरब अमेरिकी डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार, स्थिरता और नए निर्यात बाजारों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

पीयूष गोयल ने रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पादों सहित मूल्य संवर्धित समुद्री खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्यातकों से हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से उपलब्ध वैश्विक बाजार अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में राज्य की अग्रणी भूमिका तथा समुद्री खाद्य निर्यात में उसके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने आंध्र प्रदेश को सतत जलीय कृषि और समुद्री खाद्य निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि भारत में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का समुद्री खाद्य निर्यात लगभग 73,890 करोड़ रुपये (8.46 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है। फ्रोजन श्रिम्प (झींगा) देश का प्रमुख निर्यात उत्पाद बना हुआ है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने उच्च मूल्य वाले समुद्री खाद्य निर्यात के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने समुद्री खाद्य क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और तकनीकी नवाचार की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया।

मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्खी ने निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अवसंरचना विकास, प्रमाणन, नवाचार, मूल्य संवर्धन और बाजार पहुंच को वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का प्रमुख आधार बताया।

कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न संस्थानों, समुद्री खाद्य निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों, उद्योग संगठनों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं तथा जलीय कृषि किसानों ने भाग लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMKSSY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी लाभ वितरित किए गए।

चर्चा सत्रों में रोग प्रबंधन, बढ़ती उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता, कोल्ड चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और सतत मत्स्य पालन जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में ट्रेसबिलिटी सिस्टम, सतत प्रमाणन, मूल्य संवर्धन, निर्यात संवर्धन, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन तथा समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए संभावित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) ढांचे पर चर्चा हुई।

कार्यशाला का समापन समुद्री खाद्य क्षेत्र में स्थिरता, ट्रेसबिलिटी, मूल्य संवर्धन, निर्यात अवसंरचना, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को भारत के समुद्री खाद्य निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नए बेस ईयर (2022–23) पर राज्य आय आंकड़ों को लेकर विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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विशाखापट्टनम- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की राष्ट्रीय लेखा प्रभाग (NAD) द्वारा 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों को नए आधार वर्ष (2022–23) के अनुसार राज्य आय और संबंधित आंकड़ों में किए गए बदलावों से अवगत कराना तथा आंकड़ों में एकरूपता, पारदर्शिता और तुलनीयता सुनिश्चित करना है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के वित्त एवं योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार, MoSPI के अतिरिक्त महानिदेशक सिद्धार्थ कुंडू, उप महानिदेशक डॉ. सुभ्रा सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) राज्यों की उधारी सीमा तय करने और केंद्र से मिलने वाले करों के बंटवारे के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने GST, e-Vahan और PFMS जैसे प्रशासनिक डेटा के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने राज्यों से ASUSE और PLFS जैसे सर्वेक्षणों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की, ताकि विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए बेहतर जिला स्तर के आंकड़े तैयार किए जा सकें।

आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव पीयूष कुमार ने कहा कि 2011–12 से 2022–23 में बेस ईयर का बदलाव अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों को सही तरीके से दर्शाने के लिए आवश्यक है। इससे राज्य और जिला स्तर पर नीति निर्माण के लिए अधिक सटीक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर अधिकारियों ने राज्यों की भूमिका को राष्ट्रीय आंकड़ों की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर के 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 125 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

निष्कर्ष: यह कार्यशाला राज्यों को नई आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप आंकड़ों को समझने और बेहतर नीति निर्माण में सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय नौसेना ने MILAN 2026 के तहत MILAN Village का किया उद्घाटन

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विशाखापट्टनम:-भारतीय नौसेना ने 15 फरवरी 2026 को पूर्वी नौसेना कमान में MILAN 2026 अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास के तहत MILAN Village का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने की। उन्होंने औपचारिक रूप से इस गांव का उद्घाटन किया और विभिन्न देशों से आए नौसैनिक प्रतिनिधियों के लिए बनाए गए सुविधाओं का निरीक्षण किया।

