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भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH), हैदराबाद ने केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तहत सेवाधि म्यूजियम एंड इंडोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (SEMIRI), कुमारनल्लूर, कोट्टायम, केरल के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य SEMIRI में संरक्षित चिकित्सा पांडुलिपियों का व्यवस्थित डिजिटलीकरण और विस्तृत विवरणात्मक कैटलॉग तैयार करना है।

SEMIRI के पास 30,000 से अधिक पांडुलिपियों का विशाल संग्रह है, जिसमें मंदिर से संबंधित अभिलेख भी शामिल हैं। इस संग्रह में आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी कई दुर्लभ एवं ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण पांडुलिपियां मौजूद हैं।

इन पांडुलिपियों में चिकित्सा विचारों के विकास, उपचार पद्धतियों, औषधीय द्रव्यों, निदान संबंधी अवधारणाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा की विद्वत परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

MoU के तहत CCRAS-NIIMH तकनीकी एवं शोध विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। सैकड़ों चिकित्सा पांडुलिपियों का उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और नाजुक पांडुलिपियों को बार-बार संभालने की आवश्यकता भी कम होगी।

तैयार होगा विस्तृत विवरणात्मक कैटलॉग

इस पहल के तहत पांडुलिपियों का एक व्यापक Descriptive Catalogue भी तैयार किया जाएगा। इसमें उपलब्ध जानकारी के आधार पर शीर्षक, लेखक, विषय, लिपि, भाषा, सामग्री, आकार, फोलियो विवरण, स्थिति, स्रोत एवं अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज किए जाएंगे।

यह कार्य AYUSH Manuscripts Advanced Repository के निर्धारित प्रारूप के अनुसार किया जाएगा। इससे शोधकर्ताओं और विद्वानों को संबंधित पांडुलिपियों की पहचान करने तथा भविष्य के शोध के लिए प्राथमिक स्रोतों तक पहुंच बनाने में सुविधा होगी।

यह पहल ज्ञान भारतम मिशन और भारत सरकार द्वारा देश की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं व्यापक प्रसार के प्रयासों के अनुरूप है। चिकित्सा संबंधी पांडुलिपियां भारत की बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान समाहित है।

CCRAS के महानिदेशक प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य ने कहा कि चिकित्सा पांडुलिपियों का संरक्षण केवल अभिलेखीय कार्य नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से दुर्लभ चिकित्सा ज्ञान भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और सुलभ रहेगा।

वहीं, SEMIRI के अध्यक्ष डॉ. सी.एस. उन्नी ने कुमारनल्लूर और कोट्टायम क्षेत्र की समृद्ध विरासत को सामने लाने में इस सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। CCRAS-NIIMH के प्रमुख डॉ. गोली पेंचला प्रसाद ने आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के संरक्षण और अध्ययन से जुड़ी चुनौतियों एवं आगे की रणनीति पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर SEMIRI के क्यूरेटर डॉ. एस. राजेंदु, CCRAS के रिसर्च ऑफिसर (आयुर्वेद) डॉ. संतोष एस. माने, डॉ. राकेश नारायणन सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

CCRAS-NIIMH की विशेषज्ञ टीम ने संस्थान की Collection, Digitization and Cataloguing of AYUSH Manuscripts and Rare Books परियोजना के तहत पांडुलिपियों का मौके पर ही व्यवस्थित डिजिटलीकरण भी शुरू कर दिया है।

यह सहयोग भारत की पारंपरिक चिकित्सा एवं पांडुलिपि विरासत को डिजिटल, संरक्षित और शोध के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, शिक्षाविदों और आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेषज्ञों को महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत उपलब्ध हो सकेंगे।


लद्दाख में पहली बार शुरू हुआ योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स, समग्र स्वास्थ्य को मिलेगा बढ़ावा

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लेह- राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (NISR), लेह में तीन माह (400 घंटे) का योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया गया है। यह पाठ्यक्रम मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY), नई दिल्ली और राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री योग पुरस्कार से सम्मानित एवं महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर (MIMC) के संस्थापक अध्यक्ष वेन. भिक्षु संघसेना ने किया। इस अवसर पर केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के आयुष, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. ताशी थिनलास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान, लेह के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेट ने की।

डॉ. पद्मा गुरमेट ने प्रतिभागियों को लद्दाख के पहले योग वेलनेस सर्टिफिकेट कोर्स का हिस्सा बनने पर बधाई देते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण युवाओं को योग के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों पहलुओं में दक्ष बनाएगा। उन्होंने लद्दाख में योग एवं ध्यान को बढ़ावा देने के लिए वेन. भिक्षु संघसेना के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों और वेलनेस पद्धतियों को समाज तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्य अतिथि डॉ. ताशी थिनलास ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा, पारंपरिक चिकित्सा और योग के समन्वय से समग्र स्वास्थ्य एवं बेहतर जीवनशैली सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने लद्दाख में योग विशेषज्ञों की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में योग को व्यापक रूप से शामिल करने की योजना की जानकारी दी।

वेन. भिक्षु संघसेना ने अपने संबोधन में कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से योग को समर्पण और ईमानदारी के साथ अपनाने का आह्वान किया तथा ध्यान (Meditation) को योग का अभिन्न हिस्सा बताते हुए महाबोधि मेडिटेशन सेंटर आने का निमंत्रण भी दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में कोर्स समन्वयक गोपाल शर्मा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा और दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। अंत में डोलमा त्सेरिंग ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इसी के साथ तीन माह के योग वेलनेस इंस्ट्रक्टर सर्टिफिकेट कोर्स का औपचारिक शुभारंभ हुआ।

यह पहल लद्दाख में योग शिक्षा, पारंपरिक चिकित्सा और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भारत को वैश्विक आयुष हब बनाने की दिशा में मंथन, नई दिल्ली में सरकार-उद्योग विचार-विमर्श सत्र आयोजित

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नई दिल्ली- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने आयुष मंत्रालय तथा आयुष एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AYUSHEXCIL) के सहयोग से 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में आयुष क्षेत्र पर सरकार-उद्योग विचार-विमर्श (ब्रेनस्टॉर्मिंग) सत्र आयोजित किया।

"पारंपरिक स्वास्थ्य एवं कल्याण में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को सुदृढ़ करना : नवाचार, गुणवत्ता, निर्यात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग" विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, निर्यातक, निर्माता, एमएसएमई, स्टार्टअप, शोधकर्ता, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण तथा अन्य हितधारक शामिल रहे। सभी ने आयुष क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को मजबूत करने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम के दौरान भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से मिलने वाले अवसरों, आयुष की वैश्विक ब्रांडिंग, निर्यात प्रोत्साहन, गुणवत्ता मानकों एवं WHO-GMP अनुपालन, आयुष क्वालिटी मार्क, वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, नवाचार, मेडिकल वैल्यू ट्रैवल, वेलनेस सेवाओं तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नियामकीय एवं बाजार पहुंच संबंधी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार, उद्योग, शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भारतीय आयुष उत्पादों एवं सेवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक सुझाव साझा किए।

सत्र को संबोधित करते हुए सांसद एवं AYUSHEXCIL के अध्यक्ष डॉ. अनुराग शर्मा ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को विश्वभर में तेजी से स्वीकार्यता मिल रही है और भारत समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का विश्वसनीय वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करने के लिए सरकार, उद्योग और शोध संस्थानों के बीच घनिष्ठ सहयोग पर बल दिया। उन्होंने यह भी बताया कि AYUSHEXCIL निर्यातकों को बाजार विकास, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय पहुंच कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग प्रदान कर रहा है।

