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12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: भारत से दुनिया तक योग का महापर्व

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नई दिल्ली- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY 2026) ने भारत और विश्वभर में अभूतपूर्व भागीदारी के साथ एक नया इतिहास रच दिया। इस वर्ष की थीम "स्वस्थ आयु के लिए योग" (Yoga for Healthy Ageing) रही, जिसने शारीरिक फिटनेस, मानसिक मजबूती और समग्र स्वास्थ्य में योग की भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में विशाल योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जबकि कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर लगभग 35,000 लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास कर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

दुनिया ने अपनाया योग का संदेश

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, मिस्र सहित अनेक देशों में बड़े पैमाने पर योग सत्र आयोजित किए गए। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से लेकर यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और पूर्वी एशिया के प्रमुख शहरों तक लाखों लोगों ने योग दिवस में भाग लिया। इससे यह साबित हुआ कि योग आज वैश्विक स्वास्थ्य और सामूहिक कल्याण का प्रतीक बन चुका है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योग मानवता को जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का एक सशक्त माध्यम है।

देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी किया योग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित सामूहिक योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। वहीं उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने लद्दाख के लेह में योग दिवस मनाया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद परिसर में सांसदों के साथ योग सत्र का नेतृत्व किया।

गंगोत्री से गंगासागर तक योग का संदेश

इस वर्ष का सबसे विशेष अभियान "गंगोत्री से गंगासागर" रहा। लगभग 2,525 किलोमीटर की यात्रा के दौरान ऋषिकेश, हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, पटना और हुगली सहित अनेक प्रमुख घाटों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस पहल ने भारत की दो महान धरोहरों—गंगा और योग—को एक सूत्र में पिरोते हुए स्वस्थ जीवन का संदेश दिया।

योग संगम पोर्टल पर रिकॉर्ड भागीदारी

योग संगम पोर्टल पर 3.07 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई। देश के 780 जिलों और 36 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से लोगों ने योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। पोर्टल पर 7.46 लाख से अधिक तस्वीरें अपलोड की गईं और 2.66 लाख से अधिक प्रमाण पत्र जारी किए गए।

रिकॉर्ड बनाने वाला योग दिवस

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले आयोजित कार्यक्रमों ने भी कई रिकॉर्ड बनाए।

  • महाराष्ट्र के बुलढाणा में लगभग 5,000 लोगों ने एक साथ त्रिकोणासन कर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान बनाया।

  • कान्हा शांति वनम में 6,000 से अधिक प्रतिभागियों ने एक साथ भुजंगासन कर नया रिकॉर्ड बनाया।

  • 14 जून 2026 को आयुष मंत्रालय ने अपने यूट्यूब लाइव योग सत्र के दौरान 4,35,831 दर्शकों के साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

सेना से युवाओं तक, हर वर्ग ने निभाई भागीदारी

रक्षा मंत्रालय ने सियाचिन ग्लेशियर से लेकर कन्याकुमारी तक योग कार्यक्रम आयोजित किए। रक्षा मंत्री Rajnath Singh सहित हजारों सैनिकों ने योग किया।

वहीं राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) ने देशभर के 5,000 से अधिक स्थानों पर 8.30 लाख से ज्यादा कैडेटों के साथ योगाभ्यास कर युवाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की।

भारत ने फिर दिखाया विश्व को मार्ग

12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन का मार्ग है। करोड़ों लोगों की भागीदारी और वैश्विक उत्साह के साथ भारत ने योग के माध्यम से विश्व कल्याण और स्वस्थ जीवन का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया।

"12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 पर भारत से दुनिया तक योग का महापर्व देखने को मिला। करोड़ों लोगों ने ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ के संदेश को अपनाते हुए स्वास्थ्य, संतुलन और सकारात्मक जीवनशैली की दिशा में कदम बढ़ाया।"




अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले कोलकाता में ‘दौड़ से ध्यान’ कार्यक्रम का आयोजन, हजारों लोगों ने लिया भाग

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कोलकाता- 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के पूर्व आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत कोलकाता में “दौड़ से ध्यान 2026 – From Movement to Stillness” का भव्य आयोजन किया गया। स्वच्छता से स्वागत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस अनूठी पहल ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, नागरिक जिम्मेदारी और समग्र कल्याण के संदेश को एक साथ जोड़ने का कार्य किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ आज सुबह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी तथा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने संयुक्त रूप से किया। दोनों नेताओं ने कोलकाता नगर निगम (KMC) मुख्यालय से ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग तक आयोजित मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

मैराथन के बाद राइटर्स बिल्डिंग परिसर में योग और ध्यान सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली और मानसिक शांति का संदेश दिया।

इस अवसर पर मंत्री इंद्रनील खान, अग्निमित्रा पॉल और तापस रॉय, विधायक विजय ओझा, पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव डॉ. मनोज कुमार अग्रवाल, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रसिद्ध पूर्व टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भी योग सत्र में भाग लेकर कार्यक्रम को विशेष उत्साह प्रदान किया।

11 स्थानों पर एक साथ आयोजित हुई योग दौड़

इस पहल के तहत कोलकाता के 11 प्रमुख स्थानों पर एक साथ 2 किलोमीटर की योग रन आयोजित की गई। इसका उद्देश्य लोगों को योग को जीवनशैली के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

योग रन के प्रमुख स्थानों में शामिल रहे:

  • पी.ए.सी. टेंट मैदान

  • एलियट पार्क

  • आरएसएम स्क्वायर (सेंट्रल)

  • ताला पार्क (बेलगछिया)

  • सुभाष सरोवर (बेलियाघाटा)

  • कैप्टन भेरी (ईएम बाईपास)

  • गोलपार्क (विवेकानंद पार्क)

  • गीतांजलि स्टेडियम (कस्बा)

  • केएफआर ग्राउंड (बेहाला)

  • संघमित्रा स्कूल मैदान (वेस्ट पोर्ट)

  • चंडीपुरा रंगसारा ग्राउंड (भांगर)

योग का मूल संदेश: गति से स्थिरता की ओर

कार्यक्रम का मुख्य संदेश “दौड़ से ध्यान” योग के वास्तविक स्वरूप को दर्शाता है, जिसमें शारीरिक गतिविधि से मानसिक शांति, अनुशासन से संतुलन और सामूहिक प्रयास से समग्र कल्याण की ओर बढ़ने की प्रेरणा दी जाती है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पहले पश्चिम बंगाल में आयोजित इस तरह के कार्यक्रम योग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।