70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के लिए अनुभव क्षेत्र

MILAN Village को एक विशेष अनुभव क्षेत्र के रूप में तैयार किया गया है, जहां 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और नौसैनिक कर्मी दोस्ती और सहयोग के माहौल में एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह गांव सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र बनेगा, जिससे पेशेवर सहयोग से आगे बढ़कर आपसी संबंध मजबूत होंगे।

भारतीय संस्कृति की झलक और सांस्कृतिक कार्यक्रम

MILAN Village में भारत की विविध संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। यहां लाइव संगीत, पारंपरिक लोक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत को दर्शाएंगे।

हस्तशिल्प, स्मृति चिन्ह और भारतीय व्यंजन

गांव में नौसेना से जुड़े स्मृति चिन्ह, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं, जो देशभर की कारीगरी को प्रदर्शित करते हैं। इसके अलावा, आगंतुकों को भारत के विभिन्न क्षेत्रों के स्वादिष्ट व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर भी मिलेगा।

नौसैनिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर जोर

अपने संबोधन में वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने कहा कि MILAN Village नौसैनिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि विशाखापट्टनम में IFR, MILAN और IONS जैसे बड़े आयोजन एक साथ होना भारत की समुद्री कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।

MILAN 2026: हिंद-प्रशांत क्षेत्र का प्रमुख नौसैनिक अभ्यास

MILAN 2026 अभ्यास 15 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापट्टनम में आयोजित किया जाएगा। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक है, जिसमें दुनिया भर की नौसेनाएं भाग लेंगी। इस अभ्यास के दौरान पनडुब्बी रोधी युद्ध, वायु रक्षा, खोज एवं बचाव, और सुरक्षा मिशनों जैसे जटिल समुद्री अभियानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

यह अभ्यास प्रधानमंत्री के MAHASAGAR विज़न का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भारत को वैश्विक समुद्री सुरक्षा में एक प्रमुख और जिम्मेदार भागीदार के रूप में स्थापित करता है।

“मैत्री, सहयोग और समन्वय” की थीम

MILAN Village का मुख्य विषय “Camaraderie, Cooperation, Collaboration” है, जो विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच मित्रता, सहयोग और साझेदारी के मजबूत संबंधों का प्रतीक है।


इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 का विशाखापत्तनम में भव्य समापन, समुद्री विरासत और पर्यटन को मिला नया आयाम

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विशाखापत्तनम में आयोजित दो दिवसीय इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 का समापन भव्य रूप से हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि इस आयोजन ने विशाखापत्तनम को “भारत की समुद्री विरासत और तटीय संस्कृति के एक प्रकाश-स्तंभ” के रूप में स्थापित किया है।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा,

“लाइटहाउस फेस्टिवल की परिकल्पना लोगों, संस्कृति और विरासत के उत्सव के रूप में की गई थी—और विशाखापत्तनम ने सभी अपेक्षाओं से बढ़कर प्रदर्शन किया है। जीवंत प्रस्तुतियों, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों, स्थानीय हस्तशिल्प, विविध व्यंजनों, फैशन प्रस्तुतियों और रात्रिकालीन प्रकाश-सज्जा ने इस स्थल को भारत की तटीय पहचान के जीवंत उत्सव में बदल दिया। सबसे अधिक हर्ष की बात यह रही कि परिवारों, युवाओं, कलाकारों, उद्यमियों, छात्रों और आगंतुकों की उत्साही भागीदारी ने इस महोत्सव को जीवंत, समावेशी और यादगार बनाया।”

समापन सत्र में सर्बानंद सोनोवाल ने आंध्र प्रदेश के पहले लाइटहाउस संग्रहालय को विशाखापत्तनम में विकसित करने की घोषणा की। यह संग्रहालय समुद्री शिक्षा, विरासत संरक्षण और पर्यटन संवर्धन का केंद्र होगा। 75 लाइटहाउसों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की सफलता के आधार पर उन्होंने कहा कि सरकार अब देशभर में अतिरिक्त 25 लाइटहाउस विकसित करने का प्रस्ताव रखती है, जिसमें आंध्र प्रदेश में और उपयुक्त स्थलों की पहचान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि लाइटहाउस-आधारित पर्यटन को और बढ़ावा मिल सके।

