Media24Media.com: #Yoga

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #Yoga. Show all posts
Showing posts with label #Yoga. Show all posts

लद्दाख में पहली बार शुरू हुआ योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स, समग्र स्वास्थ्य को मिलेगा बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

लेह- राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (NISR), लेह में तीन माह (400 घंटे) का योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है। यह पाठ्यक्रम मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY), नई दिल्ली और राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री योग पुरस्कार से सम्मानित एवं महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (MIMC) के संस्थापक अध्यक्ष वेन. भिक्षु संघसेना ने किया। इस अवसर पर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के आयुष, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. ताशी थिनलास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेट ने की।

डॉ. पद्मा गुरमेट ने प्रतिभागियों को लद्दाख के पहले योग वेलनेस सर्टिफिकेट कोर्स का हिस्सा बनने पर बधाई देते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण युवाओं को योग के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों पहलुओं में दक्ष बनाएगा। उन्होंने लद्दाख में योग एवं ध्यान को बढ़ावा देने के लिए वेन. भिक्षु संघसेना के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों और वेलनेस पद्धतियों को समाज तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्य अतिथि डॉ. ताशी थिनलास ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक चिकित्सा और योग के समन्वय से समग्र स्वास्थ्य एवं बेहतर जीवनशैली सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने लद्दाख में योग विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में योग को व्यापक रूप से शामिल करने की योजना की जानकारी दी।

वेन. भिक्षु संघसेना ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से योग को समर्पण और ईमानदारी के साथ अपनाने का आह्वान किया तथा ध्यान (Meditation) को योग का अभिन्न हिस्सा बताते हुए महाबोधि मेडिटेशन सेंटर आने का निमंत्रण भी दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में कोर्स समन्वयक गोपाल शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा और दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। अंत में डोलमा त्सेरिंग ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इसी के साथ तीन माह के योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

यह पहल लद्दाख में योग शिक्षा, पारंपरिक चिकित्सा और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता देश, प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में गिनाईं उपलब्धियां

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, विज्ञान और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, योग, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में निर्मित C-295 विमान की पहली सफल उड़ान देश के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष दुनिया भर के 2,500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने 114 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय उत्पाद अपनाने की अपील की। उन्होंने आगामी गणेश उत्सव के अवसर पर मिट्टी से बनी स्थानीय कारीगरों की गणेश प्रतिमाएं खरीदने तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से बचने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए लोगों से इन योजनाओं का लाभ उठाने और अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण, 'कैच द रेन' अभियान और जनभागीदारी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सभी नागरिकों से इसमें सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: भारत से दुनिया तक योग का महापर्व

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) ने भारत और विश्वभर में अभूतपूर्व भागीदारी के साथ एक नया इतिहास रच दिया। इस वर्ष की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" (Yoga for Healthy Ageing) रही, जिसने शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और समग्र स्वास्थ्य में योग की भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विशाल योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर लगभग 35,000 लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास कर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

दुनिया ने अपनाया योग का संदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, मिस्र सहित अनेक देशों में बड़े पैमाने पर योग सत्र आयोजित किए गए। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से लेकर यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और पूर्वी एशिया के प्रमुख शहरों तक लाखों लोगों ने योग दिवस में भाग लिया। इससे यह साबित हुआ कि योग आज वैश्विक स्वास्थ्य और सामूहिक कल्याण का प्रतीक बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योग मानवता को जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का एक सशक्त माध्यम है।

देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी किया योग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित सामूहिक योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वहीं उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने लद्दाख के लेह में योग दिवस मनाया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में सांसदों के साथ योग सत्र का नेतृत्व किया।

गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश

इस वर्ष का सबसे विशेष अभियान "गंगोत्री से गंगासागर" रहा। लगभग 2,525 किलोमीटर की यात्रा के दौरान ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, पटना और हुगली सहित अनेक प्रमुख घाटों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस पहल ने भारत की दो महान धरोहरों—गंगा और योग—को एक सूत्र में पिरोते हुए स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

योग संगम पोर्टल पर रिकॉर्ड भागीदारी

योग संगम पोर्टल पर 3.07 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। देश के 780 जिलों और 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से लोगों ने योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पोर्टल पर 7.46 लाख से अधिक तस्वीरें अपलोड की गईं और 2.66 लाख से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए।

