Media24Media.com: गट हेल्थ पर बढ़ी चिंता, प्रोबायोटिक्स और पारंपरिक आहार पर जोर: राजीव गौबा

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गट हेल्थ पर बढ़ी चिंता, प्रोबायोटिक्स और पारंपरिक आहार पर जोर: राजीव गौबा

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नई दिल्ली- गट माइक्रोबायोटा एंड प्रोबायोटिक साइंस फाउंडेशन द्वारा 27–28 मार्च 2026 को “गट माइक्रोबायोम और प्रोबायोटिक्स: शिशु से वृद्ध तक प्रभाव” विषय पर 16वां इंडिया प्रोबायोटिक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अपने संबोधन में राजीव गौबा ने गट माइक्रोबायोम (आंतों के सूक्ष्म जीव) की भूमिका को इम्युनिटी, मेटाबॉलिज्म और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में बदलती जीवनशैली और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बढ़ती खपत लोगों को पारंपरिक और पोषणयुक्त आहार से दूर कर रही है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने चिंता जताई कि भारत में लगभग 56.4% बीमारियों का कारण असंतुलित आहार है और चेतावनी दी कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो “सूक्ष्म जीव (micro-organisms) बड़े परिणाम (macro consequences) पैदा कर सकते हैं।”

राजीव गौबा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र देश के विकास और आर्थिक प्रगति के लिए बेहद अहम है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत, पीएम-जय, जनऔषधि योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। साथ ही, लोगों के जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च 62.6% से घटकर 39.4% हो गया है, जिससे परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुलभता, गुणवत्ता और प्रशिक्षित मानव संसाधन की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने डॉक्टरों से सस्ती जेनेरिक दवाओं के उपयोग, टेलीमेडिसिन और AI आधारित तकनीकों को बढ़ावा देने की अपील की।

प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब CRISPR और सिंथेटिक बायोलॉजी जैसी तकनीकों के जरिए नई पीढ़ी के उपचार विकसित हो रहे हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने भ्रामक विज्ञापनों और गलत जानकारी से सावधान रहने की जरूरत बताई।

भारत की पारंपरिक फर्मेंटेड फूड संस्कृति को देश की ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकता है।

कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी नई साझेदारियों और नवाचार को बढ़ावा देगी।


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