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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने IIS और ISS अधिकारी प्रशिक्षुओं से कहा—सुशासन, जनसेवा और सत्यनिष्ठा को दें सर्वोच्च प्राथमिकता

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भारतीय सूचना सेवा (IIS) और भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) के अधिकारी प्रशिक्षुओं के एक समूह ने आज (19 अगस्त, 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भेंट की।

अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा के कार्य भले ही अलग-अलग हों, लेकिन दोनों का साझा उद्देश्य सुशासन की गुणवत्ता को मजबूत करना और देश की जनता की सेवा करना है। प्रभावी संचार और विश्वसनीय सूचना एक जीवंत एवं उत्तरदायी लोकतंत्र के आवश्यक स्तंभ हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारी प्रशिक्षु जब अपने करियर की शुरुआत करें, तो उन्हें निरंतर सीखते और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालते रहना चाहिए। प्रौद्योगिकी, मीडिया, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक नीति की दुनिया तेजी से बदल रही है। उन्होंने उन्हें जिज्ञासु बने रहने, नई दक्षताएँ विकसित करने और अनुभव से सीखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने निर्णयों में विवेकपूर्ण, व्यवहार में संवेदनशील तथा ईमानदारी के प्रति अडिग रहना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी के साथ लोगों की निष्पक्षता, विनम्रता और समर्पण के साथ सेवा करने की गहरी जिम्मेदारी भी जुड़ी है।



राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सूचना सेवा ने सरकार और नागरिकों के बीच जुड़ाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने नागरिकों के सूचना प्राप्त करने, साझा करने और उस पर प्रतिक्रिया देने के तरीके को मौलिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों को सलाह दी कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग केवल सूचना देने और लोगों से जुड़ने के लिए ही नहीं, बल्कि लोगों की चिंताओं को सुनने, समझने और उनका जवाब देने के लिए भी करें। उन्होंने कहा कि ऐसे वातावरण में, जहाँ सूचना बहुत तेजी से फैलती है, उनके संचार का मार्गदर्शन हमेशा सटीकता, विश्वसनीयता और जनहित से होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी, क्योंकि एक जागरूक नागरिक विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने में सक्षम होता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज की डेटा-आधारित दुनिया में सार्वजनिक नीतियों की गुणवत्ता काफी हद तक सटीक, समयबद्ध और विश्वसनीय आँकड़ों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। भारतीय सांख्यिकी सेवा आधिकारिक आँकड़ों के निर्माण, विश्लेषण और व्याख्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जो हमारे करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों का आधार बनते हैं।



उन्होंने कहा कि भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों का कार्य अर्थव्यवस्था और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को समर्थन देगा। उन्होंने उन्हें हमेशा याद रखने की सलाह दी कि हर आँकड़े के पीछे वास्तविक लोग और उनका जीवन होता है। उन्होंने अधिकारियों से आँकड़ों को नागरिकों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के लिए अधिक सुलभ बनाने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक, विश्वसनीय और प्रौद्योगिकी-सक्षम सांख्यिकीय व्यवस्था के निर्माण में उनका योगदान विकसित भारत (Viksit Bharat) की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

नए बेस ईयर (2022–23) पर राज्य आय आंकड़ों को लेकर विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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विशाखापट्टनम- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की राष्ट्रीय लेखा प्रभाग (NAD) द्वारा 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों को नए आधार वर्ष (2022–23) के अनुसार राज्य आय और संबंधित आंकड़ों में किए गए बदलावों से अवगत कराना तथा आंकड़ों में एकरूपता, पारदर्शिता और तुलनीयता सुनिश्चित करना है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के वित्त एवं योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार, MoSPI के अतिरिक्त महानिदेशक सिद्धार्थ कुंडू, उप महानिदेशक डॉ. सुभ्रा सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) राज्यों की उधारी सीमा तय करने और केंद्र से मिलने वाले करों के बंटवारे के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने GST, e-Vahan और PFMS जैसे प्रशासनिक डेटा के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने राज्यों से ASUSE और PLFS जैसे सर्वेक्षणों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की, ताकि विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए बेहतर जिला स्तर के आंकड़े तैयार किए जा सकें।

आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव पीयूष कुमार ने कहा कि 2011–12 से 2022–23 में बेस ईयर का बदलाव अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों को सही तरीके से दर्शाने के लिए आवश्यक है। इससे राज्य और जिला स्तर पर नीति निर्माण के लिए अधिक सटीक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर अधिकारियों ने राज्यों की भूमिका को राष्ट्रीय आंकड़ों की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर के 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 125 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

निष्कर्ष: यह कार्यशाला राज्यों को नई आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप आंकड़ों को समझने और बेहतर नीति निर्माण में सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रशासनिक डेटा समन्वय पर राष्ट्रीय कार्यशाला 24 फरवरी को विज्ञान भवन में

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कार्यशाला का उद्देश्य

यह कार्यशाला आगामी राष्ट्रीय स्तर के विचार-विमर्श शिखर सम्मेलन “डेटा फॉर डेवलपमेंट” (अप्रैल 2026) की तैयारी का हिस्सा है।
यह सम्मेलन दिसंबर 2025 में आयोजित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद आयोजित किया जा रहा है।

इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य है:

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक डेटा प्रणालियों को मजबूत करना

  • विभिन्न विभागों के डेटा का जिम्मेदार और संरचित तरीके से समन्वय (हर्मोनाइजेशन) करना

  • राष्ट्रीय स्तर पर सुधार के प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करना

परामर्श कार्यशाला के प्रमुख लक्ष्य

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को डेटा समन्वय से जुड़े उद्देश्य, दायरा और प्रमुख मुद्दों की जानकारी देना

  • सरकारी, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, उद्योग, थिंक टैंक और शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श

  • प्रशासनिक डेटा के सफल उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत करना

  • राज्य स्तर की कार्यशालाओं से प्राप्त सुझावों को राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में चर्चा हेतु तैयार करना

प्रतिभागी

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के योजना एवं आईटी विभाग के अधिकारी

  • केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारी

  • अन्य संबंधित हितधारक (स्टेकहोल्डर्स)


खाद्य तेल क्षेत्र में सख्त निगरानी: संशोधित VOPPA आदेश 2025 के तहत नियामक ढांचा मजबूत

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भारत सरकार ने वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन एवं उपलब्धता (विनियमन) संशोधन आदेश, 2025 (VOPPA आदेश, 2025) के माध्यम से खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में नियामक निगरानी को और सुदृढ़ किया है। संशोधित आदेश के तहत सभी खाद्य तेल निर्माता, प्रोसेसर, ब्लेंडर एवं री-पैकर के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और VOPPA पोर्टल (www.edibleoilindia.in) पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, उत्पादन, भंडारण और उपलब्धता से संबंधित मासिक विवरण (रिटर्न) दाखिल करना भी अनिवार्य किया गया है।

मासिक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य

संशोधित VOPPA आदेश, 2025 के अनुसार अब कंपनियों को उत्पादन, स्टॉक, आयात, प्रेषण, बिक्री और खपत से संबंधित मासिक रिटर्न दाखिल करने होंगे। इसमें कच्चा एवं परिष्कृत वनस्पति तेल, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टेड तेल, ब्लेंडेड ऑयल, वनस्पति घी, मार्जरीन तथा अन्य अधिसूचित उत्पाद शामिल हैं। यह व्यवस्था पारदर्शी और डेटा-आधारित खाद्य तेल प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे नीति निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

देशभर में निरीक्षण एवं अनुपालन अभियान

देशव्यापी अनुपालन अभियान के तहत खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण अभियान चलाए गए। इन निरीक्षणों में NSWS/VOPPA पंजीकरण की स्थिति, मासिक रिटर्न की सटीकता और समयबद्धता की जांच की गई तथा उद्योग से संवाद कर अनुपालन को बढ़ावा दिया गया।

इसके साथ ही विभाग द्वारा क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सटीक डेटा रिपोर्टिंग, NSWS पंजीकरण, VOPPA पोर्टल के उपयोग और समय पर रिटर्न दाखिल करने पर प्रशिक्षण दिया गया। इसी तरह की कार्यशालाएं अन्य प्रमुख राज्यों में भी आयोजित की जाएंगी।

