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'कांकेयर' ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान,शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

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रायपुर- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड कांकेर की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।

‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। ये उत्पाद स्वसहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किए जाते हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पादों का सी-मार्ट और कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से इनकी थोक खरीदी की जा सकती है। वेबसाइट Kancare.Shop के माध्यम से इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। 

कांकेर जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 'कांकेयर’ ब्रांड के 92 किलोग्राम अरहर दाल , 5.5 किलोग्राम शहद, 5 किलोग्राम छिंद गुड़, 9 किलोग्राम रागी आटा तथा 6 किलोग्राम मक्का आटा की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।

गट हेल्थ पर बढ़ी चिंता, प्रोबायोटिक्स और पारंपरिक आहार पर जोर: राजीव गौबा

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नई दिल्ली- गट माइक्रोबायोटा एंड प्रोबायोटिक साइंस फाउंडेशन द्वारा 27–28 मार्च 2026 को “गट माइक्रोबायोम और प्रोबायोटिक्स: शिशु से वृद्ध तक प्रभाव” विषय पर 16वां इंडिया प्रोबायोटिक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अपने संबोधन में राजीव गौबा ने गट माइक्रोबायोम (आंतों के सूक्ष्म जीव) की भूमिका को इम्युनिटी, मेटाबॉलिज्म और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में बदलती जीवनशैली और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बढ़ती खपत लोगों को पारंपरिक और पोषणयुक्त आहार से दूर कर रही है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने चिंता जताई कि भारत में लगभग 56.4% बीमारियों का कारण असंतुलित आहार है और चेतावनी दी कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो “सूक्ष्म जीव (micro-organisms) बड़े परिणाम (macro consequences) पैदा कर सकते हैं।”

राजीव गौबा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र देश के विकास और आर्थिक प्रगति के लिए बेहद अहम है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत, पीएम-जय, जनऔषधि योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। साथ ही, लोगों के जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च 62.6% से घटकर 39.4% हो गया है, जिससे परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुलभता, गुणवत्ता और प्रशिक्षित मानव संसाधन की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने डॉक्टरों से सस्ती जेनेरिक दवाओं के उपयोग, टेलीमेडिसिन और AI आधारित तकनीकों को बढ़ावा देने की अपील की।

प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब CRISPR और सिंथेटिक बायोलॉजी जैसी तकनीकों के जरिए नई पीढ़ी के उपचार विकसित हो रहे हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने भ्रामक विज्ञापनों और गलत जानकारी से सावधान रहने की जरूरत बताई।

भारत की पारंपरिक फर्मेंटेड फूड संस्कृति को देश की ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकता है।

कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी नई साझेदारियों और नवाचार को बढ़ावा देगी।


अमित शाह ने गुजरात में मोतीलाल चौधरी सागर सैनिक स्कूल और सागर ऑर्गेनिक प्लांट का उद्घाटन किया

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री,अमित शाह ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुजरात में  मोतीलाल आर. चौधरी सागर सैनिक स्कूल (MRCSSS) और सागर ऑर्गेनिक प्लांट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री,भूपेंद्र पटेल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में हाल ही में हुए कार धमाके में अपनी जान गंवाने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि इस आतंकवादी घटना में शामिल सभी अपराधियों को कठोरतम सजा दी जाएगी। गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली कार ब्लास्ट के दोषियों को सजा देने से विश्व को संदेश मिलेगा कि किसी भी आतंकवादी को भारत में ऐसा कायरतापूर्ण कृत्य करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, पिछले 11 वर्षों में भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को पूरी दुनिया ने पहचाना है और प्रधानमंत्री इस लड़ाई का नेतृत्व विश्व स्तर पर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कायरतापूर्ण घटना में शामिल सभी लोग और इसके पीछे के व्यक्ति कानून के समक्ष लाए जाएंगे और उन्हें कठोरतम सजा दी जाएगी। भारत सरकार और गृह मंत्रालय इस मामले में पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने सागर ऑर्गेनिक प्लांट और मोतीलाल चौधरी सागर सैनिक स्कूल के उद्घाटन को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि मोतीलाल काका मंसा के सभी नागरिकों के लिए आदर्श और प्रेरणा हैं। मोतीलाल जी का जीवन महात्मा गांधी के सिद्धांतों—ईमानदारी, पारदर्शिता और समाज में सकारात्मक मूल्य फैलाने के प्रति समर्पण—पर आधारित था। उस समय, गुजरात के डेयरी पालक, किसान और गांवों के लिए समृद्धि के मार्ग खोलने के लिए कई प्रयास किए गए। शाह ने कहा कि आज, अमूल विश्व का नंबर एक सहकारी ब्रांड बन चुका है और इसकी नींव उस समय के महान व्यक्तित्वों ने रखी थी।