सोनोवाल ने यहां से अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के विजयपुरम (जंगलिघाट) में कर्मचारियों के क्वार्टरों के पुनर्निर्माण का शिलान्यास वर्चुअल माध्यम से किया। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने गोवा के अगुआडा लाइटहाउस में लाइट एंड साउंड प्रोजेक्शन मैपिंग शो का भी वर्चुअल उद्घाटन किया।

सर्बानंद सोनोवाल ने देशभर में समुद्री सुरक्षा, विरासत और पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की। उन्होंने बताया कि असम में राष्ट्रीय जलमार्ग–2 (ब्रह्मपुत्र नदी) पर बोगीबील, सिलघाट, पांडु और बिस्वनाथघाट में चार नए लाइटहाउस बनाए जाएंगे, जिससे अंतर्देशीय जलमार्गों पर नौवहन सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

इस अवसर पर उन्होंने कहा,

“माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हमारे लाइटहाउस केवल तटों पर ही नहीं, बल्कि लोगों के हृदय और मन में भी प्रकाश फैलाएं। इस महोत्सव की सफलता स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि लाइटहाउस पर्यटन किस प्रकार स्थानीय आजीविका सृजित कर सकता है, समुद्री जागरूकता बढ़ा सकता है और तटीय समुदायों को उनके समुद्री इतिहास से भावनात्मक रूप से जोड़ सकता है।”

विशाखापत्तनम पोर्ट प्राधिकरण (VPA) और डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ लाइटहाउसेज़ एंड लाइटशिप्स (DGLL) के बीच विशाखापत्तनम में लाइटहाउस संग्रहालय के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान किया गया। इस सहयोग के अंतर्गत VPA बंदरगाह परिसर के पुराने लाइटहाउस क्षेत्र में 3,156 वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराएगा। संग्रहालय में लाइटहाउसों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें प्राचीन नौवहन साधनों से लेकर आधुनिक समुद्री सुरक्षा प्रणालियों तक के विकास और भारत की समुद्री विरासत में उनकी भूमिका को दर्शाया जाएगा।

मोदी सरकार की लाइटहाउस पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) में निर्माणाधीन 77 मीटर ऊंचे लाइटहाउस संग्रहालय का उल्लेख किया, जिस पर ₹266 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। यह विश्व के सबसे बड़े समुद्री संग्रहालयों में से एक होगा और इसका लाइटहाउस संग्रहालय दुनिया का सबसे ऊंचा माना जाएगा। यह प्रतिष्ठित संरचना लाइटहाउसों के इतिहास और विकास को प्रदर्शित करेगी तथा भारत की बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षाओं का सशक्त प्रतीक बनेगी।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल के अवसर पर विशाखापत्तनम पोर्ट पर ₹230 करोड़ की परियोजनाएं

दिन में इससे पहले, इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल 3.0 के अवसर पर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने विशाखापत्तनम पोर्ट प्राधिकरण (VPA) में ₹230 करोड़ की बंदरगाह अवसंरचना विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ करना, जहाज मरम्मत क्षमताओं का विस्तार करना, प्रशासनिक अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना और बंदरगाह कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं में सुधार करना है, जो विश्वस्तरीय, भविष्य-तैयार समुद्री अवसंरचना के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

इस अवसर पर उन्होंने कहा,

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के बंदरगाह विकास, सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इंजन के रूप में परिवर्तित हो रहे हैं। आज विशाखापत्तनम पोर्ट पर शुरू की गई पहलें क्षमता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को सुदृढ़ करती हैं, विजाग की आधुनिक समुद्री द्वार के रूप में भूमिका को मजबूत करती हैं और भारत के पूर्वी तट को सशक्त बनाती हैं।”

परियोजनाओं में LPG बर्थ पर अग्निशमन सुविधाओं का उन्नयन शामिल है, जिससे 40,000 DWT और उससे अधिक क्षमता वाले जहाजों को संभाला जा सकेगा। ₹52.24 करोड़ की यह परियोजना बंदरगाह की सुरक्षा तैयारी को काफी मजबूत करेगी।

