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आयुष मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में ASU चिकित्सा प्रणाली के लिए वैश्विक कोडिंग ढांचे के विकास पर चर्चा

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भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 25–26 मई 2026 को ऑनलाइन माध्यम से आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (ASU) चिकित्सा प्रणालियों के लिए इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेल्थ इंटरवेंशन्स (ICHI) तथा नेशनल हेल्थ इंटरवेंशन कोड्स (NHIC) के विकास पर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक और परामर्श चर्चा का आयोजन किया।

World Health Organization के साथ हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) और डोनर एग्रीमेंट के बाद यह पहल पारंपरिक चिकित्सा हस्तक्षेपों को WHO के ICHI फ्रेमवर्क में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (ASU) चिकित्सा हस्तक्षेपों के लिए एक वैश्विक स्तर पर मानकीकृत और वैज्ञानिक रूप से मजबूत कोडिंग शब्दावली विकसित करना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेटा का आदान-प्रदान, नैदानिक अनुसंधान को बढ़ावा और स्वास्थ्य प्रणालियों की अंतर-संचालनीयता (interoperability) सुनिश्चित की जा सके, साथ ही बीमा एकीकरण में भी सहायता मिले।

इस बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित हस्तक्षेप वर्गीकरण पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों में एकीकृत करने, दस्तावेज़ीकरण को मजबूत करने तथा डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में अंतर-संचालनीयता बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उद्घाटन एवं तकनीकी सत्र

उद्घाटन सत्र में Central Council for Research in Ayurvedic Sciences के उपमहानिदेशक डॉ. एन. श्रीकांत ने स्वागत संबोधन दिया। संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने अपने प्रारंभिक वक्तव्य में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को साक्ष्य-आधारित बनाने के लिए मानकीकृत हस्तक्षेप शब्दावली के महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके बाद World Health Organization के प्रतिनिधियों, जिनमें डॉ. पवन गोडतवार (WHO-SEARO) और डॉ. गीता कृष्णन (GTMC जामनगर) शामिल थे, ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

चार-स्तरीय (four-level) श्रेणीबद्ध कोडिंग ढांचों पर विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतियाँ संबंधित अनुसंधान परिषदों द्वारा दी गईं:

  • आयुर्वेद (NHICA): प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य, महानिदेशक, CCRAS

  • सिद्ध (NHICS): प्रो. डॉ. एन. जे. मुथुकुमार, महानिदेशक, CCRS

  • यूनानी (NHICUM): डॉ. एन. ज़हीर अहमद, महानिदेशक, CCRUM

Dr. Nenad Kostanjsek सहित World Health Organization की डेटा स्टैंडर्ड्स एवं इन्फॉर्मेटिक्स टीम के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने ASU हस्तक्षेप वर्गीकरण को वैश्विक स्वास्थ्य सूचना मानकों के अनुरूप बनाने हेतु भविष्य की रूपरेखा और तकनीकी आवश्यकताओं पर विचार-विमर्श किया।

दो दिवसीय बैठक में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी प्रणालियों के लिए अलग-अलग ब्रेकआउट सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें ड्राफ्ट दस्तावेजों की विस्तृत तकनीकी समीक्षा, परीक्षण और विशेषज्ञ परामर्श किया गया। इस बैठक में लगभग 30 वैज्ञानिकों के साथ-साथ Institute of Teaching and Research in Ayurveda, All India Institute of Ayurveda, National Institute of Unani Medicine तथा अन्य प्रमुख आयुष राष्ट्रीय संस्थानों के संकाय सदस्यों ने भाग लिया।

यह अंतिम रूप दिया गया ढांचा जुलाई 2026 में प्रस्तावित WHO-ICHI ASU अल्फा ड्राफ्ट संपादकीय कार्यशाला का आधार बनेगा।

आयुष मंत्रालय 2025: पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक मान्यता और मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण वर्ष

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साल 2025 भारत के आयुष क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक वर्ष रहा, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने, शोध, वैश्विक सहयोग और डिजिटल एकीकरण के माध्यम से नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने का प्रयास किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय ने “विकसित भारत@2047” के विजन के अनुरूप भारत की पारंपरिक चिकित्सा नेतृत्व क्षमता को मजबूत किया और लाखों नागरिकों तक स्वास्थ्य लाभ पहुँचाया।

मुख्य उपलब्धियाँ और कार्यक्रम:

  • सीएआरआई का नया परिसर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI) के 2.92 एकड़ में बने नए ₹187 करोड़ के अत्याधुनिक परिसर की आधारशिला रखी। इस परिसर में 100-बेड का अनुसंधान अस्पताल, विशेष क्लीनिक, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षण सुविधाएं होंगी।