रिकॉर्ड बनाने वाला योग दिवस

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले आयोजित कार्यक्रमों ने भी कई रिकॉर्ड बनाए।

  • महाराष्ट्र के बुलढाणा में लगभग 5,000 लोगों ने एक साथ त्रिकोणासन कर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान बनाया।

  • कान्हा शांति वनम में 6,000 से अधिक प्रतिभागियों ने एक साथ भुजंगासन कर नया रिकॉर्ड बनाया।

  • 14 जून 2026 को आयुष मंत्रालय ने अपने यूट्यूब लाइव योग सत्र के दौरान 4,35,831 दर्शकों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

सेना से युवाओं तक, हर वर्ग ने निभाई भागीदारी

रक्षा मंत्रालय ने सियाचिन ग्लेशियर से लेकर कन्याकुमारी तक योग कार्यक्रम आयोजित किए। रक्षा मंत्री Rajnath Singh सहित हजारों सैनिकों ने योग किया।

वहीं राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) ने देशभर के 5,000 से अधिक स्थानों पर 8.30 लाख से ज्यादा कैडेटों के साथ योगाभ्यास कर युवाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की।

भारत ने फिर दिखाया विश्व को मार्ग

12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का मार्ग है। करोड़ों लोगों की भागीदारी और वैश्विक उत्साह के साथ भारत ने योग के माध्यम से विश्व कल्याण और स्वस्थ जीवन का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

"12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर भारत से दुनिया तक योग का महापर्व देखने को मिला। करोड़ों लोगों ने ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ के संदेश को अपनाते हुए स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली की दिशा में कदम बढ़ाया।"




समाज, संगठन और योग के प्रति समर्पित था रूपनारायण सिन्हा जी का जीवन : मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिन्हा का संपूर्ण जीवन समाजसेवा, संगठन निर्माण और योग के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनका निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा एक कुशल संगठनकर्ता, सरल, सौम्य और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने व्यवहार, कार्यशैली और समर्पण से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विशेष पहचान बनाई थी। योग के प्रति उनकी निष्ठा और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें विशिष्ट बनाती थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष का दायित्व संभालने के बाद सिन्हा ने पूरे समर्पण और ऊर्जा के साथ योग आंदोलन को नई दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने योग को केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए अनेक नवाचार किए। उनके प्रयासों से प्रदेश में योग गतिविधियों को नई पहचान और व्यापक जनस्वीकृति मिली।

मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय सिन्हा के साथ बिताए गए क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि उनसे नियमित मुलाकात होती थी और हर मुलाकात में वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए योग आधारित नए विचार साझा करते थे। उनकी सोच सदैव रचनात्मक और जनहितकारी होती थी। वे योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर सक्रिय रहते थे और इसी उद्देश्य को अपने जीवन का मिशन बना चुके थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जशपुर के रणजीता स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम की सफलता में सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। सीमित समय में उन्होंने जिस कुशलता और प्रतिबद्धता के साथ उस आयोजन को भव्य स्वरूप दिया, वह उनकी संगठन क्षमता और कार्यकुशलता कावो उत्कृष्ट उदाहरण है। उस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने योग के प्रति जनजागरूकता को नई ऊंचाई प्रदान की थी। उनका जीवन समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक था, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

श्रद्धांजलि सभा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक धरमलाल कौशिक, विधायक अजय चंद्राकर, महापौर मीनल चौबे, रमेश बैस, राम प्रताप, पवन साय, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, राम दत्त,  राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, योग साधक एवं योग जगत से जुड़े लोगों ने उपस्थित होकर स्वर्गीय रूपनारायण सिन्हा को श्रद्धासुमन अर्पित किया।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का मुख्य समारोह कोलकाता में, “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” होगी थीम

No comments Document Thumbnail

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 का मुख्य समारोह 21 जून को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित किया जाएगा। इसकी घोषणा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और स्वस्थ उम्र बढ़ने में योग की भूमिका को रेखांकित करती है।

यह घोषणा खजुराहो स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, पश्चिमी मंदिर समूह में आयोजित योग महोत्सव 2026 के दौरान की गई, जो IDY 2026 के 25 दिन के काउंटडाउन की शुरुआत का प्रतीक है। इस कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय के अधीन मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) द्वारा किया गया, जिसमें हजारों योग प्रेमियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) के सामूहिक प्रदर्शन में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि कोलकाता, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का केंद्र है, IDY 2026 के मुख्य समारोह की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” विषय जीवन के बढ़ते चरण में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि खजुराहो अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के कारण भारत की प्राचीन परंपराओं और स्वास्थ्य अभ्यासों के सामंजस्य का प्रतीक है और यह भविष्य में वैश्विक योग एवं वेलनेस केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

