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पीसीआईएम एंड एच द्वारा ‘एएसयूएंडएच की फार्माकोपियल पैरामीटर्स’ पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

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फार्माकोपिया कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन एंड होम्योपैथी (PCIM&H) ने आज राष्ट्रीय आयुर्वेदिक पौधों बोर्ड (NMPB), आयुष मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित रीजनल रॉ ड्रग रिपॉजिटरी (RRDR) – गंगा के मैदानी क्षेत्र परियोजना के तहत “एएसयू एंड एच (आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी) की फार्माकोपियल पैरामीटर्स” विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।

अपने स्वागत भाषण में डॉ. रमन मोहन सिंह, निदेशक, PCIM&H, ने प्रतिभागियों को आयोग द्वारा आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी दवाओं के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में की गई गतिविधियों और हालिया पहलों के बारे में जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) महेश कुमार दाधीच, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, NMPB, ने एएसयू एंड एच प्रणाली की सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने में कच्ची औषधियों की गुणवत्ता के महत्वपूर्ण महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने PCIM&H द्वारा RRDR के विकास में की गई प्रगति की सराहना की और बताया कि NMPB राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के सहयोग से ASU&H दवाओं के लिए भारतीय निर्देशांक द्रव्य (Bhartiya Nirdeshak Dravya) विकसित कर रहा है। साथ ही उन्होंने PCIM&H द्वारा क्यूआर-कोड आधारित डेटाबेस के साथ विषयगत औषधीय पौधों के उद्यान विकसित करने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

डॉ. राजेंद्र सिंह, पूर्व एसोसिएट डायरेक्टर, DRDR, ने ASU&H दवाओं की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए बताया कि फार्माकोपियल और फॉर्मुलेरी मानकों की स्थापना में PCIM&H की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. ए. जयंती, प्रिंसिपल साइंटिफिक ऑफिसर (फार्माकोग्नोसी), PCIM&H, ने गंगा के मैदानी क्षेत्र RRDR परियोजना के तहत की जा रही गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने जानकारी दी कि PCIM&H वर्तमान में 523 प्रामाणिक कच्ची औषधि नमूनों, लगभग 1,000 हरबेरियम नमूनों, और 218 औषधीय प्रजातियों का संरक्षण कर रहा है।

कार्यक्रम में करीब 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय (दिल्ली), राज कुमार गोयल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (गाजियाबाद), जीएस आयुर्वेद कॉलेज (गाजियाबाद), अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA, नई दिल्ली), संस्कार कॉलेज ऑफ फार्मेसी (गाजियाबाद), बकसन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज (ग्रेटर नोएडा), IMS गाजियाबाद आदि संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल थे।

तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञ व्याख्यान शामिल थे, जैसे:

  • औषधीय पौधों की टैक्सोनॉमिक पहचान – डॉ. मुकेश कुमार, कंसल्टेंट, RRDR

  • फार्माकोग्नोस्टिक पैरामीटर्स द्वारा कच्ची औषधियों की पहचान – डॉ. ए. जयंती

  • पारंपरिक दवाओं का गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता मूल्यांकन – डॉ. एस.सी. वर्मा

  • ASU&H दवाओं का सूक्ष्मजीवीय विश्लेषण – डॉ. एम. रमेश

तकनीकी सत्रों के बाद प्रतिभागियों को फार्माकोग्नोसी, केमिस्ट्री और माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशालाओं में हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया तथा एएसयू एंड एच दवाओं के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण में उपयोग होने वाले प्रमुख उपकरणों का प्रदर्शन कराया गया। प्रतिभागियों को हर्बल गार्डन, रीजनल रॉ ड्रग रिपॉजिटरी और सीड बैंक का भ्रमण भी कराया गया।


जकार्ता में आयोजित डब्ल्यूएचओ–आईआरसीएच की 16वीं वार्षिक बैठक में भारत की महत्वपूर्ण भागीदारी

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जकार्ता (इंडोनेशिया)- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की अंतरराष्ट्रीय औषधीय सहयोग परिषद – हर्बल मेडिसिन्स (IRCH) की 16वीं वार्षिक बैठक जकार्ता, इंडोनेशिया में आयोजित की जा रही है। इस बैठक में विश्वभर के नियामक प्राधिकरणों और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य हर्बल औषधियों के नियमन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सामंजस्य को सुदृढ़ करना है।

भारत ने इस बैठक में उल्लेखनीय योगदान दिया। भारत का प्रतिनिधिमंडल डॉ. रघु अरक्कल, सलाहकार (आयुर्वेद) एवं उप महानिदेशक (कार्यवाह), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के नेतृत्व में सम्मिलित हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कार्यक्रम के दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई।