  • अंतरराष्ट्रीय उन्नीस सम्मेलन: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय परिषद फॉर रिसर्च इन यूनानी मेडिसिन (CCRUM) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत की यूनानी प्रणाली विश्व में सर्वमान्य हो रही है।

  • महाकुंभ में आयुष सेवाएं: प्रयागराज महाकुंभ में आयुष सेवाओं के माध्यम से 9 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को लाभ मिला। OPD, मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों, योग सत्रों और औषधीय पौधों के वितरण के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन शैली सुधार पर जोर दिया गया।

  • भारत-इंडोनेशिया सहयोग: पारंपरिक चिकित्सा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भारत और इंडोनेशिया के बीच MoU का आदान-प्रदान हुआ। इस सहयोग से वैश्विक मानक, प्रशिक्षण और ज्ञान का आदान-प्रदान मजबूत होगा।

  • WHO द्वारा ICD-11 अपडेट: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2025 में ICD-11 में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी के लिए समर्पित मॉड्यूल को शामिल किया, जिससे वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा के डेटा संग्रह और रिपोर्टिंग में मजबूती आई।

  • ‘देश का प्रकृति परीक्षण अभियान’ में रिकॉर्ड: अभियान के पहले चरण में 1.29 करोड़ प्रकृति आकलन हुए और भारत ने 5 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाए।

  • योग महोत्सव और 11वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: योग महोत्सव 2025 का उद्घाटन करते हुए आयुष मंत्री श्री प्रताप राव जाधव ने 11वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की 100-दिन गिनती शुरू की। प्रधानमंत्री ने विश्व के सबसे बड़े योग कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए 3 लाख प्रतिभागियों के साथ भारत की योग विश्वसनीयता को उजागर किया।

  • बीमस्टेक शिखर सम्मेलन: प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की घोषणा की, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण को बल मिलेगा।

  • विश्व होम्योपैथी दिवस और राष्ट्रीय सम्मेलन: गैंधीनगर में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में 8,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने शिक्षा, अनुसंधान और अभ्यास पर चर्चा की।

  • WHO–IRCH हर्बल मेडिसिन कार्यशाला: 17 देशों ने भाग लिया और आयुष मंत्रालय ने गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता में वैश्विक सहयोग को मजबूत किया।

  • Ayush Nivesh Saarthi पोर्टल: निवेशकों और उद्यमियों के लिए डिजिटल निवेश पोर्टल लॉन्च किया गया, जो पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र को निवेश-योग्य बनाने में सहायक होगा।

  • WHO Global Summit on Traditional Medicine: नई दिल्ली में आयोजित दूसरे सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और आयुष मंत्री जाधव ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा में वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया। सम्मेलन में 16 द्विपक्षीय बैठकें और कई वैश्विक पहलें हुईं।

निष्कर्ष:

साल 2025 ने आयुष मंत्रालय को पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने, वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए निर्णायक रूप से आगे बढ़ाया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने स्वास्थ्य, अनुसंधान, डिजिटल नवाचार और वैश्विक सहयोग में नई ऊंचाइयों को छुआ, जिससे आयुष प्रणाली विश्व स्वास्थ्य परिदृश्य में एक मजबूत और विश्वसनीय विकल्प बनकर उभरी।


IITF 2025 में आयुष मंत्रालय की भव्य प्रस्तुति: ‘आयुष के साथ – स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत’ थीम पर आकर्षण का केंद्र

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आयुष मंत्रालय ने इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2025 में भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य विरासत का व्यापक प्रदर्शन किया है। “आयुष के साथ – स्वस्थ भारत, श्रेष्ठ भारत” थीम के साथ स्थापित आयुष पवेलियन में हजारों आगंतुकों की उपस्थिति देखी जा रही है, जहां लोग आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी पर आधारित समग्र स्वास्थ्य समाधान को जानने के लिए उत्सुक हैं।

पवेलियन के प्रत्येक थीम आधारित स्टॉल में डिजिटल डायग्नोस्टिक्स, आहार संबंधी प्रदर्शन, इंटरैक्टिव गेम्स, विशेषज्ञ परामर्श और सभी आयु वर्ग के लिए सहभागितात्मक गतिविधियों के माध्यम से आयुष प्रणालियों की विशेषताओं को प्रदर्शित किया गया है।

AIIA स्टॉल: आयुर्वेदिक आहार का विस्तृत प्रदर्शन

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) का स्टॉल पवेलियन के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। यहां आयुर्वेद-आधारित फंक्शनल फूड्स जैसे रागी नाचोज़, सुंठ्यादि लड्डू, रागी-उड़द लड्डू, मूंग सूप प्रीमिक्स और यवाड़ी सत्तू का प्रदर्शन किया जा रहा है। विशेषज्ञ इन खाद्य पदार्थों के पोषण संबंधी लाभ जैसे एनीमिया प्रबंधन, प्रतिरक्षा वृद्धि और पाचन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दे रहे हैं। आगंतुकों को आयुर्वेदिक अनाज, मसाले और जड़ी-बूटियों के उपयोग से संबंधित पुस्तिकाएँ भी वितरित की जा रही हैं।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA), जयपुर: सात्त्विक आहार और व्यक्तिगत देखभाल