मंत्री जाधव ने कहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए और आयुष मंत्रालय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, योग को गाँव-गाँव, घर-घर, स्कूलों, कार्यालयों और समुदायों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि योग और आयुष आहार जैसी पहलें संतुलित पोषण, अनुशासित जीवन और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने योग संगम पोर्टल को पुनः लॉन्च किया, जिससे ऑनलाइन पंजीकरण और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही योग पार्क पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जो राज्यों और संस्थानों में योग स्थानों के विकास में मदद करेगा। उन्होंने नया डिज़ाइन किया गया योग टी-शर्ट भी प्रस्तुत किया, जो योग, स्वास्थ्य और कल्याण का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि योग 365 अभियान के तहत 100 दिन के निःशुल्क योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में दो लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया है और उन्हें योग मित्र प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि योग और खजुराहो भारत की सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी तेजी से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रही है, जिससे समाज अधिक स्वस्थ और जागरूक बन रहा है।

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि योग और आयुर्वेद केवल अभ्यास नहीं बल्कि भारत की समृद्ध परंपराओं पर आधारित जीवन शैली हैं। उन्होंने शिक्षा और योग के संयोजन को स्वस्थ समाज निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मध्य प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत मूल्यों को दर्शाता है तथा जनमानस में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है और अब यह लगभग 190 देशों में अपनाया जा रहा है।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दाश ने कहा कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में योग समग्र स्वास्थ्य के लिए सरल और स्थायी समाधान प्रदान करता है। उन्होंने नागरिकों से ‘योग मित्र’ बनने और 14 जून 2026 को होने वाले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रयास में भाग लेने की अपील की।

कार्यक्रम में हजारों योग प्रेमियों ने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) काशीनाथ सामगंडी के नेतृत्व में कॉमन योग प्रोटोकॉल का सामूहिक प्रदर्शन किया। यह प्रोटोकॉल सभी आयु वर्ग के लोगों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई योग अभ्यासों की मानकीकृत श्रृंखला है।

यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ और योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है।



मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम: केंद्रीय बजट में ऐतिहासिक घोषणाएँ

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते हुए भारत को मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म (MVT) का वैश्विक केंद्र बनाने और आयुष (AYUSH) प्रणाली को सशक्त करने के लिए कई दूरदर्शी और परिवर्तनकारी कदमों की घोषणा की। इन पहलों का उद्देश्य गुणवत्ता, अनुसंधान, रोजगार सृजन और वैश्विक पहुँच को बढ़ावा देना है।

मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म के लिए पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब

भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा पर्यटन की पसंदीदा मंज़िल बनाने के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। ये हब एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों के रूप में विकसित किए जाएंगे, जहाँ चिकित्सा सेवाएँ, शिक्षा और अनुसंधान सुविधाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।

इन मेडिकल हब्स में आयुष केंद्र, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म सुविधा केंद्र, उन्नत डायग्नोस्टिक सेवाएँ, उपचार के बाद देखभाल और पुनर्वास सुविधाएँ शामिल होंगी। इससे देश-विदेश से आने वाले मरीजों को बेहतर अनुभव मिलेगा और डॉक्टरों व एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

आयुष को वैश्विक गति

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा योग को संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तुत किए जाने के बाद उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, वहीं कोविड-19 के बाद आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई स्वीकार्यता मिली है। आयुष उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग से औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और मूल्य संवर्धन से जुड़े युवाओं को भी लाभ हो रहा है।

आयुष क्षेत्र के लिए बजट की प्रमुख घोषणाएँ

आयुष को और मज़बूत करने तथा वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए बजट में निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलें प्रस्तावित की गई हैं:

  • तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना, जिससे शिक्षा, उपचार और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

  • आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन, ताकि गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन और कुशल मानव संसाधन को सुनिश्चित किया जा सके।

  • डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर, जामनगर का उन्नयन, जिससे साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और वैश्विक जागरूकता को बल मिलेगा।

इन पहलों के माध्यम से सरकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ते हुए भारत की सॉफ्ट पावर को सशक्त कर रही है और देश को समग्र एवं विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में स्थापित करने के अपने संकल्प को दोहरा रही है।

