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भारत के मत्स्य क्षेत्र को मिला अब तक का सबसे बड़ा बजट, उत्पादन में 106% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए मत्स्य क्षेत्र को ₹2,761.80 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटित किया है। यह कदम देश की ब्लू इकॉनमी को मजबूत करने और करोड़ों मछुआरों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

सरकार की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) इस क्षेत्र के विकास की मुख्य धुरी बनी हुई है, जिसके लिए इस वर्ष ₹2,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

उत्पादन और निर्यात में बड़ी छलांग

पिछले एक दशक में भारत के मत्स्य क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
वित्त वर्ष 2013-14 में जहां मछली उत्पादन 95.79 लाख टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है, जो 106% की वृद्धि दर्शाता है।

इसके साथ ही समुद्री उत्पादों का निर्यात भी बढ़कर ₹62,408 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें जमे हुए झींगे (Frozen Shrimp) का बड़ा योगदान है।

मछुआरों को मिल रहा सीधा लाभ

सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मछुआरों तक पहुंच रहा है:

  • 4.39 लाख मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

  • 33 लाख लोगों को बीमा सुरक्षा

  • 7.44 लाख परिवारों को आजीविका सहायता

इन पहलों से मछुआरों की आय स्थिर हुई है और जोखिम कम हुआ है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक पर जोर

सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं:

  • कोल्ड स्टोरेज, फिश मार्केट और प्रोसेसिंग यूनिट का विकास

  • RAS और Biofloc जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा

  • 2,195 फिशर प्रोड्यूसर संगठन (FFPOs) का गठन

इसके अलावा, FIDF योजना के तहत 225 परियोजनाओं में ₹6,685 करोड़ का निवेश किया गया है, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़े हैं।

 डिजिटल इंडिया से जुड़ा मत्स्य क्षेत्र

सरकार ने नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) लॉन्च किया है, जिसमें अब तक 30 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। यह प्लेटफॉर्म मछुआरों को:

  • लोन

  • बीमा

  • बाजार से जुड़ाव

जैसी सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराता है।

सतत विकास और भविष्य की दिशा

सरकार ने 2025 में समुद्री मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाया जा सके।

भारत, जो पहले से ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, अब वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

निष्कर्ष

मत्स्य क्षेत्र में बढ़ता निवेश, नई तकनीक, और डिजिटल पहलें भारत को एक मजबूत और टिकाऊ ब्लू इकॉनमी की ओर ले जा रही हैं। यह क्षेत्र न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार भी बनेगा।

Union Budget 2026–27 में पर्यटन विकास: भारत को वैश्विक पर्यटन और मेडिकल टूरिज्म हब बनाने की रणनीति

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में मंदिरों और मठों के संरक्षण, तीर्थ केंद्रों के विकास और कनेक्टिविटी व सुविधाओं में सुधार का प्रस्ताव है।

  • भारत पहला ग्लोबल बिग कैट समिट आयोजित करेगा, जिसमें 95 देशों के नेता और मंत्री भाग लेंगे, जिससे इको-टूरिज्म में भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका मजबूत होगी।

  • पूर्वोदय राज्यों में पाँच प्रमुख पर्यटन स्थल विकसित किए जाएंगे और कनेक्टिविटी के लिए 4,000 ई-बसें दी जाएंगी।

  • पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे ताकि भारत मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक केंद्र बन सके।

  • 15 पुरातात्विक स्थलों (जैसे लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, सारनाथ, हस्तिनापुर, लेह पैलेस आदि) को सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

परिचय

पर्यटन भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जो रोजगार, विदेशी मुद्रा और क्षेत्रीय विकास में बड़ी भूमिका निभाता है।
2025 के पर्यटन डेटा के अनुसार:

  • पर्यटन का कुल योगदान GDP में 5.22% है।

  • प्रत्यक्ष योगदान 2.72% है।

  • रोजगार में कुल योगदान 13.34% और प्रत्यक्ष रोजगार 5.82% है।

इसलिए सरकार ने पर्यटन को एक रणनीतिक विकास क्षेत्र माना है और बजट 2026–27 में इसे मजबूत करने के लिए कई योजनाएँ घोषित की हैं।

Union Budget 2026–27: पर्यटन से जुड़े प्रमुख घोषणाएँ

थीम आधारित और गंतव्य आधारित पर्यटन विकास

  • पूर्वोत्तर भारत में बौद्ध सर्किट विकास योजना शुरू की जाएगी।

  • इसमें मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थ केंद्र, कनेक्टिविटी सुधार और सुविधाएँ शामिल होंगी।

  • इससे आध्यात्मिक पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

यह योजना पहले की स्वदेश दर्शन योजना (2014–15) और स्वदेश दर्शन 2.0 पर आधारित है।

इको-टूरिज्म और कनेक्टिविटी

  • हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, अराकू घाटी और पश्चिमी घाट में प्राकृतिक ट्रेल्स और पर्वतीय पर्यटन विकसित होंगे।

  • ओडिशा, कर्नाटक और केरल में कछुआ ट्रेल्स और आंध्र प्रदेश में बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स विकसित होंगे।

  • रेल और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी ताकि दूरस्थ पर्यटन स्थलों तक पहुँच आसान हो।

ग्लोबल बिग कैट समिट 2026

  • भारत 2026 में पहला वैश्विक बिग कैट सम्मेलन आयोजित करेगा।

  • इसमें 95 देशों के नेता और मंत्री भाग लेंगे।

  • इसका उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, वैज्ञानिक सहयोग और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देना है।

  • भारत के पास 7 में से 5 बड़ी बिल्ली प्रजातियाँ हैं –

    • बाघ,

    • शेर,

    • तेंदुआ,

    • हिम तेंदुआ,

    • चीता।

संस्थागत और मानव संसाधन सुधार

  • नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट को अपग्रेड कर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी बनाया जाएगा।

  • 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

  • इससे पर्यटन सेवाओं की गुणवत्ता और रोजगार बढ़ेगा।

डिजिटल और विरासत अवसंरचना

  • नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड बनाया जाएगा, जिससे पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों का डिजिटल दस्तावेज़ बनेगा।

  • 15 ऐतिहासिक स्थलों को इमर्सिव सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बनाया जाएगा, जैसे:

    • लोथल

    • धोलावीरा

    • राखीगढ़ी

    • सारनाथ

    • हस्तिनापुर

    • लेह पैलेस

मेडिकल और वेलनेस टूरिज्म

  • 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित होंगे।

  • इसमें आधुनिक अस्पताल, आयुष केंद्र, पुनर्वास सुविधाएँ और मेडिकल टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा।

  • भारत को वैश्विक हेल्थ टूरिज्म हब बनाने का लक्ष्य है।

 पूर्वोदय राज्यों पर विशेष ध्यान

  • बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में 5 प्रमुख पर्यटन स्थल विकसित होंगे।

