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अरब सागर में भारत-पाकिस्तान की नौसेनाओं के जहाज टकराए, भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को किया तलब

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नई दिल्ली- भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली एक घटना सामने आई है। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक जहाज और पाकिस्तान नौसेना के एक पोत के बीच टक्कर हो गई। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

क्या हुआ?

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का जहाज उत्तर अरब सागर में routine surveillance mission पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय पोत के करीब आया और manoeuvring के दौरान दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई।

भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के इस व्यवहार को “unacceptable and unprofessional” बताया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, टक्कर से भारतीय जहाज को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह अपना मिशन जारी रखने में सक्षम रहा।

पाकिस्तान के किस जहाज से हुई टक्कर?

मीडिया रिपोर्टों में पाकिस्तानी पोत की पहचान PNS Hunain के तौर पर की गई है। रिपोर्टों के अनुसार यह पाकिस्तान नौसेना का Yarmook-class offshore patrol vessel है।

कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि टक्कर के बाद PNS Hunain को नुकसान हुआ और वह अपने बंदरगाह की ओर रवाना हुआ।

भारत ने क्या कार्रवाई की?

घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और औपचारिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया।

MEA के अनुसार, पाकिस्तान के राजनयिक से कहा गया कि संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाया जाए कि समुद्र में सभी सैन्य इकाइयां उचित सावधानी बरतें और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का सम्मान करें, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

1991 के समझौते का भी दिया गया हवाला

भारत ने इस घटना के संदर्भ में अप्रैल 1991 में हुए India-Pakistan Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements का हवाला दिया है।

MEA के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक पोत का आचरण इस समझौते के Article 10 के सीधे contravention में था। भारत ने इसी आधार पर पाकिस्तान के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

क्या यह सैन्य हमला था?

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टों में इस घटना को जानबूझकर किया गया सैन्य हमला घोषित नहीं किया गया है। भारत ने इसे पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के unsafe और unprofessional conduct से जुड़ी collision बताया है।

वहीं, घटना को लेकर पाकिस्तान की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए टक्कर की पूरी परिस्थितियों और दोनों पक्षों के दावों का स्वतंत्र आकलन आगे की जानकारी पर निर्भर करेगा।

क्यों अहम है यह घटना?

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से संवेदनशील संबंधों के बीच दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों का अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में इस तरह टकराना सुरक्षा और कूटनीति, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी बड़े नुकसान या व्यापक सैन्य कार्रवाई की सूचना नहीं है। फिलहाल भारत की प्रतिक्रिया राजनयिक विरोध, सावधानी बरतने की मांग और द्विपक्षीय समझौतों के पालन पर केंद्रित है।

बड़ी बात

उत्तर अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों की टक्कर के बाद भारत ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया है। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के व्यवहार को “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” बताते हुए 1991 के द्विपक्षीय समझौते का हवाला दिया है। फिलहाल घटना में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

भारत की तटरेखा को पारिस्थितिकी, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी के एकीकृत दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता: डॉ. जितेंद्र सिंह

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भारत के तटवर्ती क्षेत्र को पारिस्थितिकी, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, प्रौद्योगिकी और मानव विकास से जुड़े एक परस्पर-समन्वित क्षेत्र के रूप में देखा जाना चाहिए। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राष्ट्रीय तटीय पारिस्थितिकी, सुरक्षा एवं स्थिरता सम्मेलन (CCESS) 2026 को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की 11,000–12,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा समुद्री संसाधनों और ‘ब्लू इकॉनमी’ (नीली अर्थव्यवस्था) के लिए व्यापक संभावनाएँ प्रदान करती है।


मंत्री ने कहा कि देश की लंबी तटरेखा और विस्तृत समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र अनेक अवसर प्रदान करते हैं, लेकिन इनके लिए वैज्ञानिक ज्ञान, पर्यावरणीय स्थिरता, सुरक्षा और आर्थिक विकास को एक साथ जोड़ने वाले समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के पास 11,000–12,000 किलोमीटर लंबा तटीय क्षेत्र है, जो दुनिया के सबसे लंबे तटीय क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने देश के भविष्य के विकास में समुद्र और तटीय क्षेत्रों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्र के साथ भारत का ऐतिहासिक संबंध यह भी दर्शाता है कि हमारे पूर्वजों को समुद्री पर्यावरण के बारे में गहरा ज्ञान और समझ थी।

