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बीमारी रोकने की ताक़त आपके पास, संदिग्ध मामलों की सूचना सीधे सरकार तक पहुंचाएं

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किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखें तो IHIP पोर्टल पर दें जानकारी, स्वास्थ्य विभाग करेगा तत्काल जांच

रायपुर- किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में यदि अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले सामने आने लगें, तो यह किसी संभावित रोग प्रकोप (Outbreak) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को ही होती है। अब आम नागरिक भी ऐसी संदिग्ध स्वास्थ्य घटनाओं की सूचना सीधे भारत सरकार के एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पर दर्ज कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग समय रहते जांच कर आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सके।

जनभागीदारी को बढ़ावा देने और रोगों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर सामुदायिक आधारित रोग निगरानी (Community Based Surveillance) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से कोई भी नागरिक अपने आसपास दिखाई देने वाली किसी असामान्य बीमारी अथवा संभावित रोग प्रकोप की सूचना सीधे ऑनलाइन दर्ज कर सकता है।

पोर्टल पर सूचना दर्ज करते समय सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, आयु, लिंग, पता तथा व्यवसाय जैसी सामान्य जानकारी के साथ घटना की तिथि, स्थान, बीमारी अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संक्षिप्त विवरण दर्ज करना होता है। यदि घटना से संबंधित कोई फोटो या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें भी प्रमाण के रूप में अपलोड किया जा सकता है। सभी अनिवार्य जानकारी भरने के बाद मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी से सत्यापन करने पर सूचना संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंच जाती है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारी अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना देने वाले व्यक्ति से भी संपर्क कर सकते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को रोकने में समय पर सूचना मिलना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। प्रारंभिक स्तर पर मिली सूचना से स्वास्थ्य विभाग शीघ्र जांच, सैंपल संग्रह, उपचार और आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सकता है, जिससे बीमारी को बड़े प्रकोप या महामारी का रूप लेने से रोका जा सकता है। सामुदायिक निगरानी न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाती है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से पूरे समाज की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल सत्य, तथ्यात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण जानकारी ही पोर्टल पर दर्ज करें। अफवाहों, अपुष्ट सूचनाओं या भ्रामक जानकारी से बचें, ताकि स्वास्थ्य तंत्र वास्तविक घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर सके।

यदि आपके आसपास किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखाई दें, तो उसकी सूचना https://ihip.mohfw.gov.in/cbs/#/ पर अवश्य दें। आपकी समय पर दी गई एक सूचना अनेक लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है और संभावित महामारी को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

​कैंसर मुक्त भविष्य की ओर कदम: धमतरी में विशेष HPV टीकाकरण सप्ताह शुरू

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13 से 18 जुलाई तक 14 वर्ष की बेटियों को लगेगा निःशुल्क जीवनरक्षक टीका

रायपुर- धमतरी जिले में बेटियों को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आज से 18 जुलाई 2026 तक विशेष एचपीवी (HPV) टीकाकरण सप्ताह का आगाज हो गया है। इस महाअभियान के तहत 14 वर्ष की आयु की सभी पात्र बालिकाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जीवनरक्षक HPV टीका लगाया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए स्कूलों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

​कैंसर से बचाव का अचूक और सुरक्षित कवच

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया HPV टीका इस गंभीर कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर देता है, इसलिए सभी पात्र बालिकाओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है।

​यहाँ उपलब्ध होगी टीकाकरण की सुविधा

अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC),​प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC),​जिले के चिन्हित विद्यालय (स्कूल्स) और ​निर्धारित विशेष टीकाकरण सत्र स्थल पर निःशुल्क उपलब्ध होगा।

​बेटियों का स्वस्थ भविष्य हमारी सामूहिक जिम्मेदारी

​धमतरी कलेक्टर ने जिले के सभी माता-पिता और अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

​कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि बेटियों का स्वस्थ भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित है।  सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर भरोसा रखकर अपनी 14 वर्ष की बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। आपका यह एक छोटा सा निर्णय आपकी बेटी को जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जिले की एक भी पात्र बालिका इस जीवनरक्षक टीके से वंचित नहीं रहनी चाहिए।