गैर-अनुपालन पर कारण बताओ नोटिस

निरीक्षणों और समीक्षा के आधार पर विभाग ने कुछ बड़ी खाद्य तेल कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने बार-बार स्मरण, ई-मेल और फोन कॉल के बावजूद अनिवार्य मासिक उत्पादन रिटर्न जमा नहीं किए। यह संशोधित VOPPA आदेश, 2025 का उल्लंघन है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अंतर्गत जारी किया गया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम की धारा 6A के तहत उल्लंघन की स्थिति में निरीक्षण और जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है, जबकि धारा 6B के अनुसार जब्ती से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके तहत संबंधित इकाइयों को 7 दिन का समय दिया गया है कि वे लिखित जवाब प्रस्तुत करें।

आगे भी जारी रहेगी सख्ती

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो इकाइयाँ VOPPA ढांचे के तहत पंजीकृत नहीं हैं या जिन्होंने अनिवार्य रिटर्न दाखिल नहीं किए हैं, उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे, ताकि पूरे क्षेत्र में समान अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा जनवरी 2026 में हरियाणा और राजस्थान सहित अन्य क्षेत्रों में खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाइयों का निरीक्षण प्रस्तावित है।

सरकार ने दोहराया है कि वह खाद्य तेल क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रभावी नीति निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

MoSPI ने नया लोगो और शुभंकर ‘सांख्यिकी’ का अनावरण किया

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1 जनवरी 2026 को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने मंत्रालय के लिए नया लोगो और शुभंकर (मास्कॉट) का अनावरण किया।

यह पहल MoSPI की संस्थागत पहचान के आधुनिकीकरण, जनसंपर्क को सशक्त बनाने तथा राष्ट्र निर्माण में आधिकारिक सांख्यिकी की भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

लोगो

MoSPI का नया लोगो राष्ट्र के विकास में आंकड़ों के महत्व को दर्शाता है और डेटा-आधारित शासन, पारदर्शिता एवं प्रगति को बढ़ावा देने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सांख्यिकीय विज्ञान से प्रेरित यह लोगो मंत्रालय के संदेश “Data for Development” (विकास के लिए डेटा) को अभिव्यक्त करता है।

लोगो में अशोक चक्र सत्य, पारदर्शिता और सुशासन का प्रतीक है। केंद्र में स्थित रुपया चिह्न (₹) आर्थिक नियोजन, नीति निर्माण और राष्ट्रीय विकास में सांख्यिकी की अहम भूमिका को दर्शाता है। संख्याओं और प्रतीकों का उपयोग आधुनिक डेटा प्रणालियों और सांख्यिकीय विज्ञान को प्रतिबिंबित करता है।

ऊपर की ओर बढ़ता हुआ विकास स्तंभ प्रगति को दर्शाता है और यह बताता है कि किस प्रकार विश्वसनीय डेटा सतत आर्थिक विकास को समर्थन देता है। केसरिया, सफेद, हरा और गहरा नीला रंग भारत के राष्ट्रीय मूल्यों—विकास, सत्य, सततता, स्थिरता और ज्ञान—का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मिलकर आधिकारिक सांख्यिकी में विश्वास और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करते हैं।

शुभंकर (मास्कॉट)

MoSPI ने अपना नया शुभंकर “सांख्यिकी” प्रस्तुत किया है, जो एक मैत्रीपूर्ण और नागरिक-केंद्रित चरित्र है। इसका उद्देश्य देशभर के लोगों के लिए सांख्यिकी को सरल, सुलभ और रोचक बनाना है। यह शुभंकर MoSPI के सटीकता, पारदर्शिता और डेटा-आधारित शासन जैसे मूल्यों को दर्शाता है तथा आम जनता के लिए आंकड़ों को आसान तरीके से प्रस्तुत करता है।