डीप ओशन मिशन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि भारत बड़े पैमाने पर अब तक अन्वेषित नहीं किए गए गहरे समुद्र के संसाधनों की खोज की दिशा में आगे बढ़ रहा है और साथ ही स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण भी कर रहा है। उन्होंने बताया कि पूरी तरह स्वदेशी अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन हाल ही में लॉन्च किया गया है, जो गहरे समुद्र में अनुसंधान और अन्वेषण के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि समुद्र की गहराइयों का अन्वेषण करने के लिए रोबोट और सबमर्सिबल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने गहरे समुद्र में अन्वेषण की भारत की क्षमता बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि इस क्षेत्र में देश की प्रगति से समुद्री संसाधनों को समझने तथा उनका उपयोग करने की नई संभावनाएँ खुलेंगी।

मंत्री ने गहरे समुद्र के अन्वेषण को भारत के उभरते आर्थिक अवसरों से जोड़ते हुए कहा कि यदि देश को अपनी अर्थव्यवस्था को अगले स्तर तक ले जाना है, तो उसे ऐसे संसाधनों की ओर देखना होगा जिनका अभी तक पूरी तरह अन्वेषण नहीं हुआ है। उन्होंने समुद्री एवं तटीय संसाधनों, धातुओं, खनिजों और मत्स्य संसाधनों को महत्वपूर्ण संभावनाओं वाले क्षेत्र बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि समुद्री संसाधन पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करते हुए देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ब्लैक सल्फाइड और खनिजों पर हो रहे अनुसंधान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य में समुद्री खनिजों के निष्कर्षण की संभावना उन क्षेत्रों में से एक है जिनका अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने मत्स्य क्षेत्र की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

मंत्री ने जोर दिया कि तटीय समुदाय व्यापक तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि तटीय संसाधनों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के प्रयासों के साथ-साथ तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की आजीविका में सुधार तथा पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने तटीय सुरक्षा के बढ़ते तकनीकी आयाम पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समुद्री निगरानी, सर्विलांस, संचार, रिमोट सेंसिंग, डेटा तथा उभरती प्रौद्योगिकियाँ तटीय और समुद्री पर्यावरण की समझ तथा उससे निपटने की भारत की तैयारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि इन तकनीकी क्षमताओं को एक व्यापक ‘कोस्टल इंडिया’ दृष्टिकोण के माध्यम से एक साथ लाने की आवश्यकता है, जिसमें सरकार और पूरे राष्ट्र की भागीदारी हो। उन्होंने जोर दिया कि तटरेखा से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों का समाधान अलग-अलग क्षेत्रों द्वारा अलग-अलग काम करके नहीं किया जा सकता।

इसी संदर्भ में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय तटीय पारिस्थितिकी, सुरक्षा एवं स्थिरता सम्मेलन (CCESS) 2026 विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। सम्मेलन का बहुविषयक स्वरूप—जिसमें पृथ्वी विज्ञान, शिक्षाविद, रक्षा, समुद्री संस्थान, कानूनी विशेषज्ञ, उद्योग और तटीय हितधारक शामिल हैं—तटीय चुनौतियों की एकीकृत समझ विकसित करने का अवसर देता है।

मंत्री ने जोर देकर कहा कि तटीय पारिस्थितिकी और तटीय सुरक्षा को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। लचीले और सक्षम तटीय क्षेत्रों के लिए स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, जागरूक समुदाय, प्रभावी शासन व्यवस्था और मजबूत वैज्ञानिक क्षमताएँ आवश्यक हैं।

उन्होंने समुद्री विज्ञान को राष्ट्रीय नीति से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया, ताकि वैज्ञानिक ज्ञान सीधे तटीय योजना और प्रबंधन में योगदान दे सके। उन्होंने तटीय समुदायों की भूमिका को भी रेखांकित किया और कहा कि उनकी आजीविका, पारंपरिक ज्ञान तथा भागीदारी टिकाऊ तटीय विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का तटीय बुनियादी ढाँचा और बंदरगाह संपर्क, व्यापार और आर्थिक विकास के लिए केंद्रीय महत्व रखते हैं। इन परिसंपत्तियों का टिकाऊ विकास तटीय और समुद्री पर्यावरण की वैज्ञानिक समझ पर आधारित होना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान का भी उल्लेख किया, जिसे पिछले पाँच वर्षों से चलाया जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2022 में 75 दिवसीय अभियान शुरू किया गया था, जिसमें तटीय राज्यों के नागरिकों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया था।