गट हेल्थ पर बढ़ी चिंता, प्रोबायोटिक्स और पारंपरिक आहार पर जोर: राजीव गौबा

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नई दिल्ली- गट माइक्रोबायोटा एंड प्रोबायोटिक साइंस फाउंडेशन द्वारा 27–28 मार्च 2026 को “गट माइक्रोबायोम और प्रोबायोटिक्स: शिशु से वृद्ध तक प्रभाव” विषय पर 16वां इंडिया प्रोबायोटिक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अपने संबोधन में राजीव गौबा ने गट माइक्रोबायोम (आंतों के सूक्ष्म जीव) की भूमिका को इम्युनिटी, मेटाबॉलिज्म और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में बदलती जीवनशैली और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की बढ़ती खपत लोगों को पारंपरिक और पोषणयुक्त आहार से दूर कर रही है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

उन्होंने चिंता जताई कि भारत में लगभग 56.4% बीमारियों का कारण असंतुलित आहार है और चेतावनी दी कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो “सूक्ष्म जीव (micro-organisms) बड़े परिणाम (macro consequences) पैदा कर सकते हैं।”

राजीव गौबा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र देश के विकास और आर्थिक प्रगति के लिए बेहद अहम है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत, पीएम-जय, जनऔषधि योजना और आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे कार्यक्रमों ने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। साथ ही, लोगों के जेब से होने वाला स्वास्थ्य खर्च 62.6% से घटकर 39.4% हो गया है, जिससे परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुलभता, गुणवत्ता और प्रशिक्षित मानव संसाधन की चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। उन्होंने डॉक्टरों से सस्ती जेनेरिक दवाओं के उपयोग, टेलीमेडिसिन और AI आधारित तकनीकों को बढ़ावा देने की अपील की।

प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अब CRISPR और सिंथेटिक बायोलॉजी जैसी तकनीकों के जरिए नई पीढ़ी के उपचार विकसित हो रहे हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने भ्रामक विज्ञापनों और गलत जानकारी से सावधान रहने की जरूरत बताई।

भारत की पारंपरिक फर्मेंटेड फूड संस्कृति को देश की ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर प्रोबायोटिक्स के क्षेत्र में नेतृत्व कर सकता है।

कार्यक्रम में युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगोष्ठी नई साझेदारियों और नवाचार को बढ़ावा देगी।


राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का सफल समापन, समग्र स्वास्थ्य एवं ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पुनः स्थापित

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Ministry of Ayush द्वारा All India Ayurvedic Congress के सहयोग से Shegaon (जिला Buldhana district), Maharashtra में 25 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का कल सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस आयोजन ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।

पवित्र विसावा मैदान, Sant Gajanan Maharaj Sansthan में आयोजित इस मेले का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने किया। चार दिनों तक चले इस आयोजन में स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक विमर्श, किसान सहभागिता और जनभागीदारी का सशक्त संगम देखने को मिला। बुलढाणा तथा व्यापक विदर्भ क्षेत्र से हजारों नागरिकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अपने उद्घाटन संबोधन में राष्ट्रपति ने स्वास्थ्य को सर्वोच्च सुख बताते हुए कहा कि आयुष पद्धतियां शरीर और मन के संतुलन पर आधारित एक समग्र जीवनशैली प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि निवारक एवं समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण रोगभार कम करने और राष्ट्र को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को “लाइफटाइम आयुर्वेदिक गौरव सम्मान” से सम्मानित किया।

Acharya Devvrat, राज्यपाल, महाराष्ट्र ने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में निहित कालातीत वैज्ञानिक परंपरा बताते हुए प्रामाणिकता और गुणवत्ता के महत्व पर बल दिया।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Prataprao Jadhav ने मेले के लगभग सभी दिनों में उपस्थित रहकर इसे भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का “महाकुंभ” बताया। उन्होंने कहा कि आयुष केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि निवारक स्वास्थ्य, ग्रामीण समृद्धि और वैश्विक वेलनेस नेतृत्व का राष्ट्रीय आंदोलन है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रालय आयुष पद्धतियों में साक्ष्य-आधारित शोध, गुणवत्ता आश्वासन और वैश्विक विस्तार को सुदृढ़ कर रहा है। आयुष पर्यटन की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से भारत विश्व में समग्र वेलनेस का शिखर बन सकता है।

