Media24Media.com: कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा — अनिश्चितताओं के दौर में आत्मनिर्भरता ही प्रासंगिक बने रहने का एकमात्र रास्ता

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कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा — अनिश्चितताओं के दौर में आत्मनिर्भरता ही प्रासंगिक बने रहने का एकमात्र रास्ता

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राजनाथ सिंह ने 6 मार्च 2026 को Kolkata में आयोजित “Sagar Sankalp - Reclaiming India’s Maritime Glory” रक्षा एवं समुद्री संवाद का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) और एक निजी मीडिया संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में सप्लाई चेन का पुनर्गठन, नई वैश्विक साझेदारियाँ और समुद्री गतिविधियों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे समय में भारत के लिए हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्व व्यवस्था तेजी से बदल रही है और वैश्विक अनिश्चितताएँ बढ़ रही हैं। मध्य पूर्व की स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा किहोर्मुज़ जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव तेल और गैस की आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीकी प्रगति आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण कारक बन चुकी है, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करना है ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

उन्होंने रक्षा उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी उद्योगों दोनों को समान अवसर देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रक्षा कॉरिडोर, DRDO प्रयोगशालाओं की उपलब्धता और आयात-निर्यात प्रक्रियाओं में सुधार जैसे कदम उद्योग को सशक्त बना रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। अप्रैल 2026 तक इसके लगभग 29,000 करोड़ रुपये तक पहुँचने की उम्मीद है और सरकार ने FY 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियाँ अब भारतीय शिपयार्ड में ही डिजाइन से लेकर निर्माण तक तैयार किए जा रहे हैं। इसे उन्होंने “Builder’s Navy” की दिशा में बड़ा कदम बताया।

कार्यक्रम में GRSE केकमोडोर पी. आर. हरि (सेवानिवृत्त)ने भारत की समुद्री विरासत और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का “Buyer’s Navy” से “Builder’s Navy” की ओर बढ़ना देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

इस संवाद में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा के दौरान समुद्री सुरक्षा, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने, वैश्विक जहाज निर्माण में भारत की भूमिका बढ़ाने और जहाज मरम्मत उद्योग को विकसित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि समन्वित योजना, नई तकनीक और संस्थागत सहयोग के माध्यम से भारत अपनी समुद्री शक्ति को मजबूत बना सकता है। उन्होंने लक्ष्य रखा कि भारत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल हो। 

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