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नए बेस ईयर (2022–23) पर राज्य आय आंकड़ों को लेकर विशाखापट्टनम में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन

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विशाखापट्टनम- सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की राष्ट्रीय लेखा प्रभाग (NAD) द्वारा 8 से 10 अप्रैल 2026 तक आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों को नए आधार वर्ष (2022–23) के अनुसार राज्य आय और संबंधित आंकड़ों में किए गए बदलावों से अवगत कराना तथा आंकड़ों में एकरूपता, पारदर्शिता और तुलनीयता सुनिश्चित करना है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के वित्त एवं योजना विभाग के प्रधान सचिव पीयूष कुमार, MoSPI के अतिरिक्त महानिदेशक सिद्धार्थ कुंडू, उप महानिदेशक डॉ. सुभ्रा सरकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

अपने संबोधन में डॉ. सौरभ गर्ग ने कहा कि राज्य सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) राज्यों की उधारी सीमा तय करने और केंद्र से मिलने वाले करों के बंटवारे के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है। उन्होंने GST, e-Vahan और PFMS जैसे प्रशासनिक डेटा के अधिक उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने राज्यों से ASUSE और PLFS जैसे सर्वेक्षणों में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की, ताकि विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के लिए बेहतर जिला स्तर के आंकड़े तैयार किए जा सकें।

आंध्र प्रदेश के प्रधान सचिव पीयूष कुमार ने कहा कि 2011–12 से 2022–23 में बेस ईयर का बदलाव अर्थव्यवस्था में आए संरचनात्मक परिवर्तनों को सही तरीके से दर्शाने के लिए आवश्यक है। इससे राज्य और जिला स्तर पर नीति निर्माण के लिए अधिक सटीक और अद्यतन आंकड़े उपलब्ध होंगे।

इस अवसर पर अधिकारियों ने राज्यों की भूमिका को राष्ट्रीय आंकड़ों की विश्वसनीयता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए समय पर और सटीक डेटा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

इस तीन दिवसीय कार्यशाला में देशभर के 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से लगभग 125 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

निष्कर्ष: यह कार्यशाला राज्यों को नई आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप आंकड़ों को समझने और बेहतर नीति निर्माण में सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रशासनिक डेटा समन्वय पर राष्ट्रीय कार्यशाला 24 फरवरी को विज्ञान भवन में

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कार्यशाला का उद्देश्य

यह कार्यशाला आगामी राष्ट्रीय स्तर के विचार-विमर्श शिखर सम्मेलन “डेटा फॉर डेवलपमेंट” (अप्रैल 2026) की तैयारी का हिस्सा है।
यह सम्मेलन दिसंबर 2025 में आयोजित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद आयोजित किया जा रहा है।

इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य है:

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक डेटा प्रणालियों को मजबूत करना

  • विभिन्न विभागों के डेटा का जिम्मेदार और संरचित तरीके से समन्वय (हर्मोनाइजेशन) करना

  • राष्ट्रीय स्तर पर सुधार के प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करना

परामर्श कार्यशाला के प्रमुख लक्ष्य

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को डेटा समन्वय से जुड़े उद्देश्य, दायरा और प्रमुख मुद्दों की जानकारी देना

  • सरकारी, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, उद्योग, थिंक टैंक और शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श

  • प्रशासनिक डेटा के सफल उपयोग के उदाहरण प्रस्तुत करना

  • राज्य स्तर की कार्यशालाओं से प्राप्त सुझावों को राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में चर्चा हेतु तैयार करना

प्रतिभागी

  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के योजना एवं आईटी विभाग के अधिकारी

  • केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारी

  • अन्य संबंधित हितधारक (स्टेकहोल्डर्स)


राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय प्रस्तावित करेगा जुलाई 2026–जून 2027 में प्रवासन पर सर्वेक्षण

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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने जुलाई 2026 से जून 2027 के दौरान प्रवासन पर सर्वेक्षण करने का प्रस्ताव रखा है।

MoSPI समय-समय पर प्रवासन सर्वेक्षण आयोजित करता रहा है; सबसे हालिया प्रवासन डेटा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2020–21 और मल्टीपल इंडिकेटर सर्वे (2020–21) के माध्यम से एकत्र किए गए थे। आगामी प्रवासन सर्वेक्षण ग्रामीण–शहरी और राज्य-स्तरीय प्रवासन की सीमा और पैटर्न, प्रवासन के कारण, वापसी प्रवासन, मौसमी प्रवासन, प्रवासियों की रोजगार प्रोफाइल आदि पर व्यापक और अद्यतन डेटा प्रदान करेगा।