NIA ने सात्त्विक आहार पर केंद्रित प्रदर्शनी लगाई है, जिसमें त्रिफला जैम, रीजुवेनेटिंग ग्रैन्यूल्स, रागी बिस्किट, एलोवेरा जेल, लिप बाम और फुट क्रीम जैसे उत्पाद शामिल हैं। विशेषज्ञ सात्त्विक आहार के मानसिक स्पष्टता, ऊर्जा संतुलन और दीर्घकालिक स्वास्थ्य में योगदान को समझा रहे हैं।

RAV: आयुष आहार थीम पर आधारित उत्पाद और मिलेट क्विज़

राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (RAV) अपने स्टॉल पर पोषक कुकीज़, एनी ब्रेड, जीतायु टी, एनपी ड्रिंक और फुल मून चॉकलेट जैसे उत्पाद प्रदर्शित कर रहा है। मिलेट क्विज़ के माध्यम से आगंतुक बाजरे के आयुर्वेदिक महत्व को जान रहे हैं।

MDNIY: योग आधारित लाइव डेमो और Y-ब्रेक सत्र

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) कॉमन योग प्रोटोकॉल, रिदमिक योग, इंटरैक्टिव क्विज़ और कार्यरत लोगों के लिए “Y-Break” सत्र आयोजित कर रहा है, ताकि लोग सरल योग अभ्यासों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकें।

यूनानी चिकित्सा: डिजिटल मिज़ाज-असेसमेंट और पारंपरिक खाद्य पदार्थ

CCRUM और NIUM द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित यूनानी स्टॉल में हरीरा, यूनानी क़हवा, हलवा गी़क़वार, गुलकंद और तलबीनाह जैसे खाद्य पदार्थ आकर्षण का केंद्र रहे। डिजिटल मिज़ाज-परीक्षण (Damvi, Balghami, Safravi, Saudavi) आगंतुकों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य समझने में मदद कर रहा है।

सिद्ध चिकित्सा: पोषण, जागरूकता और चिकित्सा परामर्श

NIS और CCRS के स्टॉल में हिबिस्कस इंफ्यूज़न टी, पंचमुठ्टी कंजी, करिसलाई मिठाई और हलीम नाचोज़ जैसे सिद्ध-प्रेरित खाद्य पदार्थ प्रदर्शित किए जा रहे हैं। 100 से अधिक लोगों को निःशुल्क चिकित्सा परामर्श भी दिया गया।

CCRH: होम्योपैथी अनुसंधान और निःशुल्क ओपीडी

CCRH के स्टॉल में शोध प्रकाशन, क्लिनिकल अध्ययन और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में जानकारी प्रदर्शित की जा रही है। होम्योपैथिक चिकित्सक पवेलियन में निःशुल्क ओपीडी चला रहे हैं।

Sowa-Rigpa (सोवा-रिग्पा): हिमालयी पारंपरिक चिकित्सा की झलक

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा प्रतिदिन लगभग 40 निःशुल्क परामर्श प्रदान कर रहा है तथा आगंतुकों को सowa-रिग्पा के आहार, आचरण और उपचार सिद्धांतों के बारे में जानकारी दे रहा है।

NMPB: औषधीय पौधों की जीवंत प्रदर्शनी

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) अपने स्टॉल पर औषधीय पौधों का लाइव डिस्प्ले, पहचान, खेती और औषधीय उपयोग पर जानकारी दे रहा है। “अटल आयुष महोत्सव” के तहत औषधीय पौधों के पौधे भी वितरित किए जा रहे हैं।

IMPCL: उच्च गुणवत्ता वाली औषधियाँ

IMPCL ने अपनी WHO-GMP और ISO प्रमाणित इकाई द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक और यूनानी औषधियों का प्रदर्शन किया है, जिसकी वार्षिक आय वर्ष 2024–25 में लगभग ₹170 करोड़ रही।

PCIM&H: औषधीय मानकों और वैज्ञानिक प्रमाणीकरण पर फोकस

PCIM&H अपने फार्माकोपिया प्रकाशन, दवाइयों के नमूने और ऑडियो-विज़ुअल सामग्री के माध्यम से आयुष औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर जागरूकता बढ़ा रहा है।