योग पार्क पोर्टल लॉन्च: पार्कों को बनाया जाएगा सामुदायिक वेलनेस हब, योग और स्वस्थ जीवनशैली को मिलेगा बढ़ावा

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भारत में शहरी और ग्रामीण समुदायों के सार्वजनिक स्थल, पार्क और ओपन स्पेस हमेशा से लोगों को जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। तेज़ रफ्तार शहरी जीवन के बीच इन सार्वजनिक स्थानों का महत्व अब और बढ़ गया है, क्योंकि ये शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं।

इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए आयुष मंत्रालय ने “योग पार्क पोर्टल” की शुरुआत की है, जिसके तहत देशभर के मौजूदा पार्कों को सामुदायिक वेलनेस हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां योग, ध्यान और स्वस्थ जीवनशैली को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जाएगा।

इस पोर्टल का शुभारंभ मध्य प्रदेश के खजुराहो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के 25-दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा किया गया। इस अवसर पर योग संगम पोर्टल को भी पुनः लॉन्च किया गया।

पार्कों को वेलनेस हब में बदलने की पहल

योग पार्क पहल का उद्देश्य केवल पार्कों का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य और सामुदायिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस पोर्टल के माध्यम से पंचायत राज संस्थाएं, शहरी स्थानीय निकाय, आरडब्ल्यूए, गैर-सरकारी संगठन और कॉर्पोरेट संस्थान मिलकर पार्कों को योग और ध्यान केंद्रों में बदल सकेंगे।

इन पार्कों में योग अभ्यास मंच, ध्यान क्षेत्र, हरित वातावरण, सामूहिक सत्रों के लिए खुले स्थान और स्वास्थ्य जागरूकता सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

सार्वजनिक स्वास्थ्य और CSR मॉडल

इस पहल की खास बात इसका सहयोगात्मक मॉडल है, जिसमें कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) की भी अहम भूमिका होगी। कंपनियां अपने CSR फंड के माध्यम से योग पार्कों के विकास में योगदान दे सकेंगी, जिससे स्थानीय समुदायों को सीधा लाभ मिलेगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी राष्ट्रीय पहल

योग पार्क पोर्टल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां सभी हितधारकों के लिए दिशानिर्देश, पंजीकरण प्रक्रिया और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसका उद्देश्य देशभर में एक संगठित और व्यापक वेलनेस आंदोलन तैयार करना है।

“योग फॉर हेल्दी एजिंग” थीम से जुड़ाव

यह पहल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम “योग फॉर हेल्दी एजिंग” से भी जुड़ी है। इसका उद्देश्य हर उम्र के लोगों—बच्चों, युवाओं, कामकाजी नागरिकों और वरिष्ठ नागरिकों—को योग और स्वास्थ्य गतिविधियों से जोड़ना है।

सतत वेलनेस की दिशा में कदम

योग पार्क पहल केवल एक आयोजन आधारित कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक स्थायी सामुदायिक स्वास्थ्य संरचना तैयार करने की दिशा में कदम है। यह भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संतुलन और समग्र जीवनशैली सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 का मुख्य समारोह कोलकाता में, “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” होगी थीम

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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 का मुख्य समारोह 21 जून को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आयोजित किया जाएगा। इसकी घोषणा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने आज की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है, जो शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और स्वस्थ उम्र बढ़ने में योग की भूमिका को रेखांकित करती है।

यह घोषणा खजुराहो स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, पश्चिमी मंदिर समूह में आयोजित योग महोत्सव 2026 के दौरान की गई, जो IDY 2026 के 25 दिन के काउंटडाउन की शुरुआत का प्रतीक है। इस कार्यक्रम का आयोजन आयुष मंत्रालय के अधीन मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) द्वारा किया गया, जिसमें हजारों योग प्रेमियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) के सामूहिक प्रदर्शन में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा कि कोलकाता, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का केंद्र है, IDY 2026 के मुख्य समारोह की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” विषय जीवन के बढ़ते चरण में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि खजुराहो अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के कारण भारत की प्राचीन परंपराओं और स्वास्थ्य अभ्यासों के सामंजस्य का प्रतीक है और यह भविष्य में वैश्विक योग एवं वेलनेस केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

मंत्री जाधव ने कहा कि योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए और आयुष मंत्रालय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में, योग को गाँव-गाँव, घर-घर, स्कूलों, कार्यालयों और समुदायों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि योग और आयुष आहार जैसी पहलें संतुलित पोषण, अनुशासित जीवन और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने योग संगम पोर्टल को पुनः लॉन्च किया, जिससे ऑनलाइन पंजीकरण और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही योग पार्क पोर्टल भी लॉन्च किया गया, जो राज्यों और संस्थानों में योग स्थानों के विकास में मदद करेगा। उन्होंने नया डिज़ाइन किया गया योग टी-शर्ट भी प्रस्तुत किया, जो योग, स्वास्थ्य और कल्याण का संदेश देता है। उन्होंने बताया कि योग 365 अभियान के तहत 100 दिन के निःशुल्क योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में दो लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया है और उन्हें योग मित्र प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि योग और खजुराहो भारत की सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी तेजी से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रही है, जिससे समाज अधिक स्वस्थ और जागरूक बन रहा है।

मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि योग और आयुर्वेद केवल अभ्यास नहीं बल्कि भारत की समृद्ध परंपराओं पर आधारित जीवन शैली हैं। उन्होंने शिक्षा और योग के संयोजन को स्वस्थ समाज निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मध्य प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत मूल्यों को दर्शाता है तथा जनमानस में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है और अब यह लगभग 190 देशों में अपनाया जा रहा है।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दाश ने कहा कि आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में योग समग्र स्वास्थ्य के लिए सरल और स्थायी समाधान प्रदान करता है। उन्होंने नागरिकों से ‘योग मित्र’ बनने और 14 जून 2026 को होने वाले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रयास में भाग लेने की अपील की।

कार्यक्रम में हजारों योग प्रेमियों ने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) काशीनाथ सामगंडी के नेतृत्व में कॉमन योग प्रोटोकॉल का सामूहिक प्रदर्शन किया। यह प्रोटोकॉल सभी आयु वर्ग के लोगों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई योग अभ्यासों की मानकीकृत श्रृंखला है।

यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ और योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है।



लोणार में योग महोत्सव 2026: 5000 लोगों ने रचा इतिहास, त्रिकोणासन बना रिकॉर्ड

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आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) ने महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के लोणार स्थित छत्रपति श्री शिवाजी महाराज उद्यान में आज योग महोत्सव–2026 का आयोजन किया। यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ, क्योंकि इसने त्रिकोणासन करने वाले सबसे बड़े समूह के रूप में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त किया।

लगभग 5,000 प्रतिभागियों ने सुबह एकत्र होकर कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) का अभ्यास किया, जिससे ऐतिहासिक नगर लोणार सामूहिक स्वास्थ्य और ऊर्जा का केंद्र बन गया। इस बड़े स्तर की भागीदारी ने यह दर्शाया कि योग आज विश्वभर में एकता, स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम बन चुका है।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने इस आयोजन को “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के 75-दिवसीय काउंटडाउन की मजबूत शुरुआत” बताया। उन्होंने कहा कि भू-वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लोणार में यह आयोजन वैश्विक स्तर पर समग्र स्वास्थ्य और संतुलन के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने योग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन को मजबूत करता है।

रिकॉर्ड बनाने वाले त्रिकोणासन प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए मंत्री जाधव ने कहा कि यह उपलब्धि योग की सामूहिकता और साझा स्वास्थ्य की भावना को दर्शाती है। उन्होंने आयुष आहार के महत्व पर भी जोर दिया और बाजरा, रागी, नारियल तेल तथा औषधीय मसालों जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी बताया।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने कहा कि योग भारत का विश्व को दिया गया एक अनमोल उपहार है, जो मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है।

कार्यक्रम में MDNIY के निदेशक प्रो. (डॉ.) काशीनाथ समगांडी के नेतृत्व में कॉमन योग प्रोटोकॉल का लाइव प्रदर्शन हुआ, जिसमें योगासन, प्राणायाम और ध्यान शामिल थे, जिससे प्रतिभागियों को योग के व्यापक लाभों का अनुभव हुआ।

योग महोत्सव–2026 में आयुष मंत्रालय की कई प्रमुख पहलों को भी प्रदर्शित किया गया, जैसे:

  • “योग फॉर एयर ट्रैवल” प्रोटोकॉल

  • “गैर-संचारी रोगों के लिए 10 योग प्रोटोकॉल”

  • योग 365 अभियान (दैनिक जीवन में योग को शामिल करने हेतु)

इसके साथ ही 1800-315-7008 टोल-फ्री हेल्पलाइन की जानकारी दी गई, जो 14 दिनों तक मुफ्त योग मार्गदर्शन प्रदान करती है।

यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के 12वें संस्करण के लिए 75-दिवसीय काउंटडाउन की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक रहा। इसमें आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

पिछले 11 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य आंदोलन बन चुका है, जिसमें हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय भागीदारी बढ़ रही है। आने वाला 12वां संस्करण गैर-संचारी रोगों, वृद्धजन स्वास्थ्य और योग के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समन्वय पर केंद्रित होगा।

आयुष मंत्रालय ने जन भागीदारी के माध्यम से योग को जन आंदोलन बनाने और IDY 2026 से पहले देश-विदेश में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


योग महोत्सव 2026 में लॉन्च हुआ 5 मिनट का इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल

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35,000 फीट की ऊंचाई पर, समय जैसे धीमा हो जाता है—लेकिन शरीर भी उसी तरह धीमा पड़ने लगता है। लंबे समय तक एक सीमित सीट पर बैठने से अनुभवी यात्रियों को भी जकड़न, थकान और मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। इस आधुनिक यात्रा चुनौती का समाधान प्रस्तुत करते हुए एक सरल लेकिन प्रभावशाली पहल सामने आई है—एयर ट्रैवल के लिए योग (Yoga for Air Travel), जो 5 मिनट का एक सुविचारित इन-फ्लाइट वेलनेस प्रोटोकॉल है।

इस पहल की शुरुआत योग महोत्सव 2026 के दौरान प्रतापराव जाधव” द्वारा की गई। यह नवाचार योग के शाश्वत ज्ञान को विमान के भीतर लाता है, जिससे आपकी सीट को ही पुनःऊर्जा प्राप्त करने का स्थान बनाया जा सके। इसे मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा विकसित किया गया है, जो आधुनिक यात्रियों के लिए तेज़, सुरक्षित और प्रभावी तरीका प्रदान करता है।

इस पहल के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा, “योग निवारक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण का एक शक्तिशाली माध्यम है। यह इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल हर परिस्थिति में योग को सुलभ बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है—even 35,000 फीट की ऊंचाई पर भी—ताकि लोग यात्रा के दौरान सक्रिय, शांत और संतुलित रह सकें।”

इन-फ्लाइट योग क्यों महत्वपूर्ण है

हवाई यात्रा, विशेषकर लंबी दूरी की उड़ानों में, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की स्थिति पैदा करती है। इससे मांसपेशियों में जकड़न, खराब रक्त संचार, थकान, जेट लैग और कुछ मामलों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यात्रा से जुड़े तनाव और केबिन प्रेशर में बदलाव के साथ, एक सरल स्वास्थ्य उपाय की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है।

यह 5 मिनट का योग प्रोटोकॉल हल्के व्यायाम, सचेत श्वास और छोटे ध्यान अभ्यासों के माध्यम से शरीर और मन में संतुलन स्थापित करने में मदद करता है।

इसकी वैज्ञानिक और निवारक महत्ता पर जोर देते हुए वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, “दैनिक जीवन में—सीमित परिस्थितियों जैसे उड़ानों में—योग को शामिल करने से रक्त संचार बेहतर होता है, तनाव कम होता है और समग्र स्वास्थ्य में सुधार आता है।”

आपकी सीट पर वेलनेस रूटीन

यह प्रोटोकॉल बेहद सरल है और बिना किसी उपकरण के सीट पर बैठे-बैठे किया जा सकता है:

  • सेंटरिंग (15 सेकंड): खुद को स्थिर करने के लिए कुछ क्षणों का मौन या ध्यान

  • हल्की जोड़ गतियां (45 सेकंड): कंधों का घुमाव, टखनों की स्ट्रेचिंग आदि

  • बैठे हुए योगासन: ताड़ासन (Palm Tree Pose), सीटेड कैट-काउ, स्पाइनल ट्विस्ट आदि

  • प्राणायाम: गहरी सांस, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, शीतली