इस सर्वेक्षण के परिणाम श्रम गतिशीलता, रेमिटेंस प्रवाह और संबंधित पहलुओं को समझने में सहायक होंगे। यह जानकारी नीति-निर्माताओं, योजनाकारों, शोधकर्ताओं और विकास कार्यकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी होगी, क्योंकि इसके माध्यम से शहरी नियोजन, आवास, परिवहन, रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेपों की योजना बनाई जा सकेगी।

PLFS 2020–21 के अनुसार, भारत में प्रवासन दर 28.9% अनुमानित की गई थी।

सभी भारत स्तर पर पुरुषों में प्रवासन दर 10.7% और महिलाओं में 47.9% अनुमानित की गई। प्रवासन के कारण लिंग के अनुसार भिन्न हैं। महिलाओं में विवाह प्रमुख कारण है, जो सभी महिला प्रवासियों का लगभग 86.8 प्रतिशत हिस्सा है। इसके विपरीत, पुरुषों में रोजगार या बेहतर रोजगार की तलाश में प्रवासन सबसे अधिक है, जो सभी भारत स्तर पर 22.8% है। ये विशिष्ट पैटर्न भारत में प्रवासन की लिंग-विशिष्ट प्रकृति को उजागर करते हैं, जिसमें महिलाओं का प्रवासन सामाजिक कारणों जैसे विवाह से प्रभावित है, जबकि पुरुषों का प्रवासन मुख्य रूप से श्रम बाजार के अवसरों से प्रभावित है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री, योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री और संस्कृति मंत्रालय राज्यमंत्री राव इंदरजीत सिंह ने दी।


MoSPI ने नया लोगो और शुभंकर ‘सांख्यिकी’ का अनावरण किया

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1 जनवरी 2026 को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने मंत्रालय के लिए नया लोगो और शुभंकर (मास्कॉट) का अनावरण किया।

यह पहल MoSPI की संस्थागत पहचान के आधुनिकीकरण, जनसंपर्क को सशक्त बनाने तथा राष्ट्र निर्माण में आधिकारिक सांख्यिकी की भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

लोगो

MoSPI का नया लोगो राष्ट्र के विकास में आंकड़ों के महत्व को दर्शाता है और डेटा-आधारित शासन, पारदर्शिता एवं प्रगति को बढ़ावा देने की मंत्रालय की प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करता है। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सांख्यिकीय विज्ञान से प्रेरित यह लोगो मंत्रालय के संदेश “Data for Development” (विकास के लिए डेटा) को अभिव्यक्त करता है।

लोगो में अशोक चक्र सत्य, पारदर्शिता और सुशासन का प्रतीक है। केंद्र में स्थित रुपया चिह्न (₹) आर्थिक नियोजन, नीति निर्माण और राष्ट्रीय विकास में सांख्यिकी की अहम भूमिका को दर्शाता है। संख्याओं और प्रतीकों का उपयोग आधुनिक डेटा प्रणालियों और सांख्यिकीय विज्ञान को प्रतिबिंबित करता है।

ऊपर की ओर बढ़ता हुआ विकास स्तंभ प्रगति को दर्शाता है और यह बताता है कि किस प्रकार विश्वसनीय डेटा सतत आर्थिक विकास को समर्थन देता है। केसरिया, सफेद, हरा और गहरा नीला रंग भारत के राष्ट्रीय मूल्यों—विकास, सत्य, सततता, स्थिरता और ज्ञान—का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो मिलकर आधिकारिक सांख्यिकी में विश्वास और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करते हैं।

शुभंकर (मास्कॉट)

MoSPI ने अपना नया शुभंकर “सांख्यिकी” प्रस्तुत किया है, जो एक मैत्रीपूर्ण और नागरिक-केंद्रित चरित्र है। इसका उद्देश्य देशभर के लोगों के लिए सांख्यिकी को सरल, सुलभ और रोचक बनाना है। यह शुभंकर MoSPI के सटीकता, पारदर्शिता और डेटा-आधारित शासन जैसे मूल्यों को दर्शाता है तथा आम जनता के लिए आंकड़ों को आसान तरीके से प्रस्तुत करता है।

एक विश्वसनीय और बुद्धिमान व्यक्तित्व के रूप में डिज़ाइन किया गया “सांख्यिकी”, जटिल सांख्यिकीय अवधारणाओं को सरल और दृश्यात्मक तरीके से समझाने में मदद करेगा। MoSPI की सार्वजनिक पहचान के रूप में यह शुभंकर राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षणों, जागरूकता अभियानों, शैक्षणिक सामग्री, डिजिटल प्लेटफॉर्मों और सार्वजनिक आयोजनों में उपयोग किया जाएगा। इसका शुभारंभ एनएसओ सर्वेक्षणों में जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने और एक सुसंगत एवं पहचान योग्य दृश्य उपस्थिति के माध्यम से आधिकारिक सांख्यिकी में विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