जहाज मरम्मत और रखरखाव क्षमता बढ़ाने के लिए ORS ड्राई डॉक में अवसंरचना सुविधाओं के उन्नयन और विकास की भी शुरुआत की गई, जिस पर ₹35.87 करोड़ का निवेश होगा। यह परियोजना समुद्री मरम्मत गतिविधियों को समर्थन देगी और रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी। साथ ही, सर्बानंद सोनोवाल ने इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर (ISTC) की स्थापना की घोषणा की, जो इंडिया मैरीटाइम यूनिवर्सिटी (IMU) के अंतर्गत विशाखापत्तनम में स्थापित किया जाएगा। यह जहाज निर्माण डिजाइन, मानव संसाधन प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास तथा परीक्षण सुविधाओं के समन्वय में भारत की क्षमताओं को बढ़ाएगा।

इसके अतिरिक्त, ₹97.70 करोड़ की लागत से नए प्रशासनिक कार्यालय भवन और ₹44.20 करोड़ की लागत से हार्बर पार्क में आवासीय अपार्टमेंट्स के निर्माण की भी शुरुआत की गई, जिससे कर्मचारियों के कल्याण और कार्यक्षमता में सुधार होगा।

पिछले एक दशक में भारत के समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2024–25 में देश के 12 प्रमुख बंदरगाहों ने 855 मिलियन टन कार्गो का संचालन किया, जबकि जहाजों का औसत टर्नअराउंड समय 2014 के 96 घंटों से घटकर 2025 में 49.5 घंटे हो गया। आज, नौ भारतीय बंदरगाह वैश्विक शीर्ष 100 में शामिल हैं, जिनमें विशाखापत्तनम पोर्ट कंटेनर ट्रैफिक में शीर्ष 20 में है। सागरमाला कार्यक्रम के अंतर्गत ₹1.41 लाख करोड़ की 272 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, वहीं अंतर्देशीय जलमार्गों पर कार्गो परिवहन 700% से अधिक बढ़कर लगभग 150 मिलियन टन प्रतिवर्ष हो गया है।

इंडियन लाइटहाउस फेस्टिवल भारत की समुद्री विरासत और लाइटहाउस पर्यटन के इस परिवर्तन को प्रदर्शित करने का एक प्रमुख मंच बनकर उभरा है। पहली कड़ी सितंबर 2023 में गोवा के फोर्ट अगुआडा में, दूसरी अक्टूबर 2024 में पुरी (ओडिशा) में और तीसरी कड़ी विशाखापत्तनम में आयोजित की गई। यह महोत्सव निदेशालय जनरल ऑफ लाइटहाउसेज़ एंड लाइटशिप्स (DGLL) द्वारा पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) के अंतर्गत आयोजित किया गया।


विशाखापत्तनम में पेसा महोत्सव 2025: आदिवासी लोक संस्कृति और पंचायती राज का राष्ट्रीय उत्सव

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पंचायती राज मंत्रालय 23 एवं 24 दिसंबर 2025 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में “पेसा महोत्सव : उत्सव लोक संस्कृति का” नामक दो दिवसीय आयोजन कर रहा है। यह आयोजन पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) के अधिनियमन को चिह्नित करने के लिए किया जा रहा है। पेसा दिवस अधिनियम की वर्षगांठ के अवसर पर 24 दिसंबर को मनाया जाएगा। महोत्सव का उद्घाटन आंध्र प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री तथा पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री कोनिडाला पवन कल्याण द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज सहित केंद्र और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

इस आयोजन में सभी 10 पेसा राज्यों से लगभग 2,000 प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है, जिनमें पंचायत प्रतिनिधि, खिलाड़ी, सांस्कृतिक कलाकार आदि शामिल होंगे। पेसा महोत्सव को पेसा क्षेत्रों से आने वाले आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को मनाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है।

24 दिसंबर 2025 को पेसा से संबंधित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया जाएगा। इनमें पेसा के क्रियान्वयन की जानकारी के प्रसार और निगरानी के लिए पेसा पोर्टल, राज्यों में क्रियान्वयन की स्थिति के आकलन हेतु पेसा संकेतक, जनजातीय भाषाओं में पेसा पर प्रशिक्षण मॉड्यूल (जागरूकता और जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने के लिए) तथा हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले पर आधारित एक ई-बुक, जिसमें क्षेत्र के पारंपरिक ज्ञान, संस्कृति और विरासत का दस्तावेजीकरण किया गया है, शामिल हैं।

