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मुंगेली : सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने पर 29 जून से 06 जुलाई तक मनाया जाएगा "सहकारी सप्ताह"

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सहकार से समृद्धि के संकल्प को सशक्त बनाने के लिए जिलेभर में होंगे विविध कार्यक्रम

मुंगेली- सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार के निर्देशानुसार 29 जून 2026 से 06 जुलाई 2026 तक पूरे देश में "सहकारी सप्ताह" का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रीय, राज्य, जिला, विकासखंड तथा प्राथमिक सहकारी समितियों के स्तर पर सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने, सहकारी संस्थाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने तथा आमजन की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इसी क्रम में कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशन में जिले में सहकारी सप्ताह के माध्यम से "सहकार से समृद्धि" की भावना को साकार करने के लिए सहकारी क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों एवं योगदान को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस अवधि में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, किसान संगोष्ठी, स्वास्थ्य शिविर, सहकारिता सम्मेलन, जागरूकता कार्यक्रम, हितधारक संवाद तथा विभिन्न जनभागीदारी आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

29 जून  को सप्ताह के प्रथम दिवस जिले की समस्त पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों में सहकारी ध्वज रोहण, सहकारिता संबंधी उद्बोधन, सहकारी शपथ एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया जाएगा। 

30 जून को सदस्यों की आय वृद्धि में दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। जिला मुख्यालय में जिला सहकारी विकास समिति की बैठक आयोजित होगी, जिसमें जिला प्रशासन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं संबंधित विभागों के अधिकारी भाग लेंगे।

01 जुलाई  को जिला एवं विकासखंड स्तर पर कृषक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग सहित आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। कार्यक्रम में  इफ्को  एवं  क्रीभको  का सहयोग रहेगा।

02 जुलाई को सभी पैक्स में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), रूपे केसीसी कार्ड, एटीएम सुविधा एवं बैंकिंग सेवाओं के प्रति जागरूक करते हुए संबंधित कार्यवाही भी की जाएगी।

03 जुलाई को जिलेभर में वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जाएगा तथा जल संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही "सहकार समाचार पत्र" के प्रचार-प्रसार के माध्यम से सहकारिता की योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुँचाई जाएगी।

04 जुलाई को जिला कार्यालय में सहकारिता संगोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें सहकारी संस्थाओं की भूमिका, भविष्य की योजनाओं तथा सहकारिता के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। 

05 जुलाई को युवा वर्ग एवं आमजन में सहकारिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से "सहकार संकल्प दौड़" आयोजित की जाएगी। इसमें पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि तथा नागरिक भाग लेंगे।

06 जुलाई को प्राथमिक सहकारी समितियों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को "सहकारी प्रेरणा पुरस्कार" प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

सहकारिता विभाग ने जिले के सभी सहकारी संस्थानों, किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों तथा आम नागरिकों से अपील की है कि वे "सहकारी सप्ताह" के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाकर "सहकार से समृद्धि, सशक्त समाज, सशक्त भारत" के संकल्प को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।

सहकारी संस्थाओं को बड़ा बढ़ावा: NCDC को दिए गए बैंक ऋण होंगे प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में शामिल

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नई दिल्ली- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत सरकार के परामर्श से घोषणा की है कि 19 जनवरी 2026 से बैंकों द्वारा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को दिए गए ऋण, जो सहकारी संस्थाओं को आगे ऋण देने के लिए हैं, उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।



यह प्रावधान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, शहरी सहकारी बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और लोकल एरिया बैंक को छोड़कर अन्य बैंकों पर लागू होगा। ये ऋण RBI की प्राथमिकता क्षेत्र ऋण संबंधी मास्टर डायरेक्शन 2025 के तहत निर्धारित गतिविधियों के लिए होंगे।

NCDC की भूमिका

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), सहकारिता मंत्रालय के तहत एक वैधानिक संस्था है, जो सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है और सहकारी आंदोलन के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

सहकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए सरकार और RBI के कदम

सरकार और RBI ने सहकारी बैंकों की वित्तीय स्थिति, शासन व्यवस्था और डिजिटल समावेशन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को नई शाखाएं खोलने की अनुमति

  • UCBs के लिए हाउसिंग लोन सीमा 10% से बढ़ाकर 25%

  • सहकारी बैंकों के निदेशकों का कार्यकाल 8 से बढ़ाकर 10 वर्ष

  • आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) के लाइसेंस शुल्क में कमी

  • शहरी सहकारी बैंकों के लिए NUCFDC नामक अम्ब्रेला संस्था की स्थापना, जो IT और संचालन सहायता देगी

  • ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए “सहकार सारथी” साझा सेवा इकाई की स्थापना

  • ग्रामीण सहकारी बैंकों को एकीकृत लोकपाल योजना में शामिल किया गया

  • DICGC द्वारा सभी सहकारी बैंकों में प्रति जमाकर्ता ₹5 लाख तक जमा बीमा

राज्यसभा में दी गई जानकारी

यह जानकारी वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।


“भारत टैक्सी” बनी देश की पहली सहकारी राइड-हेलिंग सेवा, ड्राइवर होंगे मालिक और भागीदार

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नई दिल्ली- सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी संस्थाओं को रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और जमीनी स्तर पर आर्थिक भागीदारी का सशक्त माध्यम बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसी दिशा में “भारत टैक्सी” को मोबिलिटी सेक्टर में एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में शुरू किया गया है।

“भारत टैक्सी” भारत का पहला सहकारी नेतृत्व वाला राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसमें ड्राइवरों (जिन्हें सारथी कहा जाता है) को स्वामित्व, शासन और मूल्य सृजन के केंद्र में रखा गया है। यह मॉडल निवेश-आधारित एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के बजाय एक स्वदेशी और टिकाऊ विकल्प प्रदान करता है।

शून्य कमीशन मॉडल पर आधारित

भारत टैक्सी को 6 जून 2025 को सहकारिता क्षेत्र में कार्यरत 8 राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी एक्ट, 2002 के तहत पंजीकृत किया गया। यह प्लेटफॉर्म शून्य कमीशन मॉडल पर काम करता है, जिसमें लाभ सीधे ड्राइवरों को वितरित किया जाता है।

कहां-कहां चल रही सेवा

फिलहाल भारत टैक्सी सेवा दिल्ली NCR (दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा) और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में संचालित है।

  • 9.9 लाख से अधिक पंजीकृत ग्राहक

  • 3 लाख से ज्यादा पंजीकृत ड्राइवर

  • 2.9 लाख से अधिक राइड्स पूरी

2029 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में सेवा शुरू करने की योजना है।

कोई प्लेटफॉर्म फीस नहीं

फिलहाल यात्रियों और ड्राइवरों से कोई सुविधा शुल्क, प्लेटफॉर्म फीस या कमीशन नहीं लिया जा रहा है। हालांकि, एयरपोर्ट प्रीपेड बूथ पर संचालन खर्च के लिए 7% सेवा शुल्क लगाया जाता है।

ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा

भारत टैक्सी ड्राइवरों के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, रिटायरमेंट बचत और ड्राइवर सपोर्ट सिस्टम जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देता है। दिल्ली में 7 स्थानों पर सहायता केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
ड्राइवरों को अन्य प्लेटफॉर्म पर काम करने की भी स्वतंत्रता है।

महिला सशक्तिकरण पहल

“बाइक दीदी” पहल के तहत 150 से अधिक महिला ड्राइवरों को प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है।

भविष्य की योजना

भारत टैक्सी सभी राज्यों और शहरों में विस्तार, हर राज्य में सहायता केंद्र, ड्राइवर सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एकीकृत मोबिलिटी इकोसिस्टम बनाने की योजना पर काम कर रही है।

यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।


सहकार से समृद्धि की ओर भारत: सहकारी आंदोलन ने रचा विकास और समावेशन का नया अध्याय

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भारत में सहकारी आंदोलन आज समावेशी, पारदर्शी और सतत विकास का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से प्रेरित यह आंदोलन ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र के साथ देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 को “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष” घोषित किया जाना, सहकारी संस्थाओं की वैश्विक भूमिका और भारत के प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है।

सहकारिता की व्यापक पहुंच और मजबूती

देशभर में 8.5 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 6.6 लाख सक्रिय हैं। ये संस्थाएं 30 से अधिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं और करीब 32 करोड़ सदस्यों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से लगभग 10 करोड़ महिलाएं सहकारी ढांचे से जुड़ चुकी हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई गति मिली है।

PACS का सशक्तिकरण और डिजिटलीकरण

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को आर्थिक रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं। 79,630 PACS के कंप्यूटरीकरण को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 59,261 PACS सक्रिय रूप से ERP सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं। 32,119 PACS को ई-PACS के रूप में सक्षम बनाया गया है, जिससे डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन ऑडिट और पारदर्शी लेखा प्रणाली को बढ़ावा मिला है।

ग्रामीण स्तर पर नई सहकारी संस्थाएं

देशभर में 32,009 नई बहुउद्देश्यीय PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का पंजीकरण किया गया है। इससे पंचायत और गांव स्तर पर सहकारी सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी पहलें

  • NCEL (नेशनल को-ऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड): 28 देशों को 13.77 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का निर्यात, ₹5,556 करोड़ का कारोबार और सदस्यों को 20% लाभांश।

  • NCOL (नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड): 10,035 सहकारी संस्थाएं सदस्य, “भारत ऑर्गेनिक्स” ब्रांड के तहत 28 जैविक उत्पाद।

  • BBSSL (भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड): 31,605 सहकारी संस्थाओं की सदस्यता के साथ “भारत बीज” ब्रांड की शुरुआत।

विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना

112 PACS में गोदाम निर्माण पूरा कर 68,702 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता सृजित की गई है। यह योजना खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 और आत्मनिर्भरता अभियान

डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 के तहत 20,070 नई डेयरी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं। वहीं, आत्मनिर्भरता अभियान के अंतर्गत दलहन और मक्का उत्पादन को बढ़ावा देते हुए MSP पर सुनिश्चित खरीद और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाखों किसानों को जोड़ा गया है।

क्षमता निर्माण और संस्थागत सशक्तिकरण

देश की पहली राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय — त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय — की स्थापना से सहकारी क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा रहे हैं। 2024-25 में 3.15 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा किए गए नीतिगत, डिजिटल और संस्थागत सुधारों ने सहकारी आंदोलन को नई दिशा दी है। पारदर्शिता, समावेशन और बहुआयामी विकास के साथ सहकारिता आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही है। ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के साथ भारत का सहकारी आंदोलन विकसित भारत 2047 की ओर सशक्त कदम बढ़ा रहा है।

चौथा सहकारी मेला 2025 असम में शुरू, राज्य में सहकारी आंदोलन और सामुदायिक सशक्तिकरण को मिला मंच

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असम सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित चौथा सहकारी मेला 2025 आज एईआई ग्राउंड, चांदमारी में उद्घाटित किया गया। यह तीन दिवसीय मेला 13 से 15 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य असम में सहकारी आंदोलन की ताकत, विविधता और संभावनाओं को प्रदर्शित करना है।

उद्घाटन समारोह

मेलें का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री, सहकारिता, कृष्णपाल गुर्जर द्वारा किया गया, जिनके साथ असम के सहकारिता मंत्री,  जोगेन मोहन उपस्थित रहे।

केंद्रीय राज्य मंत्री का संबोधन

केंद्रीय राज्य मंत्री गुर्जर ने असम में सहकारी आंदोलन को राज्य की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का स्वाभाविक विस्तार बताया। उन्होंने क्षेत्र के महान संत महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और महापुरुष माधवदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी एकता, समानता और समाज सेवा की शिक्षाएँ सहकारी भावना की नींव हैं।

