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सहकारिता से बढ़ेगी किसानों की आय, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव होगी मजबूत : मुख्यमंत्री साय

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सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने पर राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन आयोजित

162 करोड़ से अधिक की तेंदूपत्ता प्रोत्साहन राशि वितरण का शुभारंभ, 1352 नई सहकारी समितियों के गठन से गांवों तक पहुंचा सहकार का विस्तार

पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मिल रहा है बढ़ावा

किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है सहकारिता

उत्कृष्ट सहकारी समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार से किया गया सम्मानित, महिला स्व सहायता समूह को वितरित किया गया लाभांश

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय का गठन देश के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह निर्णय 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को साकार करने वाला है। डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में सहकारिता के माध्यम से किसानों, वनवासियों, महिला समूहों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने तथा उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय सहकारी सम्मेलन एवं सहकारी सप्ताह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उत्कृष्ट समितियों को सहकार प्रेरणा पुरस्कार प्रदान किया तथा संग्रहण वर्ष 2023 के 7.14 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए 162 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन पारिश्रमिक राशि के वितरण का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूं और बचपन से ही सहकारिता से मेरा गहरा रिश्ता रहा है। तभी से मुझे विश्वास था कि सहकारिता के क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि' का वही सपना धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रथम कार्यकाल में उन्हें राज्यमंत्री के रूप में साथ काम करने का अवसर मिला और उन्होंने किसानों के प्रति प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता तथा समर्पण को बहुत करीब से देखा है। किसानों के कल्याण के प्रति इसी प्रतिबद्धता के कारण प्रधानमंत्री ने कृषि मंत्रालय का दायरा बढ़ाते हुए उसका नाम 'कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय' किया, ताकि किसानों का समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता बने। सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता का सबसे प्रभावी माध्यम बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा मिली है और इसका लाभ सीधे किसानों एवं ग्रामीण परिवारों तक पहुंच रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार केवल कृषि ही नहीं बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, वनोपज, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी सहकारिता को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव दिखाई देने लगे हैं। राज्य सरकार पशुपालन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पहले किसानों को खेती-किसानी के लिए 16 से 18 प्रतिशत दर पर ऋण लेना पड़ता था और भारी-भरकम ब्याज का बोझ उन्हें आर्थिक रूप से परेशान कर देता था। आज सहकारिता व्यवस्था और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश के 15 लाख से अधिक किसानों को 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसानों को खेती के लिए सुलभ वित्तीय सहायता मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिस प्रकार दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और सुरक्षा बलों के साहस से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है, उसी प्रकार सहकारिता के माध्यम से भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा परिवर्तन लाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहकारी सप्ताह के दौरान विषय विशेषज्ञों के मंथन से प्रदेश में सहकारिता के नए आयाम स्थापित होंगे और इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूरे होना देश के लिए गौरव का विषय है। इस अवसर पर 29 जून से 06 जुलाई तक सहकारिता सप्ताह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सहकारिता का मूल उद्देश्य है। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की कोई भी पंचायत सहकारिता से वंचित न रहे, इस दिशा में कार्य करते हुए राज्य में 1352 नई सहकारी समितियों का गठन किया गया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने सहकारिता विभाग के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से किसानों का पंजीयन पूरी तरह ऑनलाइन, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने सहकारिता से जुड़े विभिन्न स्टालों का किया अवलोकन

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन किया और सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा वनधन समितियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने हरित क्रांति आदिवासी सहकारी समिति जशपुर, महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति कोरबा, बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम, छत्तीसगढ़ हर्बल्स, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड), छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ, इफको तथा गंगा मैया दुग्ध उत्पादक संघ बालोद सहित विभिन्न संस्थाओं के स्टॉलों का अवलोकन कर उनके कार्यों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 5 नवीन पैक्स समितियों को माइक्रो एटीएम वितरित किए तथा छत्तीसगढ़ हर्बल्स के पांच नए उत्पादों का लोकार्पण किया। उन्होंने उत्कृष्ट तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए, वन-धन समितियों की हैंडबुक का विमोचन किया, महिला स्व-सहायता समूहों को लाभांश वितरित किया तथा विभिन्न हितग्राहियों को सामग्री, प्रोत्साहन राशि और केसीसी ऋण वितरित किए। 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, छत्तीसगढ़ तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, प्राधिकृत अधिकारी विपणन संघ शशिकांत द्विवेदी, सहकार भारती के कनिराम, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ के प्राधिकृत अधिकारी सौरभ शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी अंत्यावसायी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार बेसरा, छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्षगण, सहकारिता सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, आयुक्त सहकारिता रमेश शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी, किसान एवं बड़ी संख्या में हितग्राही उपस्थित थे।

मुंगेली : सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने पर 29 जून से 06 जुलाई तक मनाया जाएगा "सहकारी सप्ताह"

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सहकार से समृद्धि के संकल्प को सशक्त बनाने के लिए जिलेभर में होंगे विविध कार्यक्रम

मुंगेली- सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार के निर्देशानुसार 29 जून 2026 से 06 जुलाई 2026 तक पूरे देश में "सहकारी सप्ताह" का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रीय, राज्य, जिला, विकासखंड तथा प्राथमिक सहकारी समितियों के स्तर पर सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने, सहकारी संस्थाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने तथा आमजन की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इसी क्रम में कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशन में जिले में सहकारी सप्ताह के माध्यम से "सहकार से समृद्धि" की भावना को साकार करने के लिए सहकारी क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों एवं योगदान को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस अवधि में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, किसान संगोष्ठी, स्वास्थ्य शिविर, सहकारिता सम्मेलन, जागरूकता कार्यक्रम, हितधारक संवाद तथा विभिन्न जनभागीदारी आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

29 जून  को सप्ताह के प्रथम दिवस जिले की समस्त पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों में सहकारी ध्वज रोहण, सहकारिता संबंधी उद्बोधन, सहकारी शपथ एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया जाएगा। 