महोत्सव के अंतर्गत आंध्र प्रदेश के पेसा ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें सहभागी राज्यों के निर्वाचित प्रतिनिधि पेसा के दस चिन्हित विषयों पर सहभागिता करेंगे। इसके अतिरिक्त, 24 दिसंबर 2025 को सभी 10 पेसा राज्यों में भी विशेष ग्राम सभाएँ आयोजित की जाएँगी, जिनका उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को सुदृढ़ करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, परंपरागत प्रथाओं का संरक्षण, आजीविका और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना है।

महोत्सव के दौरान खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जो भारत की आदिवासी विरासत की विविधता और जीवंतता को प्रदर्शित करेगी। महोत्सव का मुख्य स्थल विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी परिसर होगा, जबकि गतिविधियाँ रामकृष्ण बीच, इंडोर स्टेडियम, क्रिकेट स्टेडियम और कलावाणी ऑडिटोरियम, विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में आयोजित की जाएँगी।

पेसा अधिनियम, 1996 के बारे में

भारत के संविधान के अनुच्छेद 243M(4)(b) के अंतर्गत संसद ने “पंचायतों के उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996” अर्थात पेसा अधिनियम का अधिनियमन किया, जिसके माध्यम से संविधान के भाग-IX के प्रावधानों को कुछ अपवादों और संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित किया गया।

अनुसूचित क्षेत्र वे क्षेत्र हैं जिन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा घोषित किया जाता है। संविधान का अनुच्छेद 244(1) तथा पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों से संबंधित प्रावधानों से संबंधित है। चूँकि ये क्षेत्र संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, इसलिए इन्हें पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र कहा जाता है। वर्तमान में पाँचवीं अनुसूची क्षेत्र 10 राज्यों—आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना—में घोषित हैं।

वार्षिक NES सम्मेलन 2025: नेवल स्कूलों में गुणवत्ता, समानता और NEP-2020 के अनुरूप परिवर्तन पर फोकस

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वार्षिक नेवी एजुकेशन सोसाइटी (NES) सम्मेलन 2025 सफलतापूर्वक 10 से 13 नवंबर 2025 तक ईस्टर्न नेवल कमांड, विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया।

सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ

सम्मेलन में कार्यकारी समिति, प्रबंधन सलाहकार समिति (MAC), और अकादमिक सलाहकार समिति (AAC) की महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें नेवल स्कूलों की नीति संरचना और संचालनात्मक पहलुओं पर चर्चा हुई, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के परिवर्तनकारी कार्यान्वयन के संदर्भ में।

  • कार्यकारी समिति की बैठक 12 नवंबर 2025 को आयोजित हुई और इसकी अध्यक्षता वी.एdm सीआर प्रवीण नायर, कंट्रोलर पर्सनल सर्विसेज और NES के अध्यक्ष ने की।

  • MAC और AAC सत्र की अध्यक्षता कमोडोर (नौसेना शिक्षा) Cmde SM उरूज अथर और NES के उपाध्यक्ष ने की।

सम्मेलन में नेवल हेडक्वार्टर से अधिकारी तथा देशभर के नेवल स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले शैक्षणिक और प्रशासनिक नेताओं ने भाग लिया।

प्रमुख गतिविधियाँ और चर्चा

  • प्रतिभागियों ने केस स्टडी प्रस्तुत कीं, जिसमें चुनौतियों और उनके समाधान की प्रभावी रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।

  • मुद्दा-आधारित चर्चाओं के माध्यम से विशेषज्ञता साझा की गई और महत्वपूर्ण कार्यात्मक मामलों पर रचनात्मक संवाद हुआ, जिससे ठोस और लागू करने योग्य समाधान तैयार हुए।

नवाचार और समावेशिता

इस बार पहली बार सम्मेलन में संकल्प स्कूलों ने भाग लिया – ये संस्थाएँ नेवल समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा, पूर्व-व्यावसायिक प्रशिक्षण और जीवन कौशल विकास को बढ़ावा देती हैं। यह कदम समावेशिता और सहयोगी विकास के प्रति NES की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य भाषण