आयुष मंत्रालय 2025: पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक मान्यता और मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण वर्ष

No comments Document Thumbnail

साल 2025 भारत के आयुष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने, शोध, वैश्विक सहयोग और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय ने “विकसित भारत@2047” के विजन के अनुरूप भारत की पारंपरिक चिकित्सा नेतृत्व क्षमता को मजबूत किया और लाखों नागरिकों तक स्वास्थ्य लाभ पहुँचाया।

मुख्य उपलब्धियाँ और कार्यक्रम:

  • सीएआरआई का नया परिसर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI) के 2.92 एकड़ में बने नए ₹187 करोड़ के अत्याधुनिक परिसर की आधारशिला रखी। इस परिसर में 100-बेड का अनुसंधान अस्पताल, विशेष क्लीनिक, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण सुविधाएं होंगी।

  • अंतरराष्ट्रीय उन्नीस सम्मेलन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय परिषद फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन (CCRUM) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की यूनानी प्रणाली विश्व में सर्वमान्य हो रही है।

  • महाकुंभ में आयुष सेवाएं: प्रयागराज महाकुंभ में आयुष सेवाओं के माध्यम से 9 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को लाभ मिला। OPD, मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों, योग सत्रों और औषधीय पौधों के वितरण के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन शैली सुधार पर जोर दिया गया।

  • भारत-इंडोनेशिया सहयोग: पारंपरिक चिकित्सा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारत और इंडोनेशिया के बीच MoU का आदान-प्रदान हुआ। इस सहयोग से वैश्विक मानक, प्रशिक्षण और ज्ञान का आदान-प्रदान मजबूत होगा।

  • WHO द्वारा ICD-11 अपडेट: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2025 में ICD-11 में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी के लिए समर्पित मॉड्यूल को शामिल किया, जिससे वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा के डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग में मजबूती आई।

  • ‘देश का प्रकृति परीक्षण अभियान’ में रिकॉर्ड: अभियान के पहले चरण में 1.29 करोड़ प्रकृति आकलन हुए और भारत ने 5 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए।

  • योग महोत्सव और 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: योग महोत्सव 2025 का उद्घाटन करते हुए आयुष मंत्री श्री प्रताप राव जाधव ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की 100-दिन गिनती शुरू की। प्रधानमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े योग कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए 3 लाख प्रतिभागियों के साथ भारत की योग विश्वसनीयता को उजागर किया।

  • बीमस्टेक शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की घोषणा की, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण को बल मिलेगा।

  • विश्व होम्योपैथी दिवस और राष्ट्रीय सम्मेलन: गैंधीनगर में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में 8,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने शिक्षा, अनुसंधान और अभ्यास पर चर्चा की।

  • WHO–IRCH हर्बल मेडिसिन कार्यशाला: 17 देशों ने भाग लिया और आयुष मंत्रालय ने गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता में वैश्विक सहयोग को मजबूत किया।

  • Ayush Nivesh Saarthi पोर्टल: निवेशकों और उद्यमियों के लिए डिजिटल निवेश पोर्टल लॉन्च किया गया, जो पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र को निवेश-योग्य बनाने में सहायक होगा।

  • WHO Global Summit on Traditional Medicine: नई दिल्ली में आयोजित दूसरे सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और आयुष मंत्री जाधव ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया। सम्मेलन में 16 द्विपक्षीय बैठकें और कई वैश्विक पहलें हुईं।

निष्कर्ष:

साल 2025 ने आयुष मंत्रालय को पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने, वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने स्वास्थ्य, अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और वैश्विक सहयोग में नई ऊंचाइयों को छुआ, जिससे आयुष प्रणाली विश्व स्वास्थ्य परिदृश्य में एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरी।


प्रधानमंत्री मोदी ने योग के transformative प्रभाव पर साझा किया संस्कृत श्लोक

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज योग के परिवर्तनकारी प्रभाव को उजागर करते हुए एक संस्कृत श्लोक साझा किया। इस श्लोक में योग की प्रगतिशील यात्रा का वर्णन किया गया है—शारीरिक स्वास्थ्य से लेकर परम मोक्ष तक—आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा और समाधि के अभ्यास के माध्यम से।

प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट में लिखा:

“आसनेन रुजो हन्ति प्राणायामेन पातकम्।
विकारं मानसं योगी प्रत्याहारेण सर्वदा॥

धारणाभिर्मनोधैर्यं याति चैतन्यमद्भुतम्।
समाधौ मोक्षमाप्नोति त्यक्त्त्वा कर्म शुभाशुभम्॥”

अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा हेतु यूनेस्को की 20वीं अंतर-सरकारी समिति का सत्र नई दिल्ली के लाल किले में प्रारंभ

No comments Document Thumbnail

यूनेस्को की Intangible Cultural Heritage (अमूर्त सांस्कृतिक विरासत) की सुरक्षा के लिए 20वीं अंतर-सरकारी समिति का सत्र आज लाल किले, नई दिल्ली में विभिन्न बैठकों के साथ शुरू हुआ।

सुबह के सत्र के बाद संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने प्रेस वार्ता की अध्यक्षता की।
इस प्रेस वार्ता में 20 COM के अध्यक्ष और भारत के यूनेस्को में स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा, तथा यूनेस्को के सहायक महानिदेशक (संस्कृति) एर्नेस्टो ओत्तोने उपस्थित रहे।

भारत की विरासत संरक्षण प्रतिबद्धता पर जोर

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए,

सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा कि यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल लाल किले में इस सत्र की मेजबानी करना, भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के अद्वितीय सम्मिश्रण का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि भारत परंपराओं के संरक्षण में समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें—

  • राष्ट्रीय सूची (National Inventory) का विस्तार,

  • कलाकारों और परंपरा-वाहकों के लिए क्षमता-विकास कार्यक्रम,

  • और जीवित परंपराओं को राष्ट्रीय विकास कार्यक्रमों से जोड़ने के प्रयास शामिल हैं।

भारत के 15 अमूर्त तत्व—“सांस्कृतिक पहचान का कैलिडोस्कोप”

सचिव ने भारत के 15 अमूर्त सांस्कृतिक तत्वों का उल्लेख किया जो यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल हैं, जैसे:

  • वैदिक मंत्रोच्चार

  • कुटियाट्टम

  • योग

  • कुंभ मेला

  • दुर्गा पूजा

  • गरबा

उन्होंने कहा कि ये सभी भारत की सांस्कृतिक पहचान के “कैलिडोस्कोप” हैं।

अग्रवाल ने यह भी रेखांकित किया कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत मानवता की “जीवंत धड़कन” है, जो प्रदर्शन कलाओं, शिल्प, उत्सवों, अनुष्ठानों और मौखिक परंपराओं के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित होती है।

विश्व स्तर पर अमूर्त विरासत के सामने चुनौतियाँ

सचिव ने बताया कि यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भर में अमूर्त सांस्कृतिक विरासतें—

  • व्यावसायिक दबाव,

  • समुदायों की बदलती संरचना,

  • और विकसित होते डिजिटल परिवेश

जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि यूनेस्को का मंच सहयोग, संवाद और सामूहिक संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

भारत की प्रतिबद्धता फिर दोहराई गई

प्रेस वार्ता में बोलते हुए विशाल वी. शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दोहराया।

उन्होंने कहा कि समिति में भारत का कार्यकाल (2022–2026), वैश्विक चर्चाओं में भारत की भूमिका को और मजबूत करता है।

यूनेस्को प्रतिनिधि की प्रशंसा

यूनेस्को के सहायक महानिदेशक एर्नेस्टो ओत्तोने ने भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि—

  • नई दिल्ली में 20वें सत्र की मेजबानी से वे अत्यंत प्रसन्न हैं,

  • और उन्होंने भारत सरकार द्वारा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

8–13 दिसंबर 2025 तक चलेगा सत्र

यह सप्ताहभर चलने वाला सत्र 8 से 13 दिसंबर 2025 तक आयोजित होगा, जिसमें लगभग 1000 प्रतिनिधि शामिल होंगे—
सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधि, सांस्कृतिक संस्थान, विशेषज्ञ, एनजीओ और पर्यवेक्षक।

प्रधानमंत्री ने दूरदर्शन के ‘सुप्रभातम्’ कार्यक्रम की प्रशंसा की

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री ने दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले सुप्रभातम् कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह सुबह की शुरुआत को सुखद और ताज़गीभरा बनाता है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह कार्यक्रम योग से लेकर भारतीय जीवन शैली के विभिन्न पहलुओं तक विस्तृत विषयों को समेटे हुए है।


