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डीआरआई ने सोना तस्करी और विदेशी मुद्रा तस्करी के बड़े रैकेट का किया भंडाफोड़

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राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने सीमा पार से होने वाली सोने की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए दिल्ली स्थित एक बड़े सोना तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया। यह गिरोह पूर्वोत्तर भारत से अलग-अलग ट्रेनों के माध्यम से कई वाहकों (कैरियर्स) का उपयोग कर विदेशी मूल का सोना दिल्ली पहुंचाता था। पकड़े जाने के जोखिम को कम करने के लिए तस्करों को अलग-अलग समय पर भेजा जाता था। गिरोह दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्र में अवैध रूप से सोना गलाने (मेल्टिंग) की इकाई भी संचालित कर रहा था।

प्रमुख घटनाक्रम

  • 26 जून 2026 को डीआरआई अधिकारियों ने एक समन्वित अभियान में न्यू कूचबिहार रेलवे स्टेशन (पश्चिम बंगाल) और मानसी जंक्शन (बिहार) पर दो वाहकों को पकड़ा।

  • इनके पास से शरीर पर छिपाकर रखा गया लगभग 2 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया।

  • इसी दौरान दिल्ली में भी दो अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार कर उनके पास से लगभग 1.2 किलोग्राम तस्करी का सोना बरामद किया गया।

  • जांच के दौरान दिल्ली में संचालित एक अवैध सोना गलाने की इकाई का भी पता चला।

  • इस कार्रवाई में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

महिला तस्कर से 3.3 किलोग्राम सोना बरामद

  • उसी दिन एक अन्य अभियान में सैरांग से कोलकाता जा रही एक महिला यात्री को ट्रेन में पकड़ा गया।

  • उसके विशेष रूप से तैयार किए गए कमर बेल्ट में छिपाकर रखी गई विदेशी भाषा के चिन्हों वाली 20 सोने की ईंटें, जिनका कुल वजन लगभग 3.3 किलोग्राम था, बरामद की गईं।

  • महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

चेन्नई में विदेशी मुद्रा तस्करी का खुलासा

  • डीआरआई ने चेन्नई एयर कार्गो में घरेलू हवाई कार्गो के माध्यम से विदेशी मुद्रा की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भी पर्दाफाश किया।

  • अधिकारियों ने 7,58,500 अमेरिकी डॉलर (USD) और 35,00,000 थाई बहत (Thai Baht) बरामद किए, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹8.15 करोड़ है।

  • इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • जांच में पता चला कि इस विदेशी मुद्रा को भारत से अवैध रूप से बाहर भेजकर उससे सोना और चांदी की तस्करी के लिए वित्तपोषण किया जाता था।

बेंगलुरु में आगे की कार्रवाई

  • जांच के आधार पर दुबई से लौट रहे एक व्यक्ति को बेंगलुरु हवाई अड्डे पर पकड़ा गया।

  • उसके पास से 1.8 किलोग्राम सोना बरामद हुआ।

  • उसके घर की तलाशी में लगभग 42 किलोग्राम चांदी, 700 ग्राम सोने के आभूषण तथा ₹26.67 लाख भारतीय मुद्रा जब्त की गई।

  • जांच से यह स्पष्ट हुआ कि भारत में अवैध रूप से जुटाई गई विदेशी मुद्रा को विदेश भेजकर उसी धन से सोना और चांदी की संगठित तस्करी की जा रही थी।

कुल बरामदगी

डीआरआई की इन संयुक्त कार्रवाइयों में:

  • लगभग 9 किलोग्राम विदेशी मूल का तस्करी का सोना,

  • 42 किलोग्राम चांदी,

  • ₹8.15 करोड़ मूल्य की विदेशी मुद्रा,

  • ₹26.67 लाख भारतीय नकदी जब्त की गई।

इन मामलों में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज चेन्नई के कलैवनार अरंगम में 9वें सिद्धा दिवस समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सिद्धा चिकित्सा पद्धति को समकालीन विश्व में एक समग्र, निवारक एवं सतत स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के रूप में इसकी प्रासंगिकता पर बल दिया। नीति-निर्माताओं, चिकित्सकों, शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों की विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सिद्धा की सुदृढ़ दार्शनिक नींव, वैज्ञानिक गहराई तथा शरीर, मन और प्रकृति के समन्वित दृष्टिकोण को रेखांकित किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिद्धा, आयुर्वेद, योग सहित भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि जीवंत परंपराएँ हैं जो आज भी भारत और विश्वभर में करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धा चिकित्सा देश की सबसे प्राचीन और गहन चिकित्सा परंपराओं में से एक है, जिसकी जड़ें हजारों वर्षों में संचित ज्ञान में निहित हैं, और जो शरीर, मन एवं प्रकृति के बीच सामंजस्य को बढ़ावा देती है।