वी.एडमनायर ने अपने मुख्य भाषण में नेवल स्कूलों में समानता और समावेशी शैक्षणिक वातावरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने पिछले वर्ष की प्रगति की समीक्षा करते हुए NEP-2020 के अनुरूप चल रहे सुधारों, मानकीकरण और नीति सुविधा में प्रगति, साथ ही बुनियादी ढांचे और शिक्षक विकास में निवेश को रेखांकित किया।

उन्होंने NES के संशोधित विज़न और मिशन स्टेटमेंट्स भी प्रस्तुत किए, जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार नागरिक बनाने के उद्देश्य से एक मजबूत मूल्य प्रणाली पर आधारित हैं। यह संशोधन NEP-2020 की परिवर्तनकारी सोच को प्रतिबिंबित करता है और उच्च गुणवत्ता, समावेशी शिक्षा प्रदान करने के NES के संकल्प को पुष्ट करता है।

उपलब्धियाँ और पुरस्कार

सम्मेलन के दौरान NES अकादमिक पुरस्कार 2024-25 प्रदान किए गए, जिससे शैक्षणिक उत्कृष्टता को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, प्रतिभागियों को विशाखापत्तनम के नेवल चिल्ड्रन स्कूलों का गाइडेड टूर भी कराया गया।


विशाखापत्तनम में ‘समुद्र शक्ति – 2025’ भारत–इंडोनेशिया संयुक्त नौसैनिक अभ्यास का पाँचवाँ संस्करण प्रारंभ

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विशाखापत्तनम- भारतीय नौसेना विशाखापत्तनम में भारत–इंडोनेशिया संयुक्त द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘समुद्र शक्ति – 2025’ के पाँचवें संस्करण की मेजबानी कर रही है। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसैनिक कमान (Eastern Naval Command – ENC) के अधीन पूर्वी बेड़े की पनडुब्बी रोधी युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती तथा इंडोनेशियाई नौसेना का युद्धपोत केआरआई जॉन ली, जो एक समेकित हेलिकॉप्टर से सुसज्जित है, भाग ले रहे हैं। केआरआई जॉन ली के विशाखापत्तनम आगमन पर ईएनसी ने गर्मजोशी से स्वागत किया।

अभ्यास का बंदरगाह चरण (Harbour Phase) मैत्री और पेशेवर तालमेल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित विभिन्न गतिविधियों पर केंद्रित है, जिनमें क्रॉस-डेक विज़िट्स, संयुक्त योग सत्र, मैत्रीपूर्ण खेल मुकाबले और विषय विशेषज्ञों के बीच पेशेवर आदान-प्रदान (SMEE) शामिल हैं।

इसके बाद समुद्री चरण (Sea Phase) में कई गतिशील और जटिल समुद्री अभियानों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें हेलिकॉप्टर संचालन, वायु रक्षा अभ्यास, हथियार फायरिंग ड्रिल्स, तथा विज़िट, बोर्ड, सर्च एंड सीज़र (VBSS) जैसे अभ्यास शामिल होंगे।

‘समुद्र शक्ति’ भारत और इंडोनेशिया के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग है, जिसका उद्देश्य अंतरसंचालन क्षमता (interoperability) को बढ़ाना, पारस्परिक समझ और सहयोग को सुदृढ़ करना, तथा सर्वोत्तम नौसैनिक प्रथाओं का आदान-प्रदान करना है।

यह अभ्यास हिंद–प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।



विशाखापत्तनम में 1-GW Google डेटा सेंटर: आंध्र प्रदेश को ₹10,000 करोड़ राजस्व और हजारों रोजगार मिलने की उम्मीद

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केंद्रीय संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री, डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने कहा कि विशाखापत्तनम में बनने वाले 1-GW हाइपरस्केल Google डेटा सेंटर से आंध्र प्रदेश के लिए लगभग ₹10,000 करोड़ का राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है।