  • ध्यान (30 सेकंड): मन को शांत करने के लिए छोटा ध्यान

इस पहल पर मोनालिसा दाश ने कहा, “यह दिखाता है कि योग को रोजमर्रा की परिस्थितियों में आसानी से शामिल किया जा सकता है और इससे एक स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलता है।”

छोटा अभ्यास, बड़ा प्रभाव

सिर्फ 5 मिनट में यह अभ्यास:

  • रक्त संचार बेहतर करता है

  • मांसपेशियों की जकड़न और थकान कम करता है

  • तनाव और चिंता घटाता है

  • पाचन और हाइड्रेशन में मदद करता है

  • जेट लैग को नियंत्रित करने में सहायक होता है

सबसे महत्वपूर्ण बात, यह यात्रियों को उड़ान के दौरान भी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए सक्षम बनाता है।

कहीं भी, कभी भी वेलनेस

योग की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी अनुकूलता है। चाहे आप घर पर हों, ऑफिस में या आसमान में—योग हर जगह संभव है। यह प्रोटोकॉल याद दिलाता है कि स्वस्थ रहने के लिए अतिरिक्त समय या जगह की जरूरत नहीं—बस एक सही इरादा चाहिए।

अगली बार जब आप उड़ान भरें, तो कुछ मिनट अपने लिए निकालें—रुकें, सांस लें और खुद से जुड़ें।

अच्छी यात्रा करें। आराम से सांस लें। संतुलित रहें। 

‘योग 365’ पहल की शुरुआत: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को दैनिक जीवन से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- योग को एक दिन के उत्सव से आगे बढ़ाकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘योग 365’ नामक एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की है। इस पहल का लक्ष्य देशभर में लोगों को साल के 365 दिनों तक नियमित रूप से योग अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

इस अभियान की घोषणा प्रतापराव जाधव, आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस ने व्यापक जागरूकता पैदा की है, लेकिन अब समय आ गया है कि इस जागरूकता को नियमित अभ्यास में बदला जाए।

‘योग 365’ पहल का औपचारिक शुभारंभ Yoga Mahotsav–2026 के दौरान किया गया, जो 2026 के योग दिवस के लिए 100 दिन की उलटी गिनती का प्रतीक है। इस अवसर पर मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) ने Habuild के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया, जिसके तहत देशभर में लोगों के लिए निःशुल्क दैनिक ऑनलाइन योग सत्र उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में योग के प्रति जागरूकता काफी अधिक है—ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 95 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 96 प्रतिशत लोग योग के बारे में जानते हैं। हालांकि, नियमित रूप से योग करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। ‘योग 365’ अभियान का उद्देश्य इसी अंतर को पाटना है।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने बताया कि यह पहल योग को अधिक सुलभ, व्यावहारिक और दैनिक स्वास्थ्य का हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, संयुक्त सचिव मोनालिसा डैश ने कहा कि यह अभियान समुदायों, संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करेगा।

इस पहल के तहत योग को स्कूलों, कार्यालयों, सामुदायिक समूहों और डिजिटल माध्यमों से जोड़ने की योजना है। साथ ही, Y-Break, कॉमन योग प्रोटोकॉल और रोगों के लिए विशेष योग कार्यक्रमों के माध्यम से इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि 2015 में शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अब एक वैश्विक जनआंदोलन बन चुका है, जिसमें हर वर्ष करोड़ों लोग भाग लेते हैं। वर्ष 2025 में ही 26 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी ने इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

‘योग 365’ इसी आंदोलन का अगला चरण है, जिसका उद्देश्य स्पष्ट है—

योग को एक दिन की गतिविधि से आगे बढ़ाकर, हर दिन की स्वस्थ आदत बनाना।

केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जे.जे. अस्पताल में उन्नत यूनानी शोध केंद्र का उद्घाटन किया, यूनानी दिवस 2026 समारोह में हुए शामिल

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मुंबई- केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मुंबई के जे.जे. अस्पताल परिसर में क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM) के नवीनीकरण किए गए को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने यूनानी दिवस 2026 समारोह और “यूनानी चिकित्सा में नवाचार और प्रमाण आधारित अभ्यास” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता भी की। यह दो दिवसीय कार्यक्रम आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) द्वारा आयोजित किया गया है।


3.84 करोड़ रुपये की लागत से हुआ उन्नयन

1984 में स्थापित RRIUM को-लोकेशन सेंटर को लगभग 3.84 करोड़ रुपये की लागत से उन्नत किया गया है, जिससे नैदानिक सेवाओं, शोध सुविधाओं और रोगी देखभाल को बेहतर बनाया जा सके। यह उन्नयन जे.जे. अस्पताल परिसर में यूनानी चिकित्सा को मजबूत करने और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी के विजन को बताया प्रेरणा

उद्घाटन समारोह में प्रतापराव जाधव ने कहा कि जे.जे. अस्पताल में यूनानी शोध केंद्र का उन्नयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य ढांचे का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि यूनानी और आधुनिक चिकित्सा को एक ही छत के नीचे लाकर मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और समग्र उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रमाणों पर आधारित होगा।

नवाचार और वैज्ञानिक प्रमाण पर जोर

राष्ट्रीय सम्मेलन के विषय पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि नवाचार और प्रमाण यूनानी चिकित्सा के भविष्य के दो प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं से जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग कर यूनानी अवधारणाओं और उपचारों की वैज्ञानिक समझ को गहरा करने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र की भूमिका महत्वपूर्ण

महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने यूनानी दिवस के आयोजन और उन्नत सुविधा के उद्घाटन की सराहना करते हुए इसे आम लोगों के लिए किफायती और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यूनानी चिकित्सा विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों के लिए प्रभावी और सस्ती उपचार प्रणाली प्रदान करती है।

यूनानी चिकित्सा में पिछले दशक में उल्लेखनीय प्रगति

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि पिछले दशक में यूनानी चिकित्सा में अनुसंधान, रोगी देखभाल और संस्थागत विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर यूनानी चिकित्सा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित करने पर काम कर रहा है।

भारतीय चिकित्सा प्रणालियों की ‘एकता में विविधता’