एक विश्वसनीय और बुद्धिमान व्यक्तित्व के रूप में डिज़ाइन किया गया “सांख्यिकी”, जटिल सांख्यिकीय अवधारणाओं को सरल और दृश्यात्मक तरीके से समझाने में मदद करेगा। MoSPI की सार्वजनिक पहचान के रूप में यह शुभंकर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षणों, जागरूकता अभियानों, शैक्षणिक सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्मों और सार्वजनिक आयोजनों में उपयोग किया जाएगा। इसका शुभारंभ एनएसओ सर्वेक्षणों में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने और एक सुसंगत एवं पहचान योग्य दृश्य उपस्थिति के माध्यम से आधिकारिक सांख्यिकी में विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जॉर्ज कुरियन ने ‘मरीन फिशरीज़ जनगणना 2025’ और व्यास ऐप्स का शुभारंभ किया — मत्स्य क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की ओर ऐतिहासिक कदम

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कोच्चि में आज आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मरीन फिशरीज़ जनगणना (Marine Fisheries Census - MFC) 2025 के घरेलू सर्वेक्षण की शुरुआत की और VYAS–BHARAT तथा VYAS–SUTRA मोबाइल ऐप्स लॉन्च किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि एमएफसी 2025 का शुभारंभ भारत में मत्स्य क्षेत्र की गणना प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक डिजिटल परिवर्तन का प्रतीक है। परंपरागत कागज-आधारित पद्धति से पूर्णत: डिजिटल रूप में परिवर्तन करते हुए, यह जनगणना अब तक का सबसे व्यापक, सूक्ष्म और भौगोलिक रूप से संदर्भित राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार करेगी, जिससे साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण को नई दिशा मिलेगी।

जॉर्ज कुरियन ने मत्स्यपालन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार मत्स्यजनों के कल्याण के लिए ट्रांसपोंडर, टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस जैसी कई वैज्ञानिक तकनीकों को नि:शुल्क उपलब्ध करा रही है। उन्होंने मछुआरों और मछली किसानों से NFDP पोर्टल पर पंजीकरण कराने का आग्रह किया ताकि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।

एमएफसी 2025: एक ऐतिहासिक डिजिटल पहल और प्रौद्योगिकी आधारित मत्स्य कल्याण

पूर्णत: डिजिटल और भू-संदर्भित जनगणना

एमएफसी 2025 अपने पूर्ववर्ती संस्करणों (2005, 2010, 2016) से एक बड़ा परिवर्तन है। यह लगभग 12 लाख मछुआरा परिवारों को कवर करेगी, जो 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप सहित) के 5,000 गांवों में फैले हैं।

गणना अवधि

घरेलू सर्वेक्षण 3 नवंबर से 18 दिसंबर 2025 तक 45 दिनों तक चलेगा।

डिजिटल आर्किटेक्चर

यह प्रक्रिया ICAR–सेंट्रल मरीन फिशरीज़ रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMFRI) द्वारा विकसित बहुभाषी एंड्रॉइड एप्स –

  • VYAS–NAV (गांवों और बंदरगाहों का सत्यापन),

  • VYAS–BHARAT (घरेलू और बुनियादी ढांचे की गणना),

  • VYAS–SUTRA (रीयल-टाइम निगरानी और पर्यवेक्षण)
    पर आधारित है।

सटीकता और दक्षता

रीयल-टाइम, भू-संदर्भित डाटा संग्रहण से मानवीय त्रुटियाँ समाप्त होंगी और डाटा प्रोसेसिंग तेज़ होगी।

निगरानी और नियंत्रण

पूरा अभियान बहु-स्तरीय वेब डैशबोर्ड्स और सुपरवाइजरी ऐप के माध्यम से मॉनिटर किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

प्रौद्योगिकी एकीकरण और ड्रोन सर्वेक्षण

ड्रोन तकनीक का उपयोग प्रमुख मछली बंदरगाहों पर नावों और मत्स्य उपकरणों की एरियल गणना के लिए किया जा रहा है।
पूर्वी तट पर – विशाखापट्टनम, काकीनाडा, तूतीकोरिन,
पश्चिमी तट पर – मंगलुरु, बेयपोर, पुथियप्पा जैसे केंद्र शामिल हैं।