प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपराओं और मूल्यों पर आधारित यह कार्यक्रम ज्ञान, प्रेरणा और सकारात्मकता का एक अनोखा संगम प्रस्तुत करता है।

उन्होंने सुप्रभातम् कार्यक्रम के एक विशेष भाग—संस्कृत सुभाषित—की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि यह खंड भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रति एक नई चेतना को जागृत करता है। प्रधानमंत्री ने आज का सुभाषित भी दर्शकों के साथ साझा किया।

एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा:

“दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला सुप्रभातम् कार्यक्रम सुबह-सुबह ताजगी भरा एहसास देता है। इसमें योग से लेकर भारतीय जीवन शैली तक अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा होती है। भारतीय परंपराओं और मूल्यों पर आधारित यह कार्यक्रम ज्ञान, प्रेरणा और सकारात्मकता का अद्भुत संगम है।”

(वीडियो लिंक: https://www.youtube.com/watch?v=vNPCnjgSBqU)

उन्होंने आगे लिखा:

“सुप्रभातम् कार्यक्रम में एक विशेष हिस्से की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। यह है संस्कृत सुभाषित। इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति और विरासत को लेकर एक नई चेतना का संचार होता है। यह है आज का सुभाषित…”


IITF 2025 में आयुष मंत्रालय की भव्य प्रस्तुति: ‘आयुष के साथ – स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत’ थीम पर आकर्षण का केंद्र

No comments Document Thumbnail

आयुष मंत्रालय ने इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य विरासत का व्यापक प्रदर्शन किया है। “आयुष के साथ – स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत” थीम के साथ स्थापित आयुष पवेलियन में हजारों आगंतुकों की उपस्थिति देखी जा रही है, जहां लोग आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी पर आधारित समग्र स्वास्थ्य समाधान को जानने के लिए उत्सुक हैं।

पवेलियन के प्रत्येक थीम आधारित स्टॉल में डिजिटल डायग्नोस्टिक्स, आहार संबंधी प्रदर्शन, इंटरैक्टिव गेम्स, विशेषज्ञ परामर्श और सभी आयु वर्ग के लिए सहभागितात्मक गतिविधियों के माध्यम से आयुष प्रणालियों की विशेषताओं को प्रदर्शित किया गया है।

AIIA स्टॉल: आयुर्वेदिक आहार का विस्तृत प्रदर्शन

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) का स्टॉल पवेलियन के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यहां आयुर्वेद-आधारित फंक्शनल फूड्स जैसे रागी नाचोज़, सुंठ्यादि लड्डू, रागी-उड़द लड्डू, मूंग सूप प्रीमिक्स और यवाड़ी सत्तू का प्रदर्शन किया जा रहा है। विशेषज्ञ इन खाद्य पदार्थों के पोषण संबंधी लाभ जैसे एनीमिया प्रबंधन, प्रतिरक्षा वृद्धि और पाचन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दे रहे हैं। आगंतुकों को आयुर्वेदिक अनाज, मसाले और जड़ी-बूटियों के उपयोग से संबंधित पुस्तिकाएँ भी वितरित की जा रही हैं।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर: सात्त्विक आहार और व्यक्तिगत देखभाल

NIA ने सात्त्विक आहार पर केंद्रित प्रदर्शनी लगाई है, जिसमें त्रिफला जैम, रीजुवेनेटिंग ग्रैन्यूल्स, रागी बिस्किट, एलोवेरा जेल, लिप बाम और फुट क्रीम जैसे उत्पाद शामिल हैं। विशेषज्ञ सात्त्विक आहार के मानसिक स्पष्टता, ऊर्जा संतुलन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य में योगदान को समझा रहे हैं।

RAV: आयुष आहार थीम पर आधारित उत्पाद और मिलेट क्विज़

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (RAV) अपने स्टॉल पर पोषक कुकीज़, एनी ब्रेड, जीतायु टी, एनपी ड्रिंक और फुल मून चॉकलेट जैसे उत्पाद प्रदर्शित कर रहा है। मिलेट क्विज़ के माध्यम से आगंतुक बाजरे के आयुर्वेदिक महत्व को जान रहे हैं।

MDNIY: योग आधारित लाइव डेमो और Y-ब्रेक सत्र

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) कॉमन योग प्रोटोकॉल, रिदमिक योग, इंटरैक्टिव क्विज़ और कार्यरत लोगों के लिए “Y-Break” सत्र आयोजित कर रहा है, ताकि लोग सरल योग अभ्यासों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकें।