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) की अध्यक्ष डॉ. मनीषा वी. कोठेकर ने कहा कि यूनानी, आयुर्वेद, सिद्ध और सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणालियाँ “एकता में विविधता” की भावना का प्रतीक हैं, जो समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कार्य करती हैं।

महत्वपूर्ण पहल और समझौते

कार्यक्रम के दौरान यूनानी चिकित्सा पर वीडियो टीज़र, CCRUM प्रकाशनों का विमोचन, सहयोगी वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च, एक अंतरराष्ट्रीय और आठ राष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान तथा मानव स्वभाव (मिज़ाज-ए-इंसान) के आकलन के लिए प्रश्नावली जारी की गई। RRIUM मुंबई की जैव रसायन और पैथोलॉजी प्रयोगशाला को NABL प्रमाणन भी प्राप्त हुआ।


राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर ने स्वर्ण जयंती मनाई, आयुर्वेद और जनस्वास्थ्य में 50 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा

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जयपुर- भारत के प्रमुख आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा संस्थान राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर ने आज अपनी स्वर्ण जयंती मनाई, जो आयुर्वेद और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में 50 वर्षों की विशिष्ट सेवा का प्रतीक है। इस स्मृति कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव और राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं आयुष मंत्री प्रेम चंद बैरवा सहित आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, शोधकर्ता, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में संस्थान की यात्रा को रेखांकित किया गया, जो 1976 में एक आयुर्वेद महाविद्यालय के रूप में स्थापना से लेकर वर्तमान में भारत के पहले आयुर्वेद डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय बनने तक पहुँची है। संस्थान ने शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, पांडुलिपि विज्ञान और रोगी देखभाल के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच एक जीवंत सेतु है। उन्होंने कहा कि 50 वर्षों की यह उपलब्धि केवल समय का पड़ाव नहीं, बल्कि आयुर्वेद के माध्यम से जनस्वास्थ्य के प्रति समर्पण, अनुसंधान और सेवा की निरंतर यात्रा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान ऐतिहासिक रूप से आयुर्वेद की समृद्ध भूमि रहा है, जो औषधीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों से समृद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार आयुष प्रणालियों को सुदृढ़ करने और आयुर्वेद, योग तथा पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा की स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में राष्ट्रीय नेतृत्व की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि NIA देश के प्रमुख आयुर्वेद संस्थानों में से एक के रूप में उभरा है। उन्होंने संस्थान के बुनियादी ढांचे के विस्तार, अकादमिक उत्कृष्टता और भविष्य उन्मुख विकास के लिए राज्य सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री ने स्वर्ण जयंती को नए संकल्प का क्षण बताते हुए कहा कि आने वाले दशकों में NIA को वैश्विक आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान केंद्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने संकाय सदस्यों, छात्रों, शोधकर्ताओं और पूर्व छात्रों को संस्थान की विरासत में योगदान के लिए बधाई दी।

आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की 50 वर्षों की यात्रा आयुर्वेद के विद्वानों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की पीढ़ियों के अटूट समर्पण को दर्शाती है, जिन्होंने इस प्राचीन विज्ञान को संरक्षित और विकसित किया है। उन्होंने NIA को भारत की समग्र स्वास्थ्य प्रणाली का आधार स्तंभ बताया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में मजबूती से एकीकृत किया गया है। उन्होंने बजट में की गई प्रमुख घोषणाओं का उल्लेख करते हुए तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना और जामनगर में WHO के पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक केंद्र के उन्नयन को इस क्षेत्र के लिए परिवर्तनकारी कदम बताया।

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य आयुष को प्रमाण आधारित, वैज्ञानिक रूप से मान्य और वैश्विक रूप से स्वीकार्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि NIA जैसे संस्थान उन्नत अनुसंधान, डिजिटल स्वास्थ्य पहल, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रोगी-केंद्रित मॉडल के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

राजस्थान सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए मंत्री जाधव ने संस्थान के भूमि और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए निरंतर समर्थन की अपेक्षा जताई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि NIA “हील इन इंडिया” विज़न में महत्वपूर्ण योगदान देगा और समग्र कल्याण का वैश्विक केंद्र बनेगा।

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं आयुष मंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्वर्ण जयंती राजस्थान और देश दोनों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि 1976 में एक आयुर्वेद कॉलेज से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान बनने तक की यात्रा इसकी अकादमिक उत्कृष्टता और सेवा भावना को दर्शाती है।

उन्होंने आयुर्वेद, योग और पारंपरिक चिकित्सा को जनस्वास्थ्य के लिए मजबूत करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और NIA को विश्व स्तरीय आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और सुविधाओं का शुभारंभ किया गया। इनमें औषधीय पौधों के संरक्षण, शिक्षा और अनुसंधान के लिए “धन्वंतरी उपवन” औषधीय पौधा उद्यान का उद्घाटन, उन्नत सिमुलेशन प्रयोगशाला और नया ऑपरेशन थिएटर ब्लॉक शामिल हैं, जिससे संस्थान में क्लिनिकल प्रशिक्षण, अनुसंधान क्षमता और रोगी सुरक्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसके अलावा, बाह्य रोगी सेवाओं के विस्तार और रोगियों की सुविधा के लिए नया ओपीडी ब्लॉक “सुश्रुत भवन” का उद्घाटन किया गया। संस्थान के पॉडकास्ट स्टूडियो से पहला आधिकारिक पॉडकास्ट भी लॉन्च किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री ने उद्घाटन एपिसोड रिकॉर्ड किया, जिससे डिजिटल संपर्क, अकादमिक संवाद और जन सहभागिता को बढ़ावा मिलेगा।

स्वर्ण जयंती समारोह ने आयुर्वेद के संरक्षण और विकास के लिए शिक्षा, अनुसंधान और करुणामय रोगी देखभाल के प्रति राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्ट किया। कार्यक्रम का समापन NIA को आयुर्वेद ज्ञान, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और प्रमाण आधारित पारंपरिक चिकित्सा का वैश्विक केंद्र बनाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।


आयुर्वेदिक विरासत के संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम: सीसीआरएएस और बेरहामपुर विश्वविद्यालय के बीच एमओयू

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भुवनेश्वर- भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत को संरक्षित और प्रचारित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय और बेरहामपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते के तहत दक्षिण ओडिशा सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र (SOCSC) में संरक्षित दुर्लभ आयुर्वेदिक पांडुलिपियों और ताड़पत्र दस्तावेजों का डिजिटलीकरण, वर्गीकरण और प्रकाशन किया जाएगा।