  • 4,000 इलेक्ट्रिक बसें कनेक्टिविटी के लिए दी जाएंगी।

  • उद्देश्य: पूर्वी भारत को पर्यटन और विकास का नया केंद्र बनाना।

निष्कर्ष

Union Budget 2026–27 में पर्यटन को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनाने की रणनीति अपनाई गई है।
सरकार का फोकस:

  • बुनियादी ढाँचा

  • सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत संरक्षण

  • डिजिटल सिस्टम

  • कौशल विकास

  • मेडिकल और इको-टूरिज्म

  • क्षेत्रीय विकास

इन कदमों से रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और भारत वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य बनेगा।


यूनियन बजट 2026–27: MSME सेक्टर को विकास का केंद्र

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सरकार ने MSME को “चैंपियन” बनाने के लिए 3-स्तरीय रणनीति अपनाई:
    👉 इक्विटी सपोर्ट, 👉 लिक्विडिटी सपोर्ट, 👉 प्रोफेशनल सपोर्ट

  • कूरियर निर्यात सीमा ₹10 लाख प्रति कंसाइनमेंट हटाने का प्रस्ताव, जिससे छोटे व्यापारियों को ग्लोबल मार्केट तक पहुंच मिलेगी।

  • MSME सेक्टर का योगदान:

    • 🏭 35.4% मैन्युफैक्चरिंग

    • 📦 48.58% निर्यात

    • 💰 31.1% GDP

    • 👩‍💼 7.47 करोड़+ उद्यम, 32.82 करोड़+ रोजगार

MSME को बढ़ावा देने की 3-स्तरीय रणनीति

इक्विटी सपोर्ट (Equity Support)

  • ₹10,000 करोड़ का SME Growth Fund – भविष्य के बड़े MSME तैयार करने के लिए

  • SRI Fund में ₹2,000 करोड़ अतिरिक्त – माइक्रो एंटरप्राइज को जोखिम पूंजी

  • अब तक 682 MSME को ₹15,442 करोड़ निवेश सहायता

लिक्विडिटी सपोर्ट (Liquidity Support)

  • TReDS प्लेटफॉर्म से ₹7 लाख करोड़+ फंड MSME को

  • नए कदम:
    ✔ CPSEs को MSME भुगतान TReDS से करना अनिवार्य
    ✔ CGTMSE क्रेडिट गारंटी से इनवॉइस डिस्काउंटिंग
    ✔ GeM + TReDS इंटीग्रेशन
    ✔ TReDS रिसीवेबल्स को एसेट सिक्योरिटी बनाना

मतलब: MSME को तेजी से और सस्ता लोन मिलेगा

प्रोफेशनल सपोर्ट (Professional Support)

  • ICAI, ICSI, ICMAI मिलकर Corporate Mitra तैयार करेंगे

  • ये MSME को:

    • टैक्स

    • कंप्लायंस

    • मैनेजमेंट
      में मदद करेंगे (कम लागत में)

छोटे व्यापारियों के लिए बड़ा निर्यात मौका

  • कूरियर निर्यात की ₹10 लाख सीमा हटेगी

  • B2C ई-कॉमर्स ग्लोबल बिक्री आसान

  • रिटर्न/रिजेक्टेड शिपमेंट ट्रैकिंग में टेक्नोलॉजी उपयोग

छोटे स्टार्टअप, कारीगर, हस्तशिल्प उद्योग को फायदा

 MSME के लिए प्रमुख सरकारी योजनाएँ

Udyam Registration & Udyam Assist

  • 7.30 करोड़+ MSME रजिस्टर

  • फ्री, डिजिटल और पेपरलेस

PMEGP योजना

  • 10.71 लाख+ माइक्रो एंटरप्राइज सहायता

  • ₹29,249 करोड़ सब्सिडी

  • 87 लाख+ रोजगार

MSME Champions Scheme

तीन भाग:

  • ZED (Zero Defect Zero Effect)

  • LEAN (उत्पादकता सुधार)

  • Innovative (Incubation, Design, IPR)

गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धा और इनोवेशन बढ़ाने के लिए

ONDC & TEAM Initiative

  • 5 लाख MSME को ई-कॉमर्स नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य

  • सप्लाई चेन लागत कम

ODR Portal (Online Dispute Resolution)

  • MSME भुगतान विवाद सुलझाने का डिजिटल प्लेटफॉर्म

  • कोर्ट जाने से पहले समझौता संभव

Credit Guarantee Scheme (CGSMSE)

  • बिना कोलेटरल लोन गारंटी

  • गारंटी सीमा ₹10 करोड़

  • ट्रांसजेंडर उद्यमियों को विशेष लाभ

 PM Vishwakarma Scheme

  • 18 ट्रेड के कारीगरों को ट्रेनिंग और लोन

  • 30 लाख+ लाभार्थी

  • 30,000+ कारीगर GeM पर

  • ई-कॉमर्स मार्केटिंग सपोर्ट

श्रम सुधार (Labour Reforms)

  • लेबर कोड से:
    ✔ आसान कंप्लायंस
    ✔ डिजिटल सिस्टम
    ✔ सोशल सिक्योरिटी
    ✔ MSME पर इंस्पेक्शन बोझ कम

निष्कर्ष (Conclusion)

  • MSME भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं

  • ग्रामीण विकास, रोजगार और निर्यात में बड़ी भूमिका

  • बजट 2026-27 MSME को फॉर्मल, इनोवेशन-ड्रिवन और ग्लोबल मार्केट-ओरिएंटेड बनाने का लक्ष्य रखता है

आने वाले वर्षों में MSME भारत के विकास की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे

भारत का विनिर्माण क्षेत्र: 2026-27 बजट के साथ नई औद्योगिक क्रांति

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प्रमुख निष्कर्ष (Key Takeaways)

  • FY 2025-26 की पहली तिमाही में विनिर्माण GVA वृद्धि 7.72% और दूसरी तिमाही में 9.13% रही।

  • मध्यम और उच्च तकनीक उद्योग भारत के विनिर्माण मूल्य का 46.3% योगदान दे रहे हैं।

  • केंद्रीय बजट 2026-27 में सात रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण विस्तार पर जोर।

  • समुद्री खाद्य, माइक्रोवेव ओवन, फुटवियर और विमान निर्माण जैसे क्षेत्रों में कस्टम ड्यूटी छूट।

  • MSME को मजबूत करने के लिए ₹10,000 करोड़ SME ग्रोथ फंड और ₹2,000 करोड़ आत्मनिर्भर भारत फंड टॉप-अप।

परिचय (Introduction)

भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है। वैश्विक औद्योगिक उत्पादन में धीमी वृद्धि के बावजूद, भारत ने मजबूत घरेलू नीतियों और आर्थिक आधार के कारण बेहतर प्रदर्शन किया।

