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ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर कोलकाता-2026 में ‘बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस’ सम्मान से बढ़ी प्रदेश की प्रतिष्ठा

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21 राज्यों के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अभिनव पवेलियन को मिला राष्ट्रीय सम्मान

 तीन दिवसीय आयोजन में निवेश, पर्यटन साझेदारी और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊंचाई

रायपुर- ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ) कोलकाता-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजन के सफल समापन पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को देश के 21 राज्यों की सहभागिता के बीच उसके आकर्षक, सृजनात्मक एवं प्रभावशाली पवेलियन के लिए      “बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस” सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक धरोहरों और आधुनिक पर्यटन दृष्टिकोण को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के सफल प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।

10 से 12 जुलाई तक कोलकाता के विश्व बंगला प्रांगण में आयोजित देश के प्रतिष्ठित पर्यटन व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का पवेलियन तीनों दिनों तक आगंतुकों, पर्यटन विशेषज्ञों, टूर ऑपरेटर्स और निवेशकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, चित्रकोट एवं तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव, धार्मिक एवं इको-टूरिज्म, पर्यटन रिसॉर्ट्स तथा राज्य के विविध पर्यटन परिपथों को आधुनिक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिसे व्यापक सराहना मिली।

आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव एस भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक विवेक आचार्य ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों, पर्यटन विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ अनेक महत्वपूर्ण बी-टू-बी बैठकों में सहभागिता की। इन बैठकों में पर्यटन निवेश, संयुक्त पर्यटन पैकेजों के विकास, विपणन सहयोग, नए पर्यटन बाजारों तक पहुंच तथा छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इन संवादों से राज्य के पर्यटन क्षेत्र में भविष्य की नई साझेदारियों और निवेश के अवसरों को भी मजबूती मिली।

मेले में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ राज्य तथा अन्य राज्यों के लगभग 28 पंजीकृत टूर ऑपरेटर्स, होटल संचालकों, होम-स्टे संचालकों और पर्यटन उद्यमियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। इससे राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा नए व्यावसायिक संबंध स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

आयोजन के उद्घाटन अवसर पर गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन ए. खंवटे, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष तथा थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सिरीपोर्न तांतीपन्याथेप सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया था। सभी अतिथियों ने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, धार्मिक विरासत और पर्यटन विकास की संभावनाओं की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ को उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में रेखांकित किया।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में राज्य पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीटीएफ जैसे राष्ट्रीय मंच राज्य की पर्यटन संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस सम्मान ने यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ आज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक वैभव और उत्कृष्ट पर्यटन संसाधनों के बल पर राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव एस भारतीदासन ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ की प्रभावी सहभागिता से राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और निजी क्षेत्र की भागीदारी में सकारात्मक वृद्धि होगी।

कोलकाता से प्रधानमंत्री का योग दिवस संदेश: योग को जीवनशैली बनाने का आह्वान, ‘योग 365’ पहल की सराहना

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कोलकाता- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोलकाता में आयोजित भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को मानवता को जोड़ने वाली शक्ति बताते हुए इसे केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 21 जून आज विश्व का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव बन चुका है और भारत से लेकर दुनिया के विभिन्न देशों तक योग की अद्भुत तस्वीरें देखने को मिल रही हैं।


प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमालय से हिंद महासागर तक, पूर्व में बंगाल से पश्चिम में सौराष्ट्र तक पूरा देश योग की ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “योग सबको जोड़ता है, योग सबको साथ लाता है।” इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों और विश्व समुदाय को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कोलकाता में चलाए गए स्वच्छता अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि योग दिवस से पहले शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नागरिकों ने जिस तरह श्रमदान और जनभागीदारी दिखाई है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

बंगाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भगवान रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद और लाहिड़ी महाशय जैसे महान संतों और योगियों को याद किया। उन्होंने कहा कि इसी धरती से योग और आध्यात्मिक चेतना का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचा। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर और महर्षि अरविंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने योग को मानवीय एकता और जीवन के समग्र विकास का आधार बताया।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘Yoga for Healthy Ageing’ पर विशेष जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि योग व्यक्ति को उम्र बढ़ने के बावजूद स्वस्थ, ऊर्जावान और सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक लचीलेपन, मानसिक संतुलन और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव की दिशा में निरंतर प्रगति कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने भगवद्गीता के श्लोक “युक्त आहार विहारस्य...” का उल्लेख करते हुए कहा कि संतुलित भोजन, संतुलित दिनचर्या, उचित कर्म और पर्याप्त विश्राम ही योग का मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ और असंतुलन के बीच योग लोगों को संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाता है।

उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक शांति और विश्व शांति का भी मार्ग प्रशस्त करता है। योग व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता देता है, जिससे समाज और विश्व में सकारात्मक बदलाव संभव होता है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से संकल्प लेने का आग्रह किया कि वे योग को केवल एक दिवस या कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने जीवन, परिवार और आने वाली पीढ़ियों का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘योग 365’ पहल के तहत 100 दिवसीय ऑनलाइन योग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 130 देशों के 30 लाख से अधिक लोगों ने भाग लेकर अभूतपूर्व जनभागीदारी का परिचय दिया।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वस्थ समाज ही सक्षम, समृद्ध और आत्मविश्वासी राष्ट्र का निर्माण करता है। उन्होंने सभी के सुख और निरोगी जीवन की कामना करते हुए “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” का संदेश दिया और एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले कोलकाता में ‘दौड़ से ध्यान’ कार्यक्रम का आयोजन, हजारों लोगों ने लिया भाग