शाह ने कहा कि सागर सैनिक स्कूल, मोतीलाल चौधरी के नाम पर स्थापित, गुजरात के कई जिलों के बच्चों को भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर प्रदान करेगा। यह स्कूल 11 एकड़ में फैला है, ₹50 करोड़ की लागत से निर्मित किया गया है और इसमें स्मार्ट क्लासरूम, छात्रावास, पुस्तकालय और कैंटीन जैसी सुविधाएँ हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत सरकार ने देशभर में PPP मॉडल के तहत 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया है, और इनमें मोतीलाल चौधरी सैनिक स्कूल निश्चित रूप से मेहसाना के लिए गर्व का प्रतीक बनेगा।

केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज सागर ऑर्गेनिक प्लांट का उद्घाटन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्लांट महत्वपूर्ण है ताकि अमूल ब्रांड के भरोसेमंद ऑर्गेनिक उत्पाद देश और दुनिया में पहुँच सकें, और ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को उचित लाभ मिले। इस प्लांट की दैनिक क्षमता लगभग 30 मीट्रिक टन है और यह नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (NPOP) और APEDA द्वारा प्रमाणित है। APEDA प्रमाणन के कारण, उत्तर गुजरात के प्राकृतिक खेती करने वाले किसान वैश्विक बाजारों तक अपनी उपज पहुँचा पाएंगे। शाह ने कहा कि इस ऑर्गेनिक प्लांट के विस्तार से न केवल देशभर में नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि ऑर्गेनिक खेती में लगे किसानों की आय भी बढ़ेगी।

अमित शाह ने सभी ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों और उनके परिवारों से अनुरोध किया कि वे स्वयं ऑर्गेनिक उत्पादों का उपयोग करें ताकि उनके पूरे परिवार का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि 1960 में, दूधसागर डेयरी केवल 3,300 लीटर दूध प्रतिदिन इकट्ठा करती थी, जो अब बढ़कर 35 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। यह डेयरी गुजरात के 1,250 गांवों के डेयरी पालकों और राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के 10 लाख से अधिक दूध उत्पादन समूहों से जुड़ी हुई है। इसका कारोबार ₹8,000 करोड़ तक पहुँच गया है। 8 आधुनिक डेयरियां, 2 मिल्क चिलिंग सेंटर, 2 पशु आहार प्लांट और 1 सीमेंट उत्पादन इकाई के साथ, दूधसागर डेयरी आज गुजरात के व्हाइट रिवॉल्यूशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

शाह ने कहा कि बनासकांठा और दूधसागर डेयरी ने मिलकर डेयरी अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि डेयरी की सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए 75,000 नए प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया है। मोदी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित 50% दूध राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचे, जिससे डेयरी पालकों को लाभ हो।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी के लाभ पूरे गुजरात और देश के डेयरी पालकों तक पहुँचाने के लिए मोदी सरकार ने तीन बहु-राज्यीय सहकारी समितियों की स्थापना की है। उन्होंने यह भी बताया कि अमूल के कुल कारोबार का 70% महिलाओं—हमारी माताओं और बहनों—के योगदान से आता है, जो इसके माध्यम से आत्मनिर्भर बनी हैं। शाह ने कहा कि इस वर्ष गुजरात में असामयिक भारी वर्षा हुई, और प्रभावित किसानों की मदद के लिए भूपेंद्र पटेल नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने उदार राहत पैकेज की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने किसानों की सहायता में पीछे नहीं हटने का संकल्प लिया है।


विश्व खाद्य दिवस 2025 पर आयुष मंत्रालय ने ‘आयुर्वेद आहार’ के माध्यम से स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई

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विश्व खाद्य दिवस 2025 के अवसर पर, जिसका विषय है “हैंड इन हैंड फॉर बेटर फूड्स एंड अ बेटर फ्यूचर” (Hand in Hand for Better Foods and a Better Future), आयुष मंत्रालय ने एक स्वस्थ और अधिक टिकाऊ ग्रह के निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया है। इस दिशा में ‘आयुर्वेद आहार’ जैसी अग्रणी पहलें — जो संतुलन, स्वास्थ्य और प्रकृति पर आधारित भारत की विशिष्ट खाद्य दर्शनशैली है — एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

आयुष मंत्रालय के परामर्श से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में आयुर्वेद आहार श्रेणी-A के तहत उत्पादों की एक विस्तृत और प्रमाणिक सूची जारी की है। यह सूची प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों पर आधारित है और इससे आयुर्वेद आधारित पोषण के क्षेत्र में गुणवत्ता, विकास और वैश्विक विश्वास को प्रोत्साहन मिलेगा।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा —

 “इस वर्ष विश्व खाद्य दिवस का विषय भारत की पारंपरिक बुद्धिमत्ता से गहराई से जुड़ा है। आयुर्वेद आहार केवल भोजन नहीं है, बल्कि यह एक दर्शन है जो स्वास्थ्य, स्थिरता और प्रकृति के प्रति करुणा को एकजुट करता है। FSSAI के साथ हमारे सहयोग के माध्यम से, हम आयुर्वेद आहार को वैश्विक पोषण का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहते हैं, ताकि बेहतर भोजन एक बेहतर और रोग-मुक्त भविष्य की ओर ले जाए।”

FSSAI द्वारा अधिसूचित आयुर्वेद आहार विनियम (Regulations) ने भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य बुद्धिमत्ता और आधुनिक खाद्य सुरक्षा मानकों के एकीकरण में नए मापदंड स्थापित किए हैं। अब, उत्पादों की यह निश्चित सूची उपभोक्ताओं और खाद्य व्यवसायों दोनों के लिए एक स्पष्ट और प्रमाणिक संदर्भ प्रदान करेगी, जो पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित है।

वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय ने कहा — 

“आयुर्वेद आधारित खाद्य प्रणालियों के प्रति वैश्विक रुचि भारत के समग्र पोषण में योगदान को रेखांकित करती है। यह सूची निर्माताओं के लिए स्पष्टता और उपभोक्ताओं के लिए विश्वास प्रदान करती है। यह स्वास्थ्य खाद्य क्षेत्र में नवाचार और स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा अवसर है, जहाँ आयुर्वेद का ज्ञान जीवनशैली और आहार से जुड़ी बीमारियों को रोकने में मदद कर सकता है।”

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर के प्रोफेसर अनुपम श्रीवास्तव ने कहा —

“मुख्यधारा की पोषण नीति में आयुर्वेदिक आहार सिद्धांतों को शामिल करना इस बात का उदाहरण है कि भारत पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से टिकाऊ और सजग खाद्य आदतों को कैसे दिशा दे रहा है। आयुष मंत्रालय और FSSAI का यह सहयोग वास्तव में ‘बेहतर भोजन और बेहतर भविष्य’ के लिए हाथ में हाथ डालकर कार्य करने का आदर्श उदाहरण है।”

भारत की पारंपरिक खाद्य प्रणालियाँ — विशेष रूप से विविध और संतुलित भारतीय थाली — अब वैश्विक स्तर पर अपनी पोषणीयता और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए सराही जा रही हैं। आयुर्वेद की प्राचीन आहार परंपराओं से प्रेरणा लेकर, ये मॉडल मौसमी आहार, स्थानीय स्रोतों और सजग उपभोग पर बल देते हैं, जो सतत खाद्य प्रणालियों के वैश्विक आह्वान के अनुरूप हैं।

जैसे-जैसे विश्व भोजन के साथ अपने संबंध को पुनर्परिभाषित कर रहा है, भारत संतुलन का प्रतीक बनकर उभर रहा है — यह दर्शाते हुए कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान एक साथ मिलकर मजबूत, स्वस्थ और टिकाऊ समाजों का निर्माण कर सकते हैं। आयुष मंत्रालय, FSSAI और अन्य हितधारकों के सहयोग से, ‘आयुर्वेद आहार’ को पोषण, स्थिरता और वैश्विक कल्याण का पर्याय बनाने के अपने मिशन पर दृढ़तापूर्वक अग्रसर है।

