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लद्दाख में पहली बार शुरू हुआ योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स, समग्र स्वास्थ्य को मिलेगा बढ़ावा

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लेह- राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (NISR), लेह में तीन माह (400 घंटे) का योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है। यह पाठ्यक्रम मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY), नई दिल्ली और राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री योग पुरस्कार से सम्मानित एवं महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (MIMC) के संस्थापक अध्यक्ष वेन. भिक्षु संघसेना ने किया। इस अवसर पर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के आयुष, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. ताशी थिनलास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेट ने की।

डॉ. पद्मा गुरमेट ने प्रतिभागियों को लद्दाख के पहले योग वेलनेस सर्टिफिकेट कोर्स का हिस्सा बनने पर बधाई देते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण युवाओं को योग के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों पहलुओं में दक्ष बनाएगा। उन्होंने लद्दाख में योग एवं ध्यान को बढ़ावा देने के लिए वेन. भिक्षु संघसेना के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों और वेलनेस पद्धतियों को समाज तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्य अतिथि डॉ. ताशी थिनलास ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक चिकित्सा और योग के समन्वय से समग्र स्वास्थ्य एवं बेहतर जीवनशैली सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने लद्दाख में योग विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में योग को व्यापक रूप से शामिल करने की योजना की जानकारी दी।

वेन. भिक्षु संघसेना ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से योग को समर्पण और ईमानदारी के साथ अपनाने का आह्वान किया तथा ध्यान (Meditation) को योग का अभिन्न हिस्सा बताते हुए महाबोधि मेडिटेशन सेंटर आने का निमंत्रण भी दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में कोर्स समन्वयक गोपाल शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा और दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। अंत में डोलमा त्सेरिंग ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इसी के साथ तीन माह के योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

यह पहल लद्दाख में योग शिक्षा, पारंपरिक चिकित्सा और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भारत को वैश्विक आयुष हब बनाने की दिशा में मंथन, नई दिल्ली में सरकार-उद्योग विचार-विमर्श सत्र आयोजित

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नई दिल्ली- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने आयुष मंत्रालय तथा आयुष एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AYUSHEXCIL) के सहयोग से 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयुष क्षेत्र पर सरकार-उद्योग विचार-विमर्श (ब्रेनस्टॉर्मिंग) सत्र आयोजित किया।

"पारंपरिक स्वास्थ्य एवं कल्याण में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करना : नवाचार, गुणवत्ता, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग" विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, निर्यातक, निर्माता, एमएसएमई, स्टार्टअप, शोधकर्ता, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण तथा अन्य हितधारक शामिल रहे। सभी ने आयुष क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को मजबूत करने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के दौरान भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से मिलने वाले अवसरों, आयुष की वैश्विक ब्रांडिंग, निर्यात प्रोत्साहन, गुणवत्ता मानकों एवं WHO-GMP अनुपालन, आयुष क्वालिटी मार्क, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, नवाचार, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, वेलनेस सेवाओं तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नियामकीय एवं बाजार पहुंच संबंधी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार, उद्योग, शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भारतीय आयुष उत्पादों एवं सेवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक सुझाव साझा किए।

सत्र को संबोधित करते हुए सांसद एवं AYUSHEXCIL के अध्यक्ष डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को विश्वभर में तेजी से स्वीकार्यता मिल रही है और भारत समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का विश्वसनीय वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करने के लिए सरकार, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग पर बल दिया। उन्होंने यह भी बताया कि AYUSHEXCIL निर्यातकों को बाजार विकास, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पहुंच कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रहा है।

मुख्य वक्तव्य देते हुए वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि आयुष क्षेत्र देश के उभरते हुए उच्च संभावनाओं वाले निर्यात क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय आयुष ब्रांड विकसित करना है। उन्होंने उद्योग जगत से नवाचार, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया तथा मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वाणिज्य विभाग भविष्य में भी AYUSHEXCIL के साथ मिलकर जागरूकता, क्षमता निर्माण और हितधारक संवाद कार्यक्रम जारी रखेगा।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुष मार्क और आयुर्वेद आहार जैसी प्रमुख पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी लाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे गुणवत्ता, ब्रांडिंग और भारतीय आयुष उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने उद्योग जगत से आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के प्रति विश्वभर में बढ़ती रुचि का लाभ उठाने के लिए उत्पाद गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयारी करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने निर्यातकों और एमएसएमई के क्षमता निर्माण तथा भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजित खुले संवाद सत्र में निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों ने बाजार पहुंच, नियामकीय प्रक्रियाओं में सुधार, कारोबार सुगमता, नवाचार, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

विचार-विमर्श सत्र से प्राप्त सुझाव भविष्य की नीतियों, निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों और वाणिज्य विभाग, आयुष मंत्रालय तथा AYUSHEXCIL के संयुक्त प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे। इन पहलों के माध्यम से 'ब्रांड इंडिया आयुष' को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने तथा पारंपरिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: भारत से दुनिया तक योग का महापर्व

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नई दिल्ली- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) ने भारत और विश्वभर में अभूतपूर्व भागीदारी के साथ एक नया इतिहास रच दिया। इस वर्ष की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" (Yoga for Healthy Ageing) रही, जिसने शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और समग्र स्वास्थ्य में योग की भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विशाल योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर लगभग 35,000 लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास कर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

