Media24Media.com: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सिद्धा चिकित्सा पद्धति को समकालीन विश्व में एक समग्र, निवारक एवं सतत स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के रूप में इसकी प्रासंगिकता पर बल दिया। नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों की विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सिद्धा की सुदृढ़ दार्शनिक नींव, वैज्ञानिक गहराई तथा शरीर, मन और प्रकृति के समन्वित दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिद्धा, आयुर्वेद, योग सहित भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि जीवंत परंपराएँ हैं जो आज भी भारत और विश्वभर में करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धा चिकित्सा देश की सबसे प्राचीन और गहन चिकित्सा परंपराओं में से एक है, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों में संचित ज्ञान में निहित हैं, और जो शरीर, मन एवं प्रकृति के बीच सामंजस्य को बढ़ावा देती है।

प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियों, शास्त्रीय ग्रंथों एवं औषधीय वनस्पतियों पर आधारित प्रदर्शनी और प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण और पुनः अन्वेषण में लगे विद्वानों एवं संस्थानों के असाधारण प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक उपेक्षा और अपर्याप्त दस्तावेजीकरण के कारण अनेक अमूल्य ग्रंथों के क्षरण या लुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया था, और भावी पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान को सुरक्षित रखने हेतु व्यवस्थित संग्रह, संरक्षण एवं अनुसंधान की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने सिद्धा चिकित्सा में निवारक देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों के मूल कारणों पर उपचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि तनाव और अस्वास्थ्यकर आदतों से परिपूर्ण आज की तेज़-रफ्तार जीवनशैली में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आधुनिक चिकित्सा द्वारा निदान के क्षेत्र में हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धा जैसी पारंपरिक प्रणालियाँ दीर्घकालिक उपचार और संतुलन की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, और चिकित्सकों से जिम्मेदार एवं साक्ष्य-आधारित अभ्यास के माध्यम से जनविश्वास सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सिद्धा चिकित्सा में सतत अनुसंधान से भविष्य में बड़े वैज्ञानिक नवाचार संभव हैं, जिनमें वर्तमान में असाध्य माने जाने वाले रोगों के स्थायी उपचार भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को निर्बाध अध्ययन के लिए समुचित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया तथा आशा व्यक्त की कि आने वाली पीढ़ियाँ भारत की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक पहचान दिलाएंगी।

उद्घाटन समारोह में आयुष मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव; तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्रीमा. सुब्रमणियन; आयुष मंत्रालय एवं तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा सिद्धा संस्थानों के प्रमुख उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि सिद्धा चिकित्सा स्वास्थ्य, प्रकृति और चेतना की उन्नत समझ को समाहित करती है, जिससे यह आधुनिक समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए अत्यंत प्रासंगिक बनती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, विशेषकर 2014 में आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद, भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों ने अभूतपूर्व प्रगति की है।

मंत्री ने सिद्धा शिक्षा एवं अनुसंधान में प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय सिद्धा संस्थान में अवसंरचना विस्तार, कौशल-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा केंद्रीय सिद्धा अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए सशक्त अनुसंधान कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की ICD-11 में सिद्धा रुग्णता कोड्स का समावेश तथा आगामी डब्ल्यूएचओ अंतरराष्ट्रीय मानक शब्दावलियाँ सिद्धा को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर सुदृढ़ रूप से स्थापित करेंगी।

वैश्विक पहुंच पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व वाली पहलों और अकादमिक आदान-प्रदान का उल्लेख किया, जिनसे सिद्धा की वैश्विक उपस्थिति सशक्त हुई है। उन्होंने सिद्धा को साक्ष्य-आधारित, वैश्विक रूप से मान्य और सभी के लिए सुलभ बनाने के साथ-साथ इसकी शास्त्रीय शुद्धता को बनाए रखने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर सिद्धा चिकित्सा पद्धति में असाधारण एवं सराहनीय योगदान देने वाले पाँच विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित विभूतियों में डॉ. बी. माइकल जेयराज, डॉ. टी. कन्नन राजाराम, स्वर्गीय डॉ. आई. सोरनामारियम्मल, डॉ. मोहन राज तथा प्रो. डॉ. वी. बनुमति शामिल हैं, जिनकी आजीवन सेवा, अनुसंधान, पांडुलिपि संरक्षण, शिक्षा एवं नेतृत्व ने सिद्धा चिकित्सा को जमीनी, अकादमिक और राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया है।

“वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्धा” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से सिद्धा चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी एकत्र हुए। यह आयोजन अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से सिद्धा चिकित्सा को प्रोत्साहित करने तथा इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों का अभिन्न अंग बनाने के प्रति आयुष मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है।


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