मंत्री ने कहा कि यह अभियान इस वर्ष भी 12 सितंबर से 19 सितंबर तक जारी रहेगा। इसके तहत सफाई अभियान सहित विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाएँगी और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) तथा अन्य संगठनों की भागीदारी होगी। उन्होंने भारत की तटरेखा को स्वच्छ रखने के लिए शपथ शुरू किए जाने का भी उल्लेख किया, जिससे अभियान में नागरिकों की भागीदारी का एक नया आयाम जुड़ा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि व्यापक उद्देश्य एक ऐसा ‘समग्र तटीय भारत (Coastal Bharat)’ दृष्टिकोण विकसित करना होना चाहिए, जिसमें पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक अवसर, वैज्ञानिक क्षमता और तटीय सुरक्षा एक-दूसरे को मजबूत करें। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की प्रवृत्ति से आगे बढ़कर एक ऐसे एकीकृत ढाँचे की आवश्यकता पर जोर दिया, जो वैज्ञानिक ज्ञान को सहयोग, अनुसंधान प्राथमिकताओं और व्यावहारिक कार्रवाई में बदल सके तथा एक सुरक्षित, टिकाऊ और समृद्ध तटीय भविष्य का निर्माण कर सके।

22 भारतीय नाविकों से जुड़े दो जहाजों का समुद्री डाकुओं ने किया अपहरण

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नई दिल्ली- यमन और सोमालिया के तट के पास दो अलग-अलग घटनाओं में सशस्त्र समुद्री डाकुओं ने दो विदेशी झंडे वाले व्यावसायिक जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। इन दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नाविक सवार थे। राहत की बात यह है कि उपलब्ध नवीनतम जानकारी के अनुसार सभी 22 भारतीय सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

पहला जहाज — MT Sibu 1

20 अगस्त को इरिट्रिया के झंडे वाला तेल उत्पाद टैंकर MT Sibu 1 अदन की खाड़ी में यमन के तट से लगभग 30 समुद्री मील दूर समुद्री डाकुओं के कब्जे में चला गया।

जहाज पर कुल 20 लोग सवार थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, करीब छह सशस्त्र समुद्री डाकू जहाज पर चढ़े और उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। जहाज ने संकट का संदेश भी भेजा था।

दूसरा जहाज — M/V Lutuf

इससे पहले 17 अगस्त को कैमरून के झंडे वाला मालवाहक जहाज M/V Lutuf सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास समुद्री डाकुओं ने अगवा कर लिया था।

इस जहाज पर 10 सदस्यीय क्रू था, जिसमें 6 भारतीय शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, आठ हथियारबंद समुद्री डाकू, AK-47 जैसी राइफलों के साथ दो छोटी नावों से जहाज तक पहुंचे और उसे अपने कब्जे में ले लिया।

क्रू ने शुरुआत में जहाज के सुरक्षित हिस्से, जिसे Citadel कहा जाता है, में शरण लेने की कोशिश की। हालांकि, समुद्री डाकू वहां तक पहुंच गए और बाद में क्रू सदस्यों को जहाज के ब्रिज पर ले गए। अब तक किसी भारतीय नाविक के घायल होने की खबर नहीं है। 

भारत सरकार ने क्या किया?

भारत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सोमालिया के संबंधित अधिकारियों के सामने मुद्दा उठाया है। नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग ने बताया कि वह सोमालियाई अधिकारियों के संपर्क में है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा एवं कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विदेश मंत्रालय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 

चिंता क्यों बढ़ी?

अदन की खाड़ी, सोमालिया के आसपास और पश्चिमी हिंद महासागर में हाल के महीनों में समुद्री डकैती की घटनाओं में दोबारा वृद्धि देखी जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और उन पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। AP के अनुसार, अप्रैल 2026 से क्षेत्र में छह व्यावसायिक जहाजों के अपहरण की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात:
  1. 22 भारतीय नाविक — 16 MT Sibu 1 पर और 6 M/V Lutuf पर — सभी के सुरक्षित होने की सूचना है।
  2. दोनों जहाज अभी समुद्री डाकुओं के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं।
  3. भारत सरकार और भारतीय उच्चायोग स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

भारतीय नौसेना को 30 महीने के लिए मिलेंगे दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन, 1,943 करोड़ रुपये का हुआ करार

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General Atomics के साथ रक्षा मंत्रालय ने किया समझौता, हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता होगी मजबूत

नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए दो MQ-9B Sea Guardian High-Altitude Long-Endurance (HALE) Remotely Piloted Aircraft Systems (RPAS) को 30 महीने की अवधि के लिए लीज पर लेने हेतु General Atomics Aeronautical Systems Inc. (GA-ASI) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार की कुल कीमत लगभग 1,943 करोड़ रुपये है।

यह अनुबंध 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अंबारासु की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समुद्री निगरानी क्षमता होगी और मजबूत