दुनिया ने अपनाया योग का संदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, मिस्र सहित अनेक देशों में बड़े पैमाने पर योग सत्र आयोजित किए गए। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से लेकर यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और पूर्वी एशिया के प्रमुख शहरों तक लाखों लोगों ने योग दिवस में भाग लिया। इससे यह साबित हुआ कि योग आज वैश्विक स्वास्थ्य और सामूहिक कल्याण का प्रतीक बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योग मानवता को जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का एक सशक्त माध्यम है।

देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी किया योग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित सामूहिक योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वहीं उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने लद्दाख के लेह में योग दिवस मनाया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में सांसदों के साथ योग सत्र का नेतृत्व किया।

गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश

इस वर्ष का सबसे विशेष अभियान "गंगोत्री से गंगासागर" रहा। लगभग 2,525 किलोमीटर की यात्रा के दौरान ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, पटना और हुगली सहित अनेक प्रमुख घाटों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस पहल ने भारत की दो महान धरोहरों—गंगा और योग—को एक सूत्र में पिरोते हुए स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

योग संगम पोर्टल पर रिकॉर्ड भागीदारी

योग संगम पोर्टल पर 3.07 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। देश के 780 जिलों और 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से लोगों ने योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पोर्टल पर 7.46 लाख से अधिक तस्वीरें अपलोड की गईं और 2.66 लाख से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए।

रिकॉर्ड बनाने वाला योग दिवस

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले आयोजित कार्यक्रमों ने भी कई रिकॉर्ड बनाए।

  • महाराष्ट्र के बुलढाणा में लगभग 5,000 लोगों ने एक साथ त्रिकोणासन कर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान बनाया।

  • कान्हा शांति वनम में 6,000 से अधिक प्रतिभागियों ने एक साथ भुजंगासन कर नया रिकॉर्ड बनाया।

  • 14 जून 2026 को आयुष मंत्रालय ने अपने यूट्यूब लाइव योग सत्र के दौरान 4,35,831 दर्शकों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

सेना से युवाओं तक, हर वर्ग ने निभाई भागीदारी

रक्षा मंत्रालय ने सियाचिन ग्लेशियर से लेकर कन्याकुमारी तक योग कार्यक्रम आयोजित किए। रक्षा मंत्री Rajnath Singh सहित हजारों सैनिकों ने योग किया।

वहीं राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) ने देशभर के 5,000 से अधिक स्थानों पर 8.30 लाख से ज्यादा कैडेटों के साथ योगाभ्यास कर युवाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की।

भारत ने फिर दिखाया विश्व को मार्ग

12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का मार्ग है। करोड़ों लोगों की भागीदारी और वैश्विक उत्साह के साथ भारत ने योग के माध्यम से विश्व कल्याण और स्वस्थ जीवन का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

"12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर भारत से दुनिया तक योग का महापर्व देखने को मिला। करोड़ों लोगों ने ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ के संदेश को अपनाते हुए स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली की दिशा में कदम बढ़ाया।"




अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले भारत ने रचा इतिहास, मंत्रालय ने बनाया नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 से पहले भारत ने योग के क्षेत्र में एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित कर दुनिया को अपनी योग शक्ति का परिचय दिया है। आयुष मंत्रालय ने आज आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर आयोजित विशेष ऑनलाइन योग सत्र के माध्यम से "Most Viewers for a YouTube Live Yoga Stream" श्रेणी में नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

इस ऐतिहासिक लाइव योग सत्र में 4,35,831 लोगों ने भाग लिया, जो अब तक का सबसे बड़ा ऑनलाइन योग सहभागिता रिकॉर्ड है। इससे पहले वर्ष 2024 में 2,46,252 दर्शकों का रिकॉर्ड दर्ज था। भारत ने इस पुराने रिकॉर्ड को 1,89,579 दर्शकों के बड़े अंतर से पीछे छोड़ते हुए नया विश्व रिकॉर्ड कायम किया।

योग ने जोड़ी दुनिया

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के प्रचार-प्रसार के तहत आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के विभिन्न देशों से योग साधकों, छात्रों, शिक्षकों, संस्थानों, पेशेवरों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) का अभ्यास किया और "योग 365" अभियान के संदेश को आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य योग को केवल एक दिन का उत्सव नहीं बल्कि दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना है।

केंद्रीय मंत्री ने दी बधाई

इस अवसर पर केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा,

"आज की यह उपलब्धि साबित करती है कि योग लोगों को क्षेत्र, संस्कृति और देशों की सीमाओं से परे जोड़ने की अद्भुत शक्ति रखता है। यह नया विश्व रिकॉर्ड योग को जीवनशैली के रूप में वैश्विक स्वीकृति मिलने का प्रमाण है। मैं सभी नागरिकों से 'योग 365' के संकल्प को अपनाने और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने का आग्रह करता हूं।"

दुनिया को दिया बड़ा संदेश

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया को यह संदेश देने का अवसर है कि योग स्वास्थ्य और कल्याण का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।

उन्होंने कहा,

"हमारा उद्देश्य लोगों को यह प्रेरणा देना है कि वे योग को केवल एक दिन की गतिविधि न मानें, बल्कि इसे जीवनभर की आदत बनाएं।"

कई नेताओं ने भेजे संदेश

कार्यक्रम के दौरान ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग, केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई गणमान्य नेताओं के संदेश भी प्रसारित किए गए। सभी वक्ताओं ने योग को बेहतर स्वास्थ्य और समग्र कल्याण का आधार बताते हुए लोगों से इसे दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की।