MoSPI द्वारा गृह सर्वेक्षणों और शिक्षा सर्वेक्षणों में निष्पक्ष और डिजिटल कवरेज सुनिश्चित

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गृह सर्वेक्षणों में निष्पक्ष कवरेज सुनिश्चित करने के लिए, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा किए जा रहे हैं, नमूना चयन संभाव्यता-आधारित वैज्ञानिक चयन विधियों के माध्यम से किया जाता है। यह नमूना सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैला होता है और इसमें ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र दोनों शामिल होते हैं, जिससे कवरेज की समानता और पूर्णता सुनिश्चित होती है।

MoSPI ने लगातार दो गृह उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) आयोजित किए—2022-23 (अगस्त 2022–जुलाई 2023) और 2023-24 (अगस्त 2023–जुलाई 2024)। इन सर्वेक्षणों के विस्तृत निष्कर्ष क्रमशः जुलाई 2024 और जनवरी 2025 में जारी किए गए।

MoSPI ने अप्रैल–जून 2025 के दौरान शिक्षा पर व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण (CMS) आयोजित किया, जो स्कूल शिक्षा विभाग (DoSEL), शिक्षा मंत्रालय के अनुरोध पर किया गया था। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य गृहस्थी द्वारा स्कूल शिक्षा पर किए गए व्यय का अनुमान तैयार करना है। इसके अलावा, यह सर्वेक्षण उन छात्रों के लिए निजी कोचिंग या ट्यूशन पर किए गए व्यय का अनुमान भी तैयार करता है, जो वर्तमान में स्कूल शिक्षा में नामांकित हैं। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट अगस्त 2025 में जारी की गई।

MoSPI विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करता है, जिसमें नई तकनीकों का समेकन और मौजूदा तकनीकों का उन्नयन शामिल है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि ये तकनीकें सर्वेक्षणों में कितनी प्रासंगिक और उपयोगी हैं। इसके अलावा, MoSPI शहरी फ्रेम सर्वेक्षण (UFS) पाँच वर्षीय चरणों में करता है, ताकि संघनित शहरी भौगोलिक इकाइयों का फ्रेम तैयार और बनाए रखा जा सके, जो शहरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों के लिए सैंपलिंग फ्रेम के रूप में काम करता है।

2017-22 चरण से, UFS डिजिटल मोड में किया जा रहा है, जिसमें Geo ICT उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इसमें मोबाइल, डेस्कटॉप और वेब आधारित GIS समाधान शामिल हैं, जिन्हें Bhuvan प्लेटफ़ॉर्म पर विकसित किया गया है, और यह राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) के सहयोग से तैयार किया गया है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री, योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री राव इंदरजीत सिंह द्वारा दी गई।

राष्ट्रीय सांख्यिकीय सर्वेक्षणों के डेटा की पारदर्शिता, सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए MoSPI की व्यापक पहल

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 यह जानकारी आज लोकसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री, साथ ही योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री एवं संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री राव इंदरजीत सिंह द्वारा दी गई।

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के यूनिट-लेवल डेटा की सुगम उपलब्धता

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा संचालित राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) के यूनिट-लेवल डेटा और मेटाडेटा को मंत्रालय की वेबसाइट पर नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
डाटा उपयोगकर्ताओं के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए जाते हैं ताकि वे आसानी से सर्वेक्षण संकेतकों का निर्माण कर सकें।

डेटा डाउनलोड को और सरल बनाने के लिए, एक डेटा एक्सट्रैक्शन टूल भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे उपयोगकर्ता कच्चे डेटा को उपयोगी व विश्लेषणयोग्य प्रारूप में परिवर्तित कर सकें। सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी होने के बाद डेटा यूज़र्स कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जाती हैं ताकि उपयोगकर्ताओं की समझ बढ़ाई जा सके और पद्धति से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान हो सके।

डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा

MoSPI द्वारा डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रोटोकॉल अपनाए जाते हैं:

  • माइक्रोडाटा/यूनिट-लेवल डेटा को अनाम (anonymized) किया जाता है ताकि किसी व्यक्ति की पहचान न उजागर हो।

  • डेटा संग्रह के लिए Computer Assisted Personal Interviewing (CAPI) का उपयोग किया जाता है, जिसमें

    • संपूर्ण डेटा ट्रांसमिशन एन्क्रिप्टेड मोड में होता है।

    • डेटा सुरक्षित क्लाउड-आधारित प्लेटफ़ॉर्म पर संग्रहित किया जाता है।

राज्यों की क्षमता निर्माण (Capacity Building)

MoSPI द्वारा राज्यों को विस्तृत प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • NSS सर्वेक्षणों का संचालन