यह एमओयू हस्ताक्षर समारोह केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), भुवनेश्वर में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर बेरहामपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. गीतांजलि दास, सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. (वैद्य) रबी नारायण आचार्य, तथा राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति परिषद (NCISM) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. बी.एस. प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इस सहयोग का नेतृत्व राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH), हैदराबाद, जो कि सीसीआरएएस की एक परिधीय इकाई है, द्वारा किया जाएगा।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का संगम

बेरहामपुर विश्वविद्यालय के पास 2,000 से अधिक ताड़पत्र पांडुलिपियों का एक समृद्ध संग्रह है, जिनमें से अधिकांश में अमूल्य आयुर्वेदिक ज्ञान निहित है, जो अब तक अप्रकाशित और शोध समुदाय के लिए अप्राप्य रहा है। इस साझेदारी के माध्यम से इन नाज़ुक पांडुलिपियों को आधुनिक डिजिटलीकरण तकनीकों के ज़रिये संरक्षित किया जाएगा।

सहयोग की प्रमुख विशेषताएँ:

  • व्यापक डिजिटलीकरण: दुर्लभ आयुर्वेदिक पुस्तकों, पत्रिकाओं और पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण कर उनकी डिजिटल प्रतियां विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई जाएंगी।

  • वर्णनात्मक सूचीकरण: “SOCSC-बेरहामपुर विश्वविद्यालय, ओडिशा की आयुर्वेद पांडुलिपियों की वर्णनात्मक सूची” नामक विस्तृत कैटलॉग तैयार किया जाएगा, जिसमें शोधकर्ताओं के लिए 44 विशिष्ट डेटा फ़ील्ड शामिल होंगे।

  • वैश्विक पहुँच: यह कैटलॉग AMAR पोर्टल पर होस्ट किया जाएगा, जिससे विश्वभर के शोधकर्ता इन पांडुलिपियों के मेटाडेटा तक पहुँच सकेंगे।

  • अनुसंधान एवं प्रकाशन: चयनित पांडुलिपियों का लिप्यंतरण, लिप्यांतरण (ट्रांसलिटरेशन) और आधुनिक भाषाओं में अनुवाद कर प्राचीन ज्ञान को समकालीन चिकित्सा विमर्श से जोड़ा जाएगा।

संस्थागत प्रतिबद्धता

सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. (वैद्य) रबी नारायण आचार्य ने कहा कि यह पहल भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक मान्यता के लिए एक राष्ट्रीय मिशन का हिस्सा है। वहीं, बेरहामपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. गीतांजलि दास ने कहा कि यह सहयोग न केवल पांडुलिपियों की भौतिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि विश्वविद्यालय को वैश्विक सांस्कृतिक और चिकित्सा विरासत अध्ययन केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगा।

परियोजना अवधि और नैतिक प्रावधान

यह समझौता प्रारंभिक रूप से दो वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा। दोनों संस्थानों ने गोपनीयता और बौद्धिक संपदा अधिकारों का पूर्ण पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है। पांडुलिपियों का स्वामित्व बेरहामपुर विश्वविद्यालय के पास ही रहेगा, जबकि उनके ज्ञान को जिम्मेदारी के साथ सार्वजनिक किया जाएगा।

इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. एम.एम. राव (निदेशक, CARI भुवनेश्वर), डॉ. शारदा ओटा (सहायक निदेशक, आयु., CARI भुवनेश्वर) और डॉ. संतोष माने (अनुसंधान अधिकारी, NIIMH हैदराबाद) द्वारा किया जा रहा है। समारोह में CARI भुवनेश्वर के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बेरहामपुर विश्वविद्यालय के गणमान्य अधिकारी और अतिथि उपस्थित रहेंगे।


नई दिल्ली में द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन का शुभारंभ, भारत की नेतृत्व भूमिका को मिली वैश्विक सराहना

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नई दिल्ली- भारत मंडपम, नई दिल्ली में आज द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन का भव्य उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव की उपस्थिति में किया। उद्घाटन सत्र में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस का विशेष वीडियो संदेश भी प्रसारित किया गया।

17 से 19 दिसंबर 2025 तक आयोजित यह तीन दिवसीय वैश्विक वैज्ञानिक सम्मेलन “संतुलन की पुनर्स्थापना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान एवं व्यवहार” विषय पर आधारित है। सम्मेलन का संयुक्त आयोजन WHO और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा किया गया है। सम्मेलन के समापन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की संभावना है।

भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका की सराहना

डॉ. टेड्रोस ने अपने संदेश में पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और WHO के साथ उसकी मजबूत साझेदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केवल तकनीक और उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि संतुलन, गरिमा और मानवता की साझा बुद्धिमत्ता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2025–2034 को इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य सभा ने अपनाया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को मजबूत करना, गुणवत्ता व सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल से शुरुआत करते हुए पारंपरिक चिकित्सा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करना है। इसी दिशा में भारत में WHO का वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र स्थापित किया गया है।

पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक मान्यता की दिशा

केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि भारत और WHO का सहयोग पारंपरिक चिकित्सा को विज्ञान, मानकों और साक्ष्यों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली का हिस्सा बनाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि 2024 में ICD-11 मॉड्यूल-2 के तहत आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य वर्गीकरण में शामिल किया गया, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। जामनगर में बन रहा WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र अक्टूबर 2025 तक पूरा होने की दिशा में है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत 26 देशों के साथ समझौता ज्ञापन कर चुका है, 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग कर रहा है, 15 विश्वविद्यालयों में आयुष चेयर स्थापित की गई हैं और 43 देशों में आयुष सूचना केंद्र कार्यरत हैं। अश्वगंधा, गुडूची और मधुमेह पर आधारित आयुर्वेदिक शोध से वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक प्रमाण मजबूत हो रहे हैं।

‘अश्वगंधा’ पर विशेष सत्र

सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण “अश्वगंधा: पारंपरिक ज्ञान से वैश्विक प्रभाव तक” विषय पर आयोजित समानांतर सत्र रहा, जिसमें अश्वगंधा के चिकित्सीय लाभों पर वैश्विक विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक प्रमाण प्रस्तुत किए। सत्र में इसके तनाव-निवारक, तंत्रिका-संरक्षक और रोग प्रतिरोधक गुणों पर चर्चा हुई तथा मानकीकरण, सुरक्षा मूल्यांकन और वैश्विक मानकों के सामंजस्य पर बल दिया गया।