"स्वस्थ आयु के लिए योग" होगा 2026 की थीम

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम है — "स्वस्थ आयु के लिए योग" (Yoga for Healthy Ageing)।

यह थीम जीवनभर स्वस्थ रहने, मानसिक संतुलन बनाए रखने और बेहतर जीवन गुणवत्ता को बढ़ावा देने में योग की भूमिका को रेखांकित करती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का मुख्य राष्ट्रीय आयोजन 21 जून को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में आयोजित किया जाएगा, जहां देश-विदेश से हजारों योग प्रेमी एकत्रित होंगे।

हर घर योग, हर दिन योग

आयुष मंत्रालय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि में योगदान देने वाले सभी योग संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं, सरकारी विभागों, कॉर्पोरेट संगठनों, सामाजिक समूहों और वैश्विक भारतीय समुदाय का आभार व्यक्त किया।

देश अब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की ओर बढ़ रहा है और मंत्रालय ने एक बार फिर सभी नागरिकों से अपील की है कि वे "हर घर योग, हर दिन योग" के संकल्प को अपनाकर योग को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सुखी जीवन की कुंजी है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों को लेकर आयुष मंत्रालय की अहम बैठक

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नई दिल्ली में आज आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर-मंत्रालयी समिति (IMC) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, योग गुरु तथा योग संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के सफल आयोजन के लिए योजना और समन्वित क्रियान्वयन पर चर्चा करना था।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने की। उन्होंने कहा कि योग आज केवल एक अभ्यास नहीं बल्कि जन-आंदोलन बन चुका है, जो लोगों को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित कर रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2015 से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 190 से अधिक देशों में मनाया जा रहा है, जिससे योग को वैश्विक पहचान मिली है।

मंत्री ने सभी मंत्रालयों से “whole-of-government approach” अपनाने का आह्वान करते हुए 21 जून को होने वाले कॉमन योग प्रोटोकॉल में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने, स्कूलों, कार्यस्थलों और स्वास्थ्य संस्थानों में योग को शामिल करने, ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने पर जोर दिया।

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) Sibi George ने कहा कि दुनिया भर में भारतीय दूतावास और मिशन IDY 2026 के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने जापान में चल रहे योग अभ्यास कार्यक्रम का भी उल्लेख किया, जिसमें लोगों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली है।

आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा ने कहा कि योग भारत की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ अब एक वैश्विक स्वास्थ्य अभियान बन चुका है।

वहीं एच. आर. नागेंद्र ने बताया कि पिछले वर्ष 26 करोड़ से अधिक लोगों ने योग दिवस में भाग लिया था और इस वर्ष यह संख्या 30 करोड़ से पार जाने की उम्मीद है।

बैठक में IDY 2026 के लिए विभिन्न योजनाओं, गतिविधियों और रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इसमें युवाओं की भागीदारी, डिजिटल पहुंच और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

आयुष मंत्रालय ने विश्वास जताया कि समन्वित प्रयासों और व्यापक भागीदारी के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 को और भी भव्य और सफल बनाया जाएगा।

चिंतन शिविर–2026 का समापन, आयुष क्षेत्र को सशक्त बनाने पर जोर

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नई दिल्ली: प्रतापराव जाधव, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने दो दिवसीय चिंतन शिविर–2026 के समापन सत्र की अध्यक्षता की। इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का उद्देश्य आयुष क्षेत्र में नीति, शासन और क्रियान्वयन को मजबूत करना था।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि आयुष केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि एक समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली का दृष्टिकोण है, जो विशेष रूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने आयुष को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकृत करने, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे आयुष ग्रिड व टेलीमेडिसिन के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन नीति समन्वय और मंत्रालयों के बीच सहयोग पर चर्चा हुई। इस दौरान विनोद पॉल,पुण्य सलिला श्रीवास्तवऔर प्रीति सूदन जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

विनोद पॉल ने आधुनिक चिकित्सा और आयुष के एकीकरण के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने की बात कही। वहीं, पुन्या सलिला श्रीवास्तव ने आयुष को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल करने और डिजिटल हेल्थ सिस्टम के उपयोग पर जोर दिया।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह शिविर भविष्य की रणनीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ है, जिससे आयुष क्षेत्र को और सशक्त बनाया जाएगा।

इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पहलें भी शुरू की गईं, जिनमें आयुष उपचार के लिए बीमा कवरेज बढ़ाने हेतु समझौता, मंत्रालय का व्हाट्सएप चैनल लॉन्च, आयुष बीमा दरों का दस्तावेज जारी करना और हेल्पलाइन नंबर 1800-11-0008 की शुरुआत शामिल है।

कार्यक्रम में उद्यमिता, कौशल विकास, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और मीडिया रणनीतियों पर भी चर्चा की गई, ताकि आयुष को एक प्रभावी और विश्वसनीय स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित किया जा सके।

दो दिवसीय चिंतन शिविर में नीति निर्धारकों, विशेषज्ञों और हितधारकों ने शिक्षा, अनुसंधान, सेवा वितरण, डिजिटलाइजेशन और जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

शिविर का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आयुष क्षेत्र को सशक्त बनाकर 2047 तक स्वस्थ और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।