30 जून को सदस्यों की आय वृद्धि में दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। जिला मुख्यालय में जिला सहकारी विकास समिति की बैठक आयोजित होगी, जिसमें जिला प्रशासन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं संबंधित विभागों के अधिकारी भाग लेंगे।

01 जुलाई  को जिला एवं विकासखंड स्तर पर कृषक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग सहित आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। कार्यक्रम में  इफ्को  एवं  क्रीभको  का सहयोग रहेगा।

02 जुलाई को सभी पैक्स में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), रूपे केसीसी कार्ड, एटीएम सुविधा एवं बैंकिंग सेवाओं के प्रति जागरूक करते हुए संबंधित कार्यवाही भी की जाएगी।

03 जुलाई को जिलेभर में वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जाएगा तथा जल संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही "सहकार समाचार पत्र" के प्रचार-प्रसार के माध्यम से सहकारिता की योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुँचाई जाएगी।

04 जुलाई को जिला कार्यालय में सहकारिता संगोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें सहकारी संस्थाओं की भूमिका, भविष्य की योजनाओं तथा सहकारिता के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। 

05 जुलाई को युवा वर्ग एवं आमजन में सहकारिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से "सहकार संकल्प दौड़" आयोजित की जाएगी। इसमें पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि तथा नागरिक भाग लेंगे।

06 जुलाई को प्राथमिक सहकारी समितियों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को "सहकारी प्रेरणा पुरस्कार" प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

सहकारिता विभाग ने जिले के सभी सहकारी संस्थानों, किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों तथा आम नागरिकों से अपील की है कि वे "सहकारी सप्ताह" के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाकर "सहकार से समृद्धि, सशक्त समाज, सशक्त भारत" के संकल्प को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।

सहकारिता और समाजवाद के अग्रदूत भूषणलाल चन्द्रनाहू को जयंती पर दी गई श्रद्धांजलि

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महासमुंद- देश की पहली सहकारी चावल मिल के प्रणेता और प्रखर समाजवादी नेता स्व. भूषणलाल चन्द्रनाहू की जयंती पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई।

उनके जीवन को सहकारिता, शिक्षा और किसान संघर्ष का प्रतीक बताया गया। 13 फरवरी 2026 को किसान सहकारी चावल मिल, महासमुंद में उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि सभा हुई।

दीप प्रज्वलन सर्वहिन्दू समाज के देवेन्द्र दुबे, छत्तीसगढ़ जनादेश के संपादक के.पी. साहू और नई दुनिया के ब्यूरो चीफ आशुतोष शर्मा ने किया।

वक्ताओं ने कहा कि स्व. चन्द्रनाहू का जीवन सेवा, संघर्ष और सिद्धांतों की मिसाल है।

उन्होंने सहकारिता की जो मशाल जलाई, वह आज भी मार्गदर्शक है।


चन्द्रनाहू का जीवनवृत्त 

भूषण लाल चन्द्रनाहू का जन्म 13 फरवरी 1919 को ग्राम फरफौद (आरंग) में किसान अर्जुन प्रसाद कुर्मी के घर में  हुआ। प्राथमिक शिक्षा फरफौद, माध्यमिक शिक्षा मिशन स्कूल महासमुन्द में और उच्चतर शिक्षा सेंट पॉल स्कूल रायपुर एवं मारिस कालेज नागपुर एवं कांशी विश्वविद्यालय में हुई थी।

  • स्व. चन्द्रनाहू ने सन् 1944 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से वकालत की शिक्षा प्राप्त की।
  • तत्कालीन उपकुलपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन के सानिध्य ने उनके चिंतन को दिशा दी।
  • सन् 1946 में उन्होंने धान के शोषण के विरुद्ध 90 किसानों को संगठित किया।
  • एक लाख पंद्रह हजार रुपये एकत्र कर महासमुंद में चावल मिल की स्थापना की।
  • स्वतंत्रता सेनानी ठा. प्यारेलाल सिंह की प्रेरणा से इसे सहकारी आंदोलन से जोड़ा गया।
  • यह देश की पहली सहकारी चावल मिल बनी।
  • सन् 1956 में बनपचरी गांव में अपने खर्च से प्राथमिक शाला शुरू करवाई।
  • 1965-66 के सूखे में तालाब निर्माण कर राहत कार्य कराया।
  • 1974 में धान लेवी के विरोध में किसान आंदोलन का नेतृत्व किया और जेल गए।
  • आपातकाल के दौरान मीसा के तहत वे समाजवादी नेता मधु लिमये के साथ रायपुर जेल में रहे।
  • 1952 में वे समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रहे। बाद में उन्होंने कभी चुनाव नही लड़ने का संकल्प लिया।
  • 1977 में जनता पार्टी का प्रस्ताव भी अस्वीकार किया।
  • उन्होंने चन्द्रनाहू कुर्मी समाज को संगठित किया।
  • उन्हें प्रथम निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया। रायपुर में छात्रावास के लिए भूमि खरीदी।
  • निर्माण में स्वयं सहयोग किया।
  • सभी वर्गों के जरूरतमंद छात्रों को शिक्षा में मदद दी।

जयंती कार्यक्रम में किसान मिल के संचालकगण ललित चन्द्रनाहू, पंकज साहू (पूर्व पार्षद), योगेश चन्द्रनाहू, मन्नू लाल पटेल, योगेन्द्र चन्द्राकर, बलदाऊ चन्द्राकर, मलकित मक्कड़, अभयराम भास्कर, मोहन साहू आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

“भारत टैक्सी” बनी देश की पहली सहकारी राइड-हेलिंग सेवा, ड्राइवर होंगे मालिक और भागीदार

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नई दिल्ली- सहकारिता मंत्रालय ने सहकारी संस्थाओं को रोजगार सृजन, सामाजिक सुरक्षा और जमीनी स्तर पर आर्थिक भागीदारी का सशक्त माध्यम बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इसी दिशा में “भारत टैक्सी” को मोबिलिटी सेक्टर में एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में शुरू किया गया है।