मेले की एक प्रमुख विशेषता आम जनता को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रही। आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी पद्धतियों के लिए स्थापित ओपीडी काउंटरों पर चारों दिनों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हजारों लाभार्थियों ने निःशुल्क परामर्श, स्वास्थ्य जांच और प्रमाणिक आयुष औषधियों का लाभ उठाया। जीवनशैली संबंधी रोगों, दीर्घकालिक बीमारियों और निवारक देखभाल पर विशेषज्ञ सलाह को लोगों ने सराहा।

योग के लाइव प्रदर्शन और योग चिकित्सा सत्रों में सभी आयु वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। मेले के दौरान आयोजित योग प्रतियोगिता में युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने योग के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाया। आयुष आहार खंड में क्षेत्र-विशिष्ट संतुलित आहार पद्धतियों को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

मंत्रालय के मंडप में अनुसंधान परिषदों, राष्ट्रीय संस्थानों और राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। औषधीय पौधों, हर्बल उत्पादों और घरेलू उपचारों से संबंधित इंटरैक्टिव प्रदर्शन विशेषकर ग्रामीण आगंतुकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।

राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 की विशिष्टता किसानों के साथ विशेष संवाद रही। “आयुर्वेदिक खेती: उत्पादन, मूल्य संवर्धन एवं विपणन” विषय पर आयोजित सत्रों में औषधीय पौधों की खेती, फसलोत्तर प्रबंधन और सुनिश्चित बाजार संपर्क पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। लगभग 2000 किसानों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। हल्दी की खरीद के लिए महत्वपूर्ण बाय-बैक व्यवस्था सहित कई आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करने और किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

विदर्भ क्षेत्र के किसानों और प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि औषधीय पौधों की खेती पारंपरिक कृषि के साथ एक लाभकारी और सतत विकल्प प्रदान करती है। उन्होंने मेले को स्वास्थ्य उन्नयन, आय वृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन को जोड़ने वाली समयोचित पहल बताया।

चार दिनों तक यह मेला ज्ञान-विनिमय, जन-जागरूकता और प्रत्यक्ष सेवा प्रदाय का सशक्त मंच बना रहा। विशेषज्ञ व्याख्यान, चिकित्सा प्रदर्शनियां, उद्योग सहभागिता और नीति-निर्माताओं तथा जमीनी हितधारकों के बीच संवाद ने स्वास्थ्य और आजीविका के एकीकृत दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया।

शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आयुष मंत्रालय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ शोध, गुणवत्ता मानकों और आयुष मूल्य श्रृंखला में किसानों की भागीदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक सहभागिता, योग प्रतियोगिताओं में युवा भागीदारी और औषधीय पौधों की खेती के लिए संरचित समर्थन को एक साथ जोड़ते हुए इस मेले ने प्रदर्शित किया कि आयुष पद्धतियां सार्वजनिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और भारत को वैश्विक समग्र वेलनेस केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए देशव्यापी MDA अभियान का शुभारंभ, 2027 तक बीमारी खत्म करने का लक्ष्य

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नई दिल्ली- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देशभर में लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (हाथीपांव) के उन्मूलन के लिए वार्षिक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) अभियान की शुरुआत की। इस अभियान में फाइलेरिया प्रभावित 12 राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

यह अभियान रोग संचरण को रोकने, बीमारी से होने वाली विकलांगता कम करने और कमजोर आबादी को निवारक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

क्या है फाइलेरिया (हाथीपांव)

लिम्फैटिक फाइलेरियासिस एक मच्छर जनित बीमारी है, जो प्रदूषित और ठहरे पानी में पनपने वाले क्यूलेक्स मच्छर से फैलती है। यह रोग लिम्फ प्रणाली को नुकसान पहुंचाकर विकलांगता, सामाजिक कलंक और आर्थिक कठिनाइयों का कारण बनता है।

भारत सरकार ने इसे 2027 तक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, जो वैश्विक SDG लक्ष्य 2030 से पहले है।

फाइलेरिया की वर्तमान स्थिति

  • 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 348 जिलों में फाइलेरिया स्थानिक