मुख्य वक्तव्य देते हुए वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि आयुष क्षेत्र देश के उभरते हुए उच्च संभावनाओं वाले निर्यात क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लक्ष्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय आयुष ब्रांड विकसित करना है। उन्होंने उद्योग जगत से नवाचार, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया तथा मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वाणिज्य विभाग भविष्य में भी AYUSHEXCIL के साथ मिलकर जागरूकता, क्षमता निर्माण और हितधारक संवाद कार्यक्रम जारी रखेगा।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने आयुष मार्क और आयुर्वेद आहार जैसी प्रमुख पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी लाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे गुणवत्ता, ब्रांडिंग और भारतीय आयुष उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने उद्योग जगत से आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के प्रति विश्वभर में बढ़ती रुचि का लाभ उठाने के लिए उत्पाद गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयारी करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने निर्यातकों और एमएसएमई के क्षमता निर्माण तथा भारतीय मानकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजित खुले संवाद सत्र में निर्यातकों, निर्माताओं, एमएसएमई, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों ने बाजार पहुंच, नियामकीय प्रक्रियाओं में सुधार, कारोबार सुगमता, नवाचार, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

विचार-विमर्श सत्र से प्राप्त सुझाव भविष्य की नीतियों, निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रमों और वाणिज्य विभाग, आयुष मंत्रालय तथा AYUSHEXCIL के संयुक्त प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे। इन पहलों के माध्यम से 'ब्रांड इंडिया आयुष' को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत बनाने तथा पारंपरिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने अमित शाह से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की मांग

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  से मुलाकात कर राज्य में All India Institute of Ayurveda (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से राज्य के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और मरीजों को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इसके साथ ही प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेदिक शिक्षा और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संस्थान की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गति मिलेगी। विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक शोध एवं उपचार सुविधाओं से जोड़ने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर सकारात्मक चर्चा की और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेदिक संस्थान स्थापित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि AIIA की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि आयुष क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और चिकित्सा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।


हांगकांग में अंतरराष्ट्रीय हर्बल फार्माकोपिया पर WHO विशेषज्ञों की बैठक, भारत की सक्रिय भागीदारी

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हांगकांग एसएआर (चीन) में 16 से 18 जून 2026 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा आयोजित इंटरनेशनल हर्बल फार्माकोपिया के विकास पर 5वीं विशेषज्ञ बैठक आयोजित की जा रही है। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत की ओर से आयुष मंत्रालय के अंतर्गत फार्माकोपिया आयोग (PCIM&H) सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।

इस बैठक में WHO के सदस्य देशों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ वैश्विक स्तर पर हर्बल औषधियों के मानकों, गुणवत्ता, सुरक्षा और शुद्धता से जुड़े नियमों पर चर्चा कर रहे हैं।

भारत का प्रतिनिधित्व पीसीआईएम एंड एच के निदेशक डॉ. रमण मोहन सिंह विशेषज्ञ सदस्य के रूप में कर रहे हैं। उनके साथ एक तकनीकी टीम भी वर्चुअल माध्यम से इस बैठक में शामिल हो रही है, जिसमें शामिल हैं—

  • डॉ. जयंती ए. (PSO - फार्माकोग्नोसी)

  • डॉ. विजय गुप्ता (PSO - आयुर्वेद)

  • डॉ. अनुपम मौर्य (SO - केमिस्ट्री)

  • डॉ. वी. विजयकुमार (SO - सिद्ध)

  • डॉ. निखिल जिरंकलगिकर (SO - आयुर्वेद)

बैठक के दौरान PCIM&H द्वारा विकसित विभिन्न हर्बल मोनोग्राफ और दस्तावेजों को WHO टीम के साथ मिलकर प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि उनका विस्तृत मूल्यांकन और समीक्षा की जा सके।

यह पहल पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे गुणवत्ता, सुरक्षा और शुद्धता के वैश्विक मानकों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित होगा।

भारत की यह सक्रिय भागीदारी अंतरराष्ट्रीय हर्बल फार्माकोपिया के निर्माण में देश की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है और वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

चिंतन शिविर–2026 का समापन, आयुष क्षेत्र को सशक्त बनाने पर जोर

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नई दिल्ली: प्रतापराव जाधव, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने दो दिवसीय चिंतन शिविर–2026 के समापन सत्र की अध्यक्षता की। इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का उद्देश्य आयुष क्षेत्र में नीति, शासन और क्रियान्वयन को मजबूत करना था।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि आयुष केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि एक समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली का दृष्टिकोण है, जो विशेष रूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने आयुष को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकृत करने, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे आयुष ग्रिड व टेलीमेडिसिन के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन नीति समन्वय और मंत्रालयों के बीच सहयोग पर चर्चा हुई। इस दौरान विनोद पॉल,पुण्य सलिला श्रीवास्तवऔर प्रीति सूदन जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

विनोद पॉल ने आधुनिक चिकित्सा और आयुष के एकीकरण के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने की बात कही। वहीं, पुन्या सलिला श्रीवास्तव ने आयुष को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल करने और डिजिटल हेल्थ सिस्टम के उपयोग पर जोर दिया।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह शिविर भविष्य की रणनीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ है, जिससे आयुष क्षेत्र को और सशक्त बनाया जाएगा।

इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पहलें भी शुरू की गईं, जिनमें आयुष उपचार के लिए बीमा कवरेज बढ़ाने हेतु समझौता, मंत्रालय का व्हाट्सएप चैनल लॉन्च, आयुष बीमा दरों का दस्तावेज जारी करना और हेल्पलाइन नंबर 1800-11-0008 की शुरुआत शामिल है।

कार्यक्रम में उद्यमिता, कौशल विकास, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और मीडिया रणनीतियों पर भी चर्चा की गई, ताकि आयुष को एक प्रभावी और विश्वसनीय स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित किया जा सके।

दो दिवसीय चिंतन शिविर में नीति निर्धारकों, विशेषज्ञों और हितधारकों ने शिक्षा, अनुसंधान, सेवा वितरण, डिजिटलाइजेशन और जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

शिविर का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आयुष क्षेत्र को सशक्त बनाकर 2047 तक स्वस्थ और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।


AIIA की आयुर्वेदिक पहल से पुलिस कर्मियों में तनाव प्रबंधन को मिली नई दिशा, 35,000 से अधिक कर्मियों को लाभ

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अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली ने महामारी के दौरान “पुलिस कर्मियों के लिए आयुर्वेदिक हस्तक्षेप द्वारा तनाव प्रबंधन” शीर्षक से एक जनस्वास्थ्य पहल (PHI) परियोजना शुरू की, जिसने उल्लेखनीय प्रभाव डाला है। अब तक इस परियोजना के माध्यम से 35,704 पुलिस कर्मियों में जागरूकता पैदा की जा चुकी है और इसे संस्थान की एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मानसिक स्वास्थ्य की परिभाषा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी क्षमताओं को पहचानता है, जीवन के सामान्य तनावों से निपट सकता है, उत्पादक रूप से कार्य कर सकता है और समाज में योगदान देने में सक्षम होता है। इस दृष्टि से मानसिक स्वास्थ्य व्यक्तिगत कल्याण और समाज के प्रभावी संचालन की नींव है।