नवरात्रि पर सोहम हॉस्पिटल में 10 दिन निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श, विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे सेवाएँ

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महासमुंद जिले के लाभरा खुर्द स्थित सोहम हॉस्पिटल में इस वर्ष भी नवरात्रि पर्व पर विशेष पहल की जा रही है। 22 सितम्बर 2025 से 2 अक्टूबर 2025 तक पूरे 10दिनों तक अस्पताल में मरीजों को निःशुल्क परामर्श दिया जाएगा। इस अवधि में डॉ. युगल चन्द्राकार (एम.डी. एनेस्थीसिया एवं क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ), डॉ. सोमी चन्द्राकार (स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ) तथा डॉ. गौरव साहू (एमबीबीएस, एमएस ऑर्थोपेडिक्स) अपनी सेवाएँ निशुल्क प्रदान करेंगे।

डॉ. युगल चन्द्राकार, डॉ. सोमी चन्द्राकार और डॉ. गौरव साहू प्रतिवर्ष नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर यह परंपरा निभाते आ रहे हैं। उनका मानना है कि नवरात्रि केवल धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि समाज सेवा और जनकल्याण के लिए भी प्रेरणा का अवसर है। इसलिए इन नौ दिनों में वे अपनी विशेषज्ञता का लाभ मरीजों को बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराते हैं।

अस्पताल प्रशासन ने जानकारी दी है कि इस निःशुल्क परामर्श शिविर में सभी प्रकार की बीमारियों के मरीज शामिल हो सकते हैं। चाहे मरीज सामान्य रोगों से पीड़ित हों या गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हों, वे चिकित्सकों से उचित मार्गदर्शन और उपचार संबंधी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ टीम के सहयोग से मरीजों को संपूर्ण देखभाल मिलेगी।

नवरात्रि के दौरान यह पहल ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी। अक्सर देखा जाता है कि आर्थिक कारणों से कई मरीज समय पर डॉक्टर से परामर्श नहीं ले पाते। लेकिन इस अवधि में उन्हें यह अवसर मिलेगा कि वे अनुभवी डॉक्टरों से बिना किसी शुल्क के अपनी स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा कर सकें और आवश्यक उपचार का सुझाव प्राप्त कर सकें।

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नवरात्रि के नौ दिनों में बड़ी संख्या में मरीजों के आने की संभावना है। इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। रजिस्ट्रेशन काउंटर, प्रतीक्षालय और परामर्श कक्षों में अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति की गई है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

डॉ. युगल चन्द्राकार ने बताया कि यह पहल केवल परामर्श तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मरीजों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, उचित आहार, योग एवं ध्यान की महत्ता पर भी जानकारी दी जाएगी। उनका मानना है कि बीमारी से बचाव इलाज से अधिक महत्वपूर्ण है, और नवरात्रि जैसे पावन पर्व पर यह संदेश समाज तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है।

डॉ. सोमी चन्द्राकार ने कहा कि विशेष रूप से महिलाओं और गर्भवती माताओं के लिए यह निःशुल्क परामर्श बेहद लाभकारी रहेगा। अक्सर महिलाएँ अपनी समस्याओं को नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन इस अवधि में वे बिना किसी झिझक के आकर अपनी जाँच और सलाह ले सकती हैं।

वहीं डॉ. गौरव साहू (ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ) ने बताया कि हड्डियों एवं जोड़ों से संबंधित समस्याएँ बहुत आम हैं। कई मरीज दर्द और तकलीफ़ को सहते रहते हैं लेकिन समय पर परामर्श नहीं लेते। इस शिविर में वे निःशुल्क जाँच और मार्गदर्शन प्राप्त कर पाएँगे।

समग्र रूप से देखा जाए तो सोहम हॉस्पिटल की यह पहल स्वास्थ्य सेवा को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में सराहनीय कदम है। नवरात्रि पर्व को समाज सेवा से जोड़ते हुए डॉक्टरों ने यह साबित किया है कि चिकित्सक केवल रोगों का इलाज ही नहीं करते, बल्कि सामाजिक दायित्व निभाते हुए जनकल्याण में भी अग्रसर रहते हैं।

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