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भारत ने एडवांस अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया

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भारत ने 8 मई 2026 को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) प्रणाली से लैस एडवांस अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया।

इस मिसाइल का परीक्षण कई पेलोड्स के साथ किया गया, जिन्हें हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों पर सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया।

मिसाइल की पूरी उड़ान पर नजर रखने के लिए कई ग्राउंड और जहाज आधारित ट्रैकिंग स्टेशनों का उपयोग किया गया। इन प्रणालियों ने लॉन्च से लेकर सभी पेलोड्स के लक्ष्य पर पहुंचने तक मिसाइल की पूरी ट्रैजेक्टरी को ट्रैक किया। परीक्षण के आंकड़ों से पुष्टि हुई कि मिशन के सभी उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए।

इस सफल परीक्षण के साथ भारत ने एक बार फिर यह साबित किया कि वह एक ही मिसाइल प्रणाली से कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। इस अत्याधुनिक मिसाइल का विकास Defence Research and Development Organisation (DRDO) की प्रयोगशालाओं ने देशभर के उद्योगों के सहयोग से किया है।

परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और भारतीय सेना के अधिकारियों की उपस्थिति रही।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए DRDO, भारतीय सेना और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगी तथा बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच भारत की सामरिक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि करेगी।

डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना ने किया ‘TARA’ हथियार का सफल पहला परीक्षण

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Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Air Force (IAF) ने 7 मई 2026 को ओडिशा तट के पास Tactical Advanced Range Augmentation (TARA) हथियार का सफल पहला उड़ान परीक्षण किया।

TARA भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है, जो बिना गाइडेड वारहेड्स को अत्याधुनिक प्रिसीजन गाइडेड हथियारों में बदलने की क्षमता रखता है। यह सिस्टम कम लागत में दुश्मन के जमीनी ठिकानों को अधिक सटीकता और ताकत के साथ निशाना बनाने में सक्षम है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली को Research Centre Imarat (RCI), हैदराबाद और DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित किया गया है। इसमें आधुनिक और कम लागत वाली तकनीकों का उपयोग किया गया है।

TARA परियोजना का निर्माण Development cum Production Partners (DcPP) और कई भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है, जिन्होंने इसके उत्पादन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO, भारतीय वायुसेना और सभी साझेदार उद्योगों को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के चेयरमैन समीर वी कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़ी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तकनीकी अनुसंधान और ‘सरप्राइज एलिमेंट’ पर दिया जोर

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राजनाथ सिंह ने कहा है कि तेजी से बदलती तकनीक के इस दौर में देश को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान और ‘सरप्राइज एलिमेंट’ (अचानक रणनीतिक बढ़त) पर लगातार ध्यान देना होगा। वे 4 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक सिम्पोजियम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।


रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में कुछ ही वर्षों में युद्ध टैंक और मिसाइलों से ड्रोन व सेंसर आधारित हो गया है। उन्होंने कहा कि आज सामान्य उपयोग की वस्तुएं भी खतरनाक हथियार बन सकती हैं, जिससे सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि युद्ध में जीत उसी की होती है जिसके पास “सरप्राइज” का तत्व होता है। इसलिए भारत को ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी, जिससे जरूरत पड़ने पर दुश्मन को चौंकाया जा सके।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के दौर में अनुसंधान का कोई विकल्प नहीं है और भविष्य के युद्धों की दिशा प्रयोगशालाओं में तय हो रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को प्राथमिकता देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के माध्यम से उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम करना शुरू किया है।

उन्होंने जानकारी दी कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट का 25% उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक क्षेत्र के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 4500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग किया जा चुका है। साथ ही, नई तकनीक हस्तांतरण नीति के तहत शुल्क में छूट दी गई है और अब तक 2200 से अधिक तकनीकों का हस्तांतरण किया जा चुका है।

रक्षा मंत्री ने उद्योगों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाइपरसोनिक हथियार और स्पेस तकनीक जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें स्वदेशी तकनीकों जैसे आकाश मिसाइल और ब्रह्मोस का सफल उपयोग हुआ, जो भारत की सैन्य क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है। देश का रक्षा उत्पादन 2025-26 में 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर है।

इस अवसर पर सेना प्रमुख, वायुसेना अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और शिक्षाविद भी मौजूद रहे। सिम्पोजियम में 284 कंपनियों ने अपने स्वदेशी तकनीकी समाधान प्रदर्शित किए।

