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भारत-जापान के बीच टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता आयोजित, रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति

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भारत और जापान के बीच 13 जुलाई 2026 को जापान की राजधानी टोक्यो में 8वीं रक्षा नीति वार्ता (Defence Policy Dialogue) आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया, जबकि जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप रक्षा मंत्री  कानो कोजी ने किया।

बैठक में दोनों पक्षों ने पिछली रक्षा नीति वार्ता के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की और भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी (Special Strategic and Global Partnership) को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर व्यापक चर्चा की तथा साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बैठक में सैन्य-से-सैन्य सहयोग, संयुक्त मुख्यालयों के बीच समन्वय, समुद्री सहयोग, रक्षा अभ्यास, क्षमता निर्माण, रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग (विशेष रूप से समुद्री प्रौद्योगिकी) तथा संस्थागत सहयोग सहित रक्षा संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की गई।

दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग के लगातार विस्तार का स्वागत किया और नियमित उच्च-स्तरीय संवाद एवं आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया। इस वर्ष प्रस्तावित मंत्रिस्तरीय यात्राओं और 2+2 मंत्रिस्तरीय वार्ता के संभावित परिणामों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में रक्षा औद्योगिक सहयोग, तकनीकी नवाचार, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तथा अन्य उभरते रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर बढ़ती समानता पर संतोष व्यक्त किया और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में मिलकर कार्य जारी रखने पर सहमति जताई। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर आधारित स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने भारत के रक्षा क्षेत्र में जापान के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी के तहत व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करना महत्वपूर्ण है। वहीं, कानो कोजी ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भारत के साथ रक्षा संबंधों के और विस्तार के प्रति जापान की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले रक्षा सचिव ने जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी से मुलाकात कर उन्हें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने जापानी रक्षा मंत्री को भारत आने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का औपचारिक निमंत्रण भी सौंपा। दोनों पक्षों ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी में लगातार आ रही मजबूती पर संतोष व्यक्त किया।

अपने दौरे की शुरुआत में रक्षा सचिव ने टोक्यो स्थित सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज मेमोरियल स्टोन पर पुष्पांजलि अर्पित कर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के उन जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान दिया।

यह यात्रा भारत और जापान के बीच लगातार मजबूत होते रक्षा संबंधों, पारस्परिक सम्मान तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक रही।

10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद: इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर

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10वां भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद 16 जून 2026 को बैंकॉक में आयोजित किया गया। इस संवाद में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की गई तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा से जुड़े पारस्परिक हितों के मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक की सह-अध्यक्षता थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के उप-स्थायी सचिव एडमिरल नुट्टापोल डियावानिच और भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्यजीत मोहंती ने की।

दोनों पक्षों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा की और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिनिधिमंडलों ने पिछले रक्षा संवाद के बाद से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। चर्चा के प्रमुख विषयों में सैन्य-से-सैन्य संपर्क, क्षमता निर्माण पहल, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समुद्री सहयोग तथा अन्य साझा हितों के क्षेत्र शामिल रहे।

बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे रक्षा उद्योग सहयोग की भी समीक्षा की गई। दोनों पक्षों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और सैन्य क्षमताओं के विकास में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की, ताकि दोनों देशों के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी को प्रोत्साहन मिल सके।

इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडलों ने Association of Southeast Asian Nations (आसियान) के नेतृत्व वाले तंत्रों सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय रक्षा मंचों के अंतर्गत सहयोग पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने संवाद और सहयोग के माध्यम से साझा सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने तथा व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक का समापन भविष्य की गतिविधियों और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की आगामी दिशा पर चर्चा के साथ हुआ। उल्लेखनीय है कि भारत और थाईलैंड ने वर्ष 2025 में अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘कलाम एंड कवच 3.0’ में आत्मनिर्भरता और संयुक्तता पर दिया जोर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा— “किसी भी राष्ट्र की शक्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी सेना, प्रयोगशालाएं और उद्योग कितनी तेजी से एक साथ सोच और काम कर सकते हैं,” उन्होंने आत्मनिर्भरता और जॉइंटनेस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतिक स्वायत्तता आवश्यक है। वे 14 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित रक्षा रणनीतिक संवाद “कलाम एंड कवच 3.0” के दौरान वीडियो संदेश के माध्यम से नीति निर्माताओं, सैन्य नेतृत्व, रक्षा उद्योग, राजनयिकों, स्टार्टअप्स, अकादमिक जगत और रणनीतिक विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय का युद्धक्षेत्र उन लोगों का साथ देगा जो विचार, प्रोटोटाइप और उसके वास्तविक उपयोग के बीच के समय को कम कर सकेंगे। उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों, चल रहे संघर्षों, साइबर खतरों, आपूर्ति-श्रृंखला की कमजोरियों और हाइब्रिड युद्ध के नए स्वरूपों को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को पुराने सिद्धांतों पर आधारित नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बताया और कहा कि जो देश महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए दूसरों पर अत्यधिक निर्भर रहता है, वह संकट के समय असुरक्षित हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रमुख प्रणालियों को देश के अपने पारिस्थितिकी तंत्र में ही विकसित, उत्पादित, मेंटेन और अपग्रेड करना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध अब साइलो में काम नहीं करता, बल्कि भूमि, समुद्र, वायु, साइबर और अंतरिक्ष—इन सभी क्षेत्रों में समन्वय की आवश्यकता है, साथ ही प्रयोगशालाओं, उद्योगों, स्टार्टअप्स, नीति-निर्माताओं और सैन्य संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।