विनिर्माण क्षेत्र भारत के 2047 तक 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य का मुख्य आधार है। बजट 2026-27 ने निवेश, नवाचार, बुनियादी ढाँचा और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए नए उपाय किए हैं।

भारत के विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन

औद्योगिक और विनिर्माण गतिविधियों में तेजी

  • FY 2025-26 के पहले आधे हिस्से में औद्योगिक GVA 7% बढ़ा।

  • दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन 7.8% बढ़ा, जो दो वर्षों में सबसे अधिक था।

  • विनिर्माण क्षेत्र में 8.1% वृद्धि हुई।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर वाहन और परिवहन उपकरणों में तेज वृद्धि दर्ज की गई।

व्यापारिक विश्वास और मांग

  • PMI जनवरी 2026 में 55.4 रहा (50 से ऊपर वृद्धि दर्शाता है)।

  • RBI सर्वे के अनुसार, उद्योगों को मांग बढ़ने और लागत कम होने की उम्मीद है।

 मुख्य उद्योगों की भूमिका

  • सीमेंट: FY25 में उत्पादन ~453 मिलियन टन

  • स्टील: कच्चा स्टील उत्पादन 11.7% बढ़ा

  • कोयला: उत्पादन 1,047.52 मिलियन टन

  • रसायन एवं पेट्रोकेमिकल: 58,617 हजार टन उत्पादन

वैश्विक विनिर्माण में भारत की स्थिति

  • मध्यम और उच्च तकनीक उद्योगों का योगदान 46.3%

  • औद्योगिक प्रतिस्पर्धा सूचकांक (CIP) में भारत की रैंक 37वीं

  • FY26 में निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा (USD 634.3 बिलियन)

 MSME की भूमिका

  • विनिर्माण उत्पादन में योगदान: 35.4%

  • निर्यात में योगदान: 48.58%

  • GDP में योगदान: 31.1%

  • रोजगार: 32.82 करोड़ लोग

बजट 2026-27: विनिर्माण को बढ़ावा देने की पहल

रणनीतिक और उभरते क्षेत्र

  • 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों का पुनर्विकास

  • Biopharma SHAKTI योजना (₹10,000 करोड़)

  • सेमीकंडक्टर मिशन 2.0

  • रासायनिक पार्क

  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट योजना (₹40,000 करोड़)

  • दुर्लभ पृथ्वी खनिज कॉरिडोर

  • खेल उपकरण निर्माण योजना

  • कंटेनर निर्माण योजना (₹10,000 करोड़)

  • टेक्सटाइल मिशन और मेगा टेक्सटाइल पार्क

  • MSME के लिए SME ग्रोथ फंड

कर और सीमा शुल्क सुधार

  • कई क्षेत्रों में बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट

  • निर्यात के लिए इनपुट आयात सीमा बढ़ाई गई

  • भरोसेमंद निर्माताओं के लिए ड्यूटी भुगतान में सुविधा

  • विमान और रक्षा क्षेत्र के लिए कच्चे माल पर ड्यूटी छूट

सरकारी योजनाएँ और निवेश

PLI योजना

  • इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, ऑटो में निवेश बढ़ा

  • मोबाइल फोन निर्माण में भारत वैश्विक केंद्र बना

 राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन

  • GDP में विनिर्माण का हिस्सा 25% करने का लक्ष्य

  • 143 मिलियन रोजगार सृजन लक्ष्य

  • निर्यात लक्ष्य USD 1.2 ट्रिलियन

निवेश और नवाचार

  • FY26 में GFCF का हिस्सा 30%

  • सरकारी पूंजीगत खर्च ₹3.07 लाख करोड़ से ₹11.21 लाख करोड़

  • निजी निवेश ₹14.6 लाख करोड़

  • ₹1 लाख करोड़ RDI फंड

  • 2 लाख से अधिक स्टार्टअप

नवाचार और वैश्विक रैंकिंग

  • ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स रैंक 66 से 38

  • पेटेंट, ट्रेडमार्क और डिजाइन में शीर्ष रैंकिंग

  • AI, क्वांटम, बायोटेक, रक्षा और ऊर्जा में अग्रणी शोध

बुनियादी ढाँचा सुधार

  • PM GatiShakti और National Logistics Policy

  • औद्योगिक कॉरिडोर और स्मार्ट इंडस्ट्रियल सिटी

  • बेहतर लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी

निष्कर्ष (Conclusion)

भारत का विनिर्माण क्षेत्र एक नए विस्तार चरण में प्रवेश कर चुका है।
आत्मनिर्भर भारत और 2047 के आर्थिक लक्ष्य के लिए विनिर्माण प्रमुख इंजन बन रहा है।
सरकार की नीतियाँ, निवेश, नवाचार और बुनियादी ढाँचा सुधार भारत को वैश्विक औद्योगिक शक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।


केंद्रीय बजट 2026–27: भारत के वस्त्र क्षेत्र को विकास, रोज़गार और निर्यात का नया इंजन

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में वस्त्र क्षेत्र को विकास रणनीति के केंद्र में रखा गया है, जिसमें रोज़गार, निर्यात, ग्रामीण आजीविका और सतत विनिर्माण पर विशेष ज़ोर है।

  • मेगा टेक्सटाइल पार्क, मानव-निर्मित रेशों (MMF) और तकनीकी वस्त्रों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने और आधुनिक विनिर्माण पर फोकस।

  • MSME और कारीगरों के लिए तरलता सहायता, क्लस्टर आधुनिकीकरण और कौशल विकास पहलें।

  • नीति का स्पष्ट उद्देश्य—पैमाना, सततता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता—ताकि भारत वैश्विक वस्त्र मूल्य शृंखलाओं में अपनी स्थिति और मज़बूत कर सके।

केंद्रीय बजट 2026–27 में वस्त्र क्षेत्र को मिला केंद्रीय स्थान

केंद्रीय बजट 2026–27 में वस्त्र सहित रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में विनिर्माण के विस्तार पर विशेष बल दिया गया है।
भारत का वस्त्र क्षेत्र देश के सबसे पुराने और विविध उद्योगों में से एक है, जिसकी जड़ें सदियों पुरानी परंपराओं में हैं। बजट 2026–27 ने इस श्रम-प्रधान क्षेत्र को भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखा है, यह स्वीकार करते हुए कि वस्त्र क्षेत्र रोज़गार सृजन, निर्यात वृद्धि, ग्रामीण आजीविका और सतत उत्पादन का एक प्रमुख आधार है।

भारत की आंतरिक मजबूती उल्लेखनीय है—

  • कपास की खेती में विश्व में सबसे बड़ा क्षेत्रफल

  • जूट का सबसे बड़ा उत्पादक

  • रेशम और कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक

  • MMF क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर दूसरा बड़ा केंद्र

  • पॉलिएस्टर और विस्कोस फाइबर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक

विकास की बुनाई: बजट 2026–27 से वस्त्र क्षेत्र को बढ़ावा

बजट 2026–27 में फाइबर से फैशन तक, ग्राम उद्योगों से वैश्विक बाज़ारों तक पूरे मूल्य शृंखला को सशक्त करने के लिए एक समग्र नीति ढांचा प्रस्तुत किया गया है।

वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम

सरकार ने प्रतिस्पर्धात्मकता, आत्मनिर्भरता और रोज़गार सृजन के उद्देश्य से वस्त्र क्षेत्र के लिए एक एकीकृत कार्यक्रम प्रस्तावित किया है, जिसके पाँच प्रमुख घटक हैं:

1. राष्ट्रीय फाइबर योजना

प्राकृतिक रेशों (रेशम, ऊन, जूट) के साथ-साथ MMF और नई पीढ़ी के फाइबर को समर्थन देकर आत्मनिर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य। इससे आयात निर्भरता कम होगी, कपास से आगे विविधीकरण होगा और उन्नत व विशेष वस्त्रों में भारत की क्षमता बढ़ेगी।

2. वस्त्र विस्तार एवं रोज़गार योजना

पारंपरिक वस्त्र क्लस्टरों के आधुनिकीकरण, मशीनरी और तकनीक उन्नयन, तथा परीक्षण व प्रमाणन केंद्रों की स्थापना के लिए पूंजी सहायता। इससे उत्पादकता, गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर रोज़गार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।

3. राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम

मौजूदा योजनाओं को एकीकृत कर बुनकरों और कारीगरों की आय बढ़ाने, बाज़ार संपर्क सुनिश्चित करने और भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत के संरक्षण पर बल। प्राकृतिक व वनस्पति रंगों तथा डाई हाउस की स्थापना को भी प्रोत्साहन।

4. टेक्स-इको पहल

पर्यावरण के अनुकूल और वैश्विक मानकों के अनुरूप वस्त्र एवं परिधान निर्माण को बढ़ावा, जिससे हरित बाज़ारों तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।

5. समर्थ 2.0

उन्नत कौशल विकास कार्यक्रम, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से उद्योग-तैयार कुशल मानव संसाधन विकसित करने पर केंद्रित।

मेगा टेक्सटाइल पार्क और तकनीकी वस्त्र

चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की घोषणा की गई है, जो एकीकृत अवसंरचना, पैमाने की अर्थव्यवस्था और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देंगे। ये पार्क तकनीकी वस्त्रों (औद्योगिक, चिकित्सा, रक्षा, अवसंरचना) के विकास में भी सहायक होंगे।

महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल

खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को सशक्त करने हेतु वैश्विक बाज़ार संपर्क, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण, गुणवत्ता सुधार और प्रक्रिया आधुनिकीकरण पर फोकस। यह पहल ODOP (एक जिला एक उत्पाद) को भी समर्थन देती है।

वस्त्र निर्यात को बढ़ावा

ड्यूटी-फ्री आयातित इनपुट से बने वस्त्र और परिधान निर्यातकों के लिए निर्यात दायित्व अवधि 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने की गई है, जिससे अनुपालन में आसानी और कार्यशील पूंजी प्रबंधन बेहतर होगा।

TReDS के माध्यम से MSME को तरलता सहायता

TReDS एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है, जो MSME की व्यापारिक देनदारियों के वित्तपोषण में मदद करता है। अब तक ₹7 लाख करोड़ से अधिक की सुविधा प्रदान की जा चुकी है।

मुख्य उपाय:

  • CPSE द्वारा MSME से खरीद में TReDS का अनिवार्य उपयोग

  • CGTMSE के तहत क्रेडिट गारंटी

  • GeM को TReDS से जोड़ना

  • TReDS रिसीवेबल्स को एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज़ के रूप में पेश करना

SME ग्रोथ फंड

₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड भविष्य के “चैंपियन SMEs” को विकसित करने के लिए।

भारत का वस्त्र क्षेत्र: विकास, निर्यात और रोज़गार

USD 179 बिलियन के अनुमानित आकार के साथ, वस्त्र एवं परिधान उद्योग:

  • GDP में ~2% योगदान

  • विनिर्माण GVA में ~11%

  • निर्यात में ~8.63% हिस्सेदारी

भारत विश्व का छठा सबसे बड़ा T&A निर्यातक है। FY25 में निर्यात बढ़कर USD 37.75 बिलियन हो गया।

रोज़गार सृजन

वस्त्र क्षेत्र कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोज़गार प्रदाता है।
2025 के अनुमान के अनुसार 4.5 करोड़+ लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और ग्रामीण श्रमिक शामिल हैं।

भविष्य की दिशा (Outlook)

नीति का फोकस—पैमाना, आधुनिकीकरण, तकनीकी वस्त्र, MMF, सततता और निर्यात विस्तार।
वस्त्र निर्यात को ₹3 लाख करोड़ से बढ़ाकर विज़न 2030 के तहत ₹9 लाख करोड़ करने का लक्ष्य।

भारत–EU FTA से वस्त्र और परिधान पर शून्य शुल्क का लाभ मिलने की संभावना है, जिससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।

निष्कर्ष

केंद्रीय बजट 2026–27 ने फाइबर से लेकर बाज़ार तक पूरी मूल्य शृंखला को मज़बूत करते हुए भारत के वस्त्र क्षेत्र को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा तय की है।
नीतिगत समर्थन, वैश्विक साझेदारियाँ और तकनीक-आधारित विकास के साथ, भारत एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी वैश्विक वस्त्र केंद्र के रूप में उभरने को तैयार है।


भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट क्षेत्र को बढ़ावा: बजट 2026–27 और आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम

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प्रमुख बिंदु (Key Takeaways)

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा – खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के निर्माण के लिए

  • नवंबर 2025 में ₹7,280 करोड़ की REPM निर्माण योजना को मंज़ूरी

  • 6,000 MTPA की एकीकृत REPM उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी

  • पाँच वर्षों में ₹6,450 करोड़ के बिक्री-आधारित प्रोत्साहन

  • उन्नत सुविधाओं के लिए ₹750 करोड़ की पूंजीगत सब्सिडी

  • भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान

परिचय

भारत महत्वपूर्ण खनिजों में आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। इसके तहत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के लिए एक घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है। REPMs उच्च-प्रदर्शन मैग्नेट होते हैं, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन ऊर्जा टर्बाइनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से किया जाता है।

इस लक्ष्य को समर्थन देने के लिए सरकार ने नवंबर 2025 में ₹7,280 करोड़ की योजना को मंज़ूरी दी, जिसके अंतर्गत रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक की पूरी वैल्यू चेन को कवर करते हुए 6,000 MTPA की एकीकृत निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी।