  • 41% जिलों (143) ने MDA सफलतापूर्वक बंद किया

  • 50% जिलों (174) में अभी वार्षिक MDA जारी

  • 2024 तक

    • 6.20 लाख लिम्फोडेमा केस

    • 1.21 लाख हाइड्रोसील केस

 MDA अभियान से मिली बड़ी सफलता

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ स्वास्थ्य लक्ष्य नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक आवश्यकता भी है।

MDA अभियान के तहत सीधे निगरानी में दवा सेवन (Directly Observed Treatment) से अच्छे परिणाम मिले हैं। उन्होंने मच्छर नियंत्रण और जन जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया।

मरीजों के लिए उपचार और सामाजिक सुरक्षा

  • हाइड्रोसील सर्जरी और दवाओं का वितरण

  • आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्क्रीनिंग और इलाज

  • हाइड्रोसील सर्जरी को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया गया

नई रणनीति: साल में एक बार MDA

फरवरी 2026 से भारत में साल में एक बार एकीकृत MDA अभियान शुरू किया गया है, जिससे बेहतर निगरानी, उच्च कवरेज और प्रभावी संचालन संभव होगा।

कार्यक्रम की प्रगति

  • MDA कवरेज 2014 में 75% से बढ़कर 2025 में 85%

  • TAS-1 पास करने वाले जिले 15% से बढ़कर 41%

  • 2025 अभियान में 21.71 करोड़ लोगों को लक्ष्य, 96% कवरेज

  • 18.48 करोड़ लोगों ने दवा का सेवन किया

सामुदायिक भागीदारी पर जोर

सरकार ने पंचायती राज, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कृषि, ग्रामीण विकास सहित कई मंत्रालयों के सहयोग से जन जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।

2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत का लक्ष्य

स्वास्थ्य मंत्री ने पूरे समाज और सरकार के संयुक्त प्रयासों से फाइलेरिया मुक्त भारत बनाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय की सचिव स्मृति पुन्या सलिला श्रीवास्तव, NHM की एमडी अराधना पटनायक और संयुक्त सचिव निखिल गजराज भी उपस्थित रहे।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सिद्धा चिकित्सा पद्धति को समकालीन विश्व में एक समग्र, निवारक एवं सतत स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के रूप में इसकी प्रासंगिकता पर बल दिया। नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों की विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सिद्धा की सुदृढ़ दार्शनिक नींव, वैज्ञानिक गहराई तथा शरीर, मन और प्रकृति के समन्वित दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिद्धा, आयुर्वेद, योग सहित भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि जीवंत परंपराएँ हैं जो आज भी भारत और विश्वभर में करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धा चिकित्सा देश की सबसे प्राचीन और गहन चिकित्सा परंपराओं में से एक है, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों में संचित ज्ञान में निहित हैं, और जो शरीर, मन एवं प्रकृति के बीच सामंजस्य को बढ़ावा देती है।

प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियों, शास्त्रीय ग्रंथों एवं औषधीय वनस्पतियों पर आधारित प्रदर्शनी और प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण और पुनः अन्वेषण में लगे विद्वानों एवं संस्थानों के असाधारण प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक उपेक्षा और अपर्याप्त दस्तावेजीकरण के कारण अनेक अमूल्य ग्रंथों के क्षरण या लुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया था, और भावी पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान को सुरक्षित रखने हेतु व्यवस्थित संग्रह, संरक्षण एवं अनुसंधान की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने सिद्धा चिकित्सा में निवारक देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों के मूल कारणों पर उपचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि तनाव और अस्वास्थ्यकर आदतों से परिपूर्ण आज की तेज़-रफ्तार जीवनशैली में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आधुनिक चिकित्सा द्वारा निदान के क्षेत्र में हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धा जैसी पारंपरिक प्रणालियाँ दीर्घकालिक उपचार और संतुलन की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, और चिकित्सकों से जिम्मेदार एवं साक्ष्य-आधारित अभ्यास के माध्यम से जनविश्वास सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सिद्धा चिकित्सा में सतत अनुसंधान से भविष्य में बड़े वैज्ञानिक नवाचार संभव हैं, जिनमें वर्तमान में असाध्य माने जाने वाले रोगों के स्थायी उपचार भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को निर्बाध अध्ययन के लिए समुचित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया तथा आशा व्यक्त की कि आने वाली पीढ़ियाँ भारत की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक पहचान दिलाएंगी।