उद्घाटन संबोधन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने “कलाम एंड कवच” को एक ऐसा मंच बताया जहाँ विचार राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ मिलते हैं। उन्होंने कहा कि “कलाम” ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का प्रतीक है, जबकि “कवच” सुरक्षा और राष्ट्र रक्षा का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने बदलते युद्ध परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के खतरे पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं और पूर्वानुमान आधारित तैयारी आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत JAI (Jointness, Aatmanirbharta & Innovation) की अवधारणा को भारत की भविष्य की सुरक्षा संरचना का आधार बताया।

उन्होंने हालिया ऑपरेशनल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” को भारत की क्षमताओं का उदाहरण बताया और कहा कि यह आत्मनिर्भर प्रणालियों, तेज प्रतिक्रिया और संयुक्त सैन्य समन्वय का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत का रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ से बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात और ₹3 लाख करोड़ रक्षा उत्पादन हासिल करना है।

एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने अपने विशेष संबोधन में स्वदेशी नवाचार को भारत की रणनीतिक भविष्य सुरक्षा का आधार बताया।

“कलाम एंड कवच 3.0” में AI आधारित युद्ध, स्वायत्त प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम C4ISR, रक्षा उत्पादन विस्तार और रणनीतिक साझेदारियों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, सशस्त्र बलों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।

कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा — अनिश्चितताओं के दौर में आत्मनिर्भरता ही प्रासंगिक बने रहने का एकमात्र रास्ता

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राजनाथ सिंह ने 6 मार्च 2026 को Kolkata में आयोजित “Sagar Sankalp - Reclaiming India’s Maritime Glory” रक्षा एवं समुद्री संवाद का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) और एक निजी मीडिया संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में सप्लाई चेन का पुनर्गठन, नई वैश्विक साझेदारियाँ और समुद्री गतिविधियों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे समय में भारत के लिए हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्व व्यवस्था तेजी से बदल रही है और वैश्विक अनिश्चितताएँ बढ़ रही हैं। मध्य पूर्व की स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा किहोर्मुज़ जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव तेल और गैस की आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीकी प्रगति आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण कारक बन चुकी है, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करना है ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

उन्होंने रक्षा उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी उद्योगों दोनों को समान अवसर देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रक्षा कॉरिडोर, DRDO प्रयोगशालाओं की उपलब्धता और आयात-निर्यात प्रक्रियाओं में सुधार जैसे कदम उद्योग को सशक्त बना रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। अप्रैल 2026 तक इसके लगभग 29,000 करोड़ रुपये तक पहुँचने की उम्मीद है और सरकार ने FY 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियाँ अब भारतीय शिपयार्ड में ही डिजाइन से लेकर निर्माण तक तैयार किए जा रहे हैं। इसे उन्होंने “Builder’s Navy” की दिशा में बड़ा कदम बताया।

कार्यक्रम में GRSE केकमोडोर पी. आर. हरि (सेवानिवृत्त)ने भारत की समुद्री विरासत और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का “Buyer’s Navy” से “Builder’s Navy” की ओर बढ़ना देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

इस संवाद में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा के दौरान समुद्री सुरक्षा, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने, वैश्विक जहाज निर्माण में भारत की भूमिका बढ़ाने और जहाज मरम्मत उद्योग को विकसित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि समन्वित योजना, नई तकनीक और संस्थागत सहयोग के माध्यम से भारत अपनी समुद्री शक्ति को मजबूत बना सकता है। उन्होंने लक्ष्य रखा कि भारत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल हो। 

तकनीकी श्रेष्ठता ही आधुनिक युद्ध में सफलता की कुंजी: सीडीएस जनरल अनिल चौहान

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“ऑपरेशन सिंदूर आधुनिक युद्ध का एक सशक्त उदाहरण है, जिसमें प्रिसिशन स्ट्राइक क्षमताओं, नेटवर्क-केंद्रित अभियानों, डिजिटाइज्ड इंटेलिजेंस और मल्टी-डोमेन रणनीतियों का सीमित समय में प्रभावी उपयोग किया गया,” यह बात चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने 11 नवम्बर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित दिल्ली डिफेंस डायलॉग में “आधुनिक युद्ध पर तकनीक का प्रभाव” विषय पर अपने विशेष संबोधन में कही।