सटीक और लक्षित कल्याण के लिए विस्तृत डाटा संग्रहण

एमएफसी 2025 में पहली बार विस्तृत सामाजिक-आर्थिक जानकारी शामिल की जा रही है, जैसे –

  • परिवार की कुल आय

  • गृहस्वामित्व

  • ऋण स्थिति और वित्तीय स्रोत

  • बीमा कवरेज

  • कोविड-19 के प्रभाव

  • पीएम–एमकेएसएसवाई जैसी योजनाओं से प्राप्त लाभ

इसके अलावा, फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FFPOs) और सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स (SHGs) के लिए भी नए सर्वेक्षण फॉर्म तैयार किए गए हैं।

पृष्ठभूमि

यह राष्ट्रीय मरीन फिशरीज़ जनगणना 2025, भारत सरकार के मत्स्यपालन विभाग द्वारा पूर्ण वित्तपोषित है।
इसका संचालन ICAR–CMFRI (नोडल एजेंसी) और फिशरी सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) के सहयोग से किया जा रहा है।
यह भारत में मत्स्य समुदाय का सबसे बड़ा और व्यापक “स्मार्ट जनगणना, स्मार्ट मत्स्य” अभियान है, जो महिला और युवाओं के सशक्तिकरण के साथ-साथ जलवायु-समर्थ, समावेशी विकास को प्रोत्साहित करेगा।

निष्कर्ष

एमएफसी 2025 भारत की मत्स्य नीति में एक नया युग लेकर आ रहा है — डिजिटल, पारदर्शी और सशक्तिकरण-उन्मुख। यह पहल न केवल डाटा आधारित नीति निर्माण को सक्षम करेगी, बल्कि मत्स्य समुदाय के कल्याण, आजीविका और सशक्तिकरण के लिए एक ठोस आधार भी तैयार करेगी।


राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ की संवादात्मक बैठक, राज्य की सांख्यिकीय प्रणाली का लिया अवलोकन

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लखनऊ- राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक संवादात्मक बैठक का आयोजन किया, जिसमें राज्य की सांख्यिकीय प्रणाली का अवलोकन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य आधिकारिक सांख्यिकी की गुणवत्ता, समयबद्धता और पद्धतिगत स्थिरता को सुधारना तथा राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुमानों में पारदर्शिता और मजबूती सुनिश्चित करना था।

बैठक में प्रो. राजीव लक्ष्मण करंडिकर, अध्यक्ष, NSC, प्रो. ए. गणेश कुमार, प्रो. देबासीस कुंडु, और आशित कुमार साधु, आयोग के सदस्य, के साथ-साथ डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) एवं सदस्य सचिव, NSC उपस्थित रहे। बैठक में MoSPI के वरिष्ठ अधिकारी और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख अधिकारी भी शामिल हुए। आयोग ने सांख्यिकी की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए पद्धतिगत विकास और क्षमता निर्माण के महत्व पर बल दिया।

बैठक का शुभारंभ अल्का बहुगुणा धौंड़ियाल, निदेशक, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES), द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने विकसित उत्तर प्रदेश और भारत @2047 की दृष्टि को प्राप्त करने में सटीक, विस्तारपूर्ण और समयोचित डेटा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय सांख्यिकी योजना बनाने, निगरानी और विकासात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है।

अलोक कुमार, प्रमुख सचिव (योजना), उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था (OTD) मिशन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने मुख्यमंत्री की दृष्टि साझा की, जिसमें उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अग्रणी योगदानकर्ता बनाने की दिशा पर जोर दिया गया। उन्होंने समर्थ यूपी पोर्टल, फैमिली आईडी डेटाबेस और महिला आर्थिक सशक्तिकरण (WEE) सूचकांक जैसी कई पहलें साझा कीं, जो डेटा-आधारित निर्णय लेने और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हैं।