यूनानी चिकित्सा: डिजिटल मिज़ाज-असेसमेंट और पारंपरिक खाद्य पदार्थ

CCRUM और NIUM द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित यूनानी स्टॉल में हरीरा, यूनानी क़हवा, हलवा गी़क़वार, गुलकंद और तलबीनाह जैसे खाद्य पदार्थ आकर्षण का केंद्र रहे। डिजिटल मिज़ाज-परीक्षण (Damvi, Balghami, Safravi, Saudavi) आगंतुकों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य समझने में मदद कर रहा है।

सिद्ध चिकित्सा: पोषण, जागरूकता और चिकित्सा परामर्श

NIS और CCRS के स्टॉल में हिबिस्कस इंफ्यूज़न टी, पंचमुठ्टी कंजी, करिसलाई मिठाई और हलीम नाचोज़ जैसे सिद्ध-प्रेरित खाद्य पदार्थ प्रदर्शित किए जा रहे हैं। 100 से अधिक लोगों को निःशुल्क चिकित्सा परामर्श भी दिया गया।

CCRH: होम्योपैथी अनुसंधान और निःशुल्क ओपीडी

CCRH के स्टॉल में शोध प्रकाशन, क्लिनिकल अध्ययन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी प्रदर्शित की जा रही है। होम्योपैथिक चिकित्सक पवेलियन में निःशुल्क ओपीडी चला रहे हैं।

Sowa-Rigpa (सोवा-रिग्पा): हिमालयी पारंपरिक चिकित्सा की झलक

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा प्रतिदिन लगभग 40 निःशुल्क परामर्श प्रदान कर रहा है तथा आगंतुकों को सowa-रिग्पा के आहार, आचरण और उपचार सिद्धांतों के बारे में जानकारी दे रहा है।

NMPB: औषधीय पौधों की जीवंत प्रदर्शनी

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) अपने स्टॉल पर औषधीय पौधों का लाइव डिस्प्ले, पहचान, खेती और औषधीय उपयोग पर जानकारी दे रहा है। “अटल आयुष महोत्सव” के तहत औषधीय पौधों के पौधे भी वितरित किए जा रहे हैं।

IMPCL: उच्च गुणवत्ता वाली औषधियाँ

IMPCL ने अपनी WHO-GMP और ISO प्रमाणित इकाई द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक और यूनानी औषधियों का प्रदर्शन किया है, जिसकी वार्षिक आय वर्ष 2024–25 में लगभग ₹170 करोड़ रही।

PCIM&H: औषधीय मानकों और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण पर फोकस

PCIM&H अपने फार्माकोपिया प्रकाशन, दवाइयों के नमूने और ऑडियो-विज़ुअल सामग्री के माध्यम से आयुष औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर जागरूकता बढ़ा रहा है।

CCRYN: प्राकृतिक चिकित्सा आधारित पोषण और IEC सामग्री

CCRYN के स्टॉल में तिल लड्डू, मूंगफली-तिल लड्डू, मखाना लड्डू और मिलेट नमकीन जैसे प्राकृतिक आहार प्रदर्शित किए गए हैं।

स्टार्ट-अप सेक्शन: नवाचार आधारित आयुर्वेदिक उत्पाद

आयुर्वेद आधारित स्टार्ट-अप्स स्किनकेयर, डिटॉक्स ड्रिंक्स, आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थ और वेलनेस उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।

एक्टिविटी ज़ोन: बच्चों और युवाओं में स्वास्थ्य जागरूकता

ड्रॉइंग प्रतियोगिता, स्वास्थ्य-आधारित साँप-सीढ़ी, प्रकृति-परिक्षण, मिलेट क्विज़, स्लोगन रायटिंग और फोटो बूथ आगंतुकों में लोकप्रिय हैं।

समापन

IITF 2025 का आयुष पवेलियन सार्वजनिक भागीदारी, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और आयुष चिकित्सा वितरण के साथ व्यापक लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। यह पवेलियन भारत की समृद्ध समग्र चिकित्सा परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।



विश्व मधुमेह दिवस 2025: केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु करेगा “मधुमेह विमर्श” का आयोजन