उद्घाटन समारोह में आयुष मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव; तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्रीमा. सुब्रमणियन; आयुष मंत्रालय एवं तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा सिद्धा संस्थानों के प्रमुख उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि सिद्धा चिकित्सा स्वास्थ्य, प्रकृति और चेतना की उन्नत समझ को समाहित करती है, जिससे यह आधुनिक समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए अत्यंत प्रासंगिक बनती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, विशेषकर 2014 में आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद, भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों ने अभूतपूर्व प्रगति की है।

मंत्री ने सिद्धा शिक्षा एवं अनुसंधान में प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय सिद्धा संस्थान में अवसंरचना विस्तार, कौशल-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा केंद्रीय सिद्धा अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए सशक्त अनुसंधान कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की ICD-11 में सिद्धा रुग्णता कोड्स का समावेश तथा आगामी डब्ल्यूएचओ अंतरराष्ट्रीय मानक शब्दावलियाँ सिद्धा को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर सुदृढ़ रूप से स्थापित करेंगी।

वैश्विक पहुंच पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व वाली पहलों और अकादमिक आदान-प्रदान का उल्लेख किया, जिनसे सिद्धा की वैश्विक उपस्थिति सशक्त हुई है। उन्होंने सिद्धा को साक्ष्य-आधारित, वैश्विक रूप से मान्य और सभी के लिए सुलभ बनाने के साथ-साथ इसकी शास्त्रीय शुद्धता को बनाए रखने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर सिद्धा चिकित्सा पद्धति में असाधारण एवं सराहनीय योगदान देने वाले पाँच विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित विभूतियों में डॉ. बी. माइकल जेयराज, डॉ. टी. कन्नन राजाराम, स्वर्गीय डॉ. आई. सोरनामारियम्मल, डॉ. मोहन राज तथा प्रो. डॉ. वी. बनुमति शामिल हैं, जिनकी आजीवन सेवा, अनुसंधान, पांडुलिपि संरक्षण, शिक्षा एवं नेतृत्व ने सिद्धा चिकित्सा को जमीनी, अकादमिक और राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया है।

“वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्धा” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से सिद्धा चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी एकत्र हुए। यह आयोजन अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से सिद्धा चिकित्सा को प्रोत्साहित करने तथा इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों का अभिन्न अंग बनाने के प्रति आयुष मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है।


डॉ. जितेंद्र सिंह ने मोटापे को सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में संबोधित किया, सही उपयोग और जागरूकता पर दिया जोर

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केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि वर्तमान में उपलब्ध वजन कम करने या मोटापा विरोधी दवाओं का उपयोग बहुत ही समझदारी से किया जाना चाहिए।

स्वयं एक प्रसिद्ध डायबेटोलॉजिस्ट और चिकित्सा प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोटापा एक जटिल, दीर्घकालिक और दोबारा होने वाली समस्या है, और केवल एक सौंदर्य या जीवनशैली संबंधी चिंता नहीं है। इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के लिए पूरे समाज की भागीदारी आवश्यक है, क्योंकि यह भारत की सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुकी है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने 2-दिवसीय "एशिया ओशिनिया कॉन्फ्रेंस ऑन ओबेसिटी" (AOCO) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि डॉक्टर, शोधकर्ता, नीति निर्माता और अन्य हितधारक एक ही मंच पर आने से भारत में मोटापे के संकट की गंभीरता स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अर्थशास्त्र केवल अर्थशास्त्री को छोड़कर नहीं छोड़ा जा सकता, उसी तरह मोटापे की समस्या को केवल चिकित्सक या महामारी विज्ञानी तक सीमित नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहलू भी हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि भारत में गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) की संख्या बढ़ रही है, जो मोटापे से जुड़ी हैं और कुल मृत्यु दर का लगभग 63 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं रोगों का है। उन्होंने कहा कि टाइप 2 डायबिटीज़, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर मोटापे, विशेषकर पेट और मध्य भाग के मोटापे से जुड़े हैं, जो भारतीय आबादी में अधिक पाए जाते हैं और स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत में यह अभूतपूर्व है कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय मंचों से बार-बार मोटापा और जीवनशैली से जुड़े रोगों पर चर्चा की है। उन्होंने FIT इंडिया, खेलो इंडिया और व्यापक रोकथाम स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संदर्भ में प्रधानमंत्री के इस प्रयास की सराहना की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि मोटापा प्रबंधन के क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिकता और गलत सूचना लोगों को गुमराह कर सकती है। उन्होंने कहा कि केवल औपचारिक स्वीकृतियाँ ही हमेशा सही परिणाम नहीं देतीं, और लोगों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