प्राचीन ताड़पत्र पांडुलिपियों, शास्त्रीय ग्रंथों एवं औषधीय वनस्पतियों पर आधारित प्रदर्शनी और प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण और पुनः अन्वेषण में लगे विद्वानों एवं संस्थानों के असाधारण प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक उपेक्षा और अपर्याप्त दस्तावेजीकरण के कारण अनेक अमूल्य ग्रंथों के क्षरण या लुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया था, और भावी पीढ़ियों के लिए इस ज्ञान को सुरक्षित रखने हेतु व्यवस्थित संग्रह, संरक्षण एवं अनुसंधान की निरंतर आवश्यकता पर बल दिया।

उपराष्ट्रपति ने सिद्धा चिकित्सा में निवारक देखभाल, जीवनशैली प्रबंधन और रोगों के मूल कारणों पर उपचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि तनाव और अस्वास्थ्यकर आदतों से परिपूर्ण आज की तेज़-रफ्तार जीवनशैली में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आधुनिक चिकित्सा द्वारा निदान के क्षेत्र में हुई प्रगति को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धा जैसी पारंपरिक प्रणालियाँ दीर्घकालिक उपचार और संतुलन की पुनर्स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, और चिकित्सकों से जिम्मेदार एवं साक्ष्य-आधारित अभ्यास के माध्यम से जनविश्वास सुदृढ़ करने का आह्वान किया।

युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सिद्धा चिकित्सा में सतत अनुसंधान से भविष्य में बड़े वैज्ञानिक नवाचार संभव हैं, जिनमें वर्तमान में असाध्य माने जाने वाले रोगों के स्थायी उपचार भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने अनुसंधानकर्ताओं को निर्बाध अध्ययन के लिए समुचित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया तथा आशा व्यक्त की कि आने वाली पीढ़ियाँ भारत की पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्रणालियों को वैश्विक पहचान दिलाएंगी।

उद्घाटन समारोह में आयुष मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव; तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्रीमा. सुब्रमणियन; आयुष मंत्रालय एवं तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा सिद्धा संस्थानों के प्रमुख उपस्थित थे।

सभा को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि सिद्धा चिकित्सा स्वास्थ्य, प्रकृति और चेतना की उन्नत समझ को समाहित करती है, जिससे यह आधुनिक समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए अत्यंत प्रासंगिक बनती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, विशेषकर 2014 में आयुष मंत्रालय की स्थापना के बाद, भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों ने अभूतपूर्व प्रगति की है।

मंत्री ने सिद्धा शिक्षा एवं अनुसंधान में प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उल्लेख किया, जिनमें राष्ट्रीय सिद्धा संस्थान में अवसंरचना विस्तार, कौशल-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा केंद्रीय सिद्धा अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए सशक्त अनुसंधान कार्य शामिल हैं। उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की ICD-11 में सिद्धा रुग्णता कोड्स का समावेश तथा आगामी डब्ल्यूएचओ अंतरराष्ट्रीय मानक शब्दावलियाँ सिद्धा को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर सुदृढ़ रूप से स्थापित करेंगी।

वैश्विक पहुंच पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डब्ल्यूएचओ के नेतृत्व वाली पहलों और अकादमिक आदान-प्रदान का उल्लेख किया, जिनसे सिद्धा की वैश्विक उपस्थिति सशक्त हुई है। उन्होंने सिद्धा को साक्ष्य-आधारित, वैश्विक रूप से मान्य और सभी के लिए सुलभ बनाने के साथ-साथ इसकी शास्त्रीय शुद्धता को बनाए रखने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस अवसर पर सिद्धा चिकित्सा पद्धति में असाधारण एवं सराहनीय योगदान देने वाले पाँच विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित विभूतियों में डॉ. बी. माइकल जेयराज, डॉ. टी. कन्नन राजाराम, स्वर्गीय डॉ. आई. सोरनामारियम्मल, डॉ. मोहन राज तथा प्रो. डॉ. वी. बनुमति शामिल हैं, जिनकी आजीवन सेवा, अनुसंधान, पांडुलिपि संरक्षण, शिक्षा एवं नेतृत्व ने सिद्धा चिकित्सा को जमीनी, अकादमिक और राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ किया है।

“वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्धा” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से सिद्धा चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद, शोधार्थी और विद्यार्थी एकत्र हुए। यह आयोजन अनुसंधान, शिक्षा, नवाचार और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से सिद्धा चिकित्सा को प्रोत्साहित करने तथा इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों का अभिन्न अंग बनाने के प्रति आयुष मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट करता है।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के 34वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान, चेन्नई के 34वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।

नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है, जिसमें अधिक जिम्मेदारियां और नए अवसर निहित हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्नातक अपने पेशेवर कौशल, करुणा और प्रतिबद्धता के माध्यम से समाज में सकारात्मक योगदान देंगे।

तमिलनाडु की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए, राधाकृष्णन ने कहा कि यह राज्य ज्ञान और समुद्री व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां के व्यापारियों ने भारत के विचार, नैतिक मूल्य और संस्कृति को विश्व के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया, जो भारत की आत्मविश्वासी सभ्यतागत परंपरा और सीखने व आदान-प्रदान के प्रति खुलेपन को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत विकसित भारत @2047 के विजन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने का आह्वान किया।

तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती तकनीकें सभी क्षेत्रों को रूपांतरित कर रही हैं। उन्होंने निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया और छात्रों से नियमित रूप से अपने कौशल को उन्नत करने, आजीवन सीखने की मानसिकता अपनाने तथा अपने मुख्य विषयों से परे नई तकनीकों से जुड़ने का आग्रह किया।

मूल्य-आधारित शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता का आधार नैतिकता, ईमानदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए।

परिसर से बाहर के जीवन के लिए विद्यार्थियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि सफलता और असफलता जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और दोनों का सामना संतुलन, दृढ़ता और मानसिक शक्ति के साथ करना चाहिए। उन्होंने शॉर्टकट अपनाने और अस्वस्थ तुलना से बचने की सलाह दी तथा स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर प्रगति करने और अपनी विशिष्ट क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से उद्देश्यपूर्ण और सेवा-भाव से युक्त जीवन जीने तथा व्यक्तिगत उत्कृष्टता के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मा. सुब्रमणियन, डॉ. एम.जी.आर. शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थान के चांसलर डॉ. ए. सी. शन्मुगम तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


9वां सिद्ध दिवस 3 जनवरी 2026 को चेन्नई में आयोजित: “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” थीम के साथ भव्य समारोह

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भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा अपने संस्थानों—राष्ट्रीय सिद्ध चिकित्सा संस्थान (NIS) और केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद (CCRS)—तथा तमिलनाडु सरकार के भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी निदेशालय के सहयोग से 9वां सिद्ध दिवस 3 जनवरी 2026 को कलाईवनार अरंगम, चेन्नई में मनाया जाएगा। इस वर्ष समारोह की थीम “वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सिद्ध” (Siddha for Global Health) रखी गई है। यह आयोजन सिद्ध चिकित्सा के जनक माने जाने वाले महर्षि अगस्त्य की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। सिद्ध दिवस प्रतिवर्ष 6 जनवरी को मनाया जाता है।

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 9वें सिद्ध दिवस समारोह की अध्यक्षता एवं उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रतापराव जाधव, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आयुष मंत्रालय एवं राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार;मा. सुब्रमणियन, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण मंत्री, तमिलनाडु सरकार; पद्म वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार; डॉ. पी. सेंथिल कुमार, प्रधान सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, तमिलनाडु सरकार; तथा एम. विजयलक्ष्मी, निदेशक, भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी निदेशालय, तमिलनाडु सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

इस समारोह में तमिलनाडु एवं अन्य राज्यों से सिद्ध चिकित्सा के चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधार्थी और छात्र बड़ी संख्या में भाग लेंगे। सिद्ध वैधानिक निकायों के वरिष्ठ सदस्य, NIS और CCRS के शोधकर्ता, आयुष मंत्रालय तथा तमिलनाडु सरकार के अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे। चेन्नई और पलायमकोट्टई स्थित सरकारी सिद्ध मेडिकल कॉलेजों तथा तमिलनाडु और केरल के स्व-वित्तपोषित सिद्ध कॉलेजों के स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध छात्र भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे।

इस अवसर पर आयुष मंत्रालय सिद्ध चिकित्सा के क्षेत्र में असाधारण और सराहनीय योगदान के लिए पांच प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को सम्मानित करेगा।

9वां सिद्ध दिवस निवारक स्वास्थ्य, अनुसंधान और वैश्विक कल्याण में सिद्ध चिकित्सा के योगदान को प्रदर्शित करेगा। इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवा वितरण, शोध सहयोग तथा शैक्षणिक उन्नयन में सिद्ध की भूमिका को सुदृढ़ करने हेतु सरकार के निरंतर प्रयासों की पुनः पुष्टि करना है। यह आयोजन आयुष मंत्रालय की उस प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है, जिसके अंतर्गत भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे में बढ़ावा देना, नवाचार को सशक्त करना तथा सिद्ध चिकित्सा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान दिलाना शामिल है।

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