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सहकार से समृद्धि की ओर भारत: सहकारी आंदोलन ने रचा विकास और समावेशन का नया अध्याय

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भारत में सहकारी आंदोलन आज समावेशी, पारदर्शी और सतत विकास का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से प्रेरित यह आंदोलन ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र के साथ देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 को “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष” घोषित किया जाना, सहकारी संस्थाओं की वैश्विक भूमिका और भारत के प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है।

सहकारिता की व्यापक पहुंच और मजबूती

देशभर में 8.5 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 6.6 लाख सक्रिय हैं। ये संस्थाएं 30 से अधिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं और करीब 32 करोड़ सदस्यों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से लगभग 10 करोड़ महिलाएं सहकारी ढांचे से जुड़ चुकी हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई गति मिली है।

PACS का सशक्तिकरण और डिजिटलीकरण

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को आर्थिक रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं। 79,630 PACS के कंप्यूटरीकरण को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 59,261 PACS सक्रिय रूप से ERP सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं। 32,119 PACS को ई-PACS के रूप में सक्षम बनाया गया है, जिससे डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन ऑडिट और पारदर्शी लेखा प्रणाली को बढ़ावा मिला है।

ग्रामीण स्तर पर नई सहकारी संस्थाएं

देशभर में 32,009 नई बहुउद्देश्यीय PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का पंजीकरण किया गया है। इससे पंचायत और गांव स्तर पर सहकारी सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी पहलें

  • NCEL (नेशनल को-ऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड): 28 देशों को 13.77 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का निर्यात, ₹5,556 करोड़ का कारोबार और सदस्यों को 20% लाभांश।

  • NCOL (नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड): 10,035 सहकारी संस्थाएं सदस्य, “भारत ऑर्गेनिक्स” ब्रांड के तहत 28 जैविक उत्पाद।

  • BBSSL (भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड): 31,605 सहकारी संस्थाओं की सदस्यता के साथ “भारत बीज” ब्रांड की शुरुआत।

विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना

112 PACS में गोदाम निर्माण पूरा कर 68,702 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता सृजित की गई है। यह योजना खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 और आत्मनिर्भरता अभियान

डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 के तहत 20,070 नई डेयरी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं। वहीं, आत्मनिर्भरता अभियान के अंतर्गत दलहन और मक्का उत्पादन को बढ़ावा देते हुए MSP पर सुनिश्चित खरीद और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाखों किसानों को जोड़ा गया है।

क्षमता निर्माण और संस्थागत सशक्तिकरण

देश की पहली राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय — त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय — की स्थापना से सहकारी क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा रहे हैं। 2024-25 में 3.15 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा किए गए नीतिगत, डिजिटल और संस्थागत सुधारों ने सहकारी आंदोलन को नई दिशा दी है। पारदर्शिता, समावेशन और बहुआयामी विकास के साथ सहकारिता आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही है। ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के साथ भारत का सहकारी आंदोलन विकसित भारत 2047 की ओर सशक्त कदम बढ़ा रहा है।

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