उन्होंने युवा पीढ़ी तक जागरूकता फैलाने पर जोर दिया और कहा, "हमें केवल जानने वालों से नहीं, बल्कि उन लोगों से भी बात करनी होगी जो नहीं जानते कि उन्हें क्या पता नहीं है।" उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं के स्वास्थ्य और ऊर्जा की सुरक्षा 2047 में विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए आवश्यक है।

इस अवसर पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने AIAARO ओबेसिटी रजिस्ट्री लॉन्च की, जो भारत में मोटापे के शोध तंत्र को मजबूत करने, डेटा संग्रहण, सबूत-आधारित जानकारी और दीर्घकालिक नीति समर्थन प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

AOCO एशिया ओशिनिया एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ ओबेसिटी (AOASO) की प्रमुख कॉन्फ्रेंस है, जिसमें एशिया और ओशिनिया की मोटापा अनुसंधान समितियों का प्रतिनिधित्व होता है। भारत में इसे ऑल-इंडिया एसोसिएशन फॉर एडवांसिंग रिसर्च इन ओबेसिटी (AIAARO) द्वारा AOASO और IAEPEN इंडिया व OSSI के समर्थन से आयोजित किया गया है।

कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को वैश्विक श्रेष्ठ प्रथाओं से अवगत कराना, अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना और मोटापे के प्रमाण-आधारित प्रबंधन को मजबूत करना है। इस प्रकार, AOCO मोटापे को केवल चिकित्सा समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौती के रूप में देखने और इसके प्रभावी समाधान के लिए समन्वित प्रयास करने का मंच प्रदान करता है।

स्वच्छता ही सेवा (SHS) अभियान 2025: 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाया गया

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नई दिल्ली-स्वच्छता ही सेवा (SHS) अभियान, जिसे शहरी क्षेत्रों में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता विभाग (DDWS), जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया, 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक मनाया गया और यह गांधी जयंती पर अपने समापन पर पहुँचा।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने इस अभियान का शुभारंभ 17 सितंबर 2025 को स्वच्छता प्रतिज्ञा के साथ किया, जिसमें कार्यालयों और समुदायों में स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई।

अभियान की प्रमुख थीम और गतिविधियाँ

  • इस वर्ष अभियान का फोकस Cleanliness Target Units (CTUs) को मॉडल स्वच्छ क्षेत्रों में बदलने और उच्च फुटफॉल वाले सार्वजनिक स्थानों में स्वच्छता बनाए रखने पर था।

  • सफाईमित्रों के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, ताकि रोकथाम स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा दिया जा सके।

  • MoSPI और इसके कार्यालयों में व्यक्तिगत स्वच्छता और सतत स्वच्छता प्रथाओं के प्रति जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

अभियान की उपलब्धियाँ

  • कुल 52 CTUs को मॉडल स्वच्छ क्षेत्र में परिवर्तित किया गया।

  • 104 सार्वजनिक स्थानों की सफाई की गई।

  • MoSPI में सफाईमित्रों के लिए हेल्थ शिविर आयोजित किया गया, जिसमें व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर मार्गदर्शन दिया गया।

राष्ट्रीय श्रमदान और सहभागिता

  • 25 सितंबर 2025 को पूरे देश में श्रमदान आयोजित किया गया।

  • इस दौरान 2,500 से अधिक अधिकारी और स्वयंसेवक ने सफाई अभियान, वृक्षारोपण और जागरूकता गतिविधियों में भाग लिया।