गुर्जर ने कहा कि प्रधानमंत्री की निर्णायक नेतृत्व क्षमता और केंद्रीय सहकारिता मंत्री के मार्गदर्शन के तहत “सहकार से समृद्धि” की राष्ट्रीय दृष्टि जीवंत वास्तविकता में बदल रही है। उन्होंने 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इसने भारत में एक समग्र, विश्वस्तरीय सहकारी प्रणाली के लिए आवश्यक संस्थागत ढांचा और स्पष्ट ब्लूप्रिंट प्रदान किया है।

गुर्जर ने असम में सुधारों की गति की भी प्रशंसा की, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और राज्य सहकारिता मंत्री जोगेन मोहन के सक्रिय नेतृत्व के कारण संभव बताया। इस पहल के तहत असम ने 100% प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण सुनिश्चित किया है, और 800 से अधिक PACS ने नए मॉडल बाइलॉज को अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस प्रगति से युवा और महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है, उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है और 32 लाख से अधिक सदस्यों के लिए वित्तीय समावेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। असम राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें 2026 तक प्रत्येक गाँव में एक सहकारी संस्थान स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

असम के सहकारिता मंत्री का संबोधन

जोगेन मोहन ने चौथे सहकारी मेले को जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना की, जिन्होंने स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर कचरे को मूल्यवान संसाधनों में बदलकर आत्मनिर्भरता और संसाधनfulness का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इन सहकारी संस्थाओं के माध्यम से लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में लाभ मिल रहा है, जैसे आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन, महिला स्वयं सहायता समूहों की सफलता और युवाओं का सशक्तिकरण।

मेले की प्रमुख विशेषताएँ

  • इस मेले में 160 सहकारी समितियों ने भाग लिया, जो हेंडलूम, मछली पालन, डेयरी, कृषि और युवा एवं महिला नेतृत्व वाली उद्यमियों जैसे प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

  • मेला स्थानीय उत्पादों, नवाचारों और सहकारी सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने का जीवंत मंच प्रदान करता है।

  • अगले दो दिनों तक मेला प्रदर्शनी, इंटरैक्शन और ज्ञान साझा करने के सत्रों के माध्यम से सहकारिता-आधारित विकास को बढ़ावा देगा।

चौथा सहकारी मेला 2025 असम में सहकारी आंदोलन की ताकत और सामुदायिक सशक्तिकरण को उजागर करता है और राज्य में समृद्ध, आत्मनिर्भर और सहकारी नेतृत्व वाले भविष्य की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।

मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्‍ही ने महाराष्ट्र के रायगढ़ में मत्स्य सहकारी क्लस्टर का किया दौरा, सहकारी मॉडल से मत्स्य क्षेत्र के एकीकृत विकास पर बल

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मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य विभाग (Department of Fisheries - DoF) के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्‍ही ने आज महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित मत्स्य सहकारी क्लस्टर (Fisheries Cooperative Cluster) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और सहकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया।

यह क्लस्टर मत्स्य मूल्य श्रृंखला के एकीकृत विकास (Integrated Fisheries Value Chain Development) के एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस दौरे का उद्देश्य जमीनी स्तर की चुनौतियों का आकलन करना और सहकारी मॉडल के माध्यम से मत्स्य आधारित आजीविकाओं को मजबूत करने के अवसरों की पहचान करना था।

डॉ. लिक्‍ही ने इस अवसर पर रायगढ़ जिले की 156 प्राथमिक मत्स्य सहकारी समितियों (Primary Fisheries Cooperative Societies) और 9 फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशनों (FFPOs) का प्रतिनिधित्व करने वाले 251 सदस्यों से मुलाकात की।

सहकारी विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता

डॉ. लिक्‍ही ने कहा कि मत्स्य क्लस्टर गतिविधियों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और मत्स्य अवसंरचना विकास कोष (FIDF) जैसी प्रमुख राष्ट्रीय योजनाओं के साथ जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि मत्स्य विभाग और सहकारिता मंत्रालय के बीच एक संयुक्त कार्यबल (Joint Task Force) गठित किया गया है, जो देशभर में मत्स्य सहकारी समितियों को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