इसके पूरक के रूप में, केंद्रीय बजट 2026–27 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स की घोषणा की गई है। ये पहल आत्मनिर्भर भारत, नेट ज़ीरो 2070 और विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप हैं तथा भारत को वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित करती हैं।

भारत में REPM का रणनीतिक महत्व और संसाधन क्षमता

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट अपनी अत्यधिक चुंबकीय शक्ति और स्थिरता के लिए जाने जाते हैं। इनका कॉम्पैक्ट आकार और उच्च प्रदर्शन इन्हें इलेक्ट्रिक वाहन मोटर्स, पवन टर्बाइन जनरेटर, उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस प्रणालियों, रक्षा उपकरणों और प्रिसिजन सेंसर्स के लिए अनिवार्य बनाता है।

जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत मोबिलिटी और रणनीतिक क्षेत्रों में अपने विनिर्माण आधार का विस्तार कर रहा है, REPM की विश्वसनीय घरेलू आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्कि वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मज़बूत होगी।

भारत का संसाधन आधार

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का विशाल भंडार है, जो REPM जैसे डाउनस्ट्रीम उद्योगों के लिए मज़बूत आधार प्रदान करता है:

  • मोनाज़ाइट भंडार: भारत में 13.15 मिलियन टन मोनाज़ाइट उपलब्ध है, जिसमें लगभग 7.23 मिलियन टन रेयर अर्थ ऑक्साइड (REO) निहित है

  • भौगोलिक विस्तार: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र और झारखंड में तटीय रेत, टेरी/लाल रेत और आंतरिक जलोढ़ क्षेत्रों में जमा

  • अतिरिक्त संसाधन: गुजरात और राजस्थान में हार्ड-रॉक क्षेत्रों में 1.29 मिलियन टन इन-सिटू REO संसाधनों की पहचान

  • अन्वेषण प्रयास: GSI द्वारा 34 परियोजनाओं के तहत 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान

ये सभी भंडार भारत में एक एकीकृत REPM विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की मज़बूत क्षमता को दर्शाते हैं।

निवेश और विस्तार की आवश्यकता

हालाँकि भारत के पास प्रचुर संसाधन हैं, फिर भी स्थायी मैग्नेट का घरेलू उत्पादन अभी प्रारंभिक अवस्था में है। 2022–25 के दौरान लगभग 60–80% मूल्य और 85–90% मात्रा के हिसाब से आयात (मुख्यतः चीन से) पर निर्भरता रही है।

2030 तक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्रों में तेज़ वृद्धि के कारण REPM की मांग दोगुनी होने की संभावना है। ऐसे में आयात निर्भरता कम करने और दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए घरेलू क्षमता का विस्तार अनिवार्य है।

केंद्रीय बजट 2026–27: REPM और रेयर अर्थ कॉरिडोर्स

REPM निर्माण योजना (नवंबर 2025)

  • कुल परिव्यय: ₹7,280 करोड़

  • क्षमता: 6,000 MTPA एकीकृत सिण्टर्ड REPM उत्पादन

  • लाभार्थी: वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से अधिकतम पाँच

  • प्रोत्साहन: पाँच वर्षों में ₹6,450 करोड़ (बिक्री-आधारित)

  • पूंजी सब्सिडी: ₹750 करोड़

  • उद्देश्य: रेयर अर्थ ऑक्साइड से तैयार मैग्नेट तक संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करना

डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स

बजट 2026–27 में घोषित ये कॉरिडोर्स खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को बढ़ावा देंगे। ये पहल स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगी, अनुसंधान एवं विकास को गति देगी और भारत को वैश्विक उन्नत सामग्री मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ेगी।

IREL (इंडिया) लिमिटेड की भूमिका

IREL (इंडिया) लिमिटेड, जो 1963 से परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन कार्यरत है, ओडिशा और केरल में रेयर अर्थ निष्कर्षण और परिशोधन इकाइयाँ संचालित कर रही है। इसके मौजूदा ढांचे को नए कॉरिडोर्स से जोड़कर घरेलू क्षमता और उन्नत विनिर्माण को तेज़ी दी जाएगी।

राष्ट्रीय लक्ष्यों से संरेखण

  • आत्मनिर्भर भारत: आयात निर्भरता में कमी

  • स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण: EV और पवन ऊर्जा के लिए आवश्यक मैग्नेट की घरेलू आपूर्ति

  • राष्ट्रीय सुरक्षा: रक्षा और एयरोस्पेस के लिए सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला

  • नीतिगत सुधार: MMDR अधिनियम (2023 संशोधन) और राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (2025) के अनुरूप

वैश्विक साझेदारियाँ

भारत ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, ज़ाम्बिया, मोज़ाम्बिक, पेरू, ज़िम्बाब्वे, मलावी और कोट डी’आईवोर जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते कर रहा है। इसके अतिरिक्त, Minerals Security Partnership (MSP) और IPEF जैसे बहुपक्षीय मंचों में भी सक्रिय भागीदारी है।

KABIL (NALCO, HCL और MECL का संयुक्त उपक्रम) विदेशों में खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के माध्यम से भारत की आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत कर रहा है।

निष्कर्ष

₹7,280 करोड़ की REPM निर्माण योजना और बजट 2026–27 में घोषित डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर्स मिलकर भारत के लिए खनन से लेकर विनिर्माण तक एक एकीकृत ढांचा तैयार करते हैं। ये पहल आयात निर्भरता घटाने, स्वच्छ ऊर्जा एवं रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने और आत्मनिर्भर भारत, नेट ज़ीरो 2070 तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को साकार करने में सहायक होंगी। घरेलू प्रयासों और वैश्विक साझेदारियों के संयोजन से भारत उन्नत सामग्री क्षेत्र में एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी शक्ति के रूप में उभर रहा है।


केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने “MY Bharat Budget Quest 2026” की शुरुआत की

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केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने आज MY Bharat Budget Quest 2026 की शुरुआत की। यह एक राष्ट्रीय स्तर की युवा-केंद्रित पहल है, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं में केंद्रीय बजट की समझ को बढ़ाना और बजट से संबंधित प्रावधानों को अधिक सुलभ, प्रासंगिक और नागरिक-केंद्रित बनाना है।

यह पहल केंद्रीय बजट 2026 को नागरिकों के दैनिक जीवन से जोड़ने के लिए तैयार की गई है, जिसमें पूरे देश के कॉलेज, संस्थान और कोचिंग सेंटर के युवा संरचित और सहभागी ढांचे के माध्यम से शामिल होंगे।

प्रतियोगिता प्रारंभ और प्रक्रिया

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह प्रतियोगिता MY Bharat प्लेटफॉर्म (https://mybharat.gov.in/) पर 3 फरवरी 2026 से शुरू होगी। यह एक राष्ट्रीय स्तर का ऑनलाइन क्विज है, जो केवल MY Bharat पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं के लिए खुलेगा।

प्रमुख तिथियाँ और चरण:

  • पंजीकरण और क्विज़: 3 फरवरी से 17 फरवरी 2026 तक।

  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों का चयन: हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से।

  • दूसरा चरण (निबंध लेखन): 17 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक। इसमें प्रतिभागियों को 8 विषय दिए जाएंगे, जो विकसित भारत के दृष्टिकोण से जुड़े होंगे। प्रतिभागी अपने विचार और सुझाव निबंधों के माध्यम से साझा करेंगे।

  • निबंध मूल्यांकन: 3 मार्च से 10 मार्च 2026 तक।

  • राज्य/केंद्र शासित प्रदेश-वार मेरिट सूची की घोषणा: 10 मार्च 2026।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के विजेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ “विकसित भारत बजट” के दृष्टिकोण पर संपर्क और विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा। यह पहल सरकार की राष्ट्रीय आर्थिक विमर्श और विकास प्राथमिकताओं में युवाओं की सूचित भागीदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।

केंद्रीय मंत्री के विचार

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा,

“इस वर्ष बजट भाषण के दौरान, माननीय वित्त मंत्री ने VBYLD में युवाओं द्वारा साझा किए गए नवाचारी विचारों की सराहना की और कुछ विचारों को केंद्रीय बजट 2026–27 में शामिल किया गया। MY Bharat Budget Quest के माध्यम से हम इसी भावना को जारी रखना चाहते हैं और युवाओं की आवाज़ को पुनः सशक्त करना चाहते हैं।”


बजट 2026–27: Biopharma SHAKTI से भारत के बायोफार्मा क्षेत्र को नया रूप

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प्रमुख निष्कर्ष

  • केंद्रीय बजट 2026–27 में बायोफार्मा शक्ति (Biopharma SHAKTI) की घोषणा की गई, जिसका बजट पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य भारत में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के उत्पादन के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना है।
  • यह पहल भारत को वैश्विक बायोफार्मा उद्योग में अग्रणी बनाने और वैश्विक बायोफार्मास्यूटिकल मार्केट के 5% हिस्से पर कब्ज़ा करने के लक्ष्य के अनुरूप है।
  • राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (National Biopharma Mission) और पिछले कुछ वर्षों में शुरू की गई अन्य योजनाएँ भी इसी उद्देश्य की दिशा में काम कर रही हैं।

परिचय

केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की दवा उद्योग नीति में एक निर्णायक बदलाव दर्शाता है, जिसमें बायोफार्मा और बायोलॉजिक दवाओं को स्वास्थ्य और विनिर्माण रणनीति के केंद्र में रखा गया है। यह भारत को वैश्विक बायोफार्मा उद्योग में अग्रणी बनाने और वैश्विक बाजार में 5% हिस्सेदारी हासिल करने की सरकार की दृष्टि के अनुरूप है।

गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते बोझ और वैश्विक स्तर पर बायोलॉजिक्स एवं बायोसिमिलर पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए, बजट बायोफार्मा को उच्च मूल्य वाला, भविष्य-सामना करने वाला और स्वास्थ्य एवं आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में स्थान देता है।

बायोफार्मा का मतलब जीवित जैविक तंत्र (जैसे मानव कोशिकाएं, सूक्ष्मजीव या फफूंदी) के माध्यम से चिकित्सा उत्पादों का उत्पादन या निर्माण करना है। उदाहरणों में टीके, एंटीबॉडी उपचार, जीन थेरेपी, सेल इम्प्लांट, आधुनिक इंसुलिन और रीकॉम्बिनेंट प्रोटीन दवाएँ शामिल हैं।

केंद्रीय बजट 2026–27: बायोफार्मा शक्ति पहल

मुख्य घोषणाएँ:

  1. Biopharma SHAKTI की स्थापना: पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का बजट, जिसका उद्देश्य भारत में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के लिए पूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। यह पहल घरेलू विकास और उत्पादन, आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए है।

  2. NIPER नेटवर्क का विस्तार: तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPERs) की स्थापना और सात मौजूदा NIPERs का उन्नयन, जिससे बायोफार्मा में विशेषज्ञ मानव संसाधनों की जरूरत पूरी हो सके।

  3. क्लिनिकल रिसर्च इकोसिस्टम का निर्माण: देशभर में 1,000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइटों का विकास प्रस्तावित, जिससे बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर पर उन्नत नैदानिक परीक्षण तेज़ होंगे और भारत को वैश्विक नैतिक और उच्च-गुणवत्ता वाले क्लिनिकल ट्रायल के लिए प्राथमिक स्थान बनाया जा सके।

  4. नियामक ढांचे को सशक्त करना: CDSCO की क्षमता बढ़ाना, विशेषज्ञ वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मियों को शामिल करना, अनुमोदन समय सीमाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप करना और जटिल बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों का तेज़ मूल्यांकन सुनिश्चित करना।

महत्व

बजट ने निर्माण क्षमता, विशेषज्ञ मानव संसाधन, क्लिनिकल रिसर्च क्षमता और नियामक विश्वसनीयता को एक ही ढांचे में जोड़ा है। यह संकेत देता है कि भारत सस्ती जेनेरिक दवाओं के निर्माता से उच्च गुणवत्ता, नवाचार-आधारित बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

इस पहल से भारत को वैश्विक बायोफार्मा बाजार में प्रतिस्पर्धा करने और घरेलू स्तर पर उन्नत और किफायती बायोलॉजिक दवाओं तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बायोफार्मा क्या है?

पारंपरिक रासायनिक दवाओं के बजाय अब दवाएँ जैविकी (Biology) के माध्यम से विकसित हो रही हैं। बायोफार्मा वह हिस्सा है जो जीवित जैविक तंत्र का उपयोग करके दवाओं का निर्माण करता है।

सरल शब्दों में, बायोफार्मा दवाएँ कोशिकाओं, सूक्ष्मजीवों या अन्य जैविक पदार्थों से बनाई जाती हैं। इनमें मानव या पशु कोशिकाएं, बैक्टीरिया, फफूंदी आदि शामिल हो सकते हैं। इनका उद्देश्य बीमारियों को रोकना, निदान करना या इलाज करना होता है। उदाहरण में टीके, थेराप्यूटिक प्रोटीन, बायोसिमिलर और अन्य उन्नत बायोलॉजिक थेरेपी शामिल हैं।

भारत में बायोफार्मा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकारी पहल

भारत की फार्मास्यूटिकल उद्योग केवल सस्ती जेनेरिक दवाएँ बनाने तक सीमित नहीं रही; अब यह उच्च मूल्य और जटिल बायोफार्मास्यूटिकल उत्पादों में निवेश कर रही है। भारत उपलब्ध गुणवत्ता वाली दवाओं का वैश्विक हब बन चुका है, उत्पादन के हिसाब से 3रा और मूल्य के हिसाब से 14वां स्थान।