“भारत टैक्सी” भारत का पहला सहकारी नेतृत्व वाला राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसमें ड्राइवरों (जिन्हें सारथी कहा जाता है) को स्वामित्व, शासन और मूल्य सृजन के केंद्र में रखा गया है। यह मॉडल निवेश-आधारित एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के बजाय एक स्वदेशी और टिकाऊ विकल्प प्रदान करता है।

शून्य कमीशन मॉडल पर आधारित

भारत टैक्सी को 6 जून 2025 को सहकारिता क्षेत्र में कार्यरत 8 राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी एक्ट, 2002 के तहत पंजीकृत किया गया। यह प्लेटफॉर्म शून्य कमीशन मॉडल पर काम करता है, जिसमें लाभ सीधे ड्राइवरों को वितरित किया जाता है।

कहां-कहां चल रही सेवा

फिलहाल भारत टैक्सी सेवा दिल्ली NCR (दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा) और गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में संचालित है।

  • 9.9 लाख से अधिक पंजीकृत ग्राहक

  • 3 लाख से ज्यादा पंजीकृत ड्राइवर

  • 2.9 लाख से अधिक राइड्स पूरी

2029 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में सेवा शुरू करने की योजना है।

कोई प्लेटफॉर्म फीस नहीं

फिलहाल यात्रियों और ड्राइवरों से कोई सुविधा शुल्क, प्लेटफॉर्म फीस या कमीशन नहीं लिया जा रहा है। हालांकि, एयरपोर्ट प्रीपेड बूथ पर संचालन खर्च के लिए 7% सेवा शुल्क लगाया जाता है।

ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा

भारत टैक्सी ड्राइवरों के लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, रिटायरमेंट बचत और ड्राइवर सपोर्ट सिस्टम जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता देता है। दिल्ली में 7 स्थानों पर सहायता केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
ड्राइवरों को अन्य प्लेटफॉर्म पर काम करने की भी स्वतंत्रता है।

महिला सशक्तिकरण पहल

“बाइक दीदी” पहल के तहत 150 से अधिक महिला ड्राइवरों को प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है।

भविष्य की योजना

भारत टैक्सी सभी राज्यों और शहरों में विस्तार, हर राज्य में सहायता केंद्र, ड्राइवर सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एकीकृत मोबिलिटी इकोसिस्टम बनाने की योजना पर काम कर रही है।

यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।


सहकार से समृद्धि की ओर भारत: सहकारी आंदोलन ने रचा विकास और समावेशन का नया अध्याय

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भारत में सहकारी आंदोलन आज समावेशी, पारदर्शी और सतत विकास का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से प्रेरित यह आंदोलन ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र के साथ देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2025 को “अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष” घोषित किया जाना, सहकारी संस्थाओं की वैश्विक भूमिका और भारत के प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाता है।

सहकारिता की व्यापक पहुंच और मजबूती

देशभर में 8.5 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 6.6 लाख सक्रिय हैं। ये संस्थाएं 30 से अधिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं और करीब 32 करोड़ सदस्यों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से लगभग 10 करोड़ महिलाएं सहकारी ढांचे से जुड़ चुकी हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण को नई गति मिली है।

PACS का सशक्तिकरण और डिजिटलीकरण

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को आर्थिक रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं। 79,630 PACS के कंप्यूटरीकरण को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 59,261 PACS सक्रिय रूप से ERP सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही हैं। 32,119 PACS को ई-PACS के रूप में सक्षम बनाया गया है, जिससे डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन ऑडिट और पारदर्शी लेखा प्रणाली को बढ़ावा मिला है।

ग्रामीण स्तर पर नई सहकारी संस्थाएं

देशभर में 32,009 नई बहुउद्देश्यीय PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का पंजीकरण किया गया है। इससे पंचायत और गांव स्तर पर सहकारी सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

राष्ट्रीय स्तर की नई सहकारी पहलें

  • NCEL (नेशनल को-ऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड): 28 देशों को 13.77 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का निर्यात, ₹5,556 करोड़ का कारोबार और सदस्यों को 20% लाभांश।

  • NCOL (नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड): 10,035 सहकारी संस्थाएं सदस्य, “भारत ऑर्गेनिक्स” ब्रांड के तहत 28 जैविक उत्पाद।

  • BBSSL (भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड): 31,605 सहकारी संस्थाओं की सदस्यता के साथ “भारत बीज” ब्रांड की शुरुआत।

विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना

112 PACS में गोदाम निर्माण पूरा कर 68,702 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता सृजित की गई है। यह योजना खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 और आत्मनिर्भरता अभियान

डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 के तहत 20,070 नई डेयरी सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं। वहीं, आत्मनिर्भरता अभियान के अंतर्गत दलहन और मक्का उत्पादन को बढ़ावा देते हुए MSP पर सुनिश्चित खरीद और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाखों किसानों को जोड़ा गया है।

क्षमता निर्माण और संस्थागत सशक्तिकरण

देश की पहली राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय — त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय — की स्थापना से सहकारी क्षेत्र के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा रहे हैं। 2024-25 में 3.15 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

निष्कर्ष

सरकार द्वारा किए गए नीतिगत, डिजिटल और संस्थागत सुधारों ने सहकारी आंदोलन को नई दिशा दी है। पारदर्शिता, समावेशन और बहुआयामी विकास के साथ सहकारिता आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही है। ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के साथ भारत का सहकारी आंदोलन विकसित भारत 2047 की ओर सशक्त कदम बढ़ा रहा है।

कृषि में सहकारिता से समृद्धि: सतत कृषि में सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन

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कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको/ KRIBHCO) द्वारा “सहकार से समृद्धि – सतत कृषि में सहकारिताओं की भूमिका” विषय पर एक राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन का आयोजन 24 दिसंबर 2025 को इंद्रधनुष ऑडिटोरियम, पंचकूला (हरियाणा) में किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य सतत कृषि को बढ़ावा देने, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की भूमिका के विस्तार, छोटे एवं सीमांत किसानों की आय में स्थिरता सुनिश्चित करने तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों के अनुरूप सहकारी आधारित कृषि मॉडलों को सुदृढ़ करने से जुड़े नीतिगत एवं क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं पर विचार-विमर्श करना है।

सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह सम्मेलन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विचार “सहकार से समृद्धि” को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। साथ ही, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर सहकारी मॉडल को मजबूत कर किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में यह सम्मेलन एक सशक्त कदम है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त, सहकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर और मुरलीधर मोहोल, हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा भी सम्मेलन में उपस्थित रहेंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा सलमपुर (भिवानी) स्थित मिल्क कूलिंग सेंटर तथा जाटूसाना (रेवाड़ी) स्थित हैफेड आटा मिल का ई-उद्घाटन किया जाएगा। साथ ही, वे हरियाणा राज्य के सहकारी बैंकों के लाभार्थियों को रुपे प्लेटिनम डेबिट कार्ड वितरित करेंगे तथा हरियाणा कृभको द्वारा स्थापित एम-पैक्स (M-PACS) के अध्यक्षों को पंजीकरण प्रमाण पत्र भी प्रदान करेंगे। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष (IYC) के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों को प्रदर्शित करने वाले एक विशेष पोर्टल का भी उद्घाटन किया जाएगा।

यह सम्मेलन सहकारी ढांचे के माध्यम से किसानों तक उन्नत कृषि ज्ञान के आदान-प्रदान, सस्ती ऋण उपलब्धता, आधुनिक तकनीकों को अपनाने तथा जैविक एवं जलवायु-संवेदनशील कृषि पद्धतियों के प्रसार पर विशेष जोर देगा। सम्मेलन में सहकारिता मंत्रालय की हालिया नीतिगत पहलों, PACS के सुदृढ़ीकरण तथा कृभको जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की भूमिका पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय, कृभको, हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS), किसान संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य प्रमुख हितधारक भाग लेंगे।

कृभको ने वर्षों से उर्वरक आपूर्ति, कृषि परामर्श सेवाओं तथा किसान-केंद्रित पहलों के माध्यम से देशभर के लाखों किसानों को लाभ पहुंचाया है। पंचकूला में आयोजित यह राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष–2025 के अंतर्गत सहकारी आंदोलन को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

सहकारिता से आत्मनिर्भरता की ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

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साल 2025 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया गया है।जिसका मुख्य उद्देश्य "सहकारिताएँ एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती हैं" (Cooperatives Build a Better World) है, और यह वर्ष गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है l

भारत सरकार ने सहकारिता आंदोलन को गांव-गांव तक पहुँचाने के लिए वर्ष 2021 में स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश के हर ग्राम पंचायत तक सहकारी समितियों का विस्तार किया जा रहा है, ताकि किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों को सहकारिता से लाभ मिल सके। सहकारिता के माध्यम से एक बेहतर और समृद्ध ग्रामीणों का निर्माण करना है।

छत्तीसगढ़ में सहकारिता का प्रसार

छत्तीसगढ में 6063 सहकारी समितियाँ कार्यरत

छत्तीसगढ़ राज्य में कुल 11,650 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें 2,058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ (पैक्स), 1,949 दुग्ध, 1,002 मत्स्य और 1,054 लघु वनोपज सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं। 

760 नई समितियाँ गठित

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और सहकारिता मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर अब तक छत्तीसगढ़ में 310 मत्स्य, 297 दुग्ध और 153 लघु वनोपज समितियाँ नई गठित की जा चुकी हैं।

सहकारिता के माध्यम से रोजगार और सशक्तिकरण

राज्य गठन के समय केवल 1,333 सहकारी समितियाँ सक्रिय थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 2573 हो गई है। किसानों को ऋण, बीज, खाद, कीटनाशक और विपणन की सुविधा सुगमता से उपलब्ध हो रही है।

राज्य में 515 नई प्राथमिक कृषि साख समितियाँ भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के कुल सदस्य अब 30.26 लाख हैं, जिनमें से 19.38 लाख किसान क्रेडिट कार्ड धारक हैं।

राज्य में सहकारी केंद्रीय बैंक की 345 शाखाएँ संचालित

कृषि ऋण और वित्तीय सुदृढ़ता

राज्य में 6 जिला सहकारी केंद्रीय बैंक हैं, जिनकी 345 शाखाएँ संचालित हो रही हैं। इनमें से 262 शाखाएँ कम्प्यूटरीकृत हैं। राज्य के 2058 पैक्स समितियों में प्रधानमंत्री किसान सेवा केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र किसानों को खाद, बीज, कीटनाशक, कृषि उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं।

किसानों के लिए 5 लाख रुपए तक ब्याज मुक्त आसान कृषि ऋण की सुविधा

राज्य सरकार और नाबार्ड के सहयोग से किसानों को सस्ती ब्याज दर पर अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को 5 लाख रुपए तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जा रहा है।

पशुपालन, मत्स्य पालन और लघु उद्योगों के लिए भी 1% से 3% ब्याज दर पर ऋण सुविधा दी जा रही है। वर्ष 2025-26 में अब तक 15.56 लाख किसानों को 6,936 करोड़ रुपए का कृषि ऋण वितरित किया जा चुका है।

डिजिटलीकरण और पारदर्शिता

राज्य में सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण का कार्य वर्ष 2022-23 से आरंभ हुआ। अब तक 2,028 समितियाँ ई-पैक्स मोड में परिवर्तित की जा चुकी हैं। डिजिटलीकरण से किसानों के खाते, ऋण विवरण और ब्याज गणना पारदर्शी और रियल टाइम हो गए हैं।

धान खरीद और किसानों को लाभ

वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार द्वारा 25 लाख किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कुल 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। इसके लिए 34,349 करोड़ रुपए की राशि किसानों के बैंक खातों में सीधे जमा की गई।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री किसान उन्नति योजना के तहत 11,928.59 करोड़ रुपए की राशि किसानों के खातों में सीधे हस्तांतरित की गई। कुल 46276 करोड़ रुपए किसानों के खाते में अंतरित किया गया।