CCRYN: प्राकृतिक चिकित्सा आधारित पोषण और IEC सामग्री

CCRYN के स्टॉल में तिल लड्डू, मूंगफली-तिल लड्डू, मखाना लड्डू और मिलेट नमकीन जैसे प्राकृतिक आहार प्रदर्शित किए गए हैं।

स्टार्ट-अप सेक्शन: नवाचार आधारित आयुर्वेदिक उत्पाद

आयुर्वेद आधारित स्टार्ट-अप्स स्किनकेयर, डिटॉक्स ड्रिंक्स, आयुर्वेदिक खाद्य पदार्थ और वेलनेस उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।

एक्टिविटी ज़ोन: बच्चों और युवाओं में स्वास्थ्य जागरूकता

ड्रॉइंग प्रतियोगिता, स्वास्थ्य-आधारित साँप-सीढ़ी, प्रकृति-परिक्षण, मिलेट क्विज़, स्लोगन रायटिंग और फोटो बूथ आगंतुकों में लोकप्रिय हैं।

समापन

IITF 2025 का आयुष पवेलियन सार्वजनिक भागीदारी, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और आयुष चिकित्सा वितरण के साथ व्यापक लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। यह पवेलियन भारत की समृद्ध समग्र चिकित्सा परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।



पीसीआईएम एंड एच द्वारा ‘एएसयूएंडएच की फार्माकोपियल पैरामीटर्स’ पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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फार्माकोपिया कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन एंड होम्योपैथी (PCIM&H) ने आज राष्ट्रीय आयुर्वेदिक पौधों बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित रीजनल रॉ ड्रग रिपॉजिटरी (RRDR) – गंगा के मैदानी क्षेत्र परियोजना के तहत “एएसयू एंड एच (आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी) की फार्माकोपियल पैरामीटर्स” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

अपने स्वागत भाषण में डॉ. रमन मोहन सिंह, निदेशक, PCIM&H, ने प्रतिभागियों को आयोग द्वारा आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में की गई गतिविधियों और हालिया पहलों के बारे में जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधीच, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, NMPB, ने एएसयू एंड एच प्रणाली की सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने में कच्ची औषधियों की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने PCIM&H द्वारा RRDR के विकास में की गई प्रगति की सराहना की और बताया कि NMPB राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के सहयोग से ASU&H दवाओं के लिए भारतीय निर्देशांक द्रव्य (Bhartiya Nirdeshak Dravya) विकसित कर रहा है। साथ ही उन्होंने PCIM&H द्वारा क्यूआर-कोड आधारित डेटाबेस के साथ विषयगत औषधीय पौधों के उद्यान विकसित करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

डॉ. राजेंद्र सिंह, पूर्व एसोसिएट डायरेक्टर, DRDR, ने ASU&H दवाओं की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए बताया कि फार्माकोपियल और फॉर्मुलेरी मानकों की स्थापना में PCIM&H की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. ए. जयंती, प्रिंसिपल साइंटिफिक ऑफिसर (फार्माकोग्नोसी), PCIM&H, ने गंगा के मैदानी क्षेत्र RRDR परियोजना के तहत की जा रही गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने जानकारी दी कि PCIM&H वर्तमान में 523 प्रामाणिक कच्ची औषधि नमूनों, लगभग 1,000 हरबेरियम नमूनों, और 218 औषधीय प्रजातियों का संरक्षण कर रहा है।

कार्यक्रम में करीब 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय (दिल्ली), राज कुमार गोयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (गाजियाबाद), जीएस आयुर्वेद कॉलेज (गाजियाबाद), अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA, नई दिल्ली), संस्कार कॉलेज ऑफ फार्मेसी (गाजियाबाद), बकसन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज (ग्रेटर नोएडा), IMS गाजियाबाद आदि संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे।

तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञ व्याख्यान शामिल थे, जैसे:

  • औषधीय पौधों की टैक्सोनॉमिक पहचान – डॉ. मुकेश कुमार, कंसल्टेंट, RRDR

  • फार्माकोग्नोस्टिक पैरामीटर्स द्वारा कच्ची औषधियों की पहचान – डॉ. ए. जयंती

  • पारंपरिक दवाओं का गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता मूल्यांकन – डॉ. एस.सी. वर्मा

  • ASU&H दवाओं का सूक्ष्मजीवीय विश्लेषण – डॉ. एम. रमेश

तकनीकी सत्रों के बाद प्रतिभागियों को फार्माकोग्नोसी, केमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशालाओं में हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया तथा एएसयू एंड एच दवाओं के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण में उपयोग होने वाले प्रमुख उपकरणों का प्रदर्शन कराया गया। प्रतिभागियों को हर्बल गार्डन, रीजनल रॉ ड्रग रिपॉजिटरी और सीड बैंक का भ्रमण भी कराया गया।


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