सरकार ने पिछले वर्षों में अनुसंधान, उत्पादन, नवाचार और व्यावसायीकरण के लिए कई नीतिगत पहलें और योजनाएँ लागू की हैं। इनमें राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM – i3), BIRAC-लिड बायोटेक इनोवेशन सपोर्ट, PLI स्कीम, SPI स्कीम, Bulk Drug Parks, PRIP, BioE3 और Bio-RIDE जैसी प्रमुख योजनाएँ शामिल हैं।

इन पहलों का उद्देश्य सरकार, अकादमी, उद्योग और स्टार्टअप्स को एक साथ लाकर साझा अवसंरचना का निर्माण, नवाचार को बढ़ावा और घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाना है।

राष्ट्रीय बायोफार्मा मिशन (NBM) – Innovate in India (i3)

2017 में शुरू हुआ, इसका उद्देश्य भारत को 2025 तक 100 अरब डॉलर के वैश्विक बायोटेक उद्योग में बदलना और वैश्विक फार्मास्यूटिकल बाजार में 5% हिस्सेदारी प्राप्त करना है।

NBM के अंतर्गत 101 परियोजनाएँ, 150+ संस्थाएँ और 30 MSMEs शामिल हैं। इससे 1,000+ रोजगार पैदा हुए, जिनमें 304 वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल हैं। जीनोम इंडिया प्रोग्राम के तहत 10,000 जीनोम सिक्वेंस किए जा रहे हैं।

BIRAC-नेतृत्व वाले नवाचार समर्थन

BIRAC (2012 में स्थापित) स्टार्टअप्स को फंडिंग, इनक्यूबेशन और मार्गदर्शन प्रदान करता है। प्रमुख योजनाएँ:

  • Biotechnology Ignition Grant (BIG): 50 लाख तक शुरुआती स्टार्टअप्स के लिए।

  • SEED Fund: 30 लाख तक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट स्टार्टअप्स के लिए।

  • LEAP Fund: 1 करोड़ तक वाणिज्यिकरण-तैयार नवाचार के लिए।

  • जनCARE – अमृत ग्रैंड चैलेंज: AI, मशीन लर्निंग, टेलीमेडिसिन और ब्लॉकचेन आधारित 89 डिजिटल हेल्थ टेक इनोवेशन।

विनिर्माण और औद्योगिक सुदृढ़ता

PLI, SPI और Bulk Drug Parks जैसी योजनाओं के माध्यम से निर्माण क्षमता बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना, MSME अपग्रेडेशन और साझा अवसंरचना निर्माण पर ध्यान दिया गया।

निष्कर्ष

ये सभी उपाय भारत में सशक्त बायोफार्मा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए सरकार की रणनीति को दर्शाते हैं। बायोफार्मा शक्ति योजना, पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ, मानव संसाधन विकास, क्लिनिकल ट्रायल अवसंरचना और नियामक क्षमता में निवेश के माध्यम से भारत को वैश्विक बायोफार्मा हब बनाने का महत्वपूर्ण कदम है।


केंद्रीय बजट 2026–27 में उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता: किसानों के लिए किफायती उर्वरक और सतत कृषि पर जोर

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 में सरकार की यह प्रतिबद्धता दोहराई गई है कि किसानों को सही समय पर किफायती उर्वरक उपलब्ध कराना, घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना और संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।

बजट आवंटन और उद्देश्य

वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए उर्वरक विभाग को कुल ₹1.71 लाख करोड़ का नेट बजट आवंटन दिया गया है। यह सरकार की नीति को दर्शाता है कि वैश्विक उर्वरक कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में व्यवधानों से किसानों को बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

यूरिया सब्सिडी

यूरिया सब्सिडी के तहत घरेलू उत्पादन और आयात दोनों के लिए प्रावधान किया गया है, ताकि घरेलू उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाया जा सके। साथ ही, किसानों के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने और उत्पादकों को उचित लाभ सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी प्रणाली जारी रहेगी।

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS)

फॉस्फेट और पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy) योजना जारी रहेगी। इसका उद्देश्य संतुलित NPK उपयोग, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और कृषि उत्पादन बढ़ाना है।

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)

उर्वरक सब्सिडी के वितरण में DBT प्रणाली को प्रमुख रूप से जारी रखा जाएगा, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और वास्तविक समय में उर्वरक बिक्री की निगरानी सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा फर्टिलाइजर सब्सिडी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए स्थापना और आईसीटी संबंधित खर्चों का प्रावधान भी किया गया है।

जैविक उर्वरकों का प्रोत्साहन

सरकार ने जैविक उर्वरकों के प्रचार-प्रसार, मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस और अनुसंधान एवं विकास के लिए भी बजट आवंटन किया है, जिससे सतत और पर्यावरण-हितैषी कृषि को बढ़ावा मिले।

कुल मिलाकर, बजट 2026–27 किसानों के हितों की सुरक्षा, उर्वरक की किफायती उपलब्धता, घरेलू उत्पादन क्षमता का सशक्तिकरण और संतुलित तथा सतत पोषक तत्व उपयोग सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


केंद्रीय बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता: ग्रामीण आजीविका और किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर

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केंद्रीय बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे सरकार की ग्रामीण आजीविका को सशक्त करने, किसानों की आय बढ़ाने और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। बजट के प्रावधानों का मुख्य फोकस उत्पादकता बढ़ाने, पशु स्वास्थ्य सुधारने और पूरे पशुधन मूल्य श्रृंखला में आधारभूत ढांचे को मज़बूत करने पर है।

उत्पादकता और पशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

बजट में नस्ल सुधार कार्यक्रमों, पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और रोग रोकथाम पहलों के लिए अतिरिक्त समर्थन का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों की अमूल्य पशुधन संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

डेयरी क्षेत्र को मज़बूती

डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए दूध संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही, डेयरी सहकारी संस्थाओं और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों (LFPOs) को विशेष सहयोग देने की बात कही गई है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

“आत्मनिर्भर भारत” के विज़न के अनुरूप बजट में पशुपालन क्षेत्र में नवाचार, तकनीक के उपयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है। चारा विकास, फीड सुरक्षा और जलवायु-सहिष्णु पशुपालन प्रथाओं पर केंद्रित पहलें इस क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेंगी।

रोजगार और पोषण सुरक्षा

बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी पर बढ़ा हुआ फोकस रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। विभाग ने राज्यों और सभी हितधारकों के साथ मिलकर इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प दोहराया है।

बजट की प्रमुख घोषणाएँ

1. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

पशुधन क्षेत्र कृषि आय में लगभग 16% योगदान देता है, जिसमें गरीब और सीमांत परिवारों की आय भी शामिल है। पशु चिकित्सकों की संख्या 20,000 से अधिक करने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा व पैरा-वेटरनरी कॉलेज, पशु अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब और प्रजनन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। भारतीय और विदेशी संस्थानों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