गट हेल्थ पर बढ़ी चिंता, प्रोबायोटिक्स और पारंपरिक आहार पर जोर: राजीव गौबा

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नई दिल्ली- गट माइक्रोबायोटा एंड प्रोबायोटिक साइंस फाउंडेशन द्वारा 27–28 मार्च 2026 को “गट माइक्रोबायोम और प्रोबायोटिक्स: शिशु से वृद्ध तक प्रभाव” विषय पर 16वां इंडिया प्रोबायोटिक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अपने संबोधन में राजीव गौबा ने गट माइक्रोबायोम (आंतों के सूक्ष्म जीव) की भूमिका को इम्युनिटी, मेटाबॉलिज्म और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में बदलती जीवनशैली और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बढ़ती खपत लोगों को पारंपरिक और पोषणयुक्त आहार से दूर कर रही है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने चिंता जताई कि भारत में लगभग 56.4% बीमारियों का कारण असंतुलित आहार है और चेतावनी दी कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो “सूक्ष्म जीव (micro-organisms) बड़े परिणाम (macro consequences) पैदा कर सकते हैं।”

राजीव गौबा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र देश के विकास और आर्थिक प्रगति के लिए बेहद अहम है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत, पीएम-जय, जनऔषधि योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। साथ ही, लोगों के जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च 62.6% से घटकर 39.4% हो गया है, जिससे परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुलभता, गुणवत्ता और प्रशिक्षित मानव संसाधन की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने डॉक्टरों से सस्ती जेनेरिक दवाओं के उपयोग, टेलीमेडिसिन और AI आधारित तकनीकों को बढ़ावा देने की अपील की।

प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब CRISPR और सिंथेटिक बायोलॉजी जैसी तकनीकों के जरिए नई पीढ़ी के उपचार विकसित हो रहे हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने भ्रामक विज्ञापनों और गलत जानकारी से सावधान रहने की जरूरत बताई।

भारत की पारंपरिक फर्मेंटेड फूड संस्कृति को देश की ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकता है।

कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी नई साझेदारियों और नवाचार को बढ़ावा देगी।


डॉ. एकता लंगेह ने सोहम हॉस्पिटल महासमुंद में मरीजों का हालचाल जाना, फल-जूस वितरित कर दी स्वस्थ जीवन की सीख

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महासमुंद- डॉ एकता लंगेह के नेत्तृत्व में सोहम हास्पिटल लभरा महासमुद में मरीजों से भेंट कर कुशल क्षेम पूछा। मुलाकात के दौरान मरीजों को फ ल, जूस और बिस्कीट वितरण किया। इस अवसर पर एकता लंगेह ने मरीजों के  स्वस्थय लाभ के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन अनुपम है। इस जीवन में निरोग रह पाना बड़ा ही मुश्किल काम है। कभी न कभी सभी को कोई न कोई शारीरिक परेशानी हो जाती है। लेकिन डाक्टरों के पास पहुंचकर अपना इलाज करवा ही लेना चाहिए। अच्छा हुआ जो आप सब अपना इलाज करवाने पहुंचे हैं, आप सभी के दीर्घायु होने की कामना है। आगे से अपना ध्यान रखें  और डाक्टरों की हिदायत का पालन करें। डॉ लंगेह के साथ डा. युगल और डा. सोमी चंद्राकर ने अस्पताल का भ्रमण अवलोकन करते हुए हास्पिटल प्रबंधन की जानकारी दी। बताया कि हास्पिटल में महिलाए, बच्चों व सभी वर्गों के स्वास्थ से सम्बधित सभी मरीजों को उनकी सुविधा के मुताबिक दवाईयों की परची बनाकर उपचार किया जाता है। इस अवसर पर तारिणी चंद्राकर, समाज सेवी मधु तिवारी, अर्चना शर्मा, भावना गांधी, तुषार चन्द्राकरआस्था वेलफेयर  व सोहम हास्पिटल के समस्त स्टाफ  उपस्थित थे।




आयुष्मान भारत: समग्र स्वास्थ्य कवरेज, सुदृढ़ अवसंरचना और डिजिटल स्वास्थ्य की दिशा में परिवर्तनकारी पहल

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आयुष्मान भारत चार प्रमुख घटकों से मिलकर बना है:

(क) आयुष्मान आरोग्य मंदिर

आयुष्मान भारत का पहला घटक 1,50,000 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स (AB-HWCs) की स्थापना से संबंधित है, जिन्हें अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में जाना जाता है। इसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्थित उप-स्वास्थ्य केंद्रों (SHCs) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) को उन्नत कर समुदाय के निकट समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों का उद्देश्य समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) प्रदान करना है, जिसके तहत प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य (RCH) तथा संक्रामक रोग सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है और गैर-संचारी रोगों जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा मौखिक, स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की जांच व उपचार सेवाएँ जोड़ी गई हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक स्वास्थ्य, ईएनटी, नेत्र, मुख स्वास्थ्य, वृद्धावस्था, उपशामक देखभाल, ट्रॉमा केयर तथा योग जैसी स्वास्थ्य संवर्धन गतिविधियाँ भी चरणबद्ध रूप से शामिल की गई हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल जीवन-चक्र दृष्टिकोण अपनाते हुए रोकथाम, संवर्धन, उपचार, पुनर्वास और उपशामक सेवाओं को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर तक जोड़ती है। किसी व्यक्ति की जीवन-कालीन स्वास्थ्य आवश्यकताओं का लगभग 80–90% भाग प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से पूरा होता है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम एवं जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित होती है।