धान खरीदी (खरीफ विपणन) वर्ष 2025-26 के  तहत दिनांक 12 दिसंबर 2025 तक 6.94 लाख किसानों से 35.43 लाख मेट्रिक टन धान की खरीदी समितियों के माध्यम से किया जा चुका है, जिसकी लगभग राशि  7201 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को खरीदी के 48 घंटे के अंदर भुगतान किया गया है।  इस वर्ष एग्रीस्टेग से पंजीकृत किसान से  धान खरीदी की जा रही है। एग्रीस्टेग पोर्टल के पंजीकृत किसानों को संख्या 26.86 लाख है।

एग्रीस्टेग पोर्टल के माध्यम से किसान आईडी (Farmer ID) के ज़रिए भूमि, फसल, बैंक, बीमा और योजनाओं से जुड़ी सभी जानकारी एक जगह होती है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे, बिचौलियों को हटाया जा सके और डेटा-आधारित नीतियां बनाई जा सकें l

चौथा सहकारी मेला 2025 असम में शुरू, राज्य में सहकारी आंदोलन और सामुदायिक सशक्तिकरण को मिला मंच

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असम सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित चौथा सहकारी मेला 2025 आज एईआई ग्राउंड, चांदमारी में उद्घाटित किया गया। यह तीन दिवसीय मेला 13 से 15 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य असम में सहकारी आंदोलन की ताकत, विविधता और संभावनाओं को प्रदर्शित करना है।

उद्घाटन समारोह

मेलें का औपचारिक उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री, सहकारिता, कृष्णपाल गुर्जर द्वारा किया गया, जिनके साथ असम के सहकारिता मंत्री,  जोगेन मोहन उपस्थित रहे।

केंद्रीय राज्य मंत्री का संबोधन

केंद्रीय राज्य मंत्री गुर्जर ने असम में सहकारी आंदोलन को राज्य की गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का स्वाभाविक विस्तार बताया। उन्होंने क्षेत्र के महान संत महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और महापुरुष माधवदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी एकता, समानता और समाज सेवा की शिक्षाएँ सहकारी भावना की नींव हैं।

गुर्जर ने कहा कि प्रधानमंत्री की निर्णायक नेतृत्व क्षमता और केंद्रीय सहकारिता मंत्री के मार्गदर्शन के तहत “सहकार से समृद्धि” की राष्ट्रीय दृष्टि जीवंत वास्तविकता में बदल रही है। उन्होंने 2021 में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इसने भारत में एक समग्र, विश्वस्तरीय सहकारी प्रणाली के लिए आवश्यक संस्थागत ढांचा और स्पष्ट ब्लूप्रिंट प्रदान किया है।

गुर्जर ने असम में सुधारों की गति की भी प्रशंसा की, जिसे मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा और राज्य सहकारिता मंत्री जोगेन मोहन के सक्रिय नेतृत्व के कारण संभव बताया। इस पहल के तहत असम ने 100% प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण सुनिश्चित किया है, और 800 से अधिक PACS ने नए मॉडल बाइलॉज को अपनाया है। उन्होंने कहा कि इस प्रगति से युवा और महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है, उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है और 32 लाख से अधिक सदस्यों के लिए वित्तीय समावेशन सुनिश्चित किया जा रहा है। असम राष्ट्रीय सहकारी नीति 2025 के लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें 2026 तक प्रत्येक गाँव में एक सहकारी संस्थान स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

असम के सहकारिता मंत्री का संबोधन

जोगेन मोहन ने चौथे सहकारी मेले को जमीनी स्तर पर सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने प्रतिभागियों की सराहना की, जिन्होंने स्थानीय रूप से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर कचरे को मूल्यवान संसाधनों में बदलकर आत्मनिर्भरता और संसाधनfulness का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इन सहकारी संस्थाओं के माध्यम से लोगों को विभिन्न क्षेत्रों में लाभ मिल रहा है, जैसे आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन, महिला स्वयं सहायता समूहों की सफलता और युवाओं का सशक्तिकरण।

मेले की प्रमुख विशेषताएँ

  • इस मेले में 160 सहकारी समितियों ने भाग लिया, जो हेंडलूम, मछली पालन, डेयरी, कृषि और युवा एवं महिला नेतृत्व वाली उद्यमियों जैसे प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

  • मेला स्थानीय उत्पादों, नवाचारों और सहकारी सफलता की कहानियों को प्रदर्शित करने का जीवंत मंच प्रदान करता है।

  • अगले दो दिनों तक मेला प्रदर्शनी, इंटरैक्शन और ज्ञान साझा करने के सत्रों के माध्यम से सहकारिता-आधारित विकास को बढ़ावा देगा।

चौथा सहकारी मेला 2025 असम में सहकारी आंदोलन की ताकत और सामुदायिक सशक्तिकरण को उजागर करता है और राज्य में समृद्ध, आत्मनिर्भर और सहकारी नेतृत्व वाले भविष्य की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करता है।

अमित शाह ने बनास डेयरी के नए बायो-CNG और उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहयोगिता मंत्री अमित शाह ने आज गुजरात के वाव-थराद जिले में बनास डेयरी द्वारा निर्मित नए बायो-CNG और उर्वरक संयंत्र का उद्घाटन किया और 150 टन क्षमता वाले पाउडर प्लांट की आधारशिला रखी। इस अवसर पर गुजरात विधानसभा के स्पीकर शंकर चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री सहयोगिता कृष्ण पाल गुर्जर एवं मुरलीधर मोहोल, केंद्रीय सहयोगिता सचिव डॉ. अशिष कुमार भूतानी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

बनास डेयरी की सफलता और योगदान

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि गलबाभाई नांजीभाई पटेल द्वारा बनास डेयरी की शुरुआत धीरे-धीरे इतनी बड़ी हो गई कि आज इसका टर्नओवर ₹24,000 करोड़ तक पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि जहां भी वे जाते हैं, गर्व से यह घोषणा करते हैं कि गुजरात के गांवों को समृद्ध बनाने का कार्य राज्य की माताओं और बहनों ने किया है।