डॉ. रघु अरक्कल ने “हर्बल औषधियों की प्रभावकारिता और निर्धारित उपयोग (वर्किंग ग्रुप–3)” पर कार्यशाला रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने भारत की विकसित हो रही नियामक रूपरेखा और पारंपरिक चिकित्सा में साक्ष्य-आधारित नीति पहलों पर प्रकाश डाला।

डॉ. रमन मोहन सिंह, निदेशक, भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी औषध संहिता आयोग (PCIM&H) ने “हर्बल औषधियों की सुरक्षा और नियमन (वर्किंग ग्रुप–1)” पर कार्यशाला रिपोर्ट प्रस्तुत की और “हर्बल औषधियों की सुरक्षा और नियमन – भारतीय परिप्रेक्ष्य” विषय पर अलग प्रस्तुति दी।

ये दोनों कार्यशालाएँ विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से, PCIM&H के सहयोग से आयोजित की गई थीं। ये कार्यशालाएँ 6 से 8 अगस्त 2025 के बीच गाज़ियाबाद, भारत में हुईं और जकार्ता में हो रही WHO–IRCH बैठक की तैयारी में प्रमुख योगदान साबित हुईं।

इसके अतिरिक्त, डॉ. महेश दाधीच, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राष्ट्रीय औषधीय पौध बोर्ड (NMPB) ने डॉ. सिंह के साथ “हर्बल औषधियों की गुणवत्ता नियंत्रण, मानकीकरण और स्थिरता” विषय पर सत्र सह-प्रस्तुत किया। डॉ. दाधीच ने औषधीय पौधों के सतत उपयोग और गुणवत्ता नियंत्रण व मानकीकरण सुनिश्चित करने हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर भी विचार साझा किए।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के व्यापक योगदान ने हर्बल औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता के वैश्विक मानकों के निर्माण में भारत की अग्रणी भूमिका को पुनः स्थापित किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय नियामक संस्थाओं के साथ सक्रिय सहयोग के माध्यम से, भारत पारंपरिक चिकित्सा और प्राकृतिक उत्पाद आधारित स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में वैज्ञानिक और समन्वित नियमन को प्रोत्साहित करता रहेगा।

भारत की भागीदारी यह दर्शाती है कि वह हर्बल औषधियों के नियमन में वैश्विक सहयोग को सुदृढ़ करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।


भारत ने WHO–IRCH की 16वीं वार्षिक बैठक में हर्बल औषधियों के वैश्विक नियामक सहयोग में अपनी अग्रणी भूमिका को सुदृढ़ किया

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विश्व स्वास्थ्य संगठन – अंतरराष्ट्रीय हर्बल औषधियों के लिए नियामक सहयोग (WHO–IRCH) की 16वीं वार्षिक बैठक 14 से 16 अक्टूबर 2025 तक जकार्ता, इंडोनेशिया में आयोजित की जा रही है। इस बैठक में WHO सदस्य देशों और पर्यवेक्षक संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जो हर्बल औषधियों की सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता के क्षेत्रों में नियामक ढांचे के सामंजस्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।

भारत इस बैठक में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सलाहकार (आयुर्वेद) डॉ. रघु अरक्कल के नेतृत्व में उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से भाग ले रहा है। प्रतिनिधिमंडल में आयुष के उप महानिदेशक (प्रभारी) एवं भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी फार्माकोपिया आयोग (PCIM&H) के निदेशक डॉ. रमन मोहन सिंह और राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेश दाधीच शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल की सक्रिय भागीदारी वैश्विक स्वास्थ्य ढांचे में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के नियामक सामंजस्य और एकीकरण को आगे बढ़ाने में भारत की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करती है।

13 अक्टूबर 2025 को भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इंडोनेशिया में भारत के राजदूत महामहिम संदीप चक्रवर्ती से मुलाकात की। बैठक में प्रतिनिधिमंडल ने WHO–IRCH वार्षिक बैठक में भारत की भागीदारी के बारे में जानकारी दी और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की। बैठक के दौरान भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी फार्माकोपिया आयोग (PCIM&H), आयुष मंत्रालय और इंडोनेशियाई फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (FDA) के बीच 26 जनवरी 2025 को हस्ताक्षरित “पारंपरिक चिकित्सा गुणवत्ता आश्वासन के क्षेत्र में सहयोग” संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रभावी कार्यान्वयन पर भी चर्चा की गई। यह समझौता क्षमता निर्माण, तकनीकी विशेषज्ञता के आदान-प्रदान और गुणवत्ता आश्वासन प्रथाओं के सामंजस्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। राजदूत चक्रवर्ती ने जकार्ता स्थित भारतीय दूतावास द्वारा इस समझौते के प्रभावी कार्यान्वयन में सक्रिय सहयोग का आश्वासन दिया।