MQ-9B Sea Guardian HALE RPAS अत्याधुनिक प्रणालियों, आधुनिक सेंसर और उन्नत पेलोड से लैस हैं। इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की Maritime Domain Awareness (MDA) यानी समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों की निगरानी और जानकारी जुटाने की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

ये सिस्टम समुद्री क्षेत्र के विशाल इलाकों में लगातार खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (ISR) उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर भारत की नजर और मजबूत होगी तथा किसी भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर समय रहते निगरानी एवं प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी।

यह करार भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर निगरानी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका नौसेना का 8वां EOD अभ्यास 2026 कोच्चि में संपन्न

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विशेषज्ञों ने IED, बारूदी सुरंग निष्क्रिय करने और अंडरवॉटर सिस्टम के इस्तेमाल पर साझा किए अनुभव

कोच्चि- भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच आयोजित 8वां Explosive Ordnance Disposal (EOD) अभ्यास 2026 दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं की टीमों ने गहन पेशेवर संवाद, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान और विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया।

इस द्विपक्षीय अभ्यास ने EOD अभियानों के विभिन्न पहलुओं पर ज्ञान और अनुभव साझा करने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। विषय विशेषज्ञों के बीच हुए आदान-प्रदान में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से उत्पन्न वास्तविक समय के खतरों, विस्फोटकों को सुरक्षित बनाने की प्रक्रियाओं, बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने तथा मानवरहित अंडरवॉटर सिस्टम के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

डाइविंग ऑपरेशन में भी हुआ संयुक्त प्रशिक्षण

अभ्यास के क्रॉस-ट्रेनिंग चरण में डाइविंग से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें डूबे हुए जहाजों या संरचनाओं का पता लगाना और उन्हें निकालना, विशेषज्ञ उपकरणों का इस्तेमाल तथा स्लिदरिंग ऑपरेशन शामिल रहे।

संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों नौसेनाओं की डाइविंग टीमों की पेशेवर दक्षता और तकनीकी कौशल में वृद्धि हुई। साथ ही, इससे दोनों देशों के बीच बेहतर आपसी समझ और परिचालन क्षमता विकसित करने में भी मदद मिली।

अभ्यास का सफल समापन भारत और अमेरिका की नौसेनाओं की विशेष समुद्री अभियानों में परिचालन तालमेल, सहयोग और आपसी क्षमता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 01 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख (Deputy Chief of Naval Staff) का पदभार ग्रहण किया।

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38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को 01 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे श्रेणी ‘A’ (CAT ‘A’) सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication and Electronic Warfare) विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से नेवल हायर कमांड कोर्स भी किया है।

36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने समुद्र और तट—दोनों क्षेत्रों में कमान, संचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनके प्रमुख समुद्री दायित्वों में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer), पनडुब्बी रोधी युद्धक गश्ती पोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) आईएनएस शार्दुल तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान शामिल है। उन्होंने गलवान घटना के बाद ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय तथा वर्ष 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।

तटीय नियुक्तियों में उन्होंने श्री विजयपुरम स्थित नौसेना वायु स्टेशन आईएनएस उत्क्रोश के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दीं। नौसेना मुख्यालय में उनकी प्रमुख नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक (नेवल एयर स्टाफ), निदेशक तथा प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण) शामिल रहे। वे वर्ष 2006 से 2009 तक टैक्टिकल ऑडिट ग्रुप तथा वर्ष 2016 से 2019 तक भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) तथा फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के रूप में दायित्व निभाए।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के उपरांत उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक नौसैनिक संचालन (Director General Naval Operations – DGNO) के रूप में कार्य किया। डीजीएनओ के रूप में वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की योजना, तैयारी और परिचालन तत्परता तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं और उत्कृष्ट परिचालन नेतृत्व के सम्मान में उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया गया।

उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जो 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का किया शुभारंभ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का शुभारंभ किया। इनका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना तथा ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले कर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) प्रदान करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है।

28 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पिछले पांच दशकों में भारतीय तटरक्षक बल की उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ये दूरदर्शी नीतियां वर्ष 2027 में बल के स्वर्ण जयंती वर्ष की ओर बढ़ते समय उसके मनोबल और परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार समुद्री सुरक्षा बल के रूप में भारतीय तटरक्षक बल को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भर्ती और करियर में लैंगिक समानता

पहली नीति के तहत भारतीय तटरक्षक बल में अधिकारियों की भर्ती के लिए लैंगिक-तटस्थ (जेंडर-न्यूट्रल) व्यवस्था लागू की गई है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—

  • महिला उम्मीदवारों को पुरुष उम्मीदवारों के समान शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट (SSA) और परमानेंट अपॉइंटमेंट (PA) दोनों में भर्ती का अवसर मिलेगा।

  • पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी अब SSA का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

  • प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण से ही महिलाओं और पुरुषों को करियर में समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।

  • वर्तमान में कार्यरत PA महिला अधिकारियों को पात्रता की शर्तें पूरी करने पर उच्च पदों पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

  • SSA पर कार्यरत महिला अधिकारियों को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर अपनी सेवा को PA में परिवर्तित करने का विकल्प भी दिया जाएगा।

सरकार ने इस कदम को 'नारी शक्ति' और देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

समुद्र में लापता कर्मियों के परिजनों को त्वरित राहत

दूसरी नीति ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले तटरक्षक कर्मियों के निकटतम परिजनों (Next of Kin - NoK) को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लाई गई है।

इस नीति के तहत ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हुए तटरक्षक कर्मियों को एक्स-ग्रेशिया के उद्देश्य से 'मृत मान लिया गया' (Presumed Dead) घोषित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

इस सुधार से अनुग्रह राशि और सेवा-समापन लाभ (टर्मिनल बेनिफिट्स) प्रदान करने की प्रक्रिया तेज और सरल होगी। इससे शोकग्रस्त परिवारों को लंबे समय तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें कठिन समय में शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग पोत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका से पुर्तगाल के लिए रवाना, वैश्विक मंच पर दिखाई भारत की समुद्री शक्ति

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग पोत आईएनएस सुदर्शिनी 25 जुलाई 2026 को अमेरिका के बोस्टन बंदरगाह से लोकायन-26 (Lokayan 26) अभियान के तहत अपनी अगली यात्रा के लिए रवाना हो गया। अमेरिका प्रवास के दौरान पोत ने प्रतिष्ठित SAIL 250 समारोह और इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250 में भाग लेकर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और नौसैनिक परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

आईएनएस सुदर्शिनी ने अमेरिका के नॉरफ़ॉक, बाल्टीमोर, न्यूयॉर्क और बोस्टन में आयोजित SAIL 250 कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान पोत पर अनेक गणमान्य अतिथियों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न देशों की नौसेनाओं के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया गया।

इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय नौसेना ने समुद्री सहयोग, पेशेवर आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रमों ने भारत की समुद्री कूटनीति और वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की।

अब आईएनएस सुदर्शिनी पोंटा डेलगाडा (अज़ोरेस, पुर्तगाल) के लिए रवाना हो चुका है। अपनी इस यात्रा के दौरान यह पोत विश्व मंच पर भारत की समुद्री क्षमता, पेशेवर उत्कृष्टता और सद्भावना का प्रतीक बनकर आगे बढ़ रहा है।


भारत-जापान के बीच टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता आयोजित, रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति

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भारत और जापान के बीच 13 जुलाई 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री  कानो कोजी ने किया।

बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली रक्षा नीति वार्ता के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक चर्चा की तथा साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक में सैन्य-से-सैन्य सहयोग, संयुक्त मुख्यालयों के बीच समन्वय, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग (विशेष रूप से समुद्री प्रौद्योगिकी) तथा संस्थागत सहयोग सहित रक्षा संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई।

दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का स्वागत किया और नियमित उच्च-स्तरीय संवाद एवं आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया। इस वर्ष प्रस्तावित मंत्रिस्तरीय यात्राओं और 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के संभावित परिणामों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा अन्य उभरते रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ती समानता पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में मिलकर कार्य जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में जापान के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करना महत्वपूर्ण है। वहीं, कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों के और विस्तार के प्रति जापान की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले रक्षा सचिव ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी से मुलाकात कर उन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने जापानी रक्षा मंत्री को भारत आने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी में लगातार आ रही मजबूती पर संतोष व्यक्त किया।

अपने दौरे की शुरुआत में रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज मेमोरियल स्टोन पर पुष्पांजलि अर्पित कर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के उन जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह यात्रा भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते रक्षा संबंधों, पारस्परिक सम्मान तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

इंडोनेशिया और सिंगापुर ने मजबूत की साझेदारी, मलक्का जलडमरूमध्य को खुला रखने पर बनी सहमति

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जकार्ता- दक्षिण-पूर्व एशिया के दो प्रमुख देशों इंडोनेशिया और सिंगापुर ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और समुद्री व्यापार को लेकर अपनी साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया है। दोनों देशों के नेताओं की उच्चस्तरीय बैठक में मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत सभी देशों के लिए सुरक्षित और खुला बनाए रखने पर सहमति बनी।