उन्होंने किसानों, विशेष रूप से सहकारी आंदोलन के अग्रणी, ग्राम स्तरीय दूध समितियों के अध्यक्षों और बनास डेयरी के निदेशकों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जो चमत्कार किया है, उसे शायद वे स्वयं भी नहीं समझते। ₹24,000 करोड़ का व्यवसाय खड़ा करना किसी भी बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी के लिए चुनौती है, लेकिन बनास डेयरी ने यह कार्य आसानी से पूरा किया।

कृषि और जल प्रबंधन में विकास

शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पानी की कमी वाले क्षेत्रों में पर्याप्त पानी उपलब्ध करवा कर किसानों की मदद की। सजलम-सुफलम योजना के तहत नर्मदा और माहि नदियों का अतिरिक्त पानी बनासकांठा तक पहुँचाया गया। पहले यहां के किसान दूसरों के खेतों में मजदूरी करते थे, लेकिन आज वही किसान अपने खेतों को स्वर्ग बना चुके हैं और पूरे बनासकांठा को समृद्ध किया है।

महिलाओं का योगदान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस सफलता में महिलाओं का योगदान अत्यंत सराहनीय है। इस ₹24,000 करोड़ के व्यवसाय में दूध एकत्र करने का सारा काम बनासकांठा की माताओं, बहनों और बेटियों ने किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे जीवंत उदाहरण है। भुगतान प्रणाली इतनी पारदर्शी है कि दूध का पूरा पैसा सीधे उनके बैंक खातों में हर सप्ताह पहुँचता है।

एशिया की सबसे बड़ी डेयरी और सहकारी मॉडल

शाह ने बताया कि बनास डेयरी अब एशिया की सबसे बड़ी दूध उत्पादन डेयरी बन चुकी है। गलबा काका (गलबाभाई नांजीभाई पटेल) का इसमें बड़ा योगदान है। 1960 में सिर्फ आठ गांवों और दो तालुकों (वडगाम और पालनपुर) से शुरू हुई यात्रा आज ₹24,000 करोड़ के व्यवसाय तक पहुँच चुकी है। 
गलबाभाई का मूल मंत्र था:
“हमारे पास कम पैसा हो सकता है, लेकिन हमारे पास बहुत लोग हैं।”
उनकी सोच ने छोटे योगदान से बड़ी उपलब्धियाँ हासिल करने की प्रेरणा दी, जो आज न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में सहकारी आंदोलनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

नई पहलें और भविष्य की योजनाएँ

अमित शाह ने कई नई पहलों की घोषणा की, जिनमें शामिल हैं:

  • बायो-CNG संयंत्र और मिल्क पाउडर प्लांट का उद्घाटन

  • प्रोटीन प्लांट और हाई-टेक ऑटोमेटेड पनीर प्लांट का समर्पण

उन्होंने कहा कि अब सहकारी डेयरी सेक्टर को पूरी तरह से सर्कुलर इकोनॉमी में बदलने का समय आ गया है।
गाय और भैंस की गोबर को बर्बाद नहीं होने देना है, बल्कि उसे जैविक उर्वरक, बायोगैस और बिजली में बदलना है, और इससे होने वाली आय सीधे किसानों के खाते में जाएगी।

नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाएँ और डेयरी विकास

शाह ने बताया कि किसानों के लाभ के लिए भारत सरकार ने तीन नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाएँ बनाई हैं:

  1. बीज उत्पादन और वितरण

  2. ऑर्गेनिक उत्पादों का विपणन

  3. कृषि निर्यात

साथ ही, डेयरी क्षेत्र के लिए तीन राष्ट्रीय बहु-राज्यीय सहकारी संस्थाएँ बनाई गई हैं।
ये छह संस्थाएँ अब कृषि और पशुपालन के हर पहलू को कवर करेंगी—चीज़, प्रोटीन, दूध उत्पाद, खवा, आइसक्रीम, बेबी फ़ूड, तेल की पैकिंग, आटा, हनी, कूल स्टोरेज, आलू चिप्स, बीज उत्पादन, और पशु चारा निर्माण। सभी लाभ सीधे किसानों तक पहुँचेंगे।

सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल और भविष्य

शाह ने कहा कि केवल दूध, घी और पनीर तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि हाई-वैल्यू उत्पादों का उत्पादन भी करना होगा, जिनकी वैश्विक मांग और मूल्य अधिक है।
साथ ही, सहकारी डेयरी स्तर पर पशु चारा भी निर्मित होगा और आय सीधे किसानों के खाते में जाएगी।
उन्होंने आश्वासन दिया कि इसके लिए आवश्यक टेक्नोलॉजी और फाइनेंसिंग पहले ही प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा चुकी है।

सफेद क्रांति 2.0 और माइक्रो-एटीएम

शाह ने कहा कि हर गाँव की दूध सहकारी समिति को माइक्रो-एटीएम प्रदान किया गया है, जिससे भुगतान प्रक्रिया सरल हुई है। आने वाले समय में इन एटीएम के माध्यम से वित्तीय सेवाएँ भी शुरू की जाएंगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने White Revolution 2.0 के लिए कई लक्ष्य निर्धारित किए हैं, और शाह ने कहा कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन, एनिमल हसबैंडरी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड, राष्ट्रीय डेयरी योजना और राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के सहारे यह सफलता निश्चित है।

शाह ने कहा कि बनास डेयरी की यह परंपरा केवल बनासकांठा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे देश के लाखों पशुपालक किसानों के लिए समृद्धि का स्रोत बनेगी।


अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘को-ऑप कुंभ 2025’ का उद्घाटन किया

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 नई दिल्ली-केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘को-ऑप कुंभ 2025’ (Co-Op Kumbh 2025) को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। यह सम्मेलन शहरी सहकारी क्रेडिट क्षेत्र पर केंद्रित था। इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, सहकारिता मंत्रालय के सचिव एवं कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में मंत्री अमित शाह ने कहा कि शहरी सहकारी बैंकों और क्रेडिट सोसाइटियों का यह सहकार कुंभ अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 3-4 वर्षों में देश का शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र और सहकारी क्रेडिट सोसाइटी क्षेत्र नए जोश के साथ आगे बढ़ा है। उन्होंने बताया कि ‘को-ऑप कुंभ 2025’ के दौरान नीति, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर चर्चा होगी ताकि इस क्षेत्र की संभावनाओं का अधिकतम उपयोग किया जा सके। उन्होंने कहा कि एनएएफक्यूब (NAFCUB) द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की ‘दिल्ली घोषणा 2025’ (Delhi Declaration 2025) शहरी सहकारी बैंकों के विस्तार के लिए एक रोडमैप के रूप में कार्य करेगी।

