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मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम: केंद्रीय बजट में ऐतिहासिक घोषणाएँ

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते हुए भारत को मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म (MVT) का वैश्विक केंद्र बनाने और आयुष (AYUSH) प्रणाली को सशक्त करने के लिए कई दूरदर्शी और परिवर्तनकारी कदमों की घोषणा की। इन पहलों का उद्देश्य गुणवत्ता, अनुसंधान, रोजगार सृजन और वैश्विक पहुँच को बढ़ावा देना है।

मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म के लिए पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब

भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा पर्यटन की पसंदीदा मंज़िल बनाने के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। ये हब एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों के रूप में विकसित किए जाएंगे, जहाँ चिकित्सा सेवाएँ, शिक्षा और अनुसंधान सुविधाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।

इन मेडिकल हब्स में आयुष केंद्र, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म सुविधा केंद्र, उन्नत डायग्नोस्टिक सेवाएँ, उपचार के बाद देखभाल और पुनर्वास सुविधाएँ शामिल होंगी। इससे देश-विदेश से आने वाले मरीजों को बेहतर अनुभव मिलेगा और डॉक्टरों व एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

आयुष को वैश्विक गति

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा योग को संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तुत किए जाने के बाद उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, वहीं कोविड-19 के बाद आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई स्वीकार्यता मिली है। आयुष उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग से औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और मूल्य संवर्धन से जुड़े युवाओं को भी लाभ हो रहा है।

आयुष क्षेत्र के लिए बजट की प्रमुख घोषणाएँ

आयुष को और मज़बूत करने तथा वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए बजट में निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलें प्रस्तावित की गई हैं:

  • तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना, जिससे शिक्षा, उपचार और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

  • आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन, ताकि गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन और कुशल मानव संसाधन को सुनिश्चित किया जा सके।

  • डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर, जामनगर का उन्नयन, जिससे साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और वैश्विक जागरूकता को बल मिलेगा।

इन पहलों के माध्यम से सरकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ते हुए भारत की सॉफ्ट पावर को सशक्त कर रही है और देश को समग्र एवं विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में स्थापित करने के अपने संकल्प को दोहरा रही है।

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