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह आयोजन भारत को तकनीकी और सैन्य रूप से और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


DRDO और भारतीय नौसेना की बड़ी कामयाबी, एंटी-शिप मिसाइल NASM-SR का सफल परीक्षण

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भारत ने एक बार फिर अपनी रक्षा क्षमता का दम दिखाया है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) और Indian Navy ने मिलकर नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-SR) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा तट के पास बंगाल की खाड़ी में नौसेना के हेलीकॉप्टर से किया गया।

इस परीक्षण की खास बात यह रही कि एक ही हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलों को एक साथ (salvo) लॉन्च किया गया, जो भारत के लिए पहली बार है। दोनों मिसाइलों ने अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदा और सभी परीक्षण मानकों को पूरी तरह हासिल किया।

अत्याधुनिक तकनीक से लैस मिसाइल

NASM-SR मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसमें:

  • उन्नत सीकर और एवियोनिक्स सिस्टम

  • फाइबर-ऑप्टिक आधारित नेविगेशन सिस्टम

  • हाई-बैंडविड्थ टू-वे डेटा लिंक

  • सटीक गाइडेंस और कंट्रोल तकनीक

जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जो इसे दुश्मन के जहाजों के खिलाफ बेहद प्रभावी बनाती हैं।

सटीक निशाना और सफल परीक्षण

इस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने वॉटरलाइन हिट क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया, यानी जहाज के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से पर सटीक वार किया। परीक्षण की निगरानी चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से रडार और अन्य आधुनिक उपकरणों के जरिए की गई।

कई संस्थानों का संयुक्त प्रयास

इस मिसाइल को हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) सहित DRDO की कई प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योगों के सहयोग से विकसित किया गया है। इससे देश की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को भी मजबूती मिली है।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर DRDO, नौसेना, वायुसेना और सभी संबंधित टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत की समुद्री सुरक्षा को और सशक्त बनाएगी।

वहीं DRDO प्रमुख समीर वी. कामत ने भी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की मेहनत की सराहना की।

क्या है महत्व?

यह परीक्षण भारत के लिए एक बड़ा कदम है, जिससे:

  • समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी

  • दुश्मन के जहाजों पर सटीक हमला संभव होगा

  • आत्मनिर्भर भारत की दिशा में रक्षा क्षेत्र और मजबूत होगा

कुल मिलाकर, यह सफलता भारत को आधुनिक और शक्तिशाली रक्षा तकनीक वाले देशों की श्रेणी में और मजबूत स्थान दिलाती है।

एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह का आतंकवाद पर सख्त संदेश, भारत ने जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई

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राजनाथ सिंह ने 28 अप्रैल 2026 को Shanghai Cooperation Organisation (SCO) के रक्षा मंत्रियों की बैठक में बिश्केक में कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद के केंद्र अब दंड से अछूते नहीं रहेंगे। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने पर जोर दिया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद किसी भी देश की संप्रभुता पर सीधा हमला है और इस पर दोहरे मापदंडों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने SCO से अपील की कि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने, शरण देने या सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद से बिना किसी अपवाद के मुकाबला करना क्षेत्रीय सुरक्षा को शांति और समृद्धि का आधार बना सकता है। उन्होंने पिछले वर्ष की “टियांजिन घोषणा” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख और जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या धर्म नहीं होता और सभी देशों को इसके खिलाफ एकजुट और सुसंगत रुख अपनाना चाहिए। SCO के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन वर्तमान वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज दुनिया को एक ऐसे वैश्विक व्यवस्था की जरूरत है जहां सह-अस्तित्व, सहयोग और करुणा को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि “आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है” और हमें शांति, संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि SCO के सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास, समानता और सहयोग को मजबूत कर इस संगठन को शांति और आशा का प्रतीक बनाया जा सकता है। भारत इस दिशा में रचनात्मक योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैठक के दौरान सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और कट्टरता जैसे मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही, वर्ष 2026 में SCO की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जो संगठन की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

भारत–जर्मनी रक्षा सहयोग को नई गति, राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा प्रस्ताव

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म्यूनिख/बर्लिन- भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मन रक्षा उद्योग को भारत के साथ सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में विश्वसनीय साझेदारियां अनिवार्य हो गई हैं। वे जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित रक्षा निवेशक सम्मेलन में उद्योग जगत को संबोधित कर रहे थे।