शाह ने कहा कि “को-ऑप कुंभ 2025 के माध्यम से शहरी सहकारी बैंकों के विस्तार का हमारा सपना बहुत जल्द पूरा होगा।” उन्होंने बताया कि आज इस अवसर पर ‘सहकार डिजी-पे’ (Sahkar Digi-Pay) और ‘सहकार डिजी-लोन’ (Sahkar Digi-Loan) ऐप्स का शुभारंभ किया गया है। इसके माध्यम से छोटे से छोटे शहरी सहकारी बैंक भी डिजिटल भुगतान सुविधाएं प्रदान कर सकेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सहकारिता से जुड़े हर क्षेत्र में बुनियादी सुधार लाने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया कि सहकारी क्षेत्र के आधुनिकीकरण, चुनौतियों के समाधान और इसके विस्तार के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। सभी राज्य सरकारों ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के लिए मॉडल उपविधियों को स्वीकार किया है।

अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय ने चार प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं —

  1. जनरेशन सहकार (Generation Sahakar) का विकास, यानी युवा पीढ़ी को सहकार आंदोलन से जोड़ना। इसके लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है, जो सहकारिता क्षेत्र की सभी आवश्यकताओं को पूरा करेगा।

  2. सहकारी समितियों को ऐसी इकाइयों के रूप में तैयार करना जो हर चुनौती का सामना कर सकें।

  3. अगले पाँच वर्षों में दो लाख से अधिक जनसंख्या वाले हर शहर में एक शहरी सहकारी बैंक की स्थापना करना।

  4. युवा उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त करने के लिए शहरी सहकारी बैंकों को बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण से काम करना।

उन्होंने कहा कि “हमारा लक्ष्य केवल सहकारी संस्थाओं को मजबूत करना नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त बनाना भी है, और इस दिशा में शहरी सहकारी बैंक सबसे उपयुक्त माध्यम हैं।”

शाह ने बताया कि “पिछले दो वर्षों में हमने गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) को 2.8% से घटाकर 0.06% कर दिया है। अब हमें परिचालन मानकों को सुधारना होगा और वित्तीय अनुशासन को और मजबूत करना होगा। हर शहर में एक शहरी सहकारी बैंक की स्थापना तभी संभव है जब हम सहकारी समितियों को बैंकों में परिवर्तित करने की दिशा में काम करें।”

उन्होंने कहा कि केवल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े ही हमारी प्रगति को नहीं दर्शाते — जब तक हर व्यक्ति को काम और सम्मानजनक जीवन स्तर न मिले, प्रगति अधूरी है, और यह सहकारिता के बिना संभव नहीं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें सहकारिता के महत्व को भलीभांति समझती हैं, अब आवश्यकता है कि पारदर्शी और परिणामोन्मुख दृष्टिकोण से आगे बढ़ा जाए।

शाह ने बताया कि इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (ICA) ने वैश्विक रैंकिंग में अमूल को पहला और इफको (IFFCO) को दूसरा स्थान प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि “यह इस बात का प्रमाण है कि आज भी सहकारिता की अवधारणा और संस्कृति प्रासंगिक और सशक्त है।”

उन्होंने बताया कि अमूल देश में श्वेत क्रांति (White Revolution) का प्रेरक रहा है — इसके 36 लाख किसान सदस्य, 18,000 ग्राम समितियाँ और 18 जिला संघ हर दिन 3 करोड़ लीटर दूध एकत्र करते हैं। वर्ष 2024–25 में अमूल का कारोबार 90,000 करोड़ रुपये को पार कर गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि लाखों किसान, जिनमें से 65% महिलाएँ हैं, छोटे-छोटे योगदानों से एक विशाल सहकारी संस्था को वर्षों से सफलतापूर्वक चला रहे हैं।

शाह ने कहा कि इफको (IFFCO) विश्व की दूसरी सबसे बड़ी सहकारी संस्था बन गई है, जिसका कारोबार 41,000 करोड़ रुपये और लाभ 3,000 करोड़ रुपये है। इफको में देशभर की 35,000 सहकारी समितियाँ — जिनमें अधिकांश PACS और विपणन समितियाँ हैं — सदस्य हैं। इसके माध्यम से 5 करोड़ से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। इफको हर वर्ष 93 लाख मीट्रिक टन यूरिया और डीएपी का उत्पादन करता है और आज इसकी नैनो यूरिया और नैनो डीएपी 65 देशों — जैसे ब्राज़ील, ओमान, अमेरिका और जॉर्डन — को निर्यात की जा रही हैं।

शाह ने कहा कि यह सब इस बात का प्रमाण है कि भारत में सहकारिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ‘डीप सी फिशिंग वेसल्स’ का किया शुभारंभ, सहकारिता आधारित मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा

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केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज मुंबई के मझगांव डॉक में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana) के तहत ‘डीप सी फिशिंग वेसल्स’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोळ भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह कदम भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण और तटीय क्षेत्रों में सहकारिता आधारित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने और ब्लू इकॉनमी को सशक्त बनाने के लिए सहकारिता की भावना के साथ कार्य कर रही है।