प्राथमिक स्वास्थ्य टीम द्वारा समुदाय स्तर पर जनसंख्या सूचीकरण, रोगों की प्रारंभिक पहचान, समय पर रेफरल, उपचार अनुपालन तथा फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है। आवश्यक दवाइयाँ एवं जांच सुविधाएँ समुदाय के निकट उपलब्ध कराकर सुदृढ़ एवं लचीली प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण किया जा रहा है।

उपलब्धियाँ (30.11.2025 तक):

  • 1,81,873 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित

  • 12 सेवाओं का विस्तारित पैकेज एवं टेली-परामर्श सुविधा

  • कुल 494.71 करोड़ लाभार्थी आगमन (फुटफॉल)

  • 41.93 करोड़ टेली-परामर्श

  • उच्च रक्तचाप की 39.50 करोड़ जांच

  • मधुमेह की 36.70 करोड़ जांच

  • मौखिक कैंसर की 32.40 करोड़ जांच

  • महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की 15.23 करोड़ जांच

  • महिलाओं में स्तन कैंसर की 8.37 करोड़ से अधिक जांच

  • 6.54 करोड़ योग/वेलनेस सत्र आयोजित

(ख) आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY)

आयुष्मान भारत का दूसरा स्तंभ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना है, जो विश्व की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसके अंतर्गत प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का निःशुल्क स्वास्थ्य कवरेज द्वितीयक एवं तृतीयक उपचार हेतु प्रदान किया जाता है।

प्रमुख तथ्य:

  • 12 करोड़ परिवार योजना के अंतर्गत आच्छादित

  • कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने संसाधनों से लाभार्थी आधार का विस्तार किया

  • फरवरी 2024 से लगभग 37 लाख आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएँ शामिल

  • 42.48 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी (1 दिसम्बर 2025 तक)

  • 10.98 करोड़ अस्पताल में भर्ती, कुल लागत ₹1.60 लाख करोड़

  • 32,574 अस्पताल (15,532 निजी सहित) पैनल में

  • महिलाओं की भागीदारी:

    • आयुष्मान कार्ड – लगभग 49%

    • अस्पताल में भर्ती – लगभग 48%

आयुष्मान वय वंदना कार्ड:

  • 29 अक्टूबर 2024 को 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए लॉन्च

  • अनुमानित 4.5 करोड़ परिवार / 6 करोड़ व्यक्ति लाभान्वित

  • अब तक 94,19,515 पंजीकरण

डिजिटल पहल:

  • Ayushman App (एंड्रॉयड आधारित) – फेस ऑथ, OTP, आईरिस एवं फिंगरप्रिंट से सत्यापन

  • दिल्ली और ओडिशा में 2025 से योजना का विस्तार

(ग) प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM)

यह आयुष्मान भारत का तीसरा स्तंभ है, जिसका कुल परिव्यय लगभग ₹64,180 करोड़ है। इसे 25 अक्टूबर 2021 को शुरू किया गया और यह FY 2021–22 से 2025–26 तक लागू है। यह देशभर में स्वास्थ्य अवसंरचना सुदृढ़ करने की सबसे बड़ी योजना है।

इस मिशन का उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता बढ़ाना तथा वर्तमान एवं भविष्य की महामारियों/आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटना है।

प्रमुख लक्ष्य:

  • आईटी-सक्षम रोग निगरानी प्रणाली

  • ब्लॉक, जिला, क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर सर्विलांस प्रयोगशालाओं का नेटवर्क

  • प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर स्वास्थ्य इकाइयों का सुदृढ़ीकरण

  • वन हेल्थ अप्रोच के अंतर्गत अनुसंधान एवं जैव-चिकित्सीय क्षमता विकास

अवसंरचना प्रावधान:

  • 17,788 भवनरहित उप-स्वास्थ्य केंद्रों का आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में निर्माण

  • 11,024 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स

  • 3,382 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स

  • 730 जिला एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ

  • 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले जिलों में 50–100 बिस्तरों के क्रिटिकल केयर ब्लॉक

वर्तमान स्थिति (CSS घटक):

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों हेतु कुल आवंटन: ₹34,932.27 करोड़

  • ₹32,928.82 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति

  • 621 क्रिटिकल केयर ब्लॉक, 744 जिला प्रयोगशालाएँ, 9519 उप-स्वास्थ्य केंद्र AAM आदि स्वीकृत

12 केंद्रीय अस्पतालों (AIIMS, PGI, JIPMER, IMS-BHU आदि) में 150-बिस्तरों वाले क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्वीकृत हैं।

(घ) आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM)

सितंबर 2021 में प्रारंभ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य नागरिक-केंद्रित, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

इसके माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड (प्रिस्क्रिप्शन, जांच रिपोर्ट, डिस्चार्ज सारांश आदि) सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकते हैं और सहमति के आधार पर डॉक्टरों से साझा कर सकते हैं, जिससे निरंतर एवं बेहतर उपचार संभव होता है।

प्रमुख घटक:

  • ABHA (आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट) – नागरिकों की डिजिटल पहचान

  • HPR – स्वास्थ्य पेशेवर रजिस्ट्री

  • HFR – स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री

  • ड्रग रजिस्ट्री

इंटरऑपरेबिलिटी गेटवे:

  • Health Information Consent Manager (HIE-CM)

  • National Health Claims Exchange (NHCX)

  • Unified Health Interface (UHI)

इन पहलों के माध्यम से ABDM स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने योग के transformative प्रभाव पर साझा किया संस्कृत श्लोक

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज योग के परिवर्तनकारी प्रभाव को उजागर करते हुए एक संस्कृत श्लोक साझा किया। इस श्लोक में योग की प्रगतिशील यात्रा का वर्णन किया गया है—शारीरिक स्वास्थ्य से लेकर परम मोक्ष तक—आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा और समाधि के अभ्यास के माध्यम से।

प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट में लिखा:

“आसनेन रुजो हन्ति प्राणायामेन पातकम्।
विकारं मानसं योगी प्रत्याहारेण सर्वदा॥

धारणाभिर्मनोधैर्यं याति चैतन्यमद्भुतम्।
समाधौ मोक्षमाप्नोति त्यक्त्त्वा कर्म शुभाशुभम्॥”

भारत में मोटापे को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में संबोधित करने पर जोर: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

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“भारत में मोटापा एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में उभर चुका है, यह केवल एक सौंदर्य-संबंधी मुद्दा नहीं है। इस चुनौती को वैज्ञानिक सटीकता और नीति अनुशासन के साथ संबोधित करने की आवश्यकता है,” यह बात केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री; पीएमओ के MoS, डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (IISF) के दौरान "क्लिनिशियन–साइंटिस्ट इंटरैक्शन ऑन ओबेसिटी" पैनल चर्चा में कही।

चिकित्सा, जैव-चिकित्सा अनुसंधान और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों की उपस्थिति में आयोजित इस सत्र ने भारत में बढ़ते मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बोझ पर बहुआयामी दृष्टिकोण पेश किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने IISF में उपस्थित दर्शकों को संबोधित करते हुए बताया कि सामाजिक व्यवहार, बाजार की ताकतें और गलत जानकारी ने भारत में मोटापे की स्थिति को जटिल बना दिया है।

पैनल में भारत की वैज्ञानिक और चिकित्सा समुदाय के प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें डॉ. अश्वनी पारीक (कार्यकारी निदेशक, NABI), डॉ. विनोद कुमार पॉल और डॉ. वी.के. सरस्वत (सदस्य, नीति आयोग), प्रो. उल्लास कोलथुर (निदेशक, CDFD), डॉ. गणेशन कार्तिकेयन (कार्यकारी निदेशक, THSTI), और वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. संजय भड़ादा एवं डॉ. सचिन मित्तल शामिल थे।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से मोटापे को केवल सौंदर्य-संबंधी मुद्दे के रूप में देखा, जिससे इस पर वैज्ञानिक चर्चा में देरी हुई। उन्होंने भारत में केंद्रीय या विसरल मोटापे की उच्च प्रवृत्ति पर विशेष ध्यान दिया और कहा, “भारतीयों के लिए, कमर का आकार वजन से अधिक महत्वपूर्ण कहानी बताता है।”

उन्होंने GLP-आधारित दवाओं के फैशनेबल उपयोग के संदर्भ में सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि कभी-कभी लंबी अवधि के प्रभाव वर्षों बाद ही स्पष्ट होते हैं। उन्होंने 1970-80 के दशक में अनियंत्रित रूप से परिष्कृत तेलों के उपयोग के उदाहरण का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी।

मिनिस्टर ने गलत जानकारी से उत्पन्न खतरों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिना योग्य चिकित्सक और स्वयं घोषित आहार विशेषज्ञ भारत के मेटाबॉलिक संकट को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने नीति निर्माताओं से ऐसे तंत्र बनाने का आग्रह किया जो मरीजों को भ्रामक हस्तक्षेप से बचा सकें।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत में बढ़ती मेटाबॉलिक जटिलताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया और कहा, “पहले हर तीसरे OPD मरीज में अप्रकाशित मधुमेह होता था; आज हर तीसरे मरीज में फैटी लिवर है। इसे संभालने के लिए हमें एक अधिक वैज्ञानिक और नियंत्रित पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है।”

अपने संबोधन का समापन करते हुए डॉ. सिंह ने कहा, “मोटापा केवल एंडोक्राइनोलॉजिस्ट्स का विषय नहीं है। यह एक सामाजिक समस्या है, जो संस्कृति, आदतों, बाजार और गलत जानकारी से आकार लेती है, और इसे अनदेखा करना संभव नहीं है।”

सत्र का समापन क्लिनिशियनों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और जनता के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता के आह्वान के साथ हुआ, ताकि भारत की तेजी से बदलती मेटाबॉलिक स्वास्थ्य चुनौती का प्रभावी समाधान किया जा सके।

विश्व मधुमेह दिवस 2025: केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु करेगा “मधुमेह विमर्श” का आयोजन

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केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), बेंगलुरु, जो भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा मधुमेह (Diabetes Mellitus) के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में मान्यता प्राप्त है, 14 नवंबर 2025 को विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम “मधुमेह विमर्श” आयोजित करेगा। इस कार्यक्रम में मधुमेह पर चल रहे अनुसंधान, नैदानिक कार्यों और जनजागरूकता पहलों को प्रस्तुत किया जाएगा, जिन्हें उत्कृष्टता केंद्र द्वारा संचालित किया जा रहा है।