  • उनकी सक्रिय भागीदारी ने MoSPI की पर्यावरणीय स्थिरता और स्वच्छ भारत के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को प्रदर्शित किया।

अभियान का महत्व

SHS 2025 ने सामुदायिक सेवा, पर्यावरणीय जागरूकता और रोकथाम स्वास्थ्य देखभाल को सुदृढ़ किया और स्वच्छ और स्वस्थ भारत के लिए राष्ट्रीय आंदोलन को आगे बढ़ाया।



अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली में ब्राज़ील के उपराष्ट्रपति का औपचारिक दौरा

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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली, जो आयुष मंत्रालय के अंतर्गत है, ने आज ब्राज़ील के उपराष्ट्रपति एवं विकास, उद्योग, व्यापार और सेवाओं के मंत्री जेराल्डो अल्कमिन का भारत के लिए उनके औपचारिक दौरे के दौरान स्वागत किया।

अपने संबोधन में अल्कमिन ने भारत की पारंपरिक और समग्र स्वास्थ्य प्रणालियों को बढ़ावा देने में नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा, “आयुर्वेद 5,000 साल पुराना स्वास्थ्य और ज्ञान का खज़ाना है। मैं अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्वास्थ्य संवर्धन, रोगों के उपचार और समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से शिक्षा एवं शोध में उत्कृष्ट कार्य के लिए बधाई देता हूँ। विश्व को स्वास्थ्य की रोकथाम और सतत स्वास्थ्य देखभाल के लिए आयुर्वेद के कालजयी ज्ञान की आवश्यकता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है और प्राकृतिक एवं रोकथाम आधारित स्वास्थ्य प्रणालियों, जैसे आयुर्वेद, की मांग भी बढ़ रही है। यदि यह दौरा लंबा होता, तो वह अपने पीठ दर्द के इलाज के लिए AIIA का उपचार अवश्य लेते।

उपराष्ट्रपति अल्कमिन ने भारत सरकार और AIIA की टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “मैं भारत में और विशेष रूप से AIIA में मुझे और मेरे दल को दिए गए आतिथ्य के लिए आभारी हूँ।”

उपराष्ट्रपति अल्कमिन अपने पत्नी मारिया लूसिया अल्कमिन और 14 वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडली के साथ आए थे, जिनमें ब्राज़ील के भारत राजदूत केनेथ नोब्रेगा और ब्राज़ीलियन स्वास्थ्य नियामक एजेंसी (ANVISA) के निदेशक रोमिसोन रोड्रिग्स शामिल थे।

उन्हें आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और AIIA निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति सहित संस्थान के वरिष्ठ संकाय एवं अधिकारियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। वैद्य राजेश कोटेचा ने उपराष्ट्रपति और उनकी टीम का स्वागत करते हुए भारत और ब्राज़ील के बीच पारंपरिक चिकित्सा, समग्र स्वास्थ्य शोध और वेलनेस उद्योग में अधिक सहयोग का आग्रह किया।

दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति और उनकी टीम को AIIA की शिक्षा, क्लिनिकल सेवाओं और उन्नत अनुसंधान में अग्रणी योगदान की जानकारी दी गई। प्रतिनिधि मंडली ने अस्पताल ब्लॉक, अकादमिक एवं शोध विभाग और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र का दौरा किया और संकाय, शोधकर्ताओं और छात्रों के साथ बातचीत की।

AIIA की वैश्विक पहलों, सफलता की कहानियों और साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद तथा समग्र चिकित्सा को बढ़ावा देने वाली ongoing सहयोग परियोजनाओं की प्रस्तुति दी गई।

इस दौरे ने दोनों देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा में अकादमिक आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने वाले मौजूदा समझौतों (MoUs) के माध्यम से सहयोग को पुनः पुष्टि की।

AIIA के पास ब्राज़ील की प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ शोध और अकादमिक सहयोग हैं और इसने तीन MoUs पर हस्ताक्षर किए हैं:

  • AIIA और श्री वाजेरा फाउंडेशन एवं संबद्ध संस्थाओं, ब्राज़ील के बीच MoU

  • AIIA, रियो डी जनेरियो विश्वविद्यालय (UFRJ) और ब्राज़ीलियाई अकादमिक समग्र स्वास्थ्य संघ (CABSIN) के बीच MoU (सहयोग जारी रखने के लिए नवीनीकृत)