इस परियोजना को स्वराष्ट्र आंध्र प्रदेश की प्रगति और आत्मनिर्भरता की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस परियोजना में अगले पांच वर्षों (2026–2030) में लगभग $15 बिलियन (USD) का निवेश किया जाएगा। यह निवेश राज्य में 5,000–6,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 20,000–30,000 कुल रोजगार उत्पन्न करेगा। साथ ही यह विशाखापत्तनम में आवश्यक मानव संसाधन, आधारभूत संरचना, विद्युत और कूलिंग सुविधाओं को लाएगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण गुणक प्रभाव (Multiplier Effect) पड़ेगा।

डॉ. चंद्रशेखर यह बात नई दिल्ली में आयोजित भारत एआई शक्ति (Bharat AI Shakti) कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में कही, जहां Google ने विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) केंद्र की स्थापना की घोषणा की। इस परियोजना में भारत का पहला गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर और Google का भारत में पहला AI हब शामिल होगा।

मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आंध्र प्रदेश के विकास के लिए प्रदान किए गए समर्थन की सराहना की और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू तथा नारा लोकेश के निरंतर प्रयासों की प्रशंसा की, जिन्होंने Google को आंध्र प्रदेश लाने में योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य को डिजिटल हब के रूप में स्थापित करने और पूरे भारत में AI-संचालित परिवर्तन को तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित थे:

  • अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री

  •  निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामले मंत्री

  • एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश

  • नारा लोकेश, आईटी मंत्री, आंध्र प्रदेश

  •  थॉमस क्यूरी, CEO, Google Cloud

28वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन 2025: विकसित भारत के लिए सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण

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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के सहयोग से, 28वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (NCeG) 2025 आयोजित कर रहे हैं। इस वर्ष का थीम है: “विकसित भारत: सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण”

उद्घाटन और प्रमुख अतिथि

इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश और डॉ. जितेन्द्र सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, कर्मचारी, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार द्वारा किया जाएगा।

सम्मेलन में पवन कल्याण, उपमुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश और एन. लोकेश, आईटी एवं मानव संसाधन विकास मंत्री, आंध्र प्रदेश भी उपस्थित रहेंगे।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025

सम्मेलन के दौरान 19 उत्कृष्ट पहलों को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा:

  • 10 स्वर्ण, 6 रजत, और 3 जूरी पुरस्कार।

  • पुरस्कार छह श्रेणियों में – केंद्रीय, राज्य, जिला प्राधिकरण, ग्राम पंचायत और शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थान को प्रदान किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों, उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाकर सुरक्षित और सतत ई-सेवा प्रदान करने के नवाचारी और रूपांतरकारी तरीकों पर चर्चा करना है।

सम्मेलन संरचना और विषय

  • 6 मुख्य सत्र (Plenary Sessions) और 6 उप-सत्र (Breakout Sessions)।

  • लगभग 70 वक्ता विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे, जैसे:

    • विशाखापत्तनम को आईटी हब के रूप में विकसित करना

    • विकसित भारत के लिए एआई: समावेशी और स्केलेबल समाधान

    • सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण

    • ई-गवर्नेंस में साइबर सुरक्षा

    • सेवा वितरण में उत्कृष्टता और मानक निर्धारण

    • एग्री स्टैक: कृषि के लिए डिजिटल समाधान

    • स्वर्ण पुरस्कार विजेताओं द्वारा ई-गवर्नेंस पहलों में उत्कृष्टता

    • ग्राम पंचायत स्तर पर नवाचार

    • आंध्र प्रदेश सरकार की ई-गवर्नेंस पहल

    • डिजिटल सशक्तिकरण के लिए नवाचार

    • अंतर्राष्ट्रीय अंडरसी केबल और एआई डेटा सेंटर

सम्मेलन में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। एक प्रदर्शनी (Exhibition) भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत की ई-गवर्नेंस में उपलब्धियों और पिछले वर्षों के पुरस्कार विजेताओं की फोटो प्रदर्शनी दिखाई जाएगी

सम्मेलन में संबोधन देंगे:

  • वी. श्रीनिवास, सचिव, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग

  • एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

  • के. विजयानंद, मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश सरकार

  • सरिता चौहान, संयुक्त सचिव, DARPG द्वारा विशाखापत्तनम घोषणा 2025 प्रस्तुत की जाएगी।


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