मलक्का जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था, निवेश और व्यापार बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। नेताओं ने कहा कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आपसी सहयोग को बनाए रखने के लिए दोनों देश मिलकर काम करते रहेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच इंडोनेशिया और सिंगापुर की यह साझेदारी पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में आर्थिक विकास और समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती दे सकती है।

मुख्य बातें

  • इंडोनेशिया और सिंगापुर ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

  •  मलक्का जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत सुरक्षित और खुला रखने का संकल्प।

  •  समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सहयोग बढ़ाने पर जोर।

  •  क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए मिलकर काम करने का भरोसा।

आईएनएस इक्षाक सेशेल्स पहुंचा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित सर्वे वेसल लार्ज (Survey Vessel Large - SVL) आईएनएस इक्षाक (INS Ikshak) 26 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया बंदरगाह (Port Victoria) पहुंच गया।

आईएनएस इक्षाक की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ हो रही है, जो भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों और मित्रता को और सुदृढ़ करने का प्रतीक है।

राष्ट्रीय दिवस समारोह और नौसैनिक सहयोग

अपने प्रवास के दौरान आईएनएस इक्षाक सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज के बीच कई पेशेवर बैठकों और संयुक्त गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, समन्वय (Interoperability) और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

सामुदायिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन

इस दौरे के दौरान भारतीय नौसेना स्थानीय समुदायों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, आवश्यक वस्तुओं का वितरण तथा अन्य सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, सद्भाव और आपसी संबंधों को और मजबूत करना है।

आम नागरिकों के लिए भी खुलेगा जहाज

पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस इक्षाक को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे लोग भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को करीब से जान सकेंगे।

MAHASAGAR विजन को मिलेगा बल

आईएनएस इक्षाक की यह तैनाती MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के बाल्टीमोर पहुंची, ‘लोकायन 26’ अभियान के तहत भारत की समुद्री विरासत का प्रदर्शन

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) 26 जून 2026 को अमेरिका के मैरीलैंड राज्य स्थित बाल्टीमोर बंदरगाह पहुंचा। यह यात्रा भारतीय नौसेना के ऐतिहासिक ‘लोकायन 26’ (Lokayan 26) अंतरमहासागरीय अभियान का हिस्सा है।

नॉरफ़ॉक से बाल्टीमोर तक की यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (C&D) नहर से होकर गुजरते हुए मिड-अटलांटिक क्षेत्र के प्रमुख पुलों के नीचे सफलतापूर्वक समुद्री मार्ग तय किया।

भारत-अमेरिका समुद्री मित्रता को मिलेगा नया आयाम

बाल्टीमोर में आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और भारतीय नौसेना तथा अमेरिकी नौसेना के बीच मजबूत मित्रता एवं सहयोग का प्रतीक है। अपने प्रवास के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहयोग कार्यक्रमों और सामुदायिक संपर्क गतिविधियों में भाग लेगा।

यह दौरा 'Sail250 Maryland' समारोह से पहले हो रहा है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

नॉरफ़ॉक में भी किया भारत का प्रतिनिधित्व

बाल्टीमोर पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने 19 से 23 जून 2026 तक नॉरफ़ॉक (वर्जीनिया) में आयोजित Sail250 Virginia समारोह में भाग लिया। इस दौरान दुनिया भर से आए पारंपरिक ऊंचे जहाजों (Tall Ships) के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 'Parade of Sail' और 'City Crew Parade' में हिस्सा लिया।

पांच महीने में तय किए 13,000 से अधिक समुद्री मील

आईएनएस सुदर्शिनी ने कोच्चि से नॉरफ़ॉक तक की यात्रा में पिछले पांच महीनों के दौरान 13,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय की है। यह ऐतिहासिक अभियान भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना का प्रतीक है, जो समुद्रों के माध्यम से वैश्विक मित्रता, सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है।

यह अभियान विश्व समुदाय के बीच भारत की समुद्री क्षमता, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करता है।

भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड पहुंचे, भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अपने परिचालन तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहीप (Sattahip) बंदरगाह पहुंच गए हैं।

इस बेड़े का नेतृत्व रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट, कर रहे हैं। थाईलैंड पहुंचने पर रॉयल थाई नेवी ने भारतीय नौसैनिक दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह पोर्ट कॉल भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बढ़ते समुद्री सहयोग का हिस्सा है तथा भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कई संयुक्त गतिविधियों का होगा आयोजन

इस दौरे के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें—

  • पेशेवर विचार-विमर्श (Professional Exchanges)

  • क्रॉस-डेक विजिट

  • संयुक्त परिचालन गतिविधियां

  • खेल प्रतियोगिताएं

  • सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम (Community Outreach)

शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, समन्वय (Interoperability) और विश्वास को और मजबूत करना है।

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन

यह यात्रा भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोतों की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है। आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति आधुनिक तकनीक, मॉड्यूलर निर्माण और उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।

इस पोर्ट कॉल के माध्यम से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।

भारतीय तटरक्षक बल के लिए चौथे नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) की कील रखी गई

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मुंबई- भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए बनाए जा रहे छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) में से चौथे पोत की कील रखने (Keel Laying) की रस्म आज मुंबई में संपन्न हुई। यह पोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जा रहा है।

अत्याधुनिक मशीनरी और आधुनिक प्रणालियों से लैस यह पोत आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश की स्वदेशी रक्षा एवं समुद्री निर्माण क्षमताओं को और मजबूत करेगा। यह परियोजना भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता बढ़ाने और तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

समारोह में भारतीय तटरक्षक बल और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि इन छह नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स के निर्माण का अनुबंध 20 दिसंबर 2023 को संपन्न हुआ था।

इन अत्याधुनिक पोतों के शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, तटीय सुरक्षा और समुद्री कानून प्रवर्तन क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, यह परियोजना भारत की सामरिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा स्वदेशी बल: 21 जून को तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों का होगा कमीशनिंग समारोह

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कोलकाता- भारतीय नौसेना 21 जून 2026 को कोलकाता में स्वदेशी रूप से निर्मित तीन अत्याधुनिक अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म — दुनागिरी, संशोधक और अग्रय — को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह ऐतिहासिक समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होगा।

भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित ये तीनों प्लेटफॉर्म समुद्री युद्ध, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी अभियानों जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी तैनाती से भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक शक्ति को नई मजबूती मिलेगी।

दुनागिरी: अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट

दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) सहित आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगा।

संशोधक: समुद्री सर्वेक्षण में नई ताकत

संशोधक बड़े सर्वेक्षण पोत (Survey Vessel Large) श्रृंखला का चौथा जहाज है। इसे तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, समुद्री भू-वैज्ञानिक और महासागरीय आंकड़ों के संग्रह के लिए तैयार किया गया है। यह ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) जैसी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है।

अग्रय: पनडुब्बी रोधी अभियानों का नया प्रहरी

अग्रय अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट का चौथा पोत है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और शैलो वाटर सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो तटीय क्षेत्रों में छिपे पानी के भीतर के खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी सफलता

इन तीनों प्लेटफॉर्म में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इनके निर्माण में देशभर के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी रही, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला।

समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई

दुनागिरी, संशोधक और अग्रय की कमीशनिंग भारतीय नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड, निजी उद्योगों और MSMEs के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी क्षमता और ब्लू-वॉटर ऑपरेशंस को नई मजबूती प्रदान करेगी।



आत्मनिर्भर भारत को बड़ी मजबूती: भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर खरीदेगा रक्षा मंत्रालय

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और मजबूत करने तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से 12 सेट 1.25 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर की खरीद का अनुबंध किया है।

यह अनुबंध नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश में रक्षा उत्पादन का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर आधुनिक युद्धपोतों में विद्युत उत्पादन का प्रमुख स्रोत होते हैं। ये जनरेटर नौसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू प्रणालियों, उन्नत हथियारों और अत्याधुनिक सेंसरों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए इन्हें नौसैनिक युद्धक क्षमताओं की रीढ़ माना जाता है।

इस अनुबंध के माध्यम से भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर के स्वदेशी निर्माण की क्षमता विकसित होगी। साथ ही, उपकरणों के पूरे जीवनचक्र (Life-Cycle) के दौरान रखरखाव और तकनीकी सहायता भी देश में ही उपलब्ध होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।



भारतीय तटरक्षक बल में स्वदेशी एयर कुशन वाहन (होवरक्राफ्ट) शामिल, समुद्री सुरक्षा को मिलेगा बल

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भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के लिए चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित छह स्वदेशी एयर कुशन वाहनों (ACVs)/होवरक्राफ्ट में से पहले वाहन को 18 जून 2026 को गोवा में सेवा में शामिल किया गया।

यह होवरक्राफ्ट समुद्री सुरक्षा, निगरानी, खोज एवं बचाव अभियानों सहित विभिन्न समुद्री दायित्वों में भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाएगा तथा उभरती चुनौतियों का सामना करने की उसकी क्षमता को मजबूत करेगा।