यह परियोजना प्रो. (डॉ.) मेधा कुलकर्णी (प्रधान अन्वेषक) और प्रो. (डॉ.) मीना देओगड़े (सह-प्रधान अन्वेषक) के नेतृत्व में संचालित हो रही है। इस पहल के अंतर्गत एक विशेष तनाव प्रबंधन मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित किया गया है। दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (कल्याण प्रभाग) अतुल कटियार, IPS ने आयुर्वेद की भूमिका और महत्व की सराहना करते हुए इसकी शाश्वत ज्ञान परंपरा और समग्र उपचार क्षमता को रेखांकित किया तथा इस परियोजना के लिए संस्थान का आभार व्यक्त किया।

परियोजना के बारे में बताते हुए प्रो. (डॉ.) मीना देओगड़े ने कहा कि पुलिस कर्मी अक्सर अत्यधिक शारीरिक और मानसिक दबाव में कार्य करते हैं, जिससे वे तनाव से संबंधित विकारों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य आयुर्वेद पर आधारित समग्र, निवारक और उपचारात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का संरक्षण करना है। इस पहल को मिले सकारात्मक प्रतिसाद और ठोस परिणाम इसकी प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।

परियोजना के तहत 206 शिविर आयोजित किए गए, जिनमें 7,752 पुलिस कर्मियों की तनाव, उच्च रक्तचाप और अन्य संबंधित समस्याओं के लिए जांच की गई। इनमें से 1,843 कर्मियों को आयुर्वेदिक उपचार प्रदान किया गया, जिसमें आंतरिक औषधियों के साथ शिरोधारा जैसी चिकित्सा पद्धतियां शामिल थीं। दिल्ली पुलिस के कल्याण विभाग ने दो इकाइयों में स्थल उपलब्ध कराकर इस पहल को सहयोग दिया।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, नई दिल्ली ने 24 मार्च 2026 को इस PHI परियोजना का एक दिवसीय प्रसार कार्यशाला भी आयोजित की। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अतुल कटियार, IPS (विशेष पुलिस आयुक्त, कल्याण प्रभाग, दिल्ली पुलिस) उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सलाहकार डॉ. कौस्तुभ उपाध्याय शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) प्रदीप कुमार प्रजापति ने की। साथ ही, आयुष मंत्रालय की PHI परियोजना की जनस्वास्थ्य सलाहकार डॉ. सुनीला गर्ग भी उपस्थित रहीं।

कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए। पूर्वोत्तर आयुर्वेद एवं लोक चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (NEIAFMR), पासीघाट, अरुणाचल प्रदेश की सहायक प्रोफेसर डॉ. सजीना ए. ने “स्मृति मेडिटेशन के माध्यम से तनाव प्रबंधन” विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं केरल के कोट्टक्कल स्थित VPSV आयुर्वेद कॉलेज की डॉ. अनुपमा कृष्णन ने “जब काम मन को प्रभावित करता है: व्यावसायिक तनाव और उसका आयुर्वेदिक प्रबंधन” विषय पर चर्चा की, जिसमें आयुर्वेद आधारित समग्र और निवारक उपायों पर जोर दिया गया।

यह कार्यशाला अनुसंधान निष्कर्षों के प्रसार और विशेष रूप से पुलिस कर्मियों जैसे उच्च जोखिम वाले पेशों में व्यावसायिक तनाव से निपटने में आयुर्वेद की भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।

राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का सफल समापन, समग्र स्वास्थ्य एवं ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पुनः स्थापित

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Ministry of Ayush द्वारा All India Ayurvedic Congress के सहयोग से Shegaon (जिला Buldhana district), Maharashtra में 25 से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का कल सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस आयोजन ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य सेवा और ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया।

पवित्र विसावा मैदान, Sant Gajanan Maharaj Sansthan में आयोजित इस मेले का उद्घाटन भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने किया। चार दिनों तक चले इस आयोजन में स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक विमर्श, किसान सहभागिता और जनभागीदारी का सशक्त संगम देखने को मिला। बुलढाणा तथा व्यापक विदर्भ क्षेत्र से हजारों नागरिकों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अपने उद्घाटन संबोधन में राष्ट्रपति ने स्वास्थ्य को सर्वोच्च सुख बताते हुए कहा कि आयुष पद्धतियां शरीर और मन के संतुलन पर आधारित एक समग्र जीवनशैली प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि निवारक एवं समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण रोगभार कम करने और राष्ट्र को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को “लाइफटाइम आयुर्वेदिक गौरव सम्मान” से सम्मानित किया।

Acharya Devvrat, राज्यपाल, महाराष्ट्र ने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में निहित कालातीत वैज्ञानिक परंपरा बताते हुए प्रामाणिकता और गुणवत्ता के महत्व पर बल दिया।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Prataprao Jadhav ने मेले के लगभग सभी दिनों में उपस्थित रहकर इसे भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का “महाकुंभ” बताया। उन्होंने कहा कि आयुष केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि निवारक स्वास्थ्य, ग्रामीण समृद्धि और वैश्विक वेलनेस नेतृत्व का राष्ट्रीय आंदोलन है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रालय आयुष पद्धतियों में साक्ष्य-आधारित शोध, गुणवत्ता आश्वासन और वैश्विक विस्तार को सुदृढ़ कर रहा है। आयुष पर्यटन की अपार संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से भारत विश्व में समग्र वेलनेस का शिखर बन सकता है।

मेले की एक प्रमुख विशेषता आम जनता को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रही। आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी पद्धतियों के लिए स्थापित ओपीडी काउंटरों पर चारों दिनों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हजारों लाभार्थियों ने निःशुल्क परामर्श, स्वास्थ्य जांच और प्रमाणिक आयुष औषधियों का लाभ उठाया। जीवनशैली संबंधी रोगों, दीर्घकालिक बीमारियों और निवारक देखभाल पर विशेषज्ञ सलाह को लोगों ने सराहा।

योग के लाइव प्रदर्शन और योग चिकित्सा सत्रों में सभी आयु वर्गों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। मेले के दौरान आयोजित योग प्रतियोगिता में युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने योग के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाया। आयुष आहार खंड में क्षेत्र-विशिष्ट संतुलित आहार पद्धतियों को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

मंत्रालय के मंडप में अनुसंधान परिषदों, राष्ट्रीय संस्थानों और राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया। औषधीय पौधों, हर्बल उत्पादों और घरेलू उपचारों से संबंधित इंटरैक्टिव प्रदर्शन विशेषकर ग्रामीण आगंतुकों और स्वयं सहायता समूहों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे।

राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 की विशिष्टता किसानों के साथ विशेष संवाद रही। “आयुर्वेदिक खेती: उत्पादन, मूल्य संवर्धन एवं विपणन” विषय पर आयोजित सत्रों में औषधीय पौधों की खेती, फसलोत्तर प्रबंधन और सुनिश्चित बाजार संपर्क पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। लगभग 2000 किसानों ने इस कार्यशाला में भाग लिया। हल्दी की खरीद के लिए महत्वपूर्ण बाय-बैक व्यवस्था सहित कई आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ करने और किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

विदर्भ क्षेत्र के किसानों और प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि औषधीय पौधों की खेती पारंपरिक कृषि के साथ एक लाभकारी और सतत विकल्प प्रदान करती है। उन्होंने मेले को स्वास्थ्य उन्नयन, आय वृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन को जोड़ने वाली समयोचित पहल बताया।