संस्थान का प्रमुख उद्देश्य आयुर्वेद, योग और जीवनशैली सुधारों के माध्यम से मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एक समग्र (integrative) दृष्टिकोण विकसित और लागू करना है। अब तक लगभग 6,000 रोगियों ने संस्थान की सेवाओं का लाभ उठाया है, जिनमें से 25 प्रतिशत से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से हैं।

क्लिनिकल सेवाओं के अलावा, संस्थान ने डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से अपनी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे 6 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है। इसमें ई-मेडिकल रिकॉर्ड, टेली-परामर्श, एसएमएस अलर्ट, और वेबसाइट (www.cari.gov.in) व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

संस्थान ने मशीन लर्निंग आधारित मधुमेह जोखिम मूल्यांकन प्रणाली भी विकसित की है, जिसे कॉपीराइट सुरक्षा प्राप्त हुई है। इस प्रणाली का वेब एप्लिकेशन के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है और इसे एक मोबाइल एप के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की निगरानी स्वयं कर सकें।

कार्यक्रम से पहले, डॉ. सुलोचना भट, प्रभारी, सीएआरआई बेंगलुरु ने कहा,

“हमारा ध्यान पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के संयोजन पर रहा है ताकि मधुमेह का समग्र और साक्ष्य-आधारित समाधान प्रदान किया जा सके। केंद्र की पहलें दिखाती हैं कि एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण से न केवल रोकथाम संभव है बल्कि जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।”

संस्थान सीएसआईआर-सीएफटीआरआई (मैसूर) और आईआईएससी (बेंगलुरु) के साथ चयनित खाद्य उत्पादों और आयुर्वेदिक औषधियों पर सहयोगात्मक अध्ययन कर रहा है। मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एकीकृत रूपरेखा तैयार की गई है और यह प्रकाशनाधीन है, जबकि प्रकृति (Prakriti) और डायबेटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी पर अध्ययन भी प्रकाशन की प्रक्रिया में है।

कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) जी. जी. गंगाधरन, पूर्व निदेशक, रामैया इंडिक स्पेशियलिटी आयुर्वेद रिस्टोरेशन अस्पताल, “मधुमेह का समग्र प्रबंधन” विषय पर व्याख्यान देंगे।

आयुष मंत्रालय जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह के प्रबंधन हेतु सतत, समावेशी और साक्ष्य-आधारित रणनीतियों के विकास के लिए अनुसंधान और नैदानिक पहलों को बढ़ावा देता रहेगा।

स्ट्रोक की रोकथाम और पुनर्वास में समग्र एवं निवारक देखभाल प्रदान करने में आयुष प्रणालियों की महत्वपूर्ण भूमिका: आयुष मंत्रालय

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आयुष मंत्रालय ने स्ट्रोक जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या के लिए आयुष प्रणालियों की समग्र, निवारक और पुनर्वासात्मक देखभाल की भूमिका पर बल दिया है। भारत में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक होने के नाते, स्ट्रोक से निपटने के लिए आयुष प्रणालियाँ एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाती हैं, जो शरीर की संतुलन प्रणाली को सुदृढ़ करने, लचीलापन बढ़ाने और दीर्घकालिक पुनर्प्राप्ति को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है — जिससे पारंपरिक चिकित्सा उपचार को प्रभावी रूप से पूरक बनाया जा सके।

आयुष और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने कहा,

“स्ट्रोक की बढ़ती चुनौती व्यापक और एकीकृत स्वास्थ्य रणनीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। निवारक देखभाल और दीर्घकालिक पुनर्वास पर आधारित आयुष प्रणालियाँ पारंपरिक स्ट्रोक प्रबंधन को महत्वपूर्ण रूप से पूरक कर सकती हैं। आयुष मंत्रालय साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो और स्ट्रोक के राष्ट्रीय बोझ को कम किया जा सके। हमारा ध्यान मजबूत शोध सहयोग और जन-जागरूकता बढ़ाने पर है, जो स्ट्रोक की घटनाओं को कम करने और सतत पुनर्प्राप्ति मार्गों को समर्थन देने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।”

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा,

“आयुष प्रणालियाँ सामूहिक रूप से स्ट्रोक जैसी जटिल न्यूरोलॉजिकल विकारों को समझने और प्रबंधित करने के लिए एक समग्र ढाँचा प्रदान करती हैं। मंत्रालय सहयोगात्मक और अनुवादात्मक अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है ताकि आयुष आधारित उपचारों की चिकित्सीय क्षमता को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और विस्तारित किया जा सके, जिससे स्ट्रोक की रोकथाम, पुनर्वास और समग्र तंत्रिका स्वास्थ्य के लिए एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ किया जा सके।”

आयुष प्रणालियाँ शरीर, मन और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर देती हैं। इनकी निवारक दर्शनशास्त्र और समग्र उपचार पद्धतियाँ न केवल रोग प्रबंधन पर केंद्रित हैं, बल्कि प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, पुनरावृत्ति कम करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने पर भी ध्यान देती हैं।

आयुर्वेद में स्ट्रोक को वात दोष की असंतुलन स्थिति के रूप में समझा जाता है, जिससे शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या पक्षाघात हो सकता है। आयुर्वेदिक उपचार का उद्देश्य संतुलन बहाल करना है — जिसमें शुद्धिकरण, पुनर्स्थापन और पुनर्वासात्मक चिकित्सा शामिल हैं जो रक्त संचार, तंत्रिका कार्य और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ावा देती हैं।