  • CAPI सॉफ्टवेयर का उपयोग

  • क्लाउड-आधारित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का प्रबंधन

सर्वेक्षण बाद की टेब्युलेशन वर्कशॉप्स के माध्यम से राज्य अधिकारियों की क्षमता और बढ़ाई जाती है।
मंत्रालय द्वारा ‘Support for Statistical Strengthening (SSS)’ उप-योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सांख्यिकीय क्षमता बढ़ाने हेतु 2010 से 27 नवम्बर 2025 तक ₹364.69 करोड़ प्रदान किए गए हैं, जिनमें से ₹42.01 करोड़ EFC 2021-26 अवधि के दौरान जारी किए गए।

वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI) में डेटा गुणवत्ता सुनिश्चित करना

ASI के लिए डेटा संग्रह अब वेब पोर्टल के माध्यम से किया जाता है, जिससे:

  • मानवीय त्रुटियों में कमी

  • डेटा में स्वतः वैलिडेशन

  • माइक्रो व मैक्रो स्तर पर डेटा चेक

MoSPI द्वारा नियमित रूप से ASI राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाती हैं ताकि उद्योग प्रतिनिधियों को सर्वेक्षण के महत्व से अवगत कराया जा सके और उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।
इसके अलावा:

  • मल्टी-लेयर वैलिडेशन चेक

  • ASI यूनिट्स के लिए जागरूकता कैंप

  • निरीक्षण व प्रशिक्षण

द्वारा डेटा की गुणवत्ता लगातार बेहतर की जा रही है।


प्रमुख सांख्यिकीय सूचकांकों के आधार वर्ष संशोधन पर मुंबई में आयोजित होगी पहली प्री-रिलीज़ परामर्श कार्यशाला

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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) 26 नवंबर 2025 को मुंबई में “उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), सकल घरेलू उत्पाद (GDP) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के बेस संशोधन पर पहली पूर्व-प्रकाशन परामर्श कार्यशाला” आयोजित कर रहा है।

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य GDP, CPI और IIP के जारी बेस संशोधन में प्रस्तावित पद्धतिगत और संरचनात्मक परिवर्तनों को साझा करना है, ताकि सहभागी विशेषज्ञों से सुझाव एवं प्रतिक्रियाएँ प्राप्त की जा सकें। कार्यशाला में इन सूचकांकों के संकलन में उपयोग होने वाले नए डेटा स्रोतों और तकनीकों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

इस कार्यक्रम में विश्व बैंक एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, भारतीय रिज़र्व बैंक, प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री, वित्तीय एवं बैंकिंग संस्थानों के विशेषज्ञ, विषय-विशेषज्ञ, मुख्य सांख्यिकीय उपयोगकर्ता, तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। विविध समूह की भागीदारी से चर्चाएँ अधिक समृद्ध होंगी और उपयोगकर्ताओं को संशोधित श्रृंखला में होने वाले परिवर्तनों से अवगत कराया जाएगा।

कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से होगी, जिसमें प्रोफेसर एस. महेंद्र देव (अध्यक्ष, EAC-PM), डॉ. पूनम गुप्ता (उप-गवर्नर, RBI), डॉ. सौरभ गर्ग (सचिव, MoSPI) और एन. के. सन्तोषी (महानिदेशक, केंद्रीय सांख्यिकी) संबोधित करेंगे। इसके बाद GDP, CPI और IIP पर तकनीकी सत्र तथा ओपन हाउस चर्चा आयोजित होगी।

इस अवसर पर इन सूचकांकों के बेस संशोधन में प्रस्तावित परिवर्तनों से संबंधित संक्षिप्त अवधारणा-नोट्स की एक पुस्तिका भी प्रतिभागियों को वितरित की जाएगी। कार्यशाला का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, सूचित संवाद को प्रोत्साहित करना, और संशोधित श्रृंखला जारी करने से पूर्व व्यापक परामर्श सुनिश्चित करना है।

मंत्रालय ने सभी हितधारकों से इस महत्वपूर्ण परामर्श प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी और सुझाव देने का स्वागत किया है।

मोस्‍पी ने जारी किया राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) 2025: डिजिटल और ग्रीन इकोनॉमी को मिला व्यापक स्थान

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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) 2025 का विमोचन राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) की 75वीं वर्षगांठ तथा विश्व सांख्यिकी दिवस 2025 के ‘कुलमिनेशन समारोह’ के दौरान 18 नवंबर 2025, उदयपुर में किया।

NIC एक बुनियादी उपकरण है जिसका उपयोग सांख्यिकीय सर्वेक्षणों, जनगणनाओं, आर्थिक अनुसंधान और नीतिगत निर्माण में किया जाता है। भारत में यह वर्गीकरण प्रणाली पहली बार 1962 में शुरू की गई थी और बदलते आर्थिक परिदृश्य तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप इसे समय-समय पर संशोधित किया गया—जैसे NIC 1970, 1987, 1990, 1998, 2004 और 2008। NIC 2025 भारत में आर्थिक गतिविधियों के वर्गीकरण का नवीनतम अद्यतन मानक है।

