Media24Media.com: पीसीआईएम एंड एच द्वारा ‘एएसयूएंडएच की फार्माकोपियल पैरामीटर्स’ पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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पीसीआईएम एंड एच द्वारा ‘एएसयूएंडएच की फार्माकोपियल पैरामीटर्स’ पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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फार्माकोपिया कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन एंड होम्योपैथी (PCIM&H) ने आज राष्ट्रीय आयुर्वेदिक पौधों बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित रीजनल रॉ ड्रग रिपॉजिटरी (RRDR) – गंगा के मैदानी क्षेत्र परियोजना के तहत “एएसयू एंड एच (आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी) की फार्माकोपियल पैरामीटर्स” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

अपने स्वागत भाषण में डॉ. रमन मोहन सिंह, निदेशक, PCIM&H, ने प्रतिभागियों को आयोग द्वारा आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में की गई गतिविधियों और हालिया पहलों के बारे में जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधीच, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, NMPB, ने एएसयू एंड एच प्रणाली की सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने में कच्ची औषधियों की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने PCIM&H द्वारा RRDR के विकास में की गई प्रगति की सराहना की और बताया कि NMPB राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के सहयोग से ASU&H दवाओं के लिए भारतीय निर्देशांक द्रव्य (Bhartiya Nirdeshak Dravya) विकसित कर रहा है। साथ ही उन्होंने PCIM&H द्वारा क्यूआर-कोड आधारित डेटाबेस के साथ विषयगत औषधीय पौधों के उद्यान विकसित करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

डॉ. राजेंद्र सिंह, पूर्व एसोसिएट डायरेक्टर, DRDR, ने ASU&H दवाओं की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए बताया कि फार्माकोपियल और फॉर्मुलेरी मानकों की स्थापना में PCIM&H की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. ए. जयंती, प्रिंसिपल साइंटिफिक ऑफिसर (फार्माकोग्नोसी), PCIM&H, ने गंगा के मैदानी क्षेत्र RRDR परियोजना के तहत की जा रही गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने जानकारी दी कि PCIM&H वर्तमान में 523 प्रामाणिक कच्ची औषधि नमूनों, लगभग 1,000 हरबेरियम नमूनों, और 218 औषधीय प्रजातियों का संरक्षण कर रहा है।

कार्यक्रम में करीब 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय (दिल्ली), राज कुमार गोयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (गाजियाबाद), जीएस आयुर्वेद कॉलेज (गाजियाबाद), अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA, नई दिल्ली), संस्कार कॉलेज ऑफ फार्मेसी (गाजियाबाद), बकसन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज (ग्रेटर नोएडा), IMS गाजियाबाद आदि संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे।

तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञ व्याख्यान शामिल थे, जैसे:

  • औषधीय पौधों की टैक्सोनॉमिक पहचान – डॉ. मुकेश कुमार, कंसल्टेंट, RRDR

  • फार्माकोग्नोस्टिक पैरामीटर्स द्वारा कच्ची औषधियों की पहचान – डॉ. ए. जयंती

  • पारंपरिक दवाओं का गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता मूल्यांकन – डॉ. एस.सी. वर्मा

  • ASU&H दवाओं का सूक्ष्मजीवीय विश्लेषण – डॉ. एम. रमेश

तकनीकी सत्रों के बाद प्रतिभागियों को फार्माकोग्नोसी, केमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशालाओं में हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया तथा एएसयू एंड एच दवाओं के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण में उपयोग होने वाले प्रमुख उपकरणों का प्रदर्शन कराया गया। प्रतिभागियों को हर्बल गार्डन, रीजनल रॉ ड्रग रिपॉजिटरी और सीड बैंक का भ्रमण भी कराया गया।


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