डॉ. लिक्‍ही ने कहा कि सहकारी समितियाँ, सरकार की “सहकार से समृद्धि (Sahkar Se Samriddhi)” और मत्स्य समुदाय की समृद्धि की दृष्टि के केंद्र में हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) को निर्देश दिया कि वह रायगढ़ जिले के सभी तालुकों में जागरूकता, प्रशिक्षण और शिकायत निवारण शिविरों का आयोजन करे ताकि योजनाओं का अधिक व्यापक प्रचार-प्रसार और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण से मत्स्य क्षेत्र में समग्र विकास संभव है — जिससे निर्यात में वृद्धि, अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, वित्तीय पहुंच में सुधार, और बाज़ार संपर्क को मजबूत किया जा सकेगा।

वरिष्ठ अधिकारियों के वक्तव्य

  • सागर मेहरा, संयुक्त सचिव (अंतर्देशीय मत्स्यपालन), ने कहा कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए विभिन्न मंत्रालयों और योजनाओं में कन्वर्जेंस (Convergence) सुनिश्चित करना आवश्यक है।

  • नीतू कुमारी, संयुक्त सचिव (सामुद्रिक मत्स्यपालन), ने हार्बर प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन पहलों को सहकारिता मंत्रालय, NCDC और अन्य भागीदार संस्थानों के साथ समन्वय में लागू किया जा रहा है।

  • डॉ. बी.के. बेहरा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) ने रायगढ़ की मत्स्य संरचना पर प्रस्तुति दी और अगले पाँच वर्षों की प्रमुख योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिनमें अवसंरचना विकास, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण, बाज़ार संपर्क और कल्याणकारी उपाय शामिल हैं।

हितधारकों की भागीदारी

बैठक में समुद्री, अंतर्देशीय और खारे पानी के मत्स्यपालन से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
उन्होंने जेटी, आइस प्लांट, कोल्ड स्टोरेज और ड्रेजिंग सुविधाओं की आवश्यकता पर बल दिया।
महिला मत्स्य कर्मियों के लिए स्वास्थ्य शिविर, स्वच्छता सुविधाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी मांग की गई।
प्रतिभागियों ने आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के दौरे का सुझाव दिया ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) से सीख ली जा सके।

वित्तीय संस्थानों ने सहकारी प्रयासों को मजबूत करने के लिए सतत समर्थन का आश्वासन दिया।
बैठक में यह सहमति बनी कि PMMSY फेज़ 2 में स्थानीय जरूरतों के अनुसार हस्तक्षेपों को शामिल किया जाएगा ताकि एक मजबूत, समावेशी और आत्मनिर्भर मत्स्य क्षेत्र का निर्माण किया जा सके।

रायगढ़ मत्स्य क्लस्टर का उद्देश्य

रायगढ़ सहित देश के 34 मत्स्य सहकारी क्लस्टर, जो प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत अधिसूचित हैं,
का उद्देश्य है —

  • मत्स्य आधारित उद्यमों को सशक्त बनाना,

  • जलीय कृषि, समुद्री मत्स्यपालन और गहरे समुद्र मछली पकड़ने की गतिविधियों को एकीकृत करना,

  • प्रतिस्पर्धी, संगठित और सतत मत्स्य क्षेत्र को बढ़ावा देना।

इन क्लस्टर्स को ब्लू इकॉनॉमी (Blue Economy) के स्तंभ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो रोज़गार सृजन, आय वृद्धि, उद्यमिता और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देंगे।

भागीदारी

बैठक में रायगढ़ के जिलाधिकारी किशन राव जवाले,
मत्स्य आयुक्त, महाराष्ट्र किशोर तवाड़े,
सहकारिता मंत्रालय, NCDC, NFDB, MPEDA, NABARD, ICAR सहित
कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों और हितधारकों ने भाग लिया।


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