अमित शाह ने बताया कि आज जिन दो ट्रॉलरों का शुभारंभ किया गया है, वे भारत की मत्स्य संपदा की संभावनाओं को और अधिक बढ़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करेंगे कि मछली उद्योग का लाभ मेहनती मछुआरों के घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब तक मत्स्य ट्रॉलरों पर काम करने वाले लोग वेतन पर काम करते थे, लेकिन सहकारिता आधारित मत्स्य पालन के तहत ट्रॉलरों का पूरा लाभ सीधे मछुआरों तक पहुंचेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फिलहाल 14 ट्रॉलर प्रदान किए जा रहे हैं, और निकट भविष्य में केंद्र सरकार, सहकारिता मंत्रालय एवं मत्स्य विभाग की ओर से और अधिक ट्रॉलर मछुआरों को सहकारी मॉडल पर दिए जाएंगे। ये ट्रॉलर गहरे समुद्र में 25 दिनों तक रह सकते हैं और 20 टन तक मछलियां ले जा सकते हैं। इसके साथ ही बड़े जहाजों के माध्यम से समुद्र से तट तक मछलियों के परिवहन की भी व्यवस्था की जाएगी।

अमित शाह ने कहा कि लगभग 11,000 किलोमीटर लंबी भारतीय समुद्री तटरेखा पर मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाले गरीब भाइयों और बहनों के लिए आने वाले दिनों में एक बड़ी योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि देश की वास्तविक समृद्धि तभी संभव है जब ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाला गरीब व्यक्ति आर्थिक रूप से सशक्त बने। केवल जीडीपी वृद्धि को विकास का पैमाना मानने से वास्तविक विकास नहीं होता, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से प्रत्येक परिवार की समृद्धि सुनिश्चित करनी होती है।

अमित शाह ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र में सहकारिता अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रही है। भविष्य में मछलियों के प्रसंस्करण, निर्यात और बड़े संग्रहण पोतों की तैनाती की योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि ये प्रसंस्करण केंद्र और चिलिंग यूनिट मछुआरों के स्वामित्व में होंगे, और निर्यात भी बहु-राज्य सहकारी समितियों के माध्यम से किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई मत्स्य योजनाओं के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। वर्ष 2014-15 में भारत का कुल मत्स्य उत्पादन 102 लाख टन था, जो अब बढ़कर 195 लाख टन हो गया है। इसमें समुद्री मत्स्य उत्पादन 35 लाख टन से बढ़कर 48 लाख टन हुआ है, जबकि मीठे पानी की मत्स्य उत्पादन में 119 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र की शुगर मिलों ने गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है, और गुजरात में अमूल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। अमूल के माध्यम से आज लगभग 80,000 करोड़ रुपये का कारोबार ग्रामीण महिलाओं के हाथों में है। यही सहकारिता की भावना है, जो भारत की आत्मा और विकास की दिशा है।

इस अवसर पर श्री शाह ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ही भारत मानव-केंद्रित आर्थिक विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है — यही “विकसित भारत” की सच्ची परिकल्पना है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रोहतक (हरियाणा) में साबर डेयरी प्लांट का किया उद्घाटन

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रोहतक- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज रोहतक (हरियाणा) में साबर डेयरी प्लांट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय राज्य मंत्री (सहकारिता)कृष्णपाल गुर्जर, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की दशकों पुरानी मांग पूरी करते हुए अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की है, जिसके लिए पूरा देश उनका आभारी है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर सहकारी संस्थाओं की नींव को मजबूत करने का काम किया है। शाह ने विश्वास जताया कि साल 2029 तक देश की हर पंचायत में एक सहकारी समिति होगी।

अमित शाह ने कहा कि लगभग ₹350 करोड़ की लागत से तैयार हुआ यह देश का सबसे बड़ा दही, छाछ और योगर्ट उत्पादन प्लांट है, जो दुग्ध उत्पादकों के कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने बताया कि हरियाणा से ही दिल्ली-एनसीआर की डेयरी उत्पादों की पूरी मांग पूरी होगी। गुजरात के साबरकांठा जिले से शुरू हुई साबर डेयरी आज 9 राज्यों के दूध उत्पादकों को अवसर दे रही है। गुजरात की सहकारी डेयरी से जुड़कर आज 35 लाख महिलाएँ ₹85,000 करोड़ का वार्षिक कारोबार कर रही हैं।

साबर प्लांट में प्रतिदिन 150 मीट्रिक टन दही, 10 मीट्रिक टन योगर्ट, 3 लाख लीटर छाछ और 10,000 किलो मिठाइयों का उत्पादन होगा। शाह ने कहा कि आज साबर डेयरी राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की भी सेवा कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अमूल के नेतृत्व में गुजरात में एंब्रियो ट्रांसफर, सेक्स-डिटरमिनेशन, बायोगैस, मधुमक्खी पालन और ऑर्गेनिक खेती जैसे वैज्ञानिक प्रयोग सफल रहे हैं और इन्हें हरियाणा में भी लागू करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत का दुग्ध क्षेत्र 70% बढ़ा है, जिससे यह दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता डेयरी सेक्टर बन गया है। 2014-15 में देश में 86 मिलियन दुधारू पशु थे, जो अब बढ़कर 112 मिलियन हो गए हैं। दूध उत्पादन भी 146 मिलियन टन से बढ़कर 239 मिलियन टन हो गया है। देश में आज 8 करोड़ किसान दुग्ध क्षेत्र से जुड़े हैं और दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 124 ग्राम से बढ़कर 471 ग्राम हो चुकी है।

अमित शाह ने बताया कि हरियाणा हमेशा प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में शीर्ष तीन राज्यों में रहता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनकर गर्व से खड़ा है। व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 के तहत जल्द ही 75,000 से अधिक नई डेयरी समितियाँ बनाई जाएंगी और 46,000 सहकारी समितियों को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दूध प्रोसेसिंग क्षमता 660 लाख लीटर प्रतिदिन है, जिसे बढ़ाकर 1000 लाख लीटर प्रतिदिन (2028-29 तक) करने का लक्ष्य है। इससे सीधा लाभ दूध उत्पादन करने वाली माताओं और बहनों को मिलेगा।

अमित शाह ने बताया कि मोदी सरकार ने हाल ही में पशु चारा उत्पादन, गोबर प्रबंधन और मृत पशुओं के अवशेषों के उपयोग के लिए तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की स्थापना की है। इसके अलावा, सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम, पशुपालन अवसंरचना विकास कोष और राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत डेयरी प्लांट निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा और अनुसंधान एवं विकास को तीन गुना बढ़ाकर डेयरी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करेगा।



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