संतुलन और समावेशी स्वास्थ्य प्रणालियों पर जोर

उद्घाटन के बाद शुरू हुई पूर्ण सत्र चर्चाओं में वैश्विक स्वास्थ्य, ज्ञान शासन, जैव विविधता संरक्षण और समानता जैसे विषयों पर गहन विमर्श हुआ। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य का वास्तविक आधार व्यक्ति, समाज और प्रकृति के बीच संतुलन है।

सम्मेलन के विचार-विमर्श ने यह स्पष्ट किया कि पारंपरिक चिकित्सा न केवल सांस्कृतिक विरासत है, बल्कि लोगों और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करने में एक सशक्त वैश्विक समाधान भी है।

नई दिल्ली में दूसरा WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन

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भारत 17 से 19 दिसंबर 2025 तक नई दिल्ली में द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन की सह-आयोजक भूमिका निभाएगा, जिसका आयोजन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से किया जाएगा। इस समिट में वैश्विक नेता, नीति निर्माता, शोधकर्ता और विशेषज्ञ भाग लेंगे और पारंपरिक चिकित्सा में नवाचार, साक्ष्य-आधारित प्रथाओं और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श करेंगे।

8 दिसंबर 2025 को आयुष मंत्रालय ने कर्टन राइज़र कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसकी अध्यक्षता प्रतापराव जाधव, माननीय केंद्रीय आयुष मंत्री ने की। अपने संबोधन में मंत्री ने भारत में पारंपरिक चिकित्सा में बढ़ते नेतृत्व और राष्ट्रीय शोध संस्थानों की वैज्ञानिक प्रमाणिकता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने वाली भूमिका पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में, CCRAS का सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI), दिल्ली आयुर्वेदिक शोध और चिकित्सीय उन्नति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। संस्थान के निदेशक एवं प्रभारी, डॉ. हेमंता पाणिग्रही ने बताया कि CARI के समेकित शोध—मुख्य रूप से क्लिनिकल, फंडामेंटल और पॉलिसी शोध—ने प्रमुख जीवनशैली और गैर-संचारी रोगों (NCDs) के समाधान में इसकी क्षमता को काफी बढ़ा दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्थान की विशेष क्लिनिक, चल रहे शोध अध्ययन और पेशेवर प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप साक्ष्य-आधारित पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े हैं।

आगामी WHO समिट में मंत्री स्तरीय चर्चाएँ, वैज्ञानिक पैनल, प्रदर्शनियाँ और वैश्विक ज्ञान-साझा सत्र शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के भीतर और अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करना है।


आयुष मंत्रालय ने WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन 2025 का कर्टेन रेज़र किया; 100+ देशों की भागीदारी, भारत फिर बनेगा वैश्विक केंद्र

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आयुष मंत्रालय ने आज नई दिल्ली स्थित नेशनल मीडिया सेंटर में द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन (17–19 दिसंबर 2025, भारत मंडपम) के लिए कर्टेन रेज़र प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।

जनस्वास्थ्य में पारंपरिक चिकित्सा की वैश्विक भूमिका को सुदृढ़ करेगा समिट: आयुष मंत्री

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने गर्व व्यक्त किया कि भारत 2023 में गुजरात में पहली सफल मेजबानी के बाद एक बार फिर इस वैश्विक समिट की मेजबानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह समिट पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की दृष्टि "सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः" को साकार करता है।

इस वर्ष समिट की थीम है—

“Restoring Balance: The Science and Practice of Health and Well-being”

इसमें 100 से अधिक देशों के मंत्री, नीति-निर्माता, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता, उद्योग प्रतिनिधि व पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ भाग लेंगे।

Ashwagandha पर विशेष कार्यक्रम

मंत्री ने बताया कि आयुष मंत्रालय अश्वगंधा पर एक विशेष साइड इवेंट आयोजित करेगा, जिसमें इसके पारंपरिक व आधुनिक उपयोगों, वैज्ञानिक प्रमाणों और वैश्विक प्रभाव पर चर्चा होगी।

भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व भूमिका

जाधव ने कहा कि आयुर्वेद, योग–नौचिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी विश्वभर में भरोसेमंद स्वास्थ्य समाधान के रूप में उभर रहे हैं।
जामनगर, गुजरात में WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर की स्थापना इसका प्रमाण है।

WHO की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. पूनम खेतरपाल ने कहा—समिट बनेगा वैश्विक रोडमैप

WHO की वरिष्ठ सलाहकार और SEARO की पूर्व क्षेत्रीय निदेशक, डॉ. पूनम खेतरपाल ने कहा कि यह समिट पारंपरिक, पूरक व स्वदेशी चिकित्सा प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य तंत्र में वैज्ञानिक व संतुलित रूप से जोड़ने के लिए 10-वर्षीय वैश्विक रोडमैप तय करेगा।

उन्होंने कहा कि दुनिया में अरबों लोग आज भी पारंपरिक चिकित्सा पर निर्भर हैं, इसलिए शोध, नवाचार और नियमन को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है।

Ashwagandha पर 3-दिवसीय विशेषज्ञ सत्र

17–19 दिसंबर के दौरान आयोजित
“Ashwagandha: From Traditional Wisdom to Global Impact”
सत्र में वैश्विक विशेषज्ञ इसके तनाव-निरोधी, न्यूरो-प्रोटेक्टिव, और इम्यूनो-मॉड्यूलेटरी गुणों पर चर्चा करेंगे।

PM करेंगे समिट के समापन कार्यक्रम में शिरकत

मंत्री ने बताया कि इस ऐतिहासिक समिट के समापन सत्र में भारत के प्रधानमंत्री भी उपस्थित रहेंगे।

उच्च स्तरीय अधिकारियों की उपस्थिति

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचिव (आयुष) वैद्य राजेश कोटेचा, PIB के प्रमुख महानिदेशक धीरेंद्र ओझा, तथा आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भारत ने समिट की आधिकारिक काउंटडाउन की शुरुआत की

आज का कर्टेन रेज़र कार्यक्रम 9–10 नवंबर 2025 को आयोजित राजनयिक स्वागत समारोह के बाद आयोजित किया गया, जिसमें WHO–India सहयोग और समिट के वैश्विक महत्व पर चर्चा हुई थी।