अद्यतन वर्गीकरण भारतीय अर्थव्यवस्था के तेज़ी से हो रहे परिवर्तन को समाहित करता है, जो तकनीकी प्रगति, नवाचार और नए क्षेत्रों के उभरने से प्रेरित है। इस संशोधन में नवीकरणीय ऊर्जा, फिनटेक, ई-कॉमर्स, डिजिटल इंटरमीडिएशन जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई है। साथ ही आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ और हैंडलूम उद्योग जैसे महत्वपूर्ण स्वदेशी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

NIC 2025 को अंतरराष्ट्रीय मानक ISIC Rev.5 (UNSD द्वारा विकसित) के अनुरूप तैयार किया गया है। यह संशोधन आर्थिक वर्गीकरण संशोधन हेतु गठित विशेषज्ञ समिति (ECREC) के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें विषय विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा मंत्रालयों, विभागों, राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ व्यापक परामर्श भी किया गया।

NIC 2025 में पहली बार 6-अंकीय कोडिंग संरचना अपनाई गई है, जो NIC 2008 की 5-अंकीय संरचना से अधिक विस्तृत और लचीली है। इससे नई उभरती गतिविधियों को बेहतर ढंग से दर्शाना संभव होगा।

NIC 2008 बनाम NIC 2025 – संरचना तुलना

संरचना                         NIC 2008    NIC 2025
सेक्शन (Alphabetic) 21 (A–U)     22 (A–V)
डिवीजन (2-digit) 88        87
ग्रुप (3-digit) 238       257
क्लास (4-digit) 403       463
सब-क्लास 1304      1887

NIC 2025 की प्रमुख विशेषताएँ

1. इंटरमीडिएशन सेवाओं का विस्तृत वर्गीकरण

शक्ति, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा, रियल एस्टेट और खाद्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में इंटरमीडिएशन सेवाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाने के लिए नए वर्ग बनाए गए हैं।

2. पर्यावरण एवं हरित अर्थव्यवस्था का समावेश

कार्बन कैप्चर, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सुधार संबंधी गतिविधियों का विस्तृत कवरेज दिया गया है, ताकि SDGs और SEEA फ्रेमवर्क के साथ बेहतर तालमेल बने।

3. डिजिटल अर्थव्यवस्था का स्पष्ट प्रतिनिधित्व

क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्लॉकचेन, प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं, वेब सर्च पोर्टलों आदि को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

4. तकनीकी-पद्धति से स्वतंत्र वर्गीकरण

किसी भी गतिविधि को इस आधार पर विभाजित नहीं किया गया कि वह पारंपरिक तरीकों से की जा रही है या आधुनिक तकनीकों से।

NIC 2025 सांख्यिकीय सर्वेक्षणों, प्रशासनिक डेटा सेट, राष्ट्रीय खातों और अन्य आधिकारिक सांख्यिकी के लिए एक मानक ढांचा बनेगा। यह आर्थिक क्षेत्रों में संकेतकों के सुसंगत संकलन, विश्लेषण और नीति निर्माण को अधिक सटीक और उपयोगी बनाएगा।


NSS के 75 वर्ष पूरे: विश्व सांख्यिकी दिवस पर देशभर के सांख्यिकी समुदाय का भव्य समापन समारोह

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75 वर्षों की सांख्यिकीय उत्कृष्टता का उत्सव

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) की 75वीं वर्षगांठ तथा विश्व सांख्यिकी दिवस का समापन समारोह 18 नवंबर 2025 को द अनंता, उदयपुर में आयोजित कर रहा है। यह समारोह पूरे वर्ष देशभर में राष्ट्रीय/क्षेत्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला का सफल समापन है, जिनमें NSS के अमूल्य योगदान, भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को सुदृढ़ करने में इसकी भूमिका और नागरिकों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों एवं हितधारकों के साथ संवाद को बढ़ावा दिया गया।

सालभर NSS कार्यालयों ने तकनीकी सत्रों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जन-जागरूकता पहल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन पहलों ने NSS की स्थापना से लेकर आज तक की यात्रा और डेटा-संचालित भारत के निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। यह अंतिम कार्यक्रम NSS के क्षेत्रीय अधिकारियों, सांख्यिकीविदों, विशेषज्ञों और संस्थागत भागीदारों के समर्पण को सम्मान देने का अवसर है।

देशभर की सांख्यिकीय बिरादरी की सहभागिता

समारोह में NSS के फील्ड स्टाफ, MoSPI व अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग, राज्यों के आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, शिक्षाविद, मीडिया प्रतिनिधि तथा NSS 75वीं वर्षगांठ योजना समिति के सदस्य भाग लेंगे।
मुख्य अतिथि होंगे—राव इंद्रजीत सिंह, माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), MoSPI।