2. पशुपालन उद्यमिता के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी

बजट 2026-27 में पशुपालन उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना प्रस्तावित है। इससे पशुपालक, डेयरी और पोल्ट्री उद्यम आधुनिक उपकरण अपनाकर उत्पादकता बढ़ा सकेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में मज़बूत मूल्य श्रृंखलाएँ विकसित होंगी।

3. 20,000 पशु चिकित्सकों का प्रशिक्षण

देशभर में पशु चिकित्सा सेवाओं को मज़बूत करने के लिए 20,000 पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है, जिससे डायग्नोस्टिक्स और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।

4. ग्रामीण और संबद्ध कृषि पर व्यापक फोकस

  • पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री मूल्य श्रृंखलाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार

  • AI आधारित कृषि उपकरण, जैसे “भारत विस्तार” प्लेटफॉर्म, जिससे डेयरी और पशुपालकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी

  • डेयरी और पशुपालन किसानों के लिए ऋण और उद्यमिता समर्थन, ताकि ग्रामीण आय में विविधता लाई जा सके

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी कदम साबित होगा।

मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम: केंद्रीय बजट में ऐतिहासिक घोषणाएँ

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते हुए भारत को मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म (MVT) का वैश्विक केंद्र बनाने और आयुष (AYUSH) प्रणाली को सशक्त करने के लिए कई दूरदर्शी और परिवर्तनकारी कदमों की घोषणा की। इन पहलों का उद्देश्य गुणवत्ता, अनुसंधान, रोजगार सृजन और वैश्विक पहुँच को बढ़ावा देना है।

मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म के लिए पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब

भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा पर्यटन की पसंदीदा मंज़िल बनाने के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। ये हब एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों के रूप में विकसित किए जाएंगे, जहाँ चिकित्सा सेवाएँ, शिक्षा और अनुसंधान सुविधाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।

इन मेडिकल हब्स में आयुष केंद्र, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म सुविधा केंद्र, उन्नत डायग्नोस्टिक सेवाएँ, उपचार के बाद देखभाल और पुनर्वास सुविधाएँ शामिल होंगी। इससे देश-विदेश से आने वाले मरीजों को बेहतर अनुभव मिलेगा और डॉक्टरों व एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

आयुष को वैश्विक गति

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा योग को संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तुत किए जाने के बाद उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, वहीं कोविड-19 के बाद आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई स्वीकार्यता मिली है। आयुष उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग से औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और मूल्य संवर्धन से जुड़े युवाओं को भी लाभ हो रहा है।

आयुष क्षेत्र के लिए बजट की प्रमुख घोषणाएँ

आयुष को और मज़बूत करने तथा वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए बजट में निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलें प्रस्तावित की गई हैं:

  • तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना, जिससे शिक्षा, उपचार और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

  • आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन, ताकि गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन और कुशल मानव संसाधन को सुनिश्चित किया जा सके।

  • डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर, जामनगर का उन्नयन, जिससे साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और वैश्विक जागरूकता को बल मिलेगा।

इन पहलों के माध्यम से सरकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ते हुए भारत की सॉफ्ट पावर को सशक्त कर रही है और देश को समग्र एवं विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में स्थापित करने के अपने संकल्प को दोहरा रही है।

युवा शक्ति आधारित बजट 2026-27: गरीब, वंचित और विकास पर केंद्रित सरकार का संकल्प

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नई दिल्ली-केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत किया। यह बजट “युवा शक्ति” से प्रेरित है और सरकार के उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें गरीब, वंचित, पिछड़े और कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा में लाने पर विशेष जोर दिया गया है।

वित्त मंत्री ने बताया कि यह कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है, जो तीन कर्तव्यों (कर्तव्य त्रय) से प्रेरित है—

  1. आर्थिक विकास को तेज़ और सतत बनाना,

  2. जन-आकांक्षाओं की पूर्ति और क्षमता निर्माण,

  3. सबका साथ, सबका विकास के अनुरूप समावेशी प्रगति।

विकसित भारत की ओर आत्मविश्वास से कदम

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत एक बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है, जिसे वैश्विक अनिश्चितताओं, संसाधन चुनौतियों और तकनीकी बदलावों के बीच संतुलित एवं समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने बताया कि 2025 में प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद अब तक 350 से अधिक सुधार लागू किए जा चुके हैं।

आर्थिक विकास के लिए बड़े कदम

  • सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को ₹11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया

  • 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को ‘ग्रोथ कनेक्टर्स’ के रूप में विकसित किया जाएगा

  • बायोफार्मा शक्ति योजना ₹10,000 करोड़ के परिव्यय के साथ शुरू

  • ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड – MSME को भविष्य का चैंपियन बनाने हेतु

शिक्षा, कौशल और महिला सशक्तिकरण

  • STEM उच्च शिक्षण संस्थानों में हर जिले में एक गर्ल्स हॉस्टल

  • 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब

  • 20 पर्यटन स्थलों पर 10,000 टूर गाइड्स का अपस्किलिंग कार्यक्रम

  • खेल क्षेत्र में बदलाव के लिए खेलो इंडिया मिशन की घोषणा

कृषि, स्वास्थ्य और क्षेत्रीय विकास

  • भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR): कृषि के लिए बहुभाषी AI टूल

  • मेडिकल टूरिज्म के लिए 5 रीजनल मेडिकल हब्स

  • मानसिक स्वास्थ्य के लिए NIMHANS-2 और संस्थानों का उन्नयन

  • पूर्वोदय राज्यों और उत्तर-पूर्व पर विशेष फोकस

कर सुधार: सरल, पारदर्शी और नागरिक हितैषी

  • नया आयकर अधिनियम, 2025 अप्रैल 2026 से लागू

  • सरल आयकर नियम और फॉर्म जल्द अधिसूचित

  • IT सेवाओं के लिए एकीकृत सेफ हार्बर (15.5%)

  • विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं को 2047 तक टैक्स हॉलिडे

  • दंड और अभियोजन प्रक्रियाओं का युक्तिकरण

कस्टम्स और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस

  • व्यक्तिगत उपयोग के आयात पर शुल्क 20% से घटाकर 10%

  • 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट

  • कस्टम वेयरहाउसिंग में डिजिटल, रिस्क-बेस्ड प्रणाली

  • कार्गो क्लीयरेंस के लिए सिंगल डिजिटल विंडो

राजकोषीय अनुशासन

  • FY 2026-27 में राजकोषीय घाटा 4.3%

  • कर्ज-से-GDP अनुपात घटकर 55.6%

वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट आकांक्षा और समावेशन के संतुलन के साथ भारत को विकसित भारत की दिशा में आगे ले जाने वाला रोडमैप प्रस्तुत करता है।

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