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), बेंगलुरु, जो भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा मधुमेह (Diabetes Mellitus) के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में मान्यता प्राप्त है, 14 नवंबर 2025 को विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम “मधुमेह विमर्श” आयोजित करेगा। इस कार्यक्रम में मधुमेह पर चल रहे अनुसंधान, नैदानिक कार्यों और जनजागरूकता पहलों को प्रस्तुत किया जाएगा, जिन्हें उत्कृष्टता केंद्र द्वारा संचालित किया जा रहा है।

संस्थान का प्रमुख उद्देश्य आयुर्वेद, योग और जीवनशैली सुधारों के माध्यम से मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एक समग्र (integrative) दृष्टिकोण विकसित और लागू करना है। अब तक लगभग 6,000 रोगियों ने संस्थान की सेवाओं का लाभ उठाया है, जिनमें से 25 प्रतिशत से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से हैं।

क्लिनिकल सेवाओं के अलावा, संस्थान ने डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से अपनी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे 6 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है। इसमें ई-मेडिकल रिकॉर्ड, टेली-परामर्श, एसएमएस अलर्ट, और वेबसाइट (www.cari.gov.in) व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

संस्थान ने मशीन लर्निंग आधारित मधुमेह जोखिम मूल्यांकन प्रणाली भी विकसित की है, जिसे कॉपीराइट सुरक्षा प्राप्त हुई है। इस प्रणाली का वेब एप्लिकेशन के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है और इसे एक मोबाइल एप के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की निगरानी स्वयं कर सकें।

कार्यक्रम से पहले, डॉ. सुलोचना भट, प्रभारी, सीएआरआई बेंगलुरु ने कहा,

“हमारा ध्यान पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के संयोजन पर रहा है ताकि मधुमेह का समग्र और साक्ष्य-आधारित समाधान प्रदान किया जा सके। केंद्र की पहलें दिखाती हैं कि एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण से न केवल रोकथाम संभव है बल्कि जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।”

संस्थान सीएसआईआर-सीएफटीआरआई (मैसूर) और आईआईएससी (बेंगलुरु) के साथ चयनित खाद्य उत्पादों और आयुर्वेदिक औषधियों पर सहयोगात्मक अध्ययन कर रहा है। मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एकीकृत रूपरेखा तैयार की गई है और यह प्रकाशनाधीन है, जबकि प्रकृति (Prakriti) और डायबेटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी पर अध्ययन भी प्रकाशन की प्रक्रिया में है।

कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) जी. जी. गंगाधरन, पूर्व निदेशक, रामैया इंडिक स्पेशियलिटी आयुर्वेद रिस्टोरेशन अस्पताल, “मधुमेह का समग्र प्रबंधन” विषय पर व्याख्यान देंगे।

आयुष मंत्रालय जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह के प्रबंधन हेतु सतत, समावेशी और साक्ष्य-आधारित रणनीतियों के विकास के लिए अनुसंधान और नैदानिक पहलों को बढ़ावा देता रहेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हरिद्वार में पतंजलि विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में छात्रों का आह्वान किया — “व्यक्ति निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव”

No comments Document Thumbnail

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार के द्वितीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के महान विभूतियों ने मानव संस्कृति के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि, जो महानतम ऋषियों में से एक हैं, ने योग के माध्यम से मन की अशुद्धियों को, व्याकरण के माध्यम से वाणी की अशुद्धियों को, और आयुर्वेद के माध्यम से शरीर की अशुद्धियों को दूर किया। राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पतंजलि विश्वविद्यालय महर्षि पतंजलि की महान परंपरा को समाज तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्रों में शिक्षा और अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है, जो एक स्वस्थ भारत के निर्माण में सराहनीय प्रयास है।

राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की भारत-केंद्रित शिक्षा दृष्टि की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विश्व बंधुत्व की भावना, प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय, तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान की दृष्टि से यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के आदर्शों के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने यह अनुभव किया होगा कि पर्यावरण की रक्षा और प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाना मानवता के भविष्य के लिए आवश्यक है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ये विद्यार्थी जलवायु परिवर्तन सहित सभी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि सर्वजन कल्याण की भावना हमारी संस्कृति की पहचान है। यही कल्याण सद्भाव और समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सद्भाव के इस जीवन-मूल्य को व्यवहार में लाएँगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से परिवार निर्माण, समाज निर्माण और अंततः राष्ट्र निर्माण होता है। उन्होंने इस तथ्य पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पतंजलि विश्वविद्यालय ने व्यक्ति विकास के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के मार्ग को अपनाया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपने सदाचार, ज्ञान और कर्मशीलता से एक स्वस्थ समाज और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.