चार दिनों तक यह मेला ज्ञान-विनिमय, जन-जागरूकता और प्रत्यक्ष सेवा प्रदाय का सशक्त मंच बना रहा। विशेषज्ञ व्याख्यान, चिकित्सा प्रदर्शनियां, उद्योग सहभागिता और नीति-निर्माताओं तथा जमीनी हितधारकों के बीच संवाद ने स्वास्थ्य और आजीविका के एकीकृत दृष्टिकोण को सुदृढ़ किया।

शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का सफल आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आयुष मंत्रालय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ शोध, गुणवत्ता मानकों और आयुष मूल्य श्रृंखला में किसानों की भागीदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, वैज्ञानिक सहभागिता, योग प्रतियोगिताओं में युवा भागीदारी और औषधीय पौधों की खेती के लिए संरचित समर्थन को एक साथ जोड़ते हुए इस मेले ने प्रदर्शित किया कि आयुष पद्धतियां सार्वजनिक स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और भारत को वैश्विक समग्र वेलनेस केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ में बोले जे. पी. नड्डा, भारत को वैश्विक स्वास्थ्य हब बनाने पर जोर

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा आयोजित ‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ के 8वें संस्करण को वर्चुअल रूप से संबोधित किया।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने एक मजबूत, उच्च गुणवत्ता वाली और वैश्विक मानकों के अनुरूप स्वास्थ्य प्रणाली बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की मजबूत भागीदारी भारत की स्वास्थ्य सेवाओं की वैश्विक मान्यता और विश्वसनीयता को दर्शाती है।

मंत्री नड्डा ने इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के निरंतर आयोजन के लिए FICCI की सराहना की, जिसने भारत को मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच वैश्विक स्वास्थ्य हितधारकों के साथ संवाद, साझेदारी और निवेश को बढ़ावा देते हैं।

मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि यह भारत के वैश्विक स्वास्थ्य जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण आयाम है। उन्होंने कहा कि यह भारत की नैदानिक उत्कृष्टता, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सेवाएँ, पारदर्शी शासन ढांचा और रोगी-केंद्रित देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि भारत के अत्यधिक कुशल चिकित्सा पेशेवर और आधुनिक स्वास्थ्य अवसंरचना हृदय रोग, कैंसर, अंग प्रत्यारोपण, ऑर्थोपेडिक्स और न्यूरोसाइंस सहित कई क्षेत्रों में उन्नत उपचार प्रदान करते हैं। मंत्री ने कहा कि उन्नत तकनीकों, डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों और गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों के एकीकरण से रोगी परिणाम और सेवा वितरण और मजबूत हुआ है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि भारत सरकार मंत्रालयों, नियामक प्राधिकरणों, मान्यता एजेंसियों और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाकर मेडिकल वैल्यू ट्रैवल के समर्थन में पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार मेडिकल ट्रैवल को केवल आर्थिक अवसर ही नहीं, बल्कि देशों के बीच विश्वास और जन-जन संबंधों को मजबूत करने के माध्यम के रूप में भी देखती है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ वैश्विक स्वास्थ्य गतिशीलता के भविष्य को आकार देने, सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज और सहभागिता को गहरा करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और हितधारकों से सक्रिय भागीदारी, सार्थक सहयोग और भारत की विशाल संभावनाओं को खोजने का आह्वान किया।

अपने वर्चुअल संबोधन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री और आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने स्वास्थ्य सेवा के वैश्विक और सहयोगात्मक स्वरूप पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवा केवल राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सहयोग, प्रौद्योगिकी, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझा जिम्मेदारी से आकार लेती है।

मंत्री जाधव ने भारत के एकीकृत दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत का स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र उन्नत नैदानिक क्षमताओं, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार, मजबूत फार्मास्युटिकल क्षमता और वैश्विक जुड़ाव के लिए प्रतिबद्ध संस्थानों के बढ़ते नेटवर्क के साथ एक गतिशील और एकीकृत प्रणाली में विकसित हो गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यापक ढांचा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों मरीजों की सेवा करने की भारत की क्षमता को मजबूत करता है।

राज्य मंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ एकीकृत करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह एकीकृत देखभाल मॉडल भारत के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो नवाचार के साथ परंपरा और उपचार के साथ रोकथाम को महत्व देता है। उन्होंने कहा कि ऐसा दृष्टिकोण समग्र और टिकाऊ स्वास्थ्य परिणामों में योगदान देता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026’ वैश्विक स्वास्थ्य सेवा वितरण में भारत की विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थिति को और मजबूत करेगा और सीमा पार स्थायी सहयोग को बढ़ावा देगा।

सत्र का समापन भारत की व्यापक स्वास्थ्य क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी के आधिकारिक उद्घाटन के साथ हुआ, जिसमें प्रमुख अस्पताल, डायग्नोस्टिक सेवाएँ, उन्नत चिकित्सा तकनीकें, फार्मास्युटिकल ताकत, वेलनेस सेंटर और सहायक स्वास्थ्य सेवाएँ शामिल थीं, जो भारत के स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र की व्यापकता और गहराई को दर्शाती हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, स्वास्थ्य उद्योग के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और अन्य हितधारक उपस्थित थे।

एडवांटेज हेल्थ केयर – इंडिया 2026 के बारे में

एडवांटेज हेल्थ केयर इंडिया 2026 का उद्देश्य रोगी गतिशीलता, ज्ञान आदान-प्रदान, कौशल विकास और संस्थागत साझेदारी को बढ़ावा देना है, साथ ही मेडिकल वैल्यू ट्रैवल में नियामक समन्वय और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है। यह मंच उच्च गुणवत्ता, तकनीक-संचालित और समग्र स्वास्थ्य समाधान प्रदान करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है और देश को एक मजबूत, समावेशी और भविष्य-तैयार वैश्विक स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करता है।

कृषित औषधीय पौधों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी करने हेतु एनबीए ने शुरू किया डिजिटल पोर्टल

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राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए), जो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है, ने औषधीय पौधों की खेती से जुड़े हितधारकों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (Certificate of Origin) के इलेक्ट्रॉनिक निर्गमन हेतु एक डिजिटल पोर्टल विकसित कर उसे क्रियान्वित कर दिया है। यह पोर्टल उन हितधारकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) से छूट के लिए आवेदन करना चाहते हैं।

यह पोर्टल एक सिंगल-विंडो, एंड-टू-एंड ऑनलाइन प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया से लेकर प्रमाण पत्र जारी करने तक की सभी सेवाएं डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई गई हैं। हितधारक इस पोर्टल को https://absefiling.nbaindia.in/ पर एक्सेस कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 को संसद द्वारा पारित किया गया था, जिसे लोकसभा ने 25 जुलाई 2023 और राज्यसभा ने 1 अगस्त 2023 को मंजूरी दी थी। इसके बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2024 और 2025 में जैव विविधता नियमों को अधिसूचित किया।

संशोधित अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने और आयुष क्षेत्र, बीज क्षेत्र तथा अनुसंधान संस्थानों सहित विभिन्न हितधारकों की प्रक्रियागत आवश्यकताओं को सरल बनाने के उद्देश्य से ये नियम बनाए गए हैं। संशोधित नियमों में अब कृषित औषधीय पौधों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन का इलेक्ट्रॉनिक रूप से सृजन एक निर्दिष्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जाने का प्रावधान किया गया है।