इस स्वदेशी प्लेटफॉर्म का शामिल होना आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के साथ-साथ देश के समुद्री औद्योगिक आधार की बढ़ती क्षमता और मजबूती का भी प्रतीक है।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में भारतीय तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारी तथा जहाज निर्माण उद्योग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह शामिलीकरण संगठन द्वारा आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि पर दिए जा रहे निरंतर जोर को दर्शाता है, जिससे देश के समुद्री हितों की सुरक्षा के उसके दायित्व को और सशक्त बनाया जा सके।

भारतीय तटरक्षक बल के लिए छह एयर कुशन वाहनों की खरीद का अनुबंध रक्षा मंत्रालय और चौगुले एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के बीच 24 अक्टूबर को हस्ताक्षरित किया गया था। इन स्वदेशी होवरक्राफ्टों के शामिल होने से तटरक्षक बल की तटीय एवं समुद्री क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया और निगरानी क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

श्रीलंका दौरे के बाद कोलंबो से रवाना हुआ आईएनएस शारदा, भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती

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भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस शारदा (INS Sharda) 13 जून 2026 को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से अपने सफल बंदरगाह दौरे के बाद रवाना हो गया। यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग, मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

इस दौरान भारतीय नौसेना और श्रीलंकाई नौसेना के बीच कई पेशेवर, प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, समन्वय और सहयोग को नई ऊर्जा मिली।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर

दौरे के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के कर्मियों को भारतीय नौसेना द्वारा छोटे हथियारों के संचालन, बुनियादी अग्निशमन, प्राथमिक उपचार तथा बचाव प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना था।

वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों की अहम मुलाकात

यात्रा के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर रियर एडमिरल जगथ कुमारा ने आईएनएस शारदा का दौरा किया और जहाज के अधिकारियों एवं चालक दल के साथ संवाद किया। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

खेल और पेशेवर आदान-प्रदान से बढ़ी मित्रता

दौरे के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं, पेशेवर चर्चाएं और क्रॉस-डेक विजिट्स आयोजित किए गए। इन गतिविधियों ने दोनों नौसैनिक बलों के बीच पारस्परिक समझ, संचालन क्षमता और मित्रता को और मजबूत किया।

भारतीय उच्चायुक्त से की शिष्टाचार भेंट

कोलंबो प्रवास के दौरान आईएनएस शारदा के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा से शिष्टाचार मुलाकात भी की। इस बैठक में भारत-श्रीलंका संबंधों और समुद्री सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

MAHASAGAR विजन को मिला बल

आईएनएस शारदा की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग और मित्रता का प्रतीक रही। साथ ही इसने MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के विजन के अनुरूप क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और साझा विकास के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया।

यह दौरा केवल एक नौसैनिक यात्रा नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सेशेल्स पहुंचा आईएनएस तरकश, भारत-सेशेल्स समुद्री साझेदारी हुई और मजबूत

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सेशेल्स- भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तरकश दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के दौरान सेशेल्स की राजधानी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री सहयोग तथा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

आईएनएस तरकश ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज पीएस ज़ोरोस्टर को भारत से सेशेल्स तक सुरक्षित रूप से एस्कॉर्ट किया। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में मरम्मत और उन्नयन कार्य पूरा करने के बाद सेशेल्स लौट रहा था। यह सहयोग दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

इस दौरे के दौरान आईएनएस तरकश के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन रोहित मिश्रा सेशेल्स सरकार और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

भारतीय नौसेना सेशेल्स सरकार को महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण, आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी सामग्री भी सौंपेगी, जिससे समुद्री सुरक्षा और संचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

यह पोर्ट कॉल भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता, आपसी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी बल मिलेगा।



भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत जीएनएसएस जैमर खरीदने हेतु रक्षा मंत्रालय ने 449 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत क्षमता वाले ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (Enhanced Capability Global Navigation Satellite System - ECGNSS) जैमर की खरीद के लिए Accord Software and Systems Private Limited के साथ 449 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। इस प्रणाली में न्यूनतम 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा।

यह अनुबंध 10 जून 2026 को राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में नई दिल्ली में हस्ताक्षरित किया गया। यह खरीद ‘बाय (इंडियन-इंडिजिनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के अंतर्गत की गई है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली की प्रमुख क्षमताओं में दुश्मन के ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) रिसीवर की सिग्नल प्राप्ति और ट्रैकिंग क्षमता को बाधित करना, सिग्नल स्पूफिंग तथा भ्रामक जैमिंग (Deceptive Jamming) शामिल है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना के युद्धपोत बहु-खतरा (Multi-Threat) वातावरण में अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालन कर सकेंगे।

यह अनुबंध सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है तथा देश की समुद्री सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यह उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण और भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।


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