कर्टेन रेज़र के साथ ही भारत ने द्वितीय WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन की उल्टी गिनती शुरू कर दी है, और वैश्विक स्तर पर समग्र, समावेशी एवं सतत स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने के अपने संकल्प को पुनः सुदृढ़ किया है।


उड़ान के दौरान चिकित्सा सहायता प्रदान करने वाले सिद्ध डॉक्टरों को मिला सम्मान

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आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने हाल ही में एक उड़ान के दौरान एक सह-यात्री को समय पर चिकित्सीय सहायता प्रदान करने वाले दो सिद्ध चिकित्सकों के उत्कृष्ट आचरण और नैदानिक कौशल की सराहना की है। सचिव कोटेचा ने नई दिल्ली में डॉ. इलवरासन और डॉ. गौतम से मुलाकात की और वास्तविक जीवन की आपात स्थिति में उनके संयम, जिम्मेदारी की भावना और सिद्ध वर्मम तकनीकों के प्रभावी उपयोग की प्रशंसा की।

उड़ान के दौरान एक यात्री को अचानक अज्ञात चक्कर जैसा महसूस होने लगा। केबिन क्रू ने प्रारंभिक प्राथमिक उपचार दिया, परंतु यात्री की स्थिति स्थिर नहीं हुई, जिसके बाद चिकित्सीय सहायता के लिए घोषणा की गई। तत्परता दिखाते हुए सिद्ध चिकित्सक डॉ. इलवरासन और डॉ. गौतम ने स्थिति का आकलन किया और सिद्ध ग्रंथों में वर्णित विशेष वर्मम उत्तेजना तकनीकों का उपयोग किया। कुछ ही मिनटों में यात्री को राहत मिलने लगी और स्थिति सामान्य हो गई।

आयुष मंत्रालय के सचिव ने दोनों चिकित्सकों की शांत, पेशेवर और करुणामय हस्तक्षेप की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आपातकालीन स्थितियों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा सिद्ध वर्मम चिकित्सा का यह व्यावहारिक उपयोग इसकी सहायक क्षमता को दर्शाता है। यह घटना सिद्ध वर्मम तकनीकों के प्रति अधिक जागरूकता और संरचित प्रशिक्षण की आवश्यकता को भी उजागर करती है, ताकि एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं में इसका व्यापक उपयोग संभव हो सके।


सीसीआरएएस का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन: मोटापा व मेटाबॉलिक सिंड्रोम पर आयुर्वेद और एकीकृत चिकित्सा के नए आयाम

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आयुष मंत्रालय के अंतर्गत सेंटरल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज़ (CCRAS) तथा सेंट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट (CARI), बेंगलुरु की ओर से 1–2 दिसंबर 2025 को बेंगलुरु के आईआईएससी (IISc) स्थित A.V. रामाराव ऑडिटोरियम में “आयुर्वेद एवं मोटापा व मेटाबॉलिक सिंड्रोम के एकीकृत दृष्टिकोण” पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह आयोजन सीसीआरएएस के 57वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।

यह सम्मेलन IISc और NIMHANS के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मोटापा और मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के प्रमाण-आधारित एकीकृत दृष्टिकोणों से खोजना है। यह आयुष मंत्रालय की शोध-आधारित एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ बनाने की सोच को प्रतिबिंबित करता है।

प्रमुख वक्ताओं के विचार

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा:

“भारत एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत कर रहा है, और इस परिवर्तन में आयुर्वेद केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। मोटापा और मेटाबॉलिक विकार आज की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से हैं। यह सम्मेलन आयुर्वेद के ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़कर प्रमाण-आधारित चिकित्सा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

आयुष मंत्रालय के सचिव ने कहा:

“मेटाबॉलिक रोगों के बढ़ते बोझ के लिए विज्ञान-आधारित सहयोगात्मक समाधान आवश्यक हैं। आयुर्वेद की समग्र, निवारक और व्यक्तिगत उपचार पद्धति आधुनिक बायोमेडिकल प्रगति के साथ मिलकर और प्रभावी बन जाती है। यह सम्मेलन भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों और क्लिनिकल शोध को दिशा देगा।”

सीसीआरएएस के महानिदेशक डॉ. रबीनारायण आचार्य ने बताया:

“मेटाबॉलिक रोगों की बढ़ती चुनौती के बीच आयुर्वेद शक्तिशाली और व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है। यह सम्मेलन पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और अत्याधुनिक बायोमेडिकल अनुसंधान को एक सेतु पर लाने का प्रयास है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य नीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।”

सम्मेलन की आयोजक सचिव डॉ. सुचोलचन भट्ट ने कहा:

“सम्मेलन का उद्देश्य आयुर्वेद और आधुनिक जैव-चिकित्सा विज्ञान के शीर्ष विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर मोटापा और मेटाबॉलिक विकारों की चुनौती का साक्ष्य-आधारित समाधान प्रस्तुत करना है। इस अवसर पर JDRAS के मोटापा एवं मेटाबॉलिक विकारों पर विशेषांक तथा 10 अन्य पुस्तकों का विमोचन भी किया जाएगा।”

सम्मेलन की प्रमुख गतिविधियाँ

  • प्लेनरी सत्र, समानांतर वैज्ञानिक सत्र और ट्रांसलेशनल साइंस एवं टाइप-2 डायबिटीज़, मोटापा और डिसलिपिडेमिया के एकीकृत प्रबंधन पर संगोष्ठी।

  • 2 दिसंबर को IISc के TCS Smart-X Hub में नैनोटेक्नोलॉजी एवं मॉलिक्युलर बायोलॉजी पर विशेष कार्यशाला।

  • सामत्वम्, पाथशोध और CARI द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर (दोनों दिन)।

  • 25–27 नवंबर 2025 को प्री-कॉन्फ्रेंस वर्चुअल वैज्ञानिक सत्र सम्पन्न।

प्रतिभागिता

इस सम्मेलन में 700 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें:

  • 267 मौखिक प्रस्तुतियाँ

  • 120 वर्चुअल पेपर

  • 70 पोस्टर

  • 16 की-नोट व प्लेनरी व्याख्यान

समग्र उद्देश्य

यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन एकीकृत शोध को बढ़ावा देने, वैश्विक सहयोग मजबूत करने, तथा आयुष आधारित नवाचार को सशक्त करने की दिशा में सीसीआरएएस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह भारत की समग्र, सुलभ और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा की दृष्टि को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


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