जनरल चौहान ने कहा कि सैन्य नेतृत्व के लिए बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को तेजी से ढालना अनिवार्य है, क्योंकि आज के दौर में तकनीकी श्रेष्ठता ही युद्धक्षेत्र में सफलता का निर्णायक तत्व बन गई है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध का मूल उद्देश्य हमेशा विजय प्राप्त करना ही होता है, और जो तकनीक में आगे होंगे, वही अंततः विजेता बनेंगे। उन्होंने बताया कि नई उभरती तकनीकों, बदलते सैन्य सिद्धांतों और भूराजनीतिक परिस्थितियों ने आधुनिक युद्ध के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। आज युद्ध की दिशा तेजी से हो रहे नवाचारों, रणनीतिक साझेदारियों, और संगठनात्मक परिवर्तन से निर्धारित हो रही है।

दो दिवसीय यह आयोजन मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (MP-IDSA) द्वारा “रक्षा क्षमता विकास के लिए नई युग की तकनीकों का उपयोग” विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।

अपने स्वागत संबोधन में एमपी-आईडीएसए के महानिदेशक (DG) राजदूत सुजन चिनॉय ने इस अवसर के विशेष महत्व पर प्रकाश डाला, क्योंकि यह संस्थान के 60वें स्थापना दिवस के साथ भी मेल खाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा क्षमताओं को आकार देने में तकनीक की भूमिका परिवर्तनकारी रही है और दुनिया भर की सशस्त्र सेनाएँ अब औद्योगिक युग से सूचना एवं साइबर युग की ओर बढ़ रही हैं।

राजदूत चिनॉय ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), रोबोटिक्स, और क्वांटम फिजिक्स जैसी उभरती तकनीकें अब युद्ध और सुरक्षा के प्रमुख निर्धारक बनती जा रही हैं। उन्होंने विदेशी तकनीक के अधिग्रहण और स्वदेशी रक्षा निर्माण के बीच संतुलन बनाए रखने पर बल दिया तथा ‘आत्मनिर्भरता’ (Aatmanirbharta) की नीति के अंतर्गत स्वदेशी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।



यह संवाद नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाता है ताकि वे यह साझा कर सकें कि नई पीढ़ी की तकनीकों का उपयोग भारत की रक्षा क्षमताओं को और कैसे सशक्त बना सकता है।

इन चर्चाओं से डेटा-आधारित रक्षा प्रणालियों के विकास और भविष्य की सुरक्षा तकनीकों को दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कुआलालंपुर में भारत-आसियान द्वितीय अनौपचारिक रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया

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कुआलालंपुर (मलेशिया)-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-आसियान द्वितीय अनौपचारिक रक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लिया, जो कुआलालंपुर, मलेशिया में आयोजित हुई। बैठक के दौरान आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भारत की प्रमुख भूमिका की सराहना की और नई दिल्ली के साथ रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने की इच्छा व्यक्त की।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह बैठक भारत और आसियान के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है, विशेषकर आसियान-भारत कार्ययोजना 2026–2030 के रक्षा एवं सुरक्षा घटकों के संदर्भ में। उन्होंने दो भविष्यमुखी पहलें घोषित कीं —

  1. आसियान-भारत पहल: संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में महिलाओं की भागीदारी, तथा

  2. आसियान-भारत रक्षा थिंक-टैंक संवाद (Defence Think-Tank Interaction)।

मलेशिया के रक्षा मंत्री (ADMM के अध्यक्ष) ने राजनाथ सिंह का स्वागत करते हुए भारत को एक “सुपरपावर” बताया। उन्होंने कहा कि आसियान समुदाय भारत के साथ साइबर एवं डिजिटल रक्षा, रक्षा उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग गहरा करके लाभान्वित होगा। उन्होंने भारत की आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग और तकनीकी अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना की, जिससे आसियान सदस्य देशों को भी लाभ मिल सकता है।

फिलीपींस के रक्षा मंत्री ने भी भारत की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद के प्रति सम्मान का उदाहरण है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून (UNCLOS) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने आगामी भारत-आसियान समुद्री अभ्यास (Maritime Exercise) में पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की और फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में होने वाली संयुक्त गतिविधियों का उल्लेख किया।

कंबोडिया के रक्षा मंत्री ने भी भारत के उदय की सराहना की और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों, मानवीय सहायता (HMA) और सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में भारत के योगदान के लिए धन्यवाद दिया।