यह पहल न केवल पारदर्शिता और सुगमता को बढ़ावा देगी, बल्कि औषधीय पौधों से जुड़े व्यवसाय और अनुसंधान को भी नई गति प्रदान करेगी।

आयुष को सशक्त बनाने वाला बजट, समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम : प्रतापराव जाधव

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आयुष पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने वाले परिवर्तनकारी बजट घोषणाओं के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए, केंद्रीय आयुष एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)प्रतापराव जाधव ने इन घोषणाओं को भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया।

आयुष मंत्री ने बजट को “दूरदर्शी और भविष्य उन्मुख” बताते हुए कहा कि ये उपाय एक समग्र, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के लिए सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसमें आयुष एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रहा है।

अपने बजट भाषण में माननीय वित्त मंत्री ने आयुष क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन, वैश्विक नेतृत्व, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म तथा कुशल मानव संसाधन विकास को विस्तार देने हेतु कई ऐतिहासिक पहलों की घोषणा की। ये कदम पारंपरिक चिकित्सा को निवारक स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक विकास और वैश्विक वेलनेस नेतृत्व का प्रमुख चालक बनाने की भारत की आकांक्षा को सुदृढ़ करते हैं।

बजट का एक ऐतिहासिक पहलू तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा, उन्नत अनुसंधान और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा। मौजूदा राष्ट्रीय संस्थानों की सफलता के आधार पर, ये संस्थान शैक्षणिक मानकों को ऊंचा उठाने और साक्ष्य-आधारित एकीकृत चिकित्सा को सुदृढ़ करने में सहायक होंगे।

बजट में आयुष फार्मेसियों एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को उच्च प्रमाणन मानकों के अनुरूप उन्नत करने का भी प्रस्ताव है। इससे उत्पाद गुणवत्ता, उपभोक्ता विश्वास और निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और प्रसंस्करण एवं विनिर्माण से जुड़े एमएसएमई को समर्थन मिलेगा।

भारत के वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत करते हुए, जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को उन्नत किया जाएगा, जिससे अनुसंधान सहयोग, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और नीति संवाद को गहराई मिलेगी। इससे भारत पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, प्रस्तावित पाँच क्षेत्रीय मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म हब में आयुष केंद्रों को शामिल किया जाएगा। ये केंद्र उन्नत चिकित्सा उपचार के साथ पारंपरिक उपचार, वेलनेस सेवाओं और पुनर्वास सहायता को जोड़ते हुए एकीकृत स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में विकसित होंगे। इससे आयुष चिकित्सकों, थैरेपिस्टों, योग प्रशिक्षकों और संबद्ध पेशेवरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

इसके अतिरिक्त, एनएसक्यूएफ से संरेखित केयरगिवर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में योग और वेलनेस कौशल को शामिल किया गया है, जिसके तहत आगामी वर्ष में 1.5 लाख केयरगिवरों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे आयुष से जुड़े कौशल केयर इकॉनमी में मुख्यधारा में आएंगे और निवारक तथा जेरियाट्रिक देखभाल सेवाएं सशक्त होंगी।

प्रतापराव जाधव ने कहा कि पिछले एक दशक में माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आयुष क्षेत्र ने अभूतपूर्व संस्थागत विस्तार, वैश्विक मान्यता, डिजिटल विस्तार और अनुसंधान प्रगति देखी है। उन्होंने कहा, “यह बजट उसी मजबूत आधार पर आगे बढ़ते हुए विस्तार से समेकन, गुणवत्ता संवर्धन और वैश्विक एकीकरण की ओर ले जाता है। यह एक निर्णायक क्षण है, जहां पारंपरिक चिकित्सा को पूरक नहीं, बल्कि भारत के स्वास्थ्य भविष्य का अभिन्न अंग माना जा रहा है।”

आर्थिक प्रभाव पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि ये घोषणाएं स्वास्थ्य नीति को ग्रामीण आजीविका, निर्यात वृद्धि, युवा रोजगार और उद्यमिता से जोड़ती हैं, जिससे भारत के साक्ष्य-आधारित समग्र स्वास्थ्य देखभाल के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने को बल मिलता है।

उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री और माननीय वित्त मंत्री के प्रति उनके निरंतर समर्थन और दूरदर्शी दृष्टिकोण के लिए पुनः आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से सम्मानित भारत के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को संस्थागत स्वरूप देने की दिशा में निर्णायक कदम है।


मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम: केंद्रीय बजट में ऐतिहासिक घोषणाएँ

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट प्रस्तुत करते हुए भारत को मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म (MVT) का वैश्विक केंद्र बनाने और आयुष (AYUSH) प्रणाली को सशक्त करने के लिए कई दूरदर्शी और परिवर्तनकारी कदमों की घोषणा की। इन पहलों का उद्देश्य गुणवत्ता, अनुसंधान, रोजगार सृजन और वैश्विक पहुँच को बढ़ावा देना है।

मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म के लिए पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब

भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा पर्यटन की पसंदीदा मंज़िल बनाने के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी से पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। ये हब एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों के रूप में विकसित किए जाएंगे, जहाँ चिकित्सा सेवाएँ, शिक्षा और अनुसंधान सुविधाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।

इन मेडिकल हब्स में आयुष केंद्र, मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म सुविधा केंद्र, उन्नत डायग्नोस्टिक सेवाएँ, उपचार के बाद देखभाल और पुनर्वास सुविधाएँ शामिल होंगी। इससे देश-विदेश से आने वाले मरीजों को बेहतर अनुभव मिलेगा और डॉक्टरों व एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स सहित स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

आयुष को वैश्विक गति

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में वैश्विक नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा योग को संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तुत किए जाने के बाद उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली, वहीं कोविड-19 के बाद आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर नई स्वीकार्यता मिली है। आयुष उत्पादों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग से औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों और मूल्य संवर्धन से जुड़े युवाओं को भी लाभ हो रहा है।

आयुष क्षेत्र के लिए बजट की प्रमुख घोषणाएँ

आयुष को और मज़बूत करने तथा वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए बजट में निम्नलिखित महत्वपूर्ण पहलें प्रस्तावित की गई हैं:

  • तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना, जिससे शिक्षा, उपचार और अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।

  • आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन, ताकि गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन और कुशल मानव संसाधन को सुनिश्चित किया जा सके।

  • डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर, जामनगर का उन्नयन, जिससे साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, प्रशिक्षण और वैश्विक जागरूकता को बल मिलेगा।

इन पहलों के माध्यम से सरकार पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ते हुए भारत की सॉफ्ट पावर को सशक्त कर रही है और देश को समग्र एवं विश्वसनीय वैश्विक स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में स्थापित करने के अपने संकल्प को दोहरा रही है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सिद्धा चिकित्सा पद्धति को समकालीन विश्व में एक समग्र, निवारक एवं सतत स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के रूप में इसकी प्रासंगिकता पर बल दिया। नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों की विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सिद्धा की सुदृढ़ दार्शनिक नींव, वैज्ञानिक गहराई तथा शरीर, मन और प्रकृति के समन्वित दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिद्धा, आयुर्वेद, योग सहित भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि जीवंत परंपराएँ हैं जो आज भी भारत और विश्वभर में करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धा चिकित्सा देश की सबसे प्राचीन और गहन चिकित्सा परंपराओं में से एक है, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों में संचित ज्ञान में निहित हैं, और जो शरीर, मन एवं प्रकृति के बीच सामंजस्य को बढ़ावा देती है।