उत्साहपूर्ण आरंभ: पंजीकरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं संगीतमय प्रस्तुति

कार्यक्रम की शुरुआत पंजीकरण और अतिथियों के आगमन से होगी। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा।
RO मदुरै और RO संबलपुर के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत जुगलबंदी समारोह को ऊर्जामय शुरुआत देगी।

उद्घाटन सत्र: नेतृत्व की भविष्य दृष्टि

सत्र की शुरुआत NSS की महानिदेशक गीता सिंह राठौर के स्वागत संबोधन से होगी।
इसके बाद MoSPI के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग उद्घाटन remarks देंगे।
मुख्य अतिथि द्वारा उद्घाटन भाषण NSS की भारत के विकास पथ में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करेगा।

महत्वपूर्ण प्रकाशन एवं जारी करने योग्य सामग्री का विमोचन

समारोह में निम्नलिखित राष्ट्रीय प्रकाशनों का विमोचन किया जाएगा:

  • द स्टोरी ऑफ नेशनल सैंपल सर्वे – कॉफी टेबल बुक

  • स्टोरीज़ बिहाइंड नंबर्स – FOD जर्नल

  • सर्वेक्षण (संयुक्त 118वां एवं 119वां अंक) – NSO का तकनीकी जर्नल

  • नेशनल इंडस्ट्रियल क्लासिफिकेशन (NIC) 2025

  • DI Lab Portal का शुभारंभ

ये सभी प्रकाशन भारत की बदलती डेटा आवश्यकताओं और NSS की विकसित होती क्षमताओं को दर्शाते हैं।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: फील्ड की जीवंत झलक

देशभर के NSS फील्ड कार्यालय रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे—
लोक नृत्य, थीम सॉन्ग, नुक्कड़ नाटक, अनुभव-साझा—जो टीमवर्क और फील्डवर्क की भावना को उजागर करेंगे।

पैनल चर्चा: NSS सर्वेक्षणों के डेटा संग्रह की कहानियाँ

विशेष पैनल चर्चा का संचालन
 एस. एल. मेनारिया, पूर्व DG (NSS) करेंगे।
पैनलिस्ट होंगे:

  • मनीष गलुंडिया – उद्यमी

  • हेमंत अहीर – सरपंच

  • भूपेंद्र सिंह मीणा – गिरदावर

यह चर्चा बताएगी कि कैसे डेटा सिर्फ संख्या नहीं होता बल्कि समाज का वास्तविक प्रतिबिंब होता है।

विश्व सांख्यिकी दिवस

दोपहर के बाद के सत्र में विश्व सांख्यिकी दिवस के वैश्विक महत्व पर कार्यक्रम होंगे:

  • फील्ड अधिकारियों के लिए कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजी पर तकनीकी चर्चा (NSSTA एवं गेट्स फाउंडेशन द्वारा)

  • CPI (शहरी/ग्रामीण) के लिए CAPI डेमो – मूल्य सांख्यिकी प्रभाग द्वारा

देशभक्ति से ओतप्रोत समापन

समारोह का समापन
RO तिरुवनंतपुरम की देशभक्ति प्रस्तुति और सभी कलाकारों के सम्मान समारोह से होगा।
इसके बाद वरिष्ठ NSO अधिकारी धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे।


विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) और भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर

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नई दिल्ली-सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने 31 अक्टूबर, 2025 को भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (Indian Institute of Corporate Affairs – IICA), जो कि कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है, के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते का उद्देश्य एक व्यापक सतत विकास लक्ष्य (SDG) संरेखण रूपरेखा (Comprehensive SDG Alignment Framework) विकसित करना है, जो राष्ट्रीय, राज्य, ESG (Environmental, Social, Governance) और CSR (Corporate Social Responsibility) संकेतकों को एकीकृत करते हुए “विकसित भारत” (Viksit Bharat) के विज़न को साकार करने की दिशा में कार्य करेगा।

IICA की भूमिका और नेतृत्व

IICA में यह सहयोग महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह के गतिशील नेतृत्व में आरंभ किया गया है। श्री सिंह ने IICA की ESG, CSR और जिम्मेदार व्यवसाय आचरण (Responsible Business Conduct) से संबंधित रणनीतिक पहलों को राष्ट्रीय विकास एजेंडे के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हस्ताक्षर समारोह में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे —

  • किशोर बाबुराव सुरवाडे, अतिरिक्त महानिदेशक, क्षमता विकास प्रभाग, MoSPI

  • डॉ. गरिमा दाधिच, सहयोगी प्राध्यापक एवं प्रमुख, स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट, IICA