  • AIIA, फ्यूचर विज़न इंस्टीट्यूट और साओ पाउलो विश्वविद्यालय के बीच MoU

ये सहयोग पारंपरिक चिकित्सा प्रथाओं और नियमों की गुणवत्ता, सुरक्षा और पहुँच बढ़ाने के साथ-साथ वैज्ञानिक ज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखते हैं।

भारत और ब्राज़ील, जो जैव विविधता और पारंपरिक स्वास्थ्य प्रथाओं में समृद्ध हैं, प्राचीन ज्ञान पर आधारित और आधुनिक विज्ञान द्वारा सत्यापित सतत स्वास्थ्य मॉडल विकसित करने का साझा दृष्टिकोण रखते हैं। आयुर्वेद, योग और अन्य भारतीय पारंपरिक प्रणालियाँ ब्राज़ील में लोकप्रिय होती जा रही हैं, जो समग्र और रोकथाम-आधारित स्वास्थ्य देखभाल के वैश्विक स्वीकार्य दृष्टिकोण को दर्शाती 

स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत ईएसआईसी अस्पतालों में स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम

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चल रहे स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान (17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025) के अंतर्गत 28 सितम्बर 2025 को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के अस्पतालों ने तिरुप्पुर, तिरुनेलवेली, बेलटोला (गुवाहाटी) और अन्य आउटरीच स्थलों पर स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया। यह पहल पोषण माह के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य है निवारक स्वास्थ्य सेवा, पोषण जागरूकता और महिलाओं के स्वास्थ्य को मजबूत बनाना।

तिरुप्पुर स्थित ईएसआईसी अस्पताल में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित हुआ, जिसमें 27 महिला लाभार्थियों की मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी असंक्रामक बीमारियों की जांच की गई। हीमोग्लोबिन जाँच, मौखिक, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की स्क्रीनिंग तथा सिकल सेल जाँच भी की गई। साथ ही एनीमिया रोकथाम, मासिक धर्म स्वच्छता, पोषण, टीकाकरण और जीवनशैली संबंधी रोगों की रोकथाम पर जागरूकता सत्र आयोजित किए गए।

तिरुनेलवेली और थूथुकुडी कॉर्पोरेशन (पश्चिम जोन) में आयोजित शिविर में 160 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 127 लोगों की निवारक जांच की गई। विशेष ध्यान महिला स्वच्छता कर्मियों, डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर (DBC) और माइक्रो कम्पोस्ट सेंटर के कर्मचारियों पर दिया गया। जागरूकता सत्रों में मासिक धर्म स्वच्छता, मातृ स्वास्थ्य, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और असंक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए जीवनशैली संबंधी उपायों पर जानकारी दी गई। इस अवसर पर SPREE 2025 विशेष पंजीकरण अभियान के अंतर्गत अप्रतिबंधित श्रमिकों को ईएसआई योजना से जोड़ा गया।

गुवाहाटी के बेलटोला स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा ब्रह्मपुत्र औद्योगिक पार्क में भी स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया, स्तन, गर्भाशय ग्रीवा एवं मौखिक कैंसर की जांच की गई। कुल 111 लाभार्थियों की स्क्रीनिंग हुई, जिनमें 49 अस्पताल में और 62 आउटरीच शिविर में शामिल हुए। जागरूकता सत्रों में मासिक धर्म स्वास्थ्य, स्तनपान, पोषण और स्व-परीक्षण पर जोर दिया गया। प्रतिभागियों को आयरन फोलिक एसिड, कैल्शियम, मल्टीविटामिन और ओआरएस वितरित किए गए।

सशक्तिकरण की दिशा में पहल

यह अभियान महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ सभी वर्गों तक समावेशी एवं निवारक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के विज़न को साकार कर रहा है। ईएसआईसी अस्पताल इन शिविरों के माध्यम से न केवल निवारक स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, बल्कि पोषण और महिलाओं के स्वास्थ्य पर सामुदायिक स्तर पर जागरूकता भी फैला रहे हैं।


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