होम्योपैथी को सहायक उपचार के रूप में प्रभावी पाया गया है, विशेषकर न्यूरोलॉजिकल सुधार, मोटर रिकवरी और स्ट्रोक के बाद जीवन की गुणवत्ता में सुधार में।

आयुष मंत्रालय ने बताया कि विभिन्न आयुष प्रणालियाँ स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास के लिए विशिष्ट और पूरक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं, जो शारीरिक और न्यूरोलॉजिकल दोनों प्रकार की पुनर्प्राप्ति को लक्षित करती हैं।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली में ब्राज़ील के उपराष्ट्रपति का औपचारिक दौरा

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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली, जो आयुष मंत्रालय के अंतर्गत है, ने आज ब्राज़ील के उपराष्ट्रपति एवं विकास, उद्योग, व्यापार और सेवाओं के मंत्री जेराल्डो अल्कमिन का भारत के लिए उनके औपचारिक दौरे के दौरान स्वागत किया।

अपने संबोधन में अल्कमिन ने भारत की पारंपरिक और समग्र स्वास्थ्य प्रणालियों को बढ़ावा देने में नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा, “आयुर्वेद 5,000 साल पुराना स्वास्थ्य और ज्ञान का खज़ाना है। मैं अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्वास्थ्य संवर्धन, रोगों के उपचार और समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से शिक्षा एवं शोध में उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई देता हूँ। विश्व को स्वास्थ्य की रोकथाम और सतत स्वास्थ्य देखभाल के लिए आयुर्वेद के कालजयी ज्ञान की आवश्यकता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है और प्राकृतिक एवं रोकथाम आधारित स्वास्थ्य प्रणालियों, जैसे आयुर्वेद, की मांग भी बढ़ रही है। यदि यह दौरा लंबा होता, तो वह अपने पीठ दर्द के इलाज के लिए AIIA का उपचार अवश्य लेते।

उपराष्ट्रपति अल्कमिन ने भारत सरकार और AIIA की टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं भारत में और विशेष रूप से AIIA में मुझे और मेरे दल को दिए गए आतिथ्य के लिए आभारी हूँ।”

उपराष्ट्रपति अल्कमिन अपने पत्नी मारिया लूसिया अल्कमिन और 14 वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडली के साथ आए थे, जिनमें ब्राज़ील के भारत राजदूत केनेथ नोब्रेगा और ब्राज़ीलियन स्वास्थ्य नियामक एजेंसी (ANVISA) के निदेशक रोमिसोन रोड्रिग्स शामिल थे।

उन्हें आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और AIIA निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति सहित संस्थान के वरिष्ठ संकाय एवं अधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। वैद्य राजेश कोटेचा ने उपराष्ट्रपति और उनकी टीम का स्वागत करते हुए भारत और ब्राज़ील के बीच पारंपरिक चिकित्सा, समग्र स्वास्थ्य शोध और वेलनेस उद्योग में अधिक सहयोग का आग्रह किया।

दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति और उनकी टीम को AIIA की शिक्षा, क्लिनिकल सेवाओं और उन्नत अनुसंधान में अग्रणी योगदान की जानकारी दी गई। प्रतिनिधि मंडली ने अस्पताल ब्लॉक, अकादमिक एवं शोध विभाग और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र का दौरा किया और संकाय, शोधकर्ताओं और छात्रों के साथ बातचीत की।

AIIA की वैश्विक पहलों, सफलता की कहानियों और साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद तथा समग्र चिकित्सा को बढ़ावा देने वाली ongoing सहयोग परियोजनाओं की प्रस्तुति दी गई।

इस दौरे ने दोनों देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा में अकादमिक आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने वाले मौजूदा समझौतों (MoUs) के माध्यम से सहयोग को पुनः पुष्टि की।

AIIA के पास ब्राज़ील की प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ शोध और अकादमिक सहयोग हैं और इसने तीन MoUs पर हस्ताक्षर किए हैं:

  • AIIA और श्री वाजेरा फाउंडेशन एवं संबद्ध संस्थाओं, ब्राज़ील के बीच MoU

  • AIIA, रियो डी जनेरियो विश्वविद्यालय (UFRJ) और ब्राज़ीलियाई अकादमिक समग्र स्वास्थ्य संघ (CABSIN) के बीच MoU (सहयोग जारी रखने के लिए नवीनीकृत)

  • AIIA, फ्यूचर विज़न इंस्टीट्यूट और साओ पाउलो विश्वविद्यालय के बीच MoU

ये सहयोग पारंपरिक चिकित्सा प्रथाओं और नियमों की गुणवत्ता, सुरक्षा और पहुँच बढ़ाने के साथ-साथ वैज्ञानिक ज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखते हैं।

भारत और ब्राज़ील, जो जैव विविधता और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रथाओं में समृद्ध हैं, प्राचीन ज्ञान पर आधारित और आधुनिक विज्ञान द्वारा सत्यापित सतत स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने का साझा दृष्टिकोण रखते हैं। आयुर्वेद, योग और अन्य भारतीय पारंपरिक प्रणालियाँ ब्राज़ील में लोकप्रिय होती जा रही हैं, जो समग्र और रोकथाम-आधारित स्वास्थ्य देखभाल के वैश्विक स्वीकार्य दृष्टिकोण को दर्शाती 

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