वैश्विक हालात में भारत की अहम भूमिका

रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय भूराजनैतिक बदलाव, सप्लाई चेन में व्यवधान और तेज तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में देश और उद्योग अपने साझेदारों को नए सिरे से चुन रहे हैं।
उन्होंने बताया कि भारत स्थिर नीतियों, कुशल युवाशक्ति और तेजी से बढ़ते औद्योगिक ढांचे के कारण निवेश के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।

उन्नत तकनीकों में सहयोग की पेशकश

भारत ने जर्मनी के साथ कई हाई-टेक क्षेत्रों में साझेदारी का प्रस्ताव रखा, जिनमें शामिल हैं:

  • एडवांस्ड रडार और सेंसर सिस्टम

  • AI आधारित ड्रोन (Unmanned Aerial Systems)

  • मल्टी-सेंसर टेक्नोलॉजी

  • सोनोबॉय और अंडरवॉटर ट्रांसमीटर

‘आत्मनिर्भर भारत’ से वैश्विक साझेदारी तक

आत्मनिर्भर भारत का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत की आत्मनिर्भरता दुनिया से अलग होने की नहीं, बल्कि साथ मिलकर आगे बढ़ने की सोच है।

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरण खरीदने वाला देश नहीं, बल्कि डिजाइन, विकास और निर्माण में भागीदार बन रहा है।

2047 के विकसित भारत का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के विजन को दोहराया। उन्होंने कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था और स्पष्ट नीतियां इस लक्ष्य को संभव बना रही हैं।

स्टार्टअप और नवाचार की ताकत

भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से उभर रहा है, जहां
बेंगलुरु,हैदराबाद,पुणे जैसे शहर इनोवेशन के प्रमुख केंद्र हैं।
सरकार की पहलें जैसे Start-Up India, Digital India और Skill India इस दिशा में अहम भूमिका निभा रही हैं।

जर्मनी के साथ गहराते संबंध

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत-जर्मनी रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं और दोनों देश मजबूत व भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

अहम दौरे और समझौते

  • कील में पनडुब्बी निर्माण सुविधा का दौरा

  • बर्लिन में जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से मुलाकात

  • रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप और UN पीसकीपिंग प्रशिक्षण समझौते पर हस्ताक्षर

निष्कर्ष

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के रिश्तों का अगला चरण नवाचार, क्षमता और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित होगा, जो दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक लाभ और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करेगा।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के नए उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को दी बधाई

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम के जनरल फान वान जियांग को सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त होने पर बधाई दी है।

रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि भारत वियतनाम के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को और मजबूत करने तथा सुरक्षा, सैन्य आदान-प्रदान और रक्षा उद्योग में सहयोग को गहरा करने के लिए उत्सुक है।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत-वियतनाम साझेदारी और अधिक मजबूत होगी तथा नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिल्ली में आधुनिक सैन्य अस्पताल सुविधाओं की रखी आधारशिला, स्वास्थ्य सुरक्षा पर दिया जोर

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अप्रैल 2026 को आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के 262वें स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में नेत्र, कैंसर और जॉइंट रिप्लेसमेंट सेंटर की आधारशिला रखी। इसके साथ ही बेस हॉस्पिटल में नई अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास की भी शुरुआत की गई।

नई परियोजनाओं के तहत बेस हॉस्पिटल में 998 बेड के साथ 100 अतिरिक्त इमरजेंसी बेड विकसित किए जाएंगे, जिससे सेना के जवानों और उनके परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।

अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा

रक्षा मंत्री ने कहा कि ये नई सुविधाएं सशस्त्र बलों की चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को और मजबूत करेंगी, खासकर:

  • उन्नत नेत्र चिकित्सा

  • कैंसर उपचार

  • जटिल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी

उन्होंने भरोसा जताया कि आधुनिक तकनीक से लैस ये केंद्र सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे।

रिसर्च और नवाचार पर जोर

राजनाथ सिंह ने चिकित्सा क्षेत्र में रिसर्च और नई तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत को:

  • कैंसर की शुरुआती पहचान

  • व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalised Medicine)

  • हृदय रोगों की भविष्यवाणी

  • मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान

जैसे क्षेत्रों में और आगे बढ़ने की जरूरत है।

फार्मा सेक्टर में आत्मनिर्भरता जरूरी

उन्होंने कहा कि भारत दवाइयों का बड़ा निर्यातक है, लेकिन नई दवाओं के शोध में अभी आत्मनिर्भरता की जरूरत है। इसके लिए:

  • स्टार्टअप और MSME को बढ़ावा

  • क्लिनिकल रिसर्च मजबूत करना

  • वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाना

जरूरी है।

क्लिनिकल ट्रायल और डेटा सिस्टम पर फोकस

रक्षा मंत्री ने क्लिनिकल ट्रायल सिस्टम में सुधार की आवश्यकता बताई और कहा कि:

  • राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थ डेटा पूल बनाया जाए

  • स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तैयार हों

  • डॉक्टरों के अनुभव साझा किए जाएं

इससे इलाज और नीति निर्माण दोनों बेहतर होंगे।

स्वास्थ्य सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा

उन्होंने कहा कि आज के समय में स्वास्थ्य सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है। जब सैनिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधा का भरोसा होता है, तो वे अपने मिशन को अधिक आत्मविश्वास के साथ पूरा करते हैं।

सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों को सम्मान

इस अवसर पर:

  • कमांड हॉस्पिटल, पुणे को सर्वश्रेष्ठ अस्पताल का पुरस्कार

  • आईएनएचएस अश्विनी, मुंबई को दूसरा स्थान

दिया गया।

नई पुस्तक का विमोचन

रक्षा मंत्री ने ‘Precision Protocols in Early Neurodevelopmental Intervention’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया, जो बच्चों के न्यूरो विकास संबंधी रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

 निष्कर्ष

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश का विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी होना चाहिए। उन्होंने सैन्य चिकित्सा सेवाओं से अपील की कि वे आधुनिक तकनीकों, रिसर्च और बेहतर प्रबंधन के जरिए देश को एक मजबूत और स्वस्थ राष्ट्र बनाने में योगदान दें।

विशाखापट्टनम में आईएनएस तरागिरी नौसेना में शामिल, भारत की समुद्री ताकत को मिली नई मजबूती

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विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में 3 अप्रैल 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस तरागिरी को औपचारिक रूप से शामिल किया गया। यह प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित चौथा स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है।

करीब 6,670 टन वजन वाला यह युद्धपोत वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा एमएसएमई के सहयोग से निर्मित किया गया है। इसमें उन्नत स्टेल्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे इसकी रडार पकड़ काफी कम हो जाती है और यह दुश्मन के लिए अधिक घातक बन जाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आईएनएस तरागिरी केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और मजबूत नौसैनिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि यह जहाज लंबी अवधि तक समुद्र में तैनात रह सकता है और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हुए तुरंत जवाब देने में सक्षम है।

इस युद्धपोत में ब्रह्मोस मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, आधुनिक रडार और सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो इसकी युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाते हैं। यह युद्धपोत समुद्री सुरक्षा, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन, तटीय निगरानी और मानवीय सहायता जैसे विभिन्न अभियानों में अहम भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की 11,000 किलोमीटर लंबी तटरेखा और 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों पर निर्भर होने के कारण एक मजबूत नौसेना की आवश्यकता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखती है और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

उन्होंने आधुनिक समय में समुद्री सुरक्षा के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि अब केवल तटों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि समुद्री मार्गों, महत्वपूर्ण chokepoints और समुद्र के नीचे बिछे इंटरनेट केबल्स की सुरक्षा भी जरूरी हो गई है।

रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि भारत रक्षा निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पहले लगभग 1,200 करोड़ रुपये था।

इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने आईएनएस तरागिरी की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप खुद को एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार बल के रूप में विकसित कर रही है।

आईएनएस तरागिरी में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और इसके निर्माण में 200 से अधिक एमएसएमई ने योगदान दिया है। यह जहाज आधुनिक तकनीकों से लैस है और किसी भी परिस्थिति में, किसी भी मिशन को अंजाम देने में सक्षम है।

आईएनएस तरागिरी के नौसेना में शामिल होने के साथ ही भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि देश अब उन्नत युद्धपोतों के निर्माण में आत्मनिर्भर बन चुका है और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है।


वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड, ₹38,424 करोड़ तक पहुंचा आंकड़ा

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नई दिल्ली- भारत के रक्षा निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए ₹38,424 करोड़ का आंकड़ा छू लिया है। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के ₹23,622 करोड़ के मुकाबले ₹14,802 करोड़ (62.66%) की बड़ी वृद्धि दर्शाता है।

इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कुल निर्यात में DPSUs की हिस्सेदारी 54.84% जबकि निजी क्षेत्र की भागीदारी 45.16% रही। मूल्य के हिसाब से DPSUs ने ₹21,071 करोड़ और निजी कंपनियों ने ₹17,353 करोड़ के निर्यात में योगदान दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रक्षा उत्पादन विभाग, भारतीय निर्यातकों और सभी हितधारकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक प्रभावशाली सफलता की कहानी लिख रहा है और देश वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि DPSUs के निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 151% की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निजी क्षेत्र ने 14% की वृद्धि हासिल की। पिछले वित्त वर्ष में निजी क्षेत्र का योगदान ₹15,233 करोड़ और DPSUs का ₹8,389 करोड़ था।

पिछले पांच वर्षों में रक्षा निर्यात में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र की तेजी से बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

भारत के रक्षा उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता मिल रही है और देश अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। इसके साथ ही निर्यातकों की संख्या भी बढ़कर 128 से 145 हो गई है, जो 13.3% की वृद्धि को दर्शाता है।

सरकार द्वारा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने और रक्षा निर्यातकों को सुविधाएं प्रदान करने के प्रयासों ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है। रक्षा उत्पादन विभाग ने निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल को उन्नत किया है और स्वीकृति प्रक्रियाओं को भी आसान बनाया है।

भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए मिशन मोड में काम जरूरी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र (Global Hub) बनाने के लिए मिशन मोड में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक भविष्य की युद्ध रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


रक्षा मंत्री नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित दो दिवसीय नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा ‘एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजीज’ थीम पर किया गया है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत को केवल ड्रोन तैयार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ड्रोन के सभी महत्वपूर्ण घटकों—सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और अन्य तकनीकी हिस्सों—का निर्माण भी देश में ही करना होगा। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में ड्रोन निर्माण के लिए अभी भी महत्वपूर्ण पुर्जे चीन से आयात किए जाते हैं, और भारत को इस निर्भरता को कम करते हुए आत्मनिर्भर बनना होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश का रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) बड़े उद्योगों, MSMEs, स्टार्ट-अप्स और नवाचारकर्ताओं के सहयोग से मजबूत बनता है। उन्होंने निजी क्षेत्र को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और भरोसा दिलाया कि सरकार भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए हर संभव सहयोग देगी।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने Defence India Start-up Challenge (DISC-14) और ADITI 4.0 चैलेंज का शुभारंभ किया। इन पहलों के तहत रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से कुल 107 समस्या कथन जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य स्टार्ट-अप्स और नवाचारकर्ताओं को नई तकनीकों और समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) द्वारा 101 नवाचार चुनौतियों की एक नई पहल भी शुरू की गई है, जिससे MSMEs और स्टार्ट-अप्स को डिजाइन-आधारित नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

रक्षा मंत्री ने Innovations for Defence Excellence (iDEX) और ADITI को रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने वाली गेम-चेंजर पहल बताया। उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 तक लगभग 676 स्टार्ट-अप्स, MSMEs और नवाचारकर्ता इस रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ चुके हैं। अब तक 548 अनुबंध किए जा चुके हैं और 566 चुनौतियां शुरू की गई हैं। इनमें से 58 प्रोटोटाइप को लगभग ₹3,853 करोड़ के मूल्य के साथ खरीद के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि लगभग ₹2,326 करोड़ के 45 खरीद अनुबंध पहले ही किए जा चुके हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज MSMEs कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने MSMEs और स्टार्ट-अप्स से आग्रह किया कि वे इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को अपनाकर अपनी क्षमता और संसाधनों का बेहतर उपयोग करें। उन्होंने ‘डिजिटल ट्विन’ जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उल्लेख किया, जो जटिल प्रणालियों को समझने और बेहतर निर्णय लेने में सहायक होती हैं।

उन्होंने MSMEs की क्षमता बढ़ाने के लिए हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल इंटीग्रेशन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, MSMEs का आपसी सहयोग और बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में मदद करेगी।

रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार MSMEs को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि हाल के बजट में MSMEs के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट प्रदान करने की तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई गई है, जिससे वे ‘चैंपियन MSMEs’ के रूप में उभर सकें।