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कोलकाता- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के पूर्व आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत कोलकाता में “दौड़ से ध्यान 2026 – From Movement to Stillness” का भव्य आयोजन किया गया। स्वच्छता से स्वागत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस अनूठी पहल ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, नागरिक जिम्मेदारी और समग्र कल्याण के संदेश को एक साथ जोड़ने का कार्य किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ आज सुबह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी तथा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने संयुक्त रूप से किया। दोनों नेताओं ने कोलकाता नगर निगम (KMC) मुख्यालय से ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग तक आयोजित मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मैराथन के बाद राइटर्स बिल्डिंग परिसर में योग और ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक शांति का संदेश दिया।

इस अवसर पर मंत्री इंद्रनील खान, अग्निमित्रा पॉल और तापस रॉय, विधायक विजय ओझा, पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रसिद्ध पूर्व टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भी योग सत्र में भाग लेकर कार्यक्रम को विशेष उत्साह प्रदान किया।

11 स्थानों पर एक साथ आयोजित हुई योग दौड़

इस पहल के तहत कोलकाता के 11 प्रमुख स्थानों पर एक साथ 2 किलोमीटर की योग रन आयोजित की गई। इसका उद्देश्य लोगों को योग को जीवनशैली के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

योग रन के प्रमुख स्थानों में शामिल रहे:

  • पी.ए.सी. टेंट मैदान

  • एलियट पार्क

  • आरएसएम स्क्वायर (सेंट्रल)

  • ताला पार्क (बेलगछिया)

  • सुभाष सरोवर (बेलियाघाटा)

  • कैप्टन भेरी (ईएम बाईपास)

  • गोलपार्क (विवेकानंद पार्क)

  • गीतांजलि स्टेडियम (कस्बा)

  • केएफआर ग्राउंड (बेहाला)

  • संघमित्रा स्कूल मैदान (वेस्ट पोर्ट)

  • चंडीपुरा रंगसारा ग्राउंड (भांगर)

योग का मूल संदेश: गति से स्थिरता की ओर

कार्यक्रम का मुख्य संदेश “दौड़ से ध्यान” योग के वास्तविक स्वरूप को दर्शाता है, जिसमें शारीरिक गतिविधि से मानसिक शांति, अनुशासन से संतुलन और सामूहिक प्रयास से समग्र कल्याण की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी जाती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले पश्चिम बंगाल में आयोजित इस तरह के कार्यक्रम योग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।


अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का मुख्य समारोह कोलकाता में, “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” होगी थीम

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 का मुख्य समारोह 21 जून को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित किया जाएगा। इसकी घोषणा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और स्वस्थ उम्र बढ़ने में योग की भूमिका को रेखांकित करती है।

यह घोषणा खजुराहो स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, पश्चिमी मंदिर समूह में आयोजित योग महोत्सव 2026 के दौरान की गई, जो IDY 2026 के 25 दिन के काउंटडाउन की शुरुआत का प्रतीक है। इस कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय के अधीन मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) द्वारा किया गया, जिसमें हजारों योग प्रेमियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) के सामूहिक प्रदर्शन में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि कोलकाता, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का केंद्र है, IDY 2026 के मुख्य समारोह की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” विषय जीवन के बढ़ते चरण में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि खजुराहो अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के कारण भारत की प्राचीन परंपराओं और स्वास्थ्य अभ्यासों के सामंजस्य का प्रतीक है और यह भविष्य में वैश्विक योग एवं वेलनेस केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

मंत्री जाधव ने कहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए और आयुष मंत्रालय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, योग को गाँव-गाँव, घर-घर, स्कूलों, कार्यालयों और समुदायों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि योग और आयुष आहार जैसी पहलें संतुलित पोषण, अनुशासित जीवन और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने योग संगम पोर्टल को पुनः लॉन्च किया, जिससे ऑनलाइन पंजीकरण और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही योग पार्क पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जो राज्यों और संस्थानों में योग स्थानों के विकास में मदद करेगा। उन्होंने नया डिज़ाइन किया गया योग टी-शर्ट भी प्रस्तुत किया, जो योग, स्वास्थ्य और कल्याण का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि योग 365 अभियान के तहत 100 दिन के निःशुल्क योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में दो लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया है और उन्हें योग मित्र प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि योग और खजुराहो भारत की सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी तेजी से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रही है, जिससे समाज अधिक स्वस्थ और जागरूक बन रहा है।