  • रुचिका गुप्ता, उप महानिदेशक, सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग, MoSPI

  • शिवनाथ सिंह जादावत, निदेशक, प्रशिक्षण इकाई, क्षमता विकास प्रभाग, MoSPI

  • डॉ. जियाउल हक, निदेशक, सामाजिक सांख्यिकी प्रभाग, MoSPI
    साथ ही MoSPI और IICA के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (NIF) और सहयोग की दिशा

राष्ट्रीय संकेतक रूपरेखा (National Indicator Framework – NIF), जो भारत की सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति की निगरानी का प्रमुख आधार है, इस सहयोग की नींव बनेगी।

इस रूपरेखा के आधार पर, यह पहल एक ऐसी प्रणाली विकसित करेगी जो राज्य स्तर के संकेतकों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाएगी तथा उनमें ESG और CSR आयामों को भी एकीकृत करेगी।

इस एकीकृत दृष्टिकोण के माध्यम से राष्ट्रीय, राज्य एवं कॉरपोरेट सतत विकास ढाँचों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यवसायों की CSR और ESG पहलें राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के SDG लक्ष्यों के साथ प्रभावी रूप से जुड़ी हों।

विकसित भारत की दिशा में एकीकृत प्रयास

NIF–SIF (National Indicator Framework – State Indicator Framework) के बीच इस समन्वय से प्रमाण-आधारित नीतिनिर्माण (Evidence-Based Policymaking) को सशक्त किया जाएगा, सतत कॉरपोरेट सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा और विकसित भारत के विज़न को साकार करने की दिशा में सुसंगत एवं समावेशी SDG निगरानी और कार्यान्वयन को गति मिलेगी।


स्वच्छता ही सेवा (SHS) अभियान 2025: 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया गया

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नई दिल्ली-स्वच्छता ही सेवा (SHS) अभियान, जिसे शहरी क्षेत्रों में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया, 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक मनाया गया और यह गांधी जयंती पर अपने समापन पर पहुँचा।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने इस अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर 2025 को स्वच्छता प्रतिज्ञा के साथ किया, जिसमें कार्यालयों और समुदायों में स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई।

अभियान की प्रमुख थीम और गतिविधियाँ

  • इस वर्ष अभियान का फोकस Cleanliness Target Units (CTUs) को मॉडल स्वच्छ क्षेत्रों में बदलने और उच्च फुटफॉल वाले सार्वजनिक स्थानों में स्वच्छता बनाए रखने पर था।

  • सफाईमित्रों के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, ताकि रोकथाम स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा दिया जा सके।

  • MoSPI और इसके कार्यालयों में व्यक्तिगत स्वच्छता और सतत स्वच्छता प्रथाओं के प्रति जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

अभियान की उपलब्धियाँ

  • कुल 52 CTUs को मॉडल स्वच्छ क्षेत्र में परिवर्तित किया गया।

  • 104 सार्वजनिक स्थानों की सफाई की गई।

  • MoSPI में सफाईमित्रों के लिए हेल्थ शिविर आयोजित किया गया, जिसमें व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर मार्गदर्शन दिया गया।

राष्ट्रीय श्रमदान और सहभागिता

  • 25 सितंबर 2025 को पूरे देश में श्रमदान आयोजित किया गया।

  • इस दौरान 2,500 से अधिक अधिकारी और स्वयंसेवक ने सफाई अभियान, वृक्षारोपण और जागरूकता गतिविधियों में भाग लिया।

  • उनकी सक्रिय भागीदारी ने MoSPI की पर्यावरणीय स्थिरता और स्वच्छ भारत के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को प्रदर्शित किया।

अभियान का महत्व

SHS 2025 ने सामुदायिक सेवा, पर्यावरणीय जागरूकता और रोकथाम स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ किया और स्वच्छ और स्वस्थ भारत के लिए राष्ट्रीय आंदोलन को आगे बढ़ाया।



राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ की संवादात्मक बैठक, राज्य की सांख्यिकीय प्रणाली का लिया अवलोकन

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लखनऊ- राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक संवादात्मक बैठक का आयोजन किया, जिसमें राज्य की सांख्यिकीय प्रणाली का अवलोकन किया गया। इस बैठक का उद्देश्य आधिकारिक सांख्यिकी की गुणवत्ता, समयबद्धता और पद्धतिगत स्थिरता को सुधारना तथा राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुमानों में पारदर्शिता और मजबूती सुनिश्चित करना था।

बैठक में प्रो. राजीव लक्ष्मण करंडिकर, अध्यक्ष, NSC, प्रो. ए. गणेश कुमार, प्रो. देबासीस कुंडु, और आशित कुमार साधु, आयोग के सदस्य, के साथ-साथ डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) एवं सदस्य सचिव, NSC उपस्थित रहे। बैठक में MoSPI के वरिष्ठ अधिकारी और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख अधिकारी भी शामिल हुए। आयोग ने सांख्यिकी की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए पद्धतिगत विकास और क्षमता निर्माण के महत्व पर बल दिया।