प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियों, शास्त्रीय ग्रंथों एवं औषधीय वनस्पतियों पर आधारित प्रदर्शनी और प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण और पुनः अन्वेषण में लगे विद्वानों एवं संस्थानों के असाधारण प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक उपेक्षा और अपर्याप्त दस्तावेजीकरण के कारण अनेक अमूल्य ग्रंथों के क्षरण या लुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया था, और भावी पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान को सुरक्षित रखने हेतु व्यवस्थित संग्रह, संरक्षण एवं अनुसंधान की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने सिद्धा चिकित्सा में निवारक देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों के मूल कारणों पर उपचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि तनाव और अस्वास्थ्यकर आदतों से परिपूर्ण आज की तेज़-रफ्तार जीवनशैली में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आधुनिक चिकित्सा द्वारा निदान के क्षेत्र में हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धा जैसी पारंपरिक प्रणालियाँ दीर्घकालिक उपचार और संतुलन की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, और चिकित्सकों से जिम्मेदार एवं साक्ष्य-आधारित अभ्यास के माध्यम से जनविश्वास सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सिद्धा चिकित्सा में सतत अनुसंधान से भविष्य में बड़े वैज्ञानिक नवाचार संभव हैं, जिनमें वर्तमान में असाध्य माने जाने वाले रोगों के स्थायी उपचार भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को निर्बाध अध्ययन के लिए समुचित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया तथा आशा व्यक्त की कि आने वाली पीढ़ियाँ भारत की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक पहचान दिलाएंगी।

उद्घाटन समारोह में आयुष मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव; तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्रीमा. सुब्रमणियन; आयुष मंत्रालय एवं तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा सिद्धा संस्थानों के प्रमुख उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि सिद्धा चिकित्सा स्वास्थ्य, प्रकृति और चेतना की उन्नत समझ को समाहित करती है, जिससे यह आधुनिक समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए अत्यंत प्रासंगिक बनती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, विशेषकर 2014 में आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद, भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों ने अभूतपूर्व प्रगति की है।

मंत्री ने सिद्धा शिक्षा एवं अनुसंधान में प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय सिद्धा संस्थान में अवसंरचना विस्तार, कौशल-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा केंद्रीय सिद्धा अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए सशक्त अनुसंधान कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की ICD-11 में सिद्धा रुग्णता कोड्स का समावेश तथा आगामी डब्ल्यूएचओ अंतरराष्ट्रीय मानक शब्दावलियाँ सिद्धा को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर सुदृढ़ रूप से स्थापित करेंगी।

वैश्विक पहुंच पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व वाली पहलों और अकादमिक आदान-प्रदान का उल्लेख किया, जिनसे सिद्धा की वैश्विक उपस्थिति सशक्त हुई है। उन्होंने सिद्धा को साक्ष्य-आधारित, वैश्विक रूप से मान्य और सभी के लिए सुलभ बनाने के साथ-साथ इसकी शास्त्रीय शुद्धता को बनाए रखने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर सिद्धा चिकित्सा पद्धति में असाधारण एवं सराहनीय योगदान देने वाले पाँच विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित विभूतियों में डॉ. बी. माइकल जेयराज, डॉ. टी. कन्नन राजाराम, स्वर्गीय डॉ. आई. सोरनामारियम्मल, डॉ. मोहन राज तथा प्रो. डॉ. वी. बनुमति शामिल हैं, जिनकी आजीवन सेवा, अनुसंधान, पांडुलिपि संरक्षण, शिक्षा एवं नेतृत्व ने सिद्धा चिकित्सा को जमीनी, अकादमिक और राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया है।

“वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्धा” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से सिद्धा चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी एकत्र हुए। यह आयोजन अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से सिद्धा चिकित्सा को प्रोत्साहित करने तथा इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों का अभिन्न अंग बनाने के प्रति आयुष मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है।


WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन: आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने WHO महानिदेशक से की मुलाकात, पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक सहयोग को मिला नया आयाम

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केंद्रीय आयुष मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने वैश्विक स्तर पर पारंपरिक, पूरक एवं एकीकृत चिकित्सा (Traditional, Complementary and Integrative Medicine – TCIM) को आगे बढ़ाने में WHO के नेतृत्व के लिए भारत की ओर से आभार व्यक्त किया। यह भेंट WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन हुई। सम्मेलन का समापन 19 दिसंबर 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन विज्ञान, अनुसंधान में निवेश, नवाचार, सुरक्षा, विनियमन और स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उच्चस्तरीय विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन का केंद्रीय विषय “संतुलन की पुनर्स्थापना: स्वास्थ्य एवं कल्याण का विज्ञान और व्यवहार” रहा, जो हाल ही में स्वीकृत WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025–2034 के अनुरूप है। इस रणनीति का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा को एक न्यायसंगत, सुदृढ़ और जन-केंद्रित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाना है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने नेपाल, श्रीलंका, माइक्रोनेशिया, मॉरीशस और फिजी के प्रतिनिधिमंडलों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं, जबकि आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने अन्य देशों के साथ संवाद किया। कुल मिलाकर, आयुष मंत्रालय ने ब्राज़ील, मलेशिया, नेपाल, श्रीलंका, माइक्रोनेशिया, मॉरीशस, फिजी, केन्या, संयुक्त अरब अमीरात, मैक्सिको, वियतनाम, भूटान, सूरीनाम, थाईलैंड, घाना और क्यूबा सहित 16 देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें आयोजित कीं। इन बैठकों का उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना रहा।

शिखर सम्मेलन के इतर, भारत और क्यूबा के बीच अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) से संबंधित संस्थागत समझौता ज्ञापन (MoU) का विस्तार किया गया। इसके अंतर्गत पाठ्यक्रम विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य में एकीकरण, पंचकर्म प्रशिक्षण तथा आयुर्वेद में नियामक सामंजस्य को बढ़ावा देने हेतु संयुक्त कार्य समूह के गठन पर सहमति बनी।

दूसरे दिन आयोजित पूर्ण सत्रों में ऑस्ट्रेलिया, मोरक्को, ईरान, युगांडा, कनाडा, स्विट्ज़रलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, कोलंबिया, ब्राज़ील, भारत, न्यूज़ीलैंड, जर्मनी, नेपाल, कोरिया गणराज्य और श्रीलंका के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए।

पूर्ण सत्र–2 का विषय “पारंपरिक चिकित्सा की प्रगति के लिए विज्ञान में निवेश” रहा, जिसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, सतत निवेश, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया।

इसके अतिरिक्त विभिन्न समांतर सत्रों में अनुसंधान रोडमैप को वैश्विक कार्रवाई में बदलने, अनुसंधान पद्धतियों, मानसिक स्वास्थ्य, कैंसर देखभाल, ध्यान एवं योग, निवेश और नवाचार, तथा पारंपरिक चिकित्सा के सुरक्षित एवं प्रभावी एकीकरण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

पूर्ण सत्र–3 में “संतुलन, सुरक्षा और लचीलापन के लिए स्वास्थ्य प्रणालियों की पुनर्कल्पना” पर जोर दिया गया। इसमें पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित रूप से एकीकृत करने, रोगी सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और नियामक सामंजस्य जैसे पहलुओं पर प्रकाश डाला गया।

शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन के विचार-विमर्श ने यह स्पष्ट किया कि विज्ञान-आधारित प्रमाण, मजबूत शासन व्यवस्था, रोगी सुरक्षा और समान अवसर सुनिश्चित करते हुए पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों में शामिल करना समय की आवश्यकता है। यह सम्मेलन पारंपरिक चिकित्सा को लचीली स्वास्थ्य प्रणालियों, जैव-विविधता संरक्षण और समावेशी विकास का महत्वपूर्ण आधार मानते हुए अंतिम दिन की नीतिगत चर्चाओं और वैश्विक प्रतिबद्धताओं के लिए मजबूत नींव तैयार करता है।


द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में आयुष एक्सपो होगा प्रमुख आकर्षण, भारत मंडपम में 17–19 दिसंबर को आयोजन

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भारत सरकार का आयुष मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (Global Traditional Medicine Summit) के अंतर्गत आयुष एक्सपो का आयोजन करेगा। यह शिखर सम्मेलन 17 से 19 दिसंबर 2024 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

आयुष एक्सपो इस शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख और केंद्रीय मंच होगा, जिसमें भारत की आयुष प्रणालियों के साथ-साथ दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को एक साथ प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक संवाद, नीति विमर्श और नवाचार को बढ़ावा देना है, ताकि पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित, समावेशी और प्रमाण-आधारित तरीके से एकीकृत किया जा सके।

आयुष की समग्र और वैज्ञानिक प्रस्तुति

आयुष एक्सपो में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी का व्यापक और क्यूरेटेड प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदर्शनी में इमर्सिव अनुभव, वैज्ञानिक व्याख्याएं और डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत किया जाएगा, जो आधुनिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं से जुड़ा होगा।

प्रो. (डॉ.) तनुजा मनोज नेसरी, निदेशक, आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (ITRA) ने कहा कि यह एक्सपो भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैज्ञानिक आधार और वैश्विक प्रासंगिकता के साथ प्रस्तुत करने के लिए डिजाइन किया गया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय ज्ञान, प्रमाण-आधारित अभ्यास और उभरती तकनीकों को एक मंच पर लाकर यह एक्सपो शोध सहयोग को मजबूत करेगा और पारंपरिक चिकित्सा के जिम्मेदार एकीकरण को बढ़ावा देगा।

प्रमुख आकर्षण

आयुष एक्सपो के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं:

  • औषधीय पौधे एवं बीज मंडप, जिसमें लगभग 40 जीवित औषधीय पौधों और दुर्लभ बीजों का प्रदर्शन किया जाएगा, जो भारत की वनस्पति विरासत और पारंपरिक चिकित्सा की पारिस्थितिक नींव को दर्शाएगा।

  • स्पाइसेज़ ऑफ इंडिया पवेलियन, जिसमें आमतौर पर उपयोग होने वाले मसालों के वैज्ञानिक गुणों और निवारक स्वास्थ्य में उनकी भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा।

  • मेटालोथेरेप्यूटिक्स ज़ोन, जहां शोधन प्रक्रियाओं, भस्म निर्माण और सुरक्षा मानकों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी।

  • दिनचर्या, ऋतुचर्या और पंचकर्म से जुड़े अनुभाग, जो निवारक स्वास्थ्य देखभाल और उपचारात्मक पद्धतियों को पारंपरिक उपकरणों और व्याख्यात्मक प्रारूपों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।

  • पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL), जिसे जैव-चोरी रोकने और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त पहल के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

परंपरा और तकनीक का संगम

एक्सपो में आयुष नेक्स्टजेन स्टार्ट-अप्स पवेलियन भी होगा, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रेडिक्टिव डायग्नोस्टिक्स, वेलनेस डिवाइसेज़ और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म्स से जुड़े नवाचार प्रदर्शित किए जाएंगे। इसके साथ ही, होलोग्राफिक डिस्प्ले, वर्चुअल रियलिटी आधारित योग और पंचकर्म अनुभव तथा आयुष ग्रिड का प्रदर्शन किया जाएगा, जो शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत की डिजिटल संरचना को दर्शाता है।

आगंतुक सहभागिता और वैश्विक सहभाग

आगंतुकों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण (स्वास्थ्य परीक्षा), प्रकृति परीक्षण, ध्यान एवं योग सत्र, पोषण आधारित प्रदर्शन और बच्चों के लिए वेलनेस लर्निंग ज़ोन जैसी सहभागितापूर्ण गतिविधियां भी होंगी।

इसके अतिरिक्त, एक्सपो में एक विशेष WHO ज़ोन भी होगा, जहां WHO सदस्य देशों की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, सामुदायिक स्वास्थ्य मॉडल और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को प्रदर्शित किया जाएगा। ये वैश्विक प्रदर्शन स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र, सामाजिक नवाचार और प्रकृति-आधारित स्वास्थ्य समाधानों पर केंद्रित होंगे।

वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा लाइब्रेरी का शुभारंभ

आयुष एक्सपो का एक प्रमुख आकर्षण WHO द्वारा वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा लाइब्रेरी (GTML) का शुभारंभ होगा। यह डिजिटल रिपॉजिटरी दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा से संबंधित ज्ञान, डेटा और शोध साक्ष्यों को एक मंच पर लाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रमाण-आधारित नीति निर्माण और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की वैश्विक पहचान को बढ़ावा मिलेगा।

वैश्विक स्वास्थ्य में भारत की भूमिका

अधिकारियों के अनुसार, आयुष एक्सपो अपनी वैश्विक रूपरेखा, वैज्ञानिक क्यूरेशन, उन्नत डिजिटल तकनीकों और नवाचार व जवाबदेही पर जोर के कारण विशिष्ट है। यह प्रदर्शनी दर्शाएगी कि कैसे पारंपरिक ज्ञान, जब प्रमाण, नैतिकता और जिम्मेदार शासन से समर्थित हो, तो आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आयुष मंत्रालय ने द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के अंतर्गत आयुष एक्सपो में भाग लेने के लिए प्रतिनिधियों, वैश्विक भागीदारों और मीडिया को आमंत्रित किया है, जिससे भारत और WHO की साझेदारी में पारंपरिक चिकित्सा को समान, सतत और जन-केंद्रित वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों का हिस्सा बनाने की प्रतिबद्धता को और सशक्त किया जा सके।

भारत में 2वें WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन: स्वास्थ्य, विज्ञान और कल्याण के लिए वैश्विक नेतृत्व

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भारत 2वें WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन (17–19 दिसंबर, 2025) की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन का विषय है, “लोगों और ग्रह के लिए संतुलन की बहाली: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास।” इस अवसर पर WHO पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक पुस्तकालय (TMGL) का भी शुभारंभ करेगा, जो पारंपरिक, पूरक और समग्र चिकित्सा का सबसे बड़ा डिजिटल भंडार है।

भारत में आयुष प्रणाली (आयुर्वेद, योग, सिद्ध और यूनानी) की व्यापक पहुँच है, जिसमें 3,844 अस्पताल, 36,848 डिस्पेंसरी, 886 स्नातक और 251 परास्नातक कॉलेज तथा 7.5 लाख से अधिक पंजीकृत चिकित्सक हैं। आयुष मंत्रालय पारंपरिक चिकित्सा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में एकीकृत करने, वैज्ञानिक मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुसंधान को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करता है।

सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा के सुरक्षित, गुणवत्ता-प्रधान और समान रूप से सुलभ अभ्यास को बढ़ावा देना है। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम मंत्रिस्तरीय संवाद, तकनीकी सत्र और नवाचार प्रदर्शनियों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा के वैज्ञानिक, नीतिगत और व्यावहारिक पहलुओं पर केंद्रित रहेगा।

मुख्य पहल:

  • पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैज्ञानिक और प्रमाण आधारित शोध को बढ़ावा देना।

  • आयुष सेवाओं का राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली में एकीकरण।

  • डिजिटल नवाचार और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षित दस्तावेजीकरण।

  • पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक मानक और नीति निर्माण।

महत्व:

भारत पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक मंच पर नेतृत्व कर रहा है और आयुष प्रणाली के माध्यम से मानव कल्याण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व स्तर पर योगदान दे रहा है।

आयुष मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की दूसरी बैठक, औषधीय पौधों की खेती और किसान सशक्तिकरण पर जोर

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आयुष मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की दूसरी बैठक 15.12.2025 को नई दिल्ली में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में लोकसभा एवं राज्यसभा के विभिन्न राजनीतिक दलों के माननीय सांसदों ने भाग लिया, जिनमें सदानंद म्हालू शेट तनवाडे, अष्टिकार पाटिल नागेश बापुराव और निलेश डी. लंके शामिल थे।

केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने औषधीय पौधों की खेती की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए कहा कि यह किसानों के सशक्तिकरण, आयुष क्षेत्र को मजबूत करने तथा जैव विविधता के संरक्षण में अहम योगदान देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में एकीकृत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, जिसका उद्देश्य स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना और एक सतत स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण करना है।

मंत्री ने रेखांकित किया कि मजबूत पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की नींव उच्च गुणवत्ता वाली औषधियों की उपलब्धता पर आधारित है, जो औषधीय पौधों से प्राप्त गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की सतत आपूर्ति पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि स्रोत पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने से बेहतर और शीघ्र स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त होते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) की पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले 25 वर्षों से NMPB देशभर में “औषधीय पौधों का संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन” केंद्रीय क्षेत्र योजना का क्रियान्वयन कर रहा है। किसानों में जागरूकता और क्षमता निर्माण के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) गतिविधियों पर विशेष जोर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2020–21 से 2024–25 के दौरान किसानों के प्रशिक्षण और जागरूकता के लिए 139 परियोजनाओं के माध्यम से लगभग ₹1161.96 लाख की स्वीकृति दी गई, तथा देशभर में 7 क्षेत्रीय-सह-सुविधा केंद्र तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “ई-चरक” डिजिटल प्लेटफॉर्म ने किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़कर बाजार संपर्क को सशक्त बनाया है। मंत्री ने दोहराया कि औषधीय पौधों की खेती किसानों के सशक्तिकरण, आयुष मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और जैव विविधता संरक्षण का प्रमुख साधन है। साथ ही उन्होंने मोटे अनाज (श्री अन्न) की वैश्विक बढ़ती मांग का भी उल्लेख किया, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष घोषित किए जाने से बढ़ावा मिला, जिससे खेती और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।

मंत्री ने किसानों के सशक्तिकरण में कृषि विद्यापीठों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने सुझाव दिया कि इन संस्थानों को किसानों के बीच औषधीय पौधों की खेती और उपयोग को बढ़ावा देने तथा जागरूकता फैलाने के लिए जोड़ा जा सकता है, जिससे आजीविका के अवसर बढ़ें और ग्रामीण आय में वृद्धि हो।

अंत में मंत्री ने सदस्यों की सक्रिय भागीदारी और सार्थक सुझावों के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके सुझाव देशभर में आयुष प्रणालियों को सुदृढ़ करने और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर भारत के नेतृत्व को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे।


आयुष मंत्रालय ने WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन 2025 का कर्टेन रेज़र किया; 100+ देशों की भागीदारी, भारत फिर बनेगा वैश्विक केंद्र

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आयुष मंत्रालय ने आज नई दिल्ली स्थित नेशनल मीडिया सेंटर में द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन (17–19 दिसंबर 2025, भारत मंडपम) के लिए कर्टेन रेज़र प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।

जनस्वास्थ्य में पारंपरिक चिकित्सा की वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ करेगा समिट: आयुष मंत्री

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने गर्व व्यक्त किया कि भारत 2023 में गुजरात में पहली सफल मेजबानी के बाद एक बार फिर इस वैश्विक समिट की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह समिट पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की दृष्टि "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः" को साकार करता है।

इस वर्ष समिट की थीम है—

“Restoring Balance: The Science and Practice of Health and Well-being”

इसमें 100 से अधिक देशों के मंत्री, नीति-निर्माता, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि व पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ भाग लेंगे।

Ashwagandha पर विशेष कार्यक्रम

मंत्री ने बताया कि आयुष मंत्रालय अश्वगंधा पर एक विशेष साइड इवेंट आयोजित करेगा, जिसमें इसके पारंपरिक व आधुनिक उपयोगों, वैज्ञानिक प्रमाणों और वैश्विक प्रभाव पर चर्चा होगी।

भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व भूमिका

जाधव ने कहा कि आयुर्वेद, योग–नौचिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी विश्वभर में भरोसेमंद स्वास्थ्य समाधान के रूप में उभर रहे हैं।
जामनगर, गुजरात में WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की स्थापना इसका प्रमाण है।

WHO की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पूनम खेतरपाल ने कहा—समिट बनेगा वैश्विक रोडमैप

WHO की वरिष्ठ सलाहकार और SEARO की पूर्व क्षेत्रीय निदेशक, डॉ. पूनम खेतरपाल ने कहा कि यह समिट पारंपरिक, पूरक व स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र में वैज्ञानिक व संतुलित रूप से जोड़ने के लिए 10-वर्षीय वैश्विक रोडमैप तय करेगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया में अरबों लोग आज भी पारंपरिक चिकित्सा पर निर्भर हैं, इसलिए शोध, नवाचार और नियमन को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

Ashwagandha पर 3-दिवसीय विशेषज्ञ सत्र

17–19 दिसंबर के दौरान आयोजित
“Ashwagandha: From Traditional Wisdom to Global Impact”
सत्र में वैश्विक विशेषज्ञ इसके तनाव-निरोधी, न्यूरो-प्रोटेक्टिव, और इम्यूनो-मॉड्यूलेटरी गुणों पर चर्चा करेंगे।

PM करेंगे समिट के समापन कार्यक्रम में शिरकत

मंत्री ने बताया कि इस ऐतिहासिक समिट के समापन सत्र में भारत के प्रधानमंत्री भी उपस्थित रहेंगे।

उच्च स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिव (आयुष) वैद्य राजेश कोटेचा, PIB के प्रमुख महानिदेशक धीरेंद्र ओझा, तथा आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भारत ने समिट की आधिकारिक काउंटडाउन की शुरुआत की

आज का कर्टेन रेज़र कार्यक्रम 9–10 नवंबर 2025 को आयोजित राजनयिक स्वागत समारोह के बाद आयोजित किया गया, जिसमें WHO–India सहयोग और समिट के वैश्विक महत्व पर चर्चा हुई थी।

कर्टेन रेज़र के साथ ही भारत ने द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन की उल्टी गिनती शुरू कर दी है, और वैश्विक स्तर पर समग्र, समावेशी एवं सतत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को पुनः सुदृढ़ किया है।


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