DES टीम द्वारा प्रस्तुतियाँ राज्य में सांख्यिकीय अवसंरचना मजबूत करने में प्रगति को दर्शाती हैं। तकनीकी सत्रों में GSDP अनुमान, जिला घरेलू उत्पाद (DDP) की तैयारी, प्रशासनिक और सर्वेक्षण डेटा के उपयोग से बॉटम-अप दृष्टिकोण शामिल थे। महाकुंभ जैसे बड़े पैमाने की घटनाओं से आर्थिक गतिविधियों का मूल्यांकन और Periodic Labour Force Survey (PLFS) तथा All-India Survey on Unincorporated Sector Enterprises (ASUSE) के पायलट सर्वेक्षण पर भी प्रस्तुति दी गई।

डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, MoSPI ने प्रशासनिक डेटा के एकीकरण, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के अपनाने और सांख्यिकीय प्रक्रिया में पद्धतिगत पारदर्शिता बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डेटा स्रोतों का समन्वय, आधुनिक उपकरणों जैसे GIS और डैशबोर्ड का उपयोग, और डेटा की उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभता प्रभावी शासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

NSC के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश सरकार की सांख्यिकीय प्रणाली को आधुनिक बनाने और विभागों में डेटा सिस्टम को एकीकृत करने की पहल की सराहना की। उन्होंने राज्य को अनुमानों की विधियों को सुधारने, सैम्पलिंग डिज़ाइन मजबूत करने और MoSPI के सहयोग से मानकीकृत मानकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। आयोग ने राज्य को पद्धतिगत कठोरता बढ़ाने और सांख्यिकीय संकलन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन और समर्थन देने का आश्वासन दिया।

MoSPI और राज्य योजना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने GSDP, वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) और मूल्य सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण सांख्यिकीय क्षेत्रों पर विचार साझा किए। दोनों पक्षों ने जिला स्तर पर डेटा की विस्तारशीलता सुधारने और रीयल-टाइम निगरानी और प्रसार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने के महत्व पर बल दिया।

बैठक में WEE सूचकांक, फैमिली आईडी पहल और शिकायत निवारण एवं कार्यक्रम निगरानी डैशबोर्ड जैसी सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों पर भी चर्चा हुई। इन पहलों को संपूर्ण डेटा प्रबंधन और बेहतर सेवा वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में मान्यता दी गई। NSC के सदस्यों ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि डेटा को प्रभावी ढंग से समावेशिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

समापन सत्र में डॉ. के. वी. राजू, आर्थिक सलाहकार, माननीय मुख्यमंत्री और अवनीश कुमार अवस्थी, सलाहकार, माननीय मुख्यमंत्री ने राज्य की साक्ष्य-आधारित योजना और डेटा-आधारित शासन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग तथा MoSPI द्वारा प्रदान किए गए मूल्यवान मार्गदर्शन और तकनीकी समर्थन की सराहना की।

बैठक का समापन NSC के अध्यक्ष, प्रो. राजीव लक्ष्मण करंडिकर के अभिभाषण के साथ हुआ, जिन्होंने मजबूत और पारदर्शी सांख्यिकीय प्रणाली बनाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने संस्थागत क्षमता निर्माण में दृश्यमान प्रगति की है और GSDP अनुमानों में पद्धतिगत सुधार जारी रखने के महत्व पर जोर दिया, ताकि वास्तविक और साक्ष्य-आधारित रुझानों को परिलक्षित किया जा सके।


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के बीच उच्च स्तरीय वार्ता

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के अध्यक्ष प्रो. राजीव लक्ष्मण करंदीकरआयोग के सदस्य प्रो. ए गणेश कुमार ,असित कुमार साधु और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के सचिव और एनएससी के सदस्य सचिव डॉ. सौरभ गर्ग के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। यह बैठक राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग और उत्तर प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) के बीच एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवाद से पहले आयोजित की गई।