सिंगापुर के रक्षा मंत्री ने कहा कि आसियान को भारत की क्षमता और विश्वसनीयता पर पूर्ण विश्वास है। उन्होंने भारत और आसियान के बीच संयुक्त अभ्यास, नीति संवाद, और युवा पीढ़ी के स्तर पर अधिक सहभागिता का सुझाव दिया, ताकि भविष्य के सहयोग के लिए मजबूत आधार तैयार किया जा सके।

थाईलैंड के रक्षा मंत्री ने भी भारत की रक्षा तकनीक और उद्योग पारिस्थितिकी की प्रशंसा की और “क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता” की आवश्यकता पर बल दिया।

बैठक के अंत में आसियान रक्षा मंत्रियों ने भारत की पहलों का स्वागत किया और भारत-आसियान रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।



भारत–ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों की वार्ता: रक्षा सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत

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कैनबरा- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक दोनों देशों के बीच पहली ऑस्ट्रेलिया–भारत रक्षा मंत्रियों की वार्ता (Australia–India Defence Ministers’ Dialogue) के रूप में आयोजित की गई।

वार्ता के दौरान दोनों मंत्रियों ने रक्षा सहयोग में अभूतपूर्व प्रगति और भविष्य की दिशा पर चर्चा की। बैठक ने 2020 में भारत–ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के बाद से चार उच्चस्तरीय बैठकों के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।

साझा दृष्टिकोण और सहयोग

दोनों नेताओं ने अपने प्रधानमंत्रियों की दीर्घकालिक दृष्टि को आगे बढ़ाते हुए क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सामूहिक सहयोग पर बल दिया। उन्होंने संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप (Joint Maritime Security Collaboration Roadmap) पर चर्चा की और रक्षा व सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा को और सशक्त करने की उम्मीद जताई।

महत्वपूर्ण समझौते

बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनमें शामिल हैं:

  • वार्षिक रक्षा मंत्रियों की वार्ता आयोजित करने का निर्णय

  • परस्पर पनडुब्बी खोज और बचाव सहयोग समझौता (Mutual Submarine Rescue Support and Cooperation) पर हस्ताक्षर

  • एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग व्यवस्था (Air-to-Air Refuelling Arrangement) के क्रियान्वयन में प्रगति

  • संयुक्त स्टाफ वार्ता (Joint Staff Talks) की स्थापना, जो संयुक्त सैन्य अभ्यास और परिचालन सहयोग को बढ़ावा देगी

सैन्य अभ्यास और प्रशिक्षण

दोनों देशों ने विभिन्न स्तरों पर बढ़ते सैन्य अभ्यासों और जटिल अभियानों की सराहना की।

  • ऑस्ट्रेलिया ने 2025 के Talisman Sabre अभ्यास में भारत की भागीदारी का स्वागत किया।

  • भारत ने ऑस्ट्रेलिया की Exercise Black Carillon में शामिल होने के आमंत्रण को सराहा।

  • 2026 में ऑस्ट्रेलियाई रक्षा कॉलेज में अधिक भारतीय छात्रों को शामिल किया जाएगा, और 2027 में पहली बार एक स्थान ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल अकादमी में भी दिया जाएगा।

रक्षा उद्योग और तकनीकी सहयोग

दोनों देशों ने रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई।

  • ऑस्ट्रेलिया के पहले रक्षा व्यापार मिशन (Defence Trade Mission) को भारत में आयोजित किया जाएगा।

  • भारत ने ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के जहाजों की मरम्मत और रखरखाव के लिए भारतीय शिपयार्ड की पेशकश की।

  • दोनों देशों ने संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) के माध्यम से रक्षा अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग

मंत्रियों ने एक मुक्त, समावेशी और स्थिर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने समुद्री कानूनों के पालन, निर्बाध व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन किया।

चतुष्कोणीय सहयोग (Quad)

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने भारत–ऑस्ट्रेलिया–जापान–अमेरिका (Quad) के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का स्वागत किया। उन्होंने Exercise Malabar 2025 के दौरान समुद्री निगरानी सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति जताई।

थलसेना सहयोग

दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते जुड़ाव पर संतोष व्यक्त किया गया। उन्होंने Exercise Austrahind और Exercise Puk Puk को और विस्तारित करने पर सहमति जताई, साथ ही सुरक्षित संचार, ड्रोन तकनीक और विशेष अभियानों में साझा विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का निर्णय लिया।

राजनयिक और सांस्कृतिक सहयोग

ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय नौसेना पोत कदमत की पापुआ न्यू गिनी की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ में भागीदारी की सराहना की और भारत को ऑपरेशन रेंडर सेफ में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

बैठक के अंत में रिचर्ड मार्ल्स ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए 2026 में भारत आने की सहमति दी।


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