बैठक का शुभारंभ अल्का बहुगुणा धौंड़ियाल, निदेशक, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (DES), द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने विकसित उत्तर प्रदेश और भारत @2047 की दृष्टि को प्राप्त करने में सटीक, विस्तारपूर्ण और समयोचित डेटा की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय सांख्यिकी योजना बनाने, निगरानी और विकासात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अनिवार्य है।

अलोक कुमार, प्रमुख सचिव (योजना), उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था (OTD) मिशन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने मुख्यमंत्री की दृष्टि साझा की, जिसमें उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में अग्रणी योगदानकर्ता बनाने की दिशा पर जोर दिया गया। उन्होंने समर्थ यूपी पोर्टल, फैमिली आईडी डेटाबेस और महिला आर्थिक सशक्तिकरण (WEE) सूचकांक जैसी कई पहलें साझा कीं, जो डेटा-आधारित निर्णय लेने और संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हैं।

DES टीम द्वारा प्रस्तुतियाँ राज्य में सांख्यिकीय अवसंरचना मजबूत करने में प्रगति को दर्शाती हैं। तकनीकी सत्रों में GSDP अनुमान, जिला घरेलू उत्पाद (DDP) की तैयारी, प्रशासनिक और सर्वेक्षण डेटा के उपयोग से बॉटम-अप दृष्टिकोण शामिल थे। महाकुंभ जैसे बड़े पैमाने की घटनाओं से आर्थिक गतिविधियों का मूल्यांकन और Periodic Labour Force Survey (PLFS) तथा All-India Survey on Unincorporated Sector Enterprises (ASUSE) के पायलट सर्वेक्षण पर भी प्रस्तुति दी गई।

डॉ. सौरभ गर्ग, सचिव, MoSPI ने प्रशासनिक डेटा के एकीकरण, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के अपनाने और सांख्यिकीय प्रक्रिया में पद्धतिगत पारदर्शिता बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि डेटा स्रोतों का समन्वय, आधुनिक उपकरणों जैसे GIS और डैशबोर्ड का उपयोग, और डेटा की उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभता प्रभावी शासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

NSC के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश सरकार की सांख्यिकीय प्रणाली को आधुनिक बनाने और विभागों में डेटा सिस्टम को एकीकृत करने की पहल की सराहना की। उन्होंने राज्य को अनुमानों की विधियों को सुधारने, सैम्पलिंग डिज़ाइन मजबूत करने और MoSPI के सहयोग से मानकीकृत मानकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। आयोग ने राज्य को पद्धतिगत कठोरता बढ़ाने और सांख्यिकीय संकलन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन और समर्थन देने का आश्वासन दिया।

MoSPI और राज्य योजना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने GSDP, वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण (ASI), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) और मूल्य सांख्यिकी जैसे महत्वपूर्ण सांख्यिकीय क्षेत्रों पर विचार साझा किए। दोनों पक्षों ने जिला स्तर पर डेटा की विस्तारशीलता सुधारने और रीयल-टाइम निगरानी और प्रसार के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने के महत्व पर बल दिया।

बैठक में WEE सूचकांक, फैमिली आईडी पहल और शिकायत निवारण एवं कार्यक्रम निगरानी डैशबोर्ड जैसी सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारों पर भी चर्चा हुई। इन पहलों को संपूर्ण डेटा प्रबंधन और बेहतर सेवा वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में मान्यता दी गई। NSC के सदस्यों ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि डेटा को प्रभावी ढंग से समावेशिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

समापन सत्र में डॉ. के. वी. राजू, आर्थिक सलाहकार, माननीय मुख्यमंत्री और अवनीश कुमार अवस्थी, सलाहकार, माननीय मुख्यमंत्री ने राज्य की साक्ष्य-आधारित योजना और डेटा-आधारित शासन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग तथा MoSPI द्वारा प्रदान किए गए मूल्यवान मार्गदर्शन और तकनीकी समर्थन की सराहना की।

बैठक का समापन NSC के अध्यक्ष, प्रो. राजीव लक्ष्मण करंडिकर के अभिभाषण के साथ हुआ, जिन्होंने मजबूत और पारदर्शी सांख्यिकीय प्रणाली बनाने के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने संस्थागत क्षमता निर्माण में दृश्यमान प्रगति की है और GSDP अनुमानों में पद्धतिगत सुधार जारी रखने के महत्व पर जोर दिया, ताकि वास्तविक और साक्ष्य-आधारित रुझानों को परिलक्षित किया जा सके।


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