उत्तर प्रदेश की सांख्यिकीय प्रणाली को सुदृढ़ बनाना इस बैठक में चर्चा का मुख्य विषय था ताकि राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में सहायता मिल सके। मुख्यमंत्री ने आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधारविशेष रूप से राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)उपभोक्ता मूल्य सूचकांकरोज़गार संकेतकों और औद्योगिक सांख्यिकी के आकलन में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) की ओर से सहयोग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने सीएम डैशबोर्ड और वन ट्रिलियन इकोनॉमी मिशन जैसी पहलों के माध्यम से आंकड़ों पर आधारित योजना बनाने और वास्तविक समय पर निगरानी के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर भी बल दिया।बैठक में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के अध्यक्ष ने साक्ष्य-आधारित लोक नीति निर्माण में विश्वसनीय सांख्यिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) अनुमानमूल्य सांख्यिकी और सर्वेक्षण डिज़ाइन जैसे पद्धतिगत और तकनीकी क्षेत्रों में राज्य को सहयोग देने के लिए राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने यह भी कहा कि शासन के सभी स्तरों पर आंकड़ों की सटीकतातुलना की योग्यता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय और राज्य-स्तरीय सांख्यिकीय प्रणालियों का सामंजस्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने "सांख्यिकी सुदृढ़ीकरण के लिए सहायता (एसएसएस)" योजना के अंतर्गत राज्य के साथ मंत्रालय के निरंतर सहयोग पर बल दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि उत्तर प्रदेश को आधुनिक सांख्यिकीय अवसंरचना के विकासडेटा प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने और उभरती हुई पद्धतियों तथा प्रौद्योगिकियों के संबंध में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधिकारियों के प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के आयोजन के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जाती रहेगी।

इस दौरान, कई सांख्यिकीय क्षेत्रों में राज्य की प्रगति की सराहना की गई। फिलहाल, उत्तर प्रदेश उन प्रमुख राज्यों में से एक है जिनमें मुद्रास्फीति की दर सबसे कम है और यह नियमित रूप से राज्य-स्तरीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) जारी करता है। उत्तर प्रदेश का आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस)घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (एचसीईएस) और असंगठित क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण (एएसयूएसई) जैसे राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है। बैठक में जीडीपी और आईआईपी के लिए आधार वर्ष को 2022-23 में संशोधित करने पर चर्चा की गई और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने नई सामग्री बास्केट और फ़ैक्टरी फ़्रेम विकसित करने में पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

आयोग ने सांख्यिकीय आंकड़ों को शासन और विकास योजना के साथ एकीकृत करने में उत्तर प्रदेश के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) के प्रयासों की सराहना की। राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के अध्यक्ष ने राज्य को डिजिटल और सेवा-आधारित आर्थिक गतिविधियों से जुड़े नए और उभरते क्षेत्रों को शामिल करने के लिए अपने सांख्यिकीय कवरेज का और विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने पद्धतिगत समीक्षाओं के माध्यम से जिला स्तर पर आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

मुख्यमंत्री ने सुझावों का स्वागत किया और कहा कि राज्य सरकार सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के साथ घनिष्ठ सहयोग के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि कृषिउद्योगस्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रगति को मापने के लिए मज़बूत और विश्वसनीय आंकड़े आवश्यक हैं। उन्होंने राज्य में सभी सांख्यिकीय पहलों के लिए निरंतर संस्थागत समर्थन का आश्वासन दिया।

बैठक में प्रशासनिक और वैकल्पिक डेटा स्रोतों के उपयोग तथा वास्तविक समय में रिपोर्टिंग के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने और राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली के अनुरूप एक समान मानकों को अपनाने के महत्व पर भी चर्चा हुई। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने बताया कि नियमित परामर्शक्षमता निर्माण कार्यक्रमों और डिजिटल पहलों के माध्यम से राज्यों को स्थानीय और क्षेत्रीय विकास के लिए सांख्यिकीय आंकड़ों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए सक्षम बनाया जा रहा है।

यह वार्ता केंद्र और राज्य सांख्यिकीय एजेंसियों के बीच मज़बूत समन्वय की दिशा में सकारात्मक कदम है। दोनों पक्षों ने उत्तर प्रदेश के आर्थिक परिवर्तन और समावेशी विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में प्रभावकारी सहायता के लिए पारदर्शीप्रौद्योगिकी-सक्षम और डेटा-संचालित सांख्यिकीय ढांचा विकसित करने के अपने साझा उद्देश्यों की पुष्टि की।

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