उन्होंने यह भी बताया कि 2012-13 में देश में MSMEs की संख्या लगभग 4.67 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। सरकार ने MSMEs के पंजीकरण और पहचान को आसान बनाने के लिए Udyam Portal और Udyam Assist Portal जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग की पांच महत्वपूर्ण प्रकाशन भी जारी किए, जिनका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, निर्यात को बढ़ावा और उद्योगों के लिए सुगम व्यवसाय वातावरण तैयार करना है। साथ ही, सम्मेलन में एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया, जिसमें भारतीय और विदेशी कंपनियों ने AI, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और स्मार्ट मटेरियल्स जैसी उन्नत विनिर्माण तकनीकों का प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित सेना और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री ने अंत में MSMEs और स्टार्ट-अप्स से आह्वान किया कि वे नवाचार, नई तकनीकों को अपनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा — अनिश्चितताओं के दौर में आत्मनिर्भरता ही प्रासंगिक बने रहने का एकमात्र रास्ता

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राजनाथ सिंह ने 6 मार्च 2026 को Kolkata में आयोजित “Sagar Sankalp - Reclaiming India’s Maritime Glory” रक्षा एवं समुद्री संवाद का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) और एक निजी मीडिया संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में सप्लाई चेन का पुनर्गठन, नई वैश्विक साझेदारियाँ और समुद्री गतिविधियों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे समय में भारत के लिए हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्व व्यवस्था तेजी से बदल रही है और वैश्विक अनिश्चितताएँ बढ़ रही हैं। मध्य पूर्व की स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा किहोर्मुज़ जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव तेल और गैस की आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीकी प्रगति आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण कारक बन चुकी है, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करना है ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

उन्होंने रक्षा उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी उद्योगों दोनों को समान अवसर देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रक्षा कॉरिडोर, DRDO प्रयोगशालाओं की उपलब्धता और आयात-निर्यात प्रक्रियाओं में सुधार जैसे कदम उद्योग को सशक्त बना रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। अप्रैल 2026 तक इसके लगभग 29,000 करोड़ रुपये तक पहुँचने की उम्मीद है और सरकार ने FY 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियाँ अब भारतीय शिपयार्ड में ही डिजाइन से लेकर निर्माण तक तैयार किए जा रहे हैं। इसे उन्होंने “Builder’s Navy” की दिशा में बड़ा कदम बताया।

कार्यक्रम में GRSE केकमोडोर पी. आर. हरि (सेवानिवृत्त)ने भारत की समुद्री विरासत और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का “Buyer’s Navy” से “Builder’s Navy” की ओर बढ़ना देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

इस संवाद में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा के दौरान समुद्री सुरक्षा, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने, वैश्विक जहाज निर्माण में भारत की भूमिका बढ़ाने और जहाज मरम्मत उद्योग को विकसित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि समन्वित योजना, नई तकनीक और संस्थागत सहयोग के माध्यम से भारत अपनी समुद्री शक्ति को मजबूत बना सकता है। उन्होंने लक्ष्य रखा कि भारत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल हो। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ग्रीस के रक्षा मंत्री से की द्विपक्षीय बैठक, रणनीतिक साझेदारी को मिला नया बल

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में हेलेनिक गणराज्य (ग्रीस) के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री निकोलाओस-जॉर्जियोस डेंडियास के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने दोहराया कि भारत-ग्रीस रणनीतिक साझेदारी शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और आपसी सम्मान जैसे साझा मूल्यों पर आधारित है।

दोनों देशों ने अपने-अपने स्वदेशी रक्षा उद्योगों की क्षमता को साझेदारी के माध्यम से विस्तार देने का निर्णय लिया। भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ग्रीस के ‘एजेंडा 2030’ रक्षा सुधारों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए रक्षा औद्योगिक सहयोग पर एक संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए गए। यह अगले पांच वर्षों के रोडमैप के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

बैठक के दौरान क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग तथा रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने पर सहमति बनी। दोनों देशों के सशस्त्र बलों के बीच सैन्य सहभागिता की रूपरेखा तय करने के लिए वर्ष 2026 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का भी आदान-प्रदान किया गया।

दोनों प्राचीन समुद्री राष्ट्रों के बीच प्रमुख समुद्री मुद्दों पर अभिसरण को भी रेखांकित किया गया। ग्रीस ने गुरुग्राम स्थित इंडियन ओशन रीजन इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर (IFC-IOR) में एक ग्रीक अंतरराष्ट्रीय संपर्क अधिकारी की तैनाती की घोषणा की।

बैठक से पहले ग्रीस के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने मानेकशॉ सेंटर में त्रि-सेवा गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण भी किया।

अपने दौरे के दौरान हेलेनिक प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु में प्रमुख रक्षा और औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा किया तथा नई दिल्ली में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs), रक्षा उद्योग और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। यह दौरा भारत और ग्रीस के बीच दीर्घकालिक और घनिष्ठ संबंधों पर आधारित रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है।



रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माउंट अकोंकागुआ के लिए संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को दिखाई हरी झंडी

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 05 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली से अर्जेंटीना के माउंट अकोंकागुआ के लिए एक संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 6,961 मीटर ऊँचा माउंट अकोंकागुआ दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी है और एशिया के बाहर विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी मानी जाती है। यह संयुक्त अभियान उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) और पहलगाम स्थित जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS) द्वारा किया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने इस अभियान के लिए कर्मियों को साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मबल के साथ तैयार करने के लिए NIM और JIM&WS की सराहना की। उन्होंने दल को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस दुर्गम शिखर पर चढ़ाई केवल शारीरिक सहनशक्ति की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और मानसिक दृढ़ता की भी कसौटी है, जो भारत के श्रेष्ठ पर्वतारोहियों की पहचान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अभियान दल दक्षिण अमेरिका की सर्वोच्च चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर देश का नाम रोशन करेगा।

छह सदस्यीय इस अभियान दल में अनुभवी और प्रशिक्षित प्रशिक्षक शामिल हैं—कर्नल हेम चंद्र सिंह, कैप्टन जी. संतोष कुमार, दीप बहादुर साही, विनोद गुसाईं, नायब सूबेदार भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार। यह अभियान 06 फरवरी 2026 से प्रारंभ होगा और इसके महीने के अंत तक संपन्न होने की संभावना है।

माउंट अकोंकागुआ पर प्राप्त अनुभव, ज्ञान और आत्मविश्वास का सीधा लाभ देशभर के युवाओं, सशस्त्र बलों के कर्मियों और साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वालों के प्रशिक्षण को अधिक सुरक्षित, सशक्त और प्रभावी बनाने में मिलेगा। यह अभियान वैश्विक स्तर पर साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपस्थिति का भी प्रतीक है।

रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम, नागपुर में गोला-बारूद निर्माण संयंत्र का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया उद्घाटन

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नागपुर- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की गोला-बारूद निर्माण में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) हासिल करने और भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने 19 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड की मीडियम कैलिबर एम्युनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब गोला-बारूद की कमी के कारण देश की रक्षा तैयारियों पर असर पड़ता था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है। उद्घाटित संयंत्र एक पूर्णतः स्वचालित इकाई है, जहां 30 मिमी गोला-बारूद का निर्माण किया जाएगा, जिसका व्यापक उपयोग भारतीय सेना और भारतीय नौसेना द्वारा किया जाता है।

रक्षा मंत्री ने पिनाका रॉकेट निर्माण इकाई का भी दौरा किया और आर्मेनिया के लिए निर्देशित पिनाका रॉकेटों की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

निजी क्षेत्र के योगदान की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आज गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय गोला-बारूद का निर्माण कर रहा है। उन्होंने 2021 में भारतीय सेना को सौंपे गए स्वदेशी मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड का विशेष उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने सोलर समूह द्वारा निर्मित नागास्त्र ड्रोन की प्रशंसा की, जिनका ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सफलतापूर्वक उपयोग किया गया और आतंकी ठिकानों को सटीक रूप से निशाना बनाया गया।

रक्षा मंत्री ने सोलर कंपनी द्वारा विकसित ‘भार्गवास्त्र’ काउंटर ड्रोन सिस्टम के सफल परीक्षण को निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि पिनाका मिसाइलों का निर्यात शुरू होना इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि तेजी से निर्यातक देश बन रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर को आत्मनिर्भरता का उदाहरण बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध के स्वरूप में तेजी से बदलाव आ रहा है। ऊर्जा, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, तकनीक और सूचना जैसे नए क्षेत्र भी संघर्ष का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी समय की मांग है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत या उससे अधिक करने का है। सरकार स्वदेशीकरण को बढ़ावा दे रही है और जहां पूर्ण निर्माण संभव नहीं है, वहां भी न्यूनतम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री सुनिश्चित की जा रही है।

रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में जहां देश का रक्षा उत्पादन 46,425 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें से 33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान निजी क्षेत्र का है। साथ ही, रक्षा निर्यात जो एक दशक पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब बढ़कर 24,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संतुलित सहयोग को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि दोनों को एक-दूसरे की क्षमताओं का पूरक बनकर राष्ट्रीय हित में कार्य करना होगा।

इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री द्वारा भारतीय सेना दिवस पर शुभकामनाएँ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 जनवरी, 2026 को भारतीय सेना दिवस के गौरवपूर्ण अवसर पर भारतीय सेना के वीर जवानों एवं उनके परिवारजनों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्र भारतीय सेना के अदम्य साहस, सर्वोच्च बलिदान और देश की संप्रभुता व अखंडता की रक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को नमन करता है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमाओं पर सदैव सतर्क रहने वाली और संकट के समय दृढ़ता से खड़ी रहने वाली भारतीय सेना ने अपनी पेशेवर दक्षता, अनुशासन एवं मानवीय सेवा के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सम्मान अर्जित किया है। उन्होंने एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार भारतीय सेना के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र गर्व और सम्मान के साथ अपने सैनिकों के साथ एकजुट खड़ा है।

दिन के उत्तरार्ध में रक्षा मंत्री जयपुर में आयोजित सेना दिवस समारोह में भी शिरकत करेंगे।


10वां रक्षा बल पूर्व सैनिक दिवस पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया

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देशभर में 14 जनवरी 2026 को 10वां रक्षा बल पूर्व सैनिक दिवस (Defence Forces Veterans’ Day) श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूर्व सैनिक रैलियां, शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु पुष्पांजलि समारोह, शिकायत निवारण काउंटर तथा सहायता एवं सुविधा डेस्क जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।


दिल्ली में मुख्य समारोह, रक्षा मंत्री हुए शामिल

मुख्य समारोह मानेकशॉ सेंटर, दिल्ली कैंट में आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर से लगभग 2,500 पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों के शौर्य, बलिदान और समर्पित सेवा को नमन करते हुए उन्हें राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ, सामूहिक साहस के प्रतीक और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने पूर्व सैनिकों से युवाओं का मार्गदर्शन करने, अग्निवीरों और युवा सैनिकों को सही दिशा देने, आपदा के समय नागरिक प्रशासन का सहयोग करने, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।

‘सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता’

 राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। ऐसे समय में पूर्व सैनिकों का अनुभव, नेतृत्व और मूल्य देश की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा,
“वास्तव में एक सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। वर्दी का रंग बदल सकता है, कार्यस्थल बदल सकता है, लेकिन देशभक्ति और सेवा की भावना कभी नहीं बदलती। पूर्व सैनिकों का कल्याण और सम्मान हमारी नैतिक और भावनात्मक जिम्मेदारी है।”

ऑपरेशन पवन के वीरों को मिला सम्मान

रक्षा मंत्री ने लगभग 40 वर्ष पूर्व श्रीलंका में शांति स्थापना हेतु चलाए गए ऑपरेशन पवन का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उस अभियान में भारतीय शांति सेना (IPKF) के जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार अब उन सैनिकों के योगदान को खुले रूप में स्वीकार कर रही है और उन्हें हर स्तर पर उचित सम्मान दिया जा रहा है।

पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध

रक्षा मंत्री ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) के कार्यान्वयन और एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) को मजबूत किए जाने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं का विस्तार कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इलाज में दूरी या उम्र बाधा न बने।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सैनिकों के पुनर्वास, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा उन्हें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में प्राथमिकता दी जा रही है।

पूर्व सैनिक दिवस: केवल समारोह नहीं, राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक

इस अवसर पर सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) श्रीमती सुकृति लिखी ने कहा कि पूर्व सैनिक दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने का दिन है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लगभग 60,000 सैनिक सेवानिवृत्त होते हैं, जिससे देश में पूर्व सैनिकों की संख्या लगभग 35 लाख हो जाती है, और उनका कल्याण राष्ट्र की बड़ी जिम्मेदारी है।

देशभर में कार्यक्रम

देश के विभिन्न हिस्सों—राजौरी, अमृतसर, लखनऊ, रांची, गुवाहाटी, पुणे, गोवा और कोच्चि—में भी रैलियां और पुष्पांजलि समारोह आयोजित किए गए। सभी 34 राज्य सैनिक बोर्ड और 434 जिला सैनिक बोर्ड इस दिवस को मनाने के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। मौके पर शिकायत निवारण, जागरूकता और सहायता के लिए विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए।

महान विरासत को नमन

यह दिवस हर वर्ष 14 जनवरी को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा, भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ, की स्मृति में मनाया जाता है, जो इसी दिन 1953 में सेवानिवृत्त हुए थे। यह दिन देश के पूर्व सैनिकों की अद्वितीय सेवा, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन करने का प्रतीक है।


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