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि योग और आयुर्वेद केवल अभ्यास नहीं बल्कि भारत की समृद्ध परंपराओं पर आधारित जीवन शैली हैं। उन्होंने शिक्षा और योग के संयोजन को स्वस्थ समाज निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मध्य प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत मूल्यों को दर्शाता है तथा जनमानस में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है और अब यह लगभग 190 देशों में अपनाया जा रहा है।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दाश ने कहा कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में योग समग्र स्वास्थ्य के लिए सरल और स्थायी समाधान प्रदान करता है। उन्होंने नागरिकों से ‘योग मित्र’ बनने और 14 जून 2026 को होने वाले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रयास में भाग लेने की अपील की।

कार्यक्रम में हजारों योग प्रेमियों ने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) काशीनाथ सामगंडी के नेतृत्व में कॉमन योग प्रोटोकॉल का सामूहिक प्रदर्शन किया। यह प्रोटोकॉल सभी आयु वर्ग के लोगों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई योग अभ्यासों की मानकीकृत श्रृंखला है।

यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ और योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है।



डीएससी ‘ए 23’ का शुभारंभ: भारतीय नौसेना की क्षमता में होगा विस्तार

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कोलकाता: भारतीय नौसेना के लिए डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (DSC) परियोजना के तहत चौथे जहाज DSC A 23 का 19 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टिटागढ़ में भव्य समारोह के साथ शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर दीपा शिवकुमार ने जहाज को लॉन्च किया, जबकि समारोह में वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार (चीफ ऑफ मटेरियल) सहित नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह आयोजन पारंपरिक नौसैनिक रीति-रिवाजों और गरिमा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें Titagarh Rail Systems Limited (TRSL) के प्रतिनिधि भी शामिल थे, जो इस परियोजना का निर्माण कर रही है।

आधुनिक तकनीक से लैस जहाज

लगभग 30 मीटर लंबाई और 380 टन विस्थापन क्षमता वाले इस कैटमरैन-हुल डिजाइन जहाज में बेहतर स्थिरता, विस्तृत डेक क्षेत्र और उत्कृष्ट समुद्री प्रदर्शन की विशेषताएँ हैं। यह जहाज तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों में डाइविंग अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

स्वदेशी तकनीक और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा

इस परियोजना को भारतीय शिपिंग रजिस्टर के मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है और नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में व्यापक परीक्षण और विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है।
करीब 70% उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करते हैं।

नौसेना की क्षमता में होगा इजाफा

इन जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट, अंडरवॉटर निरीक्षण, बचाव कार्य (Salvage) और तटीय अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

निष्कर्ष

डीएससी ‘ए 23’ का शुभारंभ भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

कोलकाता में आयोजित ‘सागर संकल्प’ संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा — अनिश्चितताओं के दौर में आत्मनिर्भरता ही प्रासंगिक बने रहने का एकमात्र रास्ता

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राजनाथ सिंह ने 6 मार्च 2026 को Kolkata में आयोजित “Sagar Sankalp - Reclaiming India’s Maritime Glory” रक्षा एवं समुद्री संवाद का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) और एक निजी मीडिया संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में सप्लाई चेन का पुनर्गठन, नई वैश्विक साझेदारियाँ और समुद्री गतिविधियों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे समय में भारत के लिए हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विश्व व्यवस्था तेजी से बदल रही है और वैश्विक अनिश्चितताएँ बढ़ रही हैं। मध्य पूर्व की स्थिति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा किहोर्मुज़ जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी जैसे क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा प्रभाव तेल और गैस की आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीकी प्रगति आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण कारक बन चुकी है, विशेषकर रक्षा क्षेत्र में। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करना है ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

उन्होंने रक्षा उत्पादन को मजबूत बनाने के लिए सरकार द्वारा किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी उद्योगों दोनों को समान अवसर देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। रक्षा कॉरिडोर, DRDO प्रयोगशालाओं की उपलब्धता और आयात-निर्यात प्रक्रियाओं में सुधार जैसे कदम उद्योग को सशक्त बना रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जबकि रक्षा निर्यात लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया। अप्रैल 2026 तक इसके लगभग 29,000 करोड़ रुपये तक पहुँचने की उम्मीद है और सरकार ने FY 2029-30 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय नौसेना के लिए ऑर्डर किए गए सभी युद्धपोत और पनडुब्बियाँ अब भारतीय शिपयार्ड में ही डिजाइन से लेकर निर्माण तक तैयार किए जा रहे हैं। इसे उन्होंने “Builder’s Navy” की दिशा में बड़ा कदम बताया।

कार्यक्रम में GRSE केकमोडोर पी. आर. हरि (सेवानिवृत्त)ने भारत की समुद्री विरासत और स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत का “Buyer’s Navy” से “Builder’s Navy” की ओर बढ़ना देश की तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

इस संवाद में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा के दौरान समुद्री सुरक्षा, घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करने, वैश्विक जहाज निर्माण में भारत की भूमिका बढ़ाने और जहाज मरम्मत उद्योग को विकसित करने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि समन्वित योजना, नई तकनीक और संस्थागत सहयोग के माध्यम से भारत अपनी समुद्री शक्ति को मजबूत बना सकता है। उन्होंने लक्ष्य रखा कि भारत 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 और 2047 तक शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल हो। 

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