बैठक के उद्घाटन सत्र में डॉ. रघु अरक्कल ने भारत में हर्बल औषधियों की स्थिति पर एक प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने आयुष मंत्रालय की हालिया पहल, नीतिगत प्रगति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को रेखांकित किया। उन्होंने पारंपरिक औषधियों के नियामक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और इस क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

बैठक की एक प्रमुख विशेषता WHO–IRCH कार्यशालाओं की कार्यवाही का विमोचन था — “हर्बल औषधियों की सुरक्षा और विनियमन” (कार्य समूह-1) तथा “हर्बल औषधियों की प्रभावकारिता और उपयोग” (कार्य समूह-3)। यह कार्यशाला विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा आयुष मंत्रालय एवं PCIM&H के सहयोग से 6 से 8 अगस्त 2025 के दौरान गाजियाबाद, भारत में आयोजित की गई थी।

जकार्ता में आयोजित इस तीन दिवसीय बैठक ने WHO–IRCH सदस्य देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराया है कि वे विश्व स्तर पर हर्बल औषधियों के सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण उपयोग को सुनिश्चित करेंगे। पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में नीतिगत और नियामक सहयोग को आकार देने में भारत लगातार एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है।

PCIM&H में हिंदी पखवाड़ा 2025 का सफल आयोजन

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फार्माकोपिया कमीशन फॉर इंडियन मेडिसिन एंड होम्योपैथी (PCIM&H) कार्यालय में हिंदी पखवाड़ा का आयोजन 14 सितंबर से 29 सितंबर 2025 तक सफलतापूर्वक किया गया। यह पखवाड़ा हिंदी दिवस और पाँचवीं अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन (अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन), जो कि महात्मा मंदिर कन्वेंशन और एक्ज़िबिशन सेंटर, गांधीनगर, गुजरात में आयोजित हुआ, के साथ मेल खाता हुआ प्रारंभ हुआ। इस उद्घाटन समारोह में PCIM&H कार्यालय के तीन कर्मियों ने भाग लिया।

पखवाड़ा के दौरान कई हिंदी प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें हिंदी और गैर-हिंदी भाषी श्रेणियों में भागीदारी संभव थी। इन प्रतियोगिताओं में शामिल थे:

  • निबंध लेखन

  • हिंदी शब्दकोश ज्ञान (प्रशासनिक एवं तकनीकी शब्दावली)

  • स्व-रचित काव्य

  • वाद-विवाद

  • राजभाषा अंताक्षरी

  • हिंदी कार्य प्रोत्साहन पुरस्कार

25 सितंबर 2025 को धन्वंतरि ऑडिटोरियम, पॉकेट-2 में विशेष हिंदी काव्य सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देना था। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रमन मोहन सिंह, निदेशक, PCIM&H ने की। कार्यक्रम का संचालन राजभाषा अधिकारी डॉ. स्वेता मोहन ने किया, जबकि मंच संचालन साइंटिफिक ऑफिसर – केमिस्ट्री डॉ. अनुपम मौर्य ने किया। प्रमुख कवियों जैसे डॉ. अंजु लता सिंह, राज कौशिक, और कुलदीप बर्तारिया को तुलसी का पौधा, शॉल और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर निदेशक ने कर्मियों से आधिकारिक कार्यों में हिंदी के अधिकतम उपयोग को अपनाने और सरकारी कार्य में राजभाषा के प्रचार का दायित्व निभाने का आह्वान किया। सम्मेलन ने हिंदी साहित्य और काव्य के माध्यम से भाषा के सांस्कृतिक और संचारात्मक महत्व को उजागर किया और हिंदी की सरलता और पहुँच को रेखांकित किया।

PCIM&H और DSRI (Drug Standardization Research Institute) के 110 से अधिक प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला और प्रतियोगिताओं में सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रतियोगिताओं में सभी वर्गों से उत्साही भागीदारी देखने को मिली।

पखवाड़ा 29 सितंबर 2025 को समापन समारोह के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जी.पी. गर्ग, पूर्व मुख्य रसायनज्ञ, मंत्रालय आयुष उपस्थित रहे। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। सभी नियोजित गतिविधियों की सफलता के साथ यह आयोजन समाप्त हुआ, जिसने आधिकारिक संचार में हिंदी के प